05/9/11

अन्तरजाल, एकांतता का अन्त है

यह चिट्ठी साइबर अपराध श्रृंखला का निष्कर्ष है।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर दाहिने तरफ का पृष्ट, "'बकबक' पर पॉडकास्ट कैसे सुने" देखें।
चित्र विकिपीडिया से


इस समय जितने साइबर अपराध हो रहें हैं वे सारे रिपोर्ट नहीं हो रहें शायद न लोगों का समझ में आता है कि उनसे कैसे निपटा जाय और न ही उन्हें विश्वास है कि इसका संतोषजनक हल निकल सकता है। सच यह भी है कि  इस समय हमारे पास इस तरह के अपराधों को जांच करने के लिये न ही प्रशिक्षित अन्वेषक हैं और न ही तय करने वाले न्यायधीश। लेकिन यह बदल रहा है।

लोग अक्सर साइबर अपराध यह सोच कर करते हैं कि वे अज्ञात हो कर साइबर अपराध कर सकते हैं लेकिन यह सच नहीं है। 


पीटर स्टेनर (Peter Steiner) ने ५, जुलाई में न्यू यॉर्कर  में एक कार्टून निकाला था। यह अपने आप में मील का पत्थर था। इसमें दो कुत्ते कम्युटर पर बैठे हैं। वह कुत्ता जो कम्यूटर पर काम कर रहा है वह दूसरे से कहता है कि  

'On the Internet, nobody knows that you are a dog.'
अन्तरजाल पर कोई नहीं जानता कि आप एक कुत्ते हैं।
लेकिन यह अन्तरजाल का विरोधाभास है, धोखा है। यही अन्तरजाल पर साइबर अपराधों की जड़ है। लोग समझते हैं कि वे अन्तरजाल पर अज्ञात रह कर अपराध कर सकते हैं। लेकिन यह सच से परे है। सच तो यह है कि,   
'On the Internet, everybody knows that you are a dog.'
अन्तजाल पर सबको मालुम है कि आप कुत्ते हैं।

आने वाले समय में, न ही इस तरह के अपराधों की जांच करने वाले अन्वेषक भी बढ़ेगें, न्यायधीश भी सीखेंगे और लोगों का इस का विश्वास होगा कि इनका संतोषजनक हल निकाला जा सकता है। साइबर अपराधी बच कर नहीं जा सकता। वह हमेशा पकड़ा जा सकता है। अन्तरजाल पर कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है। अन्तरजाल एकांतता का अन्त है।


बहुत जल्द फिर मिलेंगे एक नयी श्रंखला के साथ मिलेंगे।



तू डाल डाल, मैं पात पात
भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।। नाई, महिला है।। मिस्टर व्हाई - यह कौन हैं।। गणित, चित्रकारी, संगीत - क्या कोई संबन्ध है।। क्या कंप्यूटर व्यक्तियों की जगह ले सकते हैं।। भाषायें लुप्त हो जाती हैं - गणित के सिद्घान्त नहीं।। ऐसा कोई कंप्यूटर नहीं, जिसे हैक न किया जा सकता हो।। साइबर या कंप्यूटर कानून क्या होता हैभारत में साइबर कानून।। साइबर कानून का उल्लंघन और उसके उपाय।। कंप्यूटर या सर्वर को लक्षय कर किये गये साईबर अपराध।। साइबर अपराध, जिनका लक्षय कंप्यूटर नहीं होता है।। अन्तरजाल, एकांतता का अन्त है।।


About this post in Hindi-Roman and English 
yeh chitthi cyber apradh shrankhla ka nishkarsh hai. yeh batata hai anterjaal ekantataa ka ant hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post talks is the conclusion of cyber crime series. It explains that Internet is the end of the privacy. You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. 

सांकेतिक शब्द

। Peter, Steiner, The New Yorker, On the Internet, nobody knows that you are a dog,
। Cyberlaw, Computer law, Internet law, Legal aspects of computing
Hindi, पॉडकास्ट, podcast,
04/22/11

साइबर अपराध, जिनका लक्षय कंप्यूटर नहीं होता है

इस चिट्ठी में उन साइबर अपराधों की चर्चा है, जो कंप्यूटर का प्रयोग करके किये जाते हैं पर उनका लक्षय कंप्यूटर या सर्वर नहीं होता है।

इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर दाहिने तरफ का पृष्ट, "'बकबक' पर पॉडकास्ट कैसे सुने" देखें।


बहुत से साइबर अपराध, कंप्यूटर का प्रयोग करके किये जाते हैं पर उनका लक्षय कंप्यूटर या सर्वर नहीं होता है। इस तरह के अपराधों को मुख्यतः निम्न श्रेणी में बांटा जा सकता है।

साइबर आतंकवाद (Cyber Terrorism)
साइबर गतिविधियों के द्वारा धार्मिक, राजनैतिक उन्माद पैदा करना साइबर आतंकवाद के अन्दर आता है। यह किसी भी देश की आंतरिक सुरक्षा को समाप्त कर सकता है।
 

आर्थिक अपराध
इस समय अधिकतर बैंक का काम अन्तरजाल पर हो रहा है। व्यापार भी अन्तरजाल पर हो रहा है। क्रेडिट कार्ड से गलत तरह से पैसा निकाल लेना। ऑनलाइन व्यापार या बैकिंग में धोखाधडी करना - यह सब आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है।

 
फिशिंग (Phishing)
अक्सर कुछ ऎसे ईमेल मिलते है जिससे प्रतीत होता है कि वे किसी बैंक में या किसी अन्य संस्था की बेब साइट से हैं। यह आपके बैंक के खाते या अन्य व्यक्तिगत सूचना पूछने का प्रयत्न करते हैं। ये सारी ई-मेल फर्जी है और यह आपकी व्यक्तिगत सूचना को जानकर कुछ गड़बड़ी पैदा कर सकते है। इसे फिशिंग कहा जाता है। इस तरह की ईमेल का जवाब न दें। मेरी पत्नी शुभा, एक बार इनके जाल में फंस चुकी है। हमें सारे पासवर्ड बदलने पड़े।
 

साइबर छल (Cyber Fraud)
अक्सर ई-मेल ,एसएमएस मिलते है कि भेजने वाली विधवा है जिसके पति का बहुत सारा पैसा फंसा हुआ है और वह  पैसा निकालने में आपकी सहायता चाहती है। इस तरह के भी ईमेल या एसएमएस आते हैं कि आपके  ई-मेल या फोन नम्बर ने करोड़ों की लॉटरी जीत ली है, जिसे पाने के लिए सम्पर्क करें। यह सब फर्जी होता है। यह धोखाधडी  कर, आपको फसाना चाहते हैं। यह साइबर अपराध है और इस पर कभी भी अमल नहीं करना चाहिए।
 

साइबर जासूसी (Cyber Espionage)
इसे एडवेयर (Adware) या स्पाईवेयर (Spyware) भी कहा जाता है। आपके कंप्यूटर में कभी आपकी अनुमति से कभी बिना अनुमति के स्थापित हो जाते हैं। यह आपकी गतिविधियों की आपकी व्यक्तिगत सूचना एकत्र कर, अन्य को देतें है। जिसके द्वारा वे स्थापित किये जाते हैं। यह हमेशा आपके कंप्यूटर को धीमा भी कर देते हैं।
 

पहचान की चोरी (Identify Theft)
किसी व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति की पहचान चोरी करना या उसका इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर को हैक करना या किसी अन्य के नाम से फर्जी काम करना ,पहचान की चोरी कहलाता है। अपने पास वर्ड में नम्बर तथा तथा वर्णमाल दोनो का प्रयोग करें। उसे बदलते रहें। किसी को न बतायें।
 

स्पैम (Spam)
स्पैम माने अनचाही ई-मेल। यह भी साइबर अपराध  है। हिन्दी चिट्ठाजगत में, यह काफी है। अक्सर चिट्ठाकार बन्धु आपको अपनी चिट्ठी भेज कर उनकी चिट्ठियों को पढ़ने के लिये कहते हैं। यह गलत है। आप इस तरह का ईमेल तभी किसी व्यक्ति को भेजें जब उस व्यक्ति से आप उस चिट्ठी में कुछ करने के लिये कहते हैं या उसके बारे में लिखते हैं। यह न केवल अन्तरजाल शिष्टाचार के विरुद्ध है पर साइबर अपराध भी है।
 

स्पिम (Spim)
यदि स्पैम अनचाहे ई-मेल है तो स्पिम अन्तरजाल के बातों के दौरान अनचाही बातें।
 

अन्तरजाल पर पीछा करना (Cyber Stalking)
पीछा करना, तंग करना, इस हद तक घूरना कि दूसरा खीज जाये, डर जाय। यही काम जब अन्तरजाल पर हो तो साइबर स्टॉकिंग कहलाता है।
 

अशलीलता
अशलील ईमेल, अशलील चित्र, चित्रों को बदल कर किसी अन्य का चित्र लगा देना, यह
सब अशलीलता के अन्दर आता है। इस तरह के साइबर अपराध सबसे अधिक हैं। इसकी चर्चा, मैंने 'अन्तरजाल की माया नगरी में' श्रृंखला में किया था। 


अगली बार चर्चा करेंगे इस श्रंखला के निष्कर्ष की।


तू डाल डाल, मैं पात पात
भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।। नाई, महिला है।। मिस्टर व्हाई - यह कौन हैं।। गणित, चित्रकारी, संगीत - क्या कोई संबन्ध है।। क्या कंप्यूटर व्यक्तियों की जगह ले सकते हैं।। भाषायें लुप्त हो जाती हैं - गणित के सिद्घान्त नहीं।। ऐसा कोई कंप्यूटर नहीं, जिसे हैक न किया जा सकता हो।। साइबर या कंप्यूटर कानून क्या होता हैभारत में साइबर कानून।। साइबर कानून का उल्लंघन और उसके उपाय।। कंप्यूटर या सर्वर को लक्षय कर किये गये साईबर अपराध।। साइबर अपराध, जिनका लक्षय कंप्यूटर नहीं होता है।।

 

About this post in Hindi-Roman and English  is chitthi mein, un cyber apradhon kee charchaa hai jinka laksch computer ya server naheen hota hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post talks about those cyber crimes, where the computer or server is not the object. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. 

सांकेतिक शब्द
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03/4/11

कंप्यूटर या सर्वर को लक्षय कर किये गये साईबर अपराध

इस बार चर्चा का विषय है - साइबर अपराधों का वर्गीकरण और कंप्यूटर या सर्वर को लक्षय कर, होने वाले साइबर अपराध।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर दाहिने तरफ का पृष्ट, "'बकबक' पर पॉडकास्ट कैसे सुने" देखें।
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साईबर अपराधों को मुख्यतः दो श्रेणी में बांटा जा सकता है
  • पहला, जहां कंप्यूटर या सर्वर लक्षय है;
  • दूसरा, जहां कंप्यूटर का प्रयोग अपराध करने के लिये किया जाता है पर उनका लक्षय कंप्यूटर या सर्वर नहीं होता है।  
दूसरे तरह साईबर अपराधों को भी दो तरह से बांटा जा सकता हैं
  • पहला, जो आपकी सम्पति के विरुद्ध हैं;
  • दूसरा यौन और एकांतता से सम्बन्धित हैं।
हांलाकि इन श्रेणियों की सीमायें ठीक प्रकार से परिभाषित नहीं हैं। कुछ अपराध एक से अधिक श्रेणी में भी रखे जा सकते हैं।
 

आज चर्चा करते हैं पहली श्रेणी के अपराधों के बारे में।
 

डिनायल आफ सर्विस (Denial of Service) (DoS)
अलग अलग वेब साइटें, अलग तरह की सेवायें देते हैं। यदि उस वेबसाइट पर बहुत सारी ई-मेल भेज दी जांय या हिट होने लगें, तब उसका कानूनन प्रयोग करने वाले, उसकी सेवायें नही ले पाते हैं। वह बंद हो जाती है। इसे डिनायल आफ सर्विस कहते हैं।

वायरस ( Virus)
कम्यूटर में  वायरस दूषित पेन ड्राइव, या फलॉपी या सीडी लगाने से आ सकते हैं यह किसी ई-मेल से भी मिल सकते हैं। यह आपके कम्पयूटर के डाटा को समाप्त कर सकता है। इसके लिए किसी भी ईमेल के साथ लगे संलग्नक को मत खोलिये, यदि वह किसी आपके जानने वाले व्यक्ति ने न भेजा हो।

वेबसाइट हैकिंग और डाटा की चोरी
कंप्यूटर डाटा भी कॉपीराइट की तरह सुरक्षित होता है। बहुत से कंप्यूटरों, वेबसाइटों में  डाटा गुप्त, या निज़ी, या फिर गोपनीय होता है। वेब साइट या कंप्यूटर को हैक कर इसे  कॉपी या नष्ट करना, इसी श्रेणी में आता है।

अगली बार, उन अपराधों के बारे में बात जो कंप्यूटर का प्रयोग करके किये जाते हैं पर उनका लक्षय कंप्यूटर या सर्वर नहीं होता है।


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भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।। नाई, महिला है।। मिस्टर व्हाई - यह कौन हैं।। गणित, चित्रकारी, संगीत - क्या कोई संबन्ध है।। क्या कंप्यूटर व्यक्तियों की जगह ले सकते हैं।। भाषायें लुप्त हो जाती हैं - गणित के सिद्घान्त नहीं।। ऐसा कोई कंप्यूटर नहीं, जिसे हैक न किया जा सकता हो।। साइबर या कंप्यूटर कानून क्या होता हैभारत में साइबर कानून।। साइबर कानून का उल्लंघन और उसके उपाय।। कंप्यूटर या सर्वर को लक्षय कर किये गये साईबर अपराध।।

 




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This post talks about classification of of cyber crime as well as explains those cyber crimes where computer or server is the object. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. 

सांकेतिक शब्द
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01/5/11

भारत में साइबर कानून

सूचना प्रौद्योगिकी के कारण कानून के हर क्षेत्र में मुश्किले आयीं। इस बार चर्चा का विषय है कि उनको दूर करने के लिये, अपने देश में किस प्रकार के और किस क्षेत्र में कानून बनाये गये।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर दाहिने तरफ का पृष्ट, "'बकबक' पर पॉडकास्ट कैसे सुने" देखें।

हमारी संसद जहां यह कानून बनाये गये चित्र विकिपीडिया से
इस नयी तकनीक के कारण पैदा हुई मुशकलों का हल निकालने के लिये सबसे पहले अपने देश में कानून में बदलाव, बौद्धिक सम्पदा अधिकार के क्षेत्र में किया गया। 

कॉपीराइट अधिनियम को १९९४ एवं १९९९ में संशोधित कर, इस तकनीक के द्वारा लायी गयी और मुश्किलों को दूर किया गया।

२००२ में, पेटेंट अधिनियम में भी संशोधन किया गया। इस बारे में आप यहां विस्तार से पढ़ सकते हैं। 

२००४ में एक अध्यादेश के द्वारा, पेटेंट अधिनियम में किये गये संशोधन को स्पष्ट करने का प्रयत्न किया गया। लेकिन जब यह अध्यादेश, २००५ में अधिनियम के रूप में लाया गया तब इस स्पष्टीकरण को अधिनियम में नहीं जोड़ा गया। इसका अर्थ यह हुआ कि पेटेंट अधिनियम में, २००२ में किया गया संशोधन ही लागू है।

इस क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण अधिनियम २००० में, सूचना प्रोद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) (आईटी अधिनियम) के नाम से बनाया गया। इस नियम के अन्तर्गत चार अधिनियमों में भी संशोधन कया गया। यह चार हैं

  1. The Indian Penal Code, 1860;
  2. The Indian Evidence Act, 1872;
  3. The Bankers’ Book Evidence Act, 1891;
  4. The Reserve Bank of India Act, 1934.

इस समय तीन तकनीकियां - इंटरनेट, टेलीफ़ोन, और टेलीविजन आपस में मिलते जा रहे हैं। वह समय दूर नहीं है जब तीनो मिल जायेगें। इस तकनीकियों के फायदों का ठीक प्रकार से लाभ उठाने के लिए, एक अधिनियम बनाने की बात सोची गयी। इस का नाम Communication of Convergence Bill है। यह बिल संसद समिति के सामने भेज दिया गया था। समिति ने,  हर क्षेत्र के लोगों से अलग अलग  बात करने के बाद  यह पाया कि इसको बनाने के बारे में विरोधाभास है।
  • एक विचारधारा के लोग यह कहते थे कि सरकार को यह अधिनियम नहीं बनाना चाहिए;
  • दूसरी विचारधारा के लोगों का कहना था कि इसे बनाना चाहिए।
इन दोनों विचारधाराओं को बताते हुए, समिति ने अपनी रिपोर्ट दी। इस रिपोर्ट में लिखे विरोधाभास के कारण, यह बिल अभी भी अधिनियम के रूप में नहीं बन पाया।

कम्यूनिकेशन कंर्वजन बिल अधिनियम के रूप में तो नहीं बन पाया। लेकिन इसमें बहुत सारे ऎसे प्राविधान थे जो कि वास्तव में बेहतरीन थे। 


सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में २००८ में संशोधन किया गया और कम्यूनिकेशन कंर्वजेन्स बिल के कई प्रावधानों को,  संशोधन के द्वारा इसमे सम्मिलित कर लिया गया है। हांलाकि इस संशोधन के बाद भी, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम सारी कमियां दूर नहीं हुई है। बहुत कुछ करना बाकी है। देखिय वह कब तक हो पाता है।
 

साइबर कानून का किस तरह से उल्लंघन हो सकता है इसकी चर्चा अगली बार।

तू डाल डाल, मैं पात पात

भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।। नाई, महिला है।। मिस्टर व्हाई - यह कौन हैं।। गणित, चित्रकारी, संगीत - क्या कोई संबन्ध है।। क्या कंप्यूटर व्यक्तियों की जगह ले सकते हैं।। भाषायें लुप्त हो जाती हैं - गणित के सिद्घान्त नहीं।। ऐसा कोई कंप्यूटर नहीं, जिसे हैक न किया जा सकता हो।। साइबर या कंप्यूटर कानून क्या होता है। भारत में साइबर कानून।।

 


About this post in Hindi-Roman and English  suchna prdyogiki ke karan her chhetra mein mushkilen aa rhee hain. is chitthi mein , inko door karne ke liye banaye kanoonon kee charchaa hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

Information Technology has caused problems in every field. This post narrates  the laws  made in our country to remove them. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. 

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06/11/10

नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, गणित के तर्क शास्त्र पर चलता है। कंप्यूटर वायरस, इसकी कमियों का फायदा उठाते हैं। इसलिये साइबर अपराध की श्रृंखला में, साइबर अपराधों के बारे में बात करने से पहले, कुछ बातें  गणित के प्रसिद्ध २३ सवालों, और तर्क शास्त्र के क्षेत्र से, स्वयं को संदर्भित करने वाले विरोधाभास के बारे में। 
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने'
देखें।

अक्सर समझा जाता है कि गणित अपने में सम्पूर्ण विषय है। लेकिन यह सच नहीं है। १९वीं शताब्दी के समाप्त होते होते गणितज्ञों को अपने विषय के बुनियादी सिद्वान्तों के बारे में शक होने लगा। वे गणित के अलग अलग क्षेत्रों के मूलभूत सिद्वान्तों के सबूत ढूंढने लगे।

गणित के बारे में सबसे महत्वपूर्ण सम्मेलन इंटरनेशनल काँग्रेस ऑफ मैथमैटीशियनस् (आईसीएम) (International Congress of Mathematicians) है। इसका आयोजन इंटरनेशनल मैथमैटकल यूनियन (आईएमयू) (International Mathematical Union) करती है। यह सम्मेलन चार साल में एक बार होता है। इसमें पिछले चार साल में गणित का लेखा जोखा देखा जाता है और भविष्य में गणित की राह।

इस बार आईसीएम, १९-२७ अगस्त २०१० के दौरान, हैदराबाद में हो रहा है। यह एक महत्वपूर्ण सम्मेलन है और ऐशिया में तीसरी बार हो रहा है। इसकी वेबसाइट में इस सम्मेलन के पोस्टर हैं। उसका एक पोस्टर आप दाहिने तरफ देख रहे हैं और दूसरे पोस्टर से यह संस्कृत का श्लोक आपके लिये।
यह चित्र आईसीएम २०१० की वेबसाइट के सौजन्य से
यथा शिखा मयूराणां नागानां मण्यो यथा।
तथा वेदाङ्गशास्त्राणां गणितं मूर्धनि स्थितम्।।
जिस तरह से,
मोरों के सिर पर कलगी,
सापों के सिर में मणियां,
उसी तरह विज्ञान का सिरमौर गणित।।

शायद आराधना जी जो कि संस्कृत विदुषी हैं या कोई अन्य संस्कृत ज्ञानी बता सके कि यह श्लोक कहां से है और क्या इसका अनुवाद सही है?

गणित में नोबल पुरस्कार नहीं मिलता है। इसका कारण स्पष्ट नहीं है। नोबल ने शादी नहीं की थी। लेकिन कई कहते हैं कि वे साइने लिंडफोर्स (Signe Lindfors) से प्रेम करते थे। उसने उनका प्रेम न स्वीकार कर, गणितज्ञ गोस्टा मिटंग लेफर {Magnus Gustaf (Gösta) Mittag-Leffler}  से शादी कर ली। इससे क्रोधित होकर, उन्होंने गणित में नोबल पुरुस्कार नहीं रखा। शायद यह सच नहीं है। नोबल ने शायद गणित का महत्व ही नहीं समझा।
चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से

गणित में सबसे महत्वपूर्ण पुरस्कार फील्डस् मेडल (Field's Medal) है। यह पुरस्कार इसी आईसीएम में दिया जाता है। चूकिं यह चार साल में एक बार होती है इसलिये यह अधिक से अधिक चार लोगों को दिया जाता है। इसमें अधिकतम आयु सीमा ४० वर्ष की है।


आईसीएम में, आईएमयू स्कॉलर एवार्ड (IMU Scholar Award) भी दिया जाता है। यह पुरुस्कार नवोदित (३५ सालसे कम उम्र) गणितज्ञों को दिया जाता है। बहुत साल पहले शुभा को इसमें जाने का मौका मिला था। उसे आईएमयू स्कॉलर पुरस्कार मिल चुका है। मैं उसके पीछे पड़ा हूं कि वह इस सम्मेलन के बारे में अपने चिट्ठे पर लिखे। देखिये वह कब लिखती है। पत्नियां कब पतियों की बात मनाती हैं :-( वह जब लिखेगी तब देखा जायगा, हम लोग उसके लिये क्यों रुकें, चलिये आगे चलते हैं।

डेविड हिल्बर्ट का चित्र विकिपीडिया से

वर्ष १९०० की आईसीएम पेरिस में हुई थी। इसमें डेविड हिल्बर्ट ने २३ प्रश्नों को रखा था उसका कहना था कि इन मुश्किलों का हल ही गणित को नयी ऊँचाइयों तक ले जा सकता है। इसमें कुछ का हल तो निकाला जा सका है पर कईयों का नहीं।

इन प्रश्नों के, दूसरे प्रश्नों में सिद्घ करना कि,

'Mathematical reasoning is reliable, it should not lead to contradictory results'
गणित का तर्क विश्वसनीय है। यह विरोधाभास को जन्म नहीं दे सकता।

वर्ष १९२८ की आईसीएम बोलोन्या इटली (Bologna, Italy) में हुई। यहां पर हिल्बर्ट ने पुन: विचार किया,
'If it was possible to prove every true mathematical statement or can there be truly formal logical system for mathematics, where every statement could either be proved or disproved.
क्या यह संभव है कि प्रत्येक गणित के कथन को सिद्घ किया जा सके। दूसरे शब्दों में क्या गणितीय तर्क का ऐसा संसार हो सकता है जहां सही अथवा गलत कथन सिद्घ किये जा सके।

यह प्रश्न गणित के तर्क शास्त्र के क्षेत्र का है। इसमें सबसे मुश्किल स्वयं को संदर्भित करते हुए विरोधाभास (self referencing paradoxes) की है।

ऍपीमेनेडीज़ का चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से

स्वयं को संदर्भित करते विरोधाभास में सबसे प्रसिद्घ विरोधाभास ऍपीमेनेडीज़ या लाएरस् विरोधाभास (Epimenides' or liar's paradox) है। ऍपीमेनेडीज़ एक ग्रीक दार्शनिक थे और ईसा के ६०० साल पहले क्रीट में रहते थे। उन्होंने एक महत्वपूर्ण कथन किया,
'The Cretans are always liars.'
सारे क्रीटवासी हमेशा झूठ बोलते हैं।
यदि आप इनको सच माने तो यह झूठ बन जाती है और इसे झूठ माने तो यह सच हो जाती है। यही इसका विरोधाभास है।

बट्रेंड रसेल (Bertrand Russell) न केवल एक प्रसिद्व दार्शनिक थे बल्कि वह एक गणितज्ञ भी थे। उन्होंने सौ साल पहले इस विरोधाभास को नयी तरह से रखा। जिसको रसेल विरोधाभास या नाई का विरोधाभास (Russell's or Barber's paradox) भी कहा जाता है। यह कुछ इस प्रकार है,
'एक गांव में केवल एक ही नाई था। उसने कहा कि वह उन लोगों की दाढ़ी बनाता है जो स्वयं अपनी दाढ़ी न बनाते हो।'
इस कथन में कोई भी मुश्किल नहीं है जब तक आप यह सवाल न पूछें कि,
'नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है?'
यदि नाई अपनी दाढ़ी स्वयं बनाता है तो उसके कथनानुसार उसे अपनी दाढ़ी नहीं  बनानी चाहिए। यदि वह अपनी दाढ़ी नहीं बनाता है तो उसके कथनानुसार अपनी दाढ़ी बनानी चाहिए।

रसेल और व्हाइटहैड (Whitehad) ने इस तरह के विरोधाभास को समाप्त करने के लिए वर्ष १९१३ में अंकगणित की एक प्रसिद्घ पुस्तक प्रिंसिपिया मैथमैटिका (Principia Mathematica) नाम से प्रकाशित की।  उनके विचार से उन्होंने इसका हल निकाल लिया था।  क्या यह सच था - यह इस श्रृंखला की अगली कड़ी में। 

लाऍरस् विरोधाभास का एक रूप और भी देखिये। शायद यह बेहतर समझ में आये :-)

पुनः (१) मैंने कुछ समय पहले मार्टिन गार्डनर को श्रद्धांजलि देते समय सुझाव दिया था कि क्या अच्छा हो कि कोई विश्वविद्यालय उनके सम्मान में कोई कॉंफरेन्स या सम्मेलन करे। आईसीएम २०१० के आयोजकों को भी मैंने यह सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि यह मुश्किल है क्योंकि सब पहले से तय हो गया है पर वे प्रयत्न करेंगे। देखिये यह हो पाता है कि नहीं।

(२)  १९२८ की आईसीएम Bologna, Italy में हुई थी। मैंने शहर का नाम बोलगाना लिखा था। राम चन्द्र मिश्र जी इटली में शोद्ध करते हैं। उन्होंने टिप्पणी करके बताया कि इसे बोलोन्या कहते हैं। उनको मेरा धन्यवाद।

(३) मैथली गुप्त जू बलॉगवाणी के संचालक हैं। उन्होंने टिप्पणी कर के बताया कि यह श्लोक सुधाकर द्विवेदी जी द्वारा लिखित ज्योतिष ग्रंथ याजुष ज्योतिष (Yajush Jyotish) के इस पन्ने से लिया गया है। मेरा उनको धन्यवाद। मुझे अच्छा लगेगा यदि कोई चिट्टाकार बन्धु इस ग्रंथ एवं इस श्लोक के संदर्भ की व्याख्या कर उसे प्रकाशित करे। 

(४) प्रेत विनाशक जी ने टिप्पणी कर बताया कि उपरोक्त श्लोक मूल रूप से लगध ऋषि द्वारा रचित ’वेदांग ज्योतिष’ नामक ग्रंथ से लिया गया है। लगध ऋषि का काल १३५० ई. पूर्व का माना जाता है। वे भारतीय ज्ञान परम्परा में प्राचीनतम विद्वानों में से हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि सुधाकर द्विवेदी जी ने अपनी पुस्तक में इस श्लोक को मात्र संदर्भित किया है। वे इसके लिये इस पेज को भी देखने को कहते है। यह तो अब बहुत ही रोचक होता जा रहा है।  क्या कोई चिट्ठाकार बन्धु, विस्तार से प्राचीन भारत में गणित के योगदान के बारे में लिख सकेगा।

  तू डाल डाल, मैं पात पात
भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।।









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This post is part of 'Cyber Crime' series. Computer software are created with the help of mathematical logic. Computer virus take advantage of their shortcoming. In this post we talk about 23 most famous problems of Mathematics and about self referencing paradoxes. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.
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05/14/10

हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गये

मनाली के एक साइबर कैफे में, हिन्दी को लेकर एक रोचक हादसा हो गया था। इसी की चर्चा इस चिट्ठी में है।

मनाली में जॉन्सन होटल है। इसके रेस्ट्रॉं में बढ़िया स्मोक्ड ट्राउट फिश मिलती है। हम लोग एक दिन वही दोपहर का खाना खाने गये। वहीं पर वेटर ने, साइबर कैफे का पता बता दिया था।

मैं अपनी पत्नी को रेस्ट्रॉं में छोड़ कर, साइबर कैफ़े में आ गया। जब मैं अपनी ईमेल  देख रहा था तभी वहां एक विदेशी आया। उसने साइबर कैफ वाले से पूछा, 
'क्या स्काइप है?'
साइबर कैफे के मालिक के हामी भरने पर, विदेशी ने युरोप में किसी से स्काइप पर बात की, पैसा दिया, और चलते बना। मैं अपना काम समाप्त करके चलने को ही था तभी दो  व्यक्ति वहां पर आये और साईबर कैफे के मालिक से पूछा,
'मुझे अति आवश्यक संदेश हिन्दी में टाइप कराना है। क्या आप कर सकते है?'
साईबर कैफे के मालिक ने कहा,
'न तो मैं हिन्दी में टाइप करवा सकता हूं न ही मैं मनाली में किसी ऐसे व्यक्ति को जानता हूं जो हिन्दी में टाइप कर सके।'
मैं उनकी बात सुन रहा था। मैनें कहा,
'हिन्दी में टाइप करने में क्या मुश्किल है। यह तो बहुत ही आसान है।' 
मैंने उन्हें आफलाइन हिन्दी में टाइप करने कैफे हिन्दी, और आन लाइन हिन्दी में टाइप करने के लिये, गूगल ट्रास्टलिट्रेशन की सलाह दी।  कैफे हिन्दी डाउन लोड किया। उसे उनके कम्पूटर पर डाला। लेकिन वह चला नहीं। शायद मैथली जी कुछ प्रकाश डालना चाहें। 

शब्दों के हिन्दी में बदलते ही उनके चेहरे प्रसन्नता से भर गये
मैंने गूगल ट्रांसलिटरेशन का पेज निकाला। उसमें टाइप करके बताया। जैसे ही मैंने अंग्रेजी में टाइप किया और वह हिन्दी में बदल गया, उनके चेहरे पर प्रसन्नता से भर गये। वे उत्साहित हो उठे।  मैंने उनसे कहा,
'आप खुद टाइप करें। मैं लिनेक्स में काम करता हूं। इसलिए मुझे गूगल ट्रांसलिटरेशन में काम करने की जरूरत नहीं पड़ती है। यही कारण है कि मैं इस पर ठीक से टाइप नहीं कर पा रहा हूं। आप ट्रायल, ऎरर से टाइप कर लें।'
वे लोग  बहुत ही तेजी से टाइप करने लगे और उनका काम  हो गया। उनमें से एक व्यक्ति  नाम छोटे लाल था। वह  इंजीनियर है और दिल्ली के बिहार भवन में कार्यरत है। उन्होने मुझसे बताया,  
'हम शिव भक्त हैं और हमारे शिव शिष्य परिवार नामक संस्था से जुड़े हैं। हमारे गुरू देव भी आये हैं। उन्हीं का संदेश टाइप करवाना था। आप हमारे गुरूदेव से मिल लीजिए और शिव भक्त बन जांए।'
मैंने कहा,
'जैसे आप  शिव भक्त है उसी तरह मैं हिन्दी का भक्त हूं । आप हिन्दी में टाइप न होने के कारण परेशान लग रहे थे। इसलिए मैने हिन्दी में टाइप करना आपको सिखा दिया। मेरे पास समय की कमी है। इसलिए आपके गुरूदेव से न मिल सकूंगा। इसके लिए आप मुझे माफ़ करें।'
बाहर निकलते समय दूसरा व्यक्ति आया उसने कहा,
'आप क्यों नही शिव भक्त हो जाते हैं? यदि आप कहे तो मैं घोषणा कर दूं।'
मैं अज्ञेयवादी हूं। न ही इन बातों में विश्वास करता हूं और न ही किसी ऐसी संस्था का सदस्य हूं। मुझे कुछ हिचक लग रही थी। वे इतने उत्साहित और खुश लग रहे थे कि मुझे लगा कि यदि मैं मना कर दूंगा तो वह दुखी हो जायेंगे। मैं चुप रहा। उसने मेरे मौन को हांमी समझ, मेरे नाम से घोषणा की, कि मैं शिव भक्त हो गया और कहा, 
'आप जब कभी मुश्किल में पड़े तो शिव को याद करियेगा। आपकी सारी मुश्किल दूर हो जायेगी। हमें हिन्दी में टाइप करने की मुश्किल थी। हमने भगवान शिव को याद किया। जैसे, उन्होंने आपको हमारी सहायता के लिए भेज दिया वैसे वे आपकी मुश्किल दूर करने के लिये किसी को भेज देंगे, या स्वयं दूर कर देंगे।'

साइबर कैफे मालिक  भी प्रसन्न हो गये क्योंकि उसने भी कुछ नया  सीखा। मैं चलने लगा तो उसने अपनी दुकान का कार्ड दिया। यह लोग स्पेशल टूर इंडिया के नाम से पर्यटन की कम्पनी भी चलाते हैं।  मैं जब चलने लगा तो उसने मुझसे  केवल दस रुपया लिया। मुझे लगा कि यह  बहुत कम है।  उसने कहा, 

'आपने मेरी सहायता की है और हिन्दी टाइप करना सिखाया है पर इस लिए मैं केवल  दस रूपये ले रहा हूं। वैसे सही दाम ५० रुपया होता है।'
मुझे इस बात की प्रसन्नता हुई की मैं मनाली में भी हिन्दी की कुछ सेवा कर सका।

हम लोग, मनाली में स्टर्लिंग रिज़ॉर्ट में ठहरे थे। यह कुछ अलग तरह के होटेल हैं। इनके बारे में इस श्रंखला की अगली कड़ी में।

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा

हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।:
Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. his will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)
यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 
'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने




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There was an interesting incident regarding Hindi in cyber cafe in Manaali. This post idescribes the same. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
।  Manali,hindi typing in windows,
Himachal Pradesh,
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Hindi, हिन्दी,
04/28/10

तू डाल डाल, मैं पात पात

यह चिट्ठी, साइबर अपराधों पर नयी श्रृंखला की भूमिका है।
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने'
देखें।
फिल्म 'इंडिपेंडेन्स डे' से

क्या आपको मालुम है कि आज किसका जन्म दिन है? मेरा तो नहीं  है पर है किसी खास व्यक्ति का।
'उन्मुक्त जी, कौन है वह व्यक्ति? क्या चिट्ठकार है? ज्लदी बताइये, उसे बधाई तो दे दें।'
वह चिट्ठकार तो नहीं है, पर है एक महान व्यक्ति, एक महान तर्क शास्त्री है। मेरे विचार से आज तक हुऐ सारे तर्क शास्त्रियों में महानतम―नाम है उसका, कोर्ट गर्डल (Kurt Gödel)।
चित्र इंस्टिट्यूट ऑफ एडवान्सड स्टडीज़ की वेबसाइट से

कोर्ट गर्डल का जन्म २८ अप्रैल १९०६ में , बर्नो चेक रिपब्लिक (Czech Republic) में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ायी वियान ऑस्ट्रिया में पूरी की पर बाद में इंस्टिट्यूट ऑफ एडवान्सड स्टडीज़, प्रिंक्सटन  चले गये। वहीं उनकी मृत्यु  १४ जनवरी १९७८ में हो गयी।

'उन्मुक्त जी आपका शीर्षक तो है "तू डाल डाल, मैं पात पात” हम तो समझे कि यहां कुछ छकने, छकाने की बात होगी। लेकिन आप तो चालू हो गये तर्क शास्त्री कोर्ट गर्डल की बात करने। मालुम नहीं पहला चित्र क्या है, लगता है कि कहीं लड़ाई हो रही है।
हमें तो आप "द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर" फिल्म की याद दिला रहे हैं। आपको याद है वह फिल्म। आप शीर्षक कुछ देते हैं, लिखने कुछ और लग जाते हैं।'

मुझे  'द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर' फिल्म की बहुत अच्छी तरह से याद है। यह १९६१ में बनी वॉल्ट डिज़नी की लोकप्रिय फिल्मों में से एक है। इसे मैंने चौथी या पांचवी कक्षा में पढ़ते समय देखा था। 

कौन भूल सकता है उस प्रोफेसर को, जिसने  भूल से, उड़ते रबर (flying rubber) (flubber) (फ्लबर) का आविष्कार कर लिया था। इसी रोमांच में वह अपनी शादी की तारीख भूल गया। बस, गुस्से में, उसकी मंगेतर ने शादी तोड़ दी और वह किसी अन्य से दोस्ती का दिखावा करने लगी। फिल्म में, फल्बर के साथ प्रोफेसर के रोमांचकारी किस्से और  अपने प्यार को वापस पाने की कहानी है।  कितनी प्यारी फिल्म थी, आज भी  याद है।


यह फिल्म, सैमुएल टेलर की विज्ञान कहानी 'अ सिचुऐशन ऑफ ग्रैविटी'  (A Situation of Gravity by Samuel W Taylor) नामक कहानी के ऊपर बनी है। इसके बाद १९६३ में वॉल्ट डिज़नी ने इसकी ऊत्तर कथा फिल्म 'सन ऑफ फल्बर' (Son of Flubber) बनायी। यह  श्याम-श्वेत फिल्में थीं। कुछ साल पहले, 'ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर' को नये सिरे   से रंगीन फिल्म फल्बर नाम से बनाया गया। मुझे याद है यह सब।

मैं बहुत कुछ हूं, मेरे चिट्ठियां इसकी गवाह हैं पर मैं भुलक्कड़ नहीं हूं। यह शीर्षक है, मेरी नयी श्रंखला का जो मैं साइबर अपराधों और कंप्यूटर हैकर के बारे में लिख रहा हूं। मैंने जानबूझ कर यह शीर्षक दिया है और 'इंडिपेंडेन्स डे' फिल्म का चित्र लगाया है।
'उन्मुक्त जी, अब समझ में आया कि आपने इस श्रंखला का नाम "तू डाल डाल, मैं पात पात" क्यों रखा।  चोर-सिपाही के खेल में, अक्सर चोर सिपाही से एक कदम आगे रहते हैं। कंप्यूटर हैकर भी, कंप्यूटर विशेषज्ञयों से आगे रहते हैं। इसलिये आपने इस श्रंखला का यह नाम रखा है। है न सही?'
बिलकुल सही फरमाया आपने। 
'क्या खाक सही फरमाया उन्मुक्त जी―पैर कब्र में जा रहे हैं लेकिन मज़ाक करने की आदत नहीं गयी। कोर्ट गर्डल या इस इस चित्र का, इस विषय से क्या समबंध। हमें बेवकूफ न बनाइये।'
 मेरे भाई, मेरी बहना, इतनी जल्दी नहीं। न केवल कोर्ट गर्डल, पर फिल्म 'इंडिपेंडेन्स डे' (जिस फिल्म से ऊपर का चित्र चित्र लिया गया है) का सम्बन्ध, इस विषय है। यह कैसे है इसका पता तो आपको इस श्रृंखला के दौरान चलेगा। इंतजार कीजिये इस श्रंखला की अगली कड़ी का, लेकिन उसमें कुछ समय लगेगा। मैंने इस कड़ी को केवल इसलिये प्रकाशित कर दिया क्योंकि आज कोर्ट गर्डल का जन्मदिन था।

अगली बार हम बात करेंगे कि कोर्ट गर्डल क्यों प्रसिद्ध हैं, उनके बारे में कुछ चर्चा, और
मुझे यह श्रृंखला लिखने का विचार कैसे आया।

फिल्म 'द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर' में प्रोफेसर की, अपनी मगेंतर से पुनः मित्रता हो जाने के बाद के कुछ दृश्य


तू डाल डाल, मैं पात पात
भूमिका।।






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This post is introduction to my new series on cyber crimes. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
Hindi, पॉडकास्ट, podcast,
09/19/09

जो वायदा किया, वो निभाना पड़ेगा

इस चिट्ठी में सॉफ्टवेयर फ्रीडम डे और लोकप्रिय  ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर  के बारे में चर्चा है।
'अरे उन्मुक्त जी कौन सा वायदा,  किसने किया,  कब किया?'
अरे, वही वायदा, जो आपने, हिन्दी चिट्ठाजगत ने - अपने आप से किया था। आज सितम्बर माह का तीसरा शनिवार है। इस दिन प्रत्येक साल, सॉफ्टवेयर मुक्ति दिवस (Software Freedom Day) बनाया जाता है। याद नहीं, आपने वायदा नहीं किया था कि आज के दिन से, कम से कम, आप एक ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर का प्रयोग करना शुरू करेंगे। अरे इस दिवस के बारे में, मैंने पिछले सालों में,  'आइम् लविंग इट' और 'मुक्त सॉफ्टवेयर दिवस' शीर्षक से बताया था। लगता है कि आप भूल गये। 

चलिये, कोई बात नहीं। मैं पुनः कुछ मुक्त सॉफ्टवेयरों के बारे चर्चा करता हूं जिन्हें आप बहुत आसानी से  विंडोज़ पर इस्तेमाल कर सकते हैं। यह लिनेक्स पर भी चलते हैं। पहले आप इन्हें विंडोज़ पर प्रयोग कीजिये फिर जब मन आये तब लिनेक्स शुरू कर दीजियेगा। ठीक, अब वायदा पक्का, थम्ब प्रॉमिस (thumb promise),  याद रखेंगे न।


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सबसे पहले मॉज़िला के तीन बेहतरीन मुक्त प्रोग्राम के बारे में बात करते हैं।  यह तीनो मॉज़िला पब्लिक लाइसेन्स, जो कि एक ओपेन सोर्स लाइसेन्स है, के अन्दर प्रकाशित हैं। 
  • फायरफॉक्स: यह अन्तरजाल पर सबसे बेहतरीन वेब ब्रॉउज़र है। मैं सारे काम इसी पर करता हूं। अपने चिट्ठे, पॉडकास्ट इसी पर करता हूं। आपकी चिट्ठियां भी इसी पर पढ़ता हूं। इसमें पहले हिन्दी के साथ कुछ मुश्किल थी पर अब नहीं।
  • थंडरबर्ड: यह ई-मेल भेजने और प्राप्त करने के सॉफ्टवेर है। मैं आपकी ईमेल इसी पर प्राप्त करता हूं और इसी से आपको ईमेल लिखता हूं।  इसमें चिट्ठों की आरएसएस फीड भी स्थापित की जा सकती है। मैंने पहले इसी पर फीड स्थापित कर चिट्‌ठों को पढ़ता था।
  • सनबर्ड: यह ई-मैनेजर है। यह आपको प्रिय जनों का जन्मदिन, शादी की सालगिरह की याद दिलाता है। मैंने अपने मित्रों, सहयोगियों का जन्मदिन, शादी की सालगिरह इसी पर नोट कर रखी है। उन्हें हमेशा आश्चर्य होता है कि मैं कैसे उन सब का जन्मदिम और शादी की सालगिरह याद रखता हूं। बस, इसका यही राज है। इसे आप अलग से या फिर थंडरबर्ड या फायरफॉक्स के साथ स्थापित कर चला सकते हैं। मैंने इसे  थंडरबर्ड के साथ स्थापित कर रखा है।

मैं कार्यलाय से संबन्धित सारे कार्य ओपेनऑफिस डाट कॉम के आफिस स्वीट में करता हूं।मुझे इसमें या एमएस वर्ड में कोई अन्तर नहीं लगता यह उतना ही अच्छा है। बस इसका फायदा यह है कि यह मुफ्त है। इसमें कई प्रोग्राम हैं
  • राइटर: इसका प्रयोग मैं लिखने के लिये करता हूं। मैं अपनी सारी चिट्ठियां, समय की सुविधा के अनुसार ऑफलाइन पर लिख लेता हूं। इसके बाद धीरे धीरे कड़ियों पर उन्हें अपने चिट्ठों पर डालता हूं। इसमें एक बेहतरीन सुविधा है कि यह न केवल आपकी फाइलों को पीडीएफ मानक में बदल सकता है पर यह पीडीऐफ फाइलों को संशोधित भी कर सकता है। मेरा काम लिखने से संबन्धित है। यह सारे मैं इसी पर करता हूं। मैंने कुछ पुस्तकें अंग्रेजी में लिखी हैं। सौभाग्य से इनके कई संस्करण भी निकलें हैं। यह सारे मैंने इसी पर किये हैं। मुझे इसमें कभी भी कोई मुश्किल नहीं हुई। यह डिफॉल्ट में मुक्त मानक में फाइलों को सुरक्षित करता है। लेकिन आप चाहें तो किसी भी अन्य मानक या  एमएस वर्ड के डिफॉल्ट मानक डॉक पर भी फाइलें सुरक्षित कर सकते हैं। आप अपने एमएस वर्ड पर काम करने वाले मित्र को उसी के मनचाहे मानक पर फाइलें भेज सकते हैं या फिर उनसे सन-माइक्रोसिस्टम का यह मुफ्त प्लग-इन डाउनलोड कर अपने एमएस वर्ड के प्रोग्राम में स्थापित करने के लिये कह सकते हैं ताकि यह मुक्त मानक की फाइलों को पढ़ सकें।
  • इम्प्रेस: मुझे  अकसर सम्मेलन में या फिर विद्यार्थियों के बीच बोलने का मौका मिलता है। मैं प्रस्तुतिकरण (presentation) के लिये इसी का प्रयोग करता हूं। मेरे सुनने वालों ने कभी नहीं कहा कि मेरा प्रस्तुतिकरण किसी प्रकार भी पावर पॉइंट पर बने प्रस्तुतिकरण से कम अच्छा है। मैं सुविधा के लिये अपने प्रस्तुतिकरण की एक फाइल पीपीटी मानक और पीडीएफ मानक पर भी बना कर ले जाता हूं। यह सुविधा भी इसमें है। 
  • इसके अतिरक्त कार्यालय के अन्य तरह के काम करने के लिये चार अन्य प्रोग्राम, मैथ, कैल, ड्रॉ, और बेस भी हैं। जिन पर बाकी सारी तरह की फाडलें बना सकते हैं। मुझे उनका प्रयोग करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसलिये मैं उनके बारे में नहीं लिख पा रहा हूं। आप  लिख सकतें हों तो क्या बात है। 


मल्टीमीडिया और चित्रों के लिये ओपेन सोर्स में बेहतरीन प्रोग्राम हैं।
  • वीएलसी मीडिया प्लेयर और एमप्लेयर: आप इन दोनो प्रोग्राम में ऑडियो और वीडियो के प्रत्येक प्रकार के मानकों की फाइलों को सुन सकते हैं। मैं इसी पर सुनता या देखता हूं।
  • ऑडेसिटी: इस प्रोग्राम में, ऑडियो फाइलों को सुना, संपादित, और रिकॉर्ड किया जा सकता है। मैं अपनी बकबक (मेरे पॉडकास्ट), इसी पर रिकॉर्ड करता हूं। इसमें एमपी-३ पइलों के लिये प्लग-इन डालना होता है। यह करने में कोई मुश्किल नहीं होती है। आप  एमपी-३ मानक में भी रिकॉर्ड कर सकते हैं। किसी भी मानकों की फाइलों को दूसरे मानक में बदल सकते हैं। मैं अपने पॉडकास्ट ऑग मानक पर रिकॉर्ड करता हूं। पॉडभारती में मेरे दो पॉडकास्ट 'स्कॉट की अन्तिम यात्रा' और 'पापा क्या आप उलझन में हैं' को पुनः यहां और यहां प्रकाशित किया है। वे एमपी-३ मानक में हैं। मेरे विचार से यह उन्होंने, इसी प्रोग्राम का प्रयोग कर किया है।
  • गिम्प: इस प्रोग्राम का प्रयोग चित्रों को संपादित करने के लिये कया जाता है। इसमें आप चित्रों सम्पादित और उनका पिक्सल कम कर सकते हैं। चिट्ठों पर चित्र डालते समय उन्हें अक्सर सम्पादित करना पड़ता है। क्योंकि यदि चित्र के किसी भाग का महत्व उस चिट्ठी के लिये नहीं है तो उसे रखने की कोई जरूरत नहीं। चिट्ठों पर चित्रों  को हमेशा पिक्सल कम करके डालना चाहिये। इससे चिट्ठा और वह चिट्ठी दोनो जल्दी लोड होती हैं।  यह  काम मैं इसी पर करता हूं। 
यदि आप और मुक्त सॉफ्टवेयर के प्रोग्रामों के बारे में जानना चाहें तो आप मेरी बिटिया को लिखी चिट्ठी 'ओपेन सोर्स की पाती - बिटिया के नाम' पर या फिर 'वेलेंटाइन दिवस, ओपेन सोर्स के साथ मनायें' चिट्ठी पर पढ़ सकते हैं।
linux Pictures, Images and Photos
'उन्मुक्त जी, जब बाज़ार में सारे प्रोग्राम दस रुपये की सीडी में मिल जाते हैं तो फिर   ओपेन सोर्स के टंटे करने का क्या फायदा?'
सवाल तो वाज़िफ है। मैं जवाब देने की कोशिश करता हूं।
  • मैं लिनेक्स और ओपेन सोर्स प्रोग्राम का प्रयोग इसलिये करता हूं क्योंकि मैं चाहता हूं सब इनका प्रयोग करें। यह धुर सत्य है, आप जैसी  दुनिया चाहो, वैसा स्वयं बनो। 
  • महात्मा गांधी ने एक बार कहा, 'साधन, अन्त से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।' यह बात यहां भी लागू होती। इसके लिये मैं उलझन में नहीं रहता
  • न केवल बच्चे, पर हम सब व्यवहार से सीखते हैं न कि उपदेश से। इस पर काम करने से 'एक घन्टा, एक मिनट लगता है' :-)
  • इनका प्रयोग करने के कारणों में, सबसे मुख्य बात यह है कि इनका प्रयोग करने में कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं होता और यह मुफ्त हैं। इसका प्रयोग आप अपनी अन्तरात्मा को बिना गिरवी रखे कर कर सकते हैं।
  • आपने पंचतंत्र की  कछुवा और खरगोश की कहानी तो सुनी होगी। इसमें, आजकल  बदलाव हो हो गया है। यह बदलाव ओपेन सोर्स के करीब है। आपको नहीं मालुम तो यहां पढ़ लीजिये।
  • यही वह जगह जहां पेंग्युन भी उड़ सकती हैं
  • आपको तो मालुम ही है कि ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर का सबसे जाना माना प्रोग्राम लिनेक्स है और इसे प्रयोग करने वाले पुरुष तो खास होते हैं। वे न केवल जोशीले और उत्साही होते हैं पर उन्हें महिलायें भी अधिक पसन्द करती हैं। पुरुष पाठक समय न गवायें,  तुरन्त खुद ही यहां पढ़ें। 
  • क्या कहा, आप पुरुष नहीं, महिला हैं।  कोई बात नहीं। अब वह सुबकने वाली, पुरुषों का साया ढ़ूढ़ने वाली महिला कहां रह गयी है। महिला तो आज की दुर्गा है उसका सशक्तिकरण हो चुका है। वे पुरुषों से किसी क्षेत्र में कम नहीं, फिर देर किस बात की - शुरू करिये प्रयोग करना ओपेन सोर्स के प्रोग्राम।

मैं जानता हूं कि आप यहां ओपेन सोर्स का भाषण सुनने नहीं आये हैं। आप तो आये हैं ताजमहल के प्यारे से गाने को सुनने के लिये जो इस चिट्ठी का शीर्षक है। लीजिये वह भी सुन लीजिये। लेकिन इस गाने कुछ को इस तरह से समझियेगा,
जो वायदा किया, वो निभाना पड़ेगा।
रोके तुम्हारा डर चाहे,
तुमको मुक्त सॉफ्टवेयर प्रयोग करना पड़ेगा
हो वायदा किया है तुमने,  
मुक्त सॉफ्टवेयर प्रयोग करने का।
वह वायदा तो तुम्हें निभाना पड़ेगा, निभाना पड़ेगा।



जब आप में से अधिकांश यह चिट्ठी पढ़ रहे होंगे तो मैं अपने कस्बे से दूर, कुछ दिनो तक हिमाचाल, हरियाणा, और पंजाब के दौरे पर रहूंगा। मेरा अपने आप से वायदा है कि मैं लैपटॉप न ले जाउं और इस काल्पनिक दुनिया से दूर रहूं। देखता हूं कि इसमें सफल रहता हूं कि नहीं। 

 मेरी 'केरल यात्रा' एवं 'डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े'  श्रंखलायें समाप्त हो रही हैं।  बहुत जल्द, मैं आपको नयी श्रंखलाओं  पर ले चलूंगा। इनमें से एक ऐसे उपन्यास और उससे जुड़ी कहानियों के बारे में है जो न केवल २०वीं शताब्दी के उत्कृष्ट अमेरिकन साहित्य में गिना जाना जाता है पर,  मेरी बिटिया के अनुसार, जिसे अमेरिका के कॉलेज जाने वाले प्रत्येक विद्यार्थी ने कम से कम एक बार पढ़ा है। दूसरा हो सकता है कि मैं आपको कुल्लू मनाली की यात्रा पर ले चलूं। 
 






मुक्त सॉफ्टवेयर से संबन्धित अन्य चिट्ठियां




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