January 27, 2012
इस चिट्ठी में, ‘डिसकवरी साइंस’ (Discovery Science) चैनल पर आ रही ‘प्रॉफेटस् ऑफ साइंस फिक्शन’ (Prophets of Science Fiction) श्रृंखला की आर्थर सी क्लार्क पर कड़ी पर चर्चा है।

प्रॉफेटस् ऑफ साइंस फिक्शन की आर्थर सी कलार्क कड़ी से
आर्थर सी क्लार्क, पिछली शताब्दी के महानतम विज्ञान कहानी लेखकों में थे। उनका जन्म १६ दिसंबर १९१७ को हुआ था बाद में उन्हंने लंका को अपना घर मान लिया ता वहीं उनकी मृत्यु १९ मार्च २००८ में हो गयी।
क्लार्क ने, दूसरे महायुद्ध के बाद, भविष्यवाणी की थी किस तरह सैटेलाइट के द्वारा संवाद संभव हो सकेगा। आज यह सब हो गया है और इसके बिना जीवन सोच पाना असंभव है।
आर्थर सी कलार्क - चित्र विकिपीडिया से
‘बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां‘ श्रृंखला की कड़ी ‘विज्ञान कहानियां क्या होती हैं और उनका मूलभूत सिद्धान्त‘ लिखते समय मैंने उनके लेख ‘Hazards of Prophecy: The Failure of Imagination’ का हवाला देते हुऐ इसमें उनके द्वारा भविष्य के लिये प्रतिपपादित निम्न तीन सिद्धान्तों का जिक्र किया था।

अन्य ग्रहों का रास्ता
मेरा स्कूली जीवन, और विश्विद्यालय का जीवन उनकी पुस्तकों को पढ़ते बीता। बाद में उन्होंने बहुत से उपन्यास जेन्टरी ली (Gentry Lee) के साथ लिखे। मैंने यह सब पढ़े। उनकी लिखी पुस्तकें पढ़ने योग्य हैं। यदि आपने या आपके मुन्ने, मुन्नी ने नहीं पढ़ा तो उन्हे अवश्य पढ़ने के लिये प्रोत्साहित करें। हांलाकि उनकी लिखे उपन्यासों में दर्शन का पुट होने के कारण, समझने कुछ मुश्किल होती है।
‘बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां’ की श्रृंखला की कड़ी ‘विज्ञान कहानियों पर पुरुस्कार‘ में मैंने ह्यूगो पुरुस्कार की चर्चा की थी। क्लार्क को यह पुरुस्कार १९५८ में उनकी कहानी ‘द स्टार’ (The Star) के लिये मिला था। मैंने इस कहानी की चर्चा ‘वह तारा‘ नामक चिट्ठी में की है। इसको आप यहां सुन सकते हैं। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर तरफ का विज़िट, ‘बकबक’ पर पॉडकास्ट कैसे सुने देखें।
उन्मुक्त चिट्ठे पर विज्ञान कहानियों पर लिखी गयीं चिट्ठियां
सांकेतिक शब्द
। Arthur C Clark, Gentry Lee, 2001 Space Odyssey, Stanley Kubrick,The Sentinel, The City and the Stars, Hugo award,
। Discovery Science, Prophets of Science Fiction, Prophets of Science Fiction, Ridley Scott,
। book, book, books, Books, books, book review, book review, book review, Hindi, kitaab, pustak, Review, Reviews, science fiction, किताबखाना, किताबखाना, किताबनामा, किताबमाला, किताब कोना, किताबी कोना, किताबी दुनिया, किताबें, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, पुस्तक चर्चा, पुस्तकमाला, पुस्तक समीक्षा, समीक्षा,
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| रमण रेती पर बालू का अनन्द लेते लोग - यह चित्र मेरा खींचा नही है पर इस वेबसाइट के सौजन्य से |
| गोकुल में, कालिया पर कन्हैया - चित्र विकिपीडिया से |
'लोगों का विचार है कि भगवान कृष्ण बचपन में यही पर घूमा करते थे और उनके पैर इसी बालू पर पड़े होगें। इसीलिए लोग यहां आकर लोटते हैं ताकि इस पवित्र मिट्टी से वे भी पवित्र हो सकें।'सच है कि हम वही हवा, वही मिट्ठी, वही पानी प्रयोग कर रहे हैं जो अरबों साल से है। प्रकृति मां, हमें इनका पुनः प्रयोग करने देती है।
इस चिट्ठी में, आज के दिन सौ साल पहले वीरता के कारनामे की चर्चा है।

Courtesy - The Folio Society
आज का दिन ऐतिहासिक है। आज ही के दिन सौ साल पहले, १७ जनवरी १९१२ को रॉर्बट फाल्कन स्कॉट (Robert Falcon Scott) ने दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखा था। लेकिन स्कॉट इस यात्रा से वापस नहीं आये। लौटते समय उनकी और उनके साथियों कि मृत्यु हो गयी लेकिन उनका नाम अमर हो गया। इसका श्रेय उनकी डायरियों को जाता है।
स्कॉट की डायरियां कई लोगों ने सम्पादित कर Scott’s last Expedition के नाम से छापी हैं। इसमें, इस यात्रा की कठिनाइयों और अपने साथियों के जीवन के अन्तिम क्षणों को लिखा है। यह सब इस पुस्तक में जीवन्त हो उठा है।
कुछ समय पहले मैंने ‘सैर सपाटा – विश्वसनीयता, उत्सुकता, और रोमांच’ नामक एक श्रृंखला में, यात्रा विवरण की यादगार पुस्तकों और उनके लेखकों के बारे में चर्चा की थी। इसकी ‘स्कॉट की आखिरी यात्रा – उसी की डायरी से’ नामक कड़ी में इन डायरियों एवं इस यात्रा की विस्तार से चर्चा की थी। आप चाहें तो यहां पढ़ सकते हैं और सुनना चाहें तो यहां चटका लगा कर सुन सकते हैं। यह ऑग फॉरमैट में है। सुनने में मुश्किल हो तो ‘बकबक’ पर पॉडकास्ट कैसे सुने देखें।

Courtesy - The Folio Society
पिछली शताब्दी के शुरू में (१९१०-१३) दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने की होड़ लगी थी। इस होड़ में स्कॉट के साथ रोएल्ड एमंस्डसेन (Roald Amundsen) भी शामिल थे। इस दौड़ में एमंस्डसेन जीत गये। क्योंकि वे स्कॉट से एक महीने पहले ही, दक्षणी ध्रुव पहुंच गये थे। भले ही इस दौड़ में स्कॉट, एमंस्डसेन से दूसरे नंबर पर रहें हों पर एक बात में वे सबसे पहले थे।
स्कॉट ने अपने आखरी अभियान के पहले भी, १९०१-०४ ईस्वी में डिस्करी जहाज पर अंटार्कटिक की यात्रा करने की कोशिश की थी पर वे सफल नहीं हुऐ। उन्होंने तभी से अंटार्कटिक महाद्वीप के बारे में ‘साउथ पोलर टाइम्स्’ (South Polar Times) नामक पत्रिका शुरू की थी। इस तरह की पत्रिका शुरू करने वाले वे पहले व्यक्ति थे।
इस घटना के सौ साल पूरे होने पर फोलिओ सोसायटी (The Folio Society) ने इस पत्रिका के बारह अंकों की प्रतिकृति निकाली है।
यदि आप स्कॉट की डायरी पढ़ना चाहें तब अन्तरजाल पर यहां पढ़ सकते हैं। इसे लेकिन, इन्हें संपादित कर प्रकाशित की गयी पुस्तक को पढ़ने का मजा और रोमांच कुछ और ही है।
भूमिका।। विज्ञान कहानियों के जनक जुले वर्न ।। अस्सी दिन में दुनिया की सैर ।। पंकज मिश्रा ।। बटर चिकन इन लुधियाना ।। कॉन-टिकी अभियान के नायक – थूर हायरडॉह्ल ।। कॉन-टिकी अभियान ।। स्कॉट की आखिरी यात्रा – उसी की डायरी से (►)।।
मैं जानता हूं कि आप यह शीर्षक देख कर कर रॉर्बट फाल्कन स्कॉट के बारे में पढ़ने नहीं आये हैं आप आये हैं १९६१ में बनी फिल्म ‘जब प्यार किसी से होता है‘ का यह गाना सुनने के लिये। फिर बना सुने कैसे चले जाईयेगा
सांकेतिक शब्द
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| ईरान की महारानी के मुकट में जड़ा नूर उल ऐन |
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| दरियाये नूर |
इस चिट्ठी में अनन्त के अजीब गुणों को बताते एक रोचक विडियो की चर्चा है।
अनन्त का चिन्ह - विकिपीडिया के सौजन्य से
कुछ समय पहले मैने ‘अनन्तता समझो, ईश्वर के पास पहंचो‘ नामक चिट्ठी में, आमिर डी ऐक्ज़ल (Amir D Aczel) के द्वारा, लिखी पुस्तक ‘द मिस्ट्री ऑफ द एलेफ: मैथमेटिक्स, द केबालह, एन्ड द सर्च फॉर इंफिनिटी’ (The mystery of the Aleph: Mathematics, the Kabbalah, and the Search for Infinity) की समीक्षा है। यह पुस्तक गणितज्ञ जॉर्ज कैंटर (George Cantor) की जीवनी है।
कैंटर, सेट थ्योरी के पिता कहे जाते हैं। अनन्त (infinity) पर सबसे महत्वपूर्ण काम कैंटर ने किया है। इस पुस्तक में, इसकी विस्तार से चर्चा है। इस पुस्तक के पहले कुछ अध्यायों में, कैंटर के पहले अनन्त पर किये गये कार्य और उन गणितज्ञयों की भी चर्चा है।
इस चिट्ठी को, आप मेरी ‘बकबक’ पर यहां चटका लगा कर सुन सकते हैं। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर दाहिने तरफ का पृष्ट, “‘बकबक’ पर पॉडकास्ट कैसे सुने” देखें।
अनन्त के बारे में, जॉर्ज गैमव (George Gamov) की लिखी पुस्तक ‘वन टू थ्री…इंफिनिटी फैक्टस् एण्ड स्पेक्यूलेशन ऑफ साइंस’ (One Two Three…Infinity: Facts and Speculations of Science’ भी बेहतरीन पुस्तक है। इस पुस्तक के बारे में, ऍन्ट्रॉपी के सन्दर्भ मै, मैंने यहां चर्चा की है।
परिभाषा के अनुसार ईश्वर सर्वभौमी या सर्वव्यापी सेट (Universal set or set of all sets) है। लेकिन इसकी विवेचना करने पर पता चलता है कि इस तरह का सेट नहीं हो सकता है या दूसरे शब्दों में ईश्वर का आस्तित्व नहीं है। इसकी कुछ विस्तार से चर्चा और जीवन के विश्वविद्यालय का एक वाक्या की चर्चा यहां की है। हैं न अनन्त के गुण अजीब। इस चिट्ठी को, आप मेरी ‘बकबक’ पर यहां चटका लगा कर सुन सकते हैं। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर दाहिने तरफ का पृष्ट, “‘बकबक’ पर पॉडकास्ट कैसे सुने” देखें।
कुछ समय पहले, अनन्त के बारे में एक रोचक विडियो देखने को मिला। इसमें अनन्त के अजीब गुणों की चर्चा है। आप भी उसका आनन्द लें।
सांकेतिक शब्द
। Mathematics, set theory, George cantor, Infinity, David Hilbert, Amir D Aczel,
| अक्षय पात्र संस्थान का मथुरा में मंदिर |
'रोज १,६८,००० बच्चों का खाना उनके यहां बनता है। खाना रात के २ बजे बनना शुरू होता है। खाने में दाल, चावल, रोटी और एक सब्जी रहती है।'हम लोग इनका रसोईघर भी देखने गये। यह एकदम आधुनिक है। रोटी में घी भी, हाथ से नहीं लगाया जाता है। यह काम भी मशीन के द्वारा किया जाता है।
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| राधा-कृष्ण कन्हाई चित्र |

गोविन्द कन्हाई को २००६ यूपी रत्न से नवाज़ा गया है। ![]() |
| इंगलैन्ड के राजमुकुट में जड़ा, कोहिनूर हीरा - चित्र फोटोबकेट से |
इस चिट्ठी में न्यूयॉर्क के नम्बर प्ले की कड़ी से एक अन्य पहेली

यह चित्र उसी नम्बर प्ले की उसी चिट्ठी से है।
कुछ समय पहले मैंने बताया था कि न्यूयॉर्क टाईमस् का वर्डप्ले ब्लॉग ‘Wordplay – New York Times Blog‘ है। इसमें पहेलियों का जिक्र रहता है। इसकी एक कड़ी ‘Numberplay: Treat or Trick‘ हैं यह मुझे पसन्द आती है। कुछ समय पहले ‘किस गोले से चॉकलेट निकालूं‘ नामक पहेली प्रकाशित की थी। वहीं से एक अन्य पहेली यहां से ।
ऊपर का चित्र देखें। इसके दोनो मनके और तार एक समान हैं केवल तार में बीच के उभार के। दोनो मनकों का भार भी एक है। तार के अन्त में मोम का टुकड़ा है। मनके और तार के बीच का घर्षन (friction) शून्य है। यदि दोनो मनकों को ऊपर से एक साथ छोड़ा जाय तब,
केवल जवाब की बात नहीं है, जवाब का कारण, ज्यादा महत्वपूर्ण है।
फिलिप्स पॅटी फ्रांसीसी हैं। उन्हें तारो के ऊपर चलने में महारत हासिल है। ७ अगस्त १९७४ को वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर की टावर के बीच तार डाल कर उस पर चले थे। २००८ में, बीबीसी के द्वारा उस पर एक ‘मैन ऑन वायर’ (Man on Wire) नाम का छाया चित्र बनाया गया था। उसी का अधिकारिक झलकी देखिये।
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| स्कॉन मन्दिर अन्दर से - चित्र विकिपीडिया से |
हरे कृष्णा
माई स्वीट लॉर्ड
हुम्म्म माई लॉर्ड
माई स्वीट लॉर्ड
आई रियेली वान्ट टु सी यू
रियेली वान्ट बी विथ यू
रियेली वान्ट सी यू लॉर्ड
बट इट टेक्स् सो लॉन्ग
आआ
पुनः पहला ...
आई रियेली वान्ट टु नो यू
रियेली वान्ट टु गो विथ यू
रियेली वान्ट शो यू लॉर्ड
थैट इट वोन्ट टेक लॉन्ग, माई लॉर्ड
पुनः पहला ...
माई स्वीट लॉर्ड - कन्हाई चित्र
आई रियेली वान्ट टु सी यू
आई रियेली वान्ट टु सी यू
आई रियेली वान्ट टु सी यू, लॉर्ड
रियेली वान्ट टु सी यू, लॉर्ड
बट इट टेक्स् सो लॉन्ग, माई लॉर्ड
पुनः पहला ...
आई रियेली वान्ट टु सी यू
आई रियेली वान्ट टुबी विथ यू
रियेली वान्ट सी यू लॉर्ड
बट थैट इट वोन्ट टेक लॉन्ग, माई लॉर्ड
पुनः पहला ...
हुम्म्म, माई लॉर्ड (हरे कृष्णा)
ओह हुम्म्म, माई स्वीट लॉर्ड (कृष्णा कृष्णा)
माई, माई, माई लॉर्ड (हरे कृष्णा)
ओह हम्म, माई स्वीट लॉर्ड (कृष्णा कृष्णा)
नाओ, आई रियेली वान्ट टु नो यू (हरे रामा)
रियेली वान्ट टु गो विथ यू (हरे रामा)
रियेली वान्ट टु शो यू लॉर्ड
बट इट टेकस् सो लॉन्ग, माई लॉर्ड
हुम्म्म, माई लॉर्ड
माई, माई, माई लॉर्ड (हरे कृष्णा)
माई स्वीट लॉर्ड (हरे कृष्णा)
माई स्वीट लॉर्ड (कृष्णा कृष्णा)
माई लॉर्ड (हरे हरे)
हुम्म्म, हुम्म्म
गुरूर ब्रम्हा, गुरूर विष्णु, गुरूर देवो, महेश्वरा
गुरूर साक्षात, परमब्रम्हा, तस्मत श्री, गुरूर नमः
माई स्वीट लॉर्ड (हरे राम)
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