Posts Tagged "कानून"

‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ श्रृंखला किसी को दुख देने के लिये नहीं लिखी गयी थी

मेरी श्रृंखला ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ के बारे में लोगों को गलतफहमी है। यह चिट्ठी किसी को दुख पहुंचाने के लिये नहीं लिखी गयी थी। यह चिट्ठी यही बताती है। There is misconception about my series ‘Jyotis, Hasrekha vidya, Aur tone tutke’; It was not written to hurt anyone. This post explains the same. meri shrankhla ‘jyotish, hasrekha vidya, aur tone totke’ ke bare mein logon ko galatphahmee hai. yeh shrkhla kisee ko dukh phunchane ke liye nheen likhee gayee thee; yeh chitthi isee ko btatee hai

‘बुलबुल मारने पर दोष लगता है’ श्रृंखला के नाम का चयन कैसे हुआ
‘बुलबुल मारने पर दोष लगता है’ श्रृंखला, ‘To Kill A Mockingbird’ उपन्यास के बारे में थी। इस श्रृंखला में चर्चा थी कि यह उपन्यास क्यों लिखा गया , इसकी क्या कहानी थी, इसकी क्या शिक्षा है। इस चिट्ठी में चर्चा है कि इसका श्रृंखला के नाम का चयन कैसे हुआ।

इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने

देखें।

मेरी बिमारी के समय मेरे बेटे और बिटिया रानी ने कुछ पुस्तकें पढ़ने के लिये भिजवायीं थीं। इनमें से एक पुस्तक  ‘हू द हेल इज़ ओ ॑-हारा’  (Who the Hell is O’Hara) है। इस पुस्तक में, दुनिया के ५० बेहतरीन लिखे उपन्यासों के बारे में लिखा है कि वे किस प्रकार से लिखे गये हैं। यह पुस्तक पढ़ने योग्य है।

इस पुस्तक में एक लेख ‘टू किल अ मॉकिंगबर्ड’ उपन्यास के बारे में था। इस उपन्यास को मैंने अपने बचपन में पढ़ा था तभी इस पर बनी फिल्म भी देखी थी। इसी को पढ़ते समय मुझे इस श्रृंखला को लिखने का विचार आया और इसकी रूप रेख बनायी। फिर सवाल उठा कि इस श्रृंखला का क्या नाम रखा जाय।

इस उपन्यास में एक वाक्य है।
‘It is sin to kill a mockingbird’
मुझे लगा कि इस श्रृंखला का यही नाम होना चाहिये। अब सवाल उठा कि इसका उचित हिन्दी अनुवाद क्या होगा।

मॉकिंगबर्ड एक छोटी सी चिड़िया होती है। यह मुधर आवाज़ के लिये जानी जाती है। यह केवल अमेरिका में पायी जाती है। इसलिये इसका हिन्दीं में कोई नाम नहीं है। शास्त्री जी ने अनुवाद नहीं सुझाया पर कहा,
‘Mockingbird is a harmless bird, but since it tends to sing after midnight, many are irritated and kill it. I have not seen a Hindi equivalent. Any saying that says we should not kill the innocent due to our personal annoyance will do. I have not come across any Hindi saying for that.’
मॉकिंगबर्ड निर्दोष चिड़िया होती है। यह आधी रात के बाद गाती है इसलिये लोग खिजाते हैं और मारते हैं। मुझे इसके बारे में हिन्दी में कहावत नजर नहीं आयी। लेकिन कोई भी कहावत जो यह कहती हो कि निर्दोष को मारना गलत है ठीक होगी।

अरविन्द जी ने सुझाया,
‘सोन  चिरैया को मारने पर दोष लगता है।’
सोन चिरैया – चित्र विकिपीडीया से
सोन चिरैया या Indian bustard एक बड़ी चिड़िया है और अपनी सुंदरता के लिये जानी जाती है अपनी मधुर आवाज़ या गाने के लिये नहीं। यह लुप्त हो रही है यदि हमने इसे रोका नहीं तो यह हमेशा के लिये गायब हो जायगी। 

मुझे सुनने में यह शीर्षक अच्छा लगा। लेकिन इस उपन्यास में मॉकिंगबर्ड  गाने वाली छोटी चिड़िया है और निर्दोषता का प्रतीक है। मैं  किसी छोटी गाने वाली चिड़िया का ही नाम रखना चाहता था। मेरे परिवार वालों ने कोयल, मैना, शमा नाम सुझाया पर मुझे में बुलबुल नाम ठीक लगा। 

बुलबुल एक छोटी गाने वाली चिड़िया है जो निर्दोष है और अपने देश में जानी जाती है। इसकी प्यारी आवाज यहां सुन सकते हैं। यह मेरे घर में बहुत आती है। अब सवाल उठा कि शीर्षक क्या होना चाहिये। 

मेरी पत्नी शुभा ने कुछ अन्य शीर्षक सुझाये,

बुलबुल हत्या, पाप है।
बुलबुल हत्यारा दोषी है।
बुलबुल मारना, पाप है
बुलबुल को मारना पाप है
अन्त में मुझे अरविन्द जी का शीर्षक ही पसन्द आया। बस सोन चिरैया की जगह बुलबुल कर दिया और ‘को’ शब्द गायब कर दिया – मिल गया इस श्रंखला का शीर्षक, ‘बुलबुल मारने पर दोष लगता है‘।  

अभी कुछ कम समझ में आ रहा है और समय की भी कमी लगती है। देखिये कब कोई नयी श्रृंखला शुरू कर पाता हूं।

इस श्रृंखला की पिछली कड़ियां नीचे चटका लगा कर पढ़ें। यदि उस कड़ी को सुनना चाहें तब उस कड़ी के आगे लगे ► चिन्ह पर चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, ‘मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने‘ देखें।

भूमिका: ।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी – कोर्टरूम: ।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं: ।। कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है: ।। अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है: ।। जुरी चिट्ठे में जालसाज़ी की गयी है: ।। क्या ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’  हर्पर ली की जीवनी है: ।। बचपन के दिन भी क्या दिन थे: ।।
पुनः लेख – ‘बुलबुल मारने पर दोष लगता है’ श्रृंखला के नाम का चयन कैसे हुआ: ।।

About this post in Hindi-Roman and English 

‘bulbul maarne per dosh lagtaa hai’ shrankhlaa ‘To kill a mockingbird’ upnyaas ke baare mein thee. is chtthi mein chachaa hai ki is shrnkhlaa ka naam kaise para. yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

The series ‘Bulbul maarne per dosh lataa hai’ was about the novel ‘To Kill a Mockingbird’. This post explains why this series was so named. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द

।  book, book, books, Books, books, book review, book review, book review, Hindi, kitaab, pustak, Review, Reviews, science fiction, किताबखाना, किताबखाना, किताबनामा, किताबमाला, किताब कोना, किताबी कोना, किताबी दुनिया, किताबें, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, पुस्तक चर्चा, पुस्तकमाला, पुस्तक समीक्षा, समीक्षा,
Hindi, पॉडकास्ट, podcast,
बचपन के दिन भी क्या दिन थे
‘टु किल अ मॉकिंग बर्ड’ उपन्यास में, जीवन के दर्शन को कुछ सरल भाषा में बताया गया है। इस चिट्ठी में उसी की चर्चा है।
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने
देखें।

‘टु किल अ मॉकिंग बर्ड’ में ऎटिक्स स्कॉउट को समझाते हैं कि,
‘Scout, if you can learn a simple trick, you’ll get on better with all kinds of folks. You never really understand a person until you consider things from his point of view…..Until you climb into his skin and walk about in it.’
जब तक आप दूसरे की नजर से नहीं देखोगे तब तक उसे समझ नही सकते।


एक जगह जब एटिक्स, स्कॉउट से पूछते हैं कि क्या वह चाहेगी कि उसकी बुआ वहां उन के साथ रहें तब स्कॉउट जवाब देती है,
‘I said I would like it very much—a lie, but one must lie under certain circumstances when one can’t do anything about them’
मैंने कहा कि मैं अवश्य चाहूंगी कि बुआ हमारे साथ रहें। यह बात एकदम झूट थी लेकिन किसी को उन परिस्थतियों में झूट बोलना चाहिए जब वह उसके बारे में कुछ न कर सके।


जब अश्वेत व्यक्ति के मुकदमे में वकील हो जाने के बाद सब लोग एटिक्स और उसके बच्चों से बात करना बंद कर देतें हैं। तब ऎटिक्स अपने बच्चों को समझाते हैं,
‘Because I couldn’t Scout, every lawyer gets at least one case in his lifetime that affects him personally. This one’s mine, I guess. You might hear some ugly talk about it at school, but do one thing for me: no matter what anybody says to you, you just hold your head high and keep those fists down.’
मै इस मुकदमें को लेने से नही मना कर सकता था। प्रत्येक वकील के जीवन में कम से कम एक मुकदमा आता है जो उसे व्यक्तिगत तौर पर असर करता है। यह मेरे लिए वैसा ही मुकदमा है। हो सकता है कि इसके बारे में, तुम कुछ भद्दी बातें स्कूल में सुनो पर ख्याल रखना कोई भी कुछ कहे अपना सर उठा कर चलना।

ऎटिक्स अश्वेत लड़की के पिता से जिरह के दौरान दस्तखत करने को कहता है सबको आश्चर्य होता है पर स्काउट को मालूम था कि उसके पिता ऎसा क्यों कर रहे थे। यह वकील के जीवन का कटु सत्य भी है।
‘Atticus seemed to know what he was doing … but it seemed to me that he’d gone frog-sticking without a light. Never, never on cross- examination ask a witness a question you don’t know the answer to, was a tenet I had absorbed with may baby food.’
ऎटिक्स को मालूम था कि वह, क्या कर रहा था — गवाह से जिरह करते समय कभी ऎसा सवाल न पूछो  जिसका जवाब तुम्हें न मालूम हो।

श्वेत लड़की के दाहिनी तरफ चोट थी। इससे पता चला कि उसे किसी बायें हत्थे व्यक्ति ने मारा है। उस लड़की के  पिता ने बायें हाथ से दस्तखत किये। जिससे पता चल गया कि उसका पिता बांया हत्था था जब कि अश्वेत का बांया हाथ खराब था। दाहिने हाथ से मुंह के दाहिने तरफ मार पाना बहुत मुश्किल है। ऎटिक्स  दिखाना चाहता था कि श्वेत लड़की के पिता ने ही उसे मारा था।
बचपन के दिन भी क्या दिन थे। ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ फिल्म के एक दृश्य में जेम और स्कॉउट


एक अन्य जगह एटिक्स, स्कॉउट से कहते हैं,

‘Most people are… nice ….when you finally see them.’
जब हम लोगों का समझा पाते है तो पता चलता है कि अधिकतर लोग अच्छे होतें है।


इस उपन्यास में यह दर्शाया गया है कि निर्दोषता  समाप्ति पर क्या होता है। मॉकिंगबर्ड छोटी गाने वाली चिड़िया होती है वे किसी का नुकसान नहीं करती। इस उपन्यास में, मॉकिंगबर्ड ही निर्दोषता के प्रतीक के रूप में बताया गया हैं।

स्काउट और उसका बड़ा भाई, बड़े दिन पर एयर राइफल चाहते थे और यह उन्हें मिलती है। लेकिन ऎटिक्स उनसे कहते हैं,

‘I’d rather you shoot at tin cans in the back garden but I know you’ll go after birds. Shoot all blue jays you want, if you can hit them, but remember it’s sin to kill a mocking bird’.
मुझे अच्छा लगेगा यदि तुम लोग बगीचे में टिन के डिब्बों पर निशाना लगाओ। पर तुम लोग  चिड़ियों के पीछे जाओगे। तुम्हे जितनी ब्लूजे को मारना हो मारो, यदि तुम उन्हें मार सको। लेकिन याद रखना मॉकिंगबर्ड को मारने से पाप लगता है।


जब वे अपनी पड़ोसन से  मॉकिंगबर्ड न मारने का कारण पूछतें है तब वह बताती है,

‘Your father is right. Mockingbird don’t do one thing but make music for us … That’s why it’s a sin to kill a mockingbird’.
तुम्हारे पिता ठीक कहते हैं। मॉकिंगबर्ड कोई नुकसान नहीं पहुंचाती लेकिन हमें संगीत सुनाती हैं। इसीलिये इन्हें मारने से पाप लगता है।

यहीं से इस उपन्यास का नाम लिया गया है।

इसी के साथ यह श्रंखला समाप्त होती है। बहुत जल्द, किसी नयी नयी श्रृंखला के साथ मुलाकात होगी। तब तक के लिये आप हिमाचल यात्रा का आनन्द लें। 

बुलबुल मारने पर दोष लगता है
भूमिका।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी – कोर्टरूम।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं।। कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है।। अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है।। जुरी चिट्ठे में जालसाज़ी की गयी है।। क्या ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’  हर्पर ली की जीवनी है।। बचपन के दिन भी क्या दिन थे।।

ज़ेमेंटा के द्वारा बताये सम्बन्धित लेख

‘To kill a mockingbird’ upnyaas mein jeevan ke darshan ko saral bhashaa mein bataayaa gayaa hai. is chitthi mein usee ke baare mein charchaa hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padhne ke  liye, daahine taraf, oopar ka widget dekhen.

‘To Kill a Mockingbird’ explains the philosophy of life in easy language. This post is about the same. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द

। book, book, books, Books, books, book review, book review, book review, Hindi, kitaab, pustak, Review, Reviews, science fiction, किताबखाना, किताबखाना, किताबनामा, किताबमाला, किताब कोना, किताबी कोना, किताबी दुनिया, किताबें, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, पुस्तक चर्चा, पुस्तकमाला, पुस्तक समीक्षा, समीक्षा,
Hindi, पॉडकास्ट, podcast,
क्या ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ हर्पर ली की जीवनी है
स्कॉटस्बॉरो  बॉयज़ ट्रायल में, ९ अश्वेत लोगों पर, श्वेत लड़कियों के साथ बलात्कार करने का मुकदमा ऍलाबामा राज्य में चला था। इस मुकदमे ने हार्पर ली पर असर डाला। उनके द्वारा लिखा उपन्यास, ‘टु किल अ मॉकिंग बर्ड’ इसी पर आधारित है।  आज चर्चा करेंगे – इस उपन्यास की कहानी के बारे में और इसके एवं ली के वास्तविक जीवन में समन्वय को भी देखेंगे।
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने
देखें।
upright=1.ली, पुस्तक पर बनी फिल्म प्रॉड्यूसर के साथ – चित्र सौजन्य विकिपीडिया
हार्पर ली का जन्म २८ अप्रैल, १९२६ को ऍलाबामा राज्य में हुआ था। ऍलाबामा राज्य अमेरिका के दक्षिण में है उस समय दक्षिण और उत्तर अमेरिका में, अश्वेतों के बर्ताव में   काफी अन्तर था। दक्षिण में नागरिक अधिकारों का उतना महत्व नहीं था। स्कॉटस्बॉरो बायॉज़  के मुकदमे के समय, ली छ: साल की थी। इस मुकदमे ने, उस के जीवन में बहुत कुछ असर डाला। ‘टू किल अ मॉकिंगबर्ड’ इसी अनुभवों के आधार पर लिखा उपन्यास है। यह कहानी १९३० के दशक की है। यह कहानी है एक बहन स्काउट, उसके भाई जेम और उनके मित्र डिल की।


स्काउट के पिता एटिक्स फिंच एक वकील हैं। बू रैडली उनके रहस्यमय पड़ोसी हैं। इसमें एक अश्वेत व्यक्ति पर एक श्वेत लड़की से बलात्कार का प्रयत्न करने के लिए मुकदमा चलता है। एटिक्स को बचाव पक्ष का अधिवक्ता नियुक्त किया जाता है। इस मुकदमे में यह सिद्ध हो जाता है कि अश्वेत व्यक्ति निर्दोष है और श्वेत लड़की को चोटें,उसके पिता ने ही पहुंचायी थी। फिर भी, अश्वेत व्यक्ति को सजा हो जाती है।  इस मुकदमे के बाद श्वेत लड़की का पिता  स्काउट और जेम को मारने का प्रयत्न करता है। उस समय बू रैडली जो कि अविवेकी के रूप में जाना जाता है उनकी जान बचाता है।

‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ फिल्म में 
एटिक्स की भूमिका में ग्रेगरी पेक और स्कॉट की भूमिका में मैरी बैधम 

बहुत से लोगों  का कहना है कि ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’  हर्पर ली की जीवनी है पर वे इस बात को तो नकारती है पर यह भी स्वीकारती हैं कि उन्होंने जीवन में जो भी  देखा, उसी को इस कहानी में उतारा है।

लोगों का कहना भी गलत नहीं है क्योंकि वास्तविक जीवन में भी ली का बड़ा भाई और मित्र था।  उसके पिता भी वकील थे और शादी के पहले उनकी माँ का नाम  फिंच था जो कि उपन्यास में इनका सर-नाम है। उपन्यास से में ली का मित्र डिल है और वास्तविक जीवन में उनके मित्र का नाम ट्रूमैन कापाटे था।

उसका पहले नाम ट्रूमैन स्ट्रेकफस परसॉनस् (Truman Streckfus Persons) था। ट्रूमैन, जब चार साल का था तभी उनके माता-पिता में तलाक हो गया। उसकी मां हमेशा अच्छा जीवन जीने की सोचा करती थी। लेकिन तलाक से वह टूट गयी। उसने ट्रूमैन को उनकी आंटी के पास, मॉनरोविले में भेज दिया। वह ली को पड़ोसी था। वहीं उसका लालन पालन हुआ। ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’  में भी डिल दूसरी जगह से आता है।

ट्रूमैन की मां न्यूयार्क चली गयी जहां उसने दूसरी शादी कर ली। बाद में  ट्रूमैन के सौतेले पिता ने उसे गोद ले लिया जिससे उसका नाम बदलकर  ट्रूमैन कापाते हो गया।

‘टु किल अ मॉकिंग बर्ड’ जीवन के दर्शन को कुछ सरल वाक्यों में बताती है। अगली बार मिलेंगे तब इसी के बारे में बात करेंगें।

बुलबुल मारने पर दोष लगता है

ज़ेमेन्टा के द्वारा बताये संबन्धित लेख

About this post in Hindi-Roman and English
is chitthi mein, ‘to kill a mockingbird’ kee kahaaanee aur ooske avam harper lee ke jeevan ke sath samanvay kee charcha hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padhne ke  liye, daahine taraf, oopar ka widget dekhen.

This post talks about story of ‘To Kill A Mockingbird’ and compares it with her real life. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.
 
सांकेतिक शब्द
। book, book, books, Books, books, book review, book review, book review, Hindi, kitaab, pustak, Review, Reviews, science fiction, किताबखाना, किताबखाना, किताबनामा, किताबमाला, किताब कोना, किताबी कोना, किताबी दुनिया, किताबें, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, पुस्तक चर्चा, पुस्तकमाला, पुस्तक समीक्षा, समीक्षा,
Hindi,

Reblog this post [with Zemanta]

जुरी चिट्ठे में जालसाज़ी की गयी है
मैंने पिछली बार बताया था कि ९ अश्वेत लोगों पर, दो श्वेत लड़कियों के साथ बलात्कार करने के लिये तीन बार अलग अलग मुकदमा चला था। पहली बार, यह ऐलाबामा के स्कॉटस्बॉरो शहर में चला था। इसलिये इस मुकदमें को स्कॉटस्बॉरो  बॉयज़ ट्रायल के नाम से जाना जाता है। इन आरोपियों पर अलग अलग मुकदमा चला। आज चर्चा का विषय है कि इस मुकदमें में क्या फैसला हुआ।

इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,

मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने
देखें।
स्कॉटस्बॉरो  बॉयज़ अपने वकील सैमुएल लाइबोविट्ज़ के साथ।

पहली बार एक को छोड़कर आठ को फांसी की सजा सुनाई गयी। एक लड़के को, इसलिए छोड़ दिया गया था क्योंकि उसकी आयु १२ साल थी। ऎलाबामा राज्य के सर्वोच्च न्यायालय ने इस निर्णय की पुष्टि कर दी लेकिन  अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला पॉवेल बनाम ऎलाबामा (Powell Vs. Albama 287 US) में उलटते हुए कहा,

‘A defendant should be afforded a fair opportunity to secure counsel of his own choice. Not only was that not done here, but such designation of counsel as was attempted was either so indefinite or so close upon the trial as to amount to a denial of effective and  substantial aid in that regard.’
आरोपी को अपनी पसन्द का वकील करने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए। इस मुकदमे में ऎसा नहीं हुआ। न्यायालय ने जो वकील उन्हें दिया वह न केवल अनियमित था पर उसकी नियुक्ति मुकदमा शुरू होने के इतनी करीब थी कि आरोपियों को कोई भी ठोस एवं प्रभावी कानूनी सहायता नहीं मिल पायी।

  
रूबी बेटस्, दूसरी बार मुकदमा चलते समय, गवाही देते हुऐ।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से वापस आने के बाद यह मुकदमे अन्य शहर में स्थानान्तरित कर दिए गये।  इसमें सबसे पहले पैटरसन पर मुकदमा चला और बचाव पक्ष की तरफ से सैमुएल लाइबोविट्ज़ वकील नियुक्त हुये। इस मुकदमे में रूबी बेटस् ने बचाव पक्ष  की तरफ से गवाही दी।  उसने कहा,

‘अश्वेत लड़कों ने हमें नहीं छेड़ा था। मैंने पहली बार बलात्कार की बात विक्टोरिया प्राइस के कहने पर कही थी। क्योंकि विक्टोरिया ने कहा था कि यदि मैं इस तरह से नहीं कहूंगी  तो हमें इस तरह (बिना टिकट, माल गाड़ी पर) राज्य  की सीमा पार करने के लिए जेल में रखा जा सकता है।’ 


इस बार सबूत में यह बात सिद्घ हो चुकी थी कि पैटरसन दोषी नहीं है फिर भी जूरी ने उसे   फांसी  की सजा सुनाई। इसे परीक्षण न्यायधीश ने रद्द कर दिया। इसके बाद पैटरसन तथा बाकी सब पर पुन: मुकदमा चला। इस बार पुनः, एक को छोड़कर सबको फांसी की सजा हो गयी। ऎलाबामा सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। यह मुकदमा दुबारा फिर से अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचा।

सर्वोच्च न्यायालय में, सैमुएल ने जूरी चयन को मुद्दा बनाया। इसने बहस कि,

‘वहां एक भी अश्वेत व्यक्ति को जूरी सेवा के लिये नहीं बुलाया गया हालांकि वहां के अश्वेत लोग जूरी सेवा के लिये योग्य थे। जुरी चिट्ठे में जालसाज़ी कर, बाद में अश्वेत लोगों के नाम बढ़ाये गये हैं।’

जब अमेरिका सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने सैमुएल से पूछा,

‘क्या तुम यह सिद्घ कर सकते हो?’

सैमुएल ने हांमी भरी और जुरी चिट्ठा को सर्वोच्च न्यायालय के सामने रखा। जिससे पता चलता ता कि उसमें जालसाज़ी हुई है। यह अमेरिकी इतिहास में पहली, और केवल एक बार हुआ कि उन्होंने तथ्यों को अपनी अदालत में देखा। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने पुन: फैसले को रद्द करते समय (Norris Vs. Albama 294 US 587)   कहा,

‘Whenever by any action of State, whether through its legislature, through its courts, or through its executive or administrative officers, all persons of the African race are excluded, solely because of their race or color, from serving as grand jurors in the criminal prosecution of a person of the African race, the equal protection of the laws is denied to him, contrary to the Fourteenth Amendment of the Constitution of the United States.  

We think that the evidence that for a generation or longer no negro had been called for service on any jury in Jackson County, that there were Negroes qualified for jury service, that according to the practice of the jury commission their names would normally appear on the preliminary list of male citizens of the requisite age but that no names of Negroes were placed on the jury roll, and the testimony with respect to the lack of appropriate consideration of the qualifications of negroes, established the discrimination which the Constitution forbids. The motion to quash the indictment upon that ground should have been granted.’
जब अफ्रीकन मूल लोगों को उनके रंग या कुल के कारण अफ्रीकन मूल पर चल रहे मुकदमे में रखने से वंचित किया जाता है तो यह १४ वें संशोधन का उल्लंघन है।
जब पीढ़ी दर पीढ़ी से किसी भी अश्वेत को न तो जूरी सेवा के लिए बुलाया जाए, न ही उनका नाम जूरी चिट्ठे पर हो जब कि वे इसके लिए उपयुक्त हों तब यह भेदभाव, संविधान के विरूद्व है और इस अभियोग को अपास्त करने के लिए पर्याप्त है।

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय से वापस आने पर पाँच लोगों के खिलाफ मुकदमा समाप्त कर दिया गया। एक को फांसी की सजा दी गयी पर उसे गवर्नर ने आजीवन कारावास में बदल दिया। इस समय सब मानते है कि वे अश्वेत लड़के  दोषी नहीं थे। उन्हें यह सजा गलत तरीके से दी गयी।

इस मुकदमे पर कई फिल्म और प्रलेखी बनी हैं। १९७६ में एनबीसी ने जज हॉरटन एण्ड द स्कॉटस्बॉरो  बॉयज़ (Judge Horton and the Scottsboro Boys) नाम से टीवी फिल्म, १९९८ में कोर्ट टीवी (नया नाम ट्रूटीवी) ने इसी पर ग्रेटेस्ट ट्रायल ऑफऑल टाइमस् श्रंखला (Greatest Trials of All Time series) के लिये प्रलेखी,  २००१ में स्कॉटस्बॉरो  बॉयज़ ट्रायल (Scottsboro: An American Tragedy) के नाम से प्रलेखी, और २००६ में हैवेनस् फॉल (Heavens Fall) फिल्म बनी है।

इस श्रंखला की अगली कड़ी में चर्चा करेंगे कि इस मुकदमे ने किस तरह से हारपर ली पर असर डाला और उन्हें ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ लिखने के लिये प्रेरित किया।

चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से।
बुलबुल मारने पर दोष लगता है

भूमिका।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी – कोर्टरूम।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं।। कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है।। अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है।। जुरी चिट्ठे में जालसाज़ी की गयी है।।

अन्य संबन्धित चिट्ठियां

पुस्तक समीक्षा से संबन्धित लेख चिट्ठे पर चिट्ठियां
वकीलों से संबन्धित चिट्ठियां
About this post in Hindi-Roman and English
is chitthi mein, Scottsboro boys’ trial mukdme  ke phaisle kee chrchaa hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padhne ke  liye, daahine taraf, oopar ka widget dekhen.

This post talks about the judgement in the Scottsboro boys’ trial case. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.
सांकेतिक शब्द
Scottsboro boys trial, Victoria Price, Ruby Bates,
Samuel Leibowitz, biography, कानून, Law, leading question, suggestion,

book, book, books, Books, books, book review, book review, book review, Hindi, kitaab, pustak, Review, Reviews, science fiction, किताबखाना, किताबखाना, किताबनामा, किताबमाला, किताब कोना, किताबी कोना, किताबी दुनिया, किताबें, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, पुस्तक चर्चा, पुस्तकमाला, पुस्तक समीक्षा, समीक्षा,
Hindi,
Hindi Podcast, हिन्दी पॉडकास्ट,

Reblog this post [with Zemanta]
अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है
इस चिट्ठी में उस मुकदमें की चर्चा है जिसने हार्पर ली को ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ लिखने के लिये प्रेरित किया। इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें।
यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने
देखें।

१९४१ में सैमुएल न्यायाधीश हो गये। वे जहां भी घूमने जाते थे,  वहां न्यायालय की कार्यवाही देखना पसन्द करते थे। एक बार वे फ्लोरिडा गये। वहां न्यायालय की जूरी में ११ श्वेत लोगों के साथ एक अश्वेत भी था। दोपहर के भोजनावकाश के दौरान उसने वकीलों से पूछा,

‘क्या यहां अश्वेत लोग भी जूरी पर बैठते हैं?’

उस वकील ने जवाब दिया,

‘Yes, it is something new. This is the first time in our state we have had a nigger on a jury and it’s all on account of a son-of-a-bitch named  Samual Leibowitz from New York. He came down to Alabama a few years ago to try a case and somehow he got to the Supreme Court in Washingtone, and damned if we haven’t had to put niggers on our juries over since.
हां यह कुछ नया है यह पहली बार है जब कोई अश्वेत व्यक्ति जूरी में है। यह सब उस उल्लू के पट्ठे सैमुएल लाईबोविट्ज़ के कारण हुआ जो कि कुछ साल पहले ऎलाबामा में एक मुकदमा करने आया था फिर उसने अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय से कानून बदलवा दिया अब हमें अश्वेत लोगों को जूरी पर रखना पड़ता है।

यह मुकदमा था स्कॉटस्बॉरो बायॉज़ पर चला मुकदमा।  इस  मुकदमें के समय ली छः साल की थीं और ऎलाबामा में रहती थीं। इस मुकदमें ने उन पर असर डाला। इसी के अधार पर, उन्होंने अपना प्रसिद्ध उपन्यास ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ की रचना की।  इस मुकदमें के तथ्य कुछ इस प्रकार थे।


१९३० का दशक अमेरिकी इतिहास में मंदी का दशक था। लोग इधर-उधर नौकरी की तालाश में घूमते थे। उनके पास टिकट खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे। इसलिए मालगाड़ी में बिना टिकट लिए जाया करते थे। २५ मार्च १९३१ में, एक मालगाडी में कुछ श्वेत व कुछ अश्वेत लड़के सफर कर रहे थे। उनमें आपस में, लड़ाई हो गयी। यह स्पष्ट नहीं है कि यह क्यों शुरू हुई पर इसमें श्वेत लड़कों की पिटाई हो गयी। श्वेत लड़कों ने मालगाड़ी से उतर कर स्टेशन मास्टर से इस बात की शिकायत की और अश्वेत लड़कों पर मुकदमा चलाने की बात कही।

 रूबी बेटस् और विक्टोरिया प्राइसका चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से

अगले स्टेशन पर मालगाड़ी रोक ली गयी। पूरी मालगाड़ी में ९ अश्वेत लड़के मिले जिनकी उम्र १२ साल से १९ साल थी। वे सब पकड़ लिए गये। उनके साथ दो श्वेत लड़कियां विक्टोरिया प्राइस (Victoria Price) ,रूबी बेटस् (Ruby Bates) भी मिली। उन श्वेत लड़कियों से पूछा गया कि क्या अश्वेत लड़के उन्हें तंग कर रहे थे। उनका जवाब था,

‘अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है।’

इस पर अश्वेत लड़कों को जेल भेज दिया गया। इन पर  बलात्कार का मुकदमा स्कॉटस्बॉरो में चला।  इसलिए यह लड़के स्कॉटस्बॉरो बॉयज़ नाम से, और यह मुकदमा  स्कॉटस्बॉरो बायॉज़ ट्रायल के नाम से जाना जाता है।

यह मुकदमा अमेरिकी कानूनी इतिहास में,   एक शर्मनाक मुकदमे के रूप में जाना जाता है। यह मुकदमा २०वीं शताब्दी के न केवल संविधान, पर नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में सबसे जाना माना मुकदमा है। यह दो बार अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय में गया और दोनों बार फांसी की सज़ा रद्द कर वापस पुन: सुनवाई के लिए वापस भेजा गया।

इस मुकदमें में क्या हुआ, यह अगली बार।

बुलबुल मारने पर दोष लगता है

भूमिका।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी – कोर्टरूम।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं।। कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है।। अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है।।

अन्य संबन्धित चिट्ठियां

पुस्तक समीक्षा से संबन्धित लेख चिट्ठे पर चिट्ठियां
वकीलों से संबन्धित चिट्ठियां
About this post in Hindi-Roman and English
is chitthi mein us mukdmen kee charchaa hai jisne harper lee ko ‘to kill a mocking bird’ likhne ke liye prerit kiya. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padhne ke  liye, daahine taraf, oopar ka widget dekhen.

This post talks about the case that inspired Harler Lee to write ‘To Kill A Mocking Bird’. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.
Related articles by Zemanta

सांकेतिक शब्द
Scottsboro boys trial, Victoria Price, Ruby Bates,
Samuel Leibowitz, biography, कानून, Law, leading question, suggestion,

book, book, books, Books, books, book review, book review, book review, Hindi, kitaab, pustak, Review, Reviews, science fiction, किताबखाना, किताबखाना, किताबनामा, किताबमाला, किताब कोना, किताबी कोना, किताबी दुनिया, किताबें, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, पुस्तक चर्चा, पुस्तकमाला, पुस्तक समीक्षा, समीक्षा,
Hindi,
Hindi Podcast, हिन्दी पॉडकास्ट,

Reblog this post [with Zemanta]
कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है

क्या चश्मदीद गवाह,  न चाहते हुए भी,  गलत  बयान दे देते हैं? ‘बुलबुल मारने पर दोष लगता है’की श्रंखला की इस चिट्ठी में, इसी की चर्चा है।

इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें।
यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, ‘मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने‘ देखें।

यह सच है कि चश्मदीद गवाह, न चाहते हुए भी,  गलत बयान दे देते हैं या गलत व्यक्ति की शिनाख़्त कर देते हैं। लेकिन यह कहना गलत होगा कि वे उस समय झूठ बोल रहे होते हैं। क्योंकि, उनके मुताबिक वही सच है। लेकिन ऐसा क्यों होता है?

सैमुएल, अक्सर चश्मदीद गवाह के द्वारा आरोपी की शिनाख़्त किये जाने पर सवाल उठाया करते थे। उन्हें लगता था कि चश्मदीद गवाह गलत शिनाख़्त कर रहा है। एक बार, वे वकीलों के बीच इस विषय पर बोल रहे थे। वकीलों ने उनके इस कथन पर प्रश्न लगाया। सैमुएल ने उस वक्त कुछ नहीं कहा पर कुछ समय बाद उन्होंने लोगों से पूछा,

‘आप लोगों में से, कौन से लोग कैमल सिगरेट पीते हैं।’

कैमल सिगरेट, अमेरिका की लोकप्रिय सिगरेट में से एक है। यह उसी तरह की सिग्रेट है जैसे कि पहले पनामा हुआ करती थी या आजकल विलस् फिल्टर होती है। बहुत से लोगों ने हाथ उठाया। सैमुएल ने उनमें उन पांच लोगों को चुना जो पिछले २० सालों से दो पैकेट कैमल सिगरेट पी रहे थे। सैमुएल ने फिर पूछा,

‘आपने ७०० पैकेट प्रतिवर्ष और आज तक २४,००० पैकेट अर्थात कैमल पैकेट को आपने करीब ५ लाख बार देखा है।’

उन्होंने हामी भरी। सैमुएल ने, उन पांचों को एक कागज़ दिया फिर कहा,

‘आप लोग अलग-अलग लिख कर दें कि कैमल सिगरेट के पैकेट के ऊपर आदमी का चित्र कहा है ऊंट के आगे है, पीछे है, या ऊपर है।’


कागज वापस मिलने के बाद, उसने उसे खोल कर, जोर से पढ़ा। दो ने लिख कर दिया कि आदमी का चित्र ऊंठ के आगे है दो ने कहा कि उसके ऊपर है एक ने कहा कि कोई भी आदमी का चित्र नहीं है।

सैमुएल ने लोगों से पैकेट निकाल कर देखने को कहा। पैकेट  के ऊपर कोई भी आदमी का चित्र नहीं था। यानि की चार लोगों के जवाब गलत थे। सैमुएल ने बताया,

‘यह इसलिये हुआ कि मैंने आपको यह सुझाव दिया था कि पैकेट पर आदमी का चित्र है। चश्मदीद गवाहों को इस तरह का सुझाव दिया जाता है। इसीलिये आपसे यह गलती हुई और चश्मदीद गवाह भी अक्सर गलत शिनाख़्त कर देते हैं।’


यही कारण है कि न्यायालय में पृच्छा (examination in chief) के समय, सूचक प्रश्न (leading question) पूछना मना है हालांकि प्रति पृच्छा (cross examination) के समय इस तरह के सवाल पूछे जा सकते हैं।

इस श्रृंखला की अगली कड़ी में बात करेंगे स्कॉटस्बॉरो बायॉज़ (Scottsboro boys trial) मुकदमे की। यह मुकदमा, अमेरिका में, २०वीं शताब्दी के संविधान एवं नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में, सबसे जाना माना मुकदमा है। इसमें सैमुएल वकील थे। यह वही मुकदमा है जिसने हारपर ली को ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ लिखने के लिये प्रेरित किया। क्या हुआ था इसमें? क्यों यह मुकदमा इतना प्रसिद्ध है? यह सब अगली बार।

बुलबुल मारने पर दोष लगता है

भूमिका।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी – कोर्टरूम।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं।। कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है।।

अन्य संबन्धित चिट्ठियां

पुस्तक समीक्षा से संबन्धित लेख चिट्ठे पर चिट्ठियां
वकीलों से संबन्धित चिट्ठियां
About this post in Hindi-Roman and English
is chitthi mein charchaa hai ki kya chashmdeed gavaah na chaahte hua bhee galat byaan de dete hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padhne ke  liye, daahine taraf, oopar ka widget dekhen.

This post explains that why eyewitnesses, unknowingly, make wrong statements. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.
सांकेतिक शब्द
Samuel Leibowitz, biography, कानून, Law, leading question, suggestion,

book, book, books, Books, books, book review, book review, book review, Hindi, kitaab, pustak, Review, Reviews, science fiction, किताबखाना, किताबखाना, किताबनामा, किताबमाला, किताब कोना, किताबी कोना, किताबी दुनिया, किताबें, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, पुस्तक चर्चा, पुस्तकमाला, पुस्तक समीक्षा, समीक्षा,
Hindi,
Hindi Podcast, हिन्दी पॉडकास्ट,

Reblog this post [with Zemanta]
सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं
सैमुएल लाइबोविट्ज़, २०वीं शताब्दी के दूसरे चतुर्थांश में अमेरिका के सबसे प्रसिद्ध वकील थे। ‘बुलबुल मारने पर दोष लगता है’ श्रृंखला की इस चिट्ठी में, चर्चा है कि उन्हें पहला मुकदमा कैसे मिला और उसमें क्या हुआ।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें।
यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। सुनने के लिये, दाहिने तरफ का विज़िट, ‘मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने’ देखें।


सैमुएल की पृष्ठभूमि ऐसी नहीं थी कि उन्हें मुकदमे मिल सकें। एक बार कॉर्नेल  विश्वविद्यालय में, जब कानून के डीन ने, उनसे,  इस बारे में बात की तब  सैमुएल का कहना था

‘मैं पहले प्रसिद्व वकील बनूंगा। तब, बड़ी-बड़ी कम्पनियां मेरे पास मुकदमा कराने आयेंगी और मैं पैसे कमा सकूंगा।’ 

 सैमुएल लाइबोविट्ज़ का यह चित्र लाइफ पत्रिका के सौजन्य से।

  लेकिन जब सैमुएल वकील बन गये तब सबसे मुश्किल, उन्हें अपना पहला मुकदमा मिलने में हुई।

न्यायालय में  जब आरोपी वकील नहीं कर पाते  है तब  न्यायालय उनके लिए वकील नियुक्त करता है।  सैमुएल को भी अपना पहला मुकदमा इसी तरह मिला। 

इस मुकदमें के आरोपी के ऊपर आरोप था कि उसने  शराबखाने  का ताला खोलकर, पैसे और शराब की चोरी की। उसी दिन सुबह, उसे शराब के नशे में धुत्त, पकड़ लिया गया। उसकी जेब में वह चाभी भी मिली जिससे उसने ताले को खोला था। पुलिस के सामने उसने अपना गुनाह कबूल करा लिया। अमेरिका में पुलिस के सामने दिया बयान न्यायालय में देखा जा सकता है हालांकि भारत में नहीं।


सैमुएल ने अपने मित्रों, सहयोगियों  से इस संबन्ध में सलाह ली। उनका कहना था कि,

  • आरोपी को अपना दोष मान लेना चाहिए। क्योंकि सारे सबूत आरोपी के खिलाफ हैं। 
  • दोष मान लेने पर सजा कम हो जायगी। 

लेकिन सैमुएल को लगा कि यदि उसने अपने मुवक्किल से आरोप स्वीकार करवा दिया तब वह न तो प्रसिद्घ हो सकेगा, न ही पैसा कमा सकेगा। वह इस मुकदमे के उस पक्ष को देखने लगा,  जिसकी तरफ कोई सोच भी नहीं सकता था। 

कई  रात, बिस्तर में लेटे-लेटे, सोचते-सोचते, उसे एक युक्ति समझ में आयी।  यदि वह चल गयी तो जीत उसकी, नहीं तो आरोपी को सजा तो होनी ही थी। मुकदमा शुरू होने पर,  अभियोजन के अधिवक्ता एवं न्यायाधीश को आश्चर्य हुआ, जब आरोपी ने आरोप स्वीकार नहीं किया।

अभियोजन का पक्ष समाप्त हो जाने के बाद, आरोपी ने गवाही दी कि उसने, पुलिस अत्याचार के कारण, आरोप स्वीकार कर लिया था। 

अभियोजन का कथन था कि आरोपी ने चाभी से ताला खोलकर चोरी की है।  सैमुएल ने न्यायालय के समक्ष बहस की,


‘क्या सरकारी वकील ने यह स्वयं देखा है कि आरोपी के जेब से मिली चाभी से शराबघर का ताला खुल सकता था या नहीं। यदि नहीं तो, न्यायालय एवं जूरी चल कर देखें कि क्या इस चाभी से उस ताले को खोला जा सकता है। यदि ताला नहीं खुलता है तो उसके मुवक्किल पर चोरी का आरोप नहीं बनता है।’

यह सच था कि सरकारी वकील स्वयं इस बात की जांच नहीं की थी कि उस चाभी से ताला खोला जा सकता था अथवा नहीं। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता को लगा कि यदि, 
  • इस समय न्यायधीश, जूरी के सदस्य जा कर देखते हैं तो न्यायालय और जूरी का समय बरबाद होगा।  इस तरह के अनगिनत मुकदमे लम्बित थे, उनका भी फैसला होना था।
  • ताला न खुला, तो सरकारी वकील की भद्द उड़ जायेगी। 

यह सोचकर सरकारी वकील ने कहा कि उसे बहस नहीं करनी है। सैमुएल ने भी अपनी बहस समाप्त कर दी। यह बताने की जरूरत नहीं है कि जूरी को  आरोपी को छोड़ने में कुछ भी समय  नहीं लगा। हालांकि न्यायालय से बाहर निकलने के बाद जब सैमुएल ने उस चाभी से ताला खोलने का प्रयत्न किया तो उसने न्यायालय के सारे ताले खुल गये। 

इस मुकदमे के बारे में अगले दिन अखबार में कुछ नहीं निकाला पर जेल में अन्य कैदियों, अधिवक्ताओं के बीच, यह बातचीत चलने लगी कि यह वकील कुछ ख़ास है। यहीं से, सैमुएल का सितारा, चमकना शुरू हो गया।

सैमुएल ने अपना पहला मुकदमा, रात में ही, बिस्तर पर सोचते सोचते जीत लिया था। उसने यह आदत,  जीवन भर डाली। वह मुकदमा के शुरू होने से पहले ही सारे पक्षों के बारे में सोच लेता था। यही एक अच्छे वकील की निशानी है। वकील का वास्तविक जीवन, अर्ल स्टैनली गार्डनर के कल्पित वकील, पैरी मेसन की तरह नहीं, जो मुकदमें के दौरान ही सोचा करता था। हर सफल वकील मुकदमा शुरू होने के पहले ही, उसके सारे पहलुओं के बारे में सोच लेते हैं।

इस मुकदमें से, सैमुएल ने एक दूसरी बात यह सीखी, कि जूरी, पुलिस-अत्याचार के बारे में आसानी से विश्वास कर लेते हैं। इस बात ने भी, उसे अन्य मुकदमों सफलता दिलवायी। 

क्या चश्मदीद गवाह,  न चाहते हुऐ भी,  आरोपी की गलत शिनाख्त कर देते हैं। इस बारे में, सैमुएल के क्या विचार हैं, यह अगली बार। 

बुलबुल मारने पर दोष लगता है

भूमिका।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी – कोर्टरूम।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं।।

अन्य संबन्धित चिट्ठियां

 

पुस्तक समीक्षा से संबन्धित लेख चिट्ठे पर चिट्ठियां
वकीलों से संबन्धित चिट्ठियां
About this post in Hindi-Roman and English
pichhlee shatabdee mein, america ke  prasidh vakeel samuel leibowitz tthe. unhen  pahalaa mukdamaa kaise mila aur usme kya hua – iseee ke baare mein charchaa hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post describes how Samuel Leibowitz, the most famous American  lawyer of the 20th century, got his first case and what happened to it. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द

Samuel Leibowitz, biography, कानून, Law, Good advocate ponders over all aspects of a case beforehand,

book, book, books, Books, books, book review, book review, book review, Hindi, kitaab, pustak, Review, Reviews, science fiction, किताबखाना, किताबखाना, किताबनामा, किताबमाला, किताब कोना, किताबी कोना, किताबी दुनिया, किताबें, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, पुस्तक चर्चा, पुस्तकमाला, पुस्तक समीक्षा, समीक्षा,
Hindi,
Hindi Podcast, हिन्दी पॉडकास्ट,

वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी – कोर्टरूम
सैमुएल लाइबोविट्ज़, २०वीं शताब्दी के दूसरे चतुर्थांश में अमेरिका के सबसे प्रसिद्ध वकील थे। ‘बुलबुल मारने पर दोष लगता है’ श्रृंखला की इस चिट्ठी में, उनके जीवन पर लिखी पुस्तक ‘कोर्टरूम’ के बारे में चर्चा है।

‘डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े’ श्रृंखला की कड़ी ‘यदि विकासवाद जीतता है तो ईसाइयत बाहर हो जायेगी‘ में, मैंने वकील क्लेरेन्स डैरो (Clarence Darrow) की चर्चा की थी। उनका जन्म १८ अप्रैल, १८५७ को हुआ था। उन्न्नीसवी शताब्दी के अंत होते होते वे अमेरिका के सबसे जाने माने वकील के रूप में स्थापित हो गये थे। उनका सितारा उदय हो चुका था। उसी समय एक अन्य वकील, सैमुएल लेबो (Samuel Lebeau) का जन्म १४ अगस्त १८९३ में रोमानिया में हुआ।

१८९७ में सैमुएल के पिता अमेरिका आ गये। वहां लोगों की सलाह पर सैमुएल के पिता ने अपने नाम का अमेरिकीकरण कर लिया—लेबो की जगह वे लाइबोविट्ज़  (Leibowitz) हो गये।


सैमुएल को विद्यार्थी जीवन में,  वक्तृत्व (elocution) और वाद विवाद प्रतियोगिताएं (debate) बेहद पसन्द थे। इसमें, वे हमेशा आगे रहते थे। पिता के सुझाव पर  सैमुएल ने   वकील बनने की ठानी और कानून की शिक्षा कॉर्नेल विश्वविद्यालय से पूरी की।


बीसवीं शताब्दी के पहले चतुर्थांश के अन्त होते होते सैमुएल ने अपना नाम  अमेरिका के जाने माने फौजदारी  के वकील के रूप में स्थापित कर लिया।  दूसरे चतुर्थांश  में वे अमेरिका में फौजदारी के सबसे प्रसिद्व वकील हो गये। १९४१ में  उन्होंने न्यायाधीश बनना स्वीकार कर लिया। न्यायधीश के रूप में वे जल्दी गुस्सा हो जाते थे। इसलिये वे बाद में कुछ विवादास्पद हो गये थे। उनकी मृत्यु ११ फरवरी, १९७८ में हो गयी।

 सैमुएल लाइबोविट्ज़ एवं उनकी पत्नी अपने पौत्र के साथ खेलते हुऐ – चित्र लाइफ पत्रिका के इस सौजन्य से। 

१९५० में, क्वेंटिन रिनॉल्डस् (Quentin Reynolds) ने सैमुएल की जीवनी,  कोर्टरूम (Courtroom) नामक पुस्तक में लिखी है। यह वकीलों के द्वारा लिखी गयी आत्मकथा या उनकी बारे में लिखी जीवनियों में सबसे अच्छी लिखी पुस्तक है। यह पुस्तक न केवल हर वकील को, पर प्रत्येक व्यक्ति के  पढ़ने योग्य है। बहुत से लोग, वकीलों के बारे में अच्छे विचार नहीं रखते हैं। यह पुस्तक उनके नजरिये को बदलेगी।

अगली बार बात करेंगे सैमुएल को पहला मुकदमा कैसे मिला और उसमें क्या हुआ।

इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इन फाइलों को आप सारे ऑपरेटिंग सिस्टम में, फायरफॉक्स ३.५ या उसके आगे के संस्करण में सुन सकते हैं। इन फॉरमैट की फाइलों को आप,
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
भी सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें। यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम लिखा है वहां चटका लगायें। इन्हें डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों में से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले। इन्हें डिफॉल्ट करने के तरीके या फायरफॉक्स में सुनने के लिये मैंने यहां विस्तार से बताया है

बुलबुल मारने पर दोष लगता है

भूमिका।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी – कोर्टरूम।।

पुस्तक समीक्षा से संबन्धित लेख चिट्ठे पर अन्य चिट्ठियां

About this post in Hindi-Roman and English
pichhlee shatabdee mein, samuel leibowitz america ke sabse prasidh vakeel tthe. unkee jevanee per, quentin reynolds ne, ‘courtroom’ naamak pustak  likhee hai. yeh vakeelon kee sabse achchhee jeevane hai. ‘bulbul maarne per dosh lagtaa hai’ shrankhla kee is kari mein, isee pustak ke baare mein charchaa hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

Samuel Leibowitz was most famous American  lawyer of the second quarter of the 20th century. Quentin Reynolds has written his biography titled as ‘Coutroom’. It is the finest lawyer’s biography ever written. This post of my new series ‘bulbul maarne per dosh lagtaa hai’ is about this book. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द

Samuel Leibowitz, biography, कानून, Law,

book, book, books, Books, books, book review, book review, book review, Hindi, kitaab, pustak, Review, Reviews, science fiction, किताबखाना, किताबखाना, किताबनामा, किताबमाला, किताब कोना, किताबी कोना, किताबी दुनिया, किताबें, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, पुस्तक चर्चा, पुस्तकमाला, पुस्तक समीक्षा, समीक्षा,
Hindi,
Hindi Podcast, हिन्दी पॉडकास्ट,

Reblog this post [with Zemanta]
‘इंटेलिजेन्ट डिज़ाईन’ – सृजनवादियों का नया पैंतरा
अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय से दो बार हार जाने के बाद भी मज़हबी कट्टरवादियों ने हार नहीं मानी। उन्होनें अपना पैंतरा बदल दिया। इस चिट्ठी में उनकी इस चाल और उस पर टैमी किट्ज़मिलर बनाम डोवर एरिया स्कूल डिस्ट्रिक्ट मुकदमें में हुऐ फैसले की चर्चा है। 
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें। यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम लिखा है वहां चटका लगायें। इन्हें डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।
मज़हबी कट्टरवादियों ने १९८९ में एक पुस्तक प्रकाशित की। इसका नाम ‘ऑफ पांडास्  एण्ड पीपल’ है। इसमें सिद्वान्त तो सृजनवाद का ही है पर सृजनवाद की जगह ‘इंटेलिजेन्ट डिज़ाईन’ (Intelligent Design) शब्द का प्रयोग किया गया है। इन लोगों ने स्कूलों को निम्न तरह की यह  नीति निर्णय लेने के लिए बाध्य किया,
‘The Pennsylvania Academic Standards require students to learn about Darwin’s Theory of Evolution and Case eventually to take a standardized test of which evolution is a part.
Because Darwin’s Theory is a theory, it continues to be tested as new evidence is discovered. The Theory is not a fact. Gaps in the Theory exist for which there is no evidence. A theory is defined as a well-tested explanation that unifies a broad range of observations.
Intelligent Design is an explanation of the origin of life that differs from Darwin’s view. The reference book, Of Pandas and People, is available for students who might be interested in gaining an understanding of what Intelligent Design actually involves.
With respect to any theory, students are encouraged to keep an open mind. The school leaves the discussion of the Origins of Life to individual students and their families. As a Standards-driven district, class instruction focuses upon preparing students to achieve proficiency on Standards-based assessments.’

Intelligent design protest Pictures, Images and Photos

‘स्कूल में   डार्विन का विकासवाद का सिद्धांत पढ़ाया जा सकता है। लेकिन शिक्षक उसको पढ़ाने के पहले विद्यार्थियों को बतायें कि यह केवल सिद्धांत है और इस सिद्धांत का कोई तथ्य नहीं है।
इंटेलीजेंट डिज़ाइन सिद्धांत भी प्राणियों की उत्पत्ति के बारे में बताता है और यह डार्विन के विकासवाद से भिन्न है। इस बारे में ‘ऑफ  पांडास एण्ड पीपल’ नामक पुस्तक  विद्यार्थियों  के लिए उपलब्ध है जो इस सिद्वान्त के बारे में बताती है।
विद्यार्थियों से कहा जाता है कि वे अपने मस्तिष्क को खुला रखे।  इस बारे में, विद्यालय विद्यार्थियों को उनके एवं परिवार के विवेक पर छोड़ते है।’

यह नीति बहुत सारे स्कूलों में लागू कर दी गयी।  कुछ अभिभावकों ने इस नीति निर्णय को न्यायालय के समक्ष चुनौती दी।

दो बेटियों की मां, टैमी किट्ज़मिलर २६ सितम्बर २००५ में, हैरिसबर्ग पैनिसलवेनिया के न्यायालय से बाहर आती हुईं – चित्र कैरलिन कैस्टर/ एपी फोटो Carolyn Kaster/ AP Photo

अमेरिका के पेन्सिलवेनिया राज्य के परीक्षण न्यायालय ने, टैमी किट्ज़मिलर बनाम डोवर एरिया स्कूल डिस्ट्रिक्ट मुकदमें में, दिनांक २० दिसम्बर,२००५ को अपना फैसला देते हुऐ घोषणा की,

‘A declaratory judgement is issued in favour of Plaintiff … that Defendant’s [School's] policy violates the First Amendment of the Constitution of the United States and Article 1& 3 of the Constitution of the Commonwealth of Pennsylvania.
… Defendants are permanently enjoined from maintaining ID Policy in any school within Dover Area District.’  

यह नीति अमेरिका के प्रथम संशोधन का उल्लघंन करती है, और असंवैधानिक है।
विपक्ष पक्ष को आदेशित किया जाता है कि वे इस नीति को डोवेर क्षेत्र के किसी भी स्कूल में  लागू न करें।

Creationism Pictures, Images and Photos
नवम्बर २००५ में डोवर स्कूल बोर्ड़ के सदस्यों का चुनाव हुआ। इस  चुनाव में इंटेलीजेन्ट डिज़ाइन नीति के पक्ष में वोट दिये जाने  वाले सारे सदस्य नहीं चुने गये। नये सदस्यों के मुताबिक यह नीति  ठीक नहीं थी। उन्होनें इसे ठुकरा दिया।

क्या कट्टरवादियों ने हार मान ली या कुछ नया राग छेड़ दिया – यह अगली बार। 
डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े 
भूमिका।। डार्विन की समुद्र यात्रा।। डार्विन का विश्वास, बाईबिल से, क्यों डगमगाया।। सेब, गेहूं खाने की सजा।। भगवान, हमारे सपने हैं।। ब्रह्मा के दो भाग: आधे से पुरूष और आधे से स्त्री।। सृष्टि के कर्ता-धर्ता को भी नहीं मालुम इसकी शुरुवात का रहस्य।। मुझे फिर कभी ग़ुलाम देश में न जाना पड़े।। ऐसे व्यक्ति की जगह, बन्दरों से रिश्ता बेहतर है।। विकासवाद उष्मागति के दूसरे नियम का उल्लंघन करता है।। समय की चाल – व्यवस्था से, अव्यवस्था की ओर।। मैंने उसे थूकते हुऐ देखा है।। यदि विकासवाद जीतता है तो इसाइयत बाहर हो जायगी।। विकासवाद पढ़ाना मना करना, मज़हबी निष्पक्षता का प्रतीक नहीं।। सृजनवाद धार्मिक मत है विज्ञान नहीं है।। ‘इंटेलिजेन्ट डिज़ाईन’ – सृजनवादियों का नया पैंतरा।।
About this post in Hindi-Roman and English

is chitthi mein Tammy Kitzmiller V Dover Area School District mukdme kee charchaa hai. ismen court ne oos neeti ko gairkanoonee ghoshit kar diya jismen intelligent design ko pdhaane ka nirnay liya gayaa thaa. yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is about Tammy Kitzmiller V Dover Area School District where the court has declared the policy to teach intelligent design as unconstitutional. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.
सांकेतिक चिन्ह
Hindi,।
Hindi Podcast, हिन्दी पॉडकास्ट,
Reblog this post [with Zemanta]