February 5, 2012
'धत्त तेरे कि, हम तो समझे थे कि वेलेंटाइन दिवस पर उन्मुक्त जी, उन्मुक्त हो कर प्रेम चर्चा करेंगे। यहां तो मालुम नहीं कहां विश्वविद्यालय के चक्कर में पड़ गये हैं।'
'कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं होती। चालू हो गये उन्मुक्त जी, ओपेन सोर्स के बारे में।'
'किसी ने सच कहा है कि बुढ़ापे की तरफ पहुंचते ही लोग सठियाने लगते हैं। उन्मुक्त जी, अधिक उम्र वाले हिन्दी चिट्ठाकार हैं। उनकी आंखें कमजोर हो गयीं हैं, २००८ में मरते मरते बचे थे - लगता है कि अब सठिया भी गये हैं। आज के रोज कोई बढ़िया सी प्यार के बारे में चिट्ठी लिखनी थी। यहां तो भाषण की बात करने लगे - भगवान ही इनका मालिक है।'
'मैं तो चला चिट्ठाचर्चा देखने। उन्मुक्त जी तो वहां मिलते नहीं हैं। लेकिन आज तो वहां बढ़िया, बढ़िया प्रेम चिट्ठियों के लिंक होंगे। यहां तो बोरियत हो रही है। मालुम नहीं क्यों, आज के दिन यह चिट्ठी प्रकाशित कर दी है।'
'The only thing that kept me going was that I loved what I did. You've got to find what you love ... the only way to do great work is to love what you do. If you haven't found it yet, keep looking. Don't settle. As with all matters of the heart, you'll know when you find it. And, like any great relationship, it just gets better and better as the years roll on.'
मैं जो भी करता हूं उससे प्यार करता हूं। इसी ने मुझे आगे चलते रहने की प्रेणना दी। तुम्हे वह तलाशना है जिससे तुम प्यार करते हो ... जीवन में किसी बड़े सफल काम को करने के लिऐ, तुम जो भी करो, उससे प्यार करो। यदि तुम्हें अपना प्यार नहीं मिला है तो उसे ढूंढो - रुको नहीं। तुम्हें मालुम चल जायगा जब वह तुम्हें मिलेगा। यह दिल के किसी भी अन्य विषय की तरह है। समय बीतते, यह किसी भी अन्य रिश्ते की तरह बेहतर होता जायेगा।
'उन्मुक्त जी, यह सब छोड़िये, यह तो बताइये कि क्या आप वह काम करते हैं जो आपके दिल के सबसे पास था?'
नेपोलियन की तलवार में जड़ा – भारतीय हीरा
इस चिट्ठी में रीजेंट हीरे की चर्चा है।यह चित्र पेरिस के लूवर संग्रहालय के इस...
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इस चिट्ठी में, मथुरा में स्थित, इंडियन आयल रिफ़ाइनरी की चर्चा है। मथुरा में एक...
दूसरे ग्रहों पर जीवन, उन पर बसेरा – कल्पना आर्थर सी क्लार्क की
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सौ साल पहले…
इस चिट्ठी में, आज के दिन सौ साल पहले साहस के कारनामे की चर्चा है।
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