Unmukt – उन्मुक्त

हिन्दी चिट्ठाकार उन्मुक्त की चिट्ठियाँ

August, 2009

यदि विकासवाद जीतता है तो इसाइयत बाहर हो जायगी

विकासवाद पढ़ाने के लिये बीसवीं शताब्दी में जीव विज्ञान के अध्यापक स्कोपस् पर मुकदमा चला। इस चिट्ठी में इसी की चर्चा है।

इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,

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डार्विन के विकासवाद का सिद्धांत,  मज़हबों में प्राणी उत्पत्ति के खिलाफ था पर इसका विरोध ईसाई देशों में, खासकर अमेरिका में सबसे अधिक हुआ। यह अभी तक चल रहा है। वहां के अधिकतर राज्यों में, डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को  स्कूल में पढ़ाने के लिए वर्जित कर दिया गया था।

१९२५ में, अमेरिका के टेनेसी राज्य ने, लगभग सर्वसम्मति से (७५ के विरूद्ध ५ वोटों से) कानून पास किया कि स्कूलों में डार्विन का विकासवाद का सिद्धांत  नहीं पढ़ाया जायेगा। डेटन (Dayton),  टेनेसी राज्य का शहर है। यहां के लोगों ने सोचा कि उनके शहर को शोहरत दिलवाने का यह बहुत अच्छा मौका है।  क्यों न यहीं पर इस कानून को चुनौती दी जाए।

जॉन टी. स्कोपस्,  स्कूल में, जीव विज्ञान के अध्यापक थे। वे सरकारी स्कूल की नवीं कक्षा के विद्यार्थियों  को डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत पढ़ाने के लिए तैयार हो गये। डार्विन के विकास वाद के सिद्धांत को पढ़ाने के लिए स्कोपस् के विरूद्व बीसवीं शताब्दी में दाण्डिक मुकदमा चला। यह दुनिया के चर्चित मुकदमों में से एक है। इसे  मन्की ट्रायल (Monkey trial) भी कहा जाता है।

जॉन टी. स्कोपस् का चित्र विकिपीडिया से 

विलियम हेनिंगस ब्रायन (Williams Hennenigs Bryan) डेमोक्रेटिक पार्टी से तीन बार अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए नामित हो चुके थे। वे बाईबिल पर विश्वास करते थे। उन्हें अभियोजन पक्ष की ओर से वकील नामित किया गया।  उस समय क्लेरेंस डेरो (Clarence Darrow), अमेरिका के प्रसिद्घ वकीलों में से थे। वे नि:शुल्क बचाव पक्ष की तरफ से पैरवी करने आये। 

ब्रायन ने बहस शुरू करते समय कहा,

‘The trial uncovers an attack on religion. If evolution wins, Christianity goes.’
यह परीक्षण मज़हब पर हमला है। यदि विकासवाद जीतता है तो इसाइयत बाहर हो जायेगी।’

डैरो ने उत्तर दिया,

‘Scopes is not on trial, civilisation is on trial.’
यह मुकदमा स्कोपस्  पर नहीं, लेकिन सभ्यता पर चल रहा है।


लोगों की  सोच के मुताबिक, यह  चर्चित मुकदमा बन गया। अमेरिका और इंगलैंड से प्रेस संवाददाता डेटन पहुँचकर प्रतिदिन इस मुकदमे के बारे  में प्रेस विज्ञप्ति देने लग गये। यह मुकदमा अखबारों में छा गया।

प्रतिदिन इसे इतने लोग देखने आते थे जिससे लगा कि शायद कोर्ट की पहली मंज़िल का फर्श टूट जाये; भीड़ के कारण गर्मी और उमस भी बढ़ गयी। अन्त में मुकदमे की सुनवायी, न्यायालय के लॉन में स्थांतरित की गयी। जज़, जूरी, और वकीलों के लिये उठा हुआ प्लैटफॉर्म बनाया गया। उस पर उनके बैठने के लिये जगह थी। उसके नीचे अखबार, टेलीग्राफ और रेडिओ के लोगों के बैठने की जगह थी। प्रतिदिन लगभग पांच हज़ार लोग उसे देखने और सुनने आते थे। इस तरह के नज़ारे के साथ, मंकी ट्रायल, जो कि न्यूयॉर्क टाइम के अनुसार इतिहास के सबसे प्रसिद्ध  परीक्षण मुकदमा था,  सुना गया। 

यह पहला मुकदमा था जिसमे कि अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने स्वयं अपने आपको गवाह के रूप में पेश किया।  उसने यह गवाही दी कि बाइबिल में प्राणियों की उत्पत्ति की कथा सही है पर डैरो की प्रतिपृच्छा (cross examination) में उसकी सारी गवाही बेकार साबित हो गयी।  लेकिन, अगले ही दिन , न्यायालय ने ब्रायन की सारी गवाही  रिकार्ड पर लेने से, यह कहते हुऐ कर  मना कर  दिया,

‘यह सवाल प्रासंगिक नहीं है कि,डार्विन का सिद्वान्त सही है अथवा नहीं। न्यायालय के अनुसार उनका केवल यह देखना है कि,क्या स्कोपस ने डार्विन का सिद्वान्त  पढ़ाया अथवा नहीं।’

न्यायालय के लॉन में मुकदमा। चित्र में डैरो दाहिने तरफ खड़े और बायीं तरफ बैठे ब्रायन से क्रॉस इक्ज़ामिनेशन करते हुऐ। 
यह चित्र स्मिथसोनियन इंस्टिट्यूशन आर्काइव् के इस पेज से लिया गया है। वहां पर इस मुकदमें से सम्बन्धित कुछ और दुर्लभ चित्र हैं जिन्हें साइंस सर्विस के मैनेजिंग एडिटर वॉटसन डेवीस ने खींचा है।

यह बात  तो स्वीकृत थी कि स्कोपस्  ने डार्विन के विकासवाद के सिद्वान्त को पढ़ाया था।  न्यायालय की इस आज्ञा के कारण स्कोपस् को तो सजा होनी थी।  उसे सजा में, सौ डालर का दण्ड  दे दिया गया। यह दण्ड जूरी ने न तय कर जज ने किया।

स्कोपस्  ने, टेनेसी सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवायी पांच न्यायधीशों ने की। फैसला आने में साल भर लगा तब तक एक न्यायाधीश की मृत्यु हो गयी। सबने सर्वसम्मति से यह फैसला इसलिये उलट दिया कि दण्ड जूरी को तय करना चाहिये था न कि जज को। आश्चर्य इस बात का है कि केवल एक न्यायाधीश ने कहा कि यह कानून असंवैधानिक है। दो अन्य न्यायाधीशों ने कानून को वैध माना। चौथे न्यायाधीश ने कानून को तो वैध माना पर कहा कि यह न यह विकासवाद के सिद्धांत को पढ़ाने से मना करता है और न ही स्कोपस् पर लागू होता है। स्कोपस् पर यह  मुकदमा फिर से चलना चाहिए था पर न्यायाधीशों ने इसे फिर से चलाने पर मनाही कर दी। यही कारण था कि  यह मुकदमा अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में नहीं गया। 

इस मुकदमे  में जुड़े कुछ लोगों के बारे में भी कुछ बातें बताना उचित होगा।

  • परीक्षण न्यायलय के सजा करने के एक दिन बाद, ब्रायन की मृत्यु हो गयी। लोगों का कहना था कि डैरो के प्रतिपृच्छा के कारण वह टूट गया था। 
  • अमेरिका में निचले अदालतों का चयन, चुनाव से होता है। निचली अदालत के जज ने अगली फिर जज बनने के लिये चुनाव में खड़े होना चाहा तो इस चुनाव के लिये उसका नाम भी प्रस्तावित न हो पाया।
  • स्कूल का सुप्रीटेंडेन्ट, जिसने स्कोपस् पर मुकदमा चलवाया था, जब फिर से चुनाव लड़ने के लिये खड़ा हुआ तो उसने अपने चिन्ह पर लिखवाया, ‘स्कोपस् पर मुकदमा चलवाने वाला‘ उसका नाम भी पद के लिये प्रस्तावित नहीं हो पाया।
  • डैरो अमेरिका के प्रसिद्ध वकीलों में से था। लेकिन इस मुकदमे ने उसे सबसे प्रसिद्ध वकील बना दिया।

इस श्रंखला की अगली कड़ी में, हम बात करेंगे उस मुकदमें की जिसने अमेरिकी न्यायालय के इस शर्म को दूर किया यानि कि, जिसमें विकासवाद के सिद्वान्त को स्कूल में न पढ़ाये  जाने वाले कानून को अवैध घोषित कर दिया गया।
 

डैरो का जीवन  शिक्षा-प्रद है, प्रेणना देना वाला है। मैंने उनकी आत्मकथा द स्टोरी ऑफ माइ लाइफ (The Story of My Life) और इर्विंग स्टोन (Irving Stone) की क्लेरेंस डैरो फॉर डिफेंस (Clarence Darrow For Defense) पढ़ी है। मुझे क्लेरेंस डैरो फॉर डिफेंस बहुत अच्छी लगी। 

‘क्लेरेंस डैरो फॉर डिफेंस’ पुस्तक पढ़ने योग्य है। बहुत से लोग वकीलों के बारे में अच्छी राय नहीं रखते। यह पुस्तक उन्हें इस बारे में फिर से सोचने पर मज़बूर करेगी। शायद इससे आप अन्दाजा लगा सकें कि समाज में वकील का कितना अधिक योगदान है।  

डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े

भूमिका।। डार्विन की समुद्र यात्रा।। डार्विन का विश्वास, बाईबिल से, क्यों डगमगाया।। सेब, गेहूं खाने की सजा।। भगवान, हमारे सपने हैं।। ब्रह्मा के दो भाग: आधे से पुरूष और आधे से स्त्री।। सृष्टि के कर्ता-धर्ता को भी नहीं मालुम इसकी शुरुवात का रहस्य।। मुझे फिर कभी ग़ुलाम देश में न जाना पड़े।। ऐसे व्यक्ति की जगह, बन्दरों से रिश्ता बेहतर है।। विकासवाद उष्मागति के दूसरे नियम का उल्लंघन करता है।। समय की चाल – व्यवस्था से, अव्यवस्था की ओर।। मैंने उसे थूकते हुऐ देखा है।। यदि विकासवाद जीतता है तो इसाइयत बाहर हो जायगी। 

About this post in Hindi-Roman and English

vikaasvadd padhhaane ke liye jeev-vigyaan ke teacher Scopes per mukdma chalaayaa gayaa. is chitthi mein isee kee charchaa hai. yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

Scopes was tried for teaching Evolution in his class. This post talks about the same. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक चिन्ह

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कुमाराकॉम पक्षीशाला में

कुमाराकॉम में, एक पक्षीशाला है। इस चिट्ठी में इसी की चर्चा है।

कुमाराकॉम में, एक पक्षीशाला है। हम लोग, सुबह वहां गये थे। पक्षीशाला लगभग १०० एकड़ में है इसमें ४० एकड़ की झील है। यही हमें वहां बताया गया था हांलाकि विकिपीडिया में इस पक्षीशाला का क्षेत्रफल कम लिखा है।

झील में, हमने नाव से यात्रा की। यह नाव मोटर-बोट नहीं थी । इसे लोग डंडो की सहायता से चला रहे थे।


पक्षीशाला में सुबह के समय घूमना बेहद सुखद था। दृश्य भी सुन्दर था और मौसम भी।

यहां पर हमें कई तरह के पक्षी देखने को मिले। हमारे साथ हमारा गाइड भी था वह हमें उनके नाम बता रहा था। हमने वहां इतने पक्षी देखे कि मुझे सबका नाम याद नहीं रहा पर जिनके नाम याद है वे हैं


Pond Heron, Purple Heron, Stork billed Kingfisher, White breasted kingfisher, cormorant, Bronze winged Jacana, Terns, Openbill Stork, Darter (Snake bird)…

मुझे इनके हिन्दी में नाम नहीं मालुम हैं इसलिये नहीं लिख पा रहा हूं। लेकिन कुछ के चित्र आप इस चिट्ठी पर देख सकते हैं।

इस चिट्ठी के चित्र में, विदेशी महिला जिस तरह की नाव में सैर कर रही है हम भी उसी तरह की नाव में गये थे।


यहां-वहां एक जगह कुछ लोग झील के अन्दर से मिट्टी निकाल रहे थे। मुझे यह कुछ अजीब लगा। मेरे पूछने पर गाइड ने बताया कि यह अन्दर से सिल्ट (silt) निकाल रहे हैं। यह खेती के लिए उपयोगी होती है। यह लोग इसे किसानों को बेचकर अपनी जीविका चलाते हैं।

इस श्रंखला की अगली चिट्ठी में चलेंगे त्रिवेन्दम और बात करेंगे, रास्ते की।

कोचीन-कुमाराकॉम-त्रिवेन्दम यात्रा

क्या कहा, महिलायें वोट नहीं दे सकती थीं।। मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता।। हिन्दी चिट्ठकारों का तो खास ख्याल रखना होता है।। आप जितनी सुन्दर हैं उतनी ही सुन्दर आपके पैरों में लगी मेंहदी।। साइकलें, ठहरने वाले मेहमानो के लिये हैं।। पुरुष बच्चों को देखे – महिलाएं मौज मस्ती करें।। भारतीय महिलाएं, साड़ी पहनकर छोटे-छोटे कदम लेती हैं।। पति, बिल्लियों की देख-भाल कर रहे हैं।।कुमाराकॉम पक्षीशाला में।।

हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
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यात्रा विवरण पर लेख चिट्ठे पर अन्य चिट्ठिया


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kumarkom mein pkshishaala hai. is chitthi mein, usee kee charchaa hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.


There is bird sanctuary at Kumarakom. This post talks about the same. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
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न्यायालय ५ बजे बन्द होता है

This article is about inquiry being done against Ms. Sharon Keller Principal Judge Criminal Appellate Court Texas for refusing to keep the court open for urgent matter in death row appeal.
yeh chitthi sushree sharon keller, mukhay nayayadhish criminal apeelee nayayalay texas ke khilaaf chal rahee inquiry ke baare mein hai. unhone nyayalay ke band hone ke samay ke baad fansee kee apeal ke liye nayayalay ko khule rakhane se manaa ker diyaa.
यह चिट्ठी सुश्री शेरन केलर मुख्य न्यायधीश क्रिमिनल अपीली न्यायालय, टेक्साज़ के खिलाफ चल रही जांच के बारे में है। यह जांच इस लिये चल रही है कि उन्होंने फांसी के तख्ते पर खड़े अभियुक्त के लिये, न्यायालय को उसके बन्द होने के समय के बाद, खोले रखने के लिये मना कर दिया।

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बाप रे बाप, हिन्दुवों के इतने भगवान – उलझन नहीं होती?

लीसा से मेरी मुलाकात वियाना में कॉन्वेंट में हुई थी। मैंने वायदा किया था कि उसके और मेरे बीच बीच ई-मेल की चर्चा करूंगा। यह चिट्ठी उसमें से एक है।

हिन्दू धर्म जीने का तरीका है और उन्हीं तरीकों को आसानी से समझने के लिये कथायें और देवी देवाताओं को रचा गया है। यही बात इस चिट्ठी में समझायी गयी है।

गुटन टाग (Guten Tag!) (नमस्ते), अंकल
आप कैसे हैं। मैं माफी चाहूंगी कि मैंने बहुत दिन से आपको कोई ईमेल नहीं लिखी। मैं स्कूल में व्यस्त रही।


हमारी कक्षा के विद्यार्थी पिछली सर्दी, आयरलैंड (Ireland) गये थे। हम लोग दिन में घूमते थे। शाम को पब भी जाते थे। वहां का मौसम बरसाती था और बहुत जोर से हवा चलती थी। वहां बहुत ठंडक थी। आप तो उसे बिलकुल सहन नहीं कर पाते क्योंकि मैं भी वहां बर्फ से जम गयी।

यह हमारे क्लास विद्यार्थियों का आयरलैण्ड में खींचा चित्र है। क्या आप मुझे पहचान सकते हैं।

हम लोग आज कल स्कूल में हिन्दू धर्म के बारे में पढ़ रहें हैं। शायद आप भी हिन्दू हैं। क्या आप मुझे हिन्दू मज़हब (religion) के बारे में बतायेंगे क्योंकि मैं इसे एक सच्चे हिन्दू से जानना चाहती हूं न कि ईसाई टीचर से, जो कभी भारत नहीं गयी।



क्या हिन्दू अन्य धर्मों की पवित्र पुस्तकें जैसे कुरान, बाईबिल पढ़ते हैं?


आप लोग इतने भगवान पर कैसे विश्वास कर लेते हैं? क्या यह आपको उलझन में नहीं डालता? हम तो केवल एक ही भगवान पर विश्वास करते हैं।


लीसा



प्यारी लीसा
तुम्हारी प्यारी ईमेल मिली, अच्छा लगा। यह सच है कि मुझे ठन्ड अच्छी नहीं लगती और मुझे आयरलैण्ड में अच्छा नहीं लगता।


तुम तो सबसे खास, सबसे अलग हो। चित्र में भी सबसे अलग – छाता लिये खड़ी हो।


मैं जन्म से हिन्दू हूं पर लालन-पालन, अपने वातावरण, और कर्म से, अज्ञेयवादी हूं।


हमारा देश धर्म-निरपेक्ष (secular) है। लेकिन पश्चिमी देशों और हमारे देश और की धर्म-निरपेक्षता में अन्तर है। पश्चिमी देशों में धर्म-निरपेक्षता का अर्थ है कि मज़हब (religion) को राज्य से दूर से रखो। हमारे यहां इसका अर्थ है कि सबका आदर करो। इसलिये राजकीय समारोह या शोक में सब मज़हब (religion) के लोग आते हैं और सारे मज़हब के अनुसार पूजा की जाती है। हमारे स्कूलों में भी सारे मज़हबों (religion) के बारे में पढ़ाया जाता है। इस कारण, मुझे सारे मज़हबों के बारे में थोड़ा बहुत ज्ञान है।


हिन्दुओं के अनुसार भी भगवान एक ही है, वह सर्वशक्तिमान है, वह हम सब, यहां तक कण कण में है – सब उसी के रूप हैं।


हिन्दू धर्म, जीवन जीने का तरीका है। इन तरीकों को समझाने के लिये, अलग-अलग कथाऐं रची गयीं। उनमें देवी देवाताओं का समावेश किया गया ताकि लोग उन्हें आसानी से समझ सकें, उस पर श्रद्धा करें।


तुमने अंग्रेजी की कहावत सुनी होगी,

  • United we stand, divided we fall, या
  • Union is strength, या
  • A house divided cannot stand.

यह तीनों मुख्य रूप से बताती हैं कि शक्ति, संगठन में है। साथ चलोगे तो हमेशा जीत का सेहरा बंधेगा―अलग-थलक रहोगे तो दुश्मन पर विजय नहीं हासिल कर सकोगे। इस तरह की बात, हर सभ्याताओं में है। हांलाकि, उसका रूप अलग है।


तुमने ईसप की कहानियां पढ़ी होंगी। इसी बात को उसने अपनी दो कहानियों, ‘चार बैल और शेर’ (The Four Oxen and the Lion) एवं ‘छड़ियों का गट्ठा’ (The Bundle of Sticks) में बतायी है। इसी बात को समझाने के लिये हिन्दू ऋषियों, मुनियों ने देवी दुर्गा को की कथा बतायी।


हिन्दुओं में, देवी दुर्गा शक्ति का रूप हैं और वे शक्ति की देवी के रूप में पूजी जाती हैं। हमारे पुराणों में उनका वर्णन है – उनके अनेक सिर हैं, अनेक हाथ हैं। प्रत्येक हाथ में वह अस्त्र-शस्त्र धारण किए हैं। सिंह, जो साहस का प्रतीक है, उनका वाहन है। ऐसा क्यों है? तुम, यह उनकी कथा पढ़ कर समझ सकोगी।

चित्र विकिपीडिया से



महिषासुर नामक एक दानव था। वह अत्याचारी था। देवता, महिषासुर से संग्राम में हार गये और उनका ऐश्वर्य, श्री, और स्वर्ग सब छिन गया तब वे दीन-हीन दशा में वे भगवान के पास पहुँचे। भगवान के सुझाव पर सबने अपनी सभी शक्तियॉं (शस्त्र) एक स्थान पर रखीं। शक्ति के सामूहिक एकीकरण से दुर्गा उत्पन्न हुई। उन्होंने ने महिषासुर का वध किया। वे महिषासुर मर्दनी कहलायीं।



देवी दुर्गा, संघटन की प्रतीक हैं। इसलिये उनके रूप का वर्णन है कि उनके सहस्त्र सिर और असंख्य हाथ हैं। यह वास्तव में संघटक के सहस्त्रों सिर और असंख्य हाथ हैं। यह कथा, एकता के महत्व को समझाने के लिये बतायी गयी है। देवताओं को जीत तभी मिली जब उन्होने अपनी ताकत एकजुट की।



इसी तरह से, ऋषि मुनियों ने अलग अलग महत्व को समझाने के भिन्न भिन्न देवी देवता को गढ़ा और उनकी कथायें बनायी।


आशा है तुम समझ सकी होगी कि इतने भगवान के रूप और कथायें होने का बाद भी, हिन्दू उलझन में क्यों नहीं पड़ते।


उन्मुक्त


आप शायद अगस्त २००९ में न्यूज़वीक में, हिन्दू धर्म से संबन्धित लेख ‘अब, हम सब हिन्दू हैं’ (We Are All Hindus Now) पढ़ना चाहें।

पुनः लगता है कि इस चिट्ठी में कुछ बातें स्पष्ट नहीं हो पायीं जैसा कि मेरे अज्ञात मित्र की टिप्पणी से लगता है। मैं यहां उसे स्पष्ट करना चाहूंगा।

  • मैंने यह चिट्ठी, अपनी छोटी ऑस्ट्रियन ईमेल मित्र की हिन्दू धर्म के बारे में जिज्ञासा शान्त करने के लिये, उसे लिखा था। मैंने उसे, अपनी समझ के अनुसार, हिन्दू धर्म के बारे में लिखा था। बाद में, मुझे लगा कि शायद और लोग भी इसे पढ़ना चाहें, इस लिये इसे हिन्दी में अनुवाद कर पोस्ट कर दिया।
  • इसी बीच न्यूज़वीक का लेख भी पढ़ लिया था चूंकि वह हिन्दू धर्म के बारे में है इसलिये उसकी भी लिंक दे दी।
  • मेरी चिट्ठी में स्पष्ट लिखा है कि मैं अज्ञेयवादी हूं। मैं पूजा-पाठ में नहीं विश्वास करता। मेरी मां भी विश्वास नहीं करती थीं। यदि आप धर्म के बारे में, मेरे विचार जानना चाहते हैं तो आप मेरी चिट्टी मेरे जीवन में धर्म का महत्व में पढ़ सकते हैं। यह मेरी सबसे प्रिय चिट्ठी है। इसे मैंने अनुगूंज के लिये लिखा था।
  • धर्म के बारे में मेरी लिखी चिट्ठी कुछ लोगों को पसन्द आती होगी क्योंकि यह मुझे कभी कभी अन्तरजाल कई नामों से मिल जाती है। उसमें एक जगह यह भी है।

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yeh post ee-paaati shrnkhla kee kari hai. yeh nayee peedhee ko smjhne, unse dooree kum karne, aur unhein jeevan ke moolyon smjhaane ka praytna hai. is chitthi mein bataayaa gayaa hai ki hindu dharma jeene ka tareeka hai aur usee ko samjhaane ke liye devi devataaon ko rachaa gayaa hai. yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is part of e-paati (e-mail) series and is an attempt to understand the new generation, bridge the between gap and to inculcate right values in them. This post narrates that Hinduism is way of life and in order to explain it different stories , gods, goddess have been created. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
Aesop, Aesop’s fables, United we stand, divided we fall, secularism, Durga, Hinduism,
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पति, बिल्लियों की देख-भाल कर रहे हैं

 ताज गार्डन रिट्रीट, कुमाराकॉम में मेरी मुलाकात कई लोगों से हुई। इस चिट्ठी में ऑस्ट्रेलियायी महिलाओं से मुलाकात और महिला सशक्तिकरण के एक दूसरे रुप की चर्चा है।

कुमाराकॉम में भी अप्रवाही जल है। शाम के समय हमने वहां पर नाव से सैर की और सूर्यास्त का नज़ारा लिया।


नाव पर मेरी मुलाकात,आस्ट्रेलिया से आयी दो महिलाओं से भी हुई। हम लोग कुमाराकॉम से त्रिवेन्द्रम  जाने वाले थे जब कि वे लोग त्रिवेन्द्रम से आ रही थीं और इसके बाद कोचीन जाने वाली थीं। वहां से वे ऊटी जा रही थीं।


शाम को गर्मी और उमस थी। मैं नेकर पहने था। उस महिला ने कहा कि वह भी नेकर पहनना चाहती थी पर उनसे बताया गया था कि वे भारत में ऐसे कपड़े न पहने। मैंने बताया,

‘भारत में पुरूष लोग नेकर पहन लेते हैं पर महिलाएं नहीं। हांलाकि इस होटल में नेकर पहन कर या नहाने की ड्रेस पहन कर घूमने में कोई एतराज़ नहीं करेगा।‘

उसने कहा,

‘तब तो मैं भी कल नेकर ही पहनूगी।‘



यह दोनो महिलाएं निरोषध चिकित्सक (Physiotherapist) थीं। उनके मुताबिक ऑस्ट्रेलिया में इस पेशे में पैसा बहुत कम है शायद आने वाले समय में इसमें पैसा मिले।


इन दोनों ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं के पति  साथ में नहीं थे न ही उनके बच्चे साथ थे। मैंने पूछा, कि क्या आपके पति ऑस्ट्रेलिया  में बच्चों की देखभाल करने के लिए रूक गये हैं। उसने कहा, नहीं। हमारे बच्चे  बहुत बड़े हो गये हैं। उनकी शादी भी हो गयी है। वे लोग अलग रहते है। उसके बाद बताया,

‘हमने कई बिल्लियां पाल रखी हैं। हमारे पति ऑस्ट्रेलिया में रहकर  बिल्लियों की देखभाल कर रहे हैं और हम दोनों भारत में मस्ती मारने आयें हुए हैं।‘



यह भी महिला सशक्तिकरण का एक अलग रूप है। पति ऑस्ट्रेलिया में बिल्लियां देखें और पत्नियां भारत घूमे।

रात्रि भोज पर, मेरी मुलाकात फिर से इन महिलाओं से हुयी। शाम को नाव की सैर करते समय वे नेकर तो नहीं पहने थी पर  अनौपचारिक परिधान पहने थीं। रात के भोजन पर वे एकदम औपचारिक परिधान पहन कर आयीं थीं। मैंने उनकी तारीफ की वे बोली,

‘रात्रि का भोजन तो खास होता है। इसलिए ये खास परिधान।‘

रात्रि भोज पर कुछ युवतियां केरल के पारम्परिक नृत्य कर रही थी। केरल में, परम्परागत परिधान में  सफेद या हल्के पीले रंग की साड़ी पहनी जाती है। जिसमें सुनहरा किनारा होता है। वे इसी तरह की साड़ी पहने थीं। नृत्य के पहले वे मलयालम में उस नृत्य के बारे में बताती थी। यह  हमारे या वहां पर भोजन कर रहे किसी के समझ में नहीं आ रहा था। मैं इनकी मुख्य नृतकी के पास गया और उससे कहा कि वह अंग्रेजी में हमें इसके बारे में बताये ताकि हम उसे ठीक से समझ सके। अगले नृत्य के पहले उसने ऎसा ही किया पर उसकी अंग्रेजी बहुत अच्छी नहीं थी । मै इतना ही समझ पाया कि वह नृत्य शिव वंदना से जुड़ा है।


कुमाराकॉम में, एक पक्षीशाला है। इस श्रंखला की अगली कड़ी में वहीं घूमने चलेंगे।

कोचीन-कुमाराकॉम-त्रिवेन्दम यात्रा

 क्या कहा, महिलायें वोट नहीं दे सकती थीं।। मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता।। हिन्दी चिट्ठकारों का तो खास ख्याल रखना होता है।। आप जितनी सुन्दर हैं उतनी ही सुन्दर आपके पैरों में लगी मेंहदी।। साइकलें, ठहरने वाले मेहमानो के लिये हैं।। पुरुष बच्चों को देखे – महिलाएं मौज मस्ती करें।। भारतीय महिलाएं, साड़ी पहनकर छोटे-छोटे कदम लेती हैं।। पति, बिल्लियों की देख-भाल कर रहे हैं।।

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  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में – सुन सकते हैं।
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यात्रा विवरण और महिला अधिकार पर लेख चिट्ठे पर अन्य चिट्ठियां


About this post in Hindi-Roman and English

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At  Taj Garden Retreat at Kumarakom, we met a two ladies from Australia. This post talks about them and a different shade of women empowerment. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
Kumarakom, Taj Garden Retreat, कुमाराकॉम, कानून, सूचना , , ,

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मैंने उसे थूकते हुऐ देखा है

विकासवाद का क्या सबूत है, मिसिंग लिंक कहां है – इस चिट्ठी में इसी की चर्चा है।

इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,

  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें। यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम लिखा है वहां चटका लगायें। इन्हें डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।

सृजनवादियों की मुख्य आपत्ति है, 

  • यदि कभी मानव और बन्दर  के पूर्वज एक थे तो उसका कोई सबूत होना चाहिये।  
  • इस तरह का कोई सबूत नहीं है। 

इसलिए विकासवाद के सिद्धांत पर विश्वास नहीं  किया जा सकता है।


लेकिन सच तो यह है कि यह लोग सबूत देखना नहीं चाहते है। इन लोगों ने अपनी आंखों में पट्टी बांध रखी है। विकास करोड़ो साल में होता है उसे एक जीवन में देख पाना नामुमकिन है पर यदि आप किसी वस्तु को देख नहीं सकते तो क्या वह सच नहीं हो सकती। किसने देखा है कि पृथ्वी सूरज के चारों तरफ घूमती है। इसका मतलब यह नही कि यह सच नहीं है। 


अलग-अलग जगह पाये गये जीवाश्म (fossils), विकासवाद के सबूत हैं। यह सबूत पुरा-जीवाश्म संग्रहालय में देखे जा सकते है। यह स्पष्ट रूप से बताते हैं कि किस तरह से सारे प्राणी जुड़े है। डीएनए टेस्टिंग से भी पता चलता है कि प्राणि-जगत आपस में जुड़ा है।


किसी भी चीज की उम्र का वैज्ञानिक पता लगाने का तरीका कार्बन डेटिंग  कहलाता है। यह बताता है कि पाये गये जीवाश्म उस समय से कहीं पुराने है जैसा कि कई मज़हबो में बताया जाता है।

आप मेरी बात पर विश्वास नहीं करते। देखिये जाने माने जीव विज्ञानी रिचार्ड डॉकिंगस् और वेन्डी राइट ईसाई धर्म की महिला प्रचारक के बीच बातचीत। इसी विडियो के ऑडियो का कुछ भाग मैंने अपने पॉडकास्ट में जोड़ा है।

 
इस विडियो में डॉकिंगस् बता रहे हैं कि व्हेल, डॉलफिन‌, और दरियायी घोड़ा किस तरह से जुड़े हैं और उनके बीच के क्या सबूत हैं।

स्टीव मिर्स्की (Steve Mirsky) ने, जून २००९ की साईंफिक अमेरिकन (Scientific American) में, एक लेख Are Dog Breeds Actually Different Species? नाम से लिखा है। वे कुत्तों की प्रजातियों का संदर्भ देते हुऐ मनमौजी तरीके से विकासवाद की बात करते हैं।  सृजनवादियों की इस आपत्ति की तुलना एक मुकदमें से करते हुऐ लिखते हैं,

यह चित्र  साईंफिक अमेरिकन के उसी लेख से है

‘The claim makes me think of the trial where a man was charged with biting off another man’s ear in a bar fight. An eyewitness to the fracas took the stand. The defense attorney asked,

“Did you actually see with your own eyes my client bite off the ear in question?”

The witness said, “No.”

The attorney pounced:

“So how can you be so sure that the defendant actually bit off the ear?”

To which the witness replied,

“I saw him spit it out.”

We have the fossils, the intermediate forms, the comparative anatomy, the genomic homologies—we’ve seen what evolution spits out.’

एक बार एक व्यक्ति पर शराब खाने में हुई लड़ाई में दूसरे व्यक्ति के कान काटने के जुर्म पर मुकदमा चल रहा था। जब चश्मदीद गवाह ने गवाही देना शुरू किया तब बचाव पक्ष के वकील ने पूछा,

“क्या तुमने मेरे मुव्वकिल को कान काटते देखा?”

चश्मदीद गवाह ने इसका उत्तर नहीं में दिया। इस पर बचाव पक्ष के वकील ने पूछ फिर तुम कैसे कह सकते हो कि मेरे मुव्विकल ने कान काटे हैं। चश्मदीद गवाह ने उत्तर दिया,

“मैंने उसे कान को थूकते हुऐ देखा है।”

हमारे पास जीवाश्म हैं, जीवों की बीच की कड़ियां हैं,  तुलनात्मक दैहिक गठन संबंधी शारीरिक  रचनाऐं हैं, वन्शाणुवीय  साम्यताएं हैं – यह वह है जो विकासवाद ही हमें बता सकती है, यही उसका प्रमाण हैं।’

हांलाकि इसका अंग्रेजी का ही तर्जुमा ठीक बैठता है हिन्दी अनुवाद नहीं।

Creationism Pictures, Images and Photos

इस श्रंखला की अगली कड़ी मे हम बात करेंगे, बीसवीं शताब्दी के सबसे प्रसिद्ध मुकदमें की। यह अमेरिकी इतिहास के शर्मनाक मुकदमें की तरह भी जाना जाता है। हम चर्चा करेंगे कि क्या हुआ था उसमें, क्या था उसमें।

यह कार्टून मेरा बनाया नहीं है। फ्लोरिडा सिटिज़न फॉर साइंस (Florida Citizen for Science) ने लोगों के बीच विज्ञान को लोकप्रिय बनाने, उसे आसानी से समझाने के लिये स्टिक साइंस कंटेस्ट (Stick Science Contest) किया। मैंने यह वहीं से लिया है। इस कार्टून को प्रथम पुरुस्कार मिला है। चित्र को बड़ा करने के लिये उस पर चटका लगायें।

डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े

भूमिका।। डार्विन की समुद्र यात्रा।। डार्विन का विश्वास, बाईबिल से, क्यों डगमगाया।। सेब, गेहूं खाने की सजा।। भगवान, हमारे सपने हैं।। ब्रह्मा के दो भाग: आधे से पुरूष और आधे से स्त्री।। सृष्टि के कर्ता-धर्ता को भी नहीं मालुम इसकी शुरुवात का रहस्य।। मुझे फिर कभी ग़ुलाम देश में न जाना पड़े।। ऐसे व्यक्ति की जगह, बन्दरों से रिश्ता बेहतर है।। विकासवाद उष्मागति के दूसरे नियम का उल्लंघन करता है।। समय की चाल – व्यवस्था से, अव्यवस्था की ओर।। मैंने उसे थूकते हुऐ देखा है।।

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This post talks about evidence in favour of evolution – the missing link. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक चिन्ह

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अरे! ऐसा भी चित्र बनाया जा सकता है?

स्कॉट वेड गन्दी कार की खिड़कियों के शीशे में सुन्दर चित्र बनाते हैं। मैं नहीं समझता था कि कोई इस तरह के चित्र भी बना सकता है। उनकी कार में बने चित्रों को देख कर, अक्सर लोग अपनी कार से उतर कर चित्र खींचने आ जाते हैं। उनके बनाये गये नीचे के चित्र ने, मुझे [...]

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अन्तरजाल की मायानगरी में

This post in Hindi (Devnagri) talks about history, future of the Internet and web. It also discusses problems and their solutions arising therein.
is hindi (devnaagri) kee chitthi mein, anterjaal ke itihaas aur bhvishaya ke baare mein charchaa hai. yeh vhaan per utth rahee mushkilon aur unke samaadhaan ke baare mein bhee charchaa kartee hai.

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अंकल, क्या आप मुझे इसका पप दे सकते हैं

मैंने दस साल पहले जरूर कोई अच्छा काम किया होगा क्योंकि तभी ईश्वर ने मुझे मेरे जीवन का सबसे अच्छा उपहार दिया।

टॉमी का जन्म अप्रैल १९९९ में हुआ था। वह हमारे पास जून १९९९ में आया। हम उसे दिल्ली के एक डॉग केनल से ले कर आये थे। उसने न केवल हमारे जीवन में खुशियां भरी पर उन बहुत से लोगों के जीवन में भी जो हमारे अपने हैं हमसे करीब हैं और बहुत से अजनबी लोगों के भी। उसके पिल्ले जो कि अब स्वयं बड़े हो गये हैं, उनके जीवन में खुशियां बिखेर रहें हैं।

मैंने अपने जीवन में बहुत से नस्ल के कुत्ते पाले हैं देसी, एलसेशियन, लेब्रॉडर, पॉम, डोबरमैन, बॉक्सर पर टॉमी गोल्डन रिट्रीवर था, उसकी बात ही अलग थी। वह इन सबसे अलग क्लास में था। शायद इसलिये गोल्डन रिट्रीवर न केवल दुनिया में सबसे लोकप्रिय पारिवारिक कुत्ते माने जाते हैं पर रजिस्ट्रेशन के मुताबिक हैं भी। मालुम नहीं, मेरे किस जीवन का दोस्त था जो इतने दिन बाद मिला।


मेरे घर के सामने से अनगिनत कारें निकलती हैं पर मजाल कि वह उठे भी पर मेरी कार जब २०० मीटर दूर भी हो तो उसकी पूंछ का हिलना और भौंकना देखने काबिल होता था। अक्सर पहली बार हमारे घर में आये लोगों को अजीब लगता था कि एकदम से उसे क्या हो गया पर कुछ देर बाद समझ में आता था जब मेरी कार गेट के अन्दर आती थी।

मैं जब भी घर के अन्दर आता, वह हमेशा गेट पर पूंछ हिलाते और भौंकते ही मिलता था। लगता था कि वह दिन भर मेरे इंतजार में ही बैठा रहता था। मुन्ने की मां को हमेशा मुझसे जलन होती थी उसके आने पर पूंछ तो हिलाता था पर गेट पर पहुंच कर भौंकता नहीं था।

मैं कभी कभी मुन्ने की मां की कार लेकर भी बाहर जाता था पर वह न केवल कार की आवाज ही समझता था पर यह भी कि उसमें कौन है। यदि मैं उसमें हूं तो उसका बर्ताव वही होता था जो कि मेरी कार के लिये। शायद इसीलिये मुन्ने की मां को लगता था कि वह मेरे तीन प्रेमों में से एक था और इसीलिये क्रिकेट की नेटवेस्ट की सिरीस् जीतने के बाद वह भी हमारे साथ आइसक्रीम खाने गया था।

टॉमी का पहला काम था प्रतिदिन सुबह गेट से अखबार, पत्रिकायें लाना। वह पत्र, निमत्रंण कार्ड भी लाता था। अक्सर मैं डाकियों से कहता कि पत्र टॉमी को दे दें। वे उसे आश्चर्य से देखते फिर और भी आश्चर्य में डूबते जब वह चिट्ठी मुझे ला कर देता। हां उसे इसके लिये हमेशा एक बिस्किट मिलता।

मुझे याद है कि कुछ साल पहले हमारे कस्बे में लिओनिडस् उल्कापात (leonids meteor shower) सबसे अधिक था। हम रात को ढाई बजे नदी के किनारे इसे देखने गये थे। टॉमी भी हमारे साथ था। उसे साथ रखने में, मुझे विश्वास रहता था कि वह मुझे कुछ भी गड़बड़ी से बचा लेगा।



पिछले कुछ सालों को छोड़ कर, कस्बे में हुऐ सारे डॉग शो में, उसने भाग लिया। वह शो राष्ट्रीय स्तर का, या राज्य स्तर का, या फिर जिले स्तर का, उसे प्रत्येक में कोई न कोई पुरुस्कार मिला।

डॉग शो में, वह बच्चों के बीच वह सबसे लोकप्रिय होता था। बच्चे अक्सर मुझसे पूछते कि क्या वे उसे छू सकते हैं। मेरे जवाब होता कि न केवल वे उसे छू सकते हैं पर चूम भी सकते हैं। शायद ही कोई बच्चा होगा जिसने इसके गले में हाथ डाल कर इसे प्यार न किया हो। वे हमेशा मुझसे कहते,

‘अंकल, क्या आप मुझे इसका पप दे सकते हैं।’

मेरा जवाब होता जरूर पर पहले तुम्हारी मां को उसके सेवा करने की जिम्मेवारी लेनी होगी। बहुत कम मांएं यह काम अपने हाथ में लेने के तैयार होती।

कुछ लोग, कुत्तों की मेटिंग पसन्द नहीं करते हैं। वे इसके लिये मना करते हैं। मुझे यह ठीक नहीं लगता। मेरे विचार से यह प्राकृतिक है। इसकी अनुमति देनी चाही।

टॉमी के पास, न केवल मेरे कस्बे से, पर दूर दूर की जगहों से लोग मेटिंग के लिये कुत्तियां ले कर आते थे। आप चाहें तो इसके लिये पैसा ले लें या फिर अपनी पसन्द का पिल्ला। हमें पैसे की जरूरत नहीं। ईश्वर ने हमें बहुत दिया। हमने हमेशा पप ही लिया। उसे, उन्हें उपहार में दिया जो हमारे दिल के पास हैं। इसी तरह से टॉमी उनके जीवन में वह खुशियां दे पाया जिसकी उन्हें आशा भी न थी।

टॉमी को गेंद लाना पसन्द था। आप गेंद फेंकते फेंकते थक जायेंगे पर वह गेंद लाते नहीं। कुछ साल पहले मुन्ना अमेरिका से उसके लिये एक गेंद फेंकने वाला लाया। इसमें गेंद को हाथ से छूना नहीं पड़ता गेंद उसमें फंसायी जा सकती है और आसानी से फेंकी जा सकती है। जब से वह आया तब से कुछ राहत आयी।

जिन कुत्तों के पूंछ में बाल होते हैं उनका पिछला भाग बहुत साफ नहीं रह पाता है। उसे खास तरह से साफ करना होता है क्योंकि बाल के कारण कुछ गन्दगी फंसी रह जाती है जिससे बिमारी हो जाती है। हम यह सफाई करते थे पर शायद ठीक प्रकार से नहीं। शायद यही कारण था कि उसके पिछले भाग में एक ट्यूमर हो गया था। हमने उसका ऑपरेशन करवाया था पर यह कुछ मुश्किल करता था। लेकिन वह ठीक था।

छः दिन पहले मुझे लगा कि उसे खड़े होने पर मुश्किल हो रही है। अगले दिन वह खड़ा नहीं हो पा रहा था। उसे मुश्किल होने लगी। हम उसे सुबह और शाम डाक्टर के पास ड्रिप लगवाने के लिये ले जाते थे। कल जब वह ड्रिप लगवा कर वापस आया तो तकलीफ में था। हमें लगा कि ड्रिप से उसे तकलीफ होती है और फिर ड्रिप न लगवाने की सोची।

टॉमी की हालत बिगड़ रही थी। वह उठ नहीं पाता था, इसलिये गन्दा भी हो गया और बदबू भी करता था। मैंने कल शाम को उसे पाउडर लगाया, ब्रश किया। वह महकने लगा, जंच रहा था, बिलकुल हीरो की तरह।

मैंने उसे, शाम को ही बाहर लॉन में लिटा दिया। रात को अन्दर किया। उस समय वह जीवित था। कुछ देर बाद, मैं उसे दूध पिलाने के लिये गया। उसके मुंह के चारो तरफ खून था। वह वहां चला गया था जहां से कोई वापस नहीं आता।

मैंने उसे पुनः साफ किया। रात में ही, हम ने उसे, घर में सामने की ओर, लॉन के बगल में, चूने और नमक के साथ गाड़ दिया। उसकी आखें फाटक और घर की तरफ – हमारी चौकीदारी करते हुऐ। वह हमेशा इसी तरह से बैठता था – एक नजर मुझ पर दूसरी नजर बाकी सारी जगह पर – कहीं कोई मुझ पर हमला न कर दे। मैं जब घर में होता, वह मेरा पीछा, साये की तरह करता।

कितनी यादें हैं कितने सुनहरे पल हैं, कितनी खुशियां है। मेरे लिये सब लिखना संभव नहीं।

हे ईश्वर, तुम्हें धन्यवाद कि तुमने मुझे ऐसा उपहार दिया।

अलविदा मेरे मित्र, मित्रता दिवस पर तुम्हें सलाम। तुम हमेशा मेरे जहन में, मेरी यादों में रहोगे। मेरे साथ इतने सुनहरे पल बिताने का शुक्रिया।

पुनः हमने टॉमी की याद में, उसकी कब्र के दो तरफ, बेला और काजू का पेड़ लगाया है ताकि आने वाले समय में, उसकी महक और याद, हमेशा रहे।

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