Unmukt – उन्मुक्त

हिन्दी चिट्ठाकार उन्मुक्त की चिट्ठियाँ

July, 2010

रानी मुखर्जी हों साथ, जगह तो सुन्दर ही लगेगी

इस चिट्ठी में मानाली की सोलंग घाटी की चर्चा है।

सोलंग घाटी जाने का रास्ता हरा भरा था और सुन्दर लगा। वहां पर एक बहुत बड़ा मैदान था। वहां पर तारगाड़ी का निर्माण चल रहा था। इसके कारण मैदान बिगड़ गया था। वहां पर एक बंगाली सज्जन मिले। वे अपने परिवार के साथ थे। वह बहुत गुस्सा हो रहे थे। मैंने इसका कारण पूछा तब उन्होंने बताया। 

रानी मुकर्जी का चित्र इस वेबसाइट के सौजन्य से


‘हम  २००२ में यहां आये थे। उस दिन आये थे जिस दिन रानी मुखर्जी अपनी फिल्म की शूटिंग कर रही थी। उस समय यह मैदान घास से भरा था। बहुत सुन्दर लग रहा था। अब यह बिल्कुल बरबाद कर दिया गया है।’

अब रानी मुकर्जी हों तो दुनिया की सारी जगहें सुन्दर लगेंगी :-)

यह सच था कि उस समय, वह मैदान बेकार लग रहा था। इसका कारण यह भी था कि वहां तारगाड़ी का निर्माण हो रहा था। मुझे लगता है तारगाड़ी के निर्माण हो जाने के बाद वह फिर से सुन्दर हो जायेगा। यह भी हो सकता है उन सज्जन को रानी मुखर्जी के कारण वह जगह ज्यादा सुन्दर लगी या फिर रानी मुकर्जी से पुनः न मिलने की निराशा हो। 

सोलंग घाटी में तारगाड़ी का निर्माण

सोलंग घाटी पर भी पैरा ग्लाईडिंग हो रही थी और बहुत से लोग कर रहे थे। हम लोग थक  गये थे क्योंकि रोहतागं में काफी पैदल चले थे। वापस आकर खाना खाया और निद्रा देवी की गोद में पहुंच गये।

अगली बार हम लोग मनाली में वशिष्ट जी के मन्दिर देखने और वहां पर गर्म चश्में की कथा सुनेंगे।

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा
वह सफेद चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी।। यह तो धोखा देने की बात हुई।। पाडंवों ने अज्ञातवास पिंजौर में बिताया।। अखबारों में लेख निकले, उसके बाद सरकार जागी।। जहां हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे की बात हुई हो, वहां मीटिंग नहीं करेंगे।। बात करनी होगी और चित्र खिंचवाना होगा – अजीब शर्त है।। हनुमान जी ने दी मजाक बनाने की सजा।। छोटे बांध बनाना, बड़े बांध बनाने से ज्यादा अच्छा है।। लगता है कि विंडोज़ पर काम करना सीख ही लूं।। गाड़ी से आंटा लेते आना, रोटी बनानी है।। बच्चों का दिमाग, कितनी ऊर्जा, कितनी सोचने की शक्ति।। यह माईक की सबसे बडी भूल थी।। भारत में आधारभूत संरचना है ही नहीं।। सुनते तो हो नहीं, जो करना हो सो करो।। रानी मुकर्जी हों साथ, जगह तो सुन्दर ही लगेगी।। हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गये।। आप, क्यों नहीं, इसके बाल खींच कर देखते।।
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is chitthi mein, solang valley kee charchaa hai.  yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

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‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ श्रृंखला किसी को दुख देने के लिये नहीं लिखी गयी थी

मेरी श्रृंखला ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ के बारे में लोगों को गलतफहमी है। यह चिट्ठी किसी को दुख पहुंचाने के लिये नहीं लिखी गयी थी। यह चिट्ठी यही बताती है। There is misconception about my series ‘Jyotis, Hasrekha vidya, Aur tone tutke’; It was not written to hurt anyone. This post explains the same. meri shrankhla ‘jyotish, hasrekha vidya, aur tone totke’ ke bare mein logon ko galatphahmee hai. yeh shrkhla kisee ko dukh phunchane ke liye nheen likhee gayee thee; yeh chitthi isee ko btatee hai

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मिस्टर व्हाई – यह कौन हैं

‘कोर्ट गर्डल, महानतम तर्क शास्त्री माने जाते हैं। इस चिट्ठी में,  उनकी जीवनी और उस पर लिखी दो पुस्तकों की चर्चा है। 
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
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देखें।

कोर्ट गर्डल पर बहुत सी पुस्तकें लिखी गयी हैं। इनमें से मैंने निम्न चार पुस्तकें पढ़ी हैं:

  1. Gödel: A life of Logic by John L Casti (गर्डल: ए लाइफ ऑफ लॉज़िक लेखक जॉन एल कास्टी)
  2. A world Without Time: The forgotten legacy of Gödel and Einstein by Polle Yourgrau (ए वर्ल्ड विथआउट टाइम: द फॉरगॉटन लेगसी ऑफ गर्डल एंड आइंस्टाइन लेखक पॉले योरग्रॉ)
  3. Gödel, Escher, Bach: An Eternal Golden Braid by Douglas R. Hofstadter (गर्डल, ऍशर, बाख: एन ईटर्नल गोल्डेन ब्रेड लेखक डगलस आर हॉफस्टैडर)
  4. The Emperor’s New Mind: Concerning Computers, Minds and The Laws of Physics (द एमपररस् न्यू माइंड: कंसर्निग कंप्यूटरस्‌, माइंडस् एण्ड द लॉज़ ऑफ फिज़िक्स  लेखक रॉजर पेनरोज)

आज हम पहली दो पुस्तकों के बारे में बात करेंगे।

गर्डल जिज्ञासू थे और वह मिस्टर व्हाई (Mr. Why) के नाम से जाने जाते थे। वे असामान्य प्रतिभा के धनी थे। वे एक शर्मीले युवक से एक ऎसे व्यक्ति बन गये जिनके साथ अधिकतर लोग रहना पसंद करते थे। लेकिन जीवन के अन्त में वे फिर अकेलेपन में डूब गये।

गर्डल ने ऍडेले (Adele) नामक एक तलाकशुदा महिला से शादी की। वह उनसे ६ साल की बड़ी थी और  कैबरे  (Cabaret) नृत्य करती थी। यह शादी उनके माता पिता को पसंद नहीं थी इसलिए गर्डल को शादी के लिए १० साल इन्तजार करना पड़ा। उनके कोई सन्तान नहीं हुई।

कोर्ट गर्डल और अर्लबट आइंस्टाइन पिछले शताब्दी के दो महानतम वैज्ञानिक थे। जीवन के अंतिम दिनो में, वे दोनो ही   इंस्टीट्यूट आफ एडवांसड स्टडीज़ (Institute of Advance Studies Princeton) चले गये थे। दोनो का स्वभाव एक दूसरे के विपरीत था। गर्डल थोड़ा निराशवादी और परेशान दार्शनिक  और  आइंस्टाइन मुक्त भावुक व्यक्ति थे।  लेकिन उन दोनों को एक दूसरे से शान्ति मिलती थी।  आइंस्टाइन  का कहना था कि,

‘इंस्टीट्यूट आफ एडवांसड स्टडीज़ में सबसे अच्छी बात यह है कि, इंस्टिच्यूट से वापस घर जाते समय, गर्डल और मेरा साथ रहता है।’

फ्रीमैन डाइसन जाने माने भौतिक शास्त्री हैं। वे इंस्टीट्यूट आफ एडवांसड स्टडीज़ के स्दस्य हैं। उनका कहना है कि,

‘Gödel was … the only one of our colleagues who walked and talked on equal terms with Einstein.’
हमारे साथ के लोगों में, केवल गर्डल ही था जो आइंस्टाइन के साथ चल सकता था और उनसे बराबरी पर बात कर सकता था।

गर्डल कुछ अजीब किस्म के व्यक्ति थे। उन्होंने अन्त में आत्महत्या कर ली। उनका आत्महत्या का तरीका भी एकदम अलग अपने अपूर्णनता सिद्धान्त की तरह। उनकी मृत्यु malnutrition के कारण हो गयी। वे जीवन के अन्त में अस्पताल में unitary tract की समस्या के लिये भरती थे। उन्होंने महीने भर खाना नहीं खाया। उनका कहना था कि डाक्टर उन्हें जहर दे कर मारना चाहते हैं।

इन दोनो पुस्तकों में गर्डल के बारे पर्याप्त सूचना है।  दूसरी पुस्तक में आइंस्टाइन के संबन्ध में भी कुछ सूचना है।

पहली पुस्तक में कुछ अध्याय, कृत्रिम बुद्धि (Artificial intelligence), सोचने वाली मशीन (Thinking machines), और जटिलता (complexity) के बारे में है। इसे उन लोगों के लिए समझना मुश्किल है जो विषय पर रूचि नही रखते है या जिनको इस क्षेत्र में कोई ज्ञान नहीं है। इसलिए यदि आप चाहें तो इन अध्याय को छोड़ सकते है पर यदि आपको तर्कशास्त्र या कम्पयूटर विज्ञान में रूचि है तब इन अध्यायों को अवश्य पढ़ें। बाकी अध्याय आसान हैं व आसानी से समझे जा सकते है।

दूसरी पुस्तक में, कुछ अध्याय गर्डल द्वारा समय के ऊपर किये गये काम के बारे में है। यह वास्तव में  मुश्किल है और पढ़ते समय यदि आप चाहें तो इनको छोड़ भी सकते है।

गर्डल ने एक बार कहा

‘We live in the World in which ninety-nine per cent of all beautiful things are destroyed in the bud.’
हम ऐसे संसार में रहते हैं जहां ९९ प्रतिश्त सुन्दर वस्तुएं शुरुवात में ही समाप्त हो जाती हैं।

मालुम नहीं क्यों मुझे लगता है कि यह हिन्दी चिट्टाजगत पर सही बैठता है। हम अच्छे लेख लिखने के बजाय, व्यर्थ की बात पर विवाद करते रहते हैं। 
गर्डल के अपूर्णनता सिद्धान्त के बारे में कुछ अन्य पुस्तकों की चर्चा – इस श्रंखला की अगली कड़ी में।

तू डाल डाल, मैं पात पात
भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।। नाई, महिला है।। मिस्टर व्हाई – यह कौन हैं।। गणित, चित्रकारी, संगीत – क्या कोई संबन्ध है।।
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yeh chitthi cyber apradh ki shrakhlaa kee kari hai. is chitthi mein Gödel  kee jeevani aut us per do pustkon kee charcha hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is part of series on Cyber crimes. It talks about Gödel life and two books on him. It talks about whether Epimenides’ or liar’s paradox was sorted out in Pricipia Mathematica or not. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.
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सुनते तो हो नहीं, जो करना हो सो करो

रोहतांग पाइंट के रास्ते में पैराग्लाइडिंग होती है। इस चिट्ठी में उसी की चर्चा है।

रोहतागं पॉइंट के रास्ते में पैरा-ग्लाईडिंग भी होती है। रोहतागं पॉइंट से वापस आते समय, हमें रास्ते में कुछ लोग पैरा-ग्लाईडिंग करते हुए मिले। एक जगह कुछ लड़के, खड़े हुए थे। वहीं से पैरा-ग्लाईडिंग हो रही थी। मैंने ड्राइवर से कहा कि गाड़ी उनके पास ले चलो। मेरी पत्नी शुभा को यह बात बिल्कुल पसंद नही थी कि मै पैरा-ग्लाईडिंग करूं। वह कहने लगी कि हमें सीधे चलना चाहिए। मैंने कहा कि कम से कम बात तो करने दो। मैं जब उनके पास पहुंचा, तो उन्होंने बताया,

‘हमारे पास दो विकल्प है। छोटी उड़ान और बड़ी उड़ान। छोटी उड़ान में आप मरहीं तक जा सकते है। लम्बी उड़ान, सोलंग वैली तक जाती है। छोटी उड़ान के लिए दो हजार रूपया और सोलंग वैली के लिए ३५००/-रूपये लगते हैं।’

अब तो विश्वास हुआ न कि मैंने पैराग्लाइडिंग की

मरहीं पर हम लोगों ने आते समय नाश्ता किया था और वापस लौटते समय वहीं खाना खाने की बात थी। इसलिए मैं छोटी उड़ान लेना चाहता था। मैंने पूछा कि क्या पैसा सही है। उसने हामी भरी। हांलाकि मुझे लगा कि यह पैसा कुछ ज्यादा है। शुभा बिलकुल नहीं चाहती थी कि मैं पैरा ग्लाईडिंग करूं। लेकिन मैं पैरा ग्लाईडिंग करना चाहता था।  मैंने उसे समझाया।

‘गोवा में पैरा-सेलिंग के समय मैं अकेला था। लेकिन यहां पर पैराग्लाइडिंग करते समय मेरे साथ एक ट्रेनर भी रहेगा इसलिए मुश्किल की कोई बात नहीं है तुम मुझे पैसे दे दो।’

इस पर वह गुस्से से बोली।,

‘तुम किसी की बात नहीं सुनते हो। जो करना हो सो करो।’

मैंने उससे चित्र खीचने को कहा। उसने कहा,

‘चित्र खींचना तो दूर, मैं तो यह सब देख भी नहीं सकती।’

लेकिन उसने २००० रूपये  दे दिये पर मुंह दूसरी तरफ कर लिया।  

पैरा ग्लाइडिंग करते समय मैं आगे था और ट्रेनर पीछे की ओर। सारे कंन्ट्रोल उसी के पास थे। वह डोरी की सहायता से दायें बायें या ऊपर नीचे करता था। गोवा में पैरागलाइडिंग करते समय अकेला था तो कुछ डर लगा था। लेकिन यहां पर ट्रेनर साथ था। इसलिए मुझे कोई डर नहीं लगा और बहुत मज़ा आया। हम सात मिनट में नीचे आये। शुभा गाड़ी में थी और उसको यह दूरी तय करने में लगभग चालीस मिनट लगे।

नीचे आते समय देखा कि कुछ लोग वीडियो और कुछ लोग साधारण कैमरे से फोटो ले रहे हैं। नीचे उतरने पर उन्होंने मुझे चित्र और वीडियो दिखाया और पूछा,

‘क्या आप वीडियो या चित्र लेना चाहते हैं। सीडी में देने के लिये २०० रूपया लगेगा। चार चित्रो को प्रिंट करके देने में सौ रूपया लगेगा। यदि आप चित्र सीडी में चाहते है तो लगभग दस चित्र के १५०/-रूपये लगेंगे।’

मैंने कहा कि मैं लूंगा। बगल में तम्बू लगे थे। जिसमे कंप्यूटर रखे  थे और वहीं उस कंप्यूटर में सीडी पर लिखने या चित्र प्रिंट करने की सुविधा थी। सारे कंप्यूटर विंडोज़ पर थे।
मैंने पूछा,

‘क्या आप लोग लाइनेक्स पर काम नहीं करते?’

उन्होंने कहा,

‘लाइनेक्स, क्या बला है?’

ट्रेनर राजाराम

मैंने, उनको थोड़ा बहुत लाइनेक्स के बारे में बताया। उनका कहना था हम लोग कोशिश करेगें। हो सकता है कि आप जायें तो उन्हें  लाइनेक्स पर काम करते देखें।

मैंने कुछ देर पैरा-ग्लाईडिंग में साथ आये ट्रेनर से बात की। उसने बताया,

‘मेरा नाम राजाराम है। मैं केवल इण्टरमीडिएट तक पढ़ा हूं। मैंने यह पैराशूट यूरोप से मंगाया है। यह दो लाख रूपये का पड़ा है। यह पैसा मेरे परिवार वालों ने दिया है। मैं अपनी जीविका इसी से चलाता हूं। इससे अच्छा पैसा मिल जाता है और दो साल के अन्दर दो लाख रूपये की भरपाई हो जाती है। ‘

वहां पर वह अकेले नहीं था। उसके साथ उसके ३-४ सहयोगी भी थे।  २-३ अन्य ट्रेनर भी थे। वहां पर बहुत से लोग खड़े थे लेकिन कोई हिम्मत नही कर रहा था। लेकिन मुझे देखा-देखी और लोग भी आ गये। बाद में और लोगो ने बताया कि वह इस काम के लिए कुछ ने पन्द्रह सौ रूपये और कुछ ने बारह सौ रूपये दिए है। मुझे लगा कि मैं भी मोल भाव करता, तो वह पैसा कम कर सकता था। लेकिन यह मेरे स्वभाव में नहीं है। मेरी मां भी इसी तरह की थीं। वे दूसरे पूरे तरह से विश्वास करती थीं। यह मुझे उन्हीं से मिला है। 

मुझे पैरा-ग्लाइडिंग वालों की यह बात अच्छी नहीं लगी, कुछ दुख हुआ। मेरे कारण वहां पर ५-६ लोगों में  पैरागलाइडिंग की। सच बात तो यह है कि उसे मुझसे कम पैसा लेना चाहिए था बल्कि यहां पर तो उल्टा ही हुआ। मुझे यह भी सबक मिला कि वहां मोल भाव करना चाहिये था पर मुझे पैसा वापस मांगना ठीक नहीं लगा।

लगभग चालीस मिनट बाद शुभा और अन्य लोग आये। हम लोगों ने वहीं खाना खाया फिर सोलंग घाटी गये। 

अगली बार सोलंग घाटी के बारे में।

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा
वह सफेद चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी।। यह तो धोखा देने की बात हुई।। पाडंवों ने अज्ञातवास पिंजौर में बिताया।। अखबारों में लेख निकले, उसके बाद सरकार जागी।। जहां हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे की बात हुई हो, वहां मीटिंग नहीं करेंगे।। बात करनी होगी और चित्र खिंचवाना होगा – अजीब शर्त है।। हनुमान जी ने दी मजाक बनाने की सजा।। छोटे बांध बनाना, बड़े बांध बनाने से ज्यादा अच्छा है।। लगता है कि विंडोज़ पर काम करना सीख ही लूं।। गाड़ी से आंटा लेते आना, रोटी बनानी है।। बच्चों का दिमाग, कितनी ऊर्जा, कितनी सोचने की शक्ति।। यह माईक की सबसे बडी भूल थी।। भारत में आधारभूत संरचना है ही नहीं।। सुनते तो हो नहीं, जो करना हो सो करो।। हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गये।। आप, क्यों नहीं, इसके बाल खींच कर देखते।।
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rohtang point ke raste mein paragliding hoti hai. is chitthi mein usee kee charchaa hai.  yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateeis chitthi mein, y lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

One can do paragliding on the road to the Rohtang point. This post talks about the same. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

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भारत में आधारभूत संरचना है ही नहीं

इस चिट्ठी में, मनाली से रोहतंग पाइंट जाने की यात्रा और वहां मिले लोगों की चर्चा है।

रोहतांग पांइट जाने के लिए, हम लोग सुबह साढ़े सात बजे मनाली से निकले। रास्ते का नज़ारा बहुत सुन्दर था। दिखने वाली चोटियां बर्फ से ढ़की थीं, धूप  तेज निकली थी लेकिन गाड़ी में ठंड लगने लगी। पिछले दिनो गर्मी थी।  पूरी आस्तीन की शर्ट पहनने में पसीना निकल रहा था। इसी सोच में, मैंने  ऊनी पैंट नहीं पहनी। लेकिन यह भूल थी। मुझे दुख हुआ कि मैं ऊनी पैंट लाने के बाद उसे क्यों नही पहना। रास्ते में  पर्यटक जगह-जगह रूक कर गरम कपड़े और स्नो बूट ले रहे थे। यह वहां पर किराये पर मिल रहे थे।

रोहतागं पाइट पर मेरी मुलाकात सुरेश से हुयी। वे अपनी पत्नी के साथ बंगलौर से आये थे। इन्होंने एक बहुत ही रूमानी अंदाज में चित्र खिचवाया। वे बंगलौर से थे। वहां वे माइसेस नाम की आइटी कंपनी में काम करते हैं। यह बैकिंग सॉफ्टवेयर को टेस्ट करती हैं। मैंने जानना चाहा कि यह जो बैकिंग सॉफ्टवेयर है वह ओपेन सोर्स में है या मालिकाना लेकिन वे इसे स्पष्ट नहीं कर पाये। शायद मालिकाना है।

यहां पर मेरी मुलाकात एक अन्य दम्पत्ति से हुई। मुझे बहुत खुशी हुई कि वह ओपेन सोर्स में काम करते है और यूनिक्स (UNIX) एडमिनीस्ट्रेटर है। वे पुणे से आये थे। उन्होंने बताया, मैं पहले रेडहैट में काम करता था। अब संग्राम नामक कम्पनी में काम करते हैं। मैं उनके साथ कुछ और समय व्यतीत करता लेकिन उनके साथ जो घोड़े वाले थे। वे जल्दबाजी कर रहे थे। इसलिए उनसे विस्तार में बात नहीं हो पायी।

वहां पर मेरी मुलाकात जापानी युवती से हुई। वह नीपो एक्सप्रेस नामक कम्पनी में काम करती थी। उसके साथ दो अन्य महिलायें उसके बॉस की पत्नी और उनकी सास थीं। 

नीपो कंपनी लॉजिस्टिक कम्पनी है। इस तरह की कम्पानियां बहुत तेजी से बढ़ रही है पर हिन्दुस्तान में इतनी तेजी से नहीं बढ़ रही है। जापानी युवती का कहना था,

‘भारत में आधारभूत संरचना (Infrastructure) है ही नहीं, इस तरह की कंपनी बढ़ेंगी कैसे?’

हमारे पास आधारभूत संरचना तो है, नयी बनती भी हैं लेकिन उससे कहीं तेजी से हमारी जन संख्या बड़ रही है जो उसे नगण्य कर देती है। काश सरकार, यह हम इसे समझ पाते और इसे रोकने का तुरन्त उपाय करते। इसकी प्राथमिकता प्रथम है पर सरकार वोट से बनती है उसे इसकी क्या चिन्ता।

रोहतांग पॉइंट पर हिम

 इस श्रृंखला की अगली कड़ी में, पैरा ग्लाइडिंग का आनन्द लेंगे। 

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यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 

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This post talks about Rohtang point and people that I met there. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
। Rohtang point,
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नाई, महिला है

इस चिट्ठी में, ‘नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है‘ सवाल का जवाब और गर्डल के गणित की अपूर्णनता सिद्धान्त की चर्चा है। 
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
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देखें।

मैंने पिछली बार बताया था कि बट्रेंड रसेल (Bertrand Russell) ने ऍपीमेनेडीज़ या लाएरस् विरोधाभास को नयी तरह से रखा। उन्होंने कहा,

‘एक गांव में केवल एक ही नाई था। उसका कहना था कि वह उन लोगों की दाढ़ी बनाता है जो स्वयं अपनी दाढ़ी नहीं बनाते हैं।’

सवाल यह था कि

‘नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है?’


रसेल और व्हाइटहैड (Whitehad) के मुताबिक उन्होंने इस विराधाभास का हल,  प्रिंसिपिया मैथमैटिका (Principia Mathematica) (१९१३) में निकाल लिया था। उनका हल, कुछ इस तरह से समझा जा सकता है  कि नाई महिला है। इस दशा में तो उसे दाढ़ी बनाने की आवश्यकता नहीं है।

इस हल में वे पुरूषों के स्तर से ऊपर निकल कर व्यक्तियों के स्तर में चले जाते हैं जिसमें पुरूष और महिलायें दोनों रह सकती है।  लेकिन वे भूल गये कि व्यक्तियों के स्तर में अलग तरह  का विरोधाभास  है। जिस पर उन्होंने विचार नहीं किया।

टाइम पत्रिक का शताब्दी अंक

२०वीं शताब्दी के समाप्त होते समय, टाइम पत्रिका ने एक विशेष अंक निकाला था। इसमें उन्होंने बीसवीं शताब्दी के सौ महानतम  लोगों के बारे में लिखा था। इन सौ लोगों में एक ऑस्ट्रियन गणितज्ञ कोर्ट  गर्डल  भी थे।  उन्हें आज तक का सबसे महानतम तर्क शास्त्री माना जाता है। 

गर्डल ने १९३१ में एक पेपर जर्मन भाषा में लिखा। इसके शीर्षिक का अंग्रेजी में अनुवाद है,

‘On formally Undecidable Proposition of Principia Mathematica and Related Systems. 

इसमें  उन्होंने सिद्व किया, 

‘Proof of arithmetic consistency is not possible―every mathematical system is incomplete’.
आप किसी भी मूलभूत सिद्वान्तों को लेकर चलें, उनमें कुछ इस तरह के कथन अवश्य निकल आयेगें  जो न कि सही साबित किये जा सकते है न गलत। सुसंगत गणित सम्भव नहीं है … प्रत्येक व्यवस्था अपूर्ण है।

गर्डल ने हिलर्ब्ट के द्वारा १९०० और १९२८ की आईसीएम में रखे गये प्रश्न का जवाब ढूंढ  लिया। लेकिन यह वह जवाब नहीं था जो डेविड हिल्बर्ट चाहते थे। वे तो चाहते थे कि गणितीय तर्क का ऐसा संसार हो, जहां सारे कथन सही अथवा गलत सिद्घ किये जा सकें। गर्डल ने इसका उल्टा ही सिद्ध कर दिया। इससे हिल्बर्ट को परेशान हुई। लेकिन वे कुछ कर न सके – गर्डल के शोद्ध पत्र में आजतक कोई गलती नहीं निकाली जा सकी है। वे मन मनोस कर रह गये।

अगली बार हम लोग गर्डल और उसके अपूर्णता सिद्धान्त के बारे में लिखी कुछ  रोचक पुस्तकों के बारे में चर्चा करेंगे। 

कुछ समय पहले बीबीसी ने डेंजरस् नॉलेज (Dangerous Knowledge) नामक श्रृंखला प्रसारित की थी। यह श्रृंखला चार विलक्षण प्रतिभा के व्यक्ति, जिसमें तीन गणितज्ञ – जॉर्ज कैंटर (Georg Cantor), कोर्ट गर्डल (Kurt Gödel) और ऐलन ट्यूरिंग (Alan Turing) – और एक भौतिक शास्त्री लुडविंग बॉल्टज़मैन (Ludwig Boltzmann) पर थी। यह बेहतरीन श्रृंखला है और यदि इसे आपने नहीं देखा है तो यूट्यूब में देख सकते हैं। हांलाकि इस श्रृंंखला में, इनकी जीवनी के बारे में कुछ सूचनायें सही नहीं हैं। इसमें गर्डल के जीवन के शुरू का भाग यहां देखिये।


  तू डाल डाल, मैं पात पात
भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।। नाई, महिला है।। गर्डल और अपूर्णता सिद्धान्त पर  पुस्तकें।।

About this post in Hindi-Roman and English

yeh chitthi cyber apradh ki shrakhlaa kee kari hai. is chitthi mein charcha hai ki kya ‘principia mathmatica mein Epimenides’ ya liar’s virodhabhas ka hl nikal gaya tha ya naheen. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is part of series on Cyber crimes. It talks about whether Epimenides’ or liar’s paradox was sorted out in Pricipia Mathematica or not. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.
सांकेतिक शब्द
Hindi, पॉडकास्ट, podcast,
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