प्यार तो होता ही है TAGS: फिल्म समीक्षा इस चिट्ठी में, अंग्रेजी फिल्म ‘लव हैपेन्स्’ की समीक्षा है।फिल्म का भावपूर्ण दृश्यपॉन्डचेरी से ल…
February 5, 2012
प्यार तो होता ही है TAGS: फिल्म समीक्षा इस चिट्ठी में, अंग्रेजी फिल्म ‘लव हैपेन्स्’ की समीक्षा है।फिल्म का भावपूर्ण दृश्यपॉन्डचेरी से ल…
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आप को कैसी फिल्में पसन्द हैं TAGS: दर्शन | फिल्म समीक्षा | महिला अधिकार ऍलिसन बेचडेल का चित्र विकिपीडिया सेकिसी विचारधारा को समाज में पहुंचाने के लिये, फिल्में और ट…
बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां TAGS: astronomy | खगोलशास्त्र | पुस्तक समीक्षा | फिल्म समीक्षा | विज्ञान | हिन्दी | book review | film review | hindi | science यह चिट्ठी में, बाईबिल, खगोलशास्त्र, और इससे संबन्धित विज्ञान कहानियां के बारे में चर्चा है। is chitthi mein bible, khagolshastra aur isse smbndhit vigyaan khaniyon’ ke baare mein charchaa hai. This post talks about Bible, Astronomy and related Science fiction.
ऐसा कोई कंप्यूटर नहीं, जिसे हैक न किया जा सकता हो TAGS: गणित | फिल्म समीक्षा | विज्ञान कहानी समीक्षा इस चिट्ठी में, फिल्म इंडिपैंडेंटस डे (Independence day) और इसका साईबर अपराध से संबन्ध की चर्चा है।इस चिट्ठी …
आज, मुझसे शादी करोगी TAGS: गणित | पुस्तक समीक्षा | फिल्म समीक्षा | विज्ञान | विज्ञान कहानी समीक्षा इस चिट्ठी में डगलस ऐडम्स् की पुस्तक ‘द हिचहाइकरस् गाइड टू द गैलैक्सी’ की चर्चा के साथ आज की तारीख …
तू डाल डाल, मैं पात पात TAGS: गणित | पॉडकास्ट | फिल्म समीक्षा | विज्ञान | सूचना प्रद्योगिकी यह चिट्ठी, साइबर अपराधों पर नयी श्रृंखला की भूमिका है। इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, ‘मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने‘ देखें। फिल्म ‘इंडिपेंडेन्स डे’ से क्या आपको मालुम है कि आज किसका जन्म दिन है? मेरा तो नहीं है पर है किसी खास व्यक्ति का। ‘उन्मुक्त जी, कौन है वह व्यक्ति? क्या चिट्ठकार है? ज्लदी बताइये, उसे बधाई तो दे दें।’ वह चिट्ठकार तो नहीं है, पर है एक महान व्यक्ति, एक महान तर्क शास्त्री है। मेरे विचार से आज तक हुऐ सारे तर्क शास्त्रियों में महानतम―नाम है उसका, कोर्ट गर्डल (Kurt Gödel)। चित्र इंस्टिट्यूट ऑफ एडवान्सड स्टडीज़ की वेबसाइट से कोर्ट गर्डल का जन्म २८ अप्रैल १९०६ में , बर्नो चेक रिपब्लिक (Czech Republic) में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ायी वियान ऑस्ट्रिया में पूरी की पर बाद में इंस्टिट्यूट ऑफ एडवान्सड स्टडीज़, प्रिंक्सटन चले गये। वहीं उनकी मृत्यु १४ जनवरी १९७८ में हो गयी। ‘उन्मुक्त जी आपका शीर्षक तो है “तू डाल डाल, मैं पात पात” हम तो समझे कि यहां कुछ छकने, छकाने की बात होगी। लेकिन आप तो चालू हो गये तर्क शास्त्री कोर्ट गर्डल की बात करने। मालुम नहीं पहला चित्र क्या है, लगता है कि कहीं लड़ाई हो रही है।हमें तो आप “द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर” फिल्म की याद दिला रहे हैं। आपको याद है वह फिल्म। आप शीर्षक कुछ देते हैं, लिखने कुछ और लग जाते हैं।’ मुझे ‘द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर’ फिल्म की बहुत अच्छी तरह से याद है। यह १९६१ में बनी वॉल्ट डिज़नी की लोकप्रिय फिल्मों में से एक है। इसे मैंने चौथी या पांचवी कक्षा में पढ़ते समय देखा था। कौन भूल सकता है उस प्रोफेसर को, जिसने भूल से, उड़ते रबर (flying rubber) (flubber) (फ्लबर) का आविष्कार कर लिया था। इसी रोमांच में वह अपनी शादी की तारीख भूल गया। बस, गुस्से में, उसकी मंगेतर ने शादी तोड़ दी और वह किसी अन्य से दोस्ती का दिखावा करने लगी। फिल्म में, फल्बर के साथ प्रोफेसर के रोमांचकारी किस्से और अपने प्यार को वापस पाने की कहानी है। कितनी प्यारी फिल्म थी, आज भी याद है। यह फिल्म, सैमुएल टेलर की विज्ञान कहानी ‘अ सिचुऐशन ऑफ ग्रैविटी’ (A Situation of Gravity by Samuel W Taylor) नामक कहानी के ऊपर बनी है। इसके बाद १९६३ में वॉल्ट डिज़नी ने इसकी ऊत्तर कथा फिल्म ‘सन ऑफ फल्बर’ (Son of Flubber) बनायी। यह श्याम-श्वेत फिल्में थीं। कुछ साल पहले, ‘ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर’ को नये सिरे से रंगीन फिल्म फल्बर नाम से बनाया गया। मुझे याद है यह सब। मैं बहुत कुछ हूं, मेरे चिट्ठियां इसकी गवाह हैं पर मैं भुलक्कड़ नहीं हूं। यह शीर्षक है, मेरी नयी श्रंखला का जो मैं साइबर अपराधों और कंप्यूटर हैकर के बारे में लिख रहा हूं। मैंने जानबूझ कर यह शीर्षक दिया है और ‘इंडिपेंडेन्स डे’ फिल्म का चित्र लगाया है। ‘उन्मुक्त जी, अब समझ में आया कि आपने इस श्रंखला का नाम “तू डाल डाल, मैं पात पात” क्यों रखा। चोर-सिपाही के खेल में, अक्सर चोर सिपाही से एक कदम आगे रहते हैं। कंप्यूटर हैकर भी, कंप्यूटर विशेषज्ञयों से आगे रहते हैं। इसलिये आपने इस श्रंखला का यह नाम रखा है। है न सही?’ बिलकुल सही फरमाया आपने। ‘क्या खाक सही फरमाया उन्मुक्त जी―पैर कब्र में जा रहे हैं लेकिन मज़ाक करने की आदत नहीं गयी। कोर्ट गर्डल या इस इस चित्र का, इस विषय से क्या समबंध। हमें बेवकूफ न बनाइये।’ मेरे भाई, मेरी बहना, इतनी जल्दी नहीं। न केवल कोर्ट गर्डल, पर फिल्म ‘इंडिपेंडेन्स डे’ (जिस फिल्म से ऊपर का चित्र चित्र लिया गया है) का सम्बन्ध, इस विषय है। यह कैसे है इसका पता तो आपको इस श्रृंखला के दौरान चलेगा। इंतजार कीजिये इस श्रंखला की अगली कड़ी का, लेकिन उसमें कुछ समय लगेगा। मैंने इस कड़ी को केवल इसलिये प्रकाशित कर दिया क्योंकि आज कोर्ट गर्डल का जन्मदिन था। अगली बार हम बात करेंगे कि कोर्ट गर्डल क्यों प्रसिद्ध हैं, उनके बारे में कुछ चर्चा, और मुझे यह श्रृंखला लिखने का विचार कैसे आया। फिल्म ‘द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर’ में प्रोफेसर की, अपनी मगेंतर से पुनः मित्रता हो जाने के बाद के कुछ दृश्य तू डाल डाल, मैं पात पात भूमिका।। लेख चिट्ठे पर अन्य सम्बंधित चिट्ठियां अन्तरजाल की मायानगरी में; पेटेंट और कंप्यूटर प्रोग्राम; २ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कमप्यूटर विज्ञान; ओपेन सोर्स सौफ्टवेर; लिनेक्स की कहानी; About this post in Hindi-Roman and English yeh chitthi cyber apradhon per nayee shrankhla kee bhumika hai. yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen. This post is introduction to my new series on cyber crimes. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. सांकेतिक शब्द Kurt Godel, Independence day, cyber crime, cyber space, Information Technology, Intellectual Property Rights, information technology, Internet, Internet, Open source software, software, software, technology, technology, Technology, technology, technology, Web, आईटी, अन्तर्जाल, इंटरनेट, इंटरनेट, ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर, टेक्नॉलोजी, टैक्नोलोजी, तकनीक, तकनीक, तकनीक, सूचना प्रद्योगिकी, सॉफ्टवेयर, सॉफ्टवेर, । Hindi, पॉडकास्ट, podcast,
क्या ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ हर्पर ली की जीवनी है TAGS: कानून | पुस्तक समीक्षा | पॉडकास्ट | फिल्म समीक्षा स्कॉटस्बॉरो बॉयज़ ट्रायल में, ९ अश्वेत लोगों पर, श्वेत लड़कियों के साथ बलात्कार करने का मुकदमा ऍलाबामा राज्य में चला था। इस मुकदमे ने हार्पर ली पर असर डाला। उनके द्वारा लिखा उपन्यास, ‘टु किल अ मॉकिंग बर्ड’ इसी पर आधारित है। आज चर्चा करेंगे – इस उपन्यास की कहानी के बारे में और इसके एवं ली के वास्तविक जीवन में समन्वय को भी देखेंगे। इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, ‘मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने‘ देखें। ली, पुस्तक पर बनी फिल्म प्रॉड्यूसर के साथ – चित्र सौजन्य विकिपीडिया हार्पर ली का जन्म २८ अप्रैल, १९२६ को ऍलाबामा राज्य में हुआ था। ऍलाबामा राज्य अमेरिका के दक्षिण में है उस समय दक्षिण और उत्तर अमेरिका में, अश्वेतों के बर्ताव में काफी अन्तर था। दक्षिण में नागरिक अधिकारों का उतना महत्व नहीं था। स्कॉटस्बॉरो बायॉज़ के मुकदमे के समय, ली छ: साल की थी। इस मुकदमे ने, उस के जीवन में बहुत कुछ असर डाला। ‘टू किल अ मॉकिंगबर्ड’ इसी अनुभवों के आधार पर लिखा उपन्यास है। यह कहानी १९३० के दशक की है। यह कहानी है एक बहन स्काउट, उसके भाई जेम और उनके मित्र डिल की। स्काउट के पिता एटिक्स फिंच एक वकील हैं। बू रैडली उनके रहस्यमय पड़ोसी हैं। इसमें एक अश्वेत व्यक्ति पर एक श्वेत लड़की से बलात्कार का प्रयत्न करने के लिए मुकदमा चलता है। एटिक्स को बचाव पक्ष का अधिवक्ता नियुक्त किया जाता है। इस मुकदमे में यह सिद्ध हो जाता है कि अश्वेत व्यक्ति निर्दोष है और श्वेत लड़की को चोटें,उसके पिता ने ही पहुंचायी थी। फिर भी, अश्वेत व्यक्ति को सजा हो जाती है। इस मुकदमे के बाद श्वेत लड़की का पिता स्काउट और जेम को मारने का प्रयत्न करता है। उस समय बू रैडली जो कि अविवेकी के रूप में जाना जाता है उनकी जान बचाता है। ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ फिल्म में एटिक्स की भूमिका में ग्रेगरी पेक और स्कॉट की भूमिका में मैरी बैधम बहुत से लोगों का कहना है कि ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ हर्पर ली की जीवनी है पर वे इस बात को तो नकारती है पर यह भी स्वीकारती हैं कि उन्होंने जीवन में जो भी देखा, उसी को इस कहानी में उतारा है। लोगों का कहना भी गलत नहीं है क्योंकि वास्तविक जीवन में भी ली का बड़ा भाई और मित्र था। उसके पिता भी वकील थे और शादी के पहले उनकी माँ का नाम फिंच था जो कि उपन्यास में इनका सर-नाम है। उपन्यास से में ली का मित्र डिल है और वास्तविक जीवन में उनके मित्र का नाम ट्रूमैन कापाटे था। उसका पहले नाम ट्रूमैन स्ट्रेकफस परसॉनस् (Truman Streckfus Persons) था। ट्रूमैन, जब चार साल का था तभी उनके माता-पिता में तलाक हो गया। उसकी मां हमेशा अच्छा जीवन जीने की सोचा करती थी। लेकिन तलाक से वह टूट गयी। उसने ट्रूमैन को उनकी आंटी के पास, मॉनरोविले में भेज दिया। वह ली को पड़ोसी था। वहीं उसका लालन पालन हुआ। ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ में भी डिल दूसरी जगह से आता है। ट्रूमैन की मां न्यूयार्क चली गयी जहां उसने दूसरी शादी कर ली। बाद में ट्रूमैन के सौतेले पिता ने उसे गोद ले लिया जिससे उसका नाम बदलकर ट्रूमैन कापाते हो गया। ‘टु किल अ मॉकिंग बर्ड’ जीवन के दर्शन को कुछ सरल वाक्यों में बताती है। अगली बार मिलेंगे तब इसी के बारे में बात करेंगें। बुलबुल मारने पर दोष लगता है भूमिका।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी – कोर्टरूम।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं।। कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है।। अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है।। जुरी चिट्ठे में जालसाज़ी की गयी है।। क्या ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ हर्पर ली की जीवनी है।। अन्य संबन्धित चिट्ठियां पुस्तक समीक्षा से संबन्धित लेख चिट्ठे पर चिट्ठियां पहेलियां और मार्टिन गार्डनर; रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन; क्या आपके पास सोचने का समय नहीं है? वकीलों से संबन्धित चिट्ठियां व्यक्ति शब्द पर भारतीय निर्णय और क्रॉर्नीलिआ सोरबजी: ► कल्पित चारित्य रमपोल के सृजनकर्ता – जॉन मॉरटिमर की मृत्यु, एक श्रद्धांजलि। नानी पालकीवाला एक जीवनी: ► ज़ेमेन्टा के द्वारा बताये संबन्धित लेख To Kill A Mockingbird (blbooks.blogspot.com) To Kill A Mockingbird Background Notes (slideshare.net) About this post in Hindi-Roman and English is chitthi mein, ‘to kill a mockingbird’ kee kahaaanee aur ooske avam harper lee ke jeevan ke sath samanvay kee charcha hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padhne ke liye, daahine taraf, oopar ka widget dekhen. This post talks about story of ‘To Kill A Mockingbird’ and compares it with her real life. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. सांकेतिक शब्द । Scottsboro boys trial, Victoria Price, Ruby Bates,।To Kill a Mockingbird, Atticus Finch, Boo Radley, Harper Lee, Truman Capote, Monroe ville । book, book, books, Books, books, book review, book review, book review, Hindi, kitaab, pustak, Review, Reviews, science fiction, किताबखाना, किताबखाना, किताबनामा, किताबमाला, किताब कोना, किताबी कोना, किताबी दुनिया, किताबें, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, पुस्तक चर्चा, पुस्तकमाला, पुस्तक समीक्षा, समीक्षा, । Hindi,
यू हैव किल्ड गॉड, सर TAGS: पॉडकास्ट | फिल्म समीक्षा | विज्ञान इस चिट्ठी में अमेरिका के लूज़िआना राज्य के साइंस एजूकेशन ऐक्ट, विलायती फिल्म ‘क्रिएशन’ और ‘डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े’ श्रंखला के निष्कर्ष की चर्चा है। इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप, Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में; Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और Linux पर सभी प्रोग्रामो में, सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें। यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम लिखा है वहां चटका लगायें। इन्हें डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले। न्यायालय से पटखनी खाने के बाद भी कट्टरवादियों ने हार नही मानी। वे किसी तरह से ऎसे कानून बनाने पर जोर दे रहे हैं जिससे कि लगे कि डार्विन का विकासवाद का सिद्वान्त गलत है। अमेरिका के ऎलाबामा (Alabama), फ्लोरिडा (Florida), मिशिगन (Michigan), मिसूरी (Missouri), और साउथ कैरोलाइना ( South Carolina) राज्यों में इस तरह के कानून लाये गये पर वे पास नहीं हो पाये और २००८ में मृत हो गये पर जून २००८ में, लूज़िआना राज्य में ‘साइन्स एजूकेशन ऐक्ट’ (Science Education Act) पारित किया गया है। यह पुन: विद्यार्थियों में सृजनवाद पढ़ाने के रास्ते खोल सकता है। इस अधिनियम की सारे वैज्ञानिकों ने निन्दा की है। अफसोस की बात यह है कि इसे भारतीय मूल के बॉबी ज़िन्दल ने हरी झंडी दी है। डार्विन के जीवन पर इस साल एक नयी फिल्म ‘क्रिएशन’ (Creation) नाम से बनी है। इसमें डार्विन और उसकी पत्नी ऐमा की भूमिका, पॉल बेटॅनी और जेनिफर कॉनेली ने निभायी है जो कि वास्तविक जीवन में भी पति और पत्नी हैं। यह फिल्म अमेरीका में नहीं दिखायी जा रही है। वहां पर कोई भी फिल्म वितरक इसे वितरण के लिये नहीं लेना चाहता है। उन्हें डर है कि सृजनवादी इसके खिलाफ धरना देगें, प्रदर्शन करेंगे। इस फिल्म में एक जगह एक थॉमस हेनरी हक्सले डार्विन से कहता है ‘All mighty can no longer claim to have authored every species under a week. You have killed God, Sir’ लोग, डार्विन के सिद्धांत को इसी तरह से समझते हैं। इसलिये, यदि आप कट्टरवादी हैं तो आपको उसका सिद्धांत, यह फिल्म विवादास्पद लगेगी। इस चिट्ठी का शीर्षक मैंने इसी डायलॉग से लिया है। इस फिल्म का ट्रेलर देखिये – आपको पसन्द आयेगा। मैंने जिस डायलॉग की चर्चा की है वह भी इसमें है। इस फिल्म में डार्विन और उसकी पत्नी ऐमा की भूमिका पॉल बेटॅनी (Paul Bettany) और जेनिफर कॉनली (Jennifer Connelly) ने निभायी हो जो कि वास्तविक जीवन में भी पति और पत्नी हैं। चर्च आफ इंग्लैंन्ड ने, डार्विन के प्रति किये गये अन्याय पर माफ़ी मांग ली। उनका कहना है कि डार्विन के विकासवाद का सिद्धांत उनके मज़हब के विरूद्ध नहीं है। वे प्रयत्नशील है कि किसी तरह यह लड़ाई समाप्त हो पर कट्टरवादी कहीं भी हो, किसी भी धर्म के हों, जब वे हाथ से बाहर निकल जाते है तो किसी की भी नहीं सुनते हैं। क्या वे तर्क को, सबूतों को, विज्ञान को समझेंगे या फिर क्ट्टरवादिता, विज्ञान पर विजय प्राप्त कर लेगी? क्या क्रिएशन फिल्म अमेरिका में प्रदर्शित हो पाएगी? लगता नहीं कि ऐसा हो पायेगा ‘उन्मुक्त जी यह आप कैसे कह सकते हैं?’ मैं तो यह ब्रिटिश काउंसिल (British Council) की प्रार्थना पर इप्सॉस मोरी (Ipsos MORI) के द्वारा डार्विन के ऊपर किये गये सर्वे के कारण कहता हूं। इसका डाटा आप यहां से डाउनलोड कर सकते हैं। इसका कुछ अंश मैं यहां प्रदर्शित कर रहा हूं। १ २ ३ ४ देश विकासवाद वैज्ञानिक तथ्य हैं हां/ नहीं विकासवाद और ईश्वर - दोनो सम्भव विकासवाद अन्य सिद्धान्तों के साथ अर्जेनटीना ४४/ ७ ६२ २३/ ६५ चीन ५५/ ७ ३९ १९/ ४२ मिस्र ८/ १९ ४५ १८/ १ इंगलैंड ५१/ ७ ५४ २१/ ५४ भारतवर्ष ३८/ २ ८५ ३७/ ४० मेक्सिको ५२/ ९ ६५ २८/ ५६ रूस ३९/ ८ ५४ १०/ ५३ द. अफ्रीका ८/ ४ ५४ ११/ २९ स्पेन ३९/ ५ ४६ ३४/ ३१ अमेरिका ३३/ २४ ५३ २१/ ५१ यह चार्ट प्रतिश्त में है। इससे पता चलता है कि यद्यपि ‘विकासवाद के लिये वैज्ञानिक तथ्य हैं’ (कॉलम १) का प्रतिशत ‘विकासवाद के लिये वैज्ञानिक तथ्य नहीं हैं’ से केवल मिस्त्र (Egypt) को छोड़ कर बाकी देशों में ज्यादा है फिर भी ‘ईश्वर एवं विकासवाद पर एक साथ विश्वास किया जा सकता है’ (कॉलम २) से कम है और ‘विकासवाद व अन्य सिद्धान्त पढ़ाये जाने चाहिये’ (कॉलम ३) का प्रतिशत ‘केवल विकासवाद पढ़ाया जाना चाहिये’ के प्रतिशत से, स्पेन को छोड़, सब देशों में अधिक है। कहावत है कि झूट, होता है, फिर सफेद झूट , फिर सांख्यिकी – आंकड़े अक्सर गलत बताते हैं। ईश्वर करे कि यह सही हो ऐसे खबर है कि भारतीय और चीनी विद्यार्थियों को सृजनवाद भा रहा है। विश्वास नहीं, तो अन्तरजाल पर घूम रहा कार्टून देखिये। आज दिवाली है – विजय का त्योहार: ज्ञान की अज्ञानता पर, धर्म की अधर्म पर, रोशनी की अंधकार पर – इसी पर्व पावन पर यह श्रंखला इस आशा के साथ समाप्त होती है कि विज्ञान की धार्मिक कट्टरता पर विजय होगी। आपको दीपवली शुभ हो। कौन … कहता है कि हमारे और बन्दरों के पूर्वज एक थे देखिये हममें कितना अन्तर है। यह चित्र मेरा नहीं है। इस श्रंखला के दौरान किसी ने यह चित्र भेजा है। यदि इसके कॉपीराइट स्वामी को आपत्ति हो तो मैं चित्र को हटा दूंगा। मैं बहुत जल्दी आपको दो नयी श्रंखला में ले चलूंगा। पहली में हम बात करेंगे एक ऐसे उपन्यास और उससे जुड़ी कहानियों के बारे में है जो न केवल २०वीं शताब्दी के उत्कृष्ट अमेरिकन साहित्य में गिना जाना जाता है पर, मेरी बिटिया रानी के अनुसार, जिसे अमेरिका के कॉलेज जाने वाले प्रत्येक विद्यार्थी ने कम से कम एक बार पढ़ा है और दूसरी में, मैं आपको देव भूमि हिमाचल की यात्रा में ले चलूंगा। डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े भूमिका।। डार्विन की समुद्र यात्रा।। डार्विन का विश्वास, बाईबिल से, क्यों डगमगाया।। सेब, गेहूं खाने की सजा।। भगवान, हमारे सपने हैं।। ब्रह्मा के दो भाग: आधे से पुरूष और आधे से स्त्री।। सृष्टि के कर्ता-धर्ता को भी नहीं मालुम इसकी शुरुवात का रहस्य।। मुझे फिर कभी ग़ुलाम देश में न जाना पड़े।। ऐसे व्यक्ति की जगह, बन्दरों से रिश्ता बेहतर है।। विकासवाद उष्मागति के दूसरे नियम का उल्लंघन करता है।। समय की चाल – व्यवस्था से, अव्यवस्था की ओर।। मैंने उसे थूकते हुऐ देखा है।। यदि विकासवाद जीतता है तो इसाइयत बाहर हो जायगी।। विकासवाद पढ़ाना मना करना, मज़हबी निष्पक्षता का प्रतीक नहीं।। सृजनवाद धार्मिक मत है विज्ञान नहीं है।। ‘इंटेलिजेन्ट डिज़ाईन’ – सृजनवादियों का नया पैंतरा।। यू हैव किल्ड गॉड, सर।। ज़ेमन्टा के द्वारा बताये संबन्धित लेख Creationism, Minus a Young Earth, Emerges in the Islamic World (The New York Times) Since the dawn of time (New Statesman) Did Darwin Kill God? (guardian.co.uk) Ardi Is a New Piece for the Evolution Puzzle (Time) Darwin’s doubters (guardian.co.uk) Married Couples On Film: The husband and wife teams that lit up the screen ( Darwin’s lost daughter (guardian.co.uk) God or Darwin? The world in evolution beliefs (guardian.co.uk) About this post in Hindi-Roman and English is chitthi mein america ke Louisiana rajya ke ‘science education act’, british film ‘creation’ aur ‘Darwin, Vikaasvaad, aur Majhhabee rore’ shrankhlaa ke nishkarsh kee charchaa hai. yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen. This post is about Science Education Act enacted by State of Louisiana, British film ‘Creation’ and conclusion of ‘Darwin, Evolution and Religious Fervour’ series. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. सांकेतिक चिन्ह । Creation (2009) film, Paul Bettany, Jennifer Connelly, । Creationism, Creation according to Genesis, Hindu views on evolution, History of creationism, intelligence design, intelligence design, Islamic creationism, Jewish views on evolution, religion, धर्म, bible, Bible, Charles Darwin, Charles Darwin, चार्लस् डार्विन, culture, evolution, Family, fiction, life, Life, On the Origin of Species, Religion, Science, spiritual, जीवन शैली, धर्म, धर्म- अध्यात्म, विज्ञान, समाज, ज्ञान विज्ञान, । Hindi,। । Hindi Podcast, हिन्दी पॉडकास्ट,
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