पर्यावरण
जिम कॉर्बेट की कर्म स्थली – कुमाऊं
यह चिट्ठी हमारी कुमाऊँ यात्रा की भूमिका है।जिम कॉर्बेट रुद्रप्रयाग के आदमखोर तेंदुऐ को मारने क…
जिम कॉर्बेट की कर्म स्थली – कुमाऊं
यह चिट्ठी हमारी कुमाऊँ यात्रा की भूमिका है।जिम कॉर्बेट रुद्रप्रयाग के आदमखोर तेंदुऐ को मारने क…
पापा, नुकसान उनका है तुम्हारा नहीं
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पापा, नुकसान उनका है तुम्हारा नहीं
इस चिट्ठी में, बेटे के साथ बिताये कुछ पल, उससे मिली सीख, का वर्णन है। कुछ समय पहले, परी को शोध के ल
घोड़ा डाक्टर, गायों और भैंसों की लात खाते थे
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कोबरा मेरे हाथ पर लिपट गया
इस चिट्ठी में चेनेई के पास स्थित क्रॉकोडाइल फार्म की चर्चा है। चेनेई से पॉन्डिचेरी जाते समय, रास…
सैकड़ों वर्ष पहले के इंजीनियर ही बेहतर थे
यह चिट्ठी सालों पुराने पानी संचय करने के तरीके को बता रही है। यह आज भी प्रसांगिक है।
yeh chitthi puraane paani sanchay karne ke treeke ko bataa rahee hai. yeh aaj bhee prasangik hai.
This post talks about old method of harvesting water that is still relevant today ![]()
पृथ्वी, हमारे पास, वंशजों की धरोहर है
‘उन्मुक्त जी, हम तो समझे कि आप पर्यावरण के बारे में कुछ बता रहें हैं यहां तो कुछ और ही है – पत्नी को मनाया जा रहा है।’
‘लगता है कि उन्मुक्त जी, बढ़िया सा शीर्षक देकर, हम सब को झांसा दे रहे हैं। समझ गये, कुछ नहीं, बस टीआरपी का चक्कर है।’
‘वैसे सादा रंगीन कपड़ा सलवार है। लेकिन आजकल फैशन के अनुसार आप जिसे चाहें सलवार बना ले, जिसे कुर्ता।’
‘आप बिलकुल मत खबराइये आपकी पत्नी को सब मालूम होगा। वह सब समझ जाएगी।’
‘उंह हूं उन्मुक्त जी, इस चिट्ठी में पर्यावरण का जिक्र तो दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है।’
‘अंकल, यह सब पर्यावरण को बचाने के लिये किया जा रहा है। हम प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करते हैं। इसलिये इस तरह के पैकेट प्रयोग करते हैं। इसके अलावा, इसके कई फायदे हैं।
- हमने रद्दी समाचार पत्रों का फिर से प्रयोग कर लिया; और
- यह पैकेट लघु उद्योग के द्वारा बनाये जा रहे हैं। इस कारण बहुत से लोगों को काम मिल रहा है।’
‘We have not inherited this planet from our parents.
But have merely borrowed it from our children’
यह पृथ्वी हमें अपने पूर्वजों से नहीं मिली है
यह हमारे पास वशंजों की धरोहर है
- आप समान ऐसे पैकेटों में खरीदिये जो फिर से प्रयोग हो सकें और उन्हें बार बार प्रयोग करें।
- शॉपिंग पर अपना बैग ले जायें।
- पेपर को बेकार न करें। दोनों तरफ प्रयोग करें।
- हो सके तो, लिफाफों को फाड़ कर, अन्दर की तरफ सादी जगह को, लिखने के लिये प्रयोग करें।
- सारे बेकार कागजों को पुनर्चक्रण (recycling) के लिये इकट्ठा करें।
- प्लास्टिक के पैकेटों का कम प्रयोग करें। सब्जी, फल या मांस को सुरक्षित रखने के लिये प्लास्टिक की जरूरत नहीं।
- उन उत्पादनों को लें, जो हर बार पुनः फिर से भरने वाले पैकटों में मिलते हों। यदि आपकी प्रिय वस्तु ऐसे पैकेटों में न आती हो तो कम्पनी को इस तरह के पैकेटों में बेचने के लिये लिखें।
- खाने की वस्तुओं को हवा-बन्द बर्तनों में रखें। उन्हें चिपकती हुई प्लास्टिक में रखने की जरूरत नहीं।
- पेट्रोल बचायें, प्रदूषण कम करें।
- अपने सहयोगियों और पड़ोसियों के साथ कार पूल कर प्रयोग करने का प्रयत्न करें।
- बिना बात बिजली का प्रयोग न करें – बत्ती की जरूरत न हो तो बन्द कर दें।
- पेड़ों, जंगलों के कटने को रोके। इनके कटने के खिलाफ लोगों को जागरूक करें।
- पुनरावर्तित (recycled) वस्तुओं का प्रयोग करें।
- ऐसे बिजली के उपकरण प्रयोग करें जो कम बिजली खर्च करते हों। इस समय इस तरह के नये तकनीक पर बने बल्ब आ रहें हैं। उनका प्रयोग करें।
- पर्यावरण-मित्रवत उत्पादकों (environment friendly products) का प्रयोग करें।
- क्या चश्मदीद गवाह, न चाहते हुए भी, गलत बयान दे देते हैं: ►
- वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी – कोर्टरूम: ►
- Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
- Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
- Linux पर सभी प्रोग्रामो में – सुन सकते हैं।
लगता है कि साइकिल चलाने का चस्का बढ़ेगा
इस चिट्ठी में कोपेनहेगन व्हील के बारे में सूचना है।
is chitthi mein Copenhagen wheel ke baare mein soochnaa hai.
This post gives information about Copenhagen wheel. ![]()
भारत में समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं न कि निजी
त्रिवेन्दम में हम लोग केटीडीसी के समुद्र होटेल में ठहरे थे। वहां पहुंच कर हम लोगों ने चाय पी और नीचे समुद्र तट पर घूमने चले गये। इस तट का नाम ही ‘समुद्र तट‘ है । यहां पर सूर्यास्त हो रहा था – बहुत दृश्य सुन्दर था।
हम लोगों ने यह सोचा कि पूरे तट का एक नज़ारा ले लिया जाए। हम लोग जब एक तरफ आगे जाने लगे तो एक जगह, एक गार्ड, हम लोगों को जाने से रोकने लगा। वहां पर कोई प्राइवेट होटल था। वह उसी का गार्ड था। उसने हमसे कहा,
‘यह समुद्र तट का हिस्सा केवल उसके होटल के अतिथि के लिए है सबके लिए नहीं आप लोग नहीं जा सकते हैं।‘
मैंने उससे रौबीली आवाज़ में कहा,
‘भारत में कोई भी समुद्र तट प्राइवेट नहीं है। सारे समुद्र तट सरकारी और सार्वजनिक है। हां कुछ सुरक्षा की दृष्टि से कुछ तट सार्वजनिक तौर पर नहीं खुले है। तुम हमें यहां घूमने से नहीं रोक सकते हो।
हाँ यह बात अलग है कि हम लोग कोई अश्लील तरीके का कपड़ा पहने या कोई अश्लील काम को करें, तो रोक सकते हो। लेकिन हम लोग न अश्लील कपड़े पहने हुए हैं और न ही अश्लील हरकत कर रहे है। इसलिए हमें रोकना एकदम गलत है। तुम अपने मैनेजर को बुलाकर लाओ या फिर मुझे उसके पास ले चलो। मैं उसे समझा देता हूं।’
इतना सुनने के बाद वह थोड़ा सा घबरा सा गया। उसने कहा अच्छा-अच्छा आप लोग आगे जा सकते है। हम लोग आगे तक घूमने गये। वहां घूमते हुऐ उसकी बात समझ में आयी।
उस होटल में बहुत सारे विदेशी पर्यटक भी थे। यह लोग भारतियों से बहुत कम कपड़े पहने हुए थे और धूप का आनन्द ले रहे थे या नहा रहे थे। सारे भारतीय उन्हीं की तरफ देख रहे थे। भारत के पुरूष भी जो नहा रहे थे वह भी ठीक तरह के कपड़े पहनकर नही नहा रहे थे। मुझे ही देखने में अजीब लग रहा था तो विदेशियों को देखने में अजीब लगेगा ही। किसी को भी यह हरकत परेशान करेगी। इसीलिए वह मना कर रहा था।
हम लोग दो साल पहले गोवा गये थे वहां पर ‘सिटा दे गोवा’ नामक होटल में ठहरे थे। यह बहुत सुन्दर होटल है पर इसने अपनी इमारत इस तरह से बना ली है कि इसके सामने का समुद्र तट इन्हीं का हो गया है। इस इमारत को भी उन्होंने गैर कानूनी तौर से बनाया है। इस बारे में वहां एक लोकहित याचिका हुई। जिसमें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इमारत तोड़ने का आदेश हो गया पर गोवा सरकार ने इसे बचाने के लिए अध्यादेश जारी कर दिया है। इसलिए आजकल वहां बवाल मचा है। इस विषय पर अधिक जानकारी आप डाउन टू अर्थ नामक पत्रिका के लेख में पढ़ सकते हैं। डाउन टू अर्थ एक अच्छी पत्रिका है। मैंने इसके और पर्यावरण पर कुछ अन्य पत्रिकाओं के बारे में यहां लिखा है।
समुद्र तट पर घूमते हुए वहाँ पर कुछ लोगों ने मुझसे पूछा क्या नाव पर घूमना पसन्द करूंगा। मैंने कहा,
‘इस समय तो कुछ अंधेरा हो रहा है इसलिए आज तो नहीं पर कल घूमना पसन्द करूंगा। लेकिन, इसके लिये आपको कितने पैसे देने होंगे।’
मेरा इतना ही कहना था कि मुन्ने की मां मुझसे कहने लगी,
‘तुम नाव पर नहीं जाओगे। यदि तुम्हें नाव पर घूमने के लिए जाना है तो तुम अकेले आया करो या फिर मुझे अपने साथ न लाया करो।’
इतने में उस व्यक्ति ने जवाब दिया,
‘नाव में एक बार घूमने पर चार सौ पचास रूपये लगेगा और कल सुबह साढ़े नौ बजे से सैर करना शुरू होगा।’
हम जब वहां से चलने लगे, तो मुन्ने की मां ने फिर से कहा,
‘चाहे जो भी हो जाए, लेकिन, तुम नाव पर घूमने नहीं जाओगे।’
मैंने उसका मन रखने के लिए कहा,
‘मैं तो उससे केवल पैसा पूछ रहा था, मैं घूमने नहीं जा रहा हूं।’
मैंने सोचा कि अगले दिन अकेले आऊँगा और चुपके से बिना बताये घूमने चला जाऊँगा लेकिन यह हो न सका। हम उसके बाद बहुत व्यस्त रहे।
अगली बार बात करेंगे इटालियन सुन्दरी, सिलविया की।
क्या कहा, महिलायें वोट नहीं दे सकती थीं।। मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता।। हिन्दी चिट्ठकारों का तो खास ख्याल रखना होता है।। आप जितनी सुन्दर हैं उतनी ही सुन्दर आपके पैरों में लगी मेंहदी।। साइकलें, ठहरने वाले मेहमानो के लिये हैं।। पुरुष बच्चों को देखे – महिलाएं मौज मस्ती करें।। भारतीय महिलाएं, साड़ी पहनकर छोटे-छोटे कदम लेती हैं।। पति, बिल्लियों की देख-भाल कर रहे हैं।। कुमाराकॉम पक्षीशाला में।। क्या खांयेगे – बीफ बिरयानी, बीफ आमलेट या बीफ कटलेट।। आखिरकार, हमें प्राइवेट और सरकारी होटल में अन्तर समझ में आया।। भारत में समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं न की निजी।।
- Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
- Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
- Linux पर सभी प्रोग्रामो में – सुन सकते हैं।
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