फिल्म समीक्षा
जिम कॉर्बेट की कर्म स्थली – कुमाऊं
यह चिट्ठी हमारी कुमाऊँ यात्रा की भूमिका है।जिम कॉर्बेट रुद्रप्रयाग के आदमखोर तेंदुऐ को मारने क…
जिम कॉर्बेट की कर्म स्थली – कुमाऊं
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प्यार तो होता ही है
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आप को कैसी फिल्में पसन्द हैं
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बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां
यह चिट्ठी में, बाईबिल, खगोलशास्त्र, और इससे संबन्धित विज्ञान कहानियां के बारे में चर्चा है।
is chitthi mein bible, khagolshastra aur isse smbndhit vigyaan khaniyon’ ke baare mein charchaa hai.
This post talks about Bible, Astronomy and related Science fiction. ![]()
ऐसा कोई कंप्यूटर नहीं, जिसे हैक न किया जा सकता हो
इस चिट्ठी में, फिल्म इंडिपैंडेंटस डे (Independence day) और इसका साईबर अपराध से संबन्ध की चर्चा है।इस चिट्ठी …
आज, मुझसे शादी करोगी
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तू डाल डाल, मैं पात पात
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| फिल्म ‘इंडिपेंडेन्स डे’ से |
‘उन्मुक्त जी, कौन है वह व्यक्ति? क्या चिट्ठकार है? ज्लदी बताइये, उसे बधाई तो दे दें।’
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| चित्र इंस्टिट्यूट ऑफ एडवान्सड स्टडीज़ की वेबसाइट से |
कोर्ट गर्डल का जन्म २८ अप्रैल १९०६ में , बर्नो चेक रिपब्लिक (Czech Republic) में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ायी वियान ऑस्ट्रिया में पूरी की पर बाद में इंस्टिट्यूट ऑफ एडवान्सड स्टडीज़, प्रिंक्सटन चले गये। वहीं उनकी मृत्यु १४ जनवरी १९७८ में हो गयी।
‘उन्मुक्त जी आपका शीर्षक तो है “तू डाल डाल, मैं पात पात” हम तो समझे कि यहां कुछ छकने, छकाने की बात होगी। लेकिन आप तो चालू हो गये तर्क शास्त्री कोर्ट गर्डल की बात करने। मालुम नहीं पहला चित्र क्या है, लगता है कि कहीं लड़ाई हो रही है।
हमें तो आप “द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर” फिल्म की याद दिला रहे हैं। आपको याद है वह फिल्म। आप शीर्षक कुछ देते हैं, लिखने कुछ और लग जाते हैं।’
मुझे ‘द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर’ फिल्म की बहुत अच्छी तरह से याद है। यह १९६१ में बनी वॉल्ट डिज़नी की लोकप्रिय फिल्मों में से एक है। इसे मैंने चौथी या पांचवी कक्षा में पढ़ते समय देखा था।
कौन भूल सकता है उस प्रोफेसर को, जिसने भूल से, उड़ते रबर (flying rubber) (flubber) (फ्लबर) का आविष्कार कर लिया था। इसी रोमांच में वह अपनी शादी की तारीख भूल गया। बस, गुस्से में, उसकी मंगेतर ने शादी तोड़ दी और वह किसी अन्य से दोस्ती का दिखावा करने लगी। फिल्म में, फल्बर के साथ प्रोफेसर के रोमांचकारी किस्से और अपने प्यार को वापस पाने की कहानी है। कितनी प्यारी फिल्म थी, आज भी याद है।
यह फिल्म, सैमुएल टेलर की विज्ञान कहानी ‘अ सिचुऐशन ऑफ ग्रैविटी’ (A Situation of Gravity by Samuel W Taylor) नामक कहानी के ऊपर बनी है। इसके बाद १९६३ में वॉल्ट डिज़नी ने इसकी ऊत्तर कथा फिल्म ‘सन ऑफ फल्बर’ (Son of Flubber) बनायी। यह श्याम-श्वेत फिल्में थीं। कुछ साल पहले, ‘ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर’ को नये सिरे से रंगीन फिल्म फल्बर नाम से बनाया गया। मुझे याद है यह सब।
मैं बहुत कुछ हूं, मेरे चिट्ठियां इसकी गवाह हैं पर मैं भुलक्कड़ नहीं हूं। यह शीर्षक है, मेरी नयी श्रंखला का जो मैं साइबर अपराधों और कंप्यूटर हैकर के बारे में लिख रहा हूं। मैंने जानबूझ कर यह शीर्षक दिया है और ‘इंडिपेंडेन्स डे’ फिल्म का चित्र लगाया है।
‘उन्मुक्त जी, अब समझ में आया कि आपने इस श्रंखला का नाम “तू डाल डाल, मैं पात पात” क्यों रखा। चोर-सिपाही के खेल में, अक्सर चोर सिपाही से एक कदम आगे रहते हैं। कंप्यूटर हैकर भी, कंप्यूटर विशेषज्ञयों से आगे रहते हैं। इसलिये आपने इस श्रंखला का यह नाम रखा है। है न सही?’
‘क्या खाक सही फरमाया उन्मुक्त जी―पैर कब्र में जा रहे हैं लेकिन मज़ाक करने की आदत नहीं गयी। कोर्ट गर्डल या इस इस चित्र का, इस विषय से क्या समबंध। हमें बेवकूफ न बनाइये।’
अगली बार हम बात करेंगे कि कोर्ट गर्डल क्यों प्रसिद्ध हैं, उनके बारे में कुछ चर्चा, और
मुझे यह श्रृंखला लिखने का विचार कैसे आया।
क्या ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ हर्पर ली की जीवनी है
ली, पुस्तक पर बनी फिल्म प्रॉड्यूसर के साथ – चित्र सौजन्य विकिपीडिया
एटिक्स की भूमिका में ग्रेगरी पेक और स्कॉट की भूमिका में मैरी बैधम
।To Kill a Mockingbird, Atticus Finch, Boo Radley, Harper Lee, Truman Capote, Monroe ville
यू हैव किल्ड गॉड, सर
- Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
- Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
- Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
न्यायालय से पटखनी खाने के बाद भी कट्टरवादियों ने हार नही मानी। वे किसी तरह से ऎसे कानून बनाने पर जोर दे रहे हैं जिससे कि लगे कि डार्विन का विकासवाद का सिद्वान्त गलत है। अमेरिका के ऎलाबामा (Alabama), फ्लोरिडा (Florida), मिशिगन (Michigan), मिसूरी (Missouri), और साउथ कैरोलाइना ( South Carolina) राज्यों में इस तरह के कानून लाये गये पर वे पास नहीं हो पाये और २००८ में मृत हो गये पर जून २००८ में, लूज़िआना राज्य में ‘साइन्स एजूकेशन ऐक्ट’ (Science Education Act) पारित किया गया है। यह पुन: विद्यार्थियों में सृजनवाद पढ़ाने के रास्ते खोल सकता है। इस अधिनियम की सारे वैज्ञानिकों ने निन्दा की है। अफसोस की बात यह है कि इसे भारतीय मूल के बॉबी ज़िन्दल ने हरी झंडी दी है।
डार्विन के जीवन पर इस साल एक नयी फिल्म ‘क्रिएशन’ (Creation) नाम से बनी है। इसमें डार्विन और उसकी पत्नी ऐमा की भूमिका, पॉल बेटॅनी और जेनिफर कॉनेली ने निभायी है जो कि वास्तविक जीवन में भी पति और पत्नी हैं। यह फिल्म अमेरीका में नहीं दिखायी जा रही है। वहां पर कोई भी फिल्म वितरक इसे वितरण के लिये नहीं लेना चाहता है। उन्हें डर है कि सृजनवादी इसके खिलाफ धरना देगें, प्रदर्शन करेंगे। इस फिल्म में एक जगह एक थॉमस हेनरी हक्सले डार्विन से कहता है
‘All mighty can no longer claim to have authored every species under a week.
You have killed God, Sir’
लोग, डार्विन के सिद्धांत को इसी तरह से समझते हैं। इसलिये, यदि आप कट्टरवादी हैं तो आपको उसका सिद्धांत, यह फिल्म विवादास्पद लगेगी। इस चिट्ठी का शीर्षक मैंने इसी डायलॉग से लिया है। इस फिल्म का ट्रेलर देखिये – आपको पसन्द आयेगा। मैंने जिस डायलॉग की चर्चा की है वह भी इसमें है।
चर्च आफ इंग्लैंन्ड ने, डार्विन के प्रति किये गये अन्याय पर माफ़ी मांग ली। उनका कहना है कि डार्विन के विकासवाद का सिद्धांत उनके मज़हब के विरूद्ध नहीं है। वे प्रयत्नशील है कि किसी तरह यह लड़ाई समाप्त हो पर कट्टरवादी कहीं भी हो, किसी भी धर्म के हों, जब वे हाथ से बाहर निकल जाते है तो किसी की भी नहीं सुनते हैं। क्या वे तर्क को, सबूतों को, विज्ञान को समझेंगे या फिर क्ट्टरवादिता, विज्ञान पर विजय प्राप्त कर लेगी? क्या क्रिएशन फिल्म अमेरिका में प्रदर्शित हो पाएगी? लगता नहीं कि ऐसा हो पायेगा
‘उन्मुक्त जी यह आप कैसे कह सकते हैं?’
मैं तो यह ब्रिटिश काउंसिल (British Council) की प्रार्थना पर इप्सॉस मोरी (Ipsos MORI) के द्वारा डार्विन के ऊपर किये गये सर्वे के कारण कहता हूं। इसका डाटा आप यहां से डाउनलोड कर सकते हैं। इसका कुछ अंश मैं यहां प्रदर्शित कर रहा हूं।
| १ | २ | ३ | ४ |
| देश | विकासवाद वैज्ञानिक तथ्य हैं हां/ नहीं | विकासवाद और ईश्वर - दोनो सम्भव | विकासवाद अन्य सिद्धान्तों के साथ |
| अर्जेनटीना | ४४/ ७ | ६२ | २३/ ६५ |
| चीन | ५५/ ७ | ३९ | १९/ ४२ |
| मिस्र | ८/ १९ | ४५ | १८/ १ |
| इंगलैंड | ५१/ ७ | ५४ | २१/ ५४ |
| भारतवर्ष | ३८/ २ | ८५ | ३७/ ४० |
| मेक्सिको | ५२/ ९ | ६५ | २८/ ५६ |
| रूस | ३९/ ८ | ५४ | १०/ ५३ |
| द. अफ्रीका | ८/ ४ | ५४ | ११/ २९ |
| स्पेन | ३९/ ५ | ४६ | ३४/ ३१ |
| अमेरिका | ३३/ २४ | ५३ | २१/ ५१ |
यह चार्ट प्रतिश्त में है। इससे पता चलता है कि यद्यपि ‘विकासवाद के लिये वैज्ञानिक तथ्य हैं’ (कॉलम १) का प्रतिशत ‘विकासवाद के लिये वैज्ञानिक तथ्य नहीं हैं’ से केवल मिस्त्र (Egypt) को छोड़ कर बाकी देशों में ज्यादा है फिर भी ‘ईश्वर एवं विकासवाद पर एक साथ विश्वास किया जा सकता है’ (कॉलम २) से कम है और ‘विकासवाद व अन्य सिद्धान्त पढ़ाये जाने चाहिये’ (कॉलम ३) का प्रतिशत ‘केवल विकासवाद पढ़ाया जाना चाहिये’ के प्रतिशत से, स्पेन को छोड़, सब देशों में अधिक है।
कहावत है कि झूट, होता है, फिर सफेद झूट , फिर सांख्यिकी – आंकड़े अक्सर गलत बताते हैं। ईश्वर करे कि यह सही हो
ऐसे खबर है कि भारतीय और चीनी विद्यार्थियों को सृजनवाद भा रहा है। विश्वास नहीं, तो अन्तरजाल पर घूम रहा कार्टून देखिये।
आज दिवाली है – विजय का त्योहार: ज्ञान की अज्ञानता पर, धर्म की अधर्म पर, रोशनी की अंधकार पर – इसी पर्व पावन पर यह श्रंखला इस आशा के साथ समाप्त होती है कि विज्ञान की धार्मिक कट्टरता पर विजय होगी। आपको दीपवली शुभ हो।
मैं बहुत जल्दी आपको दो नयी श्रंखला में ले चलूंगा। पहली में हम बात करेंगे एक ऐसे उपन्यास और उससे जुड़ी कहानियों के बारे में है जो न केवल २०वीं शताब्दी के उत्कृष्ट अमेरिकन साहित्य में गिना जाना जाता है पर, मेरी बिटिया रानी के अनुसार, जिसे अमेरिका के कॉलेज जाने वाले प्रत्येक विद्यार्थी ने कम से कम एक बार पढ़ा है और दूसरी में, मैं आपको देव भूमि हिमाचल की यात्रा में ले चलूंगा।




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