February 5, 2012
'क्या यहां अश्वेत लोग भी जूरी पर बैठते हैं?'उस वकील ने जवाब दिया,
'Yes, it is something new. This is the first time in our state we have had a nigger on a jury and it's all on account of a son-of-a-bitch named Samual Leibowitz from New York. He came down to Alabama a few years ago to try a case and somehow he got to the Supreme Court in Washingtone, and damned if we haven't had to put niggers on our juries over since.
हां यह कुछ नया है यह पहली बार है जब कोई अश्वेत व्यक्ति जूरी में है। यह सब उस उल्लू के पट्ठे सैमुएल लाईबोविट्ज़ के कारण हुआ जो कि कुछ साल पहले ऎलाबामा में एक मुकदमा करने आया था फिर उसने अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय से कानून बदलवा दिया अब हमें अश्वेत लोगों को जूरी पर रखना पड़ता है।
'अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है।'इस पर अश्वेत लड़कों को जेल भेज दिया गया। इन पर बलात्कार का मुकदमा स्कॉटस्बॉरो में चला। इसलिए यह लड़के स्कॉटस्बॉरो बॉयज़ नाम से, और यह मुकदमा स्कॉटस्बॉरो बायॉज़ ट्रायल के नाम से जाना जाता है।
नेपोलियन की तलवार में जड़ा – भारतीय हीरा
इस चिट्ठी में रीजेंट हीरे की चर्चा है।यह चित्र पेरिस के लूवर संग्रहालय के इस...
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हमारे यहां भरतपुर से अधिक पक्षी आते हैं
इस चिट्ठी में, मथुरा में स्थित, इंडियन आयल रिफ़ाइनरी की चर्चा है। मथुरा में एक...
दूसरे ग्रहों पर जीवन, उन पर बसेरा – कल्पना आर्थर सी क्लार्क की
इस चिट्ठी में, 'डिसकवरी साइंस' (Discovery Science) चैनल पर आ रही 'प्रॉफेटस् ऑफ साइंस फिक्शन'...
महिलायें जमीन पर लोट रही थीं
इस चिट्ठी में, गोकुल-मथुरा में रमण रेती आश्रम की चर्चा है। रमण रेती पर बालू...
सौ साल पहले…
इस चिट्ठी में, आज के दिन सौ साल पहले साहस के कारनामे की चर्चा है।
This...
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आगे का हाल जानने का इंतजार है। आज आपके ब्लॉग पर काफ़ी दिन बाद आया और पोस्ट पढ़ने के बाद बहुत देर से सोच रहा हूं कि इतनी तरतीब से लिखे और पेश किये चिट्ठे हम लोग क्यों नहीं पढ़ते। सच यह सोच रहा था।
अनूप जी, मेरी चिट्ठियों के बारे में अच्छे विचार रखने के लिये शुक्रिया।
इस चिट्ठे पर चिट्ठियां तो मेरी हैं पर यह चिट्ठा मेरा नहीं है। यह मेरे किसी अज्ञात मित्र ने शुरू किया है। मैं उससे अभिभूत हूं पर नहीं जानता कि वह कौन है, कहां का है, क्या करता है, और यह चिट्ठा क्यों शुरू किया? रवि जी ने मेरे इस अज्ञात मित्र के बारे में आपके बारे में जरा सामने तो आओ छलिए… नाम से एक चिट्ठी भी लिखी है। फिर भी, कुछ पता नहीं चला।
मुझे यह चिट्ठा अपने तीन चिट्ठों – उन्मुक्त, छुट-पुट, और लेख से ज्यादा पसन्द आता है क्योंकि यह इन तीनो की चिट्ठियों को एक जगह रखता है।