हिन्दी चिट्ठाकार उन्मुक्त की चिट्ठियाँ -

यह बौद्व मंदिर है न कि हिन्दू मंदिर

Posted on August 20, 2010 in Full Articles | by
इस चिट्ठी में मानाली के बौद्व तृप्ति मंदिर और वन विहार की चर्चा है।
 
मनाली में वशिष्ट मन्दिर देखने के बाद, हम लोग बौद्व तृप्ति मंदिर देखने गये। हमारे टैक्सी ड्राईवर पवन जी ने मुझसे कहा,
'यह बौद्व मंदिर है न कि हिन्दू मंदिर।'
मैने उन्हें बताया,
'बौद्ध भी हिन्दु है। भगवान विष्णु के दशवतारो में गौतम बुद्ध नौवें अवतार हैं। गौतम बुद्ध के बारे में हमारे पुराणों में पहले से ही लिखा हुआ है। इसलिए यह सोचना कि बौद्ध लोग हिन्दु नहीं है गलत है। भगवान विष्णु का अंतिम और दसवां अवतार आना है। वह कल्कि के नाम से जाना जायेगा। यह करीब ८४,००० साल बाद आयेगा। उसके आने के बाद कलयुग समाप्त होगा।'
तृप्ति मंदिर में मेरी मुलाकात एक लामा से हुई जिसका नाम टैम्पा था। वह कपड़ों पर तथा कुछ पवित्र मंत्र प्रिंट कर रहा था। वही पवित्र मंत्र एक झालर के रूप में मंदिर के चारों ओर लगी थी। मैंने उनसे पूछा,
'क्या तुम मुझे एक झालर दे सकते हो?'
उसने कहा, 
'मैं यह काम किसी के कहने पर कर रहा हूं। वह व्यक्ति इसको अपने घर में लगाना चाहता है। आप चाहें तो बाहर बाजार से ख़रीद सकते हैं। इसमें आपको कोई मुश्किल नहीं होगी।'
हम लोग वहां से निकल कर बगल के वन विहार में आये। वन विहार में बहुत ऊंचे-ऊंचे और सुन्दर देवदार के वृक्ष लगे हुए थे। 
वन विहार में २००१ में सर्वे हुआ था। इसके अनुसार इसका क्षेत्रफल २४.६८ है। इसमें २४७ पेड़ हैं। उस समय इसमें ४.४६ क्यूबिक मीटर लकड़ी थी। इसके अनुसार इन पेड़ो की कीमत तेईस करोड, ग्यारह लाख चौवन हजार रूपये थी। 
यह एक सुन्दर और हरी भरी जगह है। जिसमें एक छोटा सा तालाब भी है। जिसमें पैडल बोट चला सकते है।
वन विहार से बाहर निकल कर रोड़ पर जाते समय मेरी मुलाकात राजेन्द्र कुमार नामक रोचक व्यक्ति से हुई। उसकी चर्चा अगली बार।

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा
वह सफेद चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी।। यह तो धोखा देने की बात हुई।। पाडंवों ने अज्ञातवास पिंजौर में बिताया।। अखबारों में लेख निकले, उसके बाद सरकार जागी।। जहां हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे की बात हुई हो, वहां मीटिंग नहीं करेंगे।। बात करनी होगी और चित्र खिंचवाना होगा - अजीब शर्त है।। हनुमान जी ने दी मजाक बनाने की सजा।। छोटे बांध बनाना, बड़े बांध बनाने से ज्यादा अच्छा है।। लगता है कि विंडोज़ पर काम करना सीख ही लूं।। गाड़ी से आंटा लेते आना, रोटी बनानी है।। बच्चों का दिमाग, कितनी ऊर्जा, कितनी सोचने की शक्ति।। यह माईक की सबसे बडी भूल थी।। भारत में आधारभूत संरचना है ही नहीं।। सुनते तो हो नहीं, जो करना हो सो करो।। रानी मुकर्जी हों साथ, जगह तो सुन्दर ही लगेगी।। उसकी यह अदा भा गयी।। यह बौद्व मंदिर है न कि हिन्दू मंदिर।। हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गये।। आप, क्यों नहीं, इसके बाल खींच कर देखते।।
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