जुरी चिट्ठे में जालसाज़ी की गयी है
मैंने पिछली बार बताया था कि ९ अश्वेत लोगों पर, दो श्वेत लड़कियों के साथ बलात्कार करने के लिये तीन बार अलग अलग मुकदमा चला था। पहली बार, यह ऐलाबामा के स्कॉटस्बॉरो शहर में चला था। इसलिये इस मुकदमें को स्कॉटस्बॉरो  बॉयज़ ट्रायल के नाम से जाना जाता है। इन आरोपियों पर अलग अलग मुकदमा चला। आज चर्चा का विषय है कि इस मुकदमें में क्या फैसला हुआ।

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स्कॉटस्बॉरो  बॉयज़ अपने वकील सैमुएल लाइबोविट्ज़ के साथ।

पहली बार एक को छोड़कर आठ को फांसी की सजा सुनाई गयी। एक लड़के को, इसलिए छोड़ दिया गया था क्योंकि उसकी आयु १२ साल थी। ऎलाबामा राज्य के सर्वोच्च न्यायालय ने इस निर्णय की पुष्टि कर दी लेकिन  अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला पॉवेल बनाम ऎलाबामा (Powell Vs. Albama 287 US) में उलटते हुए कहा,
'A defendant should be afforded a fair opportunity to secure counsel of his own choice. Not only was that not done here, but such designation of counsel as was attempted was either so indefinite or so close upon the trial as to amount to a denial of effective and  substantial aid in that regard.'
आरोपी को अपनी पसन्द का वकील करने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए। इस मुकदमे में ऎसा नहीं हुआ। न्यायालय ने जो वकील उन्हें दिया वह न केवल अनियमित था पर उसकी नियुक्ति मुकदमा शुरू होने के इतनी करीब थी कि आरोपियों को कोई भी ठोस एवं प्रभावी कानूनी सहायता नहीं मिल पायी।
  
रूबी बेटस्, दूसरी बार मुकदमा चलते समय, गवाही देते हुऐ।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से वापस आने के बाद यह मुकदमे अन्य शहर में स्थानान्तरित कर दिए गये।  इसमें सबसे पहले पैटरसन पर मुकदमा चला और बचाव पक्ष की तरफ से सैमुएल लाइबोविट्ज़ वकील नियुक्त हुये। इस मुकदमे में रूबी बेटस् ने बचाव पक्ष  की तरफ से गवाही दी।  उसने कहा,
'अश्वेत लड़कों ने हमें नहीं छेड़ा था। मैंने पहली बार बलात्कार की बात विक्टोरिया प्राइस के कहने पर कही थी। क्योंकि विक्टोरिया ने कहा था कि यदि मैं इस तरह से नहीं कहूंगी  तो हमें इस तरह (बिना टिकट, माल गाड़ी पर) राज्य  की सीमा पार करने के लिए जेल में रखा जा सकता है।' 


इस बार सबूत में यह बात सिद्घ हो चुकी थी कि पैटरसन दोषी नहीं है फिर भी जूरी ने उसे   फांसी  की सजा सुनाई। इसे परीक्षण न्यायधीश ने रद्द कर दिया। इसके बाद पैटरसन तथा बाकी सब पर पुन: मुकदमा चला। इस बार पुनः, एक को छोड़कर सबको फांसी की सजा हो गयी। ऎलाबामा सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। यह मुकदमा दुबारा फिर से अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचा।

सर्वोच्च न्यायालय में, सैमुएल ने जूरी चयन को मुद्दा बनाया। इसने बहस कि,
'वहां एक भी अश्वेत व्यक्ति को जूरी सेवा के लिये नहीं बुलाया गया हालांकि वहां के अश्वेत लोग जूरी सेवा के लिये योग्य थे। जुरी चिट्ठे में जालसाज़ी कर, बाद में अश्वेत लोगों के नाम बढ़ाये गये हैं।'
जब अमेरिका सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने सैमुएल से पूछा,
'क्या तुम यह सिद्घ कर सकते हो?'
सैमुएल ने हांमी भरी और जुरी चिट्ठा को सर्वोच्च न्यायालय के सामने रखा। जिससे पता चलता ता कि उसमें जालसाज़ी हुई है। यह अमेरिकी इतिहास में पहली, और केवल एक बार हुआ कि उन्होंने तथ्यों को अपनी अदालत में देखा। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने पुन: फैसले को रद्द करते समय (Norris Vs. Albama 294 US 587)   कहा,
'Whenever by any action of State, whether through its legislature, through its courts, or through its executive or administrative officers, all persons of the African race are excluded, solely because of their race or color, from serving as grand jurors in the criminal prosecution of a person of the African race, the equal protection of the laws is denied to him, contrary to the Fourteenth Amendment of the Constitution of the United States.  
We think that the evidence that for a generation or longer no negro had been called for service on any jury in Jackson County, that there were Negroes qualified for jury service, that according to the practice of the jury commission their names would normally appear on the preliminary list of male citizens of the requisite age but that no names of Negroes were placed on the jury roll, and the testimony with respect to the lack of appropriate consideration of the qualifications of negroes, established the discrimination which the Constitution forbids. The motion to quash the indictment upon that ground should have been granted.'
जब अफ्रीकन मूल लोगों को उनके रंग या कुल के कारण अफ्रीकन मूल पर चल रहे मुकदमे में रखने से वंचित किया जाता है तो यह १४ वें संशोधन का उल्लंघन है।
जब पीढ़ी दर पीढ़ी से किसी भी अश्वेत को न तो जूरी सेवा के लिए बुलाया जाए, न ही उनका नाम जूरी चिट्ठे पर हो जब कि वे इसके लिए उपयुक्त हों तब यह भेदभाव, संविधान के विरूद्व है और इस अभियोग को अपास्त करने के लिए पर्याप्त है।
अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय से वापस आने पर पाँच लोगों के खिलाफ मुकदमा समाप्त कर दिया गया। एक को फांसी की सजा दी गयी पर उसे गवर्नर ने आजीवन कारावास में बदल दिया। इस समय सब मानते है कि वे अश्वेत लड़के  दोषी नहीं थे। उन्हें यह सजा गलत तरीके से दी गयी।

इस मुकदमे पर कई फिल्म और प्रलेखी बनी हैं। १९७६ में एनबीसी ने जज हॉरटन एण्ड द स्कॉटस्बॉरो  बॉयज़ (Judge Horton and the Scottsboro Boys) नाम से टीवी फिल्म, १९९८ में कोर्ट टीवी (नया नाम ट्रूटीवी) ने इसी पर ग्रेटेस्ट ट्रायल ऑफऑल टाइमस् श्रंखला (Greatest Trials of All Time series) के लिये प्रलेखी,  २००१ में स्कॉटस्बॉरो  बॉयज़ ट्रायल (Scottsboro: An American Tragedy) के नाम से प्रलेखी, और २००६ में हैवेनस् फॉल (Heavens Fall) फिल्म बनी है।

इस श्रंखला की अगली कड़ी में चर्चा करेंगे कि इस मुकदमे ने किस तरह से हारपर ली पर असर डाला और उन्हें 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' लिखने के लिये प्रेरित किया।

चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से।

बुलबुल मारने पर दोष लगता है
भूमिका।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी - कोर्टरूम।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं।। कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है।। अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है।। जुरी चिट्ठे में जालसाज़ी की गयी है।।








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This post talks about the judgement in the Scottsboro boys' trial case. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

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सैकड़ों वर्ष पहले के इंजीनियर ही बेहतर थे

श्री अनुपम मिश्र गांधी पीस फाउंडेशन (Gandhi Peace Foundation) की नींव डालने वाले सदस्यों में हैं। वे राजस्थान में पानी संचय के बारे में बात करते हैं। उन्होंने ‘राजस्थान की रजत बूंदे’ नामक पुस्तक लिखी है। इसे गांधी शांति प्रतिष्ठान, नयी दिल्ली ने छापा है।

कुछ समय पहले ‘टेड आइडियआस् वर्थ स्परैडिंग’ (TED Ideas Worth Spreading) में,  अनुपम जी का भाषण सुनने को मिला। इसमें वे बताते हैं कि किस तरह  से सैकड़ों वर्ष पहले, भारतवासियों ने रेगिस्तान में, पानी संचय करने के तरीके निकाले। यह तरीके आजकल के कड़ोरों रुपये खर्च कर बनाये गये पानी संचय करने के तरीकों से कहीं बेहतर हैं।

हम अक्सर विज्ञान की बड़ी बड़ी बातें  करते हैं। हमारे पूर्वजों ने वर्षों पूर्व कितने आसान तरीकों से पानी का संचय किया। हम अब, क्यों नहीं इन तरीकों को अपनाते। आप स्वयं देखिये और सुनिये।

यह अंग्रेजी में है क्योंकि वे विदेश में बोल रहे थे। लेकिन आप इन्हें देखेंगे, सुनेगें तो अपने जैसे लगेंगे। अनुपम जी, शुरू में कहते हैं।

‘Please switch off proper English check programme installed in your brain.’
कृपया, अपने मस्तिष्क में अंग्रेजी चेक करने वाले प्रोग्राम को बन्द कर दें।


यह एक बेहतरीन विडियो है। ऐसे विडियो कम देखने को मिलते हैं।

मालुम नहीं क्यों, इसे देखने के बाद बचपन में पढ़ी एक पुस्तक, ‘द अगली अमेरिकन’ (The Ugly American) में इंजीनियर होमर एटकिनस् (Homer Atkins) की याद आयी।


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  • स्कॉटस्बॉरो बॉयज़ मुकदमे में क्या फैसला हुआ:
  • हार्पर ली ने उपन्यास, स्कॉटस्बॉरो बॉयज़ मुकदमे से प्रेरित होकर लिखा:

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यह तो धोखा देने की बात हुई
हिमाचल यात्रा में, पवन हमारे टैक्सी चालक थे। इस चिट्ठी में, कुछ उनके बारे में और कुछ दिल्ली एवं केरल टैक्सी सेवा के तुलना है।


हिमाचल यात्रा के लिये, हमने ईनोवा टैक्सी  ली थी क्योंकि सामान कुछ ज़्यादा था। पवन, हमारे टैक्सी चालक, के पिता सेना में नौकरी करते थे। अब, वे सेवानिवृत्त हो गये हैं। उनके दो भाई हैं, बड़े भाई स्कूल में पढ़ाते हैं और छोटा भाई पढ़ रहा है। पवन जी को एक बेटा एक बेटी है। जिनकी उम्र छः और चार साल है।

केरल यात्रा में प्रवीण हमारे साथ थे। उनका भी स्वभाव अच्छा था। वे काफी बातूनी थे।

पवन का स्वभाव अच्छा था। लेकिन वे उल्टे थे। कम बात करते थे। यह टैक्सी उनकी नहीं थी। वे केवल चालक के रूप में कार्यरत थे। 

हमारे टैक्सी चालक - पवन, रोहतांग पास पर। 
क्या आपको वह किसी फिल्म हीरो से कम लग रहे हैं :-) 

इस टैक्सी में टैक्सी का नम्बर न होकर प्राइवेट नम्बर था। मैंने पवन से पूछा,
'इस गाड़ी' में प्राइवेट नम्बर क्यों है? क्या ये टैक्सी की तरह रजिस्टर्ड नहीं है?  इसका बीमा टैक्सी की तरह है या नहीं?'
मैंने उसे बताया कि यदि इस गाड़ी का बीमा टैक्सी की तरह नहीं है तो दुर्घटना हो जाने पर हम सब मुश्किल में पड़ सकते हैं। हमारे परिवार वालों को  बीमा कम्पनी से पैसा नहीं मिल पायेगा। यह सुनने के बाद उसने कहा,
'इस गाड़ी का बीमा टैक्सी की तरह है और यह वैसे ही रजिस्टर्ड है। इसका नंबर टैक्सी का नम्बर है। लेकिन उसके मालिक ने इसमें एक प्राइवेट गाड़ी की तरह नम्बर पेन्ट किया है। यह इसलिए किया है ताकि लगे कि यह प्राइवेट गाड़ी है। चूंकि हम लोग कई राज्यों में जा रहे हैं इसलिये यदि ऐसा नहीं करते तो सब जगह टैक्स देना पड़ता।'
मैंने कहा,
'यह तो धोखा देने की बात हुई। यह बात गलत है। आपको कोई घाटा नहीं होता क्योंकि टैक्स तो हमको देना पड़ता। आपके मालिक को इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी अपने मालिक से कहियेगा कि हमें यह बात पसन्द नहीं आयी।'
उसने कहा कि इस बात को जरूर अपने मालिक से कहेगा और अगली बार ऐसा नहीं होगा। मालूम नहीं कि उसने कहा कि नहीं। यदि कहा तो क्या उसने माना।

मुझे केरल यात्रा के दौरान भी टैक्सी का अनुभव रहा। वहां हमारे टैक्सी चालक प्रवीण ज़्यादा साफ सुथरे रहते थे। केरल में लोग पेशेवर हैं। वहां की गाड़ी भी टैक्सी की तरह रजिस्टर्ड थी। इस गाड़ी को भी उसी तरह से होना चाहिए था।

हम लोग सबसे पहले पिंजौर रुके। अगली चिट्ठी में उसी के बारे में।

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा

वह सफेद चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी।। यह तो धोखा देने की बात हुई।।

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Pawan was our taxi driver in the Himachal trip. This post is about him and compares Delhi taxi service with Kerala taxi service. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

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अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है
इस चिट्ठी में उस मुकदमें की चर्चा है जिसने हार्पर ली को 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' लिखने के लिये प्रेरित किया। इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें।

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१९४१ में सैमुएल न्यायाधीश हो गये। वे जहां भी घूमने जाते थे,  वहां न्यायालय की कार्यवाही देखना पसन्द करते थे। एक बार वे फ्लोरिडा गये। वहां न्यायालय की जूरी में ११ श्वेत लोगों के साथ एक अश्वेत भी था। दोपहर के भोजनावकाश के दौरान उसने वकीलों से पूछा,
'क्या यहां अश्वेत लोग भी जूरी पर बैठते हैं?'
उस वकील ने जवाब दिया,
'Yes, it is something new. This is the first time in our state we have had a nigger on a jury and it's all on account of a son-of-a-bitch named  Samual Leibowitz from New York. He came down to Alabama a few years ago to try a case and somehow he got to the Supreme Court in Washingtone, and damned if we haven't had to put niggers on our juries over since.
हां यह कुछ नया है यह पहली बार है जब कोई अश्वेत व्यक्ति जूरी में है। यह सब उस उल्लू के पट्ठे सैमुएल लाईबोविट्ज़ के कारण हुआ जो कि कुछ साल पहले ऎलाबामा में एक मुकदमा करने आया था फिर उसने अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय से कानून बदलवा दिया अब हमें अश्वेत लोगों को जूरी पर रखना पड़ता है।

यह मुकदमा था स्कॉटस्बॉरो बायॉज़ पर चला मुकदमा।  इस  मुकदमें के समय ली छः साल की थीं और ऎलाबामा में रहती थीं। इस मुकदमें ने उन पर असर डाला। इसी के अधार पर, उन्होंने अपना प्रसिद्ध उपन्यास 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' की रचना की।  इस मुकदमें के तथ्य कुछ इस प्रकार थे।



१९३० का दशक अमेरिकी इतिहास में मंदी का दशक था। लोग इधर-उधर नौकरी की तालाश में घूमते थे। उनके पास टिकट खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे। इसलिए मालगाड़ी में बिना टिकट लिए जाया करते थे। २५ मार्च १९३१ में, एक मालगाडी में कुछ श्वेत व कुछ अश्वेत लड़के सफर कर रहे थे। उनमें आपस में, लड़ाई हो गयी। यह स्पष्ट नहीं है कि यह क्यों शुरू हुई पर इसमें श्वेत लड़कों की पिटाई हो गयी। श्वेत लड़कों ने मालगाड़ी से उतर कर स्टेशन मास्टर से इस बात की शिकायत की और अश्वेत लड़कों पर मुकदमा चलाने की बात कही।


 रूबी बेटस् और विक्टोरिया प्राइसका चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से

अगले स्टेशन पर मालगाड़ी रोक ली गयी। पूरी मालगाड़ी में ९ अश्वेत लड़के मिले जिनकी उम्र १२ साल से १९ साल थी। वे सब पकड़ लिए गये। उनके साथ दो श्वेत लड़कियां विक्टोरिया प्राइस (Victoria Price) ,रूबी बेटस् (Ruby Bates) भी मिली। उन श्वेत लड़कियों से पूछा गया कि क्या अश्वेत लड़के उन्हें तंग कर रहे थे। उनका जवाब था,
'अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है।'
इस पर अश्वेत लड़कों को जेल भेज दिया गया। इन पर  बलात्कार का मुकदमा स्कॉटस्बॉरो में चला।  इसलिए यह लड़के स्कॉटस्बॉरो बॉयज़ नाम से, और यह मुकदमा  स्कॉटस्बॉरो बायॉज़ ट्रायल के नाम से जाना जाता है।

यह मुकदमा अमेरिकी कानूनी इतिहास में,   एक शर्मनाक मुकदमे के रूप में जाना जाता है। यह मुकदमा २०वीं शताब्दी के न केवल संविधान, पर नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में सबसे जाना माना मुकदमा है। यह दो बार अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय में गया और दोनों बार फांसी की सज़ा रद्द कर वापस पुन: सुनवाई के लिए वापस भेजा गया।

इस मुकदमें में क्या हुआ, यह अगली बार।


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This post talks about the case that inspired Harler Lee to write 'To Kill A Mocking Bird'. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.





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क्या साईकिल प्रेम से जीवन बदल सकता है

यह चित्र डैनी मैकास्किल की वेबसाइट से है। जिसका लिंक नीचे दिया हुआ है।

यदि आप यह सोचते हैं कि साईकिल प्रेम या इसे चलाने से जीवन नहीं बदल सकता या फिर जीवन-व्यापन नहीं किया जा सकता तब आप गलत हैं – मिलिये डैनी मैकास्किल से।

डैनी अपने मित्र के साथ एपार्टमेंट को साझा करते हैं। उनका रोज की दिनचर्या – सुबह तैयार हो कर साईकिल पर अपने काम के लिये निकलो। रास्ते में एक लोहे की छड़ों की चहारदिवारी (fence) मिलती थी। उन्हें लगता था कि क्यों न इसके ऊपर साईकिल चला कर देखें।

एक दिन हिम्मत कर, फैंस के ऊपर साईकिल चला ली। फिर, अपने मित्र के साथ छः महीने में एक विडियो खींचा और उसे यूट्यूब में डाल दिया। इस यूट्यूब ने न केवल दुनिया भर के साईकिल चालकों का जीवन बदल दिया पर उनका भी। यह वीडियो अभी तक, लगभग १ करोड़ ३४ लाख बार देखा जा चुका है। यह यूट्यूब के खेल वीडियो के इतिहास में सबसे लोकप्रिय वीडियो है।

इसके बाद, उनके पास फिल्म बनाने वाले आने लगे वे उस पर फिल्म बनाना चाहते हैं। विज्ञापनों वाले लोग आ रहे हैं। वे उसे विज्ञापनों में रखना चाह रहें हैं। सर्कस वाले उसके साथ करने में इच्छुक है। क्या है इस वीडियो में – आप खुद ही देख लीजिये।

क्या आपको मालुम है कि शुभा मेरी पत्नी (मुन्ने की मां) ने इस वीडियो को देखने बाद क्या किया? नहीं मालुम?

और क्या, मेरा साईकिल चलाना बन्द हो गया है :-(

डैनी मैकास्किल की अपनी वेबसाइट यहां है और इस कहानी के बारे में आप विस्तार से न्यूयॉर्क के लेख को यहां पढ़ सकते हैं।

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वह सफेद चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी
आइये चलते हैं देवभूमि, हिमाचल की यात्रा पर।

हम टैक्सी पर, सुबह दिल्ली से, हिमाचल की यात्रा के लिये निकले।


मेरा भाई चण्डीगढ़ में रहता था। मैं अक्सर उसके पास जाता था। तब हम लोग करनाल में, ओएसिस में रुक कर, चाय या काफ़ी लेते थे। यहां पर आप पेट्रोल ले सकते है। अच्छी दुकानें और रेस्टरूम हैं। वहां आप, खा, पी एवं सामान खरीद सकते हैं।  

इस बार भी, हम लोग जाते समय, वहां पर गये और कॉफी पी। वहां, रेस्टरूम का भी प्रयोग किया। लेकिन वह उतना अच्छा नहीं लगा, जितना की पहले लगता था। कुछ  चीजें टूटी सी लगी पर बाथरुम साफ था। 

चलते समय मैंने अपने टैक्सी चालक  से पूछा,
'क्या तुम्हारे पास  भजन या पुराने गानो की सीडी है?'

उसने नकारात्मक में जवाब दिया। लेकिन उसके पास कुछ पंजाबी गानों की सीडी थी जो हमारी समझ के बाहर थी।

हिमाचल यात्रा के दौरान एक दृश्य

ओसिस मार्केट में सीडी की भी दुकान है। हम उस पर गये। मैंने दुकान मालिक से पूछा कि क्या उसके पास हिन्दी के कुछ पुराने गाने होगें। उसने कहा देख लीजिए। उस समय, मैं चश्मा नहीं लगाये हुए था। इसलिए कुछ पढ़ पाना मुश्किल था। मैंने दुकानवाले से पूछा कि क्या वह पढ़ सकता है। उसने कहा कि वह भी नहीं पढ़ सकता है। मेरे बगल में एक प्यारी सी लड़की खड़ी हुई थी। मैंने उससे कहा,
'बिटिया रानी,  क्या तुम मेरे लिए हिन्दी के पुराने गानों की सीडी चुन सकती हो?'
उसने कहा,
'अवश्य अंकल।' 
उसने एक पुराने गानों की हिन्दी की सीडी पसंद करके मुझको दी। 

वह युवती सफेद रंग का, चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी। जिसमें सुन्दर नक्काशी थी। मैंने पूछा,
'क्या तुम कहीं घूमने जा रही हो?'
उसने हामी भरी। 

मैंने उससे  पूछा कि वह एकदम सफेद पोशाक क्यों पहने है क्योंकि वह आसानी से गंदी हो सकती है। यह पूछने पर वह शर्मा गयी। लगता था कि उसकी नई-नई शादी हुई थी या शादी की बात चल रही थी। इसलिए वह सौम्य कपड़े पहनना चाहती थी लेकिन चमकीले भी।

हमारे टैक्सी चालक के अनुसार करनाल में हवेली, ओसिस से बेहतर जगह है।  हिमालय यात्रा से  दिल्ली वापस लौटते समय,हम लोग ओसिस कॉम्प्लेक्स में न जाकर हवेली कॉम्प्लेक्स में गये। 

मुझे हवेली कॉम्प्लेक्स बेहतर जगह लगी। शायद इसलिये कि यह ओसिस के बाद बनी  और नयी  है।  यहां  भी स्नैक्स और कॉफी वगैरह मिलती है। हवेली कॉम्प्लेक्स में सबसे अच्छी बात  यह लगी कि इसमें एक जगह खाना भी मिलता है। आप अलग खाना आर्डर भी कर सकते हैं या थाली। थाली १२५ रू० से लेकर १७५ रू० तक की है। आपको जो थाली पसन्द हो वह आर्डर करें। यहां पर हमने खाना खाया। यह अच्छा था। यहां का बाथरुम साफ था। आप जायें तो यहीं पर रुक कर चाय या खाना खायें।


इस यात्रा में पवन हमारे टैक्सी चालक थे। अगली चिट्ठी में कुछ उनके बारे में और कुछ टिप्पणी और दिल्ली एवं केरल टैक्सी सेवा की तुलना।

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा

वह सफेद चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी।।

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This post is about about my trip to Dev-Bhumi Himachal. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
। हिमाचल, Himachal,
कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है

क्या चश्मदीद गवाह,  न चाहते हुए भी,  गलत  बयान दे देते हैं? 'बुलबुल मारने पर दोष लगता है'की श्रंखला की इस चिट्ठी में, इसी की चर्चा है।
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें।

यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने' देखें।


यह सच है कि चश्मदीद गवाह, न चाहते हुए भी,  गलत बयान दे देते हैं या गलत व्यक्ति की शिनाख़्त कर देते हैं। लेकिन यह कहना गलत होगा कि वे उस समय झूठ बोल रहे होते हैं। क्योंकि, उनके मुताबिक वही सच है। लेकिन ऐसा क्यों होता है?

सैमुएल, अक्सर चश्मदीद गवाह के द्वारा आरोपी की शिनाख़्त किये जाने पर सवाल उठाया करते थे। उन्हें लगता था कि चश्मदीद गवाह गलत शिनाख़्त कर रहा है। एक बार, वे वकीलों के बीच इस विषय पर बोल रहे थे। वकीलों ने उनके इस कथन पर प्रश्न लगाया। सैमुएल ने उस वक्त कुछ नहीं कहा पर कुछ समय बाद उन्होंने लोगों से पूछा,
'आप लोगों में से, कौन से लोग कैमल सिगरेट पीते हैं।'
कैमल सिगरेट, अमेरिका की लोकप्रिय सिगरेट में से एक है। यह उसी तरह की सिग्रेट है जैसे कि पहले पनामा हुआ करती थी या आजकल विलस् फिल्टर होती है। बहुत से लोगों ने हाथ उठाया। सैमुएल ने उनमें उन पांच लोगों को चुना जो पिछले २० सालों से दो पैकेट कैमल सिगरेट पी रहे थे। सैमुएल ने फिर पूछा,
'आपने ७०० पैकेट प्रतिवर्ष और आज तक २४,००० पैकेट अर्थात कैमल पैकेट को आपने करीब ५ लाख बार देखा है।'
उन्होंने हामी भरी। सैमुएल ने, उन पांचों को एक कागज़ दिया फिर कहा,
'आप लोग अलग-अलग लिख कर दें कि कैमल सिगरेट के पैकेट के ऊपर आदमी का चित्र कहा है ऊंट के आगे है, पीछे है, या ऊपर है।'


कागज वापस मिलने के बाद, उसने उसे खोल कर, जोर से पढ़ा। दो ने लिख कर दिया कि आदमी का चित्र ऊंठ के आगे है दो ने कहा कि उसके ऊपर है एक ने कहा कि कोई भी आदमी का चित्र नहीं है।


सैमुएल ने लोगों से पैकेट निकाल कर देखने को कहा। पैकेट  के ऊपर कोई भी आदमी का चित्र नहीं था। यानि की चार लोगों के जवाब गलत थे। सैमुएल ने बताया,
'यह इसलिये हुआ कि मैंने आपको यह सुझाव दिया था कि पैकेट पर आदमी का चित्र है। चश्मदीद गवाहों को इस तरह का सुझाव दिया जाता है। इसीलिये आपसे यह गलती हुई और चश्मदीद गवाह भी अक्सर गलत शिनाख़्त कर देते हैं।'


यही कारण है कि न्यायालय में पृच्छा (examination in chief) के समय, सूचक प्रश्न (leading question) पूछना मना है हालांकि प्रति पृच्छा (cross examination) के समय इस तरह के सवाल पूछे जा सकते हैं।

इस श्रृंखला की अगली कड़ी में बात करेंगे स्कॉटस्बॉरो बायॉज़ (Scottsboro boys trial) मुकदमे की। यह मुकदमा, अमेरिका में, २०वीं शताब्दी के संविधान एवं नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में, सबसे जाना माना मुकदमा है। इसमें सैमुएल वकील थे। यह वही मुकदमा है जिसने हारपर ली को 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' लिखने के लिये प्रेरित किया। क्या हुआ था इसमें? क्यों यह मुकदमा इतना प्रसिद्ध है? यह सब अगली बार।

बुलबुल मारने पर दोष लगता है
भूमिका।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी - कोर्टरूम।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं।। कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है।।



अन्य संबन्धित चिट्ठियां
पुस्तक समीक्षा से संबन्धित लेख चिट्ठे पर चिट्ठियां
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This post explains that why eyewitnesses, unknowingly, make wrong statements. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

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पृथ्वी, हमारे पास, वंशजों की धरोहर है
इस चिट्ठी में चर्चा है कि हम पर्यावरण को बचाने में क्या सहयोग कर सकते हैं।

क्या आप कभी अपनी पत्नी का जन्मदिन और शादी की सालगिरह दोनो एक साथ भूलें है। यदि आपका जवाब हां में है तब मुन्ने की मां का गुस्सा समझ सकते हैं।

मुझे पिछले साल काम के सिलसिले में बाहर रहना पड़ा - कुछ समय दिल्ली और कुछ समय भोपाल। न उसके जन्मदिन की याद रही, न ही शादी की सालगिरह की - यह दोनो आस-पास ही पड़ते हैं। जब याद आया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लगा कि जब वापस कस्बे में पहुंचूंगा, तो खैर नहीं। सोचा, मनाने के लिये, भोपाल से कुछ ले चलूं।
'उन्मुक्त जी, हम तो समझे कि आप पर्यावरण के बारे में कुछ बता रहें हैं यहां तो कुछ और ही है - पत्नी को मनाया जा रहा है।'
भोपाल में सबसे अच्छा बजार नयी मार्केट है। वहां, मध्य प्रदेश सरकार निगम की दुकान मृगनयनी है। वहां पर, अच्छा समान वाजिब दामों में मिल जाता है। बस उसके लिये, कुछ लेने के लिये, वहीं पहुंच गया।
'लगता है कि उन्मुक्त जी, बढ़िया सा शीर्षक देकर, हम सब को झांसा दे रहे हैं। समझ गये, कुछ नहीं, बस टीआरपी का चक्कर है।'
मैंने मृगनयनी से, एक सूती चन्देरी की साड़ी, शादी की सालगिरह और सूती सलवार-कुर्ते का सेट उसके जन्मदिन के लिये लिया। सलवार-कुर्ते के सेट में तीन कपड़े थे। एक रंगीन सादा कपड़ा और दो  वैजिटेबल रंग (vegetable dye) से चित्रकारी किये हुए कपड़े थे। 


वहां पर एक प्यारी सी, युवती विक्रेता थी। मैंने उससे पूछा कि इसमें कौन सा कपड़ा क्या है। उसने एक को, दुपट्टा बताया फिर मुस्करा कर बोली,


'वैसे सादा रंगीन कपड़ा सलवार है। लेकिन आजकल फैशन के अनुसार आप जिसे चाहें सलवार बना ले, जिसे कुर्ता।'



यानि कि सादे रंगीन कपड़े को कुर्ता और चित्रकारी करे हुऐ कपड़े को सलवार। मैं कुछ उलझन में पड़ गया। इस पर उसने कहा,

'आप बिलकुल मत खबराइये आपकी पत्नी को सब मालूम होगा। वह सब समझ जाएगी।'
यह जानने के लिये कि क्या वह युवती सच कह रही थी या नहीं - मैंने अन्तरजाल में ढ़ूंढा। मुझे यहां से, फैशन पत्रिका का यह चित्र मिला। इसे देख कर तो लगता है कि सादे कपड़े का कुर्ता ज्यादा सुन्दर लगता है। हांलाकि मुन्ने की मां के अनुसार यह इसलिये है कि मॉडल-युवती सुन्दर है।

'उंह हूं उन्मुक्त जी, इस चिट्ठी में पर्यावरण का जिक्र तो दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है।'
वह युवती विक्रेता, जब इन कपड़ों को पैक करने लगी, तब मैं आश्चर्य से डूब गया। उसने समान को समाचार पत्रों के बने पैकेटों में पैक किया। उठाने के लिये, ऊपर सुतली लगी हुई थी। वह युवती समझदार थी समझ गयी कि मैं उन पैकेटों को देख कर आश्चर्य चकित हो रहा हूं। उसने बताया,

'अंकल, यह सब पर्यावरण को बचाने के लिये किया जा रहा है। हम प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करते हैं। इसलिये इस तरह के पैकेट प्रयोग करते हैं। इसके अलावा, इसके कई फायदे हैं।
  • हमने रद्दी समाचार पत्रों का फिर से प्रयोग कर लिया; और
  • यह पैकेट लघु उद्योग के द्वारा बनाये जा रहे हैं। इस कारण बहुत से लोगों को काम मिल रहा है।'
यह छोटा सा, पर सराहनीय कदम है। यह छोटे-छोटे कदम ही हमारी पृथ्वी मां को बचा सकेंगे। यह हमारी जिम्मेवारी है कि यह काम सुचारु रूप से हो। क्योंकि किसी ने सच कहा है कि,
‘We have not inherited this planet from our parents.
But have merely borrowed it from our children’
यह पृथ्वी हमें अपने पूर्वजों से नहीं मिली है
यह हमारे पास वशंजों की धरोहर है

यह हमारी जिम्मेवारी है कि हम वशंजों की धरोहर, उन्हें ठीक प्रकार से उन्हें वापस दे सकें।  क्या आप जानना चाहते हैं कि आप इसमें किस तरह से सहयोग कर सकते हैं। बहुत कुछ – देखिये आप क्या कर सकते हैं:
  1. आप समान ऐसे पैकेटों में खरीदिये जो फिर से प्रयोग हो सकें और उन्हें बार बार प्रयोग करें।
  2. शॉपिंग पर अपना बैग ले जायें।
  3. पेपर को बेकार न करें। दोनों तरफ प्रयोग करें। 
  4. हो सके तो, लिफाफों को फाड़ कर, अन्दर की तरफ सादी जगह को, लिखने के लिये प्रयोग करें।
  5. सारे बेकार कागजों को पुनर्चक्रण (recycling) के लिये इकट्ठा करें।
  6. प्लास्टिक के पैकेटों का कम प्रयोग करें। सब्जी, फल या मांस को सुरक्षित रखने के लिये प्लास्टिक की जरूरत नहीं।
  7. उन उत्पादनों को लें, जो हर बार पुनः फिर से भरने वाले पैकटों में मिलते हों। यदि आपकी प्रिय वस्तु  ऐसे पैकेटों में न आती हो तो कम्पनी को इस तरह के पैकेटों में बेचने के लिये लिखें।
  8. खाने की वस्तुओं को हवा-बन्द बर्तनों में रखें। उन्हें चिपकती हुई प्लास्टिक में रखने की जरूरत नहीं।
  9. पेट्रोल बचायें, प्रदूषण कम करें।
  10. अपने सहयोगियों और पड़ोसियों के साथ कार पूल कर प्रयोग करने का प्रयत्न करें।
  11. बिना बात बिजली का प्रयोग न करें - बत्ती की जरूरत न हो तो बन्द कर दें।
  12. पेड़ों, जंगलों के कटने को रोके। इनके कटने के खिलाफ लोगों को जागरूक करें।
  13. पुनरावर्तित (recycled) वस्तुओं का प्रयोग करें।
  14. ऐसे बिजली के उपकरण प्रयोग करें जो कम बिजली खर्च करते हों। इस समय इस तरह के नये तकनीक पर बने बल्ब आ रहें हैं। उनका प्रयोग करें।
  15. पर्यावरण-मित्रवत उत्पादकों (environment friendly products) का प्रयोग करें।
आप इन पन्द्रह बिन्दुओं में से, कितने बिन्दुओं का पालन करते हैं। मैं इसमें सब तो नहीं, पर अधिकतर का पालन करता हूं। मेरे साइकिल  चलाने के बारे में तो आप जानते ही हैं और शायद कोपेनहेगन व्हील (Copenhagen Wheel)  बहुत कुछ बदल दे।

इसी के साथ, इस साल को अलविदा। नया साल आपके लिये शुभ हो, मंगलमय हो। नये साल में आप ऊपर-लिखित १५ बिन्दुओं में से, अधिक से अधिक बिन्दुओं का प्रयोग करें - आखिरकार हमें पृथ्वी मां को, अपने बच्चों के लिये बचा कर रखना है। हिन्दी चिट्ठाजगत भी नये साल में, नयी ऊंचाईयों पर पहुंचे - ऐसी कामना, ऐसा विश्वास।


हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi

सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।:
Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. his will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)
यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इन फाइलों को आप सारे ऑपरेटिंग सिस्टम में, फायरफॉक्स ३.५ या उसके आगे के संस्करण में सुन सकते हैं। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में – सुन सकते हैं।
बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें। इन्हें सारे ऑपरेटिंग सिस्टम में फायरफॉक्स में भी सुना जा सकता है। इसे डिफॉल्ट करने के तरीके या फायरफॉक्स में सुनने के लिये मैंने यहां विस्तार से बताया है। 




मेरे अन्य चिट्ठों पर, पर्यावरण से संबन्धित चिट्ठियां




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This post talks about, what we can do save environment. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.







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विश्व की संगीत राजधानी – वियाना

मैं काम के सिलसिले में बर्लिन गया था। वहां के लिये, भारत से कोई सीधी उड़ान नहीं थी। इसलिये दिल्ली से वियाना और वहां से बर्लिन गया था। लौटते समय, घूमने के लिये वियाना रुका था। इस चिट्ठी में वियाना यात्रा का वर्णन है। यह मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।

वियाना – मैं पहुंच रहा हूं ।। सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक फिल्म, सत्य कथा पर आधारित है।। टमटम पर, राजसी ठाट-बाट के साथ।। सिगमंड फ्रायड संग्रहालय।। मन, प्रभू के चरणों में।। क्या भाई को सौतेली बहन स्वीकर कर लेनी चाहिये।। वियाना रात में।। एक प्यारी सी लड़की – लीसा।। वियाना में घूमने की जगहें।। कॉन्वेंट में पूजा और सिस्टर लूसी।। वापसी की यात्रा।।

वियाना – मैं पहुंच रहा हूं

बर्लिन से चलते समय, मैंने अपना कैमरा हैंड बैग में रख लिया था।  बर्लिन हवाई अड्डे पर, एक महिला सिक्योरिटी की इंचार्ज थी। उसने कहा कि इस कैमरे से चित्र खींच कर दिखाओ। मैंने, उसे, उसका चित्र खींच कर दिखाया। उसने कहा कि अब इसे मिटा दो। मैंने उसकी बात मान ली। बाद में मैंने पूछा यदि चित्र ही मिटवाना था तो खिंचवाया ही क्यों? वह कहने लगी,

‘मैं देखना चाहती थी कि यह कैमरा ही है, न कि कुछ और।’

लगता है कि आतंकवादियों ने हवाई जहाज उड़ाने का नया तरीका निकाल लिया है :-)
हवाई जहाज पर एक बम्बई के एक व्यापारी से मुलाकात हुई। मैंने पूछा कि वे बर्लिन कैसे आये थे। उनका जवाब था कि वे अपने लड़के से मिलने आये थे जो कि बर्लिन में यांत्रिकी इंजीनियरिंग पढ़ रहा है।

आईआईटी मद्रास, जर्मनी सरकार की सहायता से बना है। इसलिये वहां का यांत्रिकी इंजीनियरिंग विभाग बेहतरीन माना जाता है।

उन्होंने बताया कि जर्मनी की यांत्रिकी इंजीनियरिंग दुनिया में मशहूर है इसीलिये उनके लड़के वहां यांत्रिकी इंजीनियरिंग पढ़ रहे हैं। आईआईटी मद्रास, जर्मनी सरकार की सहायता से बना है। इसलिये वहां का यांत्रिकी इंजीनियरिंग विभाग बेहतरीन माना जाता है। उन्होने यह भी बताया कि जर्मनी में पढ़ाई का खर्च नहीं लगता – केवल रहने और खाने का। मैंने पूछा,

‘क्या यह केवल जर्मन लोगों के लिये है या सबके लिये।’

उन्होंने कहा कि यह सब के लिये है। मुझे यह कम समझ में आया कि क्यों जर्मन सरकार दूसरे देश के लोगों के लिये भी शिक्षा का पैसा नहीं लेती है। अमरीका में भी ऐसा होता है पर उसके एवज में उन्हें कुछ काम, जैसे टीचिंग एसिस्टेंट बनना पड़ता है।

वियाना में मुझे एक कॉन्वेन्ट में ठहरना था। इसी बात से, मुझे रास्ते में, १९६० के दशक में देखी फिल्म, सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक (Sound of Music), की याद आयी।

सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक फिल्म, सत्य कथा पर आधारित है

सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक (Sound of Music) फिल्म, १९६० के दशक में बनी थी। मैंने इसे तभी देखा था। यह आज तक की बनी संगीत-मय फिल्मों में, सबसे प्रसिद्ध है। इसे पांच ऐकेडमी पुरुस्कार मिलें हैं। यह मारिया नामक लड़की की सत्य कथा पर आधारित है।

मारिया का पूरा नाम मारिया फॉन ट्रैप (शादी के पहले कुक्षेरा) {Maria Von Trapp (nee Kutschera)} था। वह वियाना में रहने वाली एक अनाथ लड़की थी। वियाना से वह सॉल्सबर्ग (Salsburg) के एक कॉन्वेंट में नन बनने के गयी। वहां उसे, विधुर नेवल कमांडर के घर, सात बच्चों की देखभाल करने के लिये, भेजा गया। जहां दोनो में प्रेम हो गया और उन्होने शादी कर ली। द्वितीय विश्व युद्ध के समय, वे ऑस्ट्रिया से भाग कर, अमेरिका चले गये। मारिया ने बाद में अपनी जीवनी ‘द स्टोरी ऑफ ट्रैप फैमली सिंगरस् (The Story of the Trapp Family Singers) नाम से लिखी।

नन की भूमिका में जूलिया एंड्रयूस्

सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक, फिल्म मारिया की पुस्तक ‘द स्टोरी ऑफ ट्रैप फैमली सिंगरस्’ पर आधारित है। फिल्म की मूलभूत कहानी तो पुस्तक से ली गयी है पर फिल्मी मसाले के लिये, उसमें बदलाव किया गया है। वास्तव में, मारिया द्वितीय विश्व युद्ध के पहले ही कमांडर के घर बच्चों को देखने गयी थी और उसकी शादी भी पहले हो गयी थी पर यह फिल्म में यह सब द्वितीय विश्व युद्ध के समय का दिखाया गया है। हांलाकि वे द्वितीय विश्व युद्ध के समय ही वहां से भागे थे।

फिल्म में मारिया की भूमिका, जूलिया एंड्रयूस् कलाकारा ने निभाया है। यह कथा सॉल्सबर्ग की है और फिल्म की शूटिंग भी सॉल्सबर्ग में हुई है। यह एक बेहतरीन फिल्म है। यदि आपने नहीं देखी है तो अवश्य देखें। इस फिल्म का ट्रेलर का आनन्द लें।

सॉल्सबर्ग, वियाना से दूर है। वहां एक दिन में जाकर वापस नहीं आया जा सकता था इसलिये वहां नहीं गया। जिस जगह पर इस फिल्म की शूटिंग हुई है वहां पर कन्वेन्शन सेन्टर बन गया है और अन्तर-राष्ट्रीय सम्मेलन होते हैं। क्या मालुम कभी वहां सम्मेलन में जाने का मौका मिल जाय तब ही इस फिल्म की यादों को पूरा कर लूंगा।

इसी फिल्म पर आधरित हिन्दी की फिल्म ‘परिचय’ है। इसमें भारतीय परवेश के अनुसार, बदलाव किये गये हैं। इस फिल्म की मुख्य भूमिका में प्राण, जीतेन्द्र, और जया भादुड़ी हैं। परिचय फिल्म का गाना ‘सारे के सारे, गामा के संग’ सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक के लोकप्रिय गीत ‘डो रे मी … डो अ डीयर’ पर आधारित है। इसे भी आप सुन सकते हैं।

टमटम पर, राजसी ठाट-बाट के साथ

वियाना हवाई अड्डे पर, सिस्टर सिग्रेड और सिस्टर कारमेन, मुझे लेने आयी थीं। मैं इन लोगों से कभी नहीं मिला था। लेकिन उन्हें, उनके कपड़ों के कारण पहचान गया। यह लोग, एक बड़ी सी स्टेशन वैगन लेकर आयीं थीं जिसमें बैठने की तीन पंक्तियां थीं।

  • सिस्टर कारमेन जर्मनी से हैं। वे बहुत अच्छा कार चलाती हैं। उन्हें वियाना शहर के बारे में अच्छा पता है।
  • सिस्टर सिग्रेड महाराष्ट्र से हैं। उनकी हिन्दी अच्छी है। इस समय वे, सिस्टर जनरल की सलाहकार हैं। सिस्टर सिग्रेड को जर्मन भाषा तो आती है पर वियाना के बारे में ज्यादा पता नहीं था। वियाना में, सिस्टर सिग्रेड ने मेरा ख्याल रखा। मैं सारी सिस्टरस् और खास तौर से उनका आभारी हूं।
सिस्टर सीग्रेड, मुझे भाषाओं की खास जानकार लगीं

सिस्टर सिग्रेड की आवाज मधुर है वे गाना भी अच्छा गातीं हैं। एक दिन जब हम लोग घूमने निकले तब उन्होंने कार में, मां मरियम की स्तुति में एक भजन सुनाया। उन्होने बताया कि वे हमेशा बाहर जाते समय यह भजन गाती हैं। इस भजन में, मां मरियम से प्रार्थना है कि हमें अपनी शरण में ले लो। मैंने कार में ही इस गाने को रिकॉर्ड कर लिया था। आप भी इसे यहां सुन सकते हैं।

भारत जाते समय, सिस्टर सिग्रेड, मुझे  हवाई अड्डे छोड़ने भी आयीं थीं। उस समय सिस्टर सिग्रेड ने हिन्दी में एक भजन सुनाया। वे भारत की लगभग सब भाषा में भजन गा लेती हैं और जर्मन में तो गाती ही हैं। मुझे, वे भाषा की खास जानकार लगीं।

सिस्टर सिंथिया और सिस्टर सीग्रिड, टमटम पर। साथ में है महिला चालक लियाना। यह चित्र हीरोस् स्कवैर (Heroes' Square) पर खींचा गया था। टमटम के पीछे, घुड़सवारी करते हुऐ, ऑस्ट्रिया के आर्कड्यूक चार्लस् Archduke Charles of Austria की मूर्ति है। वे राजा के पुत्र और १८वीं शताब्दी में आस्ट्रिया सेना में फील्ड मार्शल थे।

बर्लिन में यदि कुछ जगहों पर रिक्शा के द्वारा घूमा जा सकता है तो वियाना में घोड़ागाड़ी पर। वियाना में घोड़ागाड़ी, पुरूष वा महिला दोनो ही चलाते हैं। जिस घोड़ागाड़ी का मैंने चित्र लिया था उसकी चालक महिला थी। उसका नाम नाम लियाना है। उसने मुझे बताया कि इस घोड़ागाड़ी को फिआकर कहते हैं। मैंने उसे बताया कि भारत में इसे टमटम कहते हैं। चलते समय लियाना ने मुस्करा कर कहा ‘टमटम’। मैंने भी मुस्करा कर जवाब दिया – फिआकर। इन घोड़ागाड़ियों के इतिहास के बारे में कुछ जानकारी यहां से प्राप्त की जा सकती है।

इस तरह की घोड़ागाड़ी,  महारानी विक्टोरिया की प्रिय सवारी थी और तभी इनका चलन बढ़ा। इसलिये इन्हें विक्टोरिया भी कहा जाता है। विक्टोरिया नम्बर २०३, घोड़ा गाड़ी के इर्द-गिर्द घूमती लोकप्रिय फिल्म है। इसमें मुख्य भूमिका अशोक कुमार और प्रान ने निभायी है।

सिगमंड फ्रायड संग्रहालय

सिगमंड फ्रायड का वियाना में घर जहां पर अब संग्रहालय है

वियाना दुनिया के संगीत की राजधानी कही जाती है। यहां बड़े-बड़े संगीतकार हुए हैं जिनमें बीथोवियन, (Beethoven) मोज़ार्ट (Mozart) मुख्य हैं। वियाना में लोग इनके संग्रहालय या म्यूज़िक कॉंसर्ट देखने जाते हैं पर मैं यदि वियाना में कहीं जाना चाहता था तो उस जगह, जहां सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) ने अपना जीवन व्यतीत किया।

फ्रायड १९३८ तक वियाना में रहे। वे यहूदी थे। १९३८ में, वियाना जर्मनी का हिस्सा बन गया तब वे सपरिवार लंदन चले गये। १९३९ में, वहां उनकी मृत्यु हो गयी।

मैं बर्लिन से तैयार होकर निकला था। नाश्ता, हवाई जहाज में ही कर लिया था। हम लोग वियाना हवाई अड्डे से ही फ्रायड संग्रहालय देखने चले गये। इस संग्रहालय को बनाने में उसकी बेटी ने मदद की। संग्रहालय के इंचार्ज ने बताया कि इस संग्रहालय को लगभग १०० लोग रोज देखने आते हैं।

संग्रहालय में मेरे साथ सिस्टर सीग्रेड और सिस्टर कारमेल थीं। हमें देख कर, वहां पर काम कर रही महिला मुस्कराने लगी। मैंने पूछा,

‘क्या आप लोग, सिंगमड फ्रायड के संग्रहालय में, सिस्टरों को देख कर मुस्करा रही हैं?’

उसने हांमी भरी। लेकिन मुस्कराने का कारण यह भी बताया कि हम तीन में से दो भारतीय हैं।

फ्रायड पढ़ाई के सारे विषयों में या तो बहुत अच्छे थे या उत्कर्ष – इससे कम नहीं

मरीजों के लिये वेटिंग रूम

यहां पर फ्रायड के शिक्षा संबंधी सर्टिफिकेट भी देखे जा सकते हैं। यह बताते हैं कि फ्रायड सारे विषयों में,

  • बहुत अच्छे (very good) थे, या
  • उत्कर्ष (excellent) थे।

इससे कम नहीं।

इस संग्रहालय से कुछ यादगार सामाग्री (Souvenir) भी खरीदी जा सकती है। मैंने वहां से फ्रायड की एक फोटो खरीदी। उनके मरीजों का प्रतीक्षालय (Waiting room) वा उनका परामर्श देने वाला कमरा (Consulting chamber) भी देखा।

फ्रायड आजकल प्रासंगिक नहीं माने जाते हैं। लेकिन जिस समय उन्होंने सेक्स के बारे में अपने सिद्घान्तो को प्रतिपादित किया उस समय इस विषय पर चर्चा करना करना, एक हिम्मत की बात थी। उन्होंने सामाजिक बंधनो से ऊपर उठकर इस विषय पर बात की। उनके पूरे संघर्ष को, जीवनी के रूप में, इर्विंग स्टोन (Irving Stone) ने ‘पैशन आफ माइंड’ (The Passion of Mind) नामक पुस्तक में लिखा है। यह पुस्तक पढ़ने योग्य है।

मन प्रभू के चरणों में

कांवेन्ट से वियाना शहर

मैं वियाना के जिस कॉन्वेंट में ठहरा, वह एक पहाड़ी पर है। यह बेहद खूबसूरत जगह है। यहां से वियाना शहर का काफी भाग दिखाई पड़ता है। इसका क्षेत्रफल भी बहुत बहुत अधिक है। यहां से प्रकृति का नज़ारा भी सुन्दर है। उस समय पत्तियां लाल, और पीली हो रही थीं। जो कि ठंड के आते-आते, अधिकतर सारे पेड़ों से – क्रिसमस पेंड़ (Christmas Tree) को छोड़कर – गिर जाती हैं। बसन्त ऋतु के आते ही फिर निकलती हैं। पेड़ हरे, पीले, और लाल रंग के दिखायी देते हैं। यह एक खूबसूरत नज़ारा होता है। मुझे यहां शान्ति मिली और लगा कि मन ईश्वर के चरणों में है।

कॉंन्वेन्ट में कमरा

कांवेन्ट में केवल सिस्टरें ही रहती हैं। वे अपने कॉवेन्ट के मुखिया का भी चुनाव करती हैं जिसे सिस्टर जनरल कहा जाता हे। यह छ: साल के लिये होता है। इनकी चार सलाहकार होती हैं जो उन्हें सलाह देती हैं। इन्होंने विश्व को खण्डों में बांटा है। हर खण्ड का अपना मुखिया हैं। वे अपने सलाहकारों के साथ आगे की योजना बनाकर कॉवेन्ट में भेजती हैं। कॉंवेन्ट के अनुमोदन के बाद, उस खण्ड में योजना के अनुसार काम आगे चलता है।

कमरे की खड़की से बाहर का दृश्य

वियाना में सारे स्कूल सरकारी हैं। प्राइवेट स्कूल बहुत मंहगे हैं इसलिये यह कॉन्वेंट वहां पर कोई स्कूल नहीं चलाता है। लेकिन, बहुत सी सिस्टरें, स्कूलों में पढ़ाती हैं या फिर अस्पताल में या वृद्घ लोगों के आश्रम में नर्स की तरह काम करती हैं। किन्डरगार्डेन के लिये जरूर कांवेन्ट कुछ सुविधा प्रदान करता है। यहां से जो पैसे मिलते हैं वे कॉन्वेंट के पास जाते हैं। इससे वहां का खर्च वगैरह चलता है। कुछ पैसा सिस्टरों के वृद्घ उम्र के लिये रखा जाता है।

क्या भाई को सौतेली बहन स्वीकर कर लेनी चाहिये

सिस्टर साइन हिल डे और सिस्टर कारमेल

इस कॉन्वेंट में, मेरी मुलाकात सिस्टर साइन हिल डे से हुई। वे कांवेन्ट की सिस्टर जनरल रह चुकी हैं। सिस्टर डे, बहुत समय भारत में रहीं हैं। हिन्दी अच्छी समझती हैं पर बोल नहीं पाती हैं। उन्होंने बताया कि भारत में लोग उन्हें फ्लाइंग नन कहते थे क्योंकि वे पहले मोपेड, फिर स्कूटर, और बाद में मोटरसाइकिल चलाती थीं।

सिस्टर डे मुझे बहुत रोचक महिला लगीं। उनके पास किस्सों का भंडार था जिन्हें वे, न केवल नाश्ते और खाने पर, लेकिन शाम को घूमते समय सुनाती रहीं। उनका एक किस्सा तो मुझे फिल्मों की तरह लगा।

कॉन्वेंट के पूजाघर (Chapel) में मां मरियम की मूर्ती

उन्होंने बताया कि बहुत साल पहले, एक भारतीय प्रतिनिधि-मंडल वियाना आया था। उसके साथ, एक भारतीय डाक्टर भी था। वह कुछ महीने वहां रहा। उसके बाद लंदन, फिर वापस भारत चला गया। वियाना में, उसका प्रेम एक आस्ट्रियन लड़की से हो गया। उससे एक लड़की हुई। मां, आस्ट्रिया में ही रह गयी थी। उसने उस लड़की को अनाथालय में छोड़ दिया। लड़की देखने में एकदम भारतीय लगती है।

सिस्टर डे भारत में उसके पिता को जानती थीं। लेकिन वे उससे, इस बात को नहीं कह पायीं। उसका पुत्र अपनी पत्नी के साथ सिस्टर डे से अक्सर मिलने आया करता था। उन्होंने उसे एक दिन अकेले आने को कहा और उसे उसकी सौतेली बहन के बारे में बताया। वह लड़की, भारत में अपने सौतेले भाई से भी मिली। लेकिन उसके भाई ने, उसे मानने से इन्कार कर दिया।

सिस्टर डे ने बताया कि भाई का लड़का अर्थात आस्ट्रिया में रह रही लड़की का भतीजा, इन बातों को ज्यादा ठीक से समझता है। वह अपनी सौतेली बुआ को स्वीकार कर सकता है। शायद निकट भविष्य में, ऐसा संभव हो सके। यदि ऐसा होता है तो उस महिला को वह पहचान मिल सकेगी जो उसके पिता या सौतेले भाई ने नहीं दी।

मुझे लगता था कि यदि मैं वह पिता या भाई होता तो उसे जरूर स्वीकार कर लेता। गलतियां स्वीकारने में कोई छोटा नहीं होता – बड़ों की यही खासियत होती है। शायद उसके पिता को अपनी प्रतिष्ठा या भाई को अपने पिता के नाम पर समाज में धक्का लगने का डर रहा हो या हो सकता है कि भाई विश्वास ही नहीं करता हो।

मैं दिल से चाहता हूं कि भतीजा अपनी सौतेली बुआ को स्वीकार कर ले। मैं भगवान को नहीं मानता – अज्ञेयवादी हूं, धर्म को अलग तरह से देखता हूं,  पर हे प्रभू, यदि तुम हो, तो ऐसा होने देना।

सिस्टर डे के पास बहुत से किस्से थे। मैंने उनसे कहा,

‘सिस्टर डे, आप इन किस्सों को किताब के रूप में लिख कर क्यों नहीं प्रकाशित करवातीं।’

वे इस बात का कोई जवाब देने से टाल गयीं। उन्होने मुझे फिर वियान कॉन्वेंट में रहने के लिये सपरिवार बुलाया है। यदि मैं फिर गया तो उनसे चिट्ठा लिखवाना जरूर शुरू करवा दूंगा :-)

वियाना रात में

काहलेनबर्ग पर चर्च

एक दिन, शाम को, सिस्टर साइन हिल डे  मुझे वियाना के नज़ारे दिखाने ले गयीं।

हम लोग पहले काहलेनबर्ग (Kahlenberg) पहाड़ी पर गये। अठ्ठारहवीं शताब्दी में टर्की ने आस्ट्रिया पर हमला बोल दिया था पोलैंड की सहायता से उन्हें हराया जा सका। इसी उपलक्ष में उस जगह पर एक चर्च का निर्माण हुआ था। यहां से पूरे वियाना, को जो की बिजली रोशनी में जगमग कर रहा था, देखा जा सकता है। यह अपने में सुन्दर दृश्य है। वहां पर होटल मैनेजमेंट स्कूल है जिसका अपना रेस्ट्रां है। इसमें असाम चाय के साथ, दार्जलिंग चाय भी मिलती है। मैंने इसे न लेकर फ्रूट चाय लेना पसन्द किया।

चाय पीने के बाद हम लोग ग्रिनज़िंग (Grinzing) नाम जगह गये। ग्रिनज़िंग यानि कि जहां इसी साल में बनी वाइन (wine) मिलती हो। ये जगह वियाना में प्रसिद्घ है। आस्ट्रिया न केवल अपने संगीत के लिये, पर अपनी वाइन के लिए भी प्रसिद्घ है। इस जगह बहुत सारे रेस्ट्रां हैं। जो कि अपनी वाइन स्वयं बनाते हैं और खाने में पेश करते हैं। पर वहां हर तरह की वाइन भी मिलती है।

काहेलबर्ग से वियाना - यह चित्र Clemens Pfeiffer का खींचा हुआ है और विकिपीडिया के सौजन्य से है।

हम लोग, वहां के ह्यूडोल्फ हाफ (Houdolf Haf) नामक रेस्ट्रां में खाने गये। यह १०० साल से भी ज्यादा पुराना रेस्ट्रां है। यहां पर अक्सर वियाना राजा के पुत्र आया करते थे।

रेस्ट्रां में पियानो एकार्डियन और वायलन बजाते रोमा जिप्सी

यहां पर एक व्यक्ति पियानो एकार्डियन और दूसरा वायलन बजा रहा था। वायलन बजाने वाला व्यक्ति मुझे भारतीय लगा। मैंने उससे बात की तो उसने बताया कि वह रोमा जिप्सी है। जिप्सियों का मूल, भारत ही कहा जाता है। शायद इसलिये वह मुझे भारतीय लगा। मुझसे बात करते समय, उसने मुस्कराकर, हिन्दी के कुछ शब्द भी बोले।

मैं बाहर जाता हूं तो वहीं का खाना पसन्द करता हूं। वहां पर मुझे एक भारतीय मिले उन्होंने एक आस्ट्रियन लड़की से शादी कर ली है और वहीं पर बस गये हैं। आजकल फैशन गहनों (Fashion Jewellery) का बोलबाला है। इसी को वे, दुनिया भर से निर्यात कर, आस्ट्रिया में बेचते हैं। उनकी पत्नी बहुत अच्छी हिन्दी बोलती हैं। मैंने पूछा कि वे कैसे इतनी अच्छी हिन्दी बोलती हैं। उन्होंने बताया,

‘वियाना के विश्वविद्यालय में हिन्दी पढ़ायी जाती है। मैंने वहां पर हिन्दी पढ़ी और सीखी है।’

भारतीय शख्स की सलाह पर, मैंने आलू सलाद (Potato Salad), वीनर शीत्जल (Weiner Schnitzel) खाने में लिया।

  • विनर शीतजल एक नामिष भोजन है जिसमें पोर्क (सुअर का मांस) होता है। यह वियाना की खासियत है।
  • आलू सलाद में कुछ मिठास थी।

मुझे, आलू सलाद पसन्द आयी। इसके आलू बहुत कोमल थे, कांटे से पकड़ने पर टूटते थे। सिस्टर डे ने बताया कि अच्छा पका आलू इसी तरह से होता है। मैं, आलू सलाद को, कांटे से नहीं खा पाया अंतत: उसे चम्मच से ही खाना पड़ा। इसके बनाने का तरीका भी सिस्टर डे ने मुझे बताया था पर समझ में नहीं आया।

एक प्यारी सी लड़की – लीसा

लीसा

वियाना के कॉन्वेंट में, मेरी मुलाकात लीसा से हुई। वह मुझे एक प्यारी सी लड़की लगी।

लीसा ने मुझे बताया कि आस्ट्रिया में उच्च शिक्षा या व्यावसायिक (Professional) शिक्षा के पहले की शिक्षा निम्न भागों में है:

  • किण्डरगार्डन (Kindergarten) ३ से ६ साल की उम्र
  • फाल्क शुले (Volkschule) ७ से ११ साल की उम्र
  • जिमनेसियम (Gymnasium) ४ साल की पढ़ाई
  • मथुरा (Mathura) यह pre university की तरह है।

लीसा जिम्नेसियम में पढ़ती है। शायद यह हमारे यहां के हिसाब से दसवीं क्लास है।

लीसा को कॉवेन्ट में देखकर, मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने पूंछा कि वह यहां कैसे आयी है। उसने बताया,

‘मैं लिंज (Linz) में रहती हूं। यह वियाना से लगभग २०० किलोमीटर दूर है। कॉन्वेंट में रहने वाली एक सिस्टर का घर, मेरे घर के पास है। मैं उन्हीं के कहने पर, छुट्टियों में कॉवेन्ट में आती हूं। मुझे यहां अच्छा लगता है लेकिन मेरे मित्रों को कॉवेन्ट पर जाना अच्छा नहीं लगता है।’

लिंज़ शहर के घूमते हुऐ सुन्दर चित्र देखने के लिये यहां जायें।
लीसा के पिता एयर कंडीशनिंग कंपनी में काम करते हैं और मां उसी स्कूल में काम करती है जहां वह पढ़ती है। यह एक सरकारी स्कूल है। वह अपने माता पिता की इकलौती सन्तान है पर उसे कभी अकेलापन नहीं महसूस होता है क्योंकि उसके छ: चचेरे ममेरी, भाई – बहन हैं जिनके साथ वह सप्ताहान्त बिताती है। मैंने लीसा से कहा कि भारत में लोग अक्सर लड़के की चाहत रखते हैं क्या ऎसा यहां भी है उसने कहा,

‘नहीं, यहां इस तरह की कोई भावना नहीं है।’

लीसा के स्कूल में, नोटबुक वाली कक्षा

लीसा के पास एक लैपटॉप था। उसने बताया कि वह नोटबुक क्लास में है उसके क्लास में सभी बच्चे अपना लैपटॉप लेकर आते हैं और सारे नोट्स भी उसी पर लेते हैं। काश अपने देश के भी स्कूल इसी तरह के हों।

मुझे सिस्टर डे ने बताया कि लीसा बड़ी होकर डाक्टर बनना चाहती है। मुझे खून देखकर डर लगता है। मैं यह जानते हुए भी कि खून देने में कुछ नहीं होता है आज तक कभी खून नहीं दे पाया। इसीलिये मैं कभी डाक्टर नहीं बन सकता था। हालांकि मैंने उन पुस्तकों को पढ़ा है जिसे उन बच्चों को पढ़ना चाहिये जो डाक्टर बनने का सपना देखते हैं। इन पुस्तकों में से प्रमुख हैं,

मैंने लीसा को यह पुस्तकें भेजने का वायदा किया था। इनमें पहली वाली नहीं मिली पर दूसरी और तीसरी मिली। इन दो पुस्तकों को, मैंने उसके पास भेजा है।

आप पुस्तकों के नाम पर चटका लगा कर इनकी समीक्षा हिन्दी में पढ़ सकते हैं। इन समीक्षाओं का हिन्दी में पॉडकास्ट सुनने के लिये, इनके आगे कोष्टक के अन्दर लगे चिन्ह पर चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ऑग फॉरमैट में है। सुनने के लिये दहिने तरफ का विज़िट पढ़ें।

Guten Tag, Lisa
It was pleasure to meet you in Vienna. I wish, I had more time to talk to you. I wanted to talk about about Austria and student life there. The time was short and I had to pack my things. I promise that when we meet next, I will have tea with you.
Do let me know when you receive the books. Do remember the conditions:

  • You have to read and tell me about the books.
  • You have to share it with your friends.

All the best in your life,
Auf Wiedersehen
लीसा नमस्ते
तुमसे वियाना में मिल कर अच्छा लगा। काश मेरे पास और समय होता तो मैं तुमसे ऑस्ट्रिया और वहां के विद्यार्थी जीवन के बारे में बात करता। मुझे समान पैक करना था। इसलिये तुम्हारे हाथ की बनी चाय न पी सका। अगली बार मिलेंगे तो चाय भी पियेंगे और बहुत सारी बातें करेंगे।
लिखना क्या किताबें मिली, शर्तों का भी ध्यान रखनाः

  • तुम्हें, इन किताबों को पढ़ कर, इनके बारे में, लिख कर मुझे बताना है
  • इन्हें सबको पढ़ने के लिये देना है

तुम्हें जीवन की हर खुशी मिले।
हम फिर मिलेंगे,
तब तक के लिये अलविदा।

लीसा से मेरी अक्सर ई-मेल पर बात होती है। मैं अपने बिटिया रानी (वास्तव में मेरी बहूरानी), बेटे राजा और लीसा से होने वाली ई-मेल की चर्चा ई-पाती श्रंखला में करता रहता हूं।

वियाना में घूमने की जगहें

हॉप ऑन - हॉप ऑफ बस का टिकट

वियाना में भी, बर्लिन की तरह हॉप ऑन – हॉप ऑफ (Hop on – Hop off) बसें चलती हैं। वियाना घूमने का यही सबसे अच्छा तरीका है। इनके तीन अलग-अलग रूट हैं पर उनके चलने तथा समाप्त होने की जगह एक ही है। तीनो के टिकट यदि एक साथ खरीदें तो वह २० यूरो पड़ता है।

जैसा कि मैंने पहले बताया है कि मैं एक दिन सिस्टर सीग्रिड और सिस्टर सिंथिया के साथ वियाना शहर घूमने गया था। हमने तीनो रूट का टिकट एक साथ लिया।

हीरोस् स्कवैर

हम लोग सबसे पहले हीरोस् स्कवैर (Heroes’ Square) पर उतरे। यह ऐतिहासिक जगह है। यहां महत्वपूर्ण कार्यक्रम होते हैं। १९३८ में जब हिटलर ने आस्ट्रिया को जर्मनी में मिलाया तो उसकी घोषणा यहीं पर की थी।

यहां पर एक जगह एक संगीतकार वायलिन पर धुन बजा रहा था। उसके सामने बर्तन में कुछ लोग पैसा भी डाल रहे थे।

अन्दर से, सेंट स्टीफंस कैथड्रल

हम लोग सेंट स्टीफंस कैथड्रल (Saint Stephens Cathedral) गये।  यह कैथड्रल यहां का सबसे महत्वपूर्ण चर्च है। वहां पर पूजा (Mass) हो रही थी। यह चर्च अपने में भव्य है। पूजा जर्मन भाषा में थी। कैथड्रल जाते समय, हमने वह जगह भी देखी, जहां मोजार्ट ने अपने जीवन के कुछ साल बिताये थे।

चर्च में मोमबत्ती जलाने के रिवाज है। सिस्टर ने बताया,

‘ईसा मसीह ने दुनिया में प्रकाश दिया था। चर्च में मोमबत्ती जलाना, इसी का प्रतीक है।’

यहां मोम से बने दिये जलाये जाते हैं। मैंने दो दिये जलाये। सिस्टर सिग्रेड ने पूछा,

‘आप दो मोमबत्ती क्यों जला रहे हैं। आपका तो एक ही बेटा है।’

मैंने कहा,

‘यह सच है कि भगवान ने मुझे एक ही बेटा दिया है कोई बेटी नहीं दी। लेकिन मैं दूसरी मोमबत्ती अपनी बहूरानी के लिये जला रहा हूं। हम उसे बेटी की तरह ही मानते है।’

मुझे लगा कि सिस्टर सिंथिया के दिल में, एक छोटी सी, नटखट सी, बच्ची है।

हम लोग दूसरे रूट पर गये। इसमें एक मनोरंजन पार्क है और एक बहुत बड़ा गोल घूमने वाला गोला है। यह १० मिनट में पूरा एक चक्कर घूमता है। सिस्टर सीग्रेड ने पूछा कि क्या मैं यहां उतरना चाहूंगा। मैंने मना कर दिया क्योंकि मैं तीसरी रूट पर राजा के महल में उतरना चाहता था। सिस्टर सिंथिया पार्क की तरफ देख कर बोली,

‘एक दिन, मैं यहां आऊंगी और पूरा दिन यहीं रहूंगी।’

मुझे लगा कि उनके मन के किसी कोने में एक छोटी सी, नटखट सी, बच्ची है।

दूसरे रूट का चक्कर लेते समय, हमें डान्यूब (Danube) नदी मिली। यह नदी जर्मनी, आस्ट्रिया, स्लोवेकिया, हंगरी, क्रोशिया, सर्विंग, रोमानिया, बुलगारिया और यूक्रेल से गुजरते हुए ब्लैक समुद्र (Black sea) में गिरती है। इसे दो भागों में विभक्त कर, उसके बीच में द्वीप बना दिया गया है जिस पर मनोरंजन के कई साधन हैं। नदी पर नावें (cruise) भी चलती हैं। इसे देख मुझे अपनी गोवा यात्रा में मंडोवी नदी पर नाव से सैर की याद आयी

राजा के महल में पीछे का बाग

तीसरी ट्रिप में हम राजा के महल (Schloss Schonbrunn) आये। इसके देखने के लिये कई टूर हैं और सबका पैसा अलग-अलग है। हम लोगों ने सबसे सस्ता वाला टूर लिया। इसमें ३५ कमरों का दिखाया जाता है। इसकी सबसे अच्छी बात है कि यह आपको एक माइक्रोफोन देते हैं। कमरे में जाकर बटन दबाइये तो वह उस कमरे के बारे में यह बताता है और उस कमरे के वर्णन के बाद रूक जाता है। अगले कमरे में जाकर पुन: बटन दबाने पर, उस कमरे के बारे में बताना शुरू करता है।

महल के पीछे राजा का बाग है। यह जगह बहुत सुन्दर थी। हर तरफ हरे भरे लॉन हैं। वहां पर लोगों ने बताया कि गर्मी में यह और भी खूबसूरत लगता है।

कॉन्वेंट में पूजा और सिस्टर लूसी

कॉंवेन्ट में पूजा

कॉवेन्ट में, मैंने उनकी पूजा (Mass) में भी भाग लिया। इसके पहले मैं कभी भी इसाई पूजा में शामिल नहीं हुआ था। उस दिन पूजा के लिये, लंदन से खास तौर पर एक पादरी (Father) आये थे। सिस्टर कारमेल अच्छा आर्गन बजाती हैं वे आर्गन बजा रही थीं। दो सिस्टर और एक अन्य पुरूष (जो इसी पूजा के लिए आये थे) गिटार बजा रहे थे।

सिस्टर ऎडल पान फ्लूट बजाती हुई।

सिस्टर ऎडल, कभी मेडोलिन बजाती थीं तो कभी एक अन्य वाद्य। मैं इस वाद्य को नहीं समझ सका। पूजा के बाद सिस्टर ऎडल ने बताया कि यह

‘पान फ्लूट है। मेडोलिन इटली का वाद्य है और पान फ्लूट इजिप्ट का। इसका वर्णन बाइबिल में भी है।’

यह पूजा जर्मन में थी जो कि समझ में नहीं आती थी पर भाव जरूर समझ में आये। कुछ देर भजन गाया जाता था फिर कुछ संदेश। कभी फादर संदेश देते थे तो कोई सिस्टर। मुझे उनका एक भजन ‘अले लू ल्या‘ कर्णप्रिय लगा। इसके संगीत से यह खुशहाली का भजन लगा। शायद इसका अर्थ भी कुछ इसी तरह है।
पूजा के बाद, वे कुछ पानी और कुछ डबलरोटी सा बांट रहे थे। सिस्टर सिग्रेड ने मुझे बताया कि मुझे यह नहीं लेना है इसके लिए संस्कारों की कई सीढ़ियां पार करनी होती है जो कि मैंने नहीं की है।

टौमी तो मुझे हमेशा हर जगह मिल जाते हैं - कॉन्वेंट में भी मिले।

सिस्टर लूसी

सुबह पूजा के बाद हम लोग नाश्ते के लिये गये। उस दिन सिस्टर लूसी का जन्म दिन था। वे मुम्बई से हैं। उनके लिये, हम लोगों ने Happy birth day गाया। इसी के बाद मैं, सिस्टर सिग्रेड, और सिस्टर सिंथिया वियाना घूमने चले गये थे। लौटते समय, मैंने सिस्टर लूसी के लिए एक सफेद गुलाब लिया। हम लोग जब कॉंवेंट वापस पहुंचे तो वहां रात का खाना चल रहा था। मैंने उनका हांथ चूमकर उन्हें गुलाब दिया। यह न केवल सिस्टर लूसी को पर सारी सिस्टरों को पसन्द आया। सबने तालियां बजाकर इसका स्वागत किया। सिस्टर लूसी ने कहा कि वे इसे ईसा के चरणों में समर्पित करती हैं और वे मेरे लिये प्रार्थना करेंगी। वे अगले सुबह तक, इस बात को याद करती रहीं और नाश्ते पर फिर से मुझे धन्यवाद दिया।

सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा – वियाना से वापसी

वियाना से मेरी उड़ान दिन के ११ बजे थी। मेरे साथ एक और सिस्टर भी उस दिन जा रहीं थी। उन्होंने नाश्ते पर एक छोटा सा भाषण दिया। मैं भी खड़ा हो गया और कहा कि मैं भी कुछ कहना चाहता हूं। सबने इसका स्वागत किया।

मैंने कहा,

‘गुटन मारगेन (शुभ प्रभात)
वियाना में अनगिनत पर्यटक आते हैं सबके अनुभव अपने ही अलग अलग होते होंगे पर मेरा अनुभव अपने में अद्वितीय है। मैंने वियाना को रात में, दिन में, सिस्टरों के साथ देखा। इस तरह का अनुभव शायद किसी और पर्यटक को हुआ होगा।
आप सबका भारत में स्वागत है। भारत में आप मेरे साथ रहें तो मुझे अच्छा लगेगा।
डांके शॉन (आप सबको बहुत धन्यवाद)
ऑउफ वीडरसेह्न (गुड बाई फिर मिलेंगे)’

वियाना से दिल्ली की यात्रा में, मेरे बगल में एक माड़वाड़ी यूवक बैठे थे। वे फर्राटे से जर्मन बोल रहे थे। मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने पूछा कि क्या वे जर्मनी में रहते हैं। उन्होने बताया कि नहीं। वे नेपाल में रहते हैं और वहां रह कर कालीन का व्यापार करते हैं और उन्हें जर्मनी में बेचते हैं। इसलिये उन्होने जर्मन भाषा सीखी है। वे साल में लगभग दो बार जर्मनी जाते हैं। उन्होने रास्ते में हवाई जहाज पर कुछ इत्र खरीदा। मैंने पूछा,

‘क्या पत्नी के लिये खरीद रहे हैं?’

वे बोले

‘नहीं। मैं यह उपहार देने के लये खरीद रहा हूं।’

मैंने पूछा,

‘क्या हवाई जहाज में खरीदने से कोई फायदा है?’

उन्होने बताया कि इसके दाम और ड्यूटी फ्री शॉप के दाम में कोई अन्तर नहीं है पर हवाई जहाज में खरीदने से पॉइंट मिल जाते हैं जिससे बाद में टिकट में सस्ते में मिल जाता है।

बात करते करते, हम दिल्ली के हवाई अड्डे पर पहुंच गये। धूल धक्कड़ भीड़ शोर शराबा – इसी सब के लिये तो मैं तरस रहा था। अपना देश तो सबसे प्यारा है।

सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।

सांकेतिक शब्द
पसन्द करें – कौन सी मछली खायेंगे
इस चिट्ठी में कोवलम अन्तर्राष्ट्रीय समुद्र तट की चर्चा है।


त्रिवेन्दम में हम केटीडीसी के होटेल में ठहरे थे। इस होटल के सामने के समुद्र तट  का नाम 'समुद्र' था। यह बहुत सुन्दर है पर हमारे टैक्सी चालक प्रवीन के अनुसार,
'समुद्र तट बहुत जल्दी गहरा हो जाता है और बहुत लहरें आती हैं। इसमें यदि आप अच्छा तैरना नहीं जानते हैं तो नहीं नहा सकते हैं। कोवलम समुद्र तट में पानी जल्दी गहरा नहीं होता है। इसलिए इसमें आप बहुत दूर तक नहाने जा सकते हैं और यदि आपको बहुत अच्छा तैरना नहीं भी आता है तो  भी आप नहा सकतें है। इसमें लहरें भी बहुत ऊँची- ऊँची नहीं आती हैं। इसलिये अधिकतर विदेशी कोवलम समुद्र तट पर जाते हैं। इसे अन्तर्राष्ट्रीय समुद्र तट भी कहा जाता है। आपको वह तट भी देखना चाहिए।’

हम लोगों ने पहले सोचा था कि कन्याकुमारी से लौटते समय हम लोग कोवलम तट पर भी जायेगें। लेकिन लौटते-लौटते अंधेरा हो गया। इसलिये वहां नहीं जा पाये।


त्रिवेन्डम में काम समाप्त करने के बाद, हम कोवलम समुद्र तट पर गये। हांलाकि, जब हम वहां पहुंचे तब सूरज डूब चुका था पर यह हमारा आखिरी दिन था। हमारे पास इसके अतिरिक्त कोई चारा नहीं था।



कोवलम अन्तर्राष्ट्रीय समुद्र तट के बारे में, हम लोगों ने कई तरह की बाते सुन रखीं थी पर हमें वैसा कोई दृश्य देखने को नहीं मिला। शायद वहां पहुंचते सूर्यास्त हो चुका था और अन्धेरा शुरू हो गया था।



हम जब कोवलम तट पर पहुंचे तब वहां अंधेरा हो चुका था। इस  कारण समुद्र तट के कोई चित्र नहीं खींच पाये। ऊपर के दोनो चित्र, विकिपीडिया कि सौजन्य से, कोवलम समुद्र तट के हैं।



मेरे बेटे को शर्ट पसन्द है। उसका कहना है कि हम जहां जायें वहां से उसके लिये शर्ट ले आया करें। समुद्र तट पर बहुत सी दुकाने थीं जहां पर शर्ट  मिल रही थीं। हम लोग एक दुकान पर गये वहां पर एक साधारण सी महिला बैठी थी पर जब हमने उससे बात शुरू की तब वह  शुद्घ उच्चारण में अंग्रेजी बोलने  लगी। यहां पर दुनिया भर से, विदेशी आते हैं इसलिये यहां के लोग कई भाषा सीख लेते हैं। मैंने कई दुकानदारों को अंग्रेजी के अलावा फ्रेंच और स्पैनिश भाषा बोलते सुना।

कोवलम समुद्र तट के किनारे खाने की जगहें थी। हर खाने की जगह की टेबल से समुद्र दिखायी देता था। आप खाना भी खायें और समुद्र का आनन्द भी लें।  


वहां पर बहुत सारे रेस्तरां भी थे। उनके सामने, मछलियां भी रखी रहती थी। आप पसन्द कर लें। वही बना दी जायेगी। मैं स्वयं मछली खाता हूं पर मालूम नहीं क्यों, इस तरह से मछली पसन्द कर, खाने का मन ही नहीं किया।

कोवलम तट का चक्कर लगाने के बाद हम वापस आ गये। हम खाना खा कर, जल्दी सो गये। हमें अगले दिन सुबह ही हवाई जहाज पकड़ना था। इसी के साथ केरल - ईश्वर की भूमि - यात्रा विवरण समाप्त होता है अब हम चलेंगे, देव भूमि हिमाचल की यात्रा पर।



कोचीन-कुमाराकॉम-त्रिवेन्दम यात्रा
 क्या कहा, महिलायें वोट नहीं दे सकती थीं।। मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता।। हिन्दी चिट्ठकारों का तो खास ख्याल रखना होता है।। आप जितनी सुन्दर हैं उतनी ही सुन्दर आपके पैरों में लगी मेंहदी।। साइकलें, ठहरने वाले मेहमानो के लिये हैं।। पुरुष बच्चों को देखे - महिलाएं मौज मस्ती करें।। भारतीय महिलाएं, साड़ी पहनकर छोटे-छोटे कदम लेती हैं।। पति, बिल्लियों की देख-भाल कर रहे हैं।। कुमाराकॉम पक्षीशाला में।। क्या खांयेगे - बीफ बिरयानी, बीफ आमलेट या बीफ कटलेट।। आखिरकार, हमें प्राइवेट और सरकारी होटल में अन्तर समझ में आया।। भारत में समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं न की निजी।। रात के खाने पर, सिलविया गुस्से में थी।। मुझे, केवल कुमारी कन्या ही मार सके।। आपका प्रेम है कि आपने मुझे अपना मान लिया।। आप,  टाइम पत्रिका पढ़ना छोड़ दीजिए।। पति, पत्नी के घर में रहते हैं।। पसन्द करें - कौन सी मछली खायेंगे।।

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kerala, केरल, Travel, Travel, travel and places, Travel journal, Travel literature, travel, travelogue, सैर सपाटा, सैर-सपाटा, यात्रा वृत्तांत, यात्रा-विवरण, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,
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