February 7, 2012
कुछ समय पहले मैंने ‘नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है‘ नामक चिट्ठी लिखी। इसमें संस्कृत का एक श्लोक भी लिखा था। मैं जानना चाहता था कि वह कहां से है। कई चिट्ठाकार बन्धुवों ने मदद की। इस पर अरविन्द जी ने ‘मेरे ही बुकशेल्फ में छुपा था उन्मुक्त जी के प्रश्न का जवाब!‘ नामक चिट्ठी लिखी। इस पर हिमान्शू मोहन जी, ने टिप्पणी की,
‘… एक बात और यहाँ साथ ही कहता चलूँ – जो मैंने उन्मुक्त की पोस्ट पर भी कही थी – कि बिना पूरी तरह जाने किसी विषय को, उस के बारे में अच्छी या बुरी धारणा बना लेना – पूर्वाग्रह है। सतर्क और जिज्ञासु – ज्ञान-पिपासु को इससे बचना चाहिए।’
राशियां - चित्र विकिपीडिया के सौजन्यसे
मैंने भी वहीं टिप्प्णी कर कहा था कि मैं जल्द ही अपनी बात रखूंगा। यह रहा मेरे जवाब का पहला भाग।
मेरी श्रृंखला ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ (पहली एवं अन्तिम चिट्ठी) के बारे में कुछ गलतफहमी है। इसके कारण मेरी अक्सर टांग खिंचायी और निन्दा होती है। उस चिट्ठी पर, अक्सर ऐसी टिप्पणियां आती हैं जो शालीनता के परे होती हैं। अक्सर लोग पूरी श्रृंखला नहीं पढ़ते हैं।
यह श्रृंखला लिखते समय, कड़ियों में लिखने का कारण स्पष्ट था पर संकलित कर रखते समय शायद यह स्पष्ट न रह सका कि मैंने वह श्रृंखला क्यों लिखी। मैं अपनी बात बात ज्योतिष प्रेमियों को समझाना चाहता हूं।
यह सच है कि मैं या मेरा परिवार ज्योतिष, या हस्तरेखा या अंकविद्या में विश्वास नहीं करता हूं। हम पूजा पाठ में भी विश्वास नहीं करते। मैंने अपनी मां का एक किस्सा ‘करो वही, जिस पर विश्वास हो‘ लिखा था। आपातकाल के समय, मेरे पिता जेल में थे। एक शुभचिन्तक ने, मेरी मां से कहा कि वे शिवपूजा करें तो मेरे पिता छूट सकेंगे। इसके लिये मां ने यह कह कर मना कर दिया। उन्हें इसमें विश्वास नहीं है।
हम सब भाई बहन की शादी के समय न तो जन्मकुंडली मिलवायी गयी न ही ज्योतिष के हिसाब से तिथि का ध्यान रखा गया। गृह निर्माण या प्रवेश में भी ज्योतिष का ध्यान नहीं रखा गया। हम सब अपने जीवन में खुश हैं।
कुछ समय पहले, मैंने दिल्ली के उपनगर में मकान बनवाया। उस बिल्डर ने नक्शा बनवाते समय पूछा कि क्या मकान वास्तु के हिसाब नहीं बनेगा। मैंने जवाब था,
‘मकान, वास्तु के हिसाब से नहीं बनेगा।’
उसका कहना था,
‘आप फिर से सोच लें। आजकल बिना वास्तु के कोई मकान नहीं बनवाता। आप पहले व्यक्ति मिले जो कह रहे हैं कि वास्तु के हिसाब से नहीं बनवायेंगे।’
मैंने कहा आप मकान का नक्शा सूरज की रोशनी और हवा की आने जाने की सुविधा से बनवाइये, न कि वास्तु के हिसाब से।
मेरे विचार में ‘ज्योतिष कूड़े का भार है‘। मैं कार्ल सेगन का प्रशंसक हूं। मेरे विचार उनके विचारों जैसे ही हैं। आप खुद इस विडियो में सुनिये।
उन्मुक्त चिट्ठे पर लिखी श्रृंखला को संपादित कर, लेख चिट्ठे पर लिखी चिट्ठी ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके‘, मेरी सबसे ज्यादा पढ़ी चिट्ठी है। इस श्रृंखला की चिट्ठियां, अन्तरजाल में कई जगह पूरी या इसके कुछ अंश – संदर्भ देते हुऐ या फिर बिना संदर्भ देते हुऐ – प्रकाशित हैं। यह मेरे ‘लेख’ चिट्ठे पर ही लगभग ५०,००० बार पढ़ी गयी है। यह सबसे विवादास्पद भी है।
इस पर तरह तरह की टिप्पणियां आती हैं। कुछ इसे सही मानते हैं, कुछ गलत। अधिकतर लोग मुझसे अपना भविष्य पूछते हैं। भविष्य पूछने वाली चिट्ठियों में से मैंने एक को प्रकाशित कर वहीं उसका जवाब लिख दिया पर उसके बाद में की टिप्पणियों को प्रकाशित नहीं करता हूं। टिप्पणी करने वालों को यह टिप्पणी और उसका जवाब पढ़ना चाहिये।
मेरी बातों को गलत कहने वालों में कुछ अपनी बात शालीनता से कहते हैं लेकिन अधिकतर लोग शालीनता के परे जवाब देते हैं। जो टिप्पणियां शालीनता के परे होती हैं, मैं उन्हें प्रकाशित नहीं करता – जबरदस्ती का विवाद होगा। लेकिन मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि जो इस चिट्ठी को गलत बताते हैं – चाहे वह शालीनता से, चाहे शालीनता के परे – वे इसमें लिखे तर्क को नहीं काट पाते हैं। वे क्या कहते हैं यह तो आप वहीं जा कर देख सकते हैं। कुछ उदाहरण देखिये,
मैंने ज्योतिष, हस्तरेखा, और अंकविद्या के बारे में पढ़ा, अध्यन किया फिर लेख लिखा। यह कहना सही नहीं है कि मैंने बिना पढ़े ही वह श्रृंखला लिखी। यदि किसी को इस विषय का बेहतर ज्ञान हो, वह ही इन बातों को तर्क से समाप्त करे, इस बारे में लिखे।
क्या इस तरह की टिप्पणियां लेख गलत साबित होता है। क्या इनसे पता चलता कि ज्योतिष अन्धविश्वास नहीं है। मुझे यह टिप्पणियां दुखी करती हैं। इसीलिये मैंने आप सही हैं … मैं बदलाव कर रहा हूं नामक चिट्ठी लिखी।
यदि यह आस्था की बात है तब मुझे कुछ नहीं कहना क्योंकि आस्था को तर्क या ज्ञान से नहीं परखा जा सकता। वह इनके परे है।
मैं आज तक किसी भी हिन्दी चिट्ठकार से नहीं मिला। मैं उनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में नहीं जानता। लेकिन मुझे वास्तविक में लोगों से मिलने उन्हें जानने का अवसर मिला है। अधिकतर लोग, कुछ न कुछ ज्योतिष, हस्तरेखा, अंक विद्या, या पूजा पाठ पर विश्वास करते मिले। मुझे ऐसे लोगों से कोई शिकवा या आपत्ति नहीं है। इनमें से बहुत, न केवल मेरे अच्छे मित्र हैं पर मुझसे कहीं गुणी और विद्वान भी हैं। वे और हम, एक दूसरे का आदर करते हैं।
मैंने ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ श्रृंखला (पहली एवं अन्तिम चिट्ठी) ज्योतिष पर विश्वास करने वालों का मजाक बनाने के लिये या किसी की आस्था या विश्वास पर चोट पहुंचाने के लिये नहीं लिखी थी।
‘उन्मुक्त जी, यदि यह श्रंखला किसी का मजाक बनाने के लिये नहीं थी तब आपने यह क्यों लिखी।’
यह सच है कि मैं यह तर्क द्वारा बताना चाह रहा था कि क्यों ज्योतिष, हस्तरेखा या अंकविद्या सही नहीं है पर इस श्रृंखला को लिखने का कारण कुछ और ही था। यह अगली बार इसी चिट्ठे पर।
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उन्मुक्त चिट्ठे पर लिखी श्रृंखला ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ को यदि आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे लिखी लिंक पर चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।
भूमिका।। तारे और ग्रही।। प्राचीन भारत में खगोल शास्त्र।। यूरोप में खगोल शास्त्र।। हेर संगीत नाटक।। पृथ्वी की गतियां।। राशियां।। विषुव अयन: हेयर संगीत नाटक के शीर्ष गीत का अर्थ।। ज्योतिष या अन्धविश्वास।। राशिफल का मेष राशि से शुरु और ज्योतिष का अपने तर्क पर गलत होना।। अंक विद्या, डैमियन – शैतान का बच्चा।। अंक लिखने का इतिहास।। हस्तरेखा विद्या और निष्कर्ष।।
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