Blogger
ब्रह्मा के दो भाग: आधे से पुरूष और आधे से स्त्री
- Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
- Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
- Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
हिन्दू मज़हब की एक धारणा, अन्य मज़हबों की तरह, ईश्वर के द्वारा की गयी रचना की बात करती हैं। कृष्ण गीता के ९वें वा ११वें अध्याय के में अर्जुन को समझाते हुऐ कहते हैं,
‘गतिर्भर्ता प्रभु: साक्षी निवास: शरणं सुहृत्।
प्रभव: प्रलय: स्थानं निधानं बीजमव्ययम्।।१८।।’
गति- कर्मफल, भर्ता- सबका पोषण करनेवाला, प्रभु-सबका स्वामी, प्राणियों के कर्म और अकर्मका साक्षी, जिसमें प्राणी निवास करते हैं वह वासस्थान, शरण अर्थात् शरण में आये हुए दु:खियों का दु:ख दूर करनेवाला, सुहृत् – प्रत्युपकार न चाहकर उपकार करनेवाला, प्रभव- जगत् की उत्पत्ति का कारण और जिसमें सब लीन हो जाते हैं वह प्रलय भी मैं ही हूँ। तथा जिसमें सब स्थित होते हैं वह स्थान, प्राणियों के कालान्तर में उपभोग करने योग्य कर्मो का भण्डार रूप निधान और अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ अर्थात् उत्पत्तिशील वस्तुओं की उत्पत्ति का अविनाशी कारण मैं ही हूँ।
‘कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्घो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्त:।
ऋतेऽपित्वा न भविष्यन्ति सर्वे येऽवस्थिता: प्रत्यनीकेषु योधा:।।३२।।’![]()
मैं लोकों का नाश करनेवाला बढ़ा हुआ काल हूँ। मैं जिस लिये बढ़ा हूँ वह सुन, इस समय मैं लोकों का संहार करने के लिये प्रवृत्त हुआ हूँ, इससे तेरे बिना भी (अर्थात् तेरे युद्घ न करने पर भी) ये सब भीष्म, द्रोण और कर्ण प्रभृति शूरवीर- योद्घा लोग जिनसे तुझे आशंका हो रही है एवं जो प्रतिपक्षियों की प्रत्येक सेना में अलग-अलग डटे हुए हैं- नहीं रहेंगे ।
मनु स्मृति के प्रथम अध्याय में ३१वां और ३२वां श्लोक में लिखा है।
‘लोकानां तु विवृद्धयर्थं मुखबाहूरूपादत:।
ब्राहाणं क्षत्रियं वैश्यं शूद्रं च निरवर्तयत्।।३१।।’
(फिर उस परमात्मा ने) (लोकानां तु) प्रजाओं अर्थात् समाज की (विवृद्धवयर्थम्) विशेष वृद्धि=शान्ति, समृद्धि एवं प्रगति के लिए (मुखबाहु-ऊरू पादत:) मुख्, बाहु, जंघा और पैर के गुणों की तुलना के अनुसार क्रमश: (ब्राहम्णं क्षत्रिय वैश्यं च शूद्रम्) ब्राहम्ण,क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्ण को ( निरवर्तयत्) निर्मित किया। अर्थात चातुर्वर्ण्य- व्यवस्था का निर्माण किया।।
‘द्विधा कृत्वाऽऽत्मनों देहमर्धेन पुरूषोऽभवत्।
अर्धेन नारी तस्यां स विराजमसृजत्प्रभु:।।३२।।’
वह ब्रह्मा (आत्मन:+देहम् ) अपने शरीर के (द्विधा कृत्वा) दो भाग करके (अर्धेन पुरूष्:) आधे से पुरूष और (अर्धेन नारी) आधे से स्त्री (अभवत्) हो गया (तत्याम्) फिर उस स्त्री में ( स.प्रभु:) उस ब्रह्मा ने ( विराजम्) ‘विराट्’ नामक पुरूष को (असृजत्) उत्पन्न किया।।
हिन्दू मज़हब में भी सृजनवाद है पर इसमें अन्य मज़हबों से एक खास अन्तर है। जहां यह बात अन्य मज़हबों में दस हजार साल के अन्दर हुई थी वहीं हिन्दू मज़हब में यह खरबों साल पहले हुई थी।
आर्थर सी क्लार्क के अनुसार हिन्दू का मज़हब में दिया गया अनुमान ही सही है। वे अपनी पुस्तक प्रोफाईल्स आफ द फ्यूचर (Profiles of the Future) के ग्यारहवें भाग ‘अबाउट टाइम’ (About time) ( पेज १३८ ) में कहते है,
‘Time has been a basic element in all religions … Some faiths (Christianity, for instance) have placed creation and beginning of Time and very recent dates in the past, and have anticipated the end of the Universe in the near future. Other religions, such as Hinduism, have looked back through enormous vistas of Time and forward to even greater ones. It was with reluctance that western astronomers realized that the East was right, and that the age of the Universe is to be measured in billions rather than millions of years – if it can be measured at all.’मज़हबों में समय की धारणा मूलभूत है … अधिकतर मज़हबों में, खास तौर से ईसाई मज़हब में रचना और प्रलय की समय सीमा बहुत कम आंकी गयी है। कुछ मज़हबों जैसे हिन्दू मज़हब में समय सीमा बहुत ज्यादा आंकी गयी है। पश्चिमी खगोलशास्त्रियों ने मुश्किल से माना कि पूरब में आंकी गयी समय सीमा सही है और सृष्टि के रचना की समय सीमा यदि आंकी जा सके तो वह करोड़ों में न होकर खरबों में है।
अगली बार हम बात करेंगे हिन्दू मज़हब में सृष्टि की रचना के सम्बंध में जुड़े, एक अन्य विचार से।
भूमिका।। डार्विन की समुद्र यात्रा।। डार्विन का विश्वास, बाईबिल से, क्यों डगमगाया।। सेब, गेहूं खाने की सजा।। भगवान, हमारे सपने हैं।। ब्रह्मा के दो भाग: आधे से पुरूष और आधे से स्त्री।।
Arthur C. Clarke, Manusmriti, Geeta,
Creationism, Creation according to Genesis, Hindu views on evolution, History of creationism, Islamic creationism, Jewish views on evolution, religion, धर्म,
bible, Bible, Charles Darwin, चार्लस् डार्विन, culture, Family, fiction, life, Life, On the Origin of Species, Religion, Science, spiritual, जीवन शैली, धर्म, धर्म- अध्यात्म, विज्ञान, समाज, ज्ञान विज्ञान,
Hindi Podcast, हिन्दी पॉडकास्ट,
हिन्दी चिट्ठकारों का तो खास ख्याल रखना होता है
कोचीन में, हम लोग ताज मालाबार होटल में रूके थे। होटल में पहुंचते समय अभिलाष, स्वागत कक्ष पर थे। उन्होंने मुस्कुरा कर हम लोगों का स्वागत किया और कहा कि उसने हमें अपग्रेड दे दिया है और हेल्टज रूम में रहने की सुविधा प्रदान की है। मेरे पूछने पर कि उसने ऎसा क्यों किया। उसने कहा, इसकें दो कारण बताये,
‘पहला, हमें पहले पता चल गया था कि हिन्दी चिट्ठाकार उन्मुक्त सपत्नीक आ रहें हैं। हिन्दी चिट्ठाकारों को तो खास कमरा देना ही होता है।’
वाह, हिन्दी चिट्टकारी का यह फायदा तो मुझे मालुम ही न था
‘होटेल में, इस समय हो अच्छे कमरे खाली हैं। आप जब वापस जाएं तो अपने मित्रों को इस होटल के बारे में बताये और उन्हें यह ठहरने के लिये कहें।’
होटेल के बाहर का दृश्य
ताज मालाबार होटल दो भागों में बना हुआ है पहला भाग पुराना है। इसे १९३६ में अंग्रेजों ने बनवायया था। उस समय यह नाविकों के आराम गृह की तरह प्रयोग किया जाता था। बाद में, ताज होटल ने, इसे खरीद लिया। इसमें एक नई बिल्डिंग बनवायी गयी है जो उसके बगल में बहुमंजिली इमारत है। शायद, हम लोगों का आरक्षण बहुमंजिली कमरे में था। अभिलाष ने हमें, हेल्टज रूम में यानी १९३६ में बने कमरे में भेज दिया। अभिलाष ने मुझसे पूछा,
‘इस कमरे में दोनो विस्तर अलग-अलग हैं। यदि आप चाहें तो हम आपको दूसरा कमरा दे सकते हैं जिसमें दोनो बिस्तर साथ साथ हो।’
मैंने जवाब दिया,
‘इस उम्र में हमें इसकी कोई जरूरत नहीं है। यह कमरा चलेगा।’
हम लोग जब कमरे में पहुंचे तो मुझे लगा कि हमारा रात में कोचीन में रूकने का निर्णय सही था। यह होटल भी बहुत अच्छा है और उसका कमरा भी। इस कमरे का भी फर्नीचर और समान, उसी समय की स्टाइल में था। इस कमरे के बाहर देखने पर अप्रवाही जल (Back water) और समुद्र का सुन्दर दृश्य दिखायी पड़ता था।
कुछ साल पहले जब मै एक सम्मेलन में भाग लेने कोचीन आया था तब यहाँ पर ‘ला मेरिडियन’ होटल में ठहरा था। वह होटल भी एक बेहतरीन होटल है पर ताज मालाबार किसी मायने में उससे कम नहीं है।
सुबह मेरी मुलाकात होटेल के दरबान, ऑगस्टीन से हूई। मैं उसका चित्र नहीं ले पाया पर उसने बताया कि वह काम चलाऊ १८ भाषायें बोल सकता है। मैंने जब उससे पूछा कि उसने यह कैसे सीखा तो उसने बताया,
‘कोचीन में विदेशी पर्यटक आते हैं। बस उन्ही से बात करते करते उनकी भाषा सीख ली।’
मैंने ऑगस्टीन से काफी देर बात की। वह मुझे हंसमुख और मिलनसार व्यक्ति लगा।
हम लोग कुमाराकॉम जाने के पहले, कोचीन के दर्शनीय स्थल भी देखने गये थे। उस श्रंखला की अगली चिट्ठी, उसी के बारे में।
क्या कहा, महिलायें वोट नहीं दे सकती थीं।। मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता।। हिन्दी चिट्ठकारों को तो खास ख्याल रखना होता है।।
- Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
- Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
- Linux पर सभी प्रोग्रामो में – सुन सकते हैं।
Taj Malabar hotel,
kerala, केरल, Travel, Travel, travel and places, Travel journal, Travel literature, travel, travelogue, सैर सपाटा, सैर-सपाटा, यात्रा वृत्तांत, यात्रा-विवरण, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,
भगवान, हमारे सपने हैं
इसे आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
- Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
- Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
- Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
हिन्दू मज़हब की एक धारणा के अनुसार, हम सब प्रलय और पुन: जीवन के चक्र में चल रहे हैं। कार्ल सेगन ने खगोल शास्त्र में शोध किया है। उन्होंने विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में कार्य किया है। दो दशक पहले दूरदर्शन में, कार्ल द्वारा बनाया गया ‘कॉस्मॉस्’ नामक सीरियल आया था। इसमें ब्रह्मांड विज्ञान और सभ्यता के विकास की कहानी को बताया गया था। बाद में, इसी सीरियल पर, इसी नाम से उनकी पुस्तक भी प्रकाशित हुई थी। इसमें, कार्ल कहते ( पेज २८५) हैं,
‘The Hindu religion is the only one of the world’s great faith dedicated to the idea that the Cosmos itself undergoes and immense, indeed an infinite number of deaths and rebirths. It is the only religion in which the time scales correspond, no doubt by accident, to those of modern scientific cosmology. Its cycles run from our ordinary day and night to a day and night of Brahma, 8.64 billion years long, longer than the age of the Earth or the Sun and about half the time since the Big Bang. And there are much longer time scales still.
There is the deep and appealing notion that the universe is but the dream of the god who, after a hundred Brahama years, dissolves himself into a dreamless sleep. The universe dissolves with him – until, after another Brahma century, he stirs, recomposes himself and begins again to dream the great cosmic dream. Meanwhile, elsewhere, there are an infinite number of other universes, each with its own god dreaming the cosmic dream. These great ideas are tempered by another, perhaps still greater. It is said that men may not be the dreams of the gods, but rather that the gods are the dreams of men.’
हिन्दू मज़हब, संसार के प्रसिद्ध मज़हबों में से एक है। केवल इसी में मान्यता है कि सृष्टि रचना और प्रलय के अनन्त चक्र में चलती है। इसमें दिया गया सृष्टि रचना का समय, आधुनिक विज्ञान के सबसे करीब है … यह चक्र खरबों साल का है …
इसमें मान्यता है कि सृष्टि, ईश्वर के सपने हैं, जो एक ब्रह्मा शताब्दी में समाप्त होती हैं और अगली ब्रह्मा शताब्दी में पुनः इसकी रचना होती है … पर शायद मानव ईश्वर के सपने न होकर, ईश्वर ही मानव के सपने हैं।
रचना और प्रलय का चक्र, ब्रह्मा शताब्दी से जुड़ा है। यह हमारी शताब्दी के बराबर नहीं है पर उससे कहीं बड़ी है। यह कितना बड़ी है यह भी पुराने समय से, गणित की एक पहली के रूप में बताया जाता है। इस पहेली के जिक्र मैंने ‘२ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कम्पयूटर विज्ञान‘ श्रंखला की इस कड़ी में भी किया है। इसे मैंने अपने बचपन में गुणाकर मुले की पुस्तक ‘गणित की पहेलियाँ’ नाम से लिखी है। इसमें एक अध्याय ‘अंकगणित की पहेलियाँ’ नाम से है। इसमें इस पहेली का वर्णन कुछ इस तरह से है:
‘कथा बहुत प्राचीन है। उस समय काशी में एक विशाल मन्दिर था। कहा जाता है कि ब्रम्हा ने जब इस संसार की रचना की, उसने इस मंदिर में हीरे की बनी हुई तीन छड़ें रखी और फिर इनमें से एक में छेद वाली सोने की ६४ तश्तरियां रखीं सबसे बड़ी नीचे और सबसे छोटी सबसे उपर। फिर ब्रम्हा ने वहां पर एक पुजारी को नियुक्त किया। उसका काम था कि वह एक छड की तश्तरियां दूसरी छड़ में बदलता जाए। इस काम के लिए वह तीसरी छड़ का सहारा ले सकता था परन्तु एक नियम का पालन जरूरी था। पुजारी एक समय केवल एक ही तश्तरी उठा सकता था और छोटी तश्तरी के उपर बड़ी तश्तरी वह रख नहीं सकता था। इस विधि से जब सभी ६४ तश्तरियां एक छड़ से दूसरी छड़ में पहुंच जाएंगी, सृष्टि का अन्त हो जाएगा।
आप कहेंगे,
“तब तो कथा की सृष्टि का अन्त हो जाना चाहिए था। ६४ तश्तरियों को एक छड़ से दूसरी छड़ में स्थांतरित करने में समय ही कितना लगता है।”नहीं, यह ‘ब्रम्ह-कार्य’ इतनी शीघ्र समाप्त नहीं हो सकता। मान लीजिए कि एक तश्तरी के बदलने में एक सेकेंड का समय लगता है। इसके माने यह हुआ कि एक घंटे में आप ३६०० तश्तरियां बदल लेंगे। इसी प्रकार एक दिन में आप लगभग १००,००० तश्तरियों और १० दिन में लगभग १,०००,००० तश्तरियां बदल लेंगे।
आप कहेंगे,
“इतने परिवर्तनों में तो ६४ तश्तरियां निश्चित रूप से एक छड़ से दूसरी छड़ में पहुंच जाएंगी।”लेकिन आपका अनुमान गलत है । उपरोक्त ‘ब्रम्ह-नियम’ के अनुसार ६४ तश्तरियों को बदलने में पुजारी महाशय को कम से कम ५,००,००,००,००,००० (पांच खरब) वर्ष लगेंगे।
इस बात पर शायद यकायक आप विश्वास न करें । परन्तु गणित के हिसाब से कुल परिवर्तनों की संख्या २६४-१, अर्थात १८,४४६,७४४,०७३,७०९,५५१,६१५ होती है,’
यह संख्या इतनी बड़ी है कि मैं नहीं जानता कि इसे शब्दों में क्या कहा जाय। क्या आप को मालुम है?
कार्ल सेगन की तरह, फ्रिटजॉफ कापरा ने भी विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए अपना योगदान दिया है। इन्होंने वियना विश्वविद्यालय से भौतिक शास्त्र में शोध किया है। कापरा के अनुसार भी हिन्दुवों की कई मान्यतायें आधुनिक विज्ञान के सबसे करीब है। वे अपनी पुस्तक ‘द टॉओ ऑफ फिज़क्सि’ (पेज २५६-२५९) में कहते हैं,
The Eastern mystics have a dynamic view of the universe similar to that of modern physics, and consequently it is not surprising that they, too, have used the image of the dance to convey their intuition of nature.
…
The metaphor of the cosmic dance has found its most profound and beautiful expression in Hinduism in the image of the dancing god Shiva. Among his many incarnations, Shiva, one of the oldest and most popular Indian gods, appears as the King of Dancers. According to Hindu belief, all life is part of a great rhythmic process of creation and destruction, of death and rebirth, and Shiva’s dance symbolizes this eternal life-death rhythm which goes on in endless cycles.
…
For the modern physicists, then, Shiva’s dance is the dance of subatomic matter. As in Hindu mythology, it is a continual dance of creation and destruction involving the whole cosmos; the basis of all existence and of all natural phenomena. Hundreds of years ago, Indian artists created visual images of dancing Shivas in a beautiful series of bronzes. In our time, physicists have used the most advanced technology to portray the patterns of the cosmic dance. The bubble-chamber photographs of interacting particles, which bear testimony to the continual rhythm of creation and destruction in the universe, are visual images of the dance of Shiva equalling those of the Indian artists in beauty and profound significance. The metaphor of the cosmic dance thus unifies ancient mythology, religious art and modern physics.
पूर्वी सन्तों की सृष्टि की कल्पना, आधुनिक भौतिक शास्त्रियों के अनुसार है। आश्चर्य नहीं कि इसलिये प्रकृति को समझाने के लिये नृत्य का सहारा लिया।
…
हिन्दू मज़हब में इसे शिव के नृत्य द्वारा सबसे बेहतरीन तरीके से समझाया गया है। यह नृत्य रचना-प्रलय जीवन-मृत्यु का प्रतीक है।
…
आधुनिक भौतिक शास्त्रियों के लिये शिव का नृत्य मूल कणों का नृत्य है …
तो क्या हिन्दू मज़हब में सृजनवाद नहीं है? यदि है तो वह कहां है? इसके बारे में अगली बार।
कार्ल सेगन और शिव का नृत्य करता चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से है।
डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े
भूमिका।। डार्विन की समुद्र यात्रा।। डार्विन का विश्वास, बाईबिल से, क्यों डगमगाया।। सेब, गेहूं खाने की सजा।। भगवान, हमारे सपने हैं।।
Creationism, Creation according to Genesis, Hindu views on evolution, History of creationism, Islamic creationism, Jewish views on evolution, religion, धर्म,
bible, Bible, Charles Darwin, चार्लस् डार्विन, culture, Family, fiction, life, Life, On the Origin of Species, Religion, Science, जीवन शैली, धर्म, धर्म- अध्यात्म, विज्ञान, समाज, ज्ञान विज्ञान,
Hindi Podcast, हिन्दी पॉडकास्ट,


![Reblog this post [with Zemanta]](http://img.zemanta.com/reblog_e.png?x-id=8d7621c4-7be1-4577-9a0b-6b6271b54faf)
![Reblog this post [with Zemanta]](http://img.zemanta.com/reblog_e.png?x-id=f2632934-962b-46c7-9be5-08a53c5e50a8)