February 5, 2012
'क्या स्काइप है?'साइबर कैफे के मालिक के हामी भरने पर, विदेशी ने युरोप में किसी से स्काइप पर बात की, पैसा दिया, और चलते बना। मैं अपना काम समाप्त करके चलने को ही था तभी दो व्यक्ति वहां पर आये और साईबर कैफे के मालिक से पूछा,
'मुझे अति आवश्यक संदेश हिन्दी में टाइप कराना है। क्या आप कर सकते है?'साईबर कैफे के मालिक ने कहा,
'न तो मैं हिन्दी में टाइप करवा सकता हूं न ही मैं मनाली में किसी ऐसे व्यक्ति को जानता हूं जो हिन्दी में टाइप कर सके।'मैं उनकी बात सुन रहा था। मैनें कहा,
'हिन्दी में टाइप करने में क्या मुश्किल है। यह तो बहुत ही आसान है।'मैंने उन्हें आफलाइन हिन्दी में टाइप करने कैफे हिन्दी, और आन लाइन हिन्दी में टाइप करने के लिये, गूगल ट्रास्टलिट्रेशन की सलाह दी। कैफे हिन्दी डाउन लोड किया। उसे उनके कम्पूटर पर डाला। लेकिन वह चला नहीं। शायद मैथली जी कुछ प्रकाश डालना चाहें।
| शब्दों के हिन्दी में बदलते ही उनके चेहरे प्रसन्नता से भर गये |
'आप खुद टाइप करें। मैं लिनेक्स में काम करता हूं। इसलिए मुझे गूगल ट्रांसलिटरेशन में काम करने की जरूरत नहीं पड़ती है। यही कारण है कि मैं इस पर ठीक से टाइप नहीं कर पा रहा हूं। आप ट्रायल, ऎरर से टाइप कर लें।'वे लोग बहुत ही तेजी से टाइप करने लगे और उनका काम हो गया। उनमें से एक व्यक्ति नाम छोटे लाल था। वह इंजीनियर है और दिल्ली के बिहार भवन में कार्यरत है। उन्होने मुझसे बताया,
'हम शिव भक्त हैं और हमारे शिव शिष्य परिवार नामक संस्था से जुड़े हैं। हमारे गुरू देव भी आये हैं। उन्हीं का संदेश टाइप करवाना था। आप हमारे गुरूदेव से मिल लीजिए और शिव भक्त बन जांए।'मैंने कहा,
'जैसे आप शिव भक्त है उसी तरह मैं हिन्दी का भक्त हूं । आप हिन्दी में टाइप न होने के कारण परेशान लग रहे थे। इसलिए मैने हिन्दी में टाइप करना आपको सिखा दिया। मेरे पास समय की कमी है। इसलिए आपके गुरूदेव से न मिल सकूंगा। इसके लिए आप मुझे माफ़ करें।'बाहर निकलते समय दूसरा व्यक्ति आया उसने कहा,
'आप क्यों नही शिव भक्त हो जाते हैं? यदि आप कहे तो मैं घोषणा कर दूं।'मैं अज्ञेयवादी हूं। न ही इन बातों में विश्वास करता हूं और न ही किसी ऐसी संस्था का सदस्य हूं। मुझे कुछ हिचक लग रही थी। वे इतने उत्साहित और खुश लग रहे थे कि मुझे लगा कि यदि मैं मना कर दूंगा तो वह दुखी हो जायेंगे। मैं चुप रहा। उसने मेरे मौन को हांमी समझ, मेरे नाम से घोषणा की, कि मैं शिव भक्त हो गया और कहा,
'आप जब कभी मुश्किल में पड़े तो शिव को याद करियेगा। आपकी सारी मुश्किल दूर हो जायेगी। हमें हिन्दी में टाइप करने की मुश्किल थी। हमने भगवान शिव को याद किया। जैसे, उन्होंने आपको हमारी सहायता के लिए भेज दिया वैसे वे आपकी मुश्किल दूर करने के लिये किसी को भेज देंगे, या स्वयं दूर कर देंगे।'
'आपने मेरी सहायता की है और हिन्दी टाइप करना सिखाया है पर इस लिए मैं केवल दस रूपये ले रहा हूं। वैसे सही दाम ५० रुपया होता है।'मुझे इस बात की प्रसन्नता हुई की मैं मनाली में भी हिन्दी की कुछ सेवा कर सका।
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आपके ब्लोग पर आ कर अच्छा लगा
हिन्दी हिमाचल से लेकर कन्याकुमारी तक व्यवहार में आने वाली भाषा है। राष्ट्रीय मेल और राजनीतिक एकता के लिए सारे देश में हिन्दी और नागरी का प्रचार आवश्यक है। प्रान्तीय ईर्ष्या-द्वेष दूर करने में जितनी सहायता हिन्दी प्रचार से मिलगी, उतनी अन्य किसी भाषा से नहीं।
हम भी भगवान शिव को याद करते है ………..इस उम्मीद मे कि कही आप मिल जाए………….तकनिकी जानकारी नगण्य रहती है ,पर हिन्दी के लिए मै भी कुछ ( थोडा-बहुत )करना चाहती हूँ……….
रोशन जी, मुझे प्रसन्नता हुई कि आपको यहां आकर अच्छा लगा।
मनोज जी, मुझे तो हिन्दी से प्यार है बस इसलिये हिन्दी में लिखता हूं।
अर्चना जी, हम सब हिन्दी से प्यार करते हैं कुछ करना चाहते हैं। इसलिये ही हिन्दी में लिखते हैं। क्या मालुम कहीं, किसी जगह मुलाकात हो जाय।