February 5, 2012
'इस गाड़ी' में प्राइवेट नम्बर क्यों है? क्या ये टैक्सी की तरह रजिस्टर्ड नहीं है? इसका बीमा टैक्सी की तरह है या नहीं?'मैंने उसे बताया कि यदि इस गाड़ी का बीमा टैक्सी की तरह नहीं है तो दुर्घटना हो जाने पर हम सब मुश्किल में पड़ सकते हैं। हमारे परिवार वालों को बीमा कम्पनी से पैसा नहीं मिल पायेगा। यह सुनने के बाद उसने कहा,
'इस गाड़ी का बीमा टैक्सी की तरह है और यह वैसे ही रजिस्टर्ड है। इसका नंबर टैक्सी का नम्बर है। लेकिन उसके मालिक ने इसमें एक प्राइवेट गाड़ी की तरह नम्बर पेन्ट किया है। यह इसलिए किया है ताकि लगे कि यह प्राइवेट गाड़ी है। चूंकि हम लोग कई राज्यों में जा रहे हैं इसलिये यदि ऐसा नहीं करते तो सब जगह टैक्स देना पड़ता।'मैंने कहा,
'यह तो धोखा देने की बात हुई। यह बात गलत है। आपको कोई घाटा नहीं होता क्योंकि टैक्स तो हमको देना पड़ता। आपके मालिक को इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी अपने मालिक से कहियेगा कि हमें यह बात पसन्द नहीं आयी।'उसने कहा कि इस बात को जरूर अपने मालिक से कहेगा और अगली बार ऐसा नहीं होगा। मालूम नहीं कि उसने कहा कि नहीं। यदि कहा तो क्या उसने माना।
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अपना अनुभव यही रहा है कि लगभग हर क्षेत्र में दक्षिण भरतीय उत्तर भरतियों से अधिक प्रोफेशनल हैं.. चाहे वह गाड़ी चलाना ही क्यों ना हो..
मुझे लगता है आपकी तरह सोचने वाले ग्राहक उनको बिरले ही मिलते होंगे जो टैक्स बचाने की बजाये भरने को तैयार हैं.
उसने अगर अपने मालिक से आपकी बात कही होगी तो दोनों मिल कर खूब हँसे होंगे आप पर.
समीर जी, अमेरिकन न्यायमूर्ति होल्मस्, २०वीं शताब्दी में के सबसे जाने माने न्यायमूर्ति के रूप में जाने जाते हैं। वे टैक्स संबन्धित नियमों को हमेशा कानूनी ठहराते थे। एक बार उनकी सक्रेटरी ने पूछा,
‘क्या आपको टैक्स देना बुरा नहीं लगता?’
उनका जवाब था,
‘मैं टैक्स देना पसन्द करता हूं। सरकार, समाज, सभ्यताएं इसी से चलती हैं।’
मुझे भी यही लगता है। मैं कोई भी खरिदारी करते समय बिल लेना पसन्द करता हूं ताकि दुकानदार, एक्साइस या सेल्स टैक्स न बचा पाये
hari om ! sundar vichar !