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	<title>उन्मुक्त - Unmukt &#187; यात्रा वर्णन</title>
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	<description>हिन्दी चिट्ठाकार उन्मुक्त की चिट्ठियाँ -</description>
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		<title>फैंटम, टार्ज़न … यह कौन हैं – साउथ अफ्रीकन सफारी</title>
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		<pubDate>Sat, 20 Aug 2011 19:30:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[Full Articles]]></category>
		<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://unmukth.wordpress.com/?p=730</guid>
		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में साउथ अफ्रीका की यात्रा का वर्णन है। 
This post is our travelogue to South Africa. 
is chittthi mein south africa kee yatra ka varnan hai.<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=730&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em>कुछ समय पहले मुझे काम से साउथ अफ्रीका जाना पड़ा। इस चिट्ठी  में, वहीं की </em><em> </em><em>यात्रा का वर्णन है। </em></p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 405px"><img title="kruger park SA sunset" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/krugerparksunset.jpg?w=395&#038;h=297" alt="" width="395" height="297" /><p class="wp-caption-text">क्रुगर पार्क साउथ अफ्रीका में सूर्यास्त</p></div>
<h3 style="text-align:center;"><span id="more-730"></span>झाड़ क्या होता है?</h3>
<p>भारत से, हवाई जहाज से साउथ अफ्रीका जाने के तीन तरीके है।</p>
<ol>
<li>दिल्ली से अरब एमिरेट की उड़ान पकड़ कर दुबई और दुबई से जॉहन्सबर्ग।</li>
<li>दिल्ली से एयर इण्डिया की उड़ान पकड़ के केनिया और वहां से केनयन एयर लाइन्स से जॉहन्सबर्ग।</li>
<li>बम्बई से साउथ अफ्रीका एयर लाइन्स की सीधी उड़ान पकड़ कर जॉहन्सबर्ग।</li>
</ol>
<p>इस समय दिल्ली &#8211; अबू धाबी &#8211; जॉहन्सबर्ग की नयी विमान सेवा भी शुरू हो गयी है। हमें लगा कि बम्बई से सीधी जॉहन्सबर्ग के लिए उड़ान पकड़ना सबसे अच्छा और आसान होगा। इसलिए हम लोग बम्बई पहुंचे। बम्बई मे हमें कुछ घण्टें व्यतीत करने थे और हम बान्द्रा क्षेत्र में रूके।</p>
<p>शाम के समय हम लोगों को लगा कि ईमेल चेक कर ली जाय इसलिए साइबर कैफे को ढ़ूंढने के लिए बाहर निकले। एक व्यक्ति से पूछा तो उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;सीधे आगे जाये। आपको एक गोल पार्क मिलेगा उसके बाद एक झाड़ मिलेगा बस उसी के बाजू से एक सीढी जाती है, वहां पर साइबर कैफे है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने पूछा कि झाड़ क्या होता है? उसने हमारी तरफ देखा जैसे मालूम नही कहां के बेवकूफ आ गये है फिर धीरे से मुस्कुरा कर कहा कि झाड़ माने पेड़। मैंने उसको शुक्रिया अदा किया।</p>
<p>साइबर कैफे में बहुत सारे कम उम्र के लोग थे। वे शायद निम्न स्तर के थे जो आपस में बीच-बीच मे बड़ी जोर से चिल्ला रहे थे, नीचे करो, वह मारा। मैंने साइबर कैफे के मालिक से पूछा ये लोग क्या खेल खेल रहे हैं। उसने बताया,</p>
<blockquote><p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/worldofwarcraft.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/worldofwarcraft.jpg?w=200&#038;h=130" alt="" width="200" height="130" border="0" /></a>&#8216;आजकल यहां पर <a href="https://signup.worldofwarcraft.com/trial/index.html">वर्ल्ड ऑफ वारक्रैफ्ट </a>(<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/World_of_Warcraft">warcraft</a>) नामक खेल लोकप्रिय है और यह लड़के दो टीम बनाकर उसे खेल रहे हैं। इसमें टीमें आपस में एक दूसरे से लड़ाई करती है।&#8217;</p></blockquote>
<div>इण्टरनेट और टीवी लोगों के स्वास्थ को कितना नुकसान पहुंचा रहा है इसके बारे में वे नहीं सोच रहे हैं।</div>
<p>एक छोटा सा कमरा जिसमें ठीक से हवा भी नहीं आ रही थी उसी में कम उम्र के बच्चे यह खेल रहे थे। इण्टरनेट और टीवी की सबसे खराब बात यही है कि लोग बाहर में खेलने की जगह, कमरे के अन्दर बंद हो गये हैं। यह उनके स्वास्थ को कितना नुकसान पहुंचा रहा है इसके बारे में वे नहीं सोच रहे हैं।</p>
<p>लौटते समय देखा कि रास्ते में भुट्ठे बिक रहे थे। ठेले वाले की अंगेठी में, छोटी सी धौकिनी लगी थी जो हवा फेंकती थी और अंगेठी तेजी से जलती थी। मैंने पूछा कि एक भुटटा कितने का है उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;दस रूपये का। साहब खाकर देखिये, यह भुटटा खास तरीके का है और मीठा है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा क्या बाहर से आता है उसका जवाब था,</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं, यहीं पैदा होता है पर बीज बाहर से आता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैने पूछा कितना रूपया कमा लेते हो। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं लगभग सौ भुटटे बेच लेता हूं हर भुटटे में करीब -दो रूपये का फायदा होता है। बाकी पैसे भुटटे और कोयले के खर्च में और कुछ अंगेठी और ट्राली को ठीक कराने में चला जाता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने पूछा क्या कुछ पैसा म्यूनिसपिल्टी को भी देना पड़ता है। उसका जवाब था हर महीने हजार रूपये। मैंने पूछा कि क्या रसीद देते हैं। उसका जवाब था,</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं, ये म्यूनिसपिल्टी के आदमी हजार रूपया अपने जेब में रख लेते हैं। बस ये समझिए कि यह एक तरह का गैर-कानूनी टैक्स देता हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>भुट्टा वास्तव में बहुत अच्छा था और मीठा था खाने में मजा ही आ गया।</p>
<p>आगे चलते समय एक जगह कुछ फल बिक रहे थे। मैने उससे पूछा कि शरीफा कितने का है । उसने बताया कि ७०/-रूपया किलो । मैने कहा कि मुझे एक शरीफा चाहिए कितने का पड़ेगा । उसने कहा कि दस रूपया के। मैने कहा कि दस रूपया का! उसने मेरी तरफ ऎसा देखा की शायद मै कहां से आ गया हूं। मैंने कहा कि मैं एक छोटे से कस्बे का हूं। उसने मुस्कुरा कर कहा, अच्छा आठ रूपया दे दीजियेगा। मैंने उसे दस रूपये का नोट दिया तो उसने दो रूपये वापस किये। मैंने कहा तुम ही रख लो। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं साहब मैने आपसे आठ रूपय कहे थे उतने ही लूंगा। ये दो रूपये वापस ले लीजिए।&#8217;</p></blockquote>
<p>मुझे उसकी इमानदारी पर ताजुब हुआ , लगा कि शायद अभी भी लोगों में इमानदारी बची है। मैने उससे कहा कि दो रूपये की जगह हमें कोई और फल दे दो। उसने हमें एक केला दे दिया।</p>
<p>वापस आकर हम लोगों ने रात का खाना खाया और साउथ अफ्रीका जाने के लिए हवाई अड्डे चले गये।</p>
<h3 style="text-align:center;">साउथ अफ्रीकन एयर लाइन्स और उसकी परिचायिकायें</h3>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 280px"><img title="south african airways" src="https://lh4.googleusercontent.com/_VD9tZkRYrQ0/TVcmkp-aIII/AAAAAAAACVo/kTsbtPj-HeM/South%20African%20Airways%20symbol.jpg" alt="" width="270" height="254" /><p class="wp-caption-text">सउथ अफ्रीकन विमान सेवा का चिन्ह</p></div>
<p style="text-align:left;">बम्बई से, जॉहन्सबर्ग जाने के लिए साउथ अफ्रीकन एयरवेज़ (<a href="http://ww3.flysaa.com/fares/nav/en/en_frameset.html?contents=/fares/faresTDPDspSearch.jsp?NewSession=true&amp;locale=en_in&amp;loadFrame=false">South African Airways</a>) का हवाई जहाज रात के ढ़ाई बजे चलता है। रात भर का जागरण तो हो ही गया । इसे अफ्रीकानस् (Afrikaans) भाषा में Suid-Afrikaanse Lugdiens (SAL) भी कहा जाता है। इसमें परिचायिकायें नीले रंग की ड्रेस और गले में, अपने देश के झण्ड़े की तरह का स्कॉर्फ पहनें थी। उन सबका रंग श्याम था।</p>
<p>परिचायिकायें आपस में जिस भाषा में बात कर रहे थे वह मुझको बिल्कुल समझ में नही आ रही थी। हालांकि वे हमसे अंग्रेजी में बात करती थीं। मैने पूछा कि आप लोग किस भाषा में बात कर रहे है तो उनका कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;साउथ अफ्रीका में ११ भाषायें चलती है जिसमें इंगलिश भी एक है। वहां पर लोग अलग-अलग भाषा में बात करते हैं। हम अपनी मातृ भाषा में बात कर रहे हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>एक हम है जो कि आपस में हिन्दी में न बात कर अंग्रेजी में बात करना पसन्द करते हैं।</p>
<p>कुछ दिन पहले अर्न्तजाल में पढ़ा था कि दिल्ली हाई कोर्ट ने ऎयर इण्डिया की परिचायिकाओं की याचिका जो उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ दाखिल की थी खारिज कर दी है। उनकी बर्खास्तगी इस बात पर की गयी थी कि वे ओवर वेट हैं। इन परिचायिकाओं को देखकर यही लगा कि शायद यह इन सब पर लागू होती है।</p>
<p>हवाई जहाज के उड़ने के बाद, उन लोगों ने हम लोगों को खाना दिया। हवाई जहाज में कुछ कम लोग थे तो ज्यादातर लोग बीच वाली सीट में जाकर बैठ गये और खाना खाने के बाद उसी में लेटकर सो गये । मेरे साथ मेरी पत्नी भी थी तो हम लोग बगल वाली सीट मे बैठे हुए थे। मेरी पत्नी पीछे वाली दो सीट में चली गयी और सो गयी हलांकि मुझको कुछ सोने में तकलीफ हुई। अगले दिन सुबह लगभग ८ बजे हम लोग जॉहन्सबर्ग पहुंचे। यहाँ से हमें प्रिटोरिया जाना था। मुझे वहीं काम था इसलिये वहीं ठहरने की बात थी।</p>
<p>क्रुगर नेशनल पार्क साउथ अफ्रीका का सबसे प्रसिद्व जानवरों का पार्क है। अधिकतर लोग जॉहन्सबर्ग से ही वहाँ चले जाते हैं। मुझे प्रिटोरिया में काम था। इसलिए सफारी प्रिटोरिया से ली। अगली बार जाना पड़े तो हम जॉहन्सबर्ग से ही सफारी पर जाना पसन्द करेंगे।</p>
<h3 style="text-align:center;">मान लीजिये, बाहर निलते समय, मैं आपका कैश कार्ड छीन लूं<em> </em></h3>
<p>जॉहन्सबर्ग हवाई अड्डे {नया नाम टैम्बो अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/OR_Tambo_International_Airport">Tambo International Airport</a>)} पर हमें किसी व्यक्ति <a href="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/4/4b/OR_Tambo_International_Airport_Copyright2007KaihsuTai.jpg/180px-OR_Tambo_International_Airport_Copyright2007KaihsuTai.jpg"><img class="alignright" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/4/4b/OR_Tambo_International_Airport_Copyright2007KaihsuTai.jpg/180px-OR_Tambo_International_Airport_Copyright2007KaihsuTai.jpg" alt="" width="200" height="131" border="0" /></a>को लेने आना था और हमें प्रिटोरिया के होटल तक पहुँचना था। लेकिन, हवाई अड्डे पर हमें कोई व्यक्ति लेने के लिए नही आया। हम लोग परेशान हो गये।</p>
<p style="text-align:right;"><em>जॉहन्सबर्ग हवाई अड्डे के अन्दर का दृश्य चित्र <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Main_Page">विकिपीडिया</a> से<br />
</em></p>
<p>शुभा के पास बीएसएनएल की मोबाइल सेवा है और सैमसंग का मोबाइल फोन है। हम लोग इसे इण्टरनेश्नल करा कर ले गये थे। मैं इसे <a href="http://unmukth.wordpress.com/2009/10/19/berlin-travelogue/">पिछली बार जर्मनी</a> भी ले गया था। विदेश में इसमें फिर से सेट करना पड़ता और इण्टरनेश्नल, का विकल्प लेना पड़ता है। पिछली बार, मैं यह विकल्प इन्टरनेशनल नहीं कर पा रहा था क्योंकि मैं &#8216;सेटिंग&#8217; की सूची में जाकर करता था। वास्तव में यह &#8216;अप्लीकेशन&#8217; की सूची में जाकर करना चाहिए। जर्मनी यात्रा के दौरान,  इसे <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/11/bsnl-international-roaming.html">इन्टरनेशनल करने में</a> बहुत मुश्किल पड़ी थी पर इस बार मुझे पूरा विश्वास था कि मैं यह कर लूंगा। जॉहन्सबर्ग पर पहुंचते ही मैने इसे इण्टरनेशनल कर लिया पर फिर भी इसने काम नहीं किया। इससे हमारी परेशानी और बढ़ गयी।<a href="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/b/bd/Oliver_Tambo_statue_Copyright2007KaihsuTai.jpg/180px-Oliver_Tambo_statue_Copyright2007KaihsuTai.jpg"><img class="alignright" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/b/bd/Oliver_Tambo_statue_Copyright2007KaihsuTai.jpg/180px-Oliver_Tambo_statue_Copyright2007KaihsuTai.jpg" alt="" width="113" height="200" border="0" /></a></p>
<div style="text-align:right;"><em>इस </em><em>हवाई अड्डे का नाम <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Oliver_Tambo">ऑलिवर टैम्बो</a> के नाम पर रखा गया है। उनकी यह मूर्ती हवाई अड्डे पर है। चित्र <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Main_Page">विकिपीडिया</a> से </em></div>
<p>मुझे लगा कि हम लोग टैक्सी कर प्रिटोरिया चले जाएँ पर साउथ अफ्रीका में केवल उन्हीं के देश का पैसा, जो कि रैंड कहलाता है, चलता है। एक रैंड लगभग छ: रूपये के बराबर है। यह हम लोगों के पास नहीं था। मेरे पास आईसीआईसीआई बैंक का कैश कार्ड था। इसके द्वारा मेरे सेविंग अकाउंट से कुछ रूपया निकाला जा सकता था। हम अपने साथ आईसीआईसीआई बैंक का यूरो कैशकार्ड भी ले गये थे, साथ में कुछ डॉलर भी थे। इसमें से वहाँ कुछ भी नहीं चलता है जॉहन्सबर्ग से प्रिटोरिटया तक लगभग ३५० रैंड लगते हैं। हमारे पास एक भी रैंड नहीं था। हमें, भारत में रैंड मिल ही नही पाया । हम लोग वह जगह ढूढ़ने लगे, जहाँ से हम पैसों को रैंड में बदल सके।</p>
<p>लोगों ने बताया था कि पैसा एटीएम से बदला जा सकता है। हवाई अड्डे पर एटीएम हम लोग जिस तल पर थे उसके ऊपर के तल पर था। हम लोगों ने अपना समान निकाल लिया था। इसलिए समझ में नहीं आ रहा था कि समान साथ लेकर चले या नहीं। मैंने अपनी पत्नी से एक पुलिस चौकी के बगल मे खड़ा होने को कहा और ऊपर के तल पर पैसा निकालने के लिए चला गया।</p>
<p>ऊपर के तल पर अलग -अलग बैंक के एटीएम लगे थे और काफी लम्बी लाइने थीं। आईसीआईसीआई बैंक का कार्ड वीसा पर चलता है। मैं उसी लाइन में खड़ा हो गया। मेरे आगे के व्यक्ति को पैसा निकालने में देर लग रही थी। बार-बार अपने हाथ को इस तरह दिखा रहा था जैसे कुछ गड़बड़ हो गया है। मेरे पीछे एक महिला खड़ी थी। मैंने कहा कि लगता है यह व्यक्ति मेरी तरह का है जिसने आज तक कभी भी एटीएम से पैसा नहीं निकाला है। मुझे भी बहुत देर लगेगी। वह मुस्कुराने लगी। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यदि आप चाहें तो मैं आपकी सहायता कर सकती हूं। आप जब अपना पिन नम्बर टाइप करेंगे तो मै अपना मुंह दूसरे तरफ कर लूंगी।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है क्योंकि मै आपको अपना कार्ड नहीं दूंगा। महिला ने मुस्करा कर कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मान लीजिए, बाहर निकलते समय मैं आपका कार्ड छीन लूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा, आपका स्वागत है।</p>
<p>मेरे नम्बर आने पर उसने पैसा निकलने में सहायता की। एटीएम को चलाते समय वह कार्ड का विकल्प पूछता है। हमारी समझ में नहीं आया कि कैश कार्ड किस विकल्प आयेगा। उसमें एक विकल्प क्रेडिट कार्ड का था। महिला ने क्रेडिट कार्ड वाला बटन दबाने का सुझाव दिया । मैने डरते डरते क्रेडिट कार्ड वाला बटन दबाया क्योंकि इसमें कैश क्रेडिट कार्ड मशीन के अन्दर चला गया। मुझे घबराहट लग रही थी कि कार्ड बाहर निकलेगा कि नही। लेकिन यह विकल्प सही था। मुझे रैंड मिल गये और मेरा कैश कार्ड भी बाहर आ गया। मैंने महिला को शुक्रिया अदा किया और वापस आया।</p>
<p>मेरे वापस पहुंचते ही मेरी पत्नी ने बताया कि मोबाइल फोन काम करने लगा है। उसने मोबाइल फोन से बात कर ली है और फारूक नामक व्यक्ति हम लोगों को लेने के लिए आ रहा है।</p>
<p>हवाई अड्डे पर मुझे लगा कि मैं फ्रेश हो लूं। मै पुरूषों के टायलेट में गया। यह काफी साफ सुथरा था। यहां पर सब कुछ नये समय के अनुसार था। नल खोलने के लिए हाथ नहीं लगाना पड़ता था। हाथ ले जाने पर नल से पानी अपने आप गिरता था यह फोटो इलेक्टिक एफॅक्ट के कारण होता है। मुझे जो वहाँ सबसे खास बात यह लगी कि वहां पर एक सीट भारतीय पद्वति के अनुसार थी। साउथ अफ्रीका की सरकार को आभास है कि भारतीय लोग अपनी पद्वति के तरह की सीट पर ही फ्रेश होना पसंद करते है।</p>
<p>हमारी मोबाइल से बात हो जाने के कुछ देर बाद, फारूक हमें जॉहन्सबर्ग हवाई अड्डे पर आये। वह बेहद मजेदार व्यक्ति निकले।</p>
<h3 style="text-align:center;">साउथ अफ्रीका में अपराध &#8211; जनसंख्या अधिक और नौकरियां कम</h3>
<p>हमें किसी को जॉहन्सबर्ग हवाई अड्डे {नया नाम टैम्बो अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/OR_Tambo_International_Airport">Tambo International Airport</a>)} पर लेने आना था पर वहां हमें कोई नहीं मिला। मोबाइल से बात करने के बाद पता चले कि उन्हें सूचना मिलने में कुछ गड़बड़ हो गयी थी इसी लिये कोई नहीं आ सका था।</p>
<p>मोबाइल से बात हो जाने के कुछ देर बाद, फारूक हमें  पर लेने आये। वह  बेहद मज़ेदार व्यक्ति निकले। उनको   साउथ अफ्रीका के बारे में अच्छा ज्ञान था।  वे हिन्दी में बात कर रहे  थे। उन्होंने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;मेरे  बाबा सूरत में रहते थे।  वे पहले डरबन में  आये। उनका मकसद यहां पर व्यापार करने का था। शुरू-शुरू में खाली बोतले खरीद कर बेचते थे। उसके बाद कुछ पैसा इक्टठा करके उन्होंने मिठाई की दुकान शुरू कर दी।  यह दुकान &#8216;मुल्ला स्वीट  मीट हाउस&#8217; नाम से आज भी  डरबन में चलती है। इसमें मुख्यत: गुजराती मिठाई बिकती है। इस दुकान को उनके चाचा चलाते हैं। इसमें इस समय एक रेस्ट्रां भी है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने पूछा कि आप जॉहन्सबर्ग क्यों आ गये। उनका कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं बचपन से डरबन में रहा और वहां पर रहते-रहते ऊब गया। इसलिए व्यापार करने जॉहन्सबर्ग  आ गया। मै टैक्सी/ ट्रैवल सर्विस चलाता हूँ।</p></blockquote>
<blockquote><p>मेरे पिता ऊर्दू बोल व लिख लेते थे। मेरी माँ गुजराती बोल और लिख पाती थीं और मैं  स्वयं अग्रेंजी, हिन्दी, ऊर्दू और गुजराती बोल लेता हूँ।&#8217;</p></blockquote>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/jagranda-flower-south-africa.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/jagranda-flower-south-africa.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>रास्ते में फूलों के पेड़ मिले, जिसमें बैगनी रंग का बहुत सुन्दर फूल लगा हुआ था। फारूक के मुताबिक इसका नाम जगरांडा (Jagranda) है। यह सफेद और गुलाबी रंग का भी होता है।</div>
<p>कार में रास्ते भर रेडियों बज रहा था। इस प्रोग्राम को एक लड़की प्रस्तुत कर रही थी। वह बोलती तो अंग्रेजी में थी पर गाने हिन्दी के सुनवा रही थी। फारूक ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह साउथ अफ्रीका में भारतीयों द्वारा चलाया जाने वाला एक रेडियो स्टेशन है। इसका नाम लोटस (Lotus) कमल है। सबसे पहले भारतीय जिस पानी के जहाज द्वारा साउथ अफ्रीका गये थे उसका नाम लोटस था इसलिए इस रेडियो स्टेशन का नाम भी लोटस रखा गया है।&#8217;</p></blockquote>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><img title="Johansburg-poverty" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/johansburg-poverty.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" /><p class="wp-caption-text">जॉहन्सबर्ग में यह भी देखने को मिला</p></div>
<p>फारुक के साथ जॉहन्सबर्ग से प्रिटोरिया  का सफर बहुत अच्छा बीता।  हम लोग जिस रोड़ पर  जा रहे थे,  वह  बेहद अच्छी व  साफ सुथरी थी। उसको देख कर लगता था कि साउथ अफ्रीका में बहुत प्रगति हुई है। वे हमसे कहीं आगे है पर यहां पर अधिकतर  सफेद  लोग ही दिखाई पड़े।</p>
<div>भारत से चलते समय हमें बताया गया था कि यहाँ पर अपराध बहुत हैं पर वहाँ इतना सब कुछ व्यवस्थित देखकर यह नहीं लगा।  मैने फारूक से पूछा कि क्या यहां पर अपराध काफी ज्यादा हैं।  उन्होंने  कहा,</div>
<blockquote><p>&#8216;यहां पर नौकरियां कम हैं और लोग ज्यादा है। यही कारण है कि यहां पर अपराध की संख्या  बहुत अधिक है।&#8217;<em><br />
</em></p></blockquote>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 210px"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/garden-court-hatfield-pretoria-south-africa.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/garden-court-hatfield-pretoria-south-africa.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a><p class="wp-caption-text">प्रिटोरिआ में हमारा होटेल</p></div>
<p>प्रिटोरिया में हमें, ग्राडन कोर्ट हैटफील्ड (<a href="http://cybercapetown.com/Hatfield/">Garden court Hatfield</a>) में ठहरना था। वहाँ पहुँच कर लगा कि  क्यों न मैं ईमेल चेक कर लूँ।  बर्लिन (जर्मनी) <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/01/what-to-see-in-berlin-city.html">यात्रा</a> के दौरान, मैं जिस होटल में ठहरा था उस होटल के नीचे लॉज़ में एक कम्पूयटर रखा था जहाँ अन्तरजाल पर जाया जा सकता था इसके  इस्तेमाल करने के लिए कुछ पैसा नहीं देना पड़ता था। इसी तरह यहाँ भी एक कम्पूयटर था।  मुझे लगा कि यह भी   जर्मनी की  तरह मुफ्त होगा लेकिन पास जाकर उसकी नोटिस  पढ़ी तो उसमें लिखा था कि इसको प्रयोग करने के लिए आपको  १५ मिनट के लिए १५ रैंड (यानी की लगभग ९०/-रूपये) और आधे घण्टें के लिए २५ रैंड   देनें होगें।  अपना  देश समान्यता  में आधे घण्टें का दाम १५/-रूपया लगता है। मुझे लगा कि यह तो बहुत मंहगा है।</p>
<p>हम लोग  शाम को रात का खाना जल्दी खाकर सो गये क्योंकि अगले दिन सुबह ही हम लोगों को क्रुगर राष्ट्रीय पार्क जाना था। अफ्रीका में बहुत सारे पार्क है पर शायद क्रुगर  पार्क अफ्रीका का सबसे अच्छा और सबसे व्यवस्थित  जानवरों का पार्क है।</p>
<h3 style="text-align:center;">यह मेरी तरफ से आपको भेंट है</h3>
<div> मुझे प्रिटोरिया में काम  था और यहीं रूकना था। इसी लिये क्रुगर राष्ट्रीय उद्यान (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kruger_National_Park">Kruger National Park</a>) घूमने का चार दिन तीन रात का पैकेज़, प्रिटोरिया से लिया था।  इसकी बुकिंग अन्तरजाल पर भारत से करा ली थी। यह कुछ मंहगा था। यह इसलिए कि पैकेज़ जॉहन्सबर्ग में शुरू होतें है, लोग वहीं से इसे लेते है पर  हमने तो प्रिटोरिया से लिया था। यह केवल एक ही कम्पनी करती है। जाहिर है कि वह मंहगी थी। अधिकतर लोग तो केवल इसी पार्क को देखने आते है इसलिए वे जॉहन्सबर्ग हवाई अड्डे से ही सीधे इस ट्रिप पर चले जाते है। उन्हें किसी भी होटल में रूकनें की जरूरत नहीं है।</div>
<p>हम लोग सुबह, कुगर राष्ट्रीय पार्क के लिए निकले। होटल में नाश्ता मुफ्त रहता है लेकिन हम लोगों को  साढ़े ६ बजे निकलना था और नाश्ते का समय सात बजे शुरू होता था।   होटल वालों ने हमें  नाश्ता पैक कर दे दिया ताकि उसे हम रास्तें में खा सकें।</p>
<p>हमको लेने के लिए मिस्टर जेम्स ट्योटा वैन लेकर आये थे। यह उस  कम्पनी के साथ काम करते है जिनके साथ हम लोगों  क्रुगर पार्क घूमनें का पैकेज लिया था।  इसमें  लगभग १२ लोग बैठ सकते हैं लेकिन जेम्स के मुताबिक ज्यादा भीड़ नहीं है और केवल हम ही लोग हैं।</p>
<p>हमें दो रातें हेज़ी व्यूह (<a title="Hazyview, Mpumalanga" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Hazyview,_Mpumalanga" rel="wikipedia">Hazyview</a>) शहर के उंभाबा होटल (Umbhaba Lodge) में, और तीसरी रात  पिलिग्रमस् रेस्ट ( Pilgrim&#8217;s rest) शहर के रॉयल होटल में रूकना था।</p>
<div>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><img title="agriculture-farming-watering-southafrica" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/agriculture-farming-watering-southafrica.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" /><p class="wp-caption-text">खेतों में पानी की यांत्रिक सिंचाई</p></div>
</div>
<p style="text-align:left;">यहाँ पर खेतों की सिचाईं एकदम आधुनिक तकनीक  के द्वारा, यंत्रो से होती है। रास्ते में न केवल हमें खेती के, पर जानवरों के फार्म भी मिले। जानवरों के फार्म पर तरह -तरह के जानवर हिरण, शुतुरमुर्ग आदि थे । यह सब मांस खाने के लिए पाले जाते है। शुतुरमुर्ग के अण्डें मे छेद कर, उसके अन्दर का पदार्थ निकाल, उसे  अच्छी तरह से सजाया जाता है। उसके बाद वे  यादगार निशानी की तरह बेचे  जाते हैं।<em></em></p>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 212px"><img title="Aloe_Vera_with_web" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/a/a1/Aloe_Vera_with_web.jpg/202px-Aloe_Vera_with_web.jpg" alt="" width="202" height="269" /><p class="wp-caption-text">चित्र विकिपीडिया से</p></div>
<p style="text-align:left;"><em><br />
</em></p>
<p style="text-align:left;">रास्ते में, हमें एलो वीरा के भी बाग दिखे। जेम्स ने बताया कि यह काफी मात्रा में पैदा किया जाता है। शुभा ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह पेड़  से तरह तरह की दवाईयां बनती हैं और  त्वचा के लिये क्रीम भी बनायी जाती है। अपने घर में भी इसका पेड़ लगा है। पिछले साल हमारी बिटिया रानी इसी तरह की Crema Hidernante <a title="Aloe vera" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Aloe_vera" rel="wikipedia">Aloe Vera</a> नाम की स्पेन में बनी Moistturizing cream लायी थी। जो कि काफी अच्छी है।&#8217;</p></blockquote>
<p>रोड बहुत अच्छी और सीधी थी। मुझे कुछ साल पहले अमेरिका जाने का मौका मिला था। साउथ अफ्रीका में रोड़ देखकर वहां के रास्ते की याद आयी। हांलाकि साउथ अफ्रीका में लोग अपने देश की तरह बांयी तरफ चलते है। आगे कुछ दूर चलने पर एक जगह बोर्ड दिखायी पड़ा जिसमे लिखा हुआ था,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्राइम जोन डोंट हाल्ट&#8217;।</p></blockquote>
<p>मैंने जेम्स से पूछा ऎसा क्यों लिखा है तब जेम्स का कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह जगह मौज़म्बीक देश के पास है और वहाँ के बहुत से लोग यहां आ जाते है और कारें रोक कर लूटते  हैं।  इसीलिए लिखा हुआ है कि यहाँ मत रूकिए।&#8217;</p></blockquote>
<p>शायद यह बात सच नहीं है। साउथ अफ्रीका में अपराध काफी हैं। मुझे लगता है कि जेम्स अपने देश की बुराई नहीं करना चाहते थे। इसीलिये उन्होंने यह बात कही।</p>
<p>रास्ते में, हम लोगों को एक ट्रक  मिली जिसमे फर्नीचर का समान लदा  हुआ जा रहा था । जेम्स ने बताया कि ये लोग मौज़म्बीक से आये है और यहां से  पुराना माल ले जाकर, वहां महंगे दामो में बेचते हैं।</p>
<p>रास्ते में, एक स्टील प्लान्ट, स्क्रैप प्लान्ट और पेपर मिल मिली। बहुत सारे थर्मल पावर स्टेशन मिले। जेम्स के मुताबिक साउथ अफ्रीका में दो हाइडिल पावर स्टेशन हैं जिसमें एक  सनसिटी के पास है। जेम्स ने हमें सनसिटी देखने जाने  की सलाह दी। उसके मुताबिक यह  बहुत सुन्दर जगह है और यहां पर ऎश्वर्या राय, मिस वर्ल्ड चुनी गयी थी।</p>
<p>रास्ते में टोल एरिया गेट बना हुआ था जिसमें रास्ते के मेनटेंस के लिए पैसा देना पड़ता है। यही कारण है कि यहां की रोड़ बेहतर हैं। रास्ते में जगह जगह पर,   पेट्रोल भरने की जगह है  जहाँ बाथरूम जाया जा सकता हैं। यह बहुत साफ थे। मुझे लगा कि काश अपने भारत मे  कुछ इस तरह की चीज़ें होती जिसका हम लोग प्रयोग कर सकते, तो कितना अच्छा होता।</p>
<p>हम लोग आधा रास्ता तय करने के बाद  एक पेट्रोल  पम्प  पर रूके । यहाँ खाने पीने का समान भी मिलता था। यह बहुत अच्छी साफ सुथरी जगह थी।  हम लोग बहुत सबेरे उठ गये थे इसलिए नींद भी आ रही थी। मैंने जेम्स से पूछा कि क्या वे कॉफी लेना पसंद करेगें। उन्होंने कहा, जरूर। हम कॉफी पीने के लिए वहाँ पहुँचें।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/yantora-cofee-creamsouth-africa.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/yantora-cofee-creamsouth-africa.jpg?w=225" alt="" border="0" /></a>मेरी पत्नी ने कॉफी लेने से मना कर दिया । हम लोगों ने दो कॉफी के लिए आर्डर दिया। जो लड़की काफी बना रही थी उसने कॉफी देने के पहले क्रीम से उस पर  सुन्दर सा फूल  बनाया। यानि कि कॉफी के ऊपर क्रीम से नक्काशी। यह बहुत सुन्दर लग रहा था। मैंने उससे कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं हिन्दुस्तान से आया हूं और मैंने कभी भी इस तरह से नक्काकाशी की हुई कॉफी नहीं पी है। क्या मैं कॉफी बनाते समय,  उसका चित्र ले सकता हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>वह मुस्कुरायी और उसने कहा जरूर। उसने एक कप कॉफी और बनायी जिसे मेरी पत्नी नें ले लिया पर तीसरी कॉफी का पैसा नहीं लिया। वह मुस्कुरा कर बोली,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह मेरी तरफ से आपको भेंट है।&#8217;</p></blockquote>
<p>उस लड़की ने अपना नाम यंतोरा बताया। वह मुस्कुरा रही थी और उसकी बातचीत करने का ढंग बहुत प्यारा था।</p>
<p>रास्ते में जो भी कस्बे मिलते थे उनके नाम के अन्त में बाद डॉर्प (Dorp) लिखा हुआ था। जेम्स ने बताया कि यह डच भाषा का शब्द है जिसका अर्थ कस्बा होता है इसलिए यह कस्बे के नाम के बाद लिखा है।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/maize-storage-place-south-africa.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/maize-storage-place-south-africa.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>रास्ते में, मक्का रखने के बड़े बड़े स्टोर मिले जिसमें मक्का बीच से डाला जाता है।</div>
<p>हमें रास्ते में, यूक्लीपिटिस, चीड़, केले,  काजू , संतरे, और आम के बगीचे मिलें। जेम्स ने बताया कि यूक्लीपिटिस का प्रयोग मकान  में फर्नीचर  और  पेपर बनाने  में होता है। केलों को प्लास्टिक से ढ़क कर रखा था। यह इसलिए किया जाता है कि उन्हें बंदर न खा सके और उनमें कीड़े न लगें।</p>
<p>रास्ता व उसके अगल बगल की जगह बेहद साफ सुथरी थी। जेम्स ने बताया कि म्यूनिसपल्टी इसको साफ करने के लिए टेंण्डर बुलाती है और वे लोग साफ रखतें हैं। रास्ते में हमनें गाड़ी में</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><img title="Umbhaba-lodge-south-africa" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/umbhaba-lodge-south-africa.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" /><p class="wp-caption-text">उंभाबा होटल जहां हम हेज़ी व्यूह में ठहरे थे</p></div>
<p>पेट्रोल भरवाया। पेट्रोल पम्प पर लिखा था, यहाँ मोबाइल फोन पर बात करना मना है। मैंने पेट्रोल मालिक से पूछा हमारे भारत में ऎसा नहीं होता है। यहाँ पर ऎसा क्यों लिखा है? उसका जवाब था,</p>
<blockquote><p>&#8216;मोबाइल फोन चार्ज करते समय या बात करते समय वे अक्सर फट जाते हैं । यदि पेट्रोल पम्प पर बात करते समय फट जाये तो अर्नथ हो सकता है। इसलिए यहाँ पर मोबाइल पर बात करना मना है।&#8217;</p></blockquote>
<p>हम लोग रास्ते का आनन्द लेते हुए १२ बजे तक हेज़ीव्यूह ( Hazyview) पहुंच गये। यहीं उम्भाबा लॉज़ (Umbhaba Lodge) में  हमें दो रातें गुजारनी थी।  हम लोगों ने, यहां पर अपना समान रखा और क्रुगर पार्क के लिए चल दिए क्योंकि  दोपहर को एक सफारी में जाना था।</p>
<h3 style="text-align:center;">क्रुगर पार्क की सफाई देख कर, अपने देश की व्यवस्था पर शर्म आती है</h3>
<p>क्रुगर राष्ट्रीय पार्क (<a title="National park" href="http://en.wikipedia.org/wiki/National_park" rel="wikipedia">Kruger national park</a>) पार्क साउथ अफ्रीका में जानवरों को सुरक्षित रखने की जगह है। यह लगभग १८,९८९ वर्ग किलोमीटर (७३३२ वर्ग मील) में फैला है और उत्तर दक्षिण ३५० किलोमीटर (२१७) मील और पूरब पश्चिम ६० किलोमीटर (३७मील) है। इस पार्क के चारो तरफ तार लगे है जिसमें हल्की सी बिजली दौड़ती रहती है। यह इसलिए की जानवर बाहर न जा सके।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><img title="Paul Kruger Vanity fair cartoon" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/8/8e/Paul_kruger00a.jpg/200px-Paul_kruger00a.jpg" alt="" width="200" height="328" /><p class="wp-caption-text">पॉल क्रुगर का वैनिटी फेयर से कार्टून - विकिपीडिया से</p></div>
<p>पॉल क्रुगर (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Paul_Kruger">Paul Kruger</a>) ट्रांसवाल गणराज्य (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Transvaal_Republic">Transvaal Republic</a>) के राष्ट्रपति थे। उन्होंने,  १८९८ में,  इस पार्क की स्थापना घटते हुऐ जानवरों की संख्या और शिकार को रोकने के लिय की।</p>
<p>क्रुगर नेशनल पार्क की सबसे अच्छी बात, वहां की सफाई है।</p>
<p>क्रुगर पार्क में, हम लोगों ने दो दिन में, लगभग १४ घण्टें, वहां पर व्यतीत किये। एक बार दिन में २ बजे से लेकर ८ बजे रात्रि तक और अगले दिन सुबह ६ बजे से २ बजे तक। वहां पर एक भी कागज, शीशे की बोतल, प्लास्टिक, या रैपर नहीं दिखायी पड़ा। हमें हिन्दुस्तान के लगभग सारे राष्ट्रीय पार्क जाने का अवसर मिला है। वहां पर रैपर और प्लास्टिक की भरमार ही दिखायी देती है।</p>
<p>पार्क में दूसरी अच्छी बात यह थी कि उस पार्क में दो ऎसी जगह हैं जहां पर आप नाश्ता या खाना खा सकतें हैं और बाथरूम जा सकते हैं। पूरी जगह की सफाई देखने लायक थी। इसे देख कर मुझे अपने देश की व्यवस्था के बारे में शर्म आयी।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/windmillkrugerpark.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/windmillkrugerpark.jpg?w=225" alt="" border="0" /></a><br />
इस पार्क में मुझे एक बात और बहुत अच्छी लगी। इसमें जगह जगह सोलर पैनल (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Solar_panel">Solar panel</a>) और हवा की चक्की (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Wind_mill">Wind mill</a>) लगी थी । मैंने वहां इसका कारण पूछा तो हमें बताया गया,</p>
<blockquote><p>&#8216;एक बार यहां पानी की कमी के कारण जानवर मरने लगे तब सरकार ने इन्हें लगाया। इससे बिजली पैदा कर पम्प चलाये जाते हैं जो जमीन से पानी निकाल कर पोखरों में जानवरों के लिये डालते हैं। जंगल के अन्दर बिजली के तार इसलिये नहीं लगे हैं कि उससे आग लगने का खतरा होता है। इनमें यह खतरा नहीं है।&#8217;</p></blockquote>
<div style="text-align:center;"><em>यह वीडियो, वर्ष २००४ में कुगर पार्क में पानी के पोखरे के पास भेंसे, शेर और मगरमच्छ के बीच, शौकिया लोगों के द्वारा खींचा गया है। यह बहुत ही रोचक है और शायद जानवरों के बारे में सबसे ज्यादा देखा गया विडियो है।</em></div>
<div style="text-align:center;"><span style="text-align:center; display: block;"><a href="http://unmukth.wordpress.com/2011/08/21/south-africa-kruger-park/"><img src="http://img.youtube.com/vi/LU8DDYz68kM/2.jpg" alt="" /></a></span></div>
<div>
<p>मुन्ने को जानवर पसन्द थे। इसलिये साल में एक बार हम लोग जंगलों में जाया करते थे पर यह जंगल, भारत के जंगलों से एकदम अलग है। भारत में जंगल बहुत घने होते हैं जब कि यह जंगल घना नहीं है। और इसमें झाड़िया हैं और जहाँ तक आपकी नजर जाती है वहां तक सब देख सकतें है। इसी कारण यहां पर ज्यादा जानवर दिखाई पड़ते हैं। हम लोगों ने इस पार्क में जितने भी जानवर देखे उतने जानवर भारत के सारे जंगलो में मिलकर नहीं देखे थे। क्रुगर पार्क में प्रति व्यक्ति को प्रति दिन में १३२ रैंड फीस देनी पड़ती है। उसको देने के बाद, हम लोग पार्क के अन्दर गये। जहां, हमारे जंगल में गाइड, रॉड्रिक्स, हमारा इन्तजार कर रहे थे।</p>
<h3 style="text-align:center;">हम दोनो व्यापार कर बहुत पैसा कमा सकते हैं</h3>
<p>रॉड्रिक्स, एक प्राइवेट गाइड है और जिस कम्पनी के साथ हमने पैकेज़ लिया था वे उसी के साथ काम करते हैं।</p>
<div style="border-bottom:7px solid #5c8a64;border-top:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">साउथ अफ्रीका में ५०% शादियां टूट रहीं हैं।</div>
<p>दो दिन हम रॉड्रिक्स के साथ रहे। इस बीच मेरी इससे काफी मित्रता हो गयी। उसने हमें काफी कुछ अपने बारे में बताया। उसने बताया कि वह एकल पिता है और उसके दो बच्चे हैं जिनमें एक १५ साल का और दूसरा ११ साल का है। वे उन्हीं के साथ रहते हैं। पत्नी, उनसे अलग,  जॉहान्सबर्ग मे रहती है।  शायद, उन दोनो के बीच में तालाक हो गया है। मैंने इस बारे में और विस्तार से कुछ बात करना उचित  नहीं समझा। रॉड्रिक्स के मुताबिक साउथ अफ्रीका में ५०% शादियां टूट रहीं हैं। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/raudriksguidekrugerparksa.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/raudriksguidekrugerparksa.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></p>
<p>रॉड्रिक्स, अपने बच्चो के बारे में चिन्तित थे कि कहीं उनमें खराब आदत न पड़ जाए। इसी लिये वे उनके सामने शराब नहीं पीते हैं। उनके घर में  केवल कोल्ड ड्रिंक्स रहती हैं जिसे वे लेते हैं।</p>
<p>रॉड्रिक्स कुछ आगे बढ़ने वाले  व्यक्ति लगे क्योंकि उन्होनें कुछ देर बात चीत के बाद कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप मुझे बहुत अच्छे लगे यदि आप मेरे साथ आ जाएं तो  हम व्यापार कर बहुत पैसा कमा सकते हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>वे चाहते थे कि मैं उनके व्यापार में हाथ बंटाऊंं  या उन्हें ऎसे लोगों से मिला सकूं, जो उनके व्यापार में हाथ बंटा सके। मेरे लिए, यह मुश्किल काम है। मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मुझे व्यापार करना नहीं आता है और मैं व्यापार नहीं कर पाऊंगा। यदि आप व्यापार करने को सोचते है तो आपको पर्यटन के लिए काम करना चाहिए। इसके लिए इण्टरनेट का प्रयोग करना अच्छा है। व्यापार के लिए आवश्यक है कि वह सुव्यस्थित हो और इसके लिए अलग से व्यवस्था करनी होगी।&#8217;</p></blockquote>
<p>रॉड्रिक्स के पास ट्योटा वैन थी जिसमें कुछ बदलाव कर दिये गये थे। इसमें बैठने के लिये सीटें तीन पक्तियों में थी। यह एक  खुली गाड़ी थी जो कि ऊपर से ढ़की थी। हमने इसी पर दोपहर की सफारी ली।</p>
<h3 style="text-align:center;">फैंटम, टार्ज़न जैसे चरित्य का जन्म &#8211; किंग सॉलमन माइनस् पुस्तक से</h3>
<p>क्रुगर पार्क में दोपहर की सफारी के समय, हमारे साथ न्यूजीलैड से आए हुए एक दम्पत्ति, उनकी पुत्री व ब्रिट्रानी दम्पत्ति थे ।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/deer-zebra.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/deer-zebra.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a></p>
<p>भारत के जंगल के पार्क में सबसे ज्यादा चीतल दिखाई पड़ते है और यहां पर सबसे ज्यादा इम्पाला है। यह हिरण जाति का एक जानवर है। हम लोग हिरण जाति के लगभग सभी जानवरों को देखा। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/hippopotamus.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/hippopotamus.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a></p>
<p>हिरणों के अतिरिक्त, हमने ज़ेबरा (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Zebra">Zebra</a>), हिप्पोपोटामस (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Hippopotamus">Hippopotamus</a>), जंगली सुअर (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Wild_boar">Wild Boar</a>), ज़िराफ (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Giraffe">Giraffe</a>), बबून बंदर (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Baboon">Baboon</a>), नीला वाइल्डबीस्ट (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Blue_Wildebeest">Blue Wildebeest</a>),   हाथी (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Elephant">Elephant</a>),    गेंडें (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Rhinoceros">Rhinoceros</a>), जंगली भैसों (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/African_buffalo">African Buffalo</a>), (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Spotted_hyena">Spotted Hyena</a>) के झुण्डों को देखा।</p>
<p>यहां पर हमनें तरह-तरह की चिड़ियों (लगभग ४०-५० तरह की) को भी देखा। चिड़ियाएं तेजी से उड़ती थी कि हम लोगों ने उनका चित्र  नहीं खींच पाए।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/wildboar.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/wildboar.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a><br />
रॉडिक्स के पास जानवरों की एक बहुत अच्छी गाइड पुस्तक थी। जब हम किसी जानवर के बारें मे पूछते  थे तो रॉडिक्स हमें उसी से दिखाते थे ताकि हम उसे ठीक प्रकार से जान सकें।</p>
<p>जंगल में घूमते समय मैने रॉड्रिक्स से पूछा कि क्या यहाँ पर टार्जन और फैन्टम के चरित्र लोकप्रिय हैं? उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैंने न तो, यह नाम, कभी सुने हैं न ही वे लोकप्रिय हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/giraffe.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/giraffe.jpg?w=150&#038;h=200" alt="" width="150" height="200" border="0" /></a>मुझे आश्चर्य हुआ। जो चरित्र अफ्रीका के जंगलो पर आधारित है वे अफ्रीका में ही नहीं जाने जाते हैं। मुझे इस पर भी आश्चर्य हुआ कि इनके बारे में न्यूजीलैंड और इग्लैंड से आये दम्पत्ति को भी कुछ नहीं मालूम था हांलाकि उन्होंने <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/07/stories-based-on-eclipse.html">किंग सॉलमन माइनस्</a> का नाम सुना था पर पढ़ी नहीं थी।</p>
<p>किंग सॉलमन माइनस्  अंग्रेजी साहित्य की उच्च कोटि की पुस्तक मानी जाती है और इसी ने लोगों के मन में अफ्रीका के जंगलो के बारे में उत्सुक्ता जताई और टार्जन एवं फैन्टम  जैसे चरित्र का जन्म हुआ।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/baboon.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/baboon.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a></p>
<p>रॉड्रिक्स  ने  शाम को हमें पार्क में  छोड़ दिया। पार्क के आफिस से हमें शाम की सफारी लेनी थी और यह सफारी केवल पार्क के लोग ही करा सकते थे। न्यूजीलैंड से  आये दम्पत्ति  यह सफारी नहीं ले सकें क्योंकि यह उन्हें पिछली रात लेनी थी पर वे इसे नहीं ले पाये थे।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/bluewildebeestkrugerparksarasmus.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/bluewildebeestkrugerparksarasmus.jpg?w=200&#038;h=134" alt="" width="200" height="134" border="0" /></a></p>
<p>इस सफारी में हमारें साथ कुछ और लोग (तीन लड़के व एक लड़की) भी थे। मेरे विचार से  अमेरिकन लग रहे थे। वे बात-चीत से घमण्ड़ी लगते थे। यह अमेरिकनों की खास पहचान है वे दुनिया के सबसे बड़े दादा है। वे जो करते हैं वह ही ठीक- अपने आगे दूसरों को कम समझते है। अब समय बदल रहा है शायद वह कुछ सीखें और बर्ताव में परिवर्तन करें। नम्रता, दूसरों को समझना, सबसे बड़ा गुण है यही कारण है कि हमारी सभ्यता इतनी पुरानी होते हुए  आज भी जीवित है पर अन्य पुरानी सभ्यतायें समाप्त हो गयी।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/elephant.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/elephant.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a></p>
<p>लौटते समय हम लोगों की गाड़ी के साथ दो अलग-अलग समय खरगोश आगे आ गये और आगे आगे चलते रहे। जब गाडी तेज हो तो वे तेजी से दौड़ कर सड़क पार करते थे मानों वे हमें  रोकना चाहते हैं। हमारे गाईड ने बताया कि इन्हे रोशनी पसंद है और ये रोशनी से खेलना चाहते है। हम लोगों ने जब अपनी गाड़ी की लाइट बंद कर दी तो वे वापस जंगल में चले गये।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/africanbuffalokrugerparksarasmus.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/africanbuffalokrugerparksarasmus.jpg?w=200&#038;h=134" alt="" width="200" height="134" border="0" /></a></div>
<p>हमारी शाम की सफारी,  रात के लगभग ८ बजे खत्म हुई और हम लोग वापस अपनी लॉज में आ गये।</p>
<h3 style="text-align:center;">हिन्दुस्तानी, बिल्लियों से क्यों डरते हैं</h3>
<p style="text-align:right;"><img class="alignright" title="umbhaba lodge room inside" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/umbhaba-lodge-room-inside.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" /><em>उम्भाबा लॉज़ में हमारे कमरे का दृश्य</em></p>
<p style="text-align:left;"><em></em>इस ट्रिप में सुबह का नाश्ता और रात का खाना मुफ्त था। दोपहर के खाने के समय हम घूमते रहते थे। इसलिये घूमने की जगह ही खाने की बात थी। नाश्ते में हमेशा फलों का रस रहता था पर रात के खाने में न तो रस रहता था न ही पानी।  वे लोग चाहते हैं  कि रात के  खाने के समय लोग शराब या वाइन लें। साउथ अफ्रीका के प्रत्येक रेस्ट्रां में बार रहता था।  उम्भाबा लॉज में भी था। उसे एक महिला देख रही थी। वह उसकी साक़ियः थी। रात के भोजन के समय, वह महिला हमारी टेबल पर आयी और पूछा,</p>
<div>
<blockquote>
<div>&#8216;क्या कोई  ड्रिंक लेना पसन्द करेगें?&#8217;</div>
</blockquote>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/umbhaba-lodge-room-view.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/umbhaba-lodge-room-view.jpg?w=320&#038;h=240" alt="" width="320" height="240" border="0" /></a><em>उम्भाबा लॉज़ में हमारे कमरे की बालकनी से बाहर का दृश्य</em></p>
</div>
<p>हमने बताया कि हम शराब नहीं पीते हैं पर क्या वह हमारे लिये मॉकटेल (Mocktail) बना सकती है। भारत में यह शब्द प्रचलित है पर लगता है कि वहां नहीं है। उस महिला ने यह शब्द कभी नहीं सुना था। उसने पूछा यह क्या होता है मैंने उसे बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;कॉकटेल में  शराब डालते हैं। मॉकटेल में शराब की जगह जूस डालते हैं और इसे सोडा के साथ बनाया जाता हैं। चूंकि इसमें शराब नहीं होती है इसलिये इसे मॉकटेल कहते है। भारत में पार्टियों में यह अक्सर ली जाती है। अगली बार जब कोई भारतीय उनके लॉज़ में रुके और शराब न पीना चाहे तो  वह उनसे यह पीने के लिये पूछ सकती है।&#8217;</p></blockquote>
<p><img class="alignright" title="umbhaba lodge cat" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/umbhaba-lodge-cat.jpg?w=150&#038;h=200" alt="" width="150" height="200" />वह महिला मेरे लिये एक मॉकटेल बना कर लायी। यह उसने पहली बार किया था। इसलिये यह उतनी अच्छी नहीं बनी थी जैसा कि भारत में दावतों या रेस्ट्रां में पीने को मिल जाती है।</p>
<p>उम्भाबा लॉज़ में एक  काली और सफेद रंग की बिल्ली  थी। मैं उसको कुछ खिला रहा था तो उस महिला ने मुझसे पूछा,</p>
<div>
<blockquote><p>&#8216;क्या आपको डर नही लगता है। क्योंकि  भारतीय लोग  बिल्ली से डरते है। जब भी वे हमारे लॉज़  में ठहरते है तो हमें बिल्ली को बंद करके रखना होता है।&#8217;</p></blockquote>
</div>
<p>मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैने हमेशा <a href="http://munnekimaa.blogspot.com/2006/11/blog-post_28.html">जानवर पाले हैं</a>। हमारे यहां तरह तरह के जानवर रहे हैं इसलिए मैं बिल्ली से नहीं डरता। हालांकि बिल्ली से थोड़ा घबराता हूं क्योंकि मैंने कभी भी बिल्ली नहीं पाली है। यदि साउथ अफ्रीका में बिल्ली ने काट लिया तो मै क्या करूंगा।  भारत में बिल्ली नहीं पाली जाती है पर कुत्ते पाले जाते हैं इसलिए भारतीय लोग बिल्ली से घबराते हैं पर कुत्तों से नहीं।&#8217;</p></blockquote>
<p>महिला ने  कहा कि यह बिल्ली पालतू है और तंग नहीं करती है। उसने मुझसे यह भी बताया कि,</p>
<blockquote><p>&#8216;बिल्ली  पालन बहुत आसान है इनकी सफाई नहीं करनी पड़ती है और बिल्ली को खाना देने की जररूत नहीं है वह अपना खाना खुद ढूंढ लेती है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैं अपने मित्रों के लिये वाइन लेना चाहता था। मैंने उससे वहां की अच्छी वाइन के बारे में पूछा। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप लॉज़ से वाइन मत लीजिये यह महंगी पड़ेगी। आप बाज़ार से १९९६ में बनी कोई भी वाइन ले लीजिये क्योंकि उस साल अंगूर की फसल सबसे अच्छी हुई थी और उस साल की बनी वाइन सबसे बेहतरीन है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने, वाइन, हवाई अड्डे से ली पर १९९६ की बनी वाइन नहीं मिल पायी।</p>
<p>हम लोग न केवल थके थे पर जोर की भूख भी लग रही थी। खाना खा कर जल्दी सोने चले गये। हमें अगले दिन क्रुगर पार्क में, सुबह की सफारी लेनी थी।</p>
<h3 style="text-align:center;">आपको तो शर्म नहीं आनी चाहिये</h3>
<div>
<p>क्रुगर पार्क में, हमने सुबह की भी सफारी ली। सुबह की सफारी में हमारे साथ वही न्यूजीलैंड के दम्पत्ति उनकी पुत्री और ब्रिटानी दम्पत्ति थे। न्यूजीलैंडर पिछले दिन भी और इस समय भी गाडी के सबसे पीछे वाली सीट पर बैठे। पीछे की सीट ऊंची होती है शायद वहां से सबसे अच्छा दिखाई पड़ता हो इसीलिए वे सबसे पीछे की सीट पर बैठना पसन्द करते थे। ब्रिटिश दम्पत्ति कुछ देर से आये इसलिए बीच वाली सीट पर हम लोग बैठ गये। हम लोग पिछले दिन भी साथ थे, वे हमारे ही लॉज़ में ठहरे थे &#8211; हमारी उन सब से अच्छी मित्रता हो गयी।</p>
</div>
<div style="border-bottom:7px solid #5c8a64;border-top:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">सार्वजनिक जगहों पर, भारतीय प्रेम या स्पर्श करने में हिचकते हैं।</div>
<p>सुबह सफारी में ठंडक होती है। हमें हिदायत दी गयी थी कि हम ठीक प्रकार से कपड़ें पहनें। हमने कपड़े भी पहने पर इसके बावजूद भी हमें ठंडक लगने लगी। न्यूजीलैंड और ब्रिटेन से आये दम्पत्ति में, पत्नी या तो पति की गोद में बैठ जाती या फिर वे एक दूसरे को आलिंगन में ले लेते ताकि वे एक दूसरे को गर्मी पहुंचा सकें पर <a href="http://munnekimaa.blogspot.com/">शुभा</a> &#8211; वह तो एक भारतीय की तरह छटक कर सीट के दूसरे कोने पर जा बैठी। उनकी तरह से बैठने पर, उसे और मुझे दोनो को शर्म आ रही थी &#8211; मैं उन्मुक्त होकर भी मुक्त नहीं, अपने बन्धनो में जकड़ा हूं। इस तरह का बर्ताव, विदेशियों से एकदम अलग है। हम लोग, सार्वजनिक जगहों में प्रेम या स्पर्श करने में हिचकते हैं।</p>
<p>हम से, न्यूजीलैंड से आये दम्पत्ति ने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप लोग भी पास पास क्यों नहीं बैठते। भारत में तो खजुराहो (<a title="Khajuraho" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Khajuraho" rel="wikipedia">Khajuraho</a>), कोर्णाक (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Konark_Sun_Temple">kornak sun temple</a>) जैसे मन्दिर हैं और कामसूत्र (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kama_Sutra">kam sutra</a>) जैसी पुस्तक लिखी गयी है फिर इस तरह का व्यवहार क्यों कर रहें हैं। आपको तो शर्म नहीं आनी चाहिये। मुझे यह कुछ अजीब सा लगता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मेरे पास इसका कोई उत्तर नहीं था। मैंने उनसे कहा कि मुझे नहीं मालुम। लेकिन मुझे भी यह अजीब लगता है।</p>
<p>रॉड्रिक्स के पास कम्बल थे। हमने उसे ओढ़ लिया। तब ही ठंड से पीछा छूटा।</p>
<p>सुबह चलते समय कुछ बूंदा बांदी हो रही थी। हम लोगों को लगा कि शायद आज का दिन तो बेकार जायेगा और कोई जानवर नही दिखेगें। लेकिन यह सच नही हुआ। वहां पहुंचने के बाद मौसम साफ हो गया, हांलाकि कुछ ठंड थी। हम लोग तरह तरह के जानवर देख पाये। वे धूप लेने के लिए निकले थे। हमें गैंडे भी दिखायी पड़े।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/krugerparksarhinocerosrasmus.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/krugerparksarhinocerosrasmus.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></p>
<div style="text-align:right;"><em>यह चित्र मेरा लिया हुआ नहीं है। इसे रासमस नामक जर्मन लड़के ने खींचा है। इस श्रंखला की अगली कड़ी में, मैंं आपकी मुलाकात, उससे और शेरों से करवाउंगा।  </em></div>
<p>रॉड्रिक्स ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;गैंडे दो प्रकार के होते है एक तो सफेद (<a title="White Rhinoceros" href="http://en.wikipedia.org/wiki/White_Rhinoceros" rel="wikipedia">white rhinoceros</a>) और दूसरा काला (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Black_Rhinoceros">black rhinoceros</a>)।&#8217;</p></blockquote>
<p>मुझें तो दोनों का रंग एक ही सा लगा। मैंने जब यह बात कही तो रॉड्रिक्स ने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;दोनों का रंग एक है पर उन्हें सफेद या काला इसलिए कहा जाता है कि एक गैंडा बड़ा होता है। इसे सफेद कहा जाता है। दूसरी तरह का गैंडा कुछ छोटा होता है जिसे काला कहा जाता है। सफेद गैंडा केवल जमीन की घास खाता है क्योंकि उसकी गर्दन की बनावट इस प्रकार होती है कि वह अपनी गर्दन ऊपर नहीं कर सकता है और काला गैंडा छोटा होता है और वह जमीन की घास और ऊपर की पत्ती भी खा लेता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मेरे यह पूछनें पर कि क्या वे एक ही योनि के है रॉड्रिक्स इसका ठीक से जवाब नही दे पाये। मैंने पूछा कि क्या इन दोनो के सम्भोग से कोई बच्चा पैदा हो सकता है। उसने कहा कि नहीं। मैंने कहा कि तब वे अलग अलग योनि के हैं अन्यथा बच्चा पैदा हो सकते है।</p>
<p>सच यह है कि गैंडे (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Rhinoceros">rhinoceros</a>) की पांच तरह की प्रजातियां पायी जाती हैं। इसमें से तीन एशिया में और दो अफ्रीका में पायीं जाती हैं। इन्हीं दो के बारे में रॉड्रिक्स हमें बता रहे थे।</p>
<p>पेड़ों पर बहुत बड़े घोंसले बने हुए थे। मेरे पूछने पर कि ये किसके घोंसलें है तो उसने कहा कि इनमे चील, बाज और गिद्व रहते है । मैने इन पंक्षियों को भी वहाँ देखा। यह सफारी ८ बजे समाप्त हो गयी। हम लोग वहीं पर नाश्ता करने के लिये रुक गये पर न्यूजीलैंड और अंग्रेज दम्पत्ति ने वहाँ हमसे विदा ली।</p>
<h3 style="text-align:center;">लगता है, आप मुझे जेल भिजवाना चाहती हैं</h3>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/krugerparksaplateau.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/krugerparksaplateau.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a>हम लोग नाश्ता कर पुन: सफारी पर निकल गये, यह सफारी सबसे अच्छी रही क्योंकि सबसे ज्यादा जानवर देख सके। इस सफारी में हम लोग एक पहाडी पर गये थे। ऊपर पहाड़ी पर समतल जगह थी। यह जगह बहुत सुन्दर थी। मेरा मन था कि यहां पर ज्यादा समय गुजारा जाए। लेकिन कुछ देर बाद रॉड्रिक्स ने हमें वहाँ से तुरन्त चलने के लिए कहा। मेरे पूछने पर उसने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;खबर मिली है कि शेर दिखें हैं और हमें वहीं चलना है।&#8217;</p></blockquote>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/lionkrugerparksarasmus.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/lionkrugerparksarasmus.jpg?w=282&#038;h=188" alt="" width="282" height="188" border="0" /></a>रॉड्रिक्स बहुत तेजी से गाड़ी चलाते हुए हमें उस जगह पर ले गये जहाँ पर शेर थे। वहां पर एक शेर ,शेरनी और उसके बच्चे थे। यह रास्ते से थोड़ी दूर पर थे। रॉड्रिक्स के मुताबिक,</div>
<blockquote><p>&#8216;वहां कई शेर, और शेरनियां हैं। लेकिन वे कुछ नीचे की जगह पर है इसलिए हम उनको नहीं देख पा रहे हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>शेरनी हम लोगों को थोड़ी देर तक तो देखती देती रही फिर उसके बाद वह आराम से सो गयी जैसे की उसे मालूम हो कि हम लोग उनका कुछ नही बिगाड़ेगें। धीरे धीरे यह खबर हर तरफ फैल गयी और हर तरफ से लोग गाडी लेकर उनको देखने आने लगे। हम लोगों ने आधा घण्टा उन्हीं को देखने में बिताया।</p>
<p>मेरे पास सोनी का कैमरा है। यह चित्रों को १२ गुना बड़ा कर खींच सकती है पर इसमें शेर और शेरनी के चित्र बड़े नहीं आ रहे थे। बगल की गाड़ी में कुछ जर्मन लोग थे। उनमें से एक लड़के के पास बहुत अच्छा कैमरा था। उस लड़के का नाम ग्रेनर रासमस (Greiner Rasmus) था और उसके पास कैनन (cannon ex 400 D) का कैमरा था। मैंने उससे कहा कि क्या वह कुछ चित्र मुझे भेज सकता हैं। उसने कहा जरूर। उसने मेरे पास कई चित्र भेजें हैं। जिसमें से कुछ, पिछली चिट्ठियों पर और कुछ इस चिट्ठी में हैं।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/r-greiner.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/r-greiner.jpg?w=242" alt="" border="0" /></a>रासमस (Rasmus) २५ वर्षीय नौजवान है। उसने मीडिया, इतिहास और साहित्य में मार्गबुर्ग (<a href="http://abcnews.go.com/International/wireStory?id=6430777">Marburg</a>) में उच्च शिक्षा प्राप्त की और दर्शन में डाक्टेरेट ली है।</p>
<blockquote><p>Gutentag Rasums,<br />
It was pleasure to meet you at Kruger&#8217;s Park. Thank you for photographs. They are beautiful and pettier that the ones that I took. Next year I do plan to visit to <a title="Rainforest" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Rainforest" rel="wikipedia">rain forests</a> in <a title="Brazil" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Brazil" rel="wikipedia">Brazil</a>. I hope you will also be able make it. We can plan to be there together.<br />
Greetings to you from <a title="India" href="http://en.wikipedia.org/wiki/India" rel="wikipedia">India</a>.<br />
Unmukt</p></blockquote>
<p>हम लोग दोपहर तक वापस आये, दिन का खाना खाया। वहां पर एक दुकान भी थी जिसमें यादगार के लिए वस्तुएं मिल रहीं थी। मैंने वहां से कुछ वस्तुऐं अपने तथा मित्रों के लिये खरीदीं। काउंटर पर एक प्यारी सी युवती बैठी थी। उसने मुस्कुराते हुऐ कहा कि,<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/springbokskin.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/springbokskin.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></p>
<blockquote><p>&#8216;आप जानवरों की खाल और शुतुरमुर्ग के रंगे हुऐ अन्डे क्यों नहीं खरीदते। यहां से लोग यह दोनो वस्तुऐं जरूर ले जाते हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैं अपने घर में, हमेशा जानवरों की खाल रखना चाहता था पर यहां जानवरो की खाल रखना गैरकानूनी है। इसलिये कभी रखने की हिम्मत नहीं की। मैंने उस युवती से कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;भारत में जानवरों की खाल रखना गैरकानूनी है। लगता है, आप मुझे जेल भिजवाना चाहती हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/springbokskincertificate.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/springbokskincertificate.jpg?w=218" alt="" border="0" /></a>उसने मुझे समझाया,</p>
<blockquote><p>&#8216;यदि आप यह खाल हमसे खरीदेगें तो हम आपको एक सार्टीफिकेट देगें कि आपने इसे यहाँ से खरीदा है। इस पर भारत में, आपको कुछ नही होना चाहिये क्योंकि हमारे देश में, खाल बेचना गैरकानूनी नहीं है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मेरा मित्र <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/04/blog-post_21.html">इकबाल</a> वकील है। मैंने उससे फोन कर यह बात पूछी। उसने स्पष्ट किया,</p>
<blockquote><p>&#8216;यदि वह लोग सर्टिफिकेट देते हैं तो कोई बात नहीं। तुम इसे खरीद सकते हो। यहां आकर इसे वन विभाग में रजिस्टर करवाना होगा।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैं शेर, चीता या तेंदुवे की खाल खरीदना चाहता था पर यह वहाँ नही मिल रही थी हालांकि कई अन्य जानवरों की खाल मिल रहीं थी। मैंने एक छोटी खाल जो स्प्रिंग बॉक (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Springbok_(antelope)">Springbok</a>) नामक हिरण जाति का होता है उसकी खाल खरीदी।<br />
<em></em></p>
<p style="text-align:right;"><em>आपको विश्वास नहीं &#8211; आप इसका सार्टीफिकेट देख लीजिये अब तो विश्वास हुआ कि नहीं।</em></p>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 210px"><a href="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/6/65/Springbok_etosha.jpg/250px-Springbok_etosha.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/6/65/Springbok_etosha.jpg/250px-Springbok_etosha.jpg" alt="" width="200" height="148" border="0" /></a><p class="wp-caption-text">स्प्रिंगबॉक हिरण का यह चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से</p></div>
<p style="text-align:left;">भारत वापस आ कर, मैंने वन विभाग को पत्र लिखकर इस खाल को रजिस्टर करने की प्रार्थना की। लेकिन उन्होंने यह कह कर मना कर दिया कि यह प्रतिबंधित खालों में नहीं है। शायद स्प्रिंग बॉक जाति का हिरण अपने देश में नहीं पाया जाता है।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/spottedheynakrugerparksarasmus.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/spottedheynakrugerparksarasmus.jpg?w=200&#038;h=134" alt="" width="200" height="134" border="0" /></a>हम लोग वापस होटल के लिए चले। रास्ते में लकडबग्गे (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Spotted_Hyena">spotted hyena</a>) के बच्चे मिले और वे बहुत देर तक रोड़ पर बैठे रहे।  हम लोगों नें अपनी गाडी को कच्चें में उतारकर जाना पडा क्योंकि वह रोड से हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे। जगंल में, जानवरों को अधिकार है। यदि वे रोड़ पर हैं तो आप गाडी उनके आगे नहीं ले जा सकते हैं।</p>
<p>हमें अगले दिन पिलीग्रीम्स रेस्ट (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Pilgrim's_Rest">Pilgrim&#8217;s Rest</a>) जाना था। हम लोगों ने, क्रुगर पार्क में चार सफारी लीं और पार्क में लगभग १४ घन्टे गाड़ी में घूमते हुऐ बिताये। यह अपने आप में थकाने वाला अनुभव था। बाकी समय, हम लोगों ने आराम करने में बिताये।</p>
<h3 style="text-align:center;">ऐसा करोगे तो, मैं बात करना छोड़ दूंगी</h3>
<p>पिलीग्रीम्स रेस्ट ( <a title="Pilgrim's Rest" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Pilgrim's_Rest" rel="wikipedia">Pilgrim&#8217;s Rest</a>) जाने के लिये, हमें सुबह केविल लेने आये। हम लोग लगभग ९ बजे, सुबह पिलीग्रीम्स रेस्ट के लिए चल दिए। रास्ते में हम लोगों को तीन जगहें देखनी थी। सबसे पहले हम लोग ग्रास कॉप गॉर्ज (<a title="Graskop" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Graskop" rel="wikipedia">Graskop</a> gorge) देखने गये। यह गहरी सी घाटी है। जिसमें एक तरफ झरना गिरता रहता है। सुबह के समय हर तरफ धुंध ही धुंध थी इसलिए कुछ अच्छी तरह दिखाई नही दे रहा था।</p>
<p style="text-align:left;">यहां पर, आप चाहें तो घाटी में, एक तरफ से दूसरी तरफ १३५ मीटर तार पर झूल कर जा सकतें हैं या फिर बीचो बीच में आप रस्सी में बांधकर नीचे तक (६८ मीटर), ३ सेकेन्ड में जा सकते हैं। मैंने कहा कि मैं इनमे से कुछ करना पसन्द करूंगा। इस पर मुन्ने की मां, मुझसे, गुस्सा हो गयी। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यदि तुम दोनों में से भी कुछ करोगे तो मैं तुमसे बात करना छोड़ दूंगी।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">हम लोग दूसरी तरफ गये जहाँ से यह हो सकता था। वह रास्ते भर जिद करती रही कि मुझे कुछ नहीं करना है । दूसरी तरफ एक जर्मन दम्पत्ति और उनके बच्चे थे जो कि दोनो कारनामे कर रहे थे। उस वक्त कुछ धुन्ध सी थी। इसलिए मुझे लगा कि बीचो बीच से नीचे जाना ठीक न होगा पर रस्सी में लटक कर, दूसरी तरफ तो जाया जा सकता हूँ। मैंने कैमरा मुन्ने की मां को दे दिया और उससे चित्र खींचने को कहा। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;तुम जो करने जा रहे हो। उसे तो मैं देख भी नहीं सकती हूं चित्र लेने का तो सवाल ही नहीं है।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">यह कह कर उसने अपना मुंह दूसरे तरफ कर लिया। मुझे <a href="http://unmukth.wordpress.com/2011/08/21/2008/10/19/goa-india/">गोवा यात्रा</a> की याद आयी जब मैंने <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/04/para-sailing.html">पैरासेलिंग करने की बात की थी</a>। मैंने जर्मन दम्पत्ति से चित्र लेने की प्रार्थना की।</p>
<p>शुरू में तार लटक कर एक तरफ से दूसरी तरफ जाने में डर लगा पर जब मैं बीचो बीच पहुंचा तो सारा डर समाप्त हो गया और मज़ा आने लगा। नीचे पानी था जिसमें झरना गिरता दिखायी दे रहा था। बीच में पहुंचने के बाद मेरे भार से तार कुछ नीचे हो गया था। नीचे कोई धुंध नहीं थी और मैं एक बेहतरीन नज़ारा देख सका। कुछ देर बाद उन्होनें पुन: मुझे वापस खींच लिया।</p>
<blockquote><p>&#8216;उन्मुक्त जी, मुझे तो आपकी बात पर बिलकुल विश्वास नहीं है। आप तो डरपोक हैं। अज्ञात हो कर चिट्टकारी करते हैं, न किसी को फोन नम्बर देते हैं न ही किसी चिट्टाकार मिलन में पहुंचते हैं और न ही किसी से मिलते हैं। आप बहुत सी चिट्ठियों पर टिप्पणियां करना चाहते है पर टिप्पणी नहीं करते। तार में लटक कर घाटी में जाना तो हिम्मत का काम है। यह कार्य आपसे नहीं हो सकता इसलिये कोई चित्र नहीं है इस चिट्ठी में &#8211; हांकना बन्द कीजिये, हमें न बनाईये।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">मेरे भाई, मेरी बहना, यह सच है कि मैं अज्ञात हो कर चिट्ठाकारी करता हूं, किसी से नहीं मिलता हूं। बहुत सारी चिट्ठियों पर चाह कर भी टिप्पणियां नहीं कर पाता हूं। लेकिन मेरी भी मजबूरी है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि मैं डरपोक हूं। मुन्ने की मां के अनुसार शायद &#8211; मैं ज्यादा ही हिम्मती हूं; अपने वास्तविक जीवन में वह करने पहुंच जाता हूं जिसके बारे में लोग सोचते ही नहीं &#8211; इस लिये कई बार अपनी जान न केवल खतरे में डाल चुका हूं। खैर यह उसका सोचना है। लेकिन आप यह चित्र देखें अब तो आपको विश्वास हो गया न कि मैं तार पर लटक कर बीचों बीच गया था।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/graskopgorgesouthafricaunmukt.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/graskopgorgesouthafricaunmukt.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></div>
<div>अब यह मत कह दीजियेगा कि लगता है कि चित्र में कुछ कलाकारी कर दी गयी है <img src='http://s2.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </div>
<h3 style="text-align:center;">भगवान की दुनिया &#8211; तभी दिखायी देगी जब खिड़की साफ हो</h3>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/lisbonfallssa.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/lisbonfallssa.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>हमें, ग्रास कॉप गॉर्ज (<a title="Graskop" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Graskop" rel="wikipedia">Graskop</a> gorge) देखने के बाद, लिस्बन झरना (<a title="Lisbon Falls, Maine" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Lisbon_Falls,_Maine" rel="wikipedia">Lisbon Falls</a>) देखने जाना था। मुझे लगा कि वहाँ पर भी धुंध रहेगी और कुछ देख नहीं सकेगें लेकिन यह झरना कम ऊंचाई पर है इसलिए वहां पर धुंध बिल्कुल नहीं थी।</p>
<p style="text-align:left;">लिस्बन झरना पर सुन्दर नज़ारा था। वहां पहुंचकर मुझे जबलपुर के धुंवाधार झरने की याद आयी। हालांकि यह झरना जबलपुर के झरने की जितना सुन्दर नहीं हैं पर सफाई के मामले में उससे कहीं बेहतर है।</p>
<p style="text-align:left;">साउथ अफ्रीका में सफाई तारीफे काबिल थी। वे सफाई के मामले में बहुत आगे हैं। क्या हम कभी साफ रह सकेंगे? हम इतने अधिक हैं कि शायद जब तक हम सब न लगें तब तक यह संभव नहीं। शायद इसके बाद भी नहीं &#8211; भारत मां की भी अपनी कमियां हैं वह इतनी बड़ी नही जिसमें हम सब समा सकें।</p>
<p>सफाई न रहने के कारण, बहुत से लोग अपने देश घूमने नहीं आते हैं। मुझे कश्मीर में मिली फिंनलैण्ड की <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/08/helga-katherine-linux.html">हेलगा कैटरीना</a> की याद आयी। उन्होंने मुझसे कहा था,</p>
<blockquote><p>&#8216;मुझे भारत पसन्द है। मैं यहां अक्सर आती हूं पर गन्दगी के कारण मेरे बच्चे भारत आना पसन्द नहीं करते हैं।&#8217; <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/rainforestgod27swindowsa.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/rainforestgod27swindowsa.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></p></blockquote>
<div>
<div>हमारा तीसरा पड़ाव गॉडस् विंडो (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/God's_Window">God&#8217;s Window</a>) नाम की जगह थी। यह एक गहरी घाटी है जिसका नाम ब्लाइड घाटी (Blyde Canyon) है। घाटी में नीचें एक नदी बहती है। यहाँ पर वर्षा वन (Rain Forest) भी है।</div>
</div>
<p style="text-align:left;">हमें बताया गया कि इस घाटी का नज़ारा बहुत ही सुन्दर है पर धुंध के कारण, हम इसे या फिर नदी को देखने से वंचित रह गये। बाद में हम लोगों ने वहां के चित्र देखे और पिक्चर पोस्ट कार्ड खरीदे। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/god27swindow-1.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/god27swindow-1.jpg?w=200&#038;h=145" alt="" width="200" height="145" border="0" /></a> जिसे देख कर लगा कि शायद हम लोग वास्तव में भगवान की दुनिया देखने से वंचित रह गये।<br />
<em></em></p>
<p style="text-align:left;"><em>यह चित्र मेरे द्वारा नहीं खींचा गया है। एक  पिक्चर पोस्ट कार्ड पर था।</em></p>
<div>हम लोग दोपहर तक पिलीग्रीम्स रेस्ट (<a title="Pilgrim's Rest" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Pilgrim's_Rest" rel="wikipedia">Pilgrim&#8217;s Rest</a>) पहुँचे। यह जगह वर्ष १८७३ में प्रसिद्व हो गयी थी क्योंकि यहां पर खोदने पर सोना मिला।</div>
<h3 style="text-align:center;">सर, पिछली रात, आपने जूस का पैसा नहीं दिया</h3>
<p style="text-align:left;">हम लोग दोपहर तक पिलीग्रीम्स रेस्ट (<a title="Pilgrim's Rest" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Pilgrim's_Rest" rel="wikipedia">Pilgrim&#8217;s Rest</a>) पहुँचे। यह जगह वर्ष १८७३ मे प्रसिद्व हो गयी थी क्योंकि यहां पर  खोदने पर सोना मिला। यहाँ पर जगह जगह से लोग सोना खोदने आने लगे। यह साउथ अफ्रीका में सोने की खादानो में, सबसे ज्यादा सोना पैदा करने वाली खदान बना।  यह १९७२ तक चलता रहा। शुरू में, लोग अकेले आकर सोना खोदने  का काम करतें थे लेकिन बाद में १८९६ में, ट्रांसवाल गोल्ड माईनिंग स्टेट  ( Transvaal Gold Mining Estate) नामक   कम्पनी बनी। उनके पास खदानो की जगह और यह कस्बा भी  फ्रीहोल्ड में था। वर्ष १९७१ में इस कम्पनी ने इस कस्बे को सरकार को  वापस  स्थानान्तरित कर दिया। यह पूरा कस्बा   ऎतिहासिक धरोहर घोषित कर दिया गया है। पूरे कस्बे को ही राष्ट्रीय सग्रंहालय बना दिया गया है और इसे देखने के लिए लोग आते हैं। यहाँ पर कई संग्रहालय हैं।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/royalhotelpilgrim27srest.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/royalhotelpilgrim27srest.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a></p>
<p>यहाँ पर हम लोग रॉयल होटल में ठहरे। जब हम वहां  चेक-इन कर रहे थे उस समय बहुत सारे पर्यटक इसकी फोटो खींच रहे थे।  मैंने उनसे पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप इतने चित्र क्यों खींच रहे हैं? क्या आप  यहां ठहरे हुए हैं?</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">उन्होंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;हम यहां नहीं ठहरे हैं पर इसके चित्र इसलिए  ले रहे हैं क्योंकि न केवल यह बहुत सुन्दर है पर इसका ऎतिहासिक महत्व भी है।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">मुझे यह समझ में नहीं आया क्योंकि वास्तव में यह किसी अन्य होटल जैसे ही था। उसके बाद जब कमरे में आया तो वहां कुछ चौपन्ने थे जिसमें होटल का इतिहास लिखा था। उन्हें पढ़ कर ही, इस होटेल का महत्व समझ में आया। यह १८९५ में,  उन लोगों की सुविधायें देने के लिए बनाया गया जो वहां पर सोना खोदने के लिए आ रहे थे।</p>
<div>मैंने यहां पर इनके कमरे और इसकी जगहों को देखना शुरू किया तो पाया कि इसकी  सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका रख रखाव  पुरानी तरह से ही किया जा रहा है। लगता</div>
<div>है कि  १०० साल के पहले लोग छोटे छोटे कमरों में रहते थे। कमरे और  बाथरूम  के बीच में केवल एक पर्दा पड़ा हुआ था। सारे कमरे इसी प्रकार के थे। शायद  उस समय इस तरह से लोग रहते रहे होगें। इनके बाथरूम मे साबुन रखने का तरीका भी नयाब था। अधिकतर होटल मे साबुन द्रव्य रूप में होता है और प्लास्टिक की छोटी-छोटी शीशियों में मिलता है। यहां का साबुन कागज के पैकेट में था और साबुन के ऊपर हल्का गुलाबी रंग का रिबन लगा हुआ था। यहां पर शैम्पू की छोटी छोटी बोतले नहीं थी पर एक बड़ी बोतल थी जिसमें कार्क लगा हुआ था।  पुराने समय में इसी  तरीके से साबुन या शैम्पू रखे जाते रहे होगें। होटल वाले इस कोशिश में लगे थे कि इस होटल को उसी  वातावरण में रखा जाए जो कि उसके बनने के समय था। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/goldcarriagesa.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/goldcarriagesa.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></div>
<p style="text-align:left;">यहाँ पर हम लोगों ने चार संग्रहालय देखे।</p>
<ul>
<li>पहला, पिलीग्रीम न्यूज़ संग्रहालय था। इसमें वहाँ के  छपाई का इतिहास था।</li>
<li>दूसरा, गैरेज संग्रहालय है।  इसमे वह वाहन भी था जिससे सोना  निकालने के बाद ले जाया जाता था। कई पुरानी कारें भी थी।</li>
<li>तीसरा हाऊस संग्रहालय था। इसमें उस समय  के प्रयोग किये जाने वाले  समान  थे। वहां पर मुझे  हारमोनियम जैसा वाद दिखायी पड़ा। लेकिन उसके अंदर  हवा हाथ से न डाल कर, नीचे पैर से पैडल चला कर डालने की सुविधा थी। इस कमरे में फोटो लगी थी जिसमें  एक महिला साड़ी पहने हुई थी । मैंने  उस संग्रहालय के देख रेख करने वाले युवक से पूछा कि क्या  यहाँ कोई  भारतीय  रहते थे।  वह इस बात की पुष्टि नहीं कर  पाया कि इसमें भारतीय रहते थे अथवा नहीं।  वह यह भी नहीं  बता पाया कि वह वाद हारमोनियम है, क्या उसका कोई और नाम है। शायद वहां के रहने वाले को इस तरह की सूचनायें पता करके रखनी चाहिये।</li>
<li>चौथा संग्रहालय एक स्टोर था। जिसमें इस बात का इतिहास था कि वहाँ किस किस तरह की चीज़ें बेची जाती हैं और किस तरह के पोस्टर होते थे। यहां कई  पोस्टर लगे हुए थे जिसमें एक पोस्टर लैक्टो कैलामाइन लोशन (Lacto Calamine Lotion) का भी था। यह आज भी मिलता है और त्वचा के बचाव के लिये महिलायें प्रयोग करती हैं, पुरुष भी चोरी छिपे इसका प्रयोग करने में नहीं हिचकते हैं <img src='http://s2.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' />  <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/audreyhepburnlactocalaminelotionposter.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/audreyhepburnlactocalaminelotionposter.jpg?w=225" alt="" border="0" /></a> इस पोस्टर की मॉडेल <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/06/unending-love-rabindra-nath-tagore.html">आड्री हेपबर्न</a> (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Audrey_Hepburn">Audry Hepbern</a>) थी। यह बचपन में मेरी प्रिय कलाकार हुआ करती थी। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/05/roman-holiday.html">रोमन हॉलीडे</a> (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Roman_Holiday">Roman Holiday</a>), न केवल इनकी पर, रूमानी फिल्मों में सबसे प्रसिद्ध फिल्म है। मैंने  इस पोस्टर का चित्र भी लिया जिसे आप देख रहें हैं।</li>
</ul>
<p style="text-align:left;">हमारे  घूमने के पैकेज में सुबह का नाश्ता और रात के भोजन का पैसा पहले ही ले लिया गया था। इसलिये इनके लिए हमें पुन: कोई पैसा नहीं देना था।  रॉयल होटल में रात के भोजन पर एक  वेटर ने  पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या आप कुछ ड्रिंक लेना पसन्द करेगें।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">मैंने कहा कि मैं शराब या वाइन नही लेता हूं और जूस लेना पसन्द करूंगा। मुझे लगता था कि इसका पैसा हमें नहीं देना था पर रात के भोजन में पीने की चीज का पैसा देना था।  हम बिना दिए ही चले आए। अगले दिन जब सुबह नाश्ते पर उस वेटर ने हमसे  मुस्कुराकर  कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;सर, पिछली रात आपने जूस लिया था और उसका पैसा नहीं दिया है।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">मैंने कहा कितना देना है। उसने कहा साढ़े दस रैंड। मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;बिल लेते आओ, मैं दस्तखत कर देता हूं और स्वागत कक्ष पर अदा कर दूंगा।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">उसने जवाब था,</p>
<blockquote>
<blockquote><p>&#8216;इस वक्त मेरे लिए वह पर्ची ला पाना मुश्किल है यदि आपको लगता है कि  आपको पैसा नहीं देना है तो मैं पैसा अदा कर दूंगा।&#8217;</p></blockquote>
</blockquote>
<p style="text-align:left;">मुझे उसकी बात में सत्यता लगी। मैंने उसे वह पैसा दे दिया । बाद में स्वागत कक्ष पर लोगों ने इस बात की पुष्टि की, कि वह पैसा हमें देना था।</p>
<p>इस कस्बे के पोस्ट आफिस में  अन्तरजाल की सुविधा थी। इस पोस्ट ऑफिस को रोज़ नामक महिला, देख रही थी। उसनें बताया कि आधे घण्टे के लिए १५ रैंड यानी की लगभग ९०/-रूपये देने होगें। मैंने यह पैसे दिए। यह कम्पयूटर  विन्डोज़ पर था पर  अच्छी बात यह थी कि इसमें फायरफॉक्स था।  हलांकि फायर फॉक्स पर हिन्दी  ठीक से नहीं दिखायी पड़ रही थी। मैंने अपनी ई-मेल देखीं और उसके बाद, हम वापस प्रिटोरिया चल दिये।</p>
<h3 style="text-align:center;">मैंने, आज तक, यहां हवा में कूदती हुई मछलियां नहीं देखी हैं</h3>
<p>हम लोग पिलग्रिमस् रेस्ट से नाश्ते के बाद प्रिटोरिआ के लिये चले। रास्ते में हमें चीड़ के बाग दिखाई पड़े इनकी खास बात यह थी कि नीचे तने में कोई डाल नहीं थी। वे काट दी गयी थीं। तना बहुत ऊपर तक सीधे गया था। हमारे ड्राइवर केविल ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;तने पर बगल में जाने वाली डाल इसलिए काट दी जाती है कि तना सीधे ऊपर जा सके। यह मकान तथा फर्नीचर बनाने में सुविधाजनक रहता है।&#8217;</p></blockquote>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/dullstroomrosecottage.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/dullstroomrosecottage.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a>पिलीग्रिमस् रेस्ट से प्रिटोरिया पहुंचने में लगभग छः घण्टे लगते हैं। हम लोग रास्ते में डलस्ट्रूम (Dullstroom) नामक जगह में रूके। यहां पर हम लोगों ने रोज़ काटेज नामक जगह पर कॉफी पी। इसके नाम को सच करने के लिये इसके चारो तरफ क्यारियों में गुलाब ही गुलाब लगे थे।</p>
<p>हमारे पैकेज के प्रोग्राम में लिखा था कि डलस्ट्रूम फलाई फिशिंग (Fly Fishing) के लिए प्रसिद्व है। हम इसे ठीक से नहीं समझ पाये थे। यह पढ़कर हमें लगा था कि यह कोई ऎसी जगह है जहाँ पर बहुत सी मछलियां हवा मे कूदती हैं पर हमारे ड्राइवर ने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216; मैं यहां से कई बार गुजरा हूं पर मैंने आज तक हवा में कूदती हुई मछलियां नहीं देखी हैं। मुझे इसके बारे में कुछ नहीं मालूम है। लेकिन आप चाहें तो टूर ऑपरेटर से पूछ सकते हैं। यदि वह कोई जगह बताती है तो मैं आपको वहां ले चल सकता हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">हम लोगों ने टूर आपरेटर से पूछा तो वह भी ठीक से नहीं बता पायी। हम लोग कुछ उलझन में रहे कि यह क्या है।</p>
<p>रोज़ काटेज में काफी पीने के बाद जब हम लोग वहाँ से आगे निकले तो रास्ते में एक दुकान थी जिसमें लिखा हुआ था <a href="http://www.flyfishing.co.za/">फलाई फिशिंग शॉप</a>, हमारे ड्राइवर ने गाडी रोक ली और कहा कि हम वहाँ जाकर पूछ सकतें है।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/dullstroomshopdog.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/dullstroomshopdog.jpg?w=150&#038;h=200" alt="" width="150" height="200" border="0" /></a>इस दुकान के बाहर एक नोटिस लगी थी कि अच्छे स्वभाव के कुत्ते अन्दर आ सकतें हैं। उस दुकान में दो कुत्ते थे जिनका नाम कैटी और एली था। दोनों ही बहुत प्यारे कुत्ते थे। मुझे कोई व्यक्ति पसन्द कर या न करे पर कुत्ते तो मेरे प्रिय हैं वे तो हमेशा मुझे पसन्द करते हैं। मैंने प्यार इनके सर पर हाथ फेरा हाथ मिलाया फिर दुकान के अन्दर गया।</p>
<p style="text-align:left;">हमनें दुकानवालों से फलाई फिशिंग के बारे में पूछा। उस दुकान में जॉन नाम का लड़का था। उसने बताया कि फलाई वास्तव में एक कांटा है जिसमें मछलियां फंसती है, मछली फंसाने के लिए बेट नहीं लगाया जाता है। उसने तरह तरह के कांटे दिखाये जिसमें अलग अलग रंग के रेशे लगे थे। जॉन के मुताबिक,</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/dullstrommflyingfishjohn.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/dullstrommflyingfishjohn.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a>&#8216;अलग अलग रंग के रेशे के पानी में पाये जाते हैं। जब कांटे में रंगों के रेशे लगा कर डाला जाता है तब मछलियां उन्हें खाने के लिए आती हैं तो कांटे में फंस जाती हैं।&#8217;</div>
<p style="text-align:left;">Hi John,<br />
It was great pleasure to meet you in Dullstroom. Thanks for telling us information about fly fishing and demonstrating how to cast the rod. I hope you dogs Katti and Elli are fine.</p>
<p>We had wonderful trip of South Africa and will like to visit it again.</p>
<p>With greetings from India<br />
Unmukt</p>
</div>
<div>
<h3 style="text-align:center;">आश्चर्य &#8211; सर्कस को चलाने वाले, इतने कम लोग</h3>
<p>प्रिटोरिया में हमारे  होटल के  बगल में एक बहुत बड़ा सा मैदान था। लौटते समय हमनें देखा कि वहां पर एक सर्कस लगा हुआ था। इसका नाम ब्राइन बॉस्वल सर्कस (<a href="http://www.boswell.co.za/">Brian Boswell&#8217;s Circus</a>) था। हम इसे देखने पहुँचे।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussapretoriaticket.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussapretoriaticket.jpg?w=437&#038;h=328" alt="" width="437" height="328" border="0" /></a></div>
<p>इस सर्कस की सबसे सस्ती सीट ५० रैंड और सबसे मंहगी सीट १०० रैंड की थी। हम लोगों ने ५० रैंड का टिकट लेना उचित समझा। इसके रोज दो शो होते थे: एक साढ़े तीन बजे और एक साढ़े सात बजे। केवल शनिवार को तीन शो थे। यह  अपने देश की तरह का  सर्कस लगता था। यह एक टेंट में था जो कि अपने देश की तरह ही था। हालांकि इस टेंट का घेरा बहुत छोटा, अपने देश के टेंट का, एक तिहाई था।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellsatiger.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellsatiger.jpg?w=165" alt="" border="0" /></a>अपने देश में रात के समय सर्च-लाइट की बीम आकाश में फेंक कर सर्कस की  सूचना दी जाती है। यहां इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं थी पर विज्ञापन के लिये इनके पास गाड़ियां थीं जि<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircuspretoriasahorse.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircuspretoriasahorse.jpg?w=110" alt="" border="0" /></a>स पर शहर में सूचना देने की व्यवस्था थी। इनकी वेबसाइट पर भी इनके प्रदर्शन की विस्तार से सूचना है।</p>
<p>शो में बहुत ज्यादा लोग नही थें ६०-७० लोग रहें होगें। सर्कस  शेर और टाइगर के करतब से प्रोग्राम शुरू हुआ। यह उसी तरह का एक शो था जैसे अपने देश के सर्कसों में होता है। उसके बाद कई और करतब थे जिसमें कई जानवरों के थे।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussapython.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussapython.jpg?w=165" alt="" border="0" /></a>एक करतब  में एक चाइनीज़ लड़की आयी। वह एक पहिये की साईकिल चला रही थी। यह भी अपने देश के प्रोग्राम की तरह था पर कुछ देर बाद  उस लड़की ने साइकिल सहित  रस्सी  कूदना शुरू किया। उसने अपने दोनों टांग से साइकिल  को पकड़ लिया था और जब वह ऊपर उछलती थी तो साइकिल भी  ऊपर उछलती थी और रस्सी नीचें से निकलती थी। वहाँ  एक मेज रखी थी। वह उसी तरह से कूदकर चढ़ती हुई मेज के ऊपर पहुँच गई। अपने देश में  मैंने इस तरह का करतब नहीं देखा है। इसमें कुछ करतब और भी देखे जिसे मैंने अपने देश में नही देखा है।</div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussaperformes.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussaperformes.jpg?w=165" alt="" border="0" /></a></div>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 135px"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussa1948poster.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussa1948poster.jpg?w=125&#038;h=165" alt="" width="125" height="165" border="0" /></a><p class="wp-caption-text">इस सर्कस का १९४८ का पोस्टर</p></div>
<p>इस सर्कस की खास बात यह लगी कि इसमे बहुत कम लोग थे। वही लोग टिकट चेक कर रहे थे, वही लोग जोकर बने हुए थे, और वही लोग सामान, जिस पर करतब दिखाते थे, उसको हटाते थे। मुझे आश्चर्य लगा कि इतने कम लोग इस सर्कस को चला रहे थे।</p>
<p>एक व्यक्ति कुछ संगीत बजा रहा था और शायद ३-४ लोग उसका सहयोग कर रहे थे जो करतब नहीं कर रहे थे। बाकी सब लोग जो लोग करतब करते थे वही लोग सर्कस में अन्य काम भी करते थे। इसमें कुछ चाइनीज़ युवतियां  भी थीं। वे जब करतब नहीं करती थी तो कपड़े बदलकर हम लोगों को  पंखे या खाने की  चीजें  बेचने के लिए इधर उधर घूम रही थीं।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussapretoriajoker.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussapretoriajoker.jpg?w=240&#038;h=320" alt="" width="240" height="320" border="0" /></a>इस सर्कस में एक इन्टरवल भी हुआ। उन्होंने इन्टरवल में सर्कस के सारे पोनीज़ आ गये। यह बहुत छोटे घोड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि  इन पर सवारी कर सकते हैं।  उस सर्कस मे जितने बच्चें थे वे सब उन पर सवारी करने के लिए पहुंच गये।  पोनीज़ ने सर्कस के अन्दर के  गोल घेरे का चक्कर लगाया जिसके लिए पांच रैंड देना पड़ा।</div>
<p>हमारे  देश में यदि शुरूवात ट्रेपीज़ के करतब से होती है तो अन्त शेर के करतब से। यहां प्रोग्राम,  शेरों के करतब से शुरू हुआ लेकिन ट्रेपीज के करतब  द्वारा इसका अंत नहीं हुआ। बल्कि अंत में दो जोकर आ गयें यह वही लोग थे जो बीच में करतब दिखा रहे थे। उन्होंने देखने वालों  से तीन महिलायें और एक पुरूष को लिया और चार कोने मे खड़ा कर दिया और एक बॉक्सिंग रिंग बनायी और बॉक्सिंग की ऎक्टिंग करते रहे।  इसी के साथ यह पूरा प्रोग्राम समाप्त हो गया।</p>
<p>सारा प्रोग्राम लगभग एक   घंटा ४० मिनट चला। सर्कस  देखकर मजा आ गया और  लगा कि ५० रैंड  वसूल हो गये।</p>
<h3 style="text-align:center;">अश्वेत लोग और गोरी मेम &#8211; वोट नहीं दे सकतीं</h3>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/apartheidmuseumjohannesburgsouthafrica.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/apartheidmuseumjohannesburgsouthafrica.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>साउथ अफ्रीका में हम लोग एक दिन प्रिटोरिआ से जॉहन्सबर्ग घूमने गये। वहां, सबसे महत्वपूर्ण देखने की जगह, रंगभेद सग्रंहालय (एपारथेड (Apartheid) म्यूज़ियम) है। यह सग्रंहालय बताता है कि साउथ अफ्रीका में किस तरह से भेदभाव होता था।</p>
<p>हम लोगों ने टिकट लिया जो कि तीस रैंड का था और साथ ही आडियो सहायता ली। आप जिस जगह पहुँचते है यह आडियो हेल्प अपने आप वहाँ पर लगे चित्रों के बारे में बताती थी। मुझे अच्छी सुविधा लगी इसके लिए हमें १५ रैंड देने पड़े थे। हलांकि हमारे अलावा कोई और लोग इस सुविधा का प्रयोग नहीं कर रहे थे। यह मुझे कुछ अजीब लगा।</p>
<p>हमारे साथ एक टैक्सी ड्राइवर भी था। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं यहां कई बार आया हूं पर मैंने इस संग्रहालय को नहीं देखा है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने अपनी पत्नी के साथ उसका टिकट भी लिया। कुछ टिकटों में काला सफेद और कुछ में सफेद लिखा हुआ था। यह टिकट इस बात के लिए नहीं दिए गये कि हम लोग काले या सफेद थे। यह टिकट यह समझानें के लिए दिया गया था किस तरह से काले और सफेद में भेदभाव किया जाता था। हम लोग अलग अलग रास्ते से अन्दर घुसे।</p>
<p>सग्रंहालय में पहली अजीब बात यह लगी कि इसमे लिखा हुआ था कि पहले वहाँ पर अश्वेत लोग और गोरी महिलायें वोट देने की अधिकारिणी नहीं थी। मैंने &#8216;<a href="http://unmukth.wordpress.com/2011/08/21/2007/10/24/women-empowerment-rights/">आज की दुर्गा &#8211; महिला सशक्तिकरण</a>&#8216; की कहानी लिखते समय, इसकी &#8216;<a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/03/blog-post_13.html">महिला दिवस</a>&#8216; की कड़ी में बताया था कि इस दिवस की शुरुवात महिलाओं को वोट दिलवाने के लिये ही शुरू हुई थी। यहां प्रत्यक्ष सबूत मिल गया।</p>
<p>इस संग्रहालय में सबसे अजीब बात यह थी इसमें महात्मा गांधी का एक भी चित्र नहीं है। सच तो यह है कि इस भेदभाव के खिलाफ उन्होंने यहां पर सबसे पहले लड़ाई लड़ी थी। इस संग्रहालय में उन्हें वह सम्मान नहीं दिया गया जो उन्हें मिलना चाहिए। वहाँ पर शिकायत दर्ज करने की कॉपी थी। मैंने उस पर आपत्ति दर्ज की। यदि आप अब वहाँ कभी जायें और महात्मा गाँधी का चित्र देखें तो वह मेरे ही कारण होगा <img src='http://s2.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/goldmine.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/goldmine.jpg?w=150&#038;h=200" alt="" width="150" height="200" border="0" /></a></p>
<div style="text-align:right;"><em>संग्रहालय के बगल में, पुरानी बन्द सोने के खान का प्रवेश द्वार &#8211; यहां यह देखा जा सकता है कि सोना कैसे निकाला जाता था।</em></div>
<p>इस संग्रहालय में अजीब तरह की भावनायें मन में आती हैं। मैं वहाँ न जाता तो शायद साउथ अफ्रीका की यात्रा अधूरी रहती।</p>
<p>जॉहन्सबर्ग में महात्मा गांधी की मूर्ति है। सग्रंहालय देखने के बाद हम वहाँ गये। हमारे टैक्सी ड्राइवर को यह जगह नहीं मालूम थी । हम लोगों ने जब उससे कहा कि हम यहां जाना चाहते है तो उसने आसपास के कुछ लोगों से पूछा उसके बाद में वह हमें वहां ले गया। उसने बताया ,</p>
<blockquote><p>&#8216;मै वहां से अक्सर गुजरता हूं और मुझे नहीं मालूम था कि यह जगह महात्मा गांधी स्क्वैर के नाम से जाना जाता है।&#8217;</p></blockquote>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/mahatmagandhistatuejohansburgsa.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/mahatmagandhistatuejohansburgsa.jpg?w=150&#038;h=200" alt="" width="150" height="200" border="0" /></a></div>
<div><em>महात्मा गांधी स्क्वैर पर मूर्ति</em></div>
<p>वह हमें वहां एक जगह ले कर गया। वहां पर एक मूर्ति थी। उसने कहा कि यही जगह महात्मा गांधी स्क्वैर है। हमें वह मूर्ति महात्मा गांधी की मूर्ति नहीं लगी। मैंने कहा कि लगता है कि हम कुछ गलत जगह आयें है पर मूर्ति के नीचे पढ़ने पर पता चला कि यह महात्मा गांधी की ही मूर्ति है। यह मूर्ति उनके उस उम्र की है जब वे साउथ अफ्रीका में थे। यह उनके जवान समय की है। यही कारण है कि हम उसे नहीं पहचान पायें ।</p>
<p>गाड़ी से उतर कर हमनें टैक्सी ड्राइवर से कहा कि हमें १० मिनट के बाद आकर ले लेना क्योंकि वहां पर कोई रूकने की जगह नहीं थी। जिस समय हम उस मूर्ति का चित्र ले रहे थे तब पुलिस जैसा व्यक्ति हमारे पास आया। वह अपने को सिक्योरिटी का आदमी बता रहा था और उसी तरह के कपड़े पहने था। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप चित्र नहीं ले सकते है और आपको इसके लिए अनुमति लेनी पड़ेगी।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने उससे कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;दुनिया में ऎसा कहीं नहीं होता कि किसी सार्वजनिक मूर्ति का चित्र लेने के लिए किसी के अनुमति जरूरत हो।&#8217;</p></blockquote>
<p>लेकिन वह नहीं माना। हम वहां उससे लड़ना नहीं चाहते थे क्योंकि यह नया देश था और वहां पर झंझट पालना ठीक नहीं था। हमनें पूछा कि अनुमति कहां से मिलेगी तो उसने मुझे एक इमारत की तरफ इशारा करके बताया कि वहां मिलेगी।</p>
<p>हम लोग पैदल चलकर उस इमारत के पास गये। वहां पर पहरेदार ने हमसे इमारत के दूसरी तरफ से १३वीं मंजिल पर जाकर अनुमति लेने की बात बतायी। हम लोग इमारत के दूसरी तरफ गये। वहां लिफ्ट ग्यारहवें तल तक जाती थी। इसलिए ग्यारहवें तल तक लिफ्ट से, उसके बाद सीढी चढ़ कर गये।</p>
<p>ऊपर एक बहुत अच्छा सा ऑफिस था। यहाँ पर स्वागत कक्ष मे बैठी महिला से वहाँ जाने के कारण बताया। उसने किसी अन्य महिला से बात करने को कहा। यह काफी सभ्रांत महिला लग रही थी जो अपने चालीस के दशक में होगी। हमने बताया, हम लोग भारत से आयें है, हम महात्मा गाँधी की मूर्ति की फोटो लेना चाहते हैं, कोई व्यक्ति ऎसा करने से मना कर रहा हैं, <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/permissiontotakepictureofgandhistatue.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/permissiontotakepictureofgandhistatue.jpg?w=200&#038;h=197" alt="" width="200" height="197" border="0" /></a></p>
<blockquote>
<div>&#8216;आपसे इसकी लिए अनुमति लेने की बात की है।&#8217;</div>
</blockquote>
<p>उस महिला ने कहा कि यह सच है कि आपको इसके लिए अनुमति लेनी पड़ेगी। उसने ऑफिस में बात कर यह अनुमित हमें दी। मुझे यह बहुत अजीब बात लगी। हमनें वापस आकर उस मूर्ति के कुछ चित्र लिए।<br />
<em></em></p>
<p style="text-align:right;"><em>महिला के द्वारा दी गयी अनुमति। इसमें उसका मोबाइल नम्बर भी था। वह मैंने हटा दिया है। </em></p>
<p>प्रिटोरिआ में मेरे मित्रों ने उसी रात पर हमें भोजन पर बुलाया था। उसने वहाँ के लोगों को भी मुझसे मिलने के लिए भी बुलाया था। मैने रात में वहाँ जब लोगों को यह बात बतायी तो उन्हे आश्चर्य हुआ। उनका कहना था कि उन्हें आश्चर्य है कि इमारत के दूसरी तरफ जाने पर किसी ने हमें लूट नहीं लिया। उनके मुताबिक वहाँ पर कोई अपना कैमरा नहीं निकलता क्योंकि उसके छिन जाने का भय रहता है।</p>
<p>इस रात्रि के भोजन पर सारे लोग श्वेत लोग थे। उन्होंने रंगभेद सग्रंहालय के बारे में मेरी राय जाननी चाही। मैने उन्हें महात्मा गाँधी के चित्र का न होने की कमी बतायी। उन लोगों का कहना था इसमें कई कमियां है। मुझे लगा कि वे लोग इस संग्रहालय से प्रसन्न नहीं हैं।</p>
<h3 style="text-align:center;">मैं, प्रिटोरिआ से ज्यादा, बम्बई की सड़को पर सुरक्षित महसूस करती हूं</h3>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/highcourtpretoria.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/highcourtpretoria.jpg?w=225" alt="" border="0" /></a> प्रिटोरिया में यदि आप किसी से पूछें कि यहां घूमने की क्या जगह है तो वे बतातें हैं कि यहां पर यूनियन बिल्डिंग देखने के अतिरिक्त कोई भी घूमने की जगह नहीं है।</p>
<div> <em> </em></div>
<div style="text-align:right;"><em>प्रिटोरिआ में उच्च न्यायालय</em></div>
<p>हम लोग यूनियन बिल्डिंग देखने जाने से पहले, वहाँ पर उच्च न्यायालय को देखने गये। वहां उस कक्ष को भी देखा, जिसमें नेलसन मण्डेला को सजा दी गयी थी। वहां के लोगों के मुताबिक महात्मा गांधी इसी हाई कोर्ट के द्वारा अर्टानी बनाये गये थे और वह यहां अक्सर आकर मुकदमों की बहस करते थे।</p>
<p>उच्च न्यायालय को देखने के बाद हम लोग वहां के यूनियन बिल्डिंग  देखने के लिए गये।  यहां पर साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति रहते हैं। यह  बहुत सुन्दर है।</p>
<p>यूनियन बिल्डिंग के सामने से  एक सड़क जाती है उसके सामने एक बहुत बड़ी जगह है जिसमें बगीचा है। यह भी बहुत सुन्दर है।<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/unionbuildingpretoria.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/unionbuildingpretoria.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></p>
<div> <em> </em></div>
<div><em>यूनियन बिल्डिंग</em></div>
<p>अपने देश मे राष्ट्रपति भवन में जो बगीचा है उसे आप हर समय  नहीं देख सकतें हैं। वह कुछ समय के लिए ही सबके लिए खुलता है । यह भी कुछ देश के राष्ट्रपति के बगीचे की तरह जगह है लेकिन यह पूरी खुली जगह है। वहां पर घूमते हुए, हमारी मुलाकात एक भारतीय दम्पत्ति से हुई। मैंने उससे  पूछा की शाम  को  हम वहाँ क्या कर सकते हैं। उन्होंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यहां पर शायद  शाम में कुछ नहीं हो सकता है। आप एक फ्रीडम पार्क देख सकते हैं लेकिन  उसके लिए वहाँ  दिन में ही जाया जा सकता हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p><em> </em>कुछ देर बातचीत करने के बाद हमने उनसे पूछा कि क्या आप गुजराती हैं।  महिला ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;भारत से दो तरह के लोग आये। एक तो मजदूर के रूप में। ये लोग मुख्यत: बिहार और उत्तर भारत के थे। दूसरे लोग गुजरात से आये जो छोटा मोटा व्यापार करने के लिए वहां पहुंचे थे। मेरे  बाबा उत्तर प्रदेश  के थे और दादी बिहार की थीं। वे लोग मजदूर  के रूप में आये थे।&#8217;</p></blockquote>
<div> मैंने उनसे ऎसे ही पूछा कि यहां पर बहुत सफाई है। यहां पर टैक्सी और कारें कानून का पालन करते है। मालूम नहीं क्यों लोग कहते है कि यहां पर कानून की व्यवस्था खराब है। उस महिला ने जवाब दिया।</div>
<blockquote><p>&#8216;मैं जब बम्बई की सड़क पर घूमती हूं तो मैं अपने को ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हूं । मेरी तीसरी पीढ़ी है उसके बावजूद भी साउथ अफ्रीका की सड़क पर अपने आपको बिल्कुल सुरक्षित नहीं महसूस  करती हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>हम लोग वापस अपने होटल आ गये। हमें अगले दिन भारत के लिए वापस चलना था।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/unionbuildinggardenpretoria.jpg"><img class="aligncenter" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/unionbuildinggardenpretoria.jpg?w=407&#038;h=305" alt="" width="407" height="305" border="0" /></a></div>
<div style="text-align:center;"><em>यूनियन बिल्डिंग के सामने का बगीचा</em></div>
<p>अगले दिन सुबह, हम प्रिटोरिया से जॉहन्सबर्ग आये। वहीं साउथ अफ्रीकन एयरलाइन्स की उड़ान पकड़ कर, रात में मुम्बई पहुँचे। रात को वहीं विश्राम किया। अगले दिन अपने कस्बे आ गये।</p>
</div>
<p style="text-align:center;"><em>यह यात्रा विवरण मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।</em></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/12/ways-to-reach-south-africa.html">झाड़ क्या होता है? &#8211; अफ्रीकन सफारी पर</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/01/south-african-airways-hostess.html">साउथ अफ्रीकन एयर लाइन्स और उसकी परिचायिकायें</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/01/johannesburg-airport-pretoria-passage.html">मान लीजिये, बाहर निलते समह, मैं आपका कैश कार्ड छीन लूं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/01/south-africa-crime-reason.html">साउथ अफ्रीका में अपराध &#8211; जनसंख्या अधिक और नौकरियां कम</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/01/pretoria-krugar-park-journey.html">यह मेरी तरफ से आपको भेंट है</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/02/kruger-national-park.html">क्रुगर पार्क की सफाई देख कर, अपने देश की व्हवस्था पर शर्म आती है</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/02/life-style-south-africa.html">हम दोनो व्यापार कर बहुत पैसा कमा सकते हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/02/kruger-park-animals-south-africa-1.html">फैंटम टार्ज़न &#8230; यह कौन हैं?</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/03/indians-afraid-of-cats-but-not-of-dogs.html">हिन्दुस्तानी, बिल्लियों से क्यों डरते हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/03/sex-indian-public-rhinoceros-africa.html">आपको तो शर्म नहीं आनी चाहिये</a>।।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/03/lion-hyena-rasmus-kruger-park-south.html">लगता है, आप मुझे जेल भिजवाना चाहती हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/04/graskop-gorge-south-africa.html">ऐसा करोगे तो, मैं बात करना छोड़ दूंगी</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/04/lisbon-falls-gods-window-sa.html">भगवान की दुनिया &#8211; तभी दिखायी देगी जब उसकी खिड़की साफ हो</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/04/pilgrims-rest-south-africa.html">सर, पिछली रात, आपने जूस का पैसा नहीं दिया</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/04/dullstroom-fly-fishing-south-africa.html">मैंने, आज तक, यहां हवा में कूदती हुई मछलियां नहीं देखी हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/05/boswell-circus-south-africa.html">आश्चर्य &#8211; सर्कस को चलाने वाले, इतने कम लोग</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/05/johannesburg-places-to-visit-south.html">अश्वेत लोग और गोरी मेम &#8211; वोट नहीं दे सकतीं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/05/pretoria-south-africa-union-building.html">मैं, प्रिटोरिआ से ज्यादा, बम्बई की सड़को पर सुरक्षित महसूस करती हूं</a>।।</p>
<div style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</div>
<div style="text-align:left;">। <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kruger_National_Park">Kruger National Park</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/South_Africa">south africa</a>, साउथ अफ्रीका, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Johannesburg">Johannesburg</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Pretoria">Pretoria</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/South_African_Airways">साउथ अफ्रीका एयरवेज़</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/The_Phantom">Phantom</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Tarzan">Tarzan</a>,</div>
<div style="text-align:left;">। जीवन, life-style,</div>
<div>। <a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, <a href="http://www.google.co.in/search?q=%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80+%E0%A4%95%E0%A5%87+%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%87&amp;ie=utf-8&amp;oe=utf-8&amp;aq=t&amp;rls=com.ubuntu:en-US:official&amp;client=firefox-a">मस्ती के लिये</a> सैर सपाटा, <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>, <a title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा विवरण </a>, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</div>
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		<title>सिक्किम – छोटा मगर सुन्दर</title>
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		<pubDate>Sat, 05 Feb 2011 12:30:58 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[Full Articles]]></category>
		<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में हमारी सिक्किम और कालिम्पॉङ यात्रा का वर्णन है। This post is about our our visit to Sikkim and Kalinpong. is post per hamari sikkim aur kalinpong yatra ka varnan hai.<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=592&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em>इस चिट्ठी  में, हमारी सिक्किम </em><em>और कालिम्पॉङ </em><em>यात्रा का वर्णन है। </em></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/stoneredironoxygen.jpg"><img src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/stoneredironoxygen.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></p>
<p><span id="more-592"></span>सिक्किम राज्य भारत के  उत्तर पूर्व में है। यह हमारे साथ १९७५ में जुड़ा।</p>
<p>सिक्किम भारत का दूसरा सबसे छोटा प्रदेश है। <a href="http://unmukth.wordpress.com/2008/10/19/goa-india/">गोवा</a> (Goa) इससे छोटा प्रदेश है सिक्किम क्षेत्रफल ७ हजार वर्ग किलोमीटर है। इसकी जनसंख्या सारे राज्यों से कम, केवल ५,४०,००० है। इसके पश्चिम में <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Nepal">नेपाल</a>, उत्तर में <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Tibet">तिब्बत</a>, पूरब में <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Bhutan">भूटान</a>, और दक्षिण में <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/West_Bengal">पश्चिम बंगाल</a> का दार्जिलिंग जिला है। सिक्किम में चार जिले हैं &#8211; उत्तर, पूरव, दक्षिण, और पश्चिम।</p>
<p>सिक्किम घूमते समय, हमें पर्यटन विभाग के द्वारा जगह, जगह पर सिक्किम के बारे में कुछ जुमले लिखे दिखे। कहीं लिखा हुआ था &#8211; &#8216;छोटा और सुन्दर&#8217; (Small &amp; beautiful) तो कहीं लिखा हुआ था &#8216;छोटा मगर सुन्दर&#8217; (Small but beautiful), इन दोनो में मुझे तो &#8216;छोटा मगर सुन्दर&#8217; जुमला ज्यादा भाया।<br />
<a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SFueEea72nI/AAAAAAAAAmk/IBGylYzY8-M/s1600-h/Sikkim+Pocket+Guide+F.jpg"><img class="alignleft" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SFueEea72nI/AAAAAAAAAmk/IBGylYzY8-M/s200/Sikkim+Pocket+Guide+F.jpg" border="0" alt="" /></a><br />
सिक्किम पहाडियों और पेड़ों से हरा भरा सुंदर जगह है। यहां अलग अलग सभ्यता और संस्कृति के लोग रहते हैं।   लिम्बू (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Limbu_people">Limbu</a>), लेपचा (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Lepcha_people">Lepcha</a>), और भूटिया (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Bhutia">Bhutia</a>) यहां के मूल निवासी हैं। <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Nepali_people">नेपाली</a> और और <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Tibetan_people">तिब्बती</a> भी यहां बस गये हैं।</p>
<p>यहां पर हम लोगों ने सिक्किम के ऊपर एक पॉकेट गाइड ली। यह गाइड माइलस्टोंस (Millstones) के द्वारा प्रकाशित है। यह सिक्किम के बारे में अच्छी सूचना देती है। आप कभी सिक्किम जाने की सोचें तो इस पुस्तक को पढ़ लें। हालांकि इसमे बताई गई हर जगह में देखने के लिए न तो समय है और शायद न ही जरूरत।</p>
<h3 style="text-align:center;">गैंगटॉक कैसे पहुंचें</h3>
<p>गैगंटॉक सिक्किम की राजधानी है। यहां पहुंचने के दो तरीके है। <a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SGbffdunRcI/AAAAAAAAAnc/RseLiVKqam0/s1600-h/sikkim+green.JPG"><img class="alignright" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SGbffdunRcI/AAAAAAAAAnc/I1PLOxElCQ4/s320-R/sikkim+green.JPG" alt="" width="320" height="240" /></a><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SGbffdunRcI/AAAAAAAAAnc/RseLiVKqam0/s1600-h/sikkim+green.JPG"> </a></p>
<ul>
<li>हवाई जहाज से बागडोगरा फिर कार या हेलीकाप्टर से गैंगटॉक</li>
<li>रेल से जलपाईगुड़ी तक फिर कार से गैंगटॉक</li>
</ul>
<div style="text-align:right;"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SGbffdunRcI/AAAAAAAAAnc/RseLiVKqam0/s1600-h/sikkim+green.JPG"> </a><em>हरा-भरा सिक्किम</em></div>
<p>हम लोग बागडोगरा तक इण्डियन एयरलाइंस के हवाई जहाज से आये। हवाई जहाज में चढ़ते समय, हमें हाथ, एवं मुँह साफ करने के लिए रूमाल तो मिला पर टॉफी नहीं मिली। मैनें परिचायिकाओं से पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;टॉफियां कहाँ है?&#8217;</p></blockquote>
<p>उन्होंने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;प्रबंध समिति ने टॉफियां न बाटनें का निर्णय लिया है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मेरे विचार से यह निर्णय ठीक नही है। इसमें ज्यादा पैसा खर्च नही होता पर लोग प्रसन्न रहते है। हम लोग ज्यादा टाफियां जेब में रख लेते थे और बाद में आराम से खाते रहते थे। लगता है कि यह अब नही हो सकेगा, इसके लिए किसी दूसरी एयर लाइन्स से उड़ान भरनी पड़ेगी।<a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SGbgFjRg_JI/AAAAAAAAAnk/V-N-5WPi6Oc/s1600-h/Sikkim+water+river.JPG"><img class="alignleft" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SGbgFjRg_JI/AAAAAAAAAnk/0KmeqQIOCDQ/s320-R/Sikkim+water+river.JPG" alt="" /></a> <em> </em></p>
<p>परिचारिकायें नीली और नारंगी रंग साड़ियां पहने थी। मैने पूछा कि क्या कोई नियम है कि कौन किस रंग की साड़ी पहनेगा। उसने बताया कि कोई नियम नहीं है पर उन्हें उन दो में से, किसी एक रंग की साड़ी पहनना होता है। जिसे जो रंग पसंद है वह उस रंग की साड़ी पहन सकती है।</p>
<p><em>नदियों और झरनों से भरपूर &#8211; सिक्किम</em></p>
<p>परिचारिकायें, हवाई जहाज पर जबान -तोड़ अंग्रेजी में बात कर रही थीं। उतरते समय भी उन्होंने अंग्रेजी में धन्यवाद और विदा ली। मेरे हिन्दी में कहे &#8216;नमस्ते&#8217; पर जरा शर्मिदगी से भरी मुस्कराहट अवश्य दी।</p>
<p>बागडोगरा एयर पोर्ट से गैगंटॉक लगभग १२५ किलोमीटर है पर पहाड़ी रास्ते के कारण लगभग ४ घण्टें लगते है। हम लोगों ने बागडोगरा हवाई अड्डे से गैगंटॉक के लिये टैक्सी पकड़ी। हमारा टैक्सी ड्राइवर मजेदार व्यक्ति था। वह रास्ते भर बात करता रहा।</p>
<h3 style="text-align:center;">टिस्ता नदी (सिक्किम) पर बांध बने अथवा नहीं</h3>
<p>हम लोगो ने बागडोगरा हवाई अड्डे से, गैगंटॉक के लिये, टैक्सी ली। रास्ता टिस्ता (teesta) नदी के बगल से चलता है। कभी नदी नीचे हो जाती थी तो कभी हम लोगों के साथ। हम लोगों ने रास्ते में एक रेस्ट्राँ में चाय पी । वहाँ पर बहुत से लोग बेड़ा विहार (Rafting) रैफ्टिंग कर रहे थे। वहां इसके अतिरिक्त कुछ और नही थी । इसलिए मैंने पूछा</p>
<blockquote><p>&#8216;यहां कौन लोग बेड़ा विहार करते हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>होटल के मालिक ने बताया</p>
<blockquote><p>&#8216;गैंगटॉक या कलिगंपॉङ जाते समय अथवा  लौटते समय, पर्यटक यहां बेड़ा विहार करते है।&#8217;</p></blockquote>
<p><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SHYivJGu8UI/AAAAAAAAAoE/QisJVLZm3KY/s1600-h/Dam+Teesta+west+bengal.JPG"><img class="alignright" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SHYivJGu8UI/AAAAAAAAAoE/4rtvAtJ5aV8/s320-R/Dam+Teesta+west+bengal.JPG" alt="" /></a>वहां कपड़े बदलने की सुविधा है। लौटते समय, कुछ लोग वहां पर रात को  भी रूकते हैं और दिन में निकल कर हवाई जहाज या ट्रेन पकड़ते हैं।</p>
<p>रास्ते में टिस्ता (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Teesta_River">teesta</a>) नदी पर  बांध बनता दिखाई पड़ा। टैक्सी ड्राइवर ने बताया कि टिस्ता नदी पर कई बांध बन रहे हैं दो पश्चिमी बंगाल में है और कुछ सिक्किम में है। यह डैम अलग-अलग शक्ति की बिजली पैदा करेगें।   हम लोग पांच बजे गैगंटॉक पहुंच गये।</p>
<p>गैंगटॉक पहुंच कर कुछ देर आराम किया फिर बाजार घूमने गये। रास्ते में, एक जगह कुछ लोग डेरा जमा रखा था। वे लोग उत्तर सिक्किम में टिस्ता नदी पर बन रहे बांध का विरोध कर रहे थे। मैने उनसे बात की। उन्होनें बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;हमारे गांव के अधिकतर लोग अनपढ़ है और लोग खेती करते हैं। जब डैम बनेगा तो हमारा गांव डूब जायेगा और हम लोग बेघर हो जायेगें। सरकार विस्थापित लोगों को नौकरी देने की बात कर रही है पर यह नौकरी केवल चपरासी की होगी।&#8217;</p></blockquote>
<p>उनका यह भी कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह   डैम कञ्चनजङ्घा राष्ट्रीय उधान (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Khangchendzonga_National_Park">Khangchendzonga National Park</a>) में है और कानूनन नही बनाया जा सकता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>यह लोग अंगेजी मे बात कर रहे थे मैने पूछा की</p>
<blockquote><p>&#8216;आप लोग अंगेजी में बात कर रहे है । आप  तो पढ़े लिखे लगते है।&#8217;</p></blockquote>
<p>उन्होनें कहा कि गांव में उनके जैसे बहुत कम लोग है। मैंने उनसे उनके आंदोलेन के बारे में लिखित सूचना मांगी तब उन्होने कहा कि वह तो नहीं है पर वे लोग चिट्ठा लिखते है। मेरे विचार में वह लोग स्वयं चिट्ठा नही लिखते है पर उनके लिए कोई और लिखता है। क्योंकि जब मैने उनसे पूछा कि वह मुफ्त चिट्ठा लिखने देने की बेबसाइट पर है या उन्होनें कोई डोमेन लिया है। वे इसका ठीक से उत्तर नही दे पाये।</p>
<div><a href="http://bp1.blogger.com/_-_ENIsSR7Yo/SFvS66kxvJI/AAAAAAAABjs/VJ9Rx2Jla2s/s1600/Picture+017.jpg"><img class="alignright" src="http://bp1.blogger.com/_-_ENIsSR7Yo/SFvS66kxvJI/AAAAAAAABjs/VJ9Rx2Jla2s/s320/Picture+017.jpg" alt="" /></a>मुझे बाद में पता चला कि उनका चिट्ठा ब्लॉगर पर है और उसका नाम <a href="http://www.weepingsikkim.blogspot.com/">ani sikkim runcha&#8230;.</a> है।</div>
<div style="text-align:right;"><em>अनशन पर बैठे, उन लोगों का  चित्र उनके चिट्ठे से है। </em></div>
<p>बांध बनाया जाय अथवा नहीं का निर्णय &#8211; अक्सर विवाद में आ जाता है। नर्बदा परियोजना, टेहरी बांध, इसके जीते जागते उद्धाहरण हैं। जल विद्युत-घर के कारण, पर्यावरण का भी नुकसान होता है लेकिन यह थर्मल विद्युत-घर और नाभिकीय-विद्युत घर के मुकाबले, बहुत कम है। बांध के द्वारा पानी का संरक्षण ठीक से किया जा सकता है, बिजली पैदा की जा सकती है। यदि यह न हो तो विकास ही रुक जाये।</p>
<p>बांध बनाने में सबसे बड़ी मुश्किल पुनर्वास की है। इसमें न केवल भ्रष्टाचार है पर कुछ लोग भावनाओं को उभार कर ब्लैक मेल भी करते हैं। मैं नहीं जानता कि टिस्ता नदी पर बन रहे डैम के लिये क्या बात सही है।</p>
<h3 style="text-align:center;">नाथुला पास – भारत चीन सीमा</h3>
<p>नाथुला पास पर भारत चीन की सीमा है। रास्ते में कुछ अन्य दर्शनीय जगहें हैं पर सबसे दूर नथुला पास है। टैक्सी ड्राइवर की सलाह थी कि हम सबसे पहले दूर की जगह को देख लें और लौटते समय अन्य जगहों को देख लेगें। बचपन में परीक्षा देते समय उल्टी बात रहती है कि पहले आसान सवाल का जवाब लिखो फिर कठिन सवाल का।</p>
<div><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr7c2XKIlI/AAAAAAAAApA/ioZBAimF8Jg/s1600-h/rest+room+onway+to+natu+la.JPG"><img class="alignleft" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr7c2XKIlI/AAAAAAAAApA/1xd4FAir3Ds/s320-R/rest+room+onway+to+natu+la.JPG" alt="" width="242" height="182" /></a></div>
<div>नथुला पास जाने के लिए परमिट की जरूरत पड़ती है। इसे अलग-अलग चेक पोस्ट पर दिखाना पड़ता है। एक चेक पोस्ट पर जब हम पास दिखाने के लिए रूके तब मुझे शंका निवारण की आवश्यक्ता पड़ी। वहां पर एक सार्वजानिक शौचालय था। यहां शंका निवारण के लिए २ रूपया देना पड़ता है। मुझे अपनी बर्लिन यात्रा की याद आयी <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/01/what-to-see-in-berlin-city.html">जहां</a> इसी के लिए ५० सेन्ट (लगभग ३० रूपये) देने पड़े थे। इस जगह जाकर मुझे आश्चर्य हुआ क्योंकि मैने इतना साफ सार्वजानिक शौचालय नहीं देखा था। मुझे इस बात से कुछ प्रसन्नता भी हुई।</div>
<div>मैंने शौचालय की देख रेख करने वाले व्यक्ति से, उसकी तारीफ की तो वह नहीं समझ पाया। टैक्सी ड्राइवर ने उस व्यक्ति को उसकी भाषा में यह समझाया तो उसने मुस्कुरा कर तारीफ स्वीकार की।</div>
<p><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr8Ccmnh1I/AAAAAAAAApI/8dxftrDm5Ug/s1600-h/soldier+meorial+nathula+pass.JPG"><img class="alignright" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr8Ccmnh1I/AAAAAAAAApI/GREeVm0dks8/s320-R/soldier+meorial+nathula+pass.JPG" alt="" width="233" height="175" /></a>नथुला पास पर एक यादगार चिन्ह बना हुआ है। यह मार्च २००२ में बनाया गया था। यहां पर गार्ड ने मुझे बताया कि यह १९६२ में भारत -चीन लड़ाई और बाद के अन्य हादसों में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के यादगार में बनाया गया है। इसके ऊपर कुछ ऊपर चढ़ने पर एक जगह पत्थर जड़ा हुआ है जिसमे लिखा हुआ है कि जवाहर लाल नेहरू १ सितम्बर १९५८ को यहां आये थे।</p>
<div><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr6HWzRX4I/AAAAAAAAAow/14009DOz4_M/s1600-h/chinese+soldiers+nathula+pass.JPG"><img class="alignleft" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr6HWzRX4I/AAAAAAAAAow/388pJOX7fCI/s320-R/chinese+soldiers+nathula+pass.JPG" alt="" width="220" height="165" /></a></div>
<p>भारत की सीमा पर सबसे ध्यान देने की बात यह थी कि वहां पर सैकड़ो हिन्दुस्तानी पर्यटक थे पर चीन की तरफ एक भी पर्यटक नहीं था। वहां पर केवल चीनी सैनिक थे। मैंने चीनी सैनिकों से हाथ भी मिलाया।</p>
<p>यहां से चीन में बनी रोड भी दिखाई पड़ती है और चीन में बनी रोड और अपने देश में बनी रोड में जमीन आसमान का अंतर दिखायी पड़ता है। जहां पर चीन की तरफ बनी हुई रोड एक बहुत ही सुन्दर, बेहतरीन और चौड़ी है जिसमें दो गाड़ी असानी से आ-जा सकती हैं। वहीं भारत की तरफ बनी रोड सकरी और कई जगह टूटी फूटी थी। सकरी होने के कारण जब आर्मी की ट्रकें आमने -सामने आ जाती थी तो लम्बा जाम फंस जाता था जिसे हटाने में काफी समय लगता था। नथुला पास से लौटते समय पानी भी बरसने लगा जिसके कारण रोड पर जगह जगह नाले से बन गये और पानी इक्टठा हो गया।</p>
<div><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr6r9b9N3I/AAAAAAAAAo4/4ivU3rmYH3w/s1600-h/Chinese+road+nathula+pass.JPG"><img class="alignright" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr6r9b9N3I/AAAAAAAAAo4/lKdXvxjCmFI/s320-R/Chinese+road+nathula+pass.JPG" alt="" width="246" height="185" /></a></div>
<p>अपने देश और चीन  की  रोड देखकर मुझे  शर्म लगी। मैंने वहाँ पर एक गार्ड से पूछा कि ऎसा क्यों है। उसने मुस्कुरा कर कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;हमारी तरफ तो पर्यटकों की भीड़ है। यह लोग, यहाँ पर आकर न केवल समय बर्बाद करते हैं पर उनके आवागमन से रोड भी खराब होत है। चीन की तरफ देखिये, उधर एक भी पर्यटक नही हैं। वे लोग इन सब बातों में समय बर्बाद नहीं करते। भीड़ कम होने के कारण उनकी सड़के भी कम खराब होती है और उनके रख रखाव में आसानी पड़ती है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मुझे लगा कि यदि कभी फिर भारत-चीन से युद्व हुआ (जिसकी सम्भावना सें इंकार नही किया जा सकता) तब इन सड़कों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।</p>
<p>मेरे विचार से यह जगह पर्यटकों के जाने के लिए कुछ समय तक के लिए बंद कर देनी चाहिये ताकि कि हम रास्ते को कम से कम की चीन की तरफ की के रास्ते बराबर बना सकें और विवाद या लड़ाई के समय उनसे पीछें न रहें। लेकिन रास्ता शायद यह बंद करना सम्भव न हो क्योंकि सिक्किम में पैसा कमाने का सबसे बड़ा साधन पर्यटन है और सिक्किम का पर्यटन विभाग नथुला पास घूमने को विज्ञापित करती है कि आप वहां जाएं और देखें कि हमारे देश के सैनिक किस तरह से सीमाओं की रक्षा कर रही है। इसी कारण वहाँ पर भारतीय पर्यटकों की भीड रहती है। इससे लोगों को व्यापार का साधन मिल रहा है। यदि वहां पर्यटकों का जाना रोका जायेगा व्यापार करने के तरीके में कमी आयेगी।</p>
<h3 style="text-align:center;">क्या ईसा मसीह सिल्क रूट से भारत आये थे</h3>
<div style="text-align:center;"><strong>सिल्क रूट क्या है?</strong></div>
<div><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SJUSlmBj4jI/AAAAAAAAApY/jopLezM0FuU/s1600-h/Silk+route.jpg"><img class="alignleft" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SJUSlmBj4jI/AAAAAAAAApY/w1cAQQsrrNE/s200-R/Silk+route.jpg" alt="" /></a>पुराने समय में चीन भारत और पश्चिमी देशों के बीच रेश्म का व्यापार हुआ करता था। यह कई रास्तों से जाता था। इन्हें &#8216;सिल्क रूट&#8217; कहा जाता था। इसमें एक रास्ता नथुला पास होकर जाया करता था। १९६२ में, भारत &#8211; चीन युद्व के बाद यह रास्ता बंद कर दिया। यह पुन: ६ जुलाई २००६ में खोला गया। इस रास्ते से पुनः व्यापार हो रहा है। हमें वहां चीन के कई ट्रक मिले जिसमें चीन से समान भारत आया था।</div>
<p><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SJUSC-XMMfI/AAAAAAAAApQ/kFuK-ehocIQ/s1600-h/Certificate+Natu+la.jpg"><img class="alignright" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SJUSC-XMMfI/AAAAAAAAApQ/8ZPa96mn4BQ/s200-R/Certificate+Natu+la.jpg" alt="" /></a><br />
नथुला पास जाने पर ५० रुपये में आप को सर्टिफिकेट मिल सकता है कि आप नथुला पास गये थे। यह कोई भी बनवा सकता है। आपको केवल पैसे देने पड़ते हैं आप जो नाम चाहें वह दे सकते हैं। देखिये अब तो आपको विश्वास हो गया न कि मैं भी वहां गया था। यह सर्टिफिकेट एक सुन्दर से फोल्डर के अन्दर रख कर मिलता है।</p>
<p>इस फोल्डर के अन्दर के हिस्से में सिल्क रूट का नक्शा बना है और इसके बारे में सूचना लिखी है।</p>
<div style="text-align:center;"><strong>क्या ईसा मसीह ही  सेंट ईसा (Saint Issa) थे और भारत आये थे?</strong></div>
<p><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SJUS17yL0UI/AAAAAAAAApg/FaH_b3BZe-c/s1600-h/Nicolas+Notovich.jpg"><img class="alignleft" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SJUS17yL0UI/AAAAAAAAApg/_z8cDcIzRis/s320-R/Nicolas+Notovich.jpg" alt="" width="153" height="219" /></a>निकोलस नोतोविच (<a title="Nicolas Notovitch" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Nicolas_Notovitch">Nicolas Notovitch</a>) एक रूसी अन्वेषक था। उसने कुछ साल  भारत में बिताये। बाद में, उन्होने फ्रेंच भाषा में &#8216;द अननोन लाइफ ऑफ जीज़स क्राइस्ट&#8217; (<a href="http://reluctant-messenger.com/issa1.htm">The unknown life of Jesus Christ</a>) नामक पुस्तक लिखी है।</p>
<p><em>निकोलस नोतोवच का चित्र <a href="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/en/thumb/6/68/NNotovich150.jpg/180px-NNotovich150.jpg">विकिपीडिया</a> से</em></p>
<p>निकोलस के मुताबिक यह पुस्तक हेमिस बौद्घ आश्रम (<a title="Hemis Monastery" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Hemis_Monastery">Hemis Monastery</a>) में रखी पुस्तक (The life of saint Issa) पर आधारित है। उस समय हेमिस बौद्घ आश्रम लद्दाक के उस भाग में था जो कि भारत का हिस्सा था। हांलाकि इस समय यह जगह तिब्बत का हिस्सा है। यह आश्रम इसी तरह के सिल्क रूट पर था।</p>
<p>यह रहस्य की बात है कि ईसा मसीह ने १३ साल से ३० साल तक क्या किया। इस पुस्तक के आधार  पर निकोला का कहना है कि,</p>
<ul>
<li>इन सालों में ईसा मसीह सिल्क रूट के द्वारा भारत आये थे</li>
<li>उन्होंने यहां में बौद्घ धर्म पढ़ने में बिताया,</li>
<li>उसके बाद बौद्घ धर्म से प्रेरित होकर धर्म की शिक्षा दी।</li>
</ul>
<p>मुझे धर्म के बारे में कम ज्ञान है में नहीं जानता कि बौद्घ धर्म और इसाई धर्म में संबंध है अथवा नहीं। मैं इतिहास का भी अच्छा जानकार नहीं हूं। मैं नहीं कह सकता कि,</p>
<ul>
<li>यह कहानी सच है अथवा नहीं?</li>
<li>ईसा मसीह वास्तव भारत आए थे अथवा नहीं?</li>
<li>ईसा मसीह ने बौद्घ धर्म की शिक्षा ली थी अथवा नहीं?</li>
<li>ईसाई धर्म बौद्घ धर्म से प्रेरित है अथवा नहीं?</li>
</ul>
<p>पर मैं इतना अवश्य जानता हूं कि इस पुस्तक के बारे में <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Lost_years_of_Jesus">विवाद</a> है और इस तरह के विवाद का संतोषजनक जवाब दे पाना मुश्किल है।</p>
<h3 style="text-align:center;">मंदाकिनी झरना &#8211; &#8216;राम तेरी गंगा मैली&#8217; फिल्म वाला<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/babaharbhajansinghtemple.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/babaharbhajansinghtemple.jpg?w=181&#038;h=181" border="0" alt="" width="181" height="181" /></a></h3>
<p>हम लोग, नथुला पास से लौटते समय, बाबा हर भजन सिंह मंदिर भी गये। यह वास्तव में समाधि है। बाबा हर भजन सिंह पंजाब रेजीमेंट में थे। ४ अक्टूबर १९६८ को जब वे एक खच्चर (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Mule">mule</a>) को लेकर आ रहे थे तो उनका पैर फिसल गया जिसके कारण वह एक झरने में गिर पड़े और उनकी मृत्यु हो गई। ऎसा कहा जाता है कि कुछ दिनों बाद वह अपने एक सहयोगी के सपने में आये और कहा कि उनके नाम से एक समाधि बना दी जाए। यहां उन्हीं की समाधि बनी है।</p>
<p>यहां आने पर मुझे बताया गया कि यदि आप २ दिन यानी रविवार और मंगलवार को मांस न खाये तो पवित्र पानी पी सकते हैं पर प्रसाद लेने मे या टीका लगवाने में कोई भी इस तरह की बाधा नहीं थी । मैं सिक्किम का खाना, खाना चाहता था जिसमें मांस भी शामिल था। इसीलिए मैने पानी नहीं लिया पर माथे पर तिलक लगवाया और प्रसाद लिया।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/tsomgolakesikkim.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/tsomgolakesikkim.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<div>लौटते समय हम लोग टोम्गो (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Tsomgo_Lake">Tsomgo</a>) झील पर भी रूके। टोम्गो  सिक्किमी भाषा का शब्द है और <a title="Nepali language" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Nepali_language">नेपाली</a> में इसे छंगू झील कहा जाता है। ज्यादातर लोग इसको छंगू झील ही कहते है। यह ३७८० मीटर (१२,४०० फीट) की ऊंचाई पर है और गैंगटॉक से ३५ किलोमीटर की दूरी पर है। इस झील की परधि लगभग एक किलोमीटर है।</div>
<p style="text-align:left;"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yaktsomgolake.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yaktsomgolake.jpg?w=240&#038;h=320" border="0" alt="" width="240" height="320" /></a></p>
<p style="text-align:left;">इस झील के पास बहुत सारे याक (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Yak">Yak</a>) थे । कई लोग उस पर चढ़कर सवारी कर रहे थे। वहां पर लोगों ने बताया की याक का दूध होता है और इस दूध की पनीर बनती है। जब मैने उसके दूध को पीने की या उससे बनी पनीर खाने की इच्छा की तो वह मुझे नहीं मिल पाया।</p>
<p>यहां पर हम लोगों ने दिन का भोजन लिया। भोजन में इस्क्यूस (iskuss) की रसेदार सब्जी और चावल था। उन्होनें बताया कि यह सब्जी कुछ लौकी और कोहड़ा जैसे होती है। भूख बहुत जोरों से लगी थी। सब कुछ स्वादिष्ट लगा।</p>
<p style="text-align:left;">&nbsp;</p>
<div style="text-align:left;"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/madakinikyongnoslafalls.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/madakinikyongnoslafalls.jpg?w=225" border="0" alt="" /></a></div>
<p style="text-align:left;">लौटते समय हमें कई झरने मिले पर हम लोग एक खास झरने पर रूके। हमारे टैक्सी ड्राइवर ने इसका नाम मंदाकिनी झरना बताया। वहां मंदाकिनी &#8216;राम तेरी गंगा मैली&#8217; फिल्म की हिरोइन है। उस फिल्म में वह इस झरने में नहाती है। इसलिए यह मंदाकिनी झरने के नाम से प्रसिद्व है। यहां पर एक बोर्ड लगा था। जिस पर इसका नाम Kyongnosla falls लिखा था। टैक्सी ड्राइवर के मुताबिक यह बोर्ड दो साल पहले पर्यटन विभाग ने लगाया है।</p>
<p>मैंने &#8216;राम तेरी गंगा मैली&#8217; फिल्म नहीं देखी है। मैं नहीं जानता कि यह सही अथवा नहीं। हो सकता है कि वहां के टैक्सी ड्राईवर पर्यटक को आकर्षित करने के लिये यह बात कहते हों। पर यदि यह सही है तो इसे मंदाकिनी झरने के नाम से पुकारा जाए और कुछ &#8216;राम तेरी गंगा मैली&#8217; फिल्म के साथ जोड़ा जाए तो कुछ ज्यादा लोग आकर्षित होंगे।</p>
<h3 style="text-align:center;">सात राजकुमारियां, जिन्होंने प्रकृति से शादी कर ली</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sevensistersfallssikkim.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sevensistersfallssikkim.jpg?w=225" border="0" alt="" /></a>हम लोगों ने गैंगटॉक से युमथांग घाटी (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Yumthang_Valley">Yumthang valley</a>), युमसंगडॉन्ग (Yumesondong) घूमने का २ दिन १ रात का पैकेज लिया। हमें गुरूडोंगमर (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Gurudongmar">Gurudongmar</a>) झील के बारे में नहीं मालूम था। इसी लिए वह वाला पैकेज नहीं लिया। इसे घूमने के लिए ३ दिन और २ रात का पैकेज लेना पड़ता था।</div>
<div>हम सुबह गैंगटॉक से निकले। हमारा रात का पड़ाव लाचुन्ग (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Lachung">Lachung</a>) में था। यह २६२४ मीटर (८६१० फीट) की ऊंचाई पर है। रात में यहीं रुकना था और अगले दिन सुबह युमथांग घाटी और युमसंगडॉन्ग जाने का प्रोग्राम था।</div>
<p>सिक्किम झीलों और झरनों का प्रदेश है नथुला पास जाते समय हम लोगों को बहुत सी झीलें मिली थी जिसमे सबसे महत्वपूर्ण छंगू झील थी। लाचुंग आते समय हमको बहुत सारे झरने मिले। सबसे पहला महत्वपूर्ण झरना सात बहने (seven sisters) पड़ा।</p>
<p>सात बहने झरने में पानी पहाडी से सात चरणों मे नीचे रास्ते तक गिरता है। इसलिए इसे सात बहने कहा गया है। वहां पर इसके बारे में कथा भी बतायी गयी। राजा की ७ राजकुमारियां थीं। उन्हें प्रकृति से प्रेम था और वे इसी झरने के रूप में हमेशा प्रकृति की हो गयीं । इसलिए इसका नाम सात बहने पड़ा।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/damchunfthang.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/damchunfthang.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<p>सिक्किम भाषा में छू शब्द का अर्थ है, पानी। वहां झरने, नंदियां हैं इसलिए अक्सर जगहों, झरनो के नाम में छू शब्द जोड़ दिया जाता है।</p>
<p>रास्ते में हम लोगों को छूंगथंग (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Chungthang">Chungthang</a>) नामक जगह मिली। यहाँ पर भी टिस्ता और लाचुंग नदी का सगंम है। यहां नदी पर डैम बन रहा है। पानी रोका जायगा और सुरंग के द्वारा के मंगन के पास ले जाया जायगा। जहां पर बिजली घर में १२०० मेगावाट बिजली पैदा होगी।</p>
<p>रास्ते में हमें कई लडके, लडकियां बच्चे स्कूल जाते और लौटते समय मिले। मैने कुछ लड़कियों से बात की।</p>
<div>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/futangschoolgirlsikkim.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/futangschoolgirlsikkim.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a>यह लड़कियां फुटंग स्कूल में पढ़ रही थी। उनके स्कूल में दो मीटिंग होती है। वे दूसरी मीटिंग में पढने जा रही थी। उन्होंने बताया,<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/amitabhbachchanfallssikkim.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/amitabhbachchanfallssikkim.jpg?w=225" border="0" alt="" /></a></p>
</div>
<div>
<blockquote><p>&#8216;हमारा स्कूल अंग्रेजी मीडियम स्कूल है । इसमे सिक्किमी भाषा पढ़ायी जाती है पर हिन्दी नही पढ़ायी जाती है।&#8217;</p></blockquote>
</div>
<p>उन्होंने अपनी कापी में सिक्किम भाषा में लिखा लेख भी दिखाया। मुझे वह देवनागरी में लगा। मेरे पूछने पर कि यदि वे हिन्दी नहीं पढ़ती है तो हिन्दी में कैसे बात कर पा रही हैं। उन्होंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;थोरा-थोरा हिन्दी आती है।&#8217;</p></blockquote>
<p>रास्ते में एक और झरना मिला। मैने इसका नाम पूछा तो ड्राइवर ने बताया की यह अमिताभ बच्चन झरना है। यदि आप इसे देखेगें तो समझ जायेगें है कि हमारा टैक्सी ड्राइवर इसे अमिताभ बच्चन झरना क्यों कह रहा था।</p>
<p>यहाँ पर बड़ी इलायची भी पैदा होती है, जिसका पेड़ भी हम लोगों ने रास्ते में देखा।</p>
<div>
<h3 style="text-align:center;">तारीफ करूं क्या उसकी, जिसने तुझे बनाया</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yusemdong-zero-point-1.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yusemdong-zero-point-1.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<p>लाचुंग से सुबह हम लोग युमसंगडॉन्ग (Yumesondong) और युमथांग घाटी (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Yumthang_Valley">Yumthang valley</a>) देखने के लिए निकले। युमसंगडॉन्ग ज्यादा दूर है। इसलिए पहले उसे देखने की सोची। सुबह भाग्य हमारे साथ नही था। हल्की-हल्की बूंदा-बांदी हो रही थी और बादल छाये हुये थे। इसलिए रास्ते में न तो कुछ ठीक से देख पाये और न ही चित्र ले पाये। मुझे कुछ दुख भी लग रहा था कि इतनी दूर आने के बाद लगता था कि सब व्यर्थ ही रहेगा।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yusemdong-zero-point-snow.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yusemdong-zero-point-snow.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a>युमसंगडॉन्ग में हम लोग जीरो प्वांइट तक गए। इसे जीरो प्वाइंट इसलिये कहा जाता है क्योंकि यहां रोड समाप्त हो जाती है। यह लगभग ४६६३ मीटर १५३०० फीट की ऊँचाई पर है हम लोग जब पहुंचे तो बूंदा बादीं बन्द हो गयी थी पर बादल थे। लेकिन बहुत जल्दी ही भाग्य ने हमारा साथ दिया और धूप निकल आयी। हम लोग वहां करीब एक घण्टा रहे और पूरे समय मौसम सुहावना रहा। मुझे लगा कि शायद भगवान भी हम लोगों का साथ देना चाहते है। यहाँ पर बहुत सी जगह बर्फ जमी हुई थी। बहुत सारे पर्यटक थे और बर्फ में खेल रहे थे।</p>
<p>इस जगह की खूबसूरती कुछ अलग कस्म की है और इसे बयान कर पाना मुश्किल है। इसके लिये मेरी जबान पर अंग्रेजी का शब्द &#8211; raw beauty आता है। मैं नहीं जानता कि इसे हिन्दी में क्या कहा जाय। मुझे तो बस यही गाना याद आता था। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yusemdong-zero-point.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yusemdong-zero-point.jpg?w=250&#038;h=188" border="0" alt="" width="250" height="188" /></a></p>
<blockquote><p><em>&#8216;तारीफ करूं क्या उसकी,</em><br />
<em>जिसने तुझे बनाया</em><br />
<em>यह चांद सा रोशन चेहरा</em><br />
<em>झुल्फ़ों का रंग सुनहरा।</em><br />
<em>यह झील सी नीली आंखें,</em><br />
<em>कोई राज है इसमें गहरा।&#8217;</em></p></blockquote>
<p>यहां एक बात मुझे अच्छी नही लगी कि चारों तरफ बिसलेरी, शराब की बोतलें, रैपर इधर उधर पड़े हुए थे। यदि इन रैपरों की गंदगी नही हटायी गई तो बहुत जल्दी ही यह बेहतरीन जगह एक कूड़ेखाने में बदल जायेगा। सिक्किम में सबसे ज्यादा पैसा पर्यटन से आता है। मेरे विचार से सरकार को कुछ कदम अति शीघ्र उठाने चाहिए:</p>
<ul>
<li>इन जगहों पर तीन तरह के कूड़ा फेकने की व्यवस्था होनी चाहिए एक में शीशा, दूसरे में प्लास्टिक एवं तीसरे में कागज। इन्हें सप्ताह में दो बार उठाया जाना चाहिए अन्यथा बहुत शीघ्र ही यह जगह घूमने के लायक नही रह जायेगी।</li>
<li>सार्वजनिक शौचालय भी होने चाहिए जिसको पैसा देकर प्रयोग किया जा सकता है। युमसंगडॉन्ग में न कोई पेड़ है, न ही कोई आड़। पुरूष तो जहां चाहे वहां शंका निवारण कर ले पर महिलाओं को अवश्य परेशानी होती होगी।</li>
</ul>
<p>यहां पर दो अस्थायी दुकाने थी। दोनों में शराब और चाय मिल रही थीं। एक दुकान को एक जाकिन नामक महिला चला रही थी। उसने कुछ देर तक मुझसे बात की लेकिन बाद में रूठ गयी और बात करने से मना कर दिया क्योंकि मैंने उसके दुकान से चाय नहीं पी। मैने चाय इसलिए नहीं पी क्योंकि उसमे चीनी बहुत मिली हुई थी और मीठी थी और मैं चीनी नहीं के बराबर लेता हूं। वह युमसंगडॉन्ग जैसी जगह चाय की दुकान लगा कर चाय और शराब बेच रही थी। यह साहस का काम है &#8211; शायद महिला सशक्तिकरण यही है। मैं बिना चाय पिये उसे पैसे दे कर, न खुद को, न ही उसको शर्मिंदा करना चाहता था। शायद मुझसे गलती हो गयी &#8211; मीठी ही सही, मुझे चाय पी लेनी चाहिये थी।</p>
<h3 style="text-align:center;">फूलों के रंग से &#8230; लिखी &#8230; पाती</h3>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yumthangvalley.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yumthangvalley.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></p>
</div>
<div>युमसंगडॉन्ग से वापसी पर, हमें युमथांग घाटी और गर्म पानी का झरना देखना था। युमथांग घाटी फूलों की घाटी है।</div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/flowers.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/flowers.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<div>यहाँ पर जाने के लिए सबसे अच्छा समय अप्रैल का होता है। हम लोग वहां मई के अन्त में पहुंचे थे। इस समय तक अधिकतर फूल समाप्त हो चुके थे लेकिन युमथांग घाटी युमसंगडॉन्ग और, के बीच तरह -तरह के लाल, नारंगी, बैगनी, पीले और सफेद रंग के फूल थे। इन रंगों में भी, कुछ गहरे थे तो कुछ हल्के और बहुत सुन्दर लग रहे थे।</div>
<div>रास्ते मे एक जगह ड्राइवर ने गाड़ी रोकी और एक सफेद फूल तोड़कर लाया। उसकी महक बहुत अच्छी थी। उसने बताया, इसे फले मेहतो कहते हैं और <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kalimpong">कालिम्पॉङ</a> में इस फूल से अगरबत्ती बनायी जाती है।</div>
<div>
<p>वापस लौटते समय, हम लोगों के सामने से एक जानवर भी गुजरा जो काले रंग का था तथा उसकी पीठ सफेद रंग की थी। यह ऊदबिलाव जैसा था और ड्राइवर के मुताबिक माल-सापटो है। मैं नहीं समझ पाया कि यह क्या है और इसका अंग्रेजी में क्या नाम है।</p>
<p>रास्ते में पत्थरों पर नारंगी/ लाल रंग था। मुझे पहले लगा कि इन्हे रंगा गया है पर एक जगह मैंने उन्हें छू कर देखा तो लगा कि यह प्राकृतिक है। लगता है कि उनमें आयरन है जो कि आक्सीजन के साथ प्रक्रिया करने के कारण इस रंग के हो गए हैं। मंगल ग्रह भी, इसी कारण लाल रंग का दिखायी पड़ता है और सेब काटने के बाद रंग बदल देता है।</p>
</div>
<div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/stoneredironoxygen-1.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/stoneredironoxygen-1.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/pine-leaves.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/pine-leaves.jpg?w=225" border="0" alt="" /></a></div>
<p>रास्ते मे चीड़ के पेड़ भी थे । इन पेड़ो में डाल समाप्त होने की जगह लाल व पीला/ धानी रंग का फूल सा दिखाई पड़ रहा था। ऎसा लगता था कि बड़े दिन पर क्रिस्मस का पेड़ सजा हुआ है। मैंने एक जगह पास जाकर देखा तो पता चला कि यह फूल नहीं है पर नयी पत्तियां निकल रही है।</p>
<p>युमथांग घाटी लाचुन नदी पर है और यह एक सुन्दर सी जगह है । हम लोगो नें सुबह नाश्ता नहीं किया था, अपने साथ ले गये थे। यहीं पर नाश्ता किया और चाय पी।</p>
<p>युमथांग घाटी के पास ही गर्म पानी का झरना है। लोगो ने बताया कि इसमे नहाने से त्वचा की बीमारियां ठीक हो जाती है। इस पानी में सल्फर मिला हुआ है।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/hotspringyumthangvaalley.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/hotspringyumthangvaalley.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
</div>
<div>गर्म पानी के झरने पर पहुंच कर मुझे अपने स्कूल कि रसायन शास्त्र के प्रयोगशाला की याद आयी क्योंकि वहां पर कुछ उसी तरह की गन्ध आ रही थी। मैंने पानी से कुल्ला भी किया तो उसका स्वाद अजीब सा था। यह पानी में सल्फर मिले होने के कारण था। पानी बहुत गर्म था। वहां कुछ समय रह कर हम लोग वापस होटल चले आए और सामान बांधकर वापस गैंगटॉक चल दिए।</div>
<div>इसी रास्ते में हमारी मुलाकात एक ऐसे शख्स से हुई जिस तरह के शख्स मुझे शर्मिन्दा करते हैं और मैंने एक चिट्ठी &#8216;<a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/06/good-manners-su-soo-privacy-rights.html" >क्या आप इस शख्स को जानते हैं?</a>&#8216; शीर्षक से लिखी।</div>
<div>
<h3 style="text-align:center;">मस्का नहीं, मस्कारा कैसे लगायें और मस्का पायें</h3>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/ganeshtokview.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/ganeshtokview.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a>हम लोगों को दो दिन गैंगटॉक में रहना था और यह समय हमने यहीं की जगहों को घूमने में बिताया। पहले दिन हम लोगों ने गणेशटोक गये। यहां पर गणेशजी का मंदिर है और वहाँ से शहर का नजारा दिखाई पड़ता है। यहां से दृश्य साफ तरीके से नहीं दिखाई पड़ रहा था क्योंकि बादल छाये हुए थे और हल्का-हल्का पानी बरस रहा था। गणेशटोक के बगल में ही चिड़ियाघर है। पानी बरसने के कारण हम वहां न जाकर, फूलों की प्रर्दशनी देखने चले गये ।</p>
<div>यह फूलों स्थायी प्रर्दशनी है। क्योंकि बहुत से पेड़ जमीन पर लगे हुए है और कुछ गुलदस्ते भी जगह-जगह पर रखे हुए हैं। पानी बरस रहा था यह ऊपर से ढ़की है इसलिए इसके अन्दर बहुत से लोग थे। यहाँ जगह -जगह फोटो सेशन चल रहा था लोग तरह-तरह के पोज़ (Pose) देकर फोटो खिंचवा रहे थे।</div>
<div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/manojsiliguri.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/manojsiliguri.jpg?w=262&#038;h=196" border="0" alt="" width="262" height="196" /></a></div>
</div>
<div>
<p>यहां पर मेरी मुलाकात मनोज से हुई जो कि अपनी महिला मित्र (या शायद उस की पत्नी हो) के साथ, सिल्लीगुड़ी से घूमने आये थे। इन लोगों के व्यवहार से लगता था कि शायद ये दोनों मित्र है और शादी शुदा नही है। मैने जब इनसे पोज़ देकर चित्र खीचने की बात की तो युवती शर्मा गई। मुझे उनसे यह पूछना ठीक नही लगा कि क्या वे शादी शुदा हैं।</p>
</div>
<p>वहाँ से निकलकर, हम लोग नमग्याल तिब्बतोलोजी संस्थान  (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Namgyal_Institute_of_Tibetology">Namgyal Institute of tibbtology</a>) देखने गये। इस संस्थान में तिब्बती सभ्यता एवं भाषा  पर शोध होता है।  यह तीन मंजिले  भवन में है।</p>
<ul>
<li>पहली मंजिल संग्रहालय पर संग्रहालय है;</li>
<li>दूसरी मंजिल पर  पुस्तकालय है; और</li>
<li>तीसरी मंजिल पर चित्र प्रर्दशनी लगी हुई थी।</li>
</ul>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/namgyalinstituteoftibbtology.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/namgyalinstituteoftibbtology.jpg?w=320&#038;h=240" border="0" alt="" width="320" height="240" /></a>संगहालय में गौतम बुद्व और बौध धर्म से जुड़े लोगों की मूर्तियां लगी हैं। वहां प्रार्थना की पुस्तकें और कुछ अन्य वस्तुएं रखी हुई थीं जिसमें लिखा था कि यह तांत्रिक विद्या में प्रयोग की जाती हैं। मुझे नही मालूम था कि बौध धर्म में भी कुछ तांत्रिक विद्या का प्रयोग होता है मैंने वहाँ के गार्ड से पूछा,</div>
<blockquote><p>&#8216;क्या बौध धर्म मे भी तांत्रिक विद्या  होती है&#8217;?</p></blockquote>
<p>उसने कहा मुझे नहीं मालूम  पर उसने बगल में बैठी एक लड़की की तरफ  इशारा कर उससे  पूछने को कहा।</p>
<p>युवती ने अपना  नाम पासंग  बताया । उसने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं वाणिज्य (commerce) में स्नातक हूं। मेरे पिता इसी सस्थान  में शोधकर्ता थे और मैं इस समय संग्रहालय की इंचार्ज हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसके मुताबिक वह सारा  सामान  सब बौद्ध धर्म की पूजा में प्रयोग किया जाता है।</p>
<p>पासंग गुलाबी रंग की बख्खू ड्रेस पहने हुई थी। उसकी पलकें भी हल्के गुलाबी रंग की थी। वह प्यारी सी गोल मटोल बिटिया लग रही थी। मैंने पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;पलको का गुलाबी रंग प्राकृतिक है अथवा फैशन।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसने बताया कि यह फैशन  है।</p>
<p>हम लोग दूसरी मंजिल पर पुस्तकालय देखने चले गये। जाते समय मेरे व मेरी पत्नी के बीच बात शर्त लगी। मेरे विचार से मस्कारा (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Mascara">mascara</a>) लगाये हुई थी पर मेरी पत्नी के विचार से उसने आई लाइनर (<a title="Eye liner" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Eye_liner">eye-liner</a>) लगाये हुई थी । मैंने लौटकर पासंग अपनी शर्तें के बारे में बताया। वह मुस्करा कर बोली,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप  अपनी पत्नी से ज्यादा महिलाओं के फैशन के  बारे में नहीं जानते हैं।  आप यह शर्त हार गये है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मुझे नहीं मालुम था कि मस्कारा भौंहों में लगाया जाता है और आई लाइनर पलकों में। मेरा हारना लाजमी था। शुभा स्वयं फैशन नहीं करती पर उसे इन बातों के बारे में मुझसे ज्यादा ज्ञान है।</p>
<p style="text-align:center;"><em>जीवन में सुन्दर लगना, न स्वयं को उत्साहित करता है पर दूसरों को भी अच्छा लगता है।</em></p>
<p style="text-align:center;"><em>देखिये कैसे मस्कारा लगायें।</em></p>
<p style="text-align:center;"><span class='embed-youtube' style='text-align:center; display: block;'><iframe class='youtube-player' type='text/html' width='500' height='312' src='http://www.youtube.com/embed/bVOpCGk1ngk?version=3&amp;rel=1&amp;fs=1&amp;showsearch=0&amp;showinfo=1&amp;iv_load_policy=1&amp;wmode=window' frameborder='0'></iframe></span></p>
</div>
<div>
<h3 style="text-align:center;">सिक्किम में, क्या लड़कियां की संख्या, लड़कों से ज्यादा हैं?</h3>
</div>
<div>हम लोग गैंगटॉक  में वहीं का खाना खाना चाहते थे। इसके  लिए  हमें तिब्बत होटल में खाने के लिये  सुझाव दिया गया था। इस होटल में स्नो लायन (Snow Lion) नाम का रेस्ट्रां   है। यहां वेटर ने हमें शाकाहरी खाना के लिए Vegetarian  chetse Detse और  Vegetarian Phing she rice  खाने की सलाह दी। इसमें सब्जी उबाल कर बनायी गयी थी और मसाला बहुत कम था। हमें यह खाना पसन्द आया।  हमने अगले दिन पुन: वहां खाना खाने गये और मांसाहारी खाना खाया।</div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimzoo-1.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimzoo-1.jpg?w=320&#038;h=240" border="0" alt="" width="320" height="240" /></a></div>
<div style="text-align:center;"><em>सिक्किम का चिड़िया घर </em></div>
<div>गैंगटॉक में तारगाड़ी  (Rope way) भी है। यह तारगाड़ी  गुलमर्ग के बराबर तो अच्छी नहीं है पर तारगाड़ी पर चढ़ने का एक अलग मजा है। यह  बहुत ऊंची  है और इसमें गैंगटॉक शहर दिखाई पडता है। हम लोग इस पर घूमने के बाद चिड़ियाघर  देखने  गये।</div>
<div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimzoosnowleopard.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimzoosnowleopard.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<p>मुन्ने को जानवर बहुत पंसद है। इसलिए हम जहां भी जाते थे वहां चिड़ियाधर या राष्ट्रीय उद्यान अवश्य जाते थे। मैंने कई जगह के चिड़ियाघर देखें है पर  गैंगटॉक तरह का चिड़ियाघर नहीं देखा है। इसमे  जानवर तो  कम  हैं लेकिन  यह है,   अजूबा। सच पूछिए तो यह चिड़ियाघर नहीं,  जंगल है जंगल &#8211; जंगलो के बीच, उसी में जानवरों का रहने का स्थान।  यहां पर मुझे, मालुम नहीं क्यों, जुरैसिक पार्क (<a title="Jurassic Park (film)" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Jurassic_Park_(film)">Jurassic Park</a>) फिल्म की याद आयी।</p>
<p>यहां हमने  कुछ ऎसे जानवर देखे जो वास्तव में कभी नहीं देखे। इनमें स्नो लेपर्ड    (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Snow_leopard">Snow leopard</a>)  लाल पांडा (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Red_panda">Red panda</a>),  हिमालयन पाम सिवेट (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Himalayan_Palm_Civet">Himalayan palm civet</a>) टाइगर बिल्ली, तिब्बती भेड़िया (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Tibetan_wolf">Tibetan wolf</a>)  शामिल है।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/teastallsikkimzoo.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/teastallsikkimzoo.jpg?w=224&#038;h=169" border="0" alt="" width="224" height="169" /></a>चिड़ियाघर  के  बीच छोटी सी दुकान जगह है, जहां पर चाय व कोल्ड ड्रिंक आदि ले सकते है ।  इस दुकान को दो बहने चलाती  हैं। बड़ी बहन का नाम मीना कुमारी प्रधान है । हमनें वहीं बैठकर  चाय पी। गैंगटॉक मे कुछ लड़किया या महिलाएं देखने को ज्यादा मिलती है और दुकानो को वही चलाती  है। हमनें पूछा कि ऎसा क्यों है तो उसने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;यहाँ पर पति और पत्नी दोनों काम करते हैं। मेरे पति  ए०जी०आफिस में काम करते हैं और मैं इस दुकान को अपनी बहन की सहायता से चलाती हूं  मैं कुछ पैसा कमाना चाहती हूं। ताकि अपने बच्चों को पढने के लिए  कलकत्ता भेज सकूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>मेरे दूसरे सवाल पर कि क्या सिक्किम में महिलाएं ज्यादा हैं?  उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह  सच है क्योंकि यहाँ पर ४ लड़कियां है तो केवल एक लड़का है।&#8217;</p></blockquote>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimzooredpanda.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimzooredpanda.jpg?w=265" border="0" alt="" /></a>मैं नहीं समझता हूं कि  लड़कियों और लड़को में इतना अन्तर हो सकता है। मैं हमेशा यही समझता हूं कि लड़की और लड़के के पैदा होने की संभावना बराबर है। मैंने कुछ समय पहले इसी सिद्धान्त पर एक सवाल पूछा था। यदि आपने इसे नहीं देखा हो और कुछ दिमागी कसरत करना चाहें तो <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/09/lies-damned-lies-statistics.html">यहां</a> देखें और इसका जवाब <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/09/probability-boy-girl.html">यहां</a> है।</div>
<p>मुन्ना जीव संबन्धी क्रियाओं  को, गणित द्वारा समझने का काम करता है। उसका कहना है कि,</p>
<blockquote><p>&#8216;महिलाओं में एक्स-एक्स क्रोमोसोम होता है और पुरूषो में एक्स -वाई क्रोमोसोम होता है। और वाई क्रोमोसोम, एक्स क्रोमोसोम से छोट होता है और तेज चलता है इसलिये इससे गर्भाधान होने की संभावना ज्यादा होती है पर पुरूषों का गर्भपात ज्यादा होता इसलिये पैदा होने वाले बच्चों में लड़के और लड़कियो की संख्या लगभग बराबर रहती है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मालुम नहीं कौन ठीक है &#8211; मैं या मुन्ना। ऐसे <a href="http://hindi.webdunia.com/news/news/international/0904/01/1090401147_1.htm">यह रिपोर्ट</a> कुछ ऐसा ही कहती है।</p>
</div>
<div>
<h3 style="text-align:center;">क्या नेपाली लड़कियों के लिये कुछ भी मुश्किल नहीं है?</h3>
<p>हम लोग दूसरे दिन भी गैंगटॉक घूमने निकले। रास्ते में जगह जगह कुछ कमरे से बने हुए दिखाई पड़ते थे। इनमें ड्रम रखे हुए थे जो कि पानी के बहाव से घूम रहे थे। हमारे ड्राइवर ने बताया कि इसे माने (यानी मंदिर) कहते है। सिक्किम में बौद्घ धर्म का जोर है और इसमें बौद्घ धर्म से सम्बन्धित पवित्र पुस्तके रखी रहती है और ड्रम के बाहर बौद्घ धर्म के मंत्र लिखे हुए हैं पानी के बहाव से घूमते रहते हैं। बौद्घ आश्रम में भी इस तरह के गोले होते हैं जिसे लोग हाथ से घुमाते रहते है। यह उसी तरह की बात है जिस तरह से हिन्दू धर्म के लोग रोज सुबह उठकर राम नाम की माला जपते हैं। सिक्किम में इस तरह के मंदिर मरने के बाद मृतक की याद में बनाये जाते हैं।<br />
<img src="http://unmukth.wordpress.com/tmp/moz-screenshot.jpg" alt="" /><br />
<img class="alignright" title="Ban jhakri falls Sikkim" src="http://lh4.ggpht.com/_VD9tZkRYrQ0/STdGDlQK2JI/AAAAAAAABBM/2DW9Q6I7_Ao/Ban%20Jhakri%20falls.jpg" alt="" width="211" height="282" />सबसे पहले, हम लोग सुबह ताशी व्यू पाइंट (Tashi view point) देखने गये। यह युमथांग घाटी के रास्तें में पड़ता है पर घाटी जाते समय हम लोग यहां नही रूके थे क्योंकि उस समय यहां मौसम एकदम साफ नहीं था और हम लोग चाहते थे कि जिस दन मौसम साफ रहे उस दिन वहां जाएं। मौसम आखिरी दिन तक साफ नहीं हुआ इसलिए हम लोग आखिरी दिन वहां गए। कञ्चनजङ्घा रेंज तो नहीं दिखाई पड़ी पर यहां पर सरकारी दुकान है जिसमें यादगार रखने के लिए समान (souvenir) मिलता है यह बहुत अच्छे हैं और इनके दाम भी वाज़िब हैं। यदि आप सिक्किम जांए और इस तरह की वस्तुयें खरीदने की बात हो तो यहीं से खरीदें।</p>
<p>बन झकरी झरना (Ban Jhakri falls) सुन्दर जगह है। यहां पर एक झरना और पार्क बना हुआ है।</p>
<p>इस पार्क में सूर्य की ऊर्जा से चलने वाली बत्तियां लगी हुई हैं और ऊर्जा के बारे में बताने की चेष्टा की गई है। एक कमरे के अन्दर ऊर्जा से सम्बन्धित कुछ बातें लिखी है। यहां इस तरह के खेल भी हैं जो बताते हैं कि एक तरह की ऊर्जा दूसरी तरह की ऊर्जा में कैसे परिवर्तित हो सकती है।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/banjhakrifallsnepaligirls.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/banjhakrifallsnepaligirls.jpg?w=218&#038;h=163" border="0" alt="" width="218" height="163" /></a>यहां एक ड्रम है जब बच्चे इसके अंदर चलते हैं तो यह घुमाता है। घूमने से ऊर्जा उत्पन होती है जिसे संगीत बजाने वाला वाद्य चलता है। यहां एक फिसलने वाली स्लाईड है। फिसलने के कारण बिजली की एक बत्ती जलती है।</p>
<p>यहां पर मुझे  लड़कियों की टोली मिली। वे अपने गुट में  नाच वा गा रहीं थी। मुझे लगा कि वह स्कूल की लड़कियां है पर उन्होंने बताया,<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/banjhakrienergyparktourist.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/banjhakrienergyparktourist.jpg?w=225" border="0" alt="" /></a></p>
<blockquote>
<blockquote><p>&#8216;हम नेपाली हैं और एक फिल्म की शूटिंग के लिये आये हैं। नेपाली लड़कियों के लिये कुछ भी मुश्किल नहीं है।&#8217;</p></blockquote>
</blockquote>
<p>मैंने कहा कि वे क्या मुझे सिक्कमी भाषा में कोई गाना सुना सकती हैं। इस पर वे शर्मा गयीं क्योंकि उन्हें सिक्कमी भाषा नहीं आती थी लेकिन उन्होंने मुझे एक नेपाली और एक हिन्दी गाना भी सुनाया।</p>
<p>उद्यान देखने के बाद, हम रकें (Ranke) बौद्घ आश्रम गये । यह बहुत ही सुन्दर जगह है । यहां मेरी मुलाकात एक लामा से हुई। उसका नाम कर्मा नेक्से था। उसने बताया</p>
<blockquote>
<blockquote><p>&#8216;मेरी आयु १६ वर्ष है। मैं ७ वर्ष पहले यहां आया था। यहां  बौद्घ धर्म की शिक्षा ग्रहण करता हूं।&#8217;</p></blockquote>
</blockquote>
</div>
<div>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimrankemonastry.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimrankemonastry.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a>मेरे कहने पर उसने एक बौद्घ पूजा का मंत्र भी सुनाया।</p>
<p>हम लोग रूमटेक (<a title="Rumtek Monastery" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Rumtek_Monastery">Rumtek</a>) बौद्घ आश्रम भी गये। यह आश्रम रकां आश्रम के जितना सुन्दर तो नहीं है पर यह सबसे महत्वपूर्ण आश्रम है।</p>
</div>
<div>रूमटेक आश्रम मे हर तरफ इन्डो- तिब्बत फोर्स लगी हुई थी यहां चित्र लेने पर मनाही थी। मुझे कुछ आश्चर्य हुआ। मैंने एक जवान से पूछा कि ऎसा क्यों है। उसके मुताबिक लामा के दो गुट है जिनमें आपस में लड़ाई रहती है। इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से तैनात है। उसके अनुसार इस आश्रम में न केवल सोने की मूर्तियां है पर बौद्घ धर्म से संबधित कुछ ऎसी चीजें है जो कि वे अमूल्य है। यदि उन्हें कुछ हो गया तो बौध धर्म की धरोहर ही समाप्त हो जायेगी। इसलिए वे लोग उसकी सुरक्षा के लिए लगे हुए हैं।</div>
<div>
<h3 style="text-align:center;">क्या आपको मालुम है कि सबसे अच्छा वक्तिगत कैक्टस का बगीचा कहां है?</h3>
<p>कालिम्पॉङ (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kalimpong">Kalimpong</a>) सिक्किम में नहीं है। यह पश्चिम बंगाल का हिस्सा है। यह गैंगटॉक जाने के रास्ते के पास में ही है। इसीलिये हम लोगों ने वहां भी जाने का प्रोग्राम बनाया।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/deolaviewpointkalinpong.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/deolaviewpointkalinpong.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a><br />
हम लोग सुबह गैंगटॉक से सिलीगुड़ी के लिये  कालिम्पॉङ (kalimpong) के लिये चले।  दिन में कालिगंपॉड घूमना था और शाम तक सिलीगुड़ी पहुंचना था जहां हमें रात गुजारनी थी। हमें बताया गया था कि कालिम्पॉङ  में दो जगह देखने के लिए हैं इसलिए हम लोग रात में कालिम्पॉङ नहीं रूके।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/deolaviewpointgardenkalinpong.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/deolaviewpointgardenkalinpong.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a><br />
कालिम्पॉङ में सबसे पहले हम लोग देवला हिल (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Deolo_Hill">Deolo hill</a>) व्यूप्वाइंट गये। यह बहुत ही सुन्दर सी जगह है, पार्क है और इसमें एक गेस्ट हाऊस भी है। जिसमें आप ठहर सकते है। हालांकि कोहरे के कारण दृश्य अच्छा नहीं था। कञ्चनजङ्घा रेंज  तो दिखायी नहीं पड़ी पर  डैनी डेंज़ोंग्पा (<a title="Danny Denzongpa" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Danny_Denzongpa">Danny Denzongpa</a>) फिल्म एक्टर की शराब बनाने की फैक्टरी को देख सके।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/cactusgardenkalinpong.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/cactusgardenkalinpong.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a>दूसरी जगह जो हम लोगों को देखनी थी , वह एक प्राइवेट जगह है लेकिन उसमें बहुत सुन्दर कैक्टस हैं। इस जगह को देखने के लिए  पहले कोई टिकट नहीं था।  लेकिन इसके मालिक ने आने वालों की संख्या देखते हुए पांच रूपया का टिकट लगा दिया। उनके मुताबिक प्रतिदिन, लगभग २५० लोग कैक्टस को देखने आते है। यहां पर तरह तरह के कैक्टस हैं। कैक्टस के पेड़ो में  नारंगी, बैगनी, लाल और सफेद रंग के फूल भी लगे थे। यहां लोगो ने बताया  कि मालकिन ने बताया कि वहां पर एक रेस्ट हाउस भी है जिसमें ६ कमरे हैं। दो बिस्तर के कमरे का ५५०/-रू०  और तीन बिस्तर के कमरे का ७५०/-रू० किराया है।<br />
<a href="http://www.pineviewcactus.com/pictures/NEW/5.jpg"><img class="alignleft" src="http://www.pineviewcactus.com/pictures/NEW/5.jpg" border="0" alt="" width="200" height="146" /></a></p>
<div><em>यह चित्र बगीचे की वेबसाइट से है और उन्हीं के सौजन्य से है।</em></div>
<p>यह लोग <a href="http://www.pineviewcactus.com/index.htm">Pineview Nursery</a> नाम से अपनी वेबसाइट भी चलाते हैं जहां से इनके बारे में विस्तार से जानकारी मिल सकती है।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/viewcactusgardenkalinpong.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/viewcactusgardenkalinpong.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></p>
<p>यहां से घाटी में लगे चीड़ के पेड़ो का दृश्य बहुत सुन्दर दिखायी पड़ता है इसी लिये इसका नाम उन्होंने Pineview Nursery  रखा है।</p>
<p>हम लोगों ने दिन का खाना, ज्योति रेस्ट्राँ  में खाया और सिल्लीगुड़ी के लिये चल दिए। अगले दिन हमें, बागडोगरा से, वापसी के लिये हवाई जहाज पकड़ना था।</p>
</div>
<div>
<h3 style="text-align:center;">क्या लोग हिन्दी में भी ब्लॉग  लिख रहे हैं?</h3>
<p>हम लोग सिल्लीगुड़ी शाम को पहुंच गये। जिस जगह हम लोग ठहरे थे उस जगह का नाम चंपा साड़ी बताया गया। थोड़ी देर बाद मैने वहां पर साइबर कैफे ढूंढना शुरू किया। यहां पर सब्जी मंडी है और केवल एक साइबर कैफे। साइबर कैफे के काउंटर पर युवती बैठी थी। वहां ५-६ कंप्यूटर रखे हुए थे।वे सारे विंडोज़ पर थे। मैंने उससे पूछा कि क्या कोई लिनेक्स पर है। उसका जवाब सवाल में था,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह लिनेक्स क्या होता है?&#8217;</p></blockquote>
<div>उसे नहीं मालुम था कि लिनेक्स भी ऑपरेटिंग सिस्टम होता है। मैंने उसे <a href="http://unmukth.wordpress.com/2006/06/01/oss/" >ओपेन सोर्स</a> पर छोटा सा भाषण दिया। मालुम नहीं कितना समझ में आया पर कम से कम एक और को कुछ तो ओपेन सोर्स के बारे पता चला।</div>
<div>
<p>वहां सबसे अच्छी बात यह थी कि फायरफॉक्स वेब ब्रॉउज़र था। इसीलिए मुझे काम करने में मुश्किल नहीं हुई। मैंने अपनी ईमेल चेक की। कुछ का जवाब भेजा। वहां पर २०रू० प्रति घंटा पैसा लिया जाता था और मुझे ३० देने पड़े क्योंकि मैं लगभग १.३० घंटा अन्तरजाल पर था।</p>
<p>उनके कम्पूटर में पुराना फायरफॉक्स था। मैंने उस युवती से कहा कि उसमें नया फायरफॉक्स डाल ले क्योकिं इसमें हिन्दी की मात्रायें ठीक प्रकार से नहीं दिखाई पड़ती हैं। उस युवती ने मुझसे पूछा,</p>
</div>
<blockquote><p>&#8216;क्या लोग हिन्दी में भी ब्लॉग लिखते हैं?&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा हां बहुत सारे लोग हिन्दी में कर रहे है और यह तो बंगाली में भी लिखा जा सकता है।</p>
<blockquote><p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/bagdograairportteashop.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/bagdograairportteashop.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></p></blockquote>
<p>अगले दिन हम लोग बागडोगरा हवाई अड्डा पहले पहुंच गये थे। यहां से ही हमें हवाई जहाज पकड़ना था। यहां काफी पर्यटक आते हैं। इसलिये इसे बढ़िया बनाया गया है। मैंने इसका एक चक्कर लिया। एक जगह तरह-तरह की चाय की पत्ती बिक रही थी। इस दुकान पर patent शब्द लिखा था। मैंने दुकानदार से कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;पेटेंट तो कानून का शब्द है क्या कोई चाय पेटेंट करा रखी है।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसने जवाब दिया,</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं, वर्तनी गलत हो गयी है। यह शब्द patient है। मैं एक तरह की चाय की पत्ती बेचता हूं जो कि डायबटीस् के बिमारों के लिये उत्तम है।&#8217;</p></blockquote>
</div>
<div>मैंने सबसे अच्छी चाय का दाम पूछा तो एक छोटे से पैकेट ९०० रूपये बताया। इस पैकट के द्वारा केवल १० कप चाय बन सकती थी यानि एक कप चाय में केवल चाय की पत्ती का दाम ९० रूपये &#8211; बाप रे बाप।</div>
<div style="text-align:center;">
<p style="text-align:left;">मैंने उससे सस्ती चाय का पैकेट (१० लोगों के लिये) १२० रूपये का लिया। हमारे हवाई जहाज का समय हो चुका था और हम वापस उड़ लिये।</p>
<h3 style="text-align:center;">सिक्किम में ट्रैफिक नियमों का पालन</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimhills.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimhills.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<div style="text-align:left;">सिक्किम में ट्रैफिक नियमों का पालन भारत में किसी अन्य राज्य से बेहतर है। अक्सर कारों  की लम्बी लाइने दिखायी पड़ती हैं। बगल का रास्ता, जो दूसरी तरफ से आने वाली कारों के लिये होता है, खाली ही रहता है। ऎसा नहीं दिखाई पड़ा कि कारें लाइन को तोड़ कर खाली रास्ते पर चलीं जायें जैसा कि अन्य जगहों पर होता है। यहां भी ट्रैफिक जैम होता है पर वह इसलिये क्योंकि रास्ते सकरे हैं और आर्मी के बहुत सारे ट्रक बड़े होते हैं। ट्रैफिक जैम, कारों की लाईन तोड़ने के कारण नहीं होता।</div>
<div style="text-align:left;"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimhills-1.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimhills-1.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a><br />
सिक्किम में पहाड़ी क्षेत्रों में घूमते हुए हमें कई रोचक से जुमले भी लिखे हुए मिले कि पहाड़ी रास्ते पर कैसे यात्रा की जाए।</div>
<ul style="text-align:left;">
<li>If driving is marriage, then speed is divorce</li>
<li>Mountains are pleasure, if you drive at leisure.</li>
<li>Gentle on my curves.</li>
<li>On my curves, watch your nerves.</li>
<li>Road is hilly, don&#8217;t  be sills.</li>
</ul>
<p style="text-align:left;">हालांकि  मुझे वहां के लोगों को पहाड़ पर गाड़ी चलाने के दो मूलभूत नियमों की समझ कम लगी।</p>
<ul>
<li style="text-align:left;">Don&#8217;t overtake on a turning मोड़ पर किसी गाड़ी से आगे मत जाओ।</li>
<li style="text-align:left;">Give was to upcoming traffic ऊपर जाने वाली गाड़ियों को पहले जाने दो।</li>
</ul>
<p style="text-align:left;">मुझे, यह जुमले कहीं भी लिखे हुए भी नहीं दिखे। हमें अक्सर इन नियमों की याद अपने ट्रैक्सी चालक दिलानी पड़ती थी।</p>
<h3>सिक्किम में संस्कृति और पहनावा</h3>
<p style="text-align:left;">सिक्किम के शहरी इलाके में सारे भारत के लोग आ कर बस गये हैं। लेकिन,  यहां मुख्यतः लिम्बू, लेपचास्, भूटिया, नेपाली, और तिब्बती लोग  हैं। यह अपनी संस्कृति और पहनावे को आज तक निर्वाह कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:left;">भूटिया महिलाओं के पहनावे को खो (kho) या बख्खू (Bakhu) कहतें हैं। बहुत सारे स्कूलों में लड़किया की यही ड्रेस है।</p>
<p>सिक्किम के पारंपरिक पहनावे देखने में बहुत प्यारे लगते हैं। इस विडियो में इसके कुछ झलकियां देखिये।</p>
<span class='embed-youtube' style='text-align:center; display: block;'><iframe class='youtube-player' type='text/html' width='500' height='312' src='http://www.youtube.com/embed/yRx6jRwOHkc?version=3&amp;rel=1&amp;fs=1&amp;showsearch=0&amp;showinfo=1&amp;iv_load_policy=1&amp;wmode=window' frameborder='0'></iframe></span>
<h3 style="text-align:center;">सिक्किम में महिलाओं का सशक्तिकरण</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/gangtokenergyparkgirls.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/gangtokenergyparkgirls.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<div>
<p style="text-align:left;">सिक्किम में सबसे मुख्य बात जो मुझको दिखाई पडी वह यह है कि यहां पर काफी लड़कियां &#8211; काम करती हुई, घूमती हुई, या स्कूल जाती हुई-दिखाई पड़ीं। मुझे ऎसा लगा कि यहां पर महिलाओं की संख्या पुरूषों की संख्या से ज्यादा है। वहां के लोगों का भी यही कहना था। हालांकि मैं यह नहीं कह सकता कि यह बात अधिकारिक रूप से यह सच है कि नहीं ।</p>
</div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/gangtokzooshopwomen.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/gangtokzooshopwomen.jpg?w=320&#038;h=320" border="0" alt="" width="320" height="320" /></a></div>
<div>
<p style="text-align:left;">वहां पर मैने बहुत सी महिलाओं और लड़कियों से बात भी की। उनसे बात करने पर मुझको लगा की जैसे उनमें अन्य जगह की महिलाओं से ज्यादा आत्म विश्वास है। यह शायद मातृ प्रधान (matriarchal) समाज का प्रभाव हो।</p>
<p style="text-align:left;">यहाँ पर मुझे कहीं भी महिलाओं के साथ छेड़-छाड़  होते नहीं दिखी, जैसा की अपने देश में, अन्य जगह होता है। यहाँ के लोग यह भी बताया कि आप किसी महिला के साथ छेड़-छाड़  करेगें तो सर कलम हो सकता है।</p>
</div>
<p style="text-align:left;">कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यहां पर अन्य राज्यों से ज्यादा ऎड्स है। ऎड्स के कई पोस्टर भी लगे दिखाई पड़े। मैं नहीं कह सकता कि यह बात सच है अथवा नही। वहां पर रहने वाले मेरे एक मित्र के अनुसार,</p>
<blockquote>
<p style="text-align:left;">&#8216;जब समाज में इतना खुलापन हो तो अक्सर सीमायें टूट जाती हैं। इस हालत में ऎड्स का बढ़ना स्वाभाविक है।&#8217;</p>
</blockquote>
<p style="text-align:left;">मैं नहीं जानता कि कि सिक्किम में ऎड्स, भारत के अन्य राज्यों से अधिक है अथवा नहीं, पर यदि कोई मुझसे पूछें कि कौन सा समाज बेहतर है तो मैं यह अवश्य कहना चाहूँगा, यह समाज- जहाँ पर महिलाओं को ज्यादा स्वतन्त्रता है, जहाँ की महिलायें ज्यादा आत्मविश्वासी है- वह भारत के अन्य समाज से बेहतर है।</p>
<p style="text-align:left;">इस चिट्ठी में मैंने लिखा जो मुझे सिक्किम में अनुभव हुआ। लोगों के विचारों में भिन्नता हो सकती है पर मेरी मंशा किसी की भावनाओं को आहत करने की नहीं है।</p>
<p style="text-align:center;">इस यात्रा के दौरान मुझे &#8216;कश्मीर की कली&#8217; फिल्म का गाना</p>
<p style="text-align:center;">&#8216;तारीफ करू क्या उसकी, जिसने तुम्हें बनाया&#8217; की याद आयी।</p>
<p style="text-align:center;">चलते चलते इसे भी सुनिये।</p>
<span class='embed-youtube' style='text-align:center; display: block;'><iframe class='youtube-player' type='text/html' width='500' height='312' src='http://www.youtube.com/embed/txv7RCe8DXM?version=3&amp;rel=1&amp;fs=1&amp;showsearch=0&amp;showinfo=1&amp;iv_load_policy=1&amp;wmode=window' frameborder='0'></iframe></span>
</div>
<div style="text-align:center;">
<p><em>यह यात्रा विवरण मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।</em></p>
<p><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/06/blog-post.html">सिक्किम &#8211; छोटा मगर सुन्दर</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/06/how-to-reach-sikkim-gangtok.html">गैंगटॉक कैसे पहुंचें</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/07/teesta-dam-protest-north-sikkim.html">टिस्ता नदी (सिक्किम) पर बांध बने अथवा नहीं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/07/natu-la-pass-sikkim.html">नाथुला पास – भारत चीन सीमा</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/08/jesus-christ-silk-route-india.html">क्या ईसा मसीह सिल्क  रूट से भारत आये थे</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/08/spots-between-gangtok-natula-pass.html">मंदाकिनी झरना &#8211; &#8216;राम तेरी गंगा मैली&#8217; फिल्म  वाला</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/09/passage-to-yumesondong-yunthang-valley.html">सात राजकुमारियां, जिन्होंने प्रकृति से शादी कर ली</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/09/yumesondong-zero-point.html">तारीफ करूं क्या उसकी जिसने तुझे बनाया</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/10/yumthang-valley-hot-springs-sikkim.html">फूलों के रंग से &#8230; लिखी &#8230; पाती</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/11/gangtok-visiting-places-1.html">मस्का नहीं, मस्कारा कैसे लगायें और मस्का पायें</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/11/gangto-visiting-places.html">सिक्किम में, क्या लड़कियां की संख्या, लड़कों से ज्यादा हैं?</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/12/blog-post.html">क्या नेपाली लड़कियों के लिये कुछ भी मुश्किल नहीं है?</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/12/blog-post_09.html">क्या आपको मालुम है कि सबसे अच्छा वक्तिगत कैक्टस  का बगीचा कहां है?</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/12/siliguri-bagdogra-airport.html">क्या लोग हिन्दी में भी ब्लॉग लिख रहे हैं?</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/12/sikkim-traffic-rules.html">सिक्किम में ट्रैफिक नियमों का पालन</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/12/sikkim-women-empowerment.html">सिक्किम में महिलाओं का सशक्तिकरण</a>।।</p>
</div>
<p><span style="font-size:x-small;"> </span></p>
<div style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</div>
<div><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Sikkim">Sikkim</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Gangtok">Gangtok</a>, गैंगटॉक, सिक्किम, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Teesta_River">teesta</a>, टिस्ता, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Natu_La">Natu la</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Yumthang_Valley">Yumthang valley</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Hot_springs">hot springs</a>, Kalimpong, Deolo hill, कालिम्पॉङ, देवला हिल व्यूप्वाइंट, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Siliguri">siliguri</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Bagdogra_airport">bagdogra airport</a>, सिलीगुड़ी, बागडोगरा हवाई अड्डा, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Traffic_rules">Traffic</a>, Traffic rules, ट्रैफिक नियम, women empowerment, महिला सशक्तिकरण,</div>
<div><a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>,  <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, <a href="http://www.google.co.in/search?q=%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80+%E0%A4%95%E0%A5%87+%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%87&amp;ie=utf-8&amp;oe=utf-8&amp;aq=t&amp;rls=com.ubuntu:en-US:official&amp;client=firefox-a">मस्ती के लिये</a> सैर सपाटा, <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>, <a title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा विवरण </a>, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</div>
<br />Filed under: <a href='http://unmukth.wordpress.com/category/%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%A8/'>यात्रा वर्णन</a>, <a href='http://unmukth.wordpress.com/category/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80/'>हिन्दी</a>  <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&amp;blog=230997&amp;post=592&amp;subd=unmukth&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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		<title>विश्व की संगीत राजधानी – वियाना</title>
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		<pubDate>Mon, 28 Dec 2009 14:14:35 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[Full Articles]]></category>
		<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>
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		<category><![CDATA[travelogue]]></category>

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		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में वियाना यात्रा का वर्णन है।
yeh chitthi vienna yatra ka varnan hai.
This post is about my visit to Vienna.<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=392&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em>मैं काम के सिलसिले में बर्लिन गया था। वहां के लिये, भारत से कोई सीधी उड़ान नहीं थी। इसलिये दिल्ली से वियाना और वहां से बर्लिन गया था। लौटते समय, घूमने के लिये वियाना रुका था। इस चिट्ठी में वियाना यात्रा का वर्णन है। </em></p>
<p style="text-align:center;"><em><img class="aligncenter" title="Vienna" src="https://lh4.googleusercontent.com/_VD9tZkRYrQ0/TU5zg_fKovI/AAAAAAAACUY/3nzy41GlvBo/Vienna.jpg" alt="" width="311" height="232" /><span id="more-392"></span></em></p>
<h3 style="text-align:center;">वियाना &#8211; मैं पहुंच रहा हूं</h3>
<p><a href="http://unmukth.wordpress.com/2009/10/19/berlin-travelogue/">बर्लिन</a> से चलते समय, मैंने अपना कैमरा हैंड बैग में रख लिया था।  बर्लिन हवाई अड्डे पर, एक महिला सिक्योरिटी की इंचार्ज थी। उसने कहा कि इस कैमरे से चित्र खींच कर दिखाओ। मैंने, उसे, उसका चित्र खींच कर दिखाया। उसने कहा कि अब इसे मिटा दो। मैंने उसकी बात मान ली। बाद में मैंने पूछा यदि चित्र ही मिटवाना था तो खिंचवाया ही क्यों? वह कहने लगी,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं देखना चाहती थी कि यह कैमरा ही है, न कि कुछ और।&#8217;</p></blockquote>
<p>लगता है कि आतंकवादियों ने हवाई जहाज उड़ाने का नया तरीका निकाल लिया है <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /><br />
हवाई जहाज पर एक बम्बई के एक व्यापारी से मुलाकात हुई। मैंने पूछा कि वे बर्लिन कैसे आये थे। उनका जवाब था कि वे अपने लड़के से मिलने आये थे जो कि बर्लिन में यांत्रिकी इंजीनियरिंग पढ़ रहा है।</p>
<div style="border-top:7px solid #5c8a64;border-bottom:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">आईआईटी मद्रास, जर्मनी सरकार की सहायता से बना है। इसलिये वहां का यांत्रिकी इंजीनियरिंग विभाग बेहतरीन माना जाता है।</div>
<p>उन्होंने बताया कि जर्मनी की यांत्रिकी इंजीनियरिंग दुनिया में मशहूर है इसीलिये उनके लड़के वहां यांत्रिकी इंजीनियरिंग पढ़ रहे हैं। आईआईटी मद्रास, जर्मनी सरकार की सहायता से बना है। इसलिये वहां का यांत्रिकी इंजीनियरिंग विभाग बेहतरीन माना जाता है। उन्होने यह भी बताया कि जर्मनी में पढ़ाई का खर्च नहीं लगता &#8211; केवल रहने और खाने का। मैंने पूछा,<a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R5rdo9y-sHI/AAAAAAAAAYA/72oDZtYdxLo/s1600-h/Sound-of-Music+poster.jpg"><img class="alignright" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R5rdo9y-sHI/AAAAAAAAAYA/72oDZtYdxLo/s200/Sound-of-Music+poster.jpg" border="0" alt="" width="155" height="157" /></a></p>
<blockquote><p>&#8216;क्या यह केवल जर्मन लोगों के लिये है या सबके लिये।&#8217;</p></blockquote>
<p>उन्होंने कहा कि यह सब के लिये है। मुझे यह कम समझ में आया कि क्यों जर्मन सरकार दूसरे देश के लोगों के लिये भी शिक्षा का पैसा नहीं लेती है। अमरीका में भी ऐसा होता है पर उसके एवज में उन्हें कुछ काम, जैसे टीचिंग एसिस्टेंट बनना पड़ता है।</p>
<p>वियाना में मुझे एक कॉन्वेन्ट में ठहरना था। इसी बात से, मुझे रास्ते में, १९६० के दशक में देखी फिल्म, सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक (Sound of Music), की याद आयी।</p>
<h3 style="text-align:center;">सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक फिल्म, सत्य कथा पर आधारित है</h3>
<p>सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक (Sound of Music) फिल्म, १९६० के दशक में बनी थी। मैंने इसे तभी देखा था। यह आज तक की बनी संगीत-मय फिल्मों में, सबसे प्रसिद्ध है। इसे पांच ऐकेडमी पुरुस्कार मिलें हैं। यह मारिया नामक लड़की की सत्य कथा पर आधारित है। <a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R6nNz9y-sSI/AAAAAAAAAZY/NHAbOd1PWSk/s1600-h/The+Story+of+the+Trapp+Family+Singers.JPG"><img class="alignleft" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R6nNz9y-sSI/AAAAAAAAAZY/NHAbOd1PWSk/s200/The+Story+of+the+Trapp+Family+Singers.JPG" border="0" alt="" width="107" height="162" /></a></p>
<p>मारिया का पूरा नाम मारिया फॉन ट्रैप (शादी के पहले कुक्षेरा) {Maria Von Trapp (nee Kutschera)} था। वह वियाना में रहने वाली एक अनाथ लड़की थी। वियाना से वह सॉल्सबर्ग (Salsburg) के एक कॉन्वेंट में नन बनने के गयी। वहां उसे, विधुर नेवल कमांडर के घर, सात बच्चों की देखभाल करने के लिये, भेजा गया। जहां दोनो में प्रेम हो गया और उन्होने शादी कर ली। द्वितीय विश्व युद्ध के समय, वे ऑस्ट्रिया से भाग कर, अमेरिका चले गये। मारिया ने बाद में अपनी जीवनी &#8216;द स्टोरी ऑफ ट्रैप फैमली सिंगरस् (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/The_Story_of_the_Trapp_Family_Singers">The Story of the Trapp Family Singers</a>) नाम से लिखी।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 169px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R6nON9y-sTI/AAAAAAAAAZg/lQrE19QCZQw/s1600-h/Julia+Andrews+nun.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R6nON9y-sTI/AAAAAAAAAZg/lQrE19QCZQw/s200/Julia+Andrews+nun.jpg" border="0" alt="" width="159" height="155" /></a><p class="wp-caption-text">नन की भूमिका में जूलिया एंड्रयूस्</p></div>
<p>सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक, फिल्म मारिया की पुस्तक &#8216;द स्टोरी ऑफ ट्रैप फैमली सिंगरस्&#8217; पर आधारित है। फिल्म की मूलभूत कहानी तो पुस्तक से ली गयी है पर फिल्मी मसाले के लिये, उसमें बदलाव किया गया है। वास्तव में, मारिया द्वितीय विश्व युद्ध के पहले ही कमांडर के घर बच्चों को देखने गयी थी और उसकी शादी भी पहले हो गयी थी पर यह फिल्म में यह सब द्वितीय विश्व युद्ध के समय का दिखाया गया है। हांलाकि वे द्वितीय विश्व युद्ध के समय ही वहां से भागे थे।</p>
<p>फिल्म में मारिया की भूमिका, जूलिया एंड्रयूस् कलाकारा ने निभाया है। यह कथा सॉल्सबर्ग की है और फिल्म की शूटिंग भी सॉल्सबर्ग में हुई है। यह एक बेहतरीन फिल्म है। यदि आपने नहीं देखी है तो अवश्य देखें। इस फिल्म का ट्रेलर का आनन्द लें।</p>
<p style="text-align:center;"><span class='embed-youtube' style='text-align:center; display: block;'><iframe class='youtube-player' type='text/html' width='500' height='312' src='http://www.youtube.com/embed/Aw-Om-t8iiM?version=3&amp;rel=1&amp;fs=1&amp;showsearch=0&amp;showinfo=1&amp;iv_load_policy=1&amp;wmode=window' frameborder='0'></iframe></span></p>
<p>सॉल्सबर्ग, वियाना से दूर है। वहां एक दिन में जाकर वापस नहीं आया जा सकता था इसलिये वहां नहीं गया। जिस जगह पर इस फिल्म की शूटिंग हुई है वहां पर कन्वेन्शन सेन्टर बन गया है और अन्तर-राष्ट्रीय सम्मेलन होते हैं। क्या मालुम कभी वहां सम्मेलन में जाने का मौका मिल जाय तब ही इस फिल्म की यादों को पूरा कर लूंगा।</p>
<p>इसी फिल्म पर आधरित हिन्दी की फिल्म &#8216;परिचय&#8217; है। इसमें भारतीय परवेश के अनुसार,  बदलाव किये गये हैं। इस फिल्म की मुख्य भूमिका में प्राण, जीतेन्द्र, और जया भादुड़ी हैं। परिचय फिल्म का गाना &#8216;सारे के सारे, गामा के संग&#8217; सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक के लोकप्रिय गीत &#8216;डो रे मी &#8230; डो अ डीयर&#8217; पर आधारित है। इसे भी आप सुन सकते हैं।</p>
<p style="text-align:center;"><span class='embed-youtube' style='text-align:center; display: block;'><iframe class='youtube-player' type='text/html' width='500' height='312' src='http://www.youtube.com/embed/ELKL0F2To_Q?version=3&amp;rel=1&amp;fs=1&amp;showsearch=0&amp;showinfo=1&amp;iv_load_policy=1&amp;wmode=window' frameborder='0'></iframe></span></p>
<h3 style="text-align:center;">टमटम पर, राजसी ठाट-बाट के साथ</h3>
<p>वियाना हवाई अड्डे पर, सिस्टर सिग्रेड और सिस्टर कारमेन, मुझे लेने आयी थीं। मैं इन लोगों से कभी नहीं मिला था। लेकिन उन्हें, उनके कपड़ों के कारण पहचान गया। यह लोग, एक बड़ी सी स्टेशन वैगन लेकर आयीं थीं जिसमें बैठने की तीन पंक्तियां थीं।</p>
<ul>
<li> सिस्टर कारमेन जर्मनी से हैं। वे बहुत अच्छा कार चलाती हैं। उन्हें वियाना शहर के बारे में  अच्छा पता  है।</li>
<li>सिस्टर सिग्रेड महाराष्ट्र से हैं। उनकी हिन्दी अच्छी है। इस समय वे, सिस्टर जनरल की सलाहकार हैं। सिस्टर सिग्रेड को जर्मन भाषा तो आती है पर वियाना के बारे में ज्यादा पता नहीं था। वियाना में, सिस्टर सिग्रेड ने मेरा ख्याल रखा। मैं सारी सिस्टरस् और खास तौर से उनका आभारी हूं।</li>
</ul>
<div style="border-top:7px solid #5c8a64;border-bottom:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">सिस्टर सीग्रेड, मुझे भाषाओं की खास जानकार लगीं</div>
<p>सिस्टर सिग्रेड की आवाज मधुर है वे गाना भी अच्छा गातीं हैं। एक दिन जब हम लोग घूमने निकले तब उन्होंने कार में, मां मरियम की स्तुति में एक भजन सुनाया। उन्होने बताया कि वे हमेशा बाहर जाते समय यह भजन गाती हैं। इस भजन में, मां मरियम से प्रार्थना है कि हमें अपनी शरण में ले लो। मैंने कार में ही इस गाने को रिकॉर्ड कर लिया था। आप भी इसे <a href="http://www.esnips.com/doc/e8fbcc52-9729-4408-9c81-e1ef9de74ef3/come-with-us-mary-prayer">यहां</a> सुन सकते हैं।</p>
<p style="text-align:left;">भारत जाते समय, सिस्टर सिग्रेड, मुझे  हवाई अड्डे छोड़ने भी आयीं थीं। उस समय सिस्टर सिग्रेड ने हिन्दी में एक भजन सुनाया। वे भारत की लगभग सब भाषा में भजन गा लेती हैं और जर्मन में तो गाती ही हैं। मुझे, वे भाषा की खास जानकार लगीं।</p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 507px"><img title="Fiaker-hero square-vienna" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2009/12/fiaker2bhero27s2bsquare.jpg?w=497&#038;h=381" alt="" width="497" height="381" /><p class="wp-caption-text">सिस्टर सिंथिया और सिस्टर सीग्रिड, टमटम पर। साथ में है महिला चालक लियाना। यह चित्र हीरोस् स्कवैर (Heroes&#039; Square) पर खींचा गया था। टमटम के पीछे, घुड़सवारी करते हुऐ, ऑस्ट्रिया के आर्कड्यूक चार्लस् Archduke Charles of Austria की मूर्ति है। वे राजा के पुत्र और १८वीं शताब्दी में आस्ट्रिया सेना में फील्ड मार्शल थे।</p></div>
<p>बर्लिन में यदि कुछ जगहों पर रिक्शा के द्वारा घूमा जा सकता है तो वियाना में घोड़ागाड़ी पर। वियाना में घोड़ागाड़ी, पुरूष वा महिला दोनो ही चलाते हैं। जिस घोड़ागाड़ी का मैंने चित्र लिया था उसकी चालक महिला थी। उसका नाम नाम लियाना है। उसने मुझे बताया कि इस घोड़ागाड़ी को फिआकर कहते हैं। मैंने उसे बताया कि भारत में इसे टमटम कहते हैं। चलते समय लियाना ने मुस्करा कर कहा &#8216;टमटम&#8217;। मैंने भी मुस्करा कर जवाब दिया &#8211; फिआकर। इन घोड़ागाड़ियों के इतिहास के बारे में कुछ जानकारी <a href="http://members.aon.at/krippenfreundewien/fiaker_engl.htm">यहां</a> से प्राप्त की जा सकती है।</p>
<p>इस तरह की घोड़ागाड़ी,  महारानी विक्टोरिया की प्रिय सवारी थी और तभी इनका चलन बढ़ा। इसलिये इन्हें विक्टोरिया भी कहा जाता है। विक्टोरिया नम्बर २०३, घोड़ा गाड़ी के इर्द-गिर्द घूमती लोकप्रिय फिल्म है। इसमें मुख्य भूमिका अशोक कुमार और प्रान ने निभायी है।</p>
<h3 style="text-align:center;">सिगमंड फ्रायड संग्रहालय</h3>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 202px"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R8DZrIX9UTI/AAAAAAAAAbM/UT8H0jSrl0A/s1600-h/Sigmund+Freud+Museum.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R8DZrIX9UTI/AAAAAAAAAbM/UT8H0jSrl0A/s200/Sigmund+Freud+Museum.JPG" border="0" alt="" width="192" height="144" /></a><p class="wp-caption-text">सिगमंड फ्रायड का वियाना में घर जहां पर अब संग्रहालय है</p></div>
<p>वियाना दुनिया के संगीत की राजधानी कही जाती है। यहां बड़े-बड़े संगीतकार हुए हैं जिनमें बीथोवियन, (Beethoven) मोज़ार्ट (Mozart) मुख्य हैं। वियाना में लोग इनके संग्रहालय या म्यूज़िक कॉंसर्ट देखने जाते हैं पर मैं यदि वियाना में कहीं जाना चाहता था तो उस  जगह, जहां सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud)  ने अपना जीवन व्यतीत किया।</p>
<p>फ्रायड १९३८ तक वियाना में रहे। वे यहूदी थे। १९३८ में, वियाना जर्मनी का हिस्सा बन गया तब वे सपरिवार लंदन चले गये। १९३९ में, वहां उनकी मृत्यु हो गयी।</p>
<p>मैं बर्लिन से तैयार होकर निकला था। नाश्ता, हवाई जहाज में ही कर लिया था।  हम लोग  वियाना हवाई अड्डे से ही <a href="http://www.freud-museum.at/e/index.html">फ्रायड संग्रहालय</a> देखने चले गये। इस संग्रहालय को बनाने में उसकी बेटी ने मदद की। संग्रहालय के इंचार्ज ने बताया कि इस संग्रहालय को लगभग १०० लोग रोज देखने आते हैं।</p>
<p>संग्रहालय में मेरे साथ सिस्टर सीग्रेड और सिस्टर कारमेल थीं। हमें देख कर, वहां पर काम कर रही महिला मुस्कराने लगी। मैंने पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या आप लोग, सिंगमड फ्रायड के संग्रहालय में, सिस्टरों को देख कर मुस्करा रही हैं?&#8217;</p></blockquote>
<p>उसने हांमी भरी। लेकिन मुस्कराने का कारण यह भी बताया कि हम तीन में से दो भारतीय हैं।</p>
<div style="border-top:7px solid #5c8a64;border-bottom:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">फ्रायड पढ़ाई के सारे विषयों में या  तो बहुत अच्छे थे या उत्कर्ष &#8211; इससे कम नहीं</div>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 189px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R8DbuYX9UUI/AAAAAAAAAbU/iAKdJYqpbGk/s1600-h/Sigmund+Freud+wating+room.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R8DbuYX9UUI/AAAAAAAAAbU/iAKdJYqpbGk/s200/Sigmund+Freud+wating+room.JPG" border="0" alt="" width="179" height="135" /></a> <p class="wp-caption-text">मरीजों के लिये वेटिंग रूम</p></div>
<p>यहां पर फ्रायड के शिक्षा संबंधी सर्टिफिकेट भी देखे जा सकते हैं। यह बताते हैं कि फ्रायड सारे विषयों में,</p>
<ul>
<li>बहुत अच्छे (very good) थे, या</li>
<li>उत्कर्ष (excellent) थे।</li>
</ul>
<p>इससे कम नहीं।</p>
<p>इस संग्रहालय से कुछ यादगार सामाग्री (Souvenir) भी खरीदी जा सकती है। मैंने वहां से फ्रायड की एक फोटो खरीदी। उनके मरीजों का प्रतीक्षालय (Waiting room) वा उनका परामर्श देने वाला कमरा (Consulting chamber) भी देखा।<br />
<a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R8DbuYX9UUI/AAAAAAAAAbU/iAKdJYqpbGk/s1600-h/Sigmund+Freud+wating+room.JPG"></a><br />
फ्रायड आजकल प्रासंगिक नहीं माने जाते हैं। लेकिन जिस समय उन्होंने सेक्स के बारे में अपने सिद्घान्तो को प्रतिपादित किया उस समय इस विषय पर चर्चा करना करना, एक हिम्मत की बात थी। उन्होंने सामाजिक बंधनो से ऊपर उठकर इस विषय पर बात की। उनके पूरे संघर्ष को, जीवनी के रूप में, इर्विंग स्टोन (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Irving_Stone">Irving Stone</a>) ने &#8216;पैशन आफ माइंड&#8217; (The Passion of Mind) नामक पुस्तक में लिखा है। यह पुस्तक पढ़ने योग्य है।</p>
<h3 style="text-align:center;">मन प्रभू के चरणों में</h3>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 190px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R9qSXkzsTiI/AAAAAAAAAc0/33vMwSkdfUo/s1600-h/convent-vienna.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R9qSXkzsTiI/AAAAAAAAAc0/33vMwSkdfUo/s200/convent-vienna.JPG" border="0" alt="" width="180" height="135" /></a><p class="wp-caption-text">कांवेन्ट से वियाना शहर</p></div>
<p>मैं वियाना के जिस कॉन्वेंट में ठहरा, वह एक पहाड़ी पर है। यह बेहद खूबसूरत जगह है। यहां से वियाना शहर का काफी भाग दिखाई पड़ता है। इसका क्षेत्रफल भी बहुत बहुत अधिक है। यहां से प्रकृति का नज़ारा भी सुन्दर है। उस समय पत्तियां लाल, और पीली हो रही थीं। जो कि ठंड के आते-आते, अधिकतर सारे पेड़ों से &#8211; क्रिसमस पेंड़ (Christmas Tree) को छोड़कर &#8211; गिर जाती हैं। बसन्त ऋतु के आते ही फिर निकलती हैं। पेड़ हरे, पीले, और लाल रंग के दिखायी देते हैं। यह एक खूबसूरत नज़ारा होता है। मुझे यहां शान्ति मिली और लगा कि मन ईश्वर के चरणों में है।</p>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 190px"><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R9qXhUzsTmI/AAAAAAAAAdU/wQsKhZ3tD0Y/s1600-h/convent+vienna+room.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R9qXhUzsTmI/AAAAAAAAAdU/wQsKhZ3tD0Y/s200/convent+vienna+room.JPG" border="0" alt="" width="180" height="135" /></a><p class="wp-caption-text">कॉंन्वेन्ट में कमरा</p></div>
<p>कांवेन्ट में केवल सिस्टरें ही रहती हैं। वे अपने कॉवेन्ट के मुखिया का भी चुनाव करती हैं जिसे सिस्टर जनरल कहा जाता हे। यह छ: साल के लिये होता है। इनकी चार सलाहकार होती हैं जो उन्हें सलाह देती हैं। इन्होंने विश्व को खण्डों में बांटा है। हर खण्ड का अपना मुखिया हैं। वे अपने सलाहकारों के साथ आगे की योजना बनाकर कॉवेन्ट में भेजती हैं। कॉंवेन्ट के  अनुमोदन के बाद,  उस खण्ड में योजना के अनुसार  काम  आगे चलता है।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 187px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R9qYIEzsTnI/AAAAAAAAAdc/TDo1jAavlLI/s1600-h/convent+vienna+room+outside.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R9qYIEzsTnI/AAAAAAAAAdc/TDo1jAavlLI/s200/convent+vienna+room+outside.JPG" border="0" alt="" width="177" height="133" /></a><p class="wp-caption-text">कमरे की खड़की से बाहर का दृश्य</p></div>
<p style="text-align:left;">वियाना में सारे स्कूल सरकारी हैं। प्राइवेट स्कूल बहुत मंहगे हैं इसलिये यह कॉन्वेंट वहां पर कोई स्कूल नहीं चलाता है। लेकिन, बहुत सी सिस्टरें, स्कूलों में पढ़ाती हैं या फिर अस्पताल में या वृद्घ लोगों के आश्रम में नर्स की तरह काम करती हैं। किन्डरगार्डेन के लिये जरूर कांवेन्ट कुछ सुविधा प्रदान करता है। यहां से जो पैसे मिलते हैं वे कॉन्वेंट के पास जाते हैं। इससे वहां का खर्च वगैरह चलता है। कुछ पैसा सिस्टरों के वृद्घ उम्र के लिये रखा जाता है।</p>
<h3 style="text-align:center;">क्या भाई को सौतेली बहन स्वीकर कर लेनी चाहिये</h3>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 123px"><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R-ZIlv4H1II/AAAAAAAAAfA/YyX87At7gXA/s1600-h/Sine+Hill+Dey+Karmell+Sisters.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R-ZIlv4H1II/AAAAAAAAAfA/YyX87At7gXA/s200/Sine+Hill+Dey+Karmell+Sisters.jpg" border="0" alt="" width="113" height="168" /></a><p class="wp-caption-text">सिस्टर साइन हिल डे और सिस्टर कारमेल</p></div>
<p>इस कॉन्वेंट में, मेरी मुलाकात सिस्टर साइन हिल डे से हुई। वे कांवेन्ट की सिस्टर जनरल  रह चुकी हैं। सिस्टर डे, बहुत समय भारत में रहीं हैं। हिन्दी अच्छी समझती हैं पर बोल नहीं पाती हैं। उन्होंने बताया कि भारत में लोग उन्हें फ्लाइंग नन कहते थे क्योंकि वे पहले मोपेड, फिर स्कूटर, और बाद में मोटरसाइकिल चलाती थीं।</p>
<p>सिस्टर डे मुझे बहुत रोचक महिला लगीं। उनके पास किस्सों का भंडार था जिन्हें वे, न केवल नाश्ते और खाने पर, लेकिन शाम को घूमते समय सुनाती रहीं। उनका एक किस्सा तो मुझे फिल्मों की तरह लगा।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 141px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R-ZRqf4H1JI/AAAAAAAAAfI/D3KJwhhRZiM/s1600-h/Mother+Mary+statue.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R-ZRqf4H1JI/AAAAAAAAAfI/D3KJwhhRZiM/s200/Mother+Mary+statue.JPG" border="0" alt="" width="131" height="175" /></a><p class="wp-caption-text">कॉन्वेंट के पूजाघर (Chapel) में मां मरियम की मूर्ती</p></div>
<p>उन्होंने बताया कि बहुत साल पहले, एक भारतीय प्रतिनिधि-मंडल वियाना आया था। उसके साथ, एक भारतीय डाक्टर भी था। वह कुछ महीने वहां रहा। उसके बाद लंदन, फिर वापस भारत चला गया। वियाना में, उसका प्रेम एक आस्ट्रियन लड़की से हो गया। उससे एक लड़की हुई। मां, आस्ट्रिया में ही रह गयी थी। उसने उस लड़की को अनाथालय में छोड़ दिया। लड़की देखने में एकदम भारतीय लगती है।</p>
<p>सिस्टर डे भारत में उसके पिता को जानती थीं। लेकिन वे उससे, इस बात को नहीं कह पायीं। उसका पुत्र अपनी पत्नी के साथ सिस्टर डे से अक्सर मिलने आया करता था। उन्होंने उसे एक दिन अकेले आने को कहा और उसे उसकी सौतेली बहन के बारे में बताया। वह लड़की,  भारत में  अपने सौतेले भाई से भी  मिली। लेकिन उसके भाई ने, उसे मानने से इन्कार कर दिया।</p>
<p>सिस्टर डे ने बताया कि भाई का लड़का अर्थात आस्ट्रिया में रह रही लड़की का भतीजा, इन बातों को ज्यादा ठीक से समझता है। वह अपनी सौतेली बुआ को स्वीकार कर सकता है। शायद निकट भविष्य में, ऐसा संभव हो सके। यदि ऐसा होता है तो उस महिला को वह पहचान मिल सकेगी जो उसके पिता या सौतेले भाई ने नहीं दी।</p>
<p>मुझे लगता था कि यदि मैं वह पिता या भाई होता तो उसे जरूर स्वीकार कर लेता। गलतियां स्वीकारने में कोई छोटा नहीं होता &#8211; बड़ों की यही <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/11/time-to-think_25.html">खासियत होती है</a>। शायद उसके पिता को अपनी प्रतिष्ठा या भाई को अपने पिता के नाम पर समाज में धक्का लगने का डर रहा हो या हो सकता है कि भाई विश्वास ही नहीं करता हो।</p>
<p>मैं दिल से चाहता हूं कि भतीजा अपनी सौतेली बुआ को स्वीकार कर ले। मैं भगवान को नहीं मानता &#8211; अज्ञेयवादी हूं, <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/04/blog-post_09.html">धर्म को अलग तरह से देखता हूं</a>,  पर हे प्रभू, यदि तुम हो, तो ऐसा होने देना।</p>
<p>सिस्टर डे के पास बहुत से किस्से थे। मैंने उनसे कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;सिस्टर डे, आप इन किस्सों को  किताब के रूप में लिख कर क्यों नहीं प्रकाशित करवातीं।&#8217;</p></blockquote>
<p>वे इस बात का कोई जवाब देने से टाल गयीं। उन्होने मुझे फिर वियान कॉन्वेंट में रहने के लिये सपरिवार बुलाया है। यदि मैं फिर गया तो उनसे चिट्ठा लिखवाना जरूर शुरू करवा दूंगा <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </p>
<div>
<h3 style="text-align:center;">वियाना रात में</h3>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 210px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R_ToZf4H1TI/AAAAAAAAAgw/2VHLfyItQD8/s1600-h/Kahlenberg+Church.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R_ToZf4H1TI/AAAAAAAAAgw/2VHLfyItQD8/s200/Kahlenberg+Church.JPG" border="0" alt="" width="200" height="150" /></a><p class="wp-caption-text"> काहलेनबर्ग पर चर्च</p></div>
<div>
<p>एक दिन, शाम को, सिस्टर साइन हिल डे  मुझे वियाना के नज़ारे दिखाने ले गयीं।</p>
<p>हम लोग पहले काहलेनबर्ग (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kahlenberg">Kahlenberg</a>) पहाड़ी पर गये। अठ्ठारहवीं शताब्दी में टर्की ने आस्ट्रिया पर हमला बोल दिया था पोलैंड की सहायता से उन्हें हराया जा सका। इसी उपलक्ष में उस जगह पर एक चर्च का निर्माण हुआ था। यहां से पूरे वियाना, को जो की बिजली रोशनी में जगमग कर रहा था, देखा जा सकता है। यह अपने में सुन्दर दृश्य है। वहां पर होटल मैनेजमेंट स्कूल है जिसका अपना रेस्ट्रां है। इसमें असाम चाय के साथ, दार्जलिंग चाय भी मिलती है। मैंने इसे न लेकर फ्रूट चाय लेना पसन्द किया।</p>
<p>चाय पीने के बाद हम लोग ग्रिनज़िंग (Grinzing) नाम जगह गये। ग्रिनज़िंग यानि कि जहां इसी साल में बनी वाइन (wine) मिलती हो। ये जगह वियाना में प्रसिद्घ है। आस्ट्रिया न केवल अपने संगीत के लिये, पर अपनी वाइन के लिए भी प्रसिद्घ है। इस जगह बहुत सारे रेस्ट्रां हैं। जो कि अपनी वाइन स्वयं बनाते हैं और खाने में पेश करते हैं। पर वहां हर तरह की वाइन भी मिलती है।</p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 498px"><img title="Vienna from Kahlenberg" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/4/4b/720px-Panorama-vom-Kahlenberg.jpg/800px-720px-Panorama-vom-Kahlenberg.jpg" alt="" width="488" height="93" /><p class="wp-caption-text">काहेलबर्ग से वियाना - यह चित्र Clemens Pfeiffer का खींचा हुआ है और विकिपीडिया के सौजन्य से है। </p></div>
<p style="text-align:center;">&nbsp;</p>
<p>हम लोग, वहां के ह्यूडोल्फ हाफ (Houdolf Haf) नामक रेस्ट्रां में खाने गये। यह १०० साल से भी ज्यादा पुराना रेस्ट्रां है। यहां पर अक्सर वियाना राजा के पुत्र आया करते थे।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 192px"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R_Tpjv4H1UI/AAAAAAAAAg4/hebYsBkzie0/s1600-h/Houdolf+Haf.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R_Tpjv4H1UI/AAAAAAAAAg4/hebYsBkzie0/s200/Houdolf+Haf.JPG" border="0" alt="" width="182" height="136" /></a><p class="wp-caption-text">रेस्ट्रां में पियानो एकार्डियन और वायलन बजाते रोमा जिप्सी</p></div>
<p>यहां पर एक व्यक्ति पियानो एकार्डियन और दूसरा वायलन बजा रहा था। वायलन बजाने वाला व्यक्ति मुझे भारतीय लगा। मैंने उससे बात की तो उसने बताया कि वह रोमा जिप्सी है। जिप्सियों का मूल, भारत ही कहा जाता है। शायद इसलिये वह मुझे भारतीय लगा। मुझसे बात करते समय, उसने मुस्कराकर, हिन्दी के कुछ शब्द भी बोले।</p>
<p>मैं बाहर जाता हूं तो वहीं का खाना पसन्द करता हूं। वहां पर मुझे एक भारतीय मिले उन्होंने एक आस्ट्रियन लड़की से शादी कर ली है और वहीं पर बस गये हैं। आजकल फैशन गहनों (Fashion Jewellery) का बोलबाला है। इसी को वे, दुनिया भर से निर्यात कर, आस्ट्रिया में बेचते हैं। उनकी पत्नी बहुत अच्छी हिन्दी बोलती हैं। मैंने पूछा कि वे कैसे इतनी अच्छी हिन्दी बोलती हैं। उन्होंने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;वियाना के विश्वविद्यालय में हिन्दी पढ़ायी जाती है। मैंने वहां पर हिन्दी पढ़ी और सीखी है।&#8217;</p></blockquote>
<p>भारतीय शख्स की सलाह पर, मैंने आलू सलाद (Potato Salad),  वीनर शीत्जल (Weiner Schnitzel)  खाने में लिया।</p>
<ul>
<li>विनर शीतजल एक नामिष भोजन है जिसमें पोर्क (सुअर का मांस)  होता है। यह वियाना की खासियत है।</li>
<li>आलू सलाद में कुछ मिठास थी।</li>
</ul>
<p>मुझे, आलू सलाद पसन्द आयी। इसके आलू बहुत कोमल थे, कांटे से पकड़ने पर टूटते थे। सिस्टर डे ने बताया कि अच्छा पका आलू इसी तरह से होता है। मैं, आलू सलाद को, कांटे से नहीं खा पाया अंतत: उसे चम्मच से ही खाना पड़ा।  इसके बनाने का तरीका  भी सिस्टर डे ने मुझे बताया था पर समझ में नहीं आया।</p>
<h3 style="text-align:center;">एक प्यारी सी लड़की &#8211; लीसा</h3>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 140px"><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SFDhkMvzoQI/AAAAAAAAAls/DXsZsSRvNMk/s200/Lisa-2.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SFDhkMvzoQI/AAAAAAAAAls/DXsZsSRvNMk/s200/Lisa-2.jpg" border="0" alt="" width="130" height="163" /></a><p class="wp-caption-text">लीसा</p></div>
<p>वियाना के कॉन्वेंट में, मेरी मुलाकात लीसा से हुई। वह मुझे एक प्यारी सी लड़की लगी।</p>
<p>लीसा ने मुझे बताया कि आस्ट्रिया में उच्च शिक्षा या व्यावसायिक (Professional) शिक्षा के पहले की शिक्षा निम्न भागों में है:</p>
<ul>
<li>किण्डरगार्डन (Kindergarten) ३ से ६ साल की उम्र</li>
<li>फाल्क शुले (Volkschule) ७ से ११ साल की उम्र</li>
<li>जिमनेसियम (Gymnasium) ४ साल की पढ़ाई</li>
<li>मथुरा  (Mathura)   यह pre university की तरह है।</li>
</ul>
<div>
<p>लीसा जिम्नेसियम  में पढ़ती है। शायद यह हमारे  यहां के हिसाब से दसवीं क्लास है।</p>
<p>लीसा को कॉवेन्ट में देखकर, मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने पूंछा कि वह यहां कैसे आयी है। उसने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं लिंज (<a title="Linz" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Linz" >Linz</a>) में रहती हूं। यह वियाना से लगभग २०० किलोमीटर दूर है। कॉन्वेंट में रहने वाली एक सिस्टर का घर, मेरे घर के पास है। मैं उन्हीं के कहने पर, छुट्टियों में कॉवेन्ट में आती हूं। मुझे यहां अच्छा लगता है लेकिन मेरे मित्रों को कॉवेन्ट पर जाना अच्छा नहीं लगता है।&#8217;</p></blockquote>
<div style="border-top:7px solid #5c8a64;border-bottom:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">लिंज़ शहर के घूमते हुऐ सुन्दर चित्र देखने के लिये <a href="http://www.herold.at/servlet/at.herold.sp.servlet.SPRPHomeServlet?context=RP&amp;sd=AH1_11951343419150101&amp;rd=&amp;unid=ROOT-herold_main:4">यहां</a> जायें।</div>
<div>लीसा के पिता एयर कंडीशनिंग कंपनी में काम करते हैं और मां उसी स्कूल में काम करती है जहां वह पढ़ती है। यह एक सरकारी स्कूल है। वह अपने माता पिता की इकलौती सन्तान है पर उसे कभी अकेलापन नहीं महसूस होता है क्योंकि उसके छ: चचेरे ममेरी, भाई &#8211; बहन हैं जिनके साथ वह सप्ताहान्त बिताती है। मैंने लीसा से कहा कि भारत में लोग अक्सर लड़के की चाहत रखते हैं क्या ऎसा यहां भी है उसने कहा,</div>
<blockquote><p>&#8216;नहीं, यहां इस तरह की कोई भावना नहीं है।&#8217;</p></blockquote>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 189px"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SAFjK7p9u5I/AAAAAAAAAiA/dxjoYrmdtPo/s1600-h/Notebook+school+Classroom+Linz+.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SAFjK7p9u5I/AAAAAAAAAiA/dxjoYrmdtPo/s200/Notebook+school+Classroom+Linz+.jpg" border="0" alt="" width="179" height="135" /></a><p class="wp-caption-text">लीसा के स्कूल में, नोटबुक वाली कक्षा</p></div>
<p>लीसा के पास एक लैपटॉप था। उसने बताया कि वह नोटबुक क्लास में है उसके क्लास में सभी बच्चे अपना लैपटॉप लेकर आते हैं और सारे नोट्स भी उसी पर लेते हैं। काश अपने देश के भी स्कूल इसी तरह के हों।</p>
<p>मुझे <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/03/sisters-nuns.html">सिस्टर डे</a> ने बताया कि लीसा बड़ी होकर डाक्टर बनना चाहती है। मुझे खून देखकर डर लगता है। मैं यह जानते हुए भी कि खून देने में कुछ नहीं होता है आज तक कभी खून नहीं दे पाया। इसीलिये मैं कभी डाक्टर नहीं बन सकता था। हालांकि मैंने उन पुस्तकों को पढ़ा है जिसे उन बच्चों को पढ़ना चाहिये जो डाक्टर बनने का सपना देखते हैं। इन पुस्तकों में से प्रमुख हैं,</p>
<ul>
<li><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/02/microbe-hunters-paul-de-kruif.html">माइक्रोब हंटरस् &#8211; जीवाणु के शिकारी लेखक पॉल डी क्रुइफ</a> (Microbe Hunters by <a title="Paul de Kruif" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Paul_de_Kruif" >Paul de Kruif</a>): (<a href="http://www.esnips.com/doc/a2066cf4-760f-4bc2-b21e-66a873daa565/Microbe-Hunters-by-Paul-de-Kruif"><em>►</em></a>)</li>
<li><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/12/double-helix-james-dewey-watson.html">डबल हेलिक्स – जनन उत्पत्ति निर्देश रहस्य का पर्दाफाश</a> लेखक जेम्स वाटसन (<a title="Double helix" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Double_helix" >Double Helix</a> by <a title="James D. Watson" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/James_D._Watson" >James Watson</a>): (<a href="http://www.esnips.com/doc/9880a22e-039e-42d9-86fd-f0af6c91dd80/The-Double-Helix-by-James-Dewey-Watson"><em>►</em></a>)</li>
<li><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/12/fantastic-voyage-isaac-asimov.html">फैंटास्टिक वॉयेज: अद्भुत यात्रा</a> लेखक <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/01/favourite-sci-fi-writer.html">आईसेक एसीमोव</a> (<a rel="imdb" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Fantastic_voyage" >Fantastic Voyage</a> by  <a title="Isaac Asimov" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Isaac_Asimov" >Issac Asimov</a>): (<a href="http://www.esnips.com/doc/364db1f6-d619-46ee-92de-e28b149e4374/%E0%A4%85%E0%A4%A6%E0%A4%AD%E0%A5%81%E0%A4%A4-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE"><em>►</em></a>)</li>
</ul>
<div>
<p>मैंने लीसा को यह पुस्तकें भेजने का वायदा किया था। इनमें पहली वाली नहीं मिली पर दूसरी और तीसरी मिली। इन दो पुस्तकों को, मैंने उसके पास भेजा है।</p>
<div style="border-top:7px solid #5c8a64;border-bottom:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">आप पुस्तकों के नाम पर चटका लगा कर इनकी समीक्षा हिन्दी में पढ़ सकते हैं। इन समीक्षाओं का हिन्दी में पॉडकास्ट सुनने के लिये, इनके आगे कोष्टक के अन्दर लगे चिन्ह <em>►</em> पर चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ऑग फॉरमैट में है। सुनने के लिये दहिने तरफ का विज़िट पढ़ें।</div>
<blockquote><p>Guten Tag, Lisa<br />
It was pleasure to meet you in Vienna. I wish, I had more time to talk to you. I wanted to talk about about Austria and student life there. The time was short and I had to pack my things. I promise that when we meet next, I will have tea with you.<br />
Do let me know when you receive the books. Do remember the conditions:</p>
<ul>
<li> You have to read and tell me about the books.</li>
<li> You have to share it with your friends.</li>
</ul>
<p>All the best in your life,<br />
Auf Wiedersehen<br />
लीसा नमस्ते<br />
तुमसे वियाना में मिल कर अच्छा लगा। काश मेरे पास और समय होता तो मैं तुमसे ऑस्ट्रिया और वहां के विद्यार्थी जीवन के बारे में बात करता। मुझे समान पैक करना था। इसलिये तुम्हारे हाथ की बनी चाय न पी सका। अगली बार मिलेंगे तो चाय भी पियेंगे और बहुत सारी बातें करेंगे।<br />
लिखना क्या किताबें मिली, शर्तों का भी ध्यान रखनाः</p>
<ul>
<li> तुम्हें, इन किताबों को पढ़ कर, इनके बारे में, लिख कर मुझे बताना है</li>
<li> इन्हें सबको पढ़ने के लिये देना है</li>
</ul>
<p>तुम्हें जीवन की हर खुशी मिले।<br />
हम फिर मिलेंगे,<br />
तब तक के लिये अलविदा।</p></blockquote>
<p>लीसा से मेरी अक्सर ई-मेल पर बात होती है। मैं अपने बिटिया रानी (वास्तव में मेरी बहूरानी), बेटे राजा और लीसा से होने वाली ई-मेल की चर्चा <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/search/label/%E0%A4%88-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80">ई-पाती श्रंखला</a> में करता रहता हूं।</p>
<h3 style="text-align:center;">वियाना में घूमने की जगहें</h3>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 96px"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpEX2oAPzI/AAAAAAAAAiw/iB6Do8b-Tus/s1600-h/vienna-hop-on-hop-off.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpEX2oAPzI/AAAAAAAAAiw/iB6Do8b-Tus/s200/vienna-hop-on-hop-off.jpg" border="0" alt="" width="86" height="183" /></a><p class="wp-caption-text">हॉप ऑन - हॉप ऑफ बस का टिकट</p></div>
<p>वियाना में भी, <a href="http://unmukth.wordpress.com/2009/10/19/berlin-travelogue/">बर्लिन</a> की तरह हॉप ऑन &#8211; हॉप ऑफ (Hop on &#8211; Hop off) बसें चलती हैं। वियाना घूमने का यही सबसे अच्छा तरीका है। इनके तीन अलग-अलग रूट हैं पर उनके चलने तथा समाप्त होने की जगह एक ही है। तीनो के टिकट यदि एक साथ खरीदें तो वह २० यूरो पड़ता है।</p>
<p>जैसा कि मैंने पहले <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/02/fiaker-horse-drawn-carriage-vienna.html">बताया</a> है कि मैं एक दिन सिस्टर सीग्रिड और सिस्टर सिंथिया के साथ वियाना शहर घूमने गया था। हमने तीनो रूट का टिकट एक साथ लिया।</p>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 181px"><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpE9WoAP0I/AAAAAAAAAi4/yl5ppCT1tTk/s1600-h/Heroes'++Square.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpE9WoAP0I/AAAAAAAAAi4/yl5ppCT1tTk/s200/Heroes'++Square.JPG" border="0" alt="" width="171" height="128" /></a><p class="wp-caption-text">हीरोस् स्कवैर</p></div>
<p>हम लोग सबसे पहले हीरोस्  स्कवैर (<a title="Hősök tere" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/H%C5%91s%C3%B6k_tere" >Heroes&#8217;  Square</a>) पर उतरे। यह ऐतिहासिक जगह है। यहां महत्वपूर्ण कार्यक्रम होते हैं। १९३८ में जब हिटलर ने आस्ट्रिया को जर्मनी में मिलाया तो उसकी घोषणा यहीं पर की थी।</p>
<p>यहां पर एक जगह एक संगीतकार वायलिन पर धुन बजा रहा था। उसके सामने बर्तन में कुछ लोग पैसा भी डाल रहे थे।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 159px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpFyGoAP1I/AAAAAAAAAjA/GAX5o0RECK0/s1600-h/Saint+Stephens+Cathedral.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpFyGoAP1I/AAAAAAAAAjA/GAX5o0RECK0/s200/Saint+Stephens+Cathedral.JPG" border="0" alt="" width="149" height="112" /></a><p class="wp-caption-text">अन्दर से, सेंट स्टीफंस कैथड्रल</p></div>
<p>हम लोग सेंट स्टीफंस कैथड्रल (Saint Stephens Cathedral) गये।  यह कैथड्रल यहां का सबसे महत्वपूर्ण चर्च है। वहां पर पूजा (<a title="Mass (mass spectrometry)" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Mass_(mass_spectrometry)" >Mass</a>) हो रही थी। यह चर्च अपने में भव्य है। पूजा जर्मन भाषा में थी। कैथड्रल जाते समय, हमने वह जगह भी देखी, जहां मोजार्ट ने अपने जीवन के कुछ साल बिताये थे।</p>
<p>चर्च में मोमबत्ती जलाने के रिवाज है। सिस्टर ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;ईसा मसीह ने दुनिया में प्रकाश दिया था। चर्च में मोमबत्ती जलाना, इसी का प्रतीक है।&#8217;</p></blockquote>
<p>यहां मोम से बने दिये जलाये जाते हैं। मैंने दो दिये जलाये। सिस्टर सिग्रेड ने पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप दो मोमबत्ती क्यों जला रहे हैं। आपका तो एक ही बेटा है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह सच है कि भगवान ने मुझे एक ही बेटा दिया है कोई बेटी नहीं दी। लेकिन मैं दूसरी मोमबत्ती अपनी बहूरानी के लिये जला रहा हूं। हम उसे बेटी की तरह ही मानते है।&#8217;</p></blockquote>
<div style="border-top:7px solid #5c8a64;border-bottom:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">मुझे लगा कि सिस्टर सिंथिया के दिल में, एक छोटी सी, नटखट सी, बच्ची है।</div>
<p>हम लोग दूसरे रूट पर गये। इसमें एक मनोरंजन पार्क है और एक बहुत बड़ा गोल घूमने वाला गोला है। यह १० मिनट में पूरा एक चक्कर घूमता है। सिस्टर सीग्रेड ने पूछा कि क्या मैं यहां उतरना चाहूंगा। मैंने मना कर दिया क्योंकि मैं तीसरी रूट पर राजा के महल में उतरना चाहता था। सिस्टर सिंथिया पार्क की तरफ देख कर बोली,</p>
<blockquote><p>&#8216;एक दिन, मैं यहां आऊंगी और पूरा दिन यहीं रहूंगी।&#8217;</p></blockquote>
<p>मुझे लगा कि उनके मन के किसी कोने में  एक छोटी सी, नटखट सी, बच्ची है।<br />
<a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpGCmoAP2I/AAAAAAAAAjI/SqOJeF0-zx8/s1600-h/Danube.JPG"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpGCmoAP2I/AAAAAAAAAjI/SqOJeF0-zx8/s200/Danube.JPG" border="0" alt="" /></a><br />
दूसरे रूट का चक्कर लेते समय, हमें डान्यूब (<a title="Danube" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Danube" >Danube</a>) नदी मिली। यह नदी जर्मनी, आस्ट्रिया, स्लोवेकिया, हंगरी, क्रोशिया, सर्विंग, रोमानिया, बुलगारिया और यूक्रेल से गुजरते हुए ब्लैक समुद्र (<a title="Black Sea" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Black_Sea" >Black sea</a>) में गिरती है। इसे दो भागों में विभक्त कर, उसके बीच में द्वीप बना दिया गया है जिस पर मनोरंजन के कई साधन हैं। नदी पर नावें (cruise) भी चलती हैं। इसे देख मुझे अपनी गोवा यात्रा में मंडोवी नदी पर नाव से सैर की <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/03/goa-cruise-on-mandovi.html">याद आयी</a>।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 182px"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SDgy4_se37I/AAAAAAAAAk8/MPZHMk0UYvM/s1600-h/Schloss+Schonburnn+Vienna.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SDgy4_se37I/AAAAAAAAAk8/MPZHMk0UYvM/s200/Schloss+Schonburnn+Vienna.JPG" border="0" alt="" width="172" height="129" /></a><p class="wp-caption-text">राजा के महल में पीछे का बाग</p></div>
<p>तीसरी ट्रिप में हम राजा के महल (<a title="Schönbrunn Palace" rel="homepage" href="http://www.schoenbrunn.at/" >Schloss Schonbrunn</a>) आये। इसके देखने के लिये कई टूर हैं और सबका पैसा अलग-अलग है। हम लोगों ने सबसे सस्ता वाला टूर लिया। इसमें ३५ कमरों का दिखाया जाता है। इसकी सबसे अच्छी बात है कि यह आपको एक माइक्रोफोन देते हैं। कमरे में जाकर बटन दबाइये तो वह उस कमरे के बारे में यह बताता है और उस कमरे के वर्णन के बाद रूक जाता है। अगले कमरे में जाकर पुन: बटन दबाने पर, उस कमरे के बारे में बताना शुरू करता है।</p>
<p>महल के पीछे राजा का बाग है। यह जगह बहुत सुन्दर थी। हर तरफ हरे भरे लॉन हैं। वहां पर लोगों ने बताया कि गर्मी में यह और भी खूबसूरत लगता है।</p>
<h3 style="text-align:center;">कॉन्वेंट में पूजा और सिस्टर लूसी</h3>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 177px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9b6H_PjYI/AAAAAAAAAkU/5BrJsgxVaVQ/s1600-h/Mass+Vienna.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9b6H_PjYI/AAAAAAAAAkU/5BrJsgxVaVQ/s200/Mass+Vienna.JPG" border="0" alt="" width="167" height="126" /></a><p class="wp-caption-text">कॉंवेन्ट में पूजा</p></div>
<p>कॉवेन्ट में, मैंने उनकी पूजा (Mass) में भी भाग लिया। इसके पहले मैं कभी भी इसाई पूजा में शामिल नहीं हुआ था। उस दिन पूजा के लिये, लंदन से खास तौर पर एक पादरी (Father) आये थे। सिस्टर कारमेल अच्छा आर्गन बजाती हैं वे आर्गन बजा रही थीं। दो सिस्टर और एक अन्य पुरूष (जो इसी पूजा के लिए आये थे) गिटार बजा रहे थे।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 130px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9XDH_PjVI/AAAAAAAAAj8/UM3tXMAAynI/s1600-h/Sister+Adel.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9XDH_PjVI/AAAAAAAAAj8/UM3tXMAAynI/s200/Sister+Adel.JPG" border="0" alt="" width="120" height="160" /></a><p class="wp-caption-text">सिस्टर ऎडल पान फ्लूट बजाती हुई।</p></div>
<p>सिस्टर ऎडल, कभी मेडोलिन बजाती थीं तो कभी एक अन्य वाद्य। मैं इस वाद्य को  नहीं समझ सका। पूजा के बाद सिस्टर ऎडल ने बताया कि यह</p>
<blockquote><p>&#8216;पान फ्लूट है। मेडोलिन इटली का वाद्य है और पान फ्लूट इजिप्ट का। इसका वर्णन बाइबिल में भी है।&#8217;</p></blockquote>
</div>
<div>यह पूजा जर्मन में थी जो कि समझ में नहीं आती थी पर भाव जरूर समझ में आये। कुछ देर भजन गाया जाता था फिर कुछ संदेश। कभी फादर संदेश देते थे तो कोई सिस्टर। मुझे उनका एक भजन &#8216;<a href="http://www.esnips.com/doc/31ef21fe-f0e4-426e-9336-72d1e0748360/Mass-Vienna-Convent">अले लू ल्या</a>&#8216; कर्णप्रिय लगा। इसके संगीत से यह खुशहाली का भजन लगा। शायद इसका अर्थ भी कुछ इसी तरह है।</div>
<div>
<div>पूजा के बाद, वे कुछ पानी और कुछ डबलरोटी सा बांट रहे थे। सिस्टर सिग्रेड ने मुझे बताया कि मुझे यह नहीं लेना है इसके लिए संस्कारों की कई सीढ़ियां पार करनी होती है जो कि मैंने नहीं की है।</div>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 182px"><img style="border:0 none;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9Xun_PjWI/AAAAAAAAAkE/LPNYixC0e-g/s200/Dogs+Vienna.jpg" border="0" alt="" width="172" height="66" /><p class="wp-caption-text">टौमी तो मुझे हमेशा हर जगह मिल जाते हैं - कॉन्वेंट में भी मिले।</p></div>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 110px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9Ybn_PjXI/AAAAAAAAAkM/PO3U-YlnWkQ/s1600-h/Sister+Lucy.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9Ybn_PjXI/AAAAAAAAAkM/PO3U-YlnWkQ/s200/Sister+Lucy.JPG" border="0" alt="" width="100" height="133" /></a><p class="wp-caption-text">सिस्टर लूसी</p></div>
<p>सुबह पूजा के बाद हम लोग नाश्ते के लिये गये। उस दिन सिस्टर लूसी का जन्म दिन था। वे मुम्बई से हैं। उनके लिये, हम लोगों ने Happy birth day गाया। इसी के बाद मैं, सिस्टर सिग्रेड, और सिस्टर सिंथिया वियाना घूमने चले गये थे। लौटते समय, मैंने सिस्टर लूसी के लिए एक सफेद गुलाब लिया। हम लोग जब कॉंवेंट वापस पहुंचे तो वहां रात का खाना चल रहा था। मैंने उनका हांथ चूमकर उन्हें गुलाब दिया। यह न केवल सिस्टर लूसी को पर सारी सिस्टरों को पसन्द आया। सबने तालियां बजाकर इसका स्वागत किया। सिस्टर लूसी ने कहा कि वे इसे ईसा के चरणों में समर्पित करती हैं और वे मेरे लिये प्रार्थना करेंगी। वे अगले सुबह तक, इस बात को याद करती रहीं और नाश्ते पर फिर से मुझे धन्यवाद दिया।</p>
<h3 style="text-align:center;">सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा &#8211; वियाना से वापसी</h3>
<p>वियाना से मेरी उड़ान दिन के ११ बजे थी। मेरे साथ एक और सिस्टर भी उस दिन जा रहीं थी। उन्होंने नाश्ते पर एक छोटा सा भाषण दिया। मैं भी खड़ा हो गया और कहा कि मैं भी कुछ कहना चाहता हूं। सबने इसका स्वागत किया।</p>
<p>मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;गुटन मारगेन (शुभ प्रभात)<br />
वियाना में अनगिनत पर्यटक आते हैं सबके अनुभव अपने ही अलग अलग होते होंगे पर मेरा अनुभव अपने में अद्वितीय है। मैंने वियाना को रात में, दिन में, सिस्टरों के साथ देखा। इस तरह का अनुभव शायद किसी और पर्यटक को हुआ होगा।<br />
आप सबका भारत में स्वागत है। भारत में आप मेरे साथ रहें तो मुझे अच्छा लगेगा।<br />
डांके शॉन (आप सबको बहुत धन्यवाद)<br />
ऑउफ वीडरसेह्न (गुड बाई फिर मिलेंगे)&#8217;</p></blockquote>
<p>वियाना से दिल्ली की यात्रा में, मेरे बगल में एक माड़वाड़ी यूवक बैठे थे। वे फर्राटे से जर्मन बोल रहे थे। मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने पूछा कि क्या वे जर्मनी में रहते हैं। उन्होने बताया कि नहीं। वे नेपाल में रहते हैं और वहां रह कर कालीन का व्यापार करते हैं और उन्हें जर्मनी में बेचते हैं। इसलिये उन्होने जर्मन भाषा सीखी है। वे साल में लगभग दो बार जर्मनी जाते हैं। उन्होने रास्ते में हवाई जहाज पर कुछ इत्र खरीदा। मैंने पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या पत्नी के लिये खरीद रहे हैं?&#8217;</p></blockquote>
<p>वे बोले</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं। मैं यह उपहार देने के लये खरीद रहा हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या हवाई जहाज में खरीदने से कोई फायदा है?&#8217;</p></blockquote>
<div style="text-align:left;">
<p>उन्होने बताया कि इसके दाम और ड्यूटी फ्री शॉप के दाम में कोई अन्तर नहीं है पर हवाई जहाज में खरीदने से पॉइंट मिल जाते हैं जिससे बाद में टिकट में सस्ते में मिल जाता है।</p>
<p style="text-align:left;">बात करते करते, हम दिल्ली के हवाई अड्डे पर पहुंच गये। धूल धक्कड़ भीड़ शोर शराबा &#8211; इसी सब के लिये तो मैं तरस रहा था। अपना देश तो सबसे प्यारा है।</p>
<p style="text-align:center;"><em>सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।</em></p>
</div>
<div style="text-align:center;"><span class='embed-youtube' style='text-align:center; display: block;'><iframe class='youtube-player' type='text/html' width='500' height='312' src='http://www.youtube.com/embed/D8mmXae8RBw?version=3&amp;rel=1&amp;fs=1&amp;showsearch=0&amp;showinfo=1&amp;iv_load_policy=1&amp;wmode=window' frameborder='0'></iframe></span></div>
<div style="text-align:center;">
<p><em>यह मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।</em><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/01/vienna-wien.html">वियाना &#8211; मैं पहुंच रहा हूं</a> ।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/02/sound-of-music-story-trapp-family.html">सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक फिल्म, सत्य कथा पर आधारित है</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/02/fiaker-horse-drawn-carriage-vienna.html">टमटम पर, राजसी ठाट-बाट के साथ</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/02/sigmund-freud-museum.html">सिगमंड फ्रायड संग्रहालय</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/03/convent-jesus-christ.html">मन, प्रभू के चरणों में</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/03/sisters-nuns.html">क्या भाई को सौतेली बहन स्वीकर कर लेनी चाहिये</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/04/vienn-by-night.html">वियाना रात में</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/04/school-girl-vienna.html">एक प्यारी सी लड़की &#8211; लीसा</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/05/vienna-places-to-visit.html">वियाना में घूमने की जगहें</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/05/blog-post.html">कॉन्वेंट में पूजा और सिस्टर लूसी</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/05/blog-post_28.html">वापसी की यात्रा</a>।।</p>
</div>
<div style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</div>
<div style="text-align:left;">
<p><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Vienna">Vienna</a>, Wien, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Austria">Austria</a>, <a href="http://www.blogvani.com/default.aspx?mode=tag&amp;TagText=Famous+Places&amp;span=Days30&amp;count=30">Famous Places</a>,</p>
<div style="text-align:left;"><a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>,  <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, <a href="http://www.google.co.in/search?q=%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80+%E0%A4%95%E0%A5%87+%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%87&amp;ie=utf-8&amp;oe=utf-8&amp;aq=t&amp;rls=com.ubuntu:en-US:official&amp;client=firefox-a">मस्ती के लिये</a> सैर सपाटा, <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>, <a title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा विवरण </a>, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</div>
<div style="text-align:left;"><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AE%20%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE">फिल्म समीक्षा</a>,</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<br />Posted in यात्रा वर्णन, हिन्दी Tagged: film review, travel, travelogue <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&amp;blog=230997&amp;post=392&amp;subd=unmukth&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>दीवार तोड़ो, दिल जोड़ो: बर्लिन की यात्रा</title>
		<link>http://unmukt.com/unmukt/2009/10/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a5%8d/</link>
		<comments>http://unmukt.com/unmukt/2009/10/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a5%8d/#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 19 Oct 2009 13:00:18 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[Full Articles]]></category>
		<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>
		<category><![CDATA[travel]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://unmukth.wordpress.com/?p=357</guid>
		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में मेरी बर्लिन यात्रा का वर्णन है।
is chitthi mein berlin yatra ka varnan hai.
This post is about my trip to Berlin. <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=357&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em>इस चिट्ठी में मेरी बर्लिन यात्रा का वर्णन है। </em></p>
<div>
<p style="text-align:right;"><span style="font-size:130%;"> </span></p>
</div>
<p><em><img class="aligncenter" title="Berlin gate" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2009/10/berlin2bgate.jpg?w=266&#038;h=355" alt="" width="266" height="355" /><span id="more-357"></span></em><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rzj9THnhJ1I/AAAAAAAAAPc/z71uy7NjzY8/s1600-h/Learn+German.jpg"><img style="float:left;cursor:pointer;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rzj9THnhJ1I/AAAAAAAAAPc/z71uy7NjzY8/s200/Learn+German.jpg" border="0" alt="" width="66" height="98" /></a>वर्ष २००७ में, मुझे बर्लिन जाने का मौका मिला। भारत से बर्लिन के लिये, कोई भी सीधी हवाई जहाज की उड़ान नहीं है। मैंने बर्लिन जाने के लिये, वियाना होते हुए टिकट लिया। मैंने लौटते समय दो दिन वियना में रहने का प्रोग्राम बनाया। मुझे लगा कि इससे अच्छा मौका, इन दोनो जगहों को देखने का नहीं मिलेगा।</p>
<p>जर्मनी और ऑस्ट्रिया दोनो जगह जर्मन भाषा बोली जाती है। इसलिये मैंने जर्मन भाषा के सीखने की बात सोची। इसके लिये मैंने दो पुस्तकें लीः</p>
<ul>
<li>पहली है Learn German in a Month (Readwell Publication New Delhi); और</li>
</ul>
<ul>
<li> दूसरी है German in your pocket (Aureole Publishing, Noida)।<span style="font-size:130%;"> </span><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rzj923nhJ3I/AAAAAAAAAPs/8CDvrGA35Z4/s1600-h/German+in+your+pocket.jpg"><img style="float:right;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rzj923nhJ3I/AAAAAAAAAPs/8CDvrGA35Z4/s200/German+in+your+pocket.jpg" border="0" alt="" width="75" height="108" /></a></li>
</ul>
<p>पहली पुस्तक का फायदा यह है कि इसमें शब्द देवनागरी में भी हैं जिससे उच्चारण ठीक से समझ में आते हैं। दूसरी का फायदा यह है कि यह छोटी है और आपकी जेब में आ जाती है।<span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rzj9pXnhJ2I/AAAAAAAAAPk/sk0BfcT9z-k/s1600-h/German+CD.jpg"><img style="float:left;cursor:pointer;width:83px;height:127px;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rzj9pXnhJ2I/AAAAAAAAAPk/sk0BfcT9z-k/s200/German+CD.jpg" border="0" alt="" /></a>मैंने जर्मन भाषा सीखने की सीडी भी सुनी यह हॉरर एजूकेशन लिमिटेड के द्वारा बनायी गयी है और अच्छी है इसमे सुनने में शब्दों के उच्चारण समझ में आये। जर्मन भाषा सीखने के लिये अन्तरजाल पर भी सहायता <a href="http://german.about.com/library/anfang/blanfang_inhalt.htm">मिली</a>।</p>
<p>मैं जर्मन भाषा तो पूरी तरह नहीं सीख पाया। इसके लिये कुछ और समय चाहिये था पर कुछ सामान्य जर्मन शब्द इस प्रकार हैं। इन शब्दों की वहां जरूरत पड़ी और इसका फायदा हुआ।</p>
<table style="color:#000000;height:841px;" border="1" cellspacing="0" cellpadding="4" width="305">
<tbody>
<tr valign="top">
<td style="font-weight:bold;" width="132"><span style="font-size:130%;">अंग्रेजी में</span></td>
<td style="font-weight:bold;" width="120"><span style="font-size:130%;">जर्मन भाषा में<br />
</span></td>
<td style="font-weight:bold;" width="174"><span style="font-size:130%;">जर्मन  शब्दों  का उच्चारण<br />
</span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Bye! See you    later. (casual) </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Tschüs! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">ट्यूस् </span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Can you help    me? </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Können    Sie mir helfen? </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">कॉनेन    सिआ हेलफ्न </span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Fine,    thanks.</span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Danke, gut. </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">डांकॅ    गुट</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Gentleman</span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Herr</span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">हेर</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Good</span></td>
<td width="120"></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">गुट</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Good    Afternoon, Good day, Hello! &#8211; Hi!</span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Guten Tag! &#8211;    Tag! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">गुटन    टाग</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Good    evening! </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Guten Abend! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">गुटेन    आबेन्ड</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Good    morning! &#8211; Morning! </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Guten    Morgen! &#8211; Morgen! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">गुटन    मॉरनेन</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Good night! </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Gute Nacht! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">गुट    नाक्ट</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Good-bye, </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Auf    Wiedersehen. </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">ऑउफ    वीडरसेहन</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Great,  Very    good</span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Sehr gut. </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">सेर     गुट</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">How are you? </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Wie geht es    Ihnen? </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">वि    गी इस इहनन</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">How are you?    (familiar, informal) </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Wie geht&#8217;s? </span></td>
<td width="174"></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">I am sorry</span></td>
<td width="120"></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">एन्ट    शुलडिगन</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">I don&#8217;t     understand German</span></td>
<td width="120"></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">एक    फसते हे काइन डॉइच </span></span><span style="font-size:85%;">(</span><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">जर्मन</span></span><span style="font-size:85%;">)</span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">I would    like&#8230; </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Ich    möchte&#8230; </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">इश    मश्तय् </span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Lady</span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Dame</span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">डामे</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">May I? </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Darf ich? </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">डार्फ    इश</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">No thanks!</span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Nein, danke!</span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">नाइन    डान्कॅ</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Not so well. </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Nicht so    gut.</span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">नित्स    सो गुट</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Please! &#8211;    Yes, please! </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Bitte! &#8211; Ja,    bitte! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">बिटॅ</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Thank you! </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Danke schön! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">डान्कॅ    शॉन</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Thanks a    lot! &#8211; Many thanks! </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Vielen Dank! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">फिलेन    डान्कॅ</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132">
<p style="margin-bottom:0;"><span style="font-size:85%;">Thanks!    &#8211; No thanks! </span></p>
<p><span style="font-size:85%;">Note: &#8220;Danke!&#8221; in response to an offer usually means &#8220;No thanks!&#8221; If you want to indicate a positive response to an offer, say &#8220;Bitte!&#8221; </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Danke! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">डान्कॅ</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">What would    you like? </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Was möchten    Sie? </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">वस    मश्त इज़ी</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">You&#8217;re    welcome! (in response to &#8220;Danke schön!&#8221;) </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Bitte schön! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">बिटॅ    शॉन</span></span></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;">&nbsp;</p>
<p style="text-align:center;"><strong>ऑस्ट्रियन एयर लाइन</strong></p>
<p>भारत से वियाना तक की फ्लाइट ऑस्ट्रियन एयर लाइन की थी। हवाई जहाज सही समय पर उड़ा। मुझे आगे की सीट मिली थी।  एक महिला अपने छोटे से बच्चे के साथ आयी। उसने कहा कि मैं उसे यह सीट दे दूं। आगे की सीट में बैठने का यह फायदा है कि बच्चों के लिये वह क्रैडल लग जाती है। जिस पर उन्हे लिटाया जा सकता है। मैंने मान लिया पर परिचायिका ने यह  नहीं करने दिया क्योंकि आगे  पहले से ही एक महिला बच्चे के साथ बैठी थी और ऊपर  केवल एक ही अतिरिक्त ऑक्सीजन मॉस्क था दो नहीं। उस महिला को पुनः अपनी जगह वापस जाना पड़ा। किसी भी अन्य यात्री ने  जिसकी सीट के सामने बच्चे के लिये क्रैडल लग सकता था, उस महिला के साथ सीट बदलने से मना कर दिया। वह कुछ मायूस हो गयी। इससे उसे रास्ते में कुछ तकलीफ तो जरूर हुई होगी पर मैं कुछ कर नहीं सकता था।<a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R0G1MAovthI/AAAAAAAAAQA/TM9ec9sZvac/s1600-h/austrian+air+hostess.jpg"><img style="float:right;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R0G1MAovthI/AAAAAAAAAQA/TM9ec9sZvac/s200/austrian+air+hostess.jpg" border="0" alt="" width="167" height="146" /></a></p>
<p>परिचारिकायें लाल परिधान पहने थीं।  युवतियां लाल स्कर्ट, लाल बेल्ट,  लाल या सफेद ब्लाउज,  लाल जैकेट,  लाल कोट, लाल स्टॉकिंग, यहां तक की लाल जूते पहने थीं। यही हाल युवकों का भी था। वे हमसे तो अंग्रेजी में बात करते थे पर आपस में किसी और भाषा में बात करते थे। मैंने एक परिचारिका से पूछा कि क्या वह जर्मन में बात कर रही है। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;हां, हम जर्मन में बात कर रहें हैं पर हमारा उच्चारण जर्मन के कुछ भिन्न है। लेकिन वर्तनी,  व्याकरण बाकी सब वही है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने जवाब दिया डांके शॉन  (आपको बहुत धन्यवाद)। वह मुस्कराकर बोली,</p>
<blockquote><p>&#8216;लगता है आपको जर्मन आती है&#8217;।</p></blockquote>
<p>मैंने कहा,  मैं जर्मनी जा रहा हूं  इसलिये  कुछ शब्द सीख लिये  हैं।</p>
<p>मेरे बगल की महिला इटली जा रही थी और जो महिला मुझसे सीट बदलना चाहती थी वह स्पेन जा रही थी। वे हरियाणा के किसी गांव की लग रही थी। उन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी। वे घबरा रही थी। मैंने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है मैं मदद करूंगा। मैंने वियना में उन्हें उस जगह तक पहुंचाया जहां से उन्हें अपनी, अगली उड़ान पकड़नी थी। हांलाकि बाहर निकलते समय एक व्यक्ति खड़ा था जो टिकट देखकर लोगों की सहायता कर रहा था।</p>
<p>मैं बर्लिन जाने के लिये, हाथ का सामान चेक करने के लिये देने लगा। एक व्यक्ति ने मुस्कुराते हुऐ पूछा कि,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या  लैपटॉप है?&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा नहीं। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या नोटबुक है?&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं,  इसमें मेरे कपड़े हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसे बहुत आश्चर्य हुआ, मानो कह रहा हो कि क्या कोई भारतीय बिना लैपटॉप के यात्रा कर सकता है। शायद सूचना प्रौद्योगिकी, भारतीयों की पहचान बन गयी है।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>बीएसएनएल अन्तरराष्ट्रीय सेवा &#8211; मुश्कलें</strong></p>
<p>मैं भारत से वियाना सुबह पहुंच गया था। वहां से बर्लिन के लिये उड़ान तीन घन्टे बाद थी। वियाना और बर्लिन का समय एक ही है और भारत के समय से ४:३० घन्टे पीछे है। मैंने अपनी पत्नी को फोन करने के लिये मोबाइल निकाला। यह बीएसएनएल का है। मैं इसे अन्तरराष्ट्रीय घूमने के लिये करवा कर ले गया था पर यह काम न कर, केवल सीमित सेवाओं को दिखा रहा था। वियाना हवाई अड्डे पर मुझे एक भारतीय सज्जन मिले। उनके फोन में भी यही मुश्किल थी। बहुत झुंझलाहट आयी। सामान ज्यादा होने के कारण, मैं अपना लैपटॉप नहीं ले गया था। मैंने अपना  प्रस्तुतीकरण पहले ही भेज दिया था।<span style="font-size:130%;"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R0ofVwovtjI/AAAAAAAAAQQ/imJDlGPEBtI/s1600-h/bsnl-5.jpg"><img style="float:left;cursor:pointer;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R0ofVwovtjI/AAAAAAAAAQQ/imJDlGPEBtI/s200/bsnl-5.jpg" border="0" alt="" /></a></span></p>
<p>घूमते-घूमते, मेरी नजर एक भारतीय युवक पर पड़ी। उसके पास लैपटॉप था। वह कम्प्यूटर इंजीनियर था और अपनी कंपनी की तरफ से पोलैंड जा रहा था। उसे, वहां पर, बैंक की क्रेडिट कार्ड सर्विस का कंप्यूटरीकरण करना था। उसके फोन के साथ भी यही मुश्किल थी। मैंने उससे पूछा कि क्या उसका लैपटॉप काम कर रहा है। उसने कहा हां। मैंने उससे पूछा कि क्या मैं उसके लैपटॉप से अपनी पत्नी को ई-मेल भेज सकता हूं। उसने मना कर दिया। उसका कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह कम्पनी का है। इससे प्राइवेट ई-मेल नहीं जा सकती है। आप पब्लिक बूथ से फोन कर लीजिये।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैं नहीं जानता था कि वह बहाना कर रहा था या सच में ऐसा था। यदि यह सच था तो वह कंपनी, मैनेजमेंट के साधारण सिद्धांतो को नहीं समझती। क्या मालुम वह यह सोचता हो कि मैं ई-मेल से बम ब्लास्ट करने की बात सोचता हूं और इसके लिये वह पकड़ जायगा <img src='http://s2.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>मेरे पास यूरो थे पर सिक्के नहीं। मैंने कभी पब्लिक बूथ से फोन नहीं किया था। भाषा की मुश्किल अपनी जगह थी। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। जीवन में, मैंने अपने आप को कभी इतना असहाय नहीं पाया।</p>
<p>बर्लिन पहुंच कर मैंने अपनी पत्नी को ई-मेल से, मोबाइल फोन की मुश्किल के बारे में बताया। उसने टेलीफोन वालों से पूछ कर निदान भी बताया पर काम नहीं बना। हार कर वहां पर प्रीपेड कार्ड खरीदा। मुझे इसका निदान वियाना में पता चला। इसके लिये Application में जाना पड़ता है। वहां से Network, फिर cell one में जाकर, International चुनना होता है। मैं Setting में जा कर, Network Service में, इसका हल ढूढ़ रहा था। वापस भारत आकर, यह प्रक्रिया पुन: अपनानी पड़ती है। इस बार National चुनकर उचित Network, जो कि Dolphin है, चुनना होता है।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>बर्लिन में भाषा की मुश्किल</strong></p>
<p>बर्लिन में मुझे होटल में ठहरना था। वहां होटलों में चेक-इन का समय ३ बजे का होता है। मैं वहां १० बजे सुबह पहुंच गया था। उन्होंने सामान रखने की अनुमति दे दी पर कहा कि कमरा तीन बजे के बाद ही मिलेगा। मैं सामान रख कर बर्लिन घूमने निकल गया।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R1QMvvZPIOI/AAAAAAAAAQo/pDqfQHTIJck/s1600-R/Berlin+Bazaar.JPG"><img style="border:0 none;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R1QMvvZPIOI/AAAAAAAAAQo/OsGVuQZMfvo/s200/Berlin+Bazaar.JPG" border="0" alt="" width="200" height="150" /></a><p class="wp-caption-text">बाज़ार</p></div>
<p>बर्लिन में ट्रेन, ट्राम, और बसें तीनों चलती हैं पर बस का सबसे ज्यादा प्रयोग होता है। शहर घूमने के लिए, कई एजेंसियां अपनी बस सेवा चलाती हैं। यह हॉप ऑन, हॉप ऑफ (Hop on, Hop Off) कहलाती हैं। आपको केवल एक बार टिकट लेना होता है। यह पूरे दिन के लिए वैध है। यह घूमने की जगह के पास रूकती हैं। आप किसी भी जगह उतरें और कहीं पर बैठ सकते हैं। दस मिनट बाद, वहां पर दूसरी बस आयेगी। बसों में हेडफोन है, जिससे सात भाषाओं में जगहों का वर्णन आता रहता है। इसमें अंग्रेजी तो शामिल है पर हिन्दी नहीं है। मैंने सोचा था कि एक चक्कर बिना उतरे लूंगा फिर दूसरी बार जो जगह अच्छी लगेगी उस पर उतर कर देखूंगा। बीच में ही मुझे भूख लगने लगी। एक जगह मुझे बहुत सारे ढ़ाबे दिखाई पड़े, मैं वहीं उतर गया।<span style="font-size:130%;"> </span><span style="font-size:130%;"> </span><span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p style="text-align:right;"><em><br />
</em></p>
<p>ढ़ाबों में मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या खाऊं। मैं शाकाहारी खाने के साथ,  दूध, अण्डा, और मछली ले लेता हूं। हांलाकि चिकन या अन्य माँस नहीं खाता। मैंने भारत छोड़ते समय निश्चय किया था कि खाने से परहेज नहीं करुंगा लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा था कि क्या खाना लूं। एक ढ़ाबे में, मैंने महिला से बात की। उसने जर्मन भाषा में कुछ जवाब दिया। मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;डाउच नाइन (जर्मन भाषा नहीं), इंगलिश याह (अंग्रजी हां)।&#8217;</p></blockquote>
<p>वह बोली,</p>
<blockquote><p>&#8216;डाउच नाइन अला&#8230;ला&#8230;ला&#8230;.।&#8217;</p></blockquote>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 160px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R1QNv_ZPIQI/AAAAAAAAAQ4/t8veZeiRE5w/s1600-R/Berlin+Municipal+building.JPG"><img style="border:0 none;cursor:pointer;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R1QNv_ZPIQI/AAAAAAAAAQ4/c1KdpPT0z1w/s200/Berlin+Municipal+building.JPG" border="0" alt="" width="150" height="200" /></a><p class="wp-caption-text">बर्लिन नगरपालिका की ईमारत</p></div>
<p><span style="font-size:130%;"> </span><span style="font-size:130%;"> </span>मुझे लगा भूख से मरा रा रा&#8230;।</p>
<p>बगल के ढ़ाबे में, अश्वेत लोग थे। वे अंग्रेजी अच्छी बोलते थे। मैंने उनसे कुछ शाकाहारी खाने के लिए कहा। उन्होंने मुझे चावल के साथ राजमां और सब्जियां दी, साथ में चटनी भी। खाना गर्म था, मजा आया। खाना खा कर मैं फिर बस में चढ़ गया।</p>
<p><em><br />
</em></p>
<p>बस में घूमते हुए हम उस क्षेत्र से भी गुजरे जहां पर दूतावास हैं। यहां भारतीय दूतावास भी देखा। यह लाल रंग की इमारत है। जिसके पत्थर राजस्थान से आये हैं। एक चक्कर पूरा करने में ही शाम हो गयी, दूसरा चक्कर लेने का न तो समय था, न ही हिम्मत। मैं वापस पैदल ही होटल की तरफ चल दिया, जो कि लगभग एक किलोमीटर दूर था।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 160px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R1QNPfZPIPI/AAAAAAAAAQw/36ybb9Idk5I/s1600-R/Berlin+Church.JPG"><img style="border:0 none;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R1QNPfZPIPI/AAAAAAAAAQw/4OwOfEla_Ck/s200/Berlin+Church.JPG" border="0" alt="" width="150" height="200" /></a><p class="wp-caption-text">बर्लिन में एक चर्च जो द्वितीय विश्व युद्ध में बमबारी का शिकार रहा</p></div>
<p>मैं वापसी में रास्ता भटक गया। मुझे दो छोटी लड़कियां मिलीं। मैंने उन्हें नक्शा दिखा कर पूछा कि मैं यहां कैसे जाऊं। वे अंग्रेजी नहीं समझती थीं पर उन्होंने मुस्करा कर इशारे में बताया और मैं उधर ही चल दिया। काफी दूर जाने के बाद भी जब होटल नहीं मिला तो घबरा गया। वहीं पर एक वृद्ध दंपत्ति दिखाई पड़े। वे भी अंग्रेजी नहीं समझते थे। मैंने उनसे पता पूछा तो वे मुस्करा कर बार बार कुछ इशारा करने लगे। कुछ देर बाद समझ में आया कि मेरा होटल दो इमारत के बाद था और वे उसके बोर्ड की तरफ इशारा कर रहे थे। मैंने उन्हे धन्यवाद दिया और कमरे में पहुंचा।<span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p>कमरे के फ्रिज में, पानी या बीयर के दाम में कोई अंतर नहीं था। मैं शराब या बीयर नहीं पीता हूं पर पानी इतना महँगा। बाथरूम से लेकर, पानी नहीं पिया गया। ७ बज रहे थे। मैंने पिछली रात हवाई जहाज में काटी थी &#8211; थकान अलग लग रही थी, जल्द ही गहरी नींद में डूब गया।</p>
<p style="text-align:right;"><em><br />
</em></p>
<p>मुझे बर्लिन में भाषा की मुश्किल पड़ी। अच्छा हुआ कि मैं कुछ जर्मन के शब्द सीख कर गया था नहीं तो और भी मुश्किल पड़ती।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>ऑफिस, स्कूल साइकिल पर – स्वास्थ भी बढ़िया, पर्यावरण भी ठीक</strong></p>
<div>
<p><span style="font-size:130%;"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R2ciWpu9ugI/AAAAAAAAASA/Xx7_swDghqQ/s1600-h/Berlin-cycle-1.JPG"><img style="float:left;cursor:pointer;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R2ciWpu9ugI/AAAAAAAAASA/Xx7_swDghqQ/s200/Berlin-cycle-1.JPG" border="0" alt="" width="186" height="140" /></a></span></p>
</div>
<div>
<div>
<p><span style="font-size:130%;"> </span>बर्लिन घूमते समय मुझे जगह-जगह लोग साइकिलों पर चलते आये। कुछ बच्चे थे कुछ युवक युवतियां तो फिर कुछ और बड़े। कुछ लोग अपने बच्चों को साइकिल पर बिठा कर जा रहे, कुछ लोग साइकिलों पर ही बर्लिन यात्रा कर रहे थे। बर्लिन में सारी जगह खम्भे बने हैं आप वहीं पर अपनी साइकिलों पर ताला लगा कर छोड़ सकते हैं। मेरे पास समय होता तो मैं भी किराये पर साइकिल लेकर घूमना पसन्द करता।</p>
<div>
<p><span style="font-size:130%;"> </span></p>
</div>
<div>
<p><span style="font-size:130%;"> </span></p>
</div>
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<div>
<p>यूरोप में साइकिल चलाने का काफी चलन है। इसके दो बड़े कारण हैं। यह चालक के स्वास्थ और पर्यावरण दोनों के लिये फायदेमंद है। बर्लिन में, मुझे बहुत सारे बच्चे साइकिल पर स्कूल जाते, और महिलाएँ एवं पुरुष ऑफिस जाते दिखे। वियाना में भी लोग साइकिलों पर घूमते नजर आये। शायद यही कारण हो कि इन दोनों जगह प्रदूषण बहुत कम था। इन दोनो जगह बहुत कम मोटर साइकिलें दिखीं। बहुत से लोग छोटी कार चलाते दिखे। लगता है कि यहां छोटी कारें काफी लोकप्रिय हैं।</p>
</div>
</div>
<p>यूरोप में किराये में साइकिल भी बहुत आसानी से मिल जाती है और इसे जगह जगह पर किराये पर लिया जा सकता है। यह किराये में ली जाने वाली कार जैसा है और स्वचलित हैं। लेकिन अब नयी तकनीक से युक्त होने के कारण खोयी जाने वाली साइकिलों का आसानी से पता लगाया जा सकेगा। अमेरिका में भी इस तरह का चलन शुरू हो रहा है। इसके बारे में आप न्यू यॉर्क टाइमस् का <a href="http://www.nytimes.com/2008/04/27/us/27bikes.html?_r=2&amp;ex=1366948800&amp;en=19840dbf078e00bb&amp;ei=5088&amp;partner=rssnyt&amp;emc=rss&amp;oref=slogin">यह</a> लेख पढ़ सकते हैं।</p>
<p>कुछ दिन पहले न्यूयार्क टाइम्स के <a href="http://www.nytimes.com/2007/11/05/us/05bike.html?_r=1&amp;ei=5070&amp;en=24f2b282cb780869&amp;ex=1194930000&amp;adxnnl=1&amp;emc=eta1&amp;adxnnlx=1194596128-khDMCgUngSKEoCpAaI8J+Q&amp;oref=slogin">एक लेख</a> में भी लिखा था कि अमेरिका के कई शहरों में साइकिलों ट्रैक बन रहे हैं और वे साइकिल चलाने पर जोर दे रहें हैं। अपने देश में कुछ उल्टा हो रहा है। हम सस्ती एक लाख रुपये की कार बनाने के बारे में सोच रहे हैं ताकि सबको कार मिल सके पर न तो सार्वजनिक यात्रा करने के संसाधनों को मजबूत कर रहे हैं, न ही पैदल अथवा साइकिल चलाने पर जोर दे रहे हैं। कुछ दिन पहले इसी बात को लेकर एक <a href="http://www.nytimes.com/2007/11/04/opinion/04iht-edfried.1.8177603.html">अन्य लेख</a> न्यूयॉर्क टाइम्स में निकला था। यदि सारे हिंदुस्तानियों के पास कार हो जायें यानि की एक अरब कारें- क्या हाल होगा &#8211; अरे क्या होगा सब जगह ट्रैफिक जाम।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 141px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R3Gi6pu9uzI/AAAAAAAAAUs/AjWknrVTCP0/s1600-h/Dead+by+the+Berlin+wall.jpg"><img style="border:0 none;cursor:pointer;width:112px;height:171px;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R3Gi6pu9uzI/AAAAAAAAAUs/AjWknrVTCP0/s200/Dead+by+the+Berlin+wall.jpg" border="0" alt="" width="131" height="200" /></a><p class="wp-caption-text">बर्लिन दीवाल पार करते समय, पूर्वी बर्लिन के गार्ड की गोली से मरा यूवक - चित्र विकिपीडिया से</p></div>
<p><strong>बर्लिन दीवार का टूटना और दिलों का मिलना</strong><span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p>बर्लिन दीवार १९६१ में बनी थी। यह इसलिये बनायी गयी थी ताकि लोग पूर्वी जर्मनी से, पश्चिमी जर्मनी की तरफ न जा सके। बस में चल रही कमेंटरी से पता चला कि इसके बनने के बावजूद भी लगभग ५००० लोग भागने में सफल हो गये पर ९० लोग मार दिये गये थे। जिसमें ६० गोलियों के शिकार हुए।<span style="font-size:130%;"> </span><span style="font-size:130%;"> </span><span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p style="text-align:right;"><em><br />
</em></p>
<p>बर्लिन दीवार को १९९० में, तोड़ दिया गया। इस समय, दिखाने के लिये कि कुछ जगह यह छोड़ दी गयी है। बर्लिन दीवार, जहां पर हटा दी गयी है, वहां दो ईंटो की लाइन बिछी है जिससे पता चलाता है कि यहां पर बर्लिन दीवार थी। जगह-जगह उसमें लोहे की प्लेट जड़ी है। जिस पर नम्बर लिखें हैं। शायद किसी निश्चित जगह से उसकी दूरी बताते हैं।<a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R3Gkqpu9u0I/AAAAAAAAAU0/dvuzW1RYTjY/s1600-h/The+Spy.jpg"><img style="float:left;cursor:pointer;width:96px;height:147px;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R3Gkqpu9u0I/AAAAAAAAAU0/dvuzW1RYTjY/s200/The+Spy.jpg" border="0" alt="" /></a></p>
<p>हमारी बस वहां से भी गुजरी, जहां पर बर्लिन दीवाल का कुछ भाग अब भी है। वहां से गुजरते समय, मुझे १९६० के दशक में पढ़ा उपन्यास &#8211; <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/The_Spy_Who_Came_in_from_the_Cold">The Spy Who Came In From the Cold</a> &#8211; की याद आयी। उसी समय इस पर <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/The_Spy_Who_Came_in_from_the_Cold_(film)">बनी फिल्म</a> भी देखी थी। इस उपन्यास को John le Carre ने लिखा है। यह उस समय बर्लिन में चल रहे शीत युद्ध पर आधारित एक डबल एजेंट की कहानी है जिसमें बर्लिन दीवाल की अहम भूमिका है। इसमें कोई शक नहीं कि यह, शीत युद्ध से जुड़ा, सबसे बेहतरीन जासूसी रोमांचकारी उपन्यास है।<span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p>जब जर्मनी के दोनों भाग जुड़ रहे थे तब बहुत से लोग कहते थे क्योंकि कि पूर्वी जर्मनी के लोग पश्चिमी जर्मनी के कारण अमीर हो जायेंगे। इस बारे में पूछने पर वहां लोगों ने बताया कि ऐसा नहीं हुआ। पूर्वी जर्मनी अब भी गरीब है। वहां रोज़गार के साधन नहीं हैं। वहां अधिकतर शहरों में जनसंख्या कम होती जा रही है। युवक युवतियां वहां से निकल कर पश्चिमी जर्मनी आ रहे हैं और पूर्वी जर्मनी के शहर केवल वृद्ध लोगों के शहर होते जा रहे हैं<span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p>द्वितीय विश्व युद्घ के बारे में मैंने डरते डरते कुछ सवाल किये। उनका कहना था कि हांलाकि नयी पीढ़ी यह नहीं समझ पाती है कि जिसे देश में इतने विचारक, इतने दार्शनिक हुए हैं उन्होंने ऐसा काम कैसे कर लिया पर नई पीढ़ी यह भी सोचती है कि यह काम पुरानी पीढ़ी ने किया है जिसके लिये वे उत्तरदायी नहीं हैं।</p>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 210px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R3Gg1pu9uwI/AAAAAAAAAUU/LXX-HoRKAAM/s1600-h/Berlin+wall+remaining.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R3Gg1pu9uwI/AAAAAAAAAUU/LXX-HoRKAAM/s200/Berlin+wall+remaining.JPG" border="0" alt="" width="200" height="150" /></a><p class="wp-caption-text">बची हुई बर्लिन दीवाल - चित्र विकिपीडिया से</p></div>
<p>बर्लिन दीवाल का टूटना, पूर्वी-पश्चिमी जर्मनी का आपस में विलय, होना यह एक भावनात्मक बात थी। मुझे जर्मन लोगों ने बताया कि उन्हें इसकी प्रसन्नता है। हमारे भी &#8211; दो टुकड़े हुए हिन्दुस्तान और पाकिस्तान। बाद में पाकिस्तान के भी दो। यानि कि हम दो से तीन हो गये हैं। हम में एक खून है, एक सभ्यता है &#8211; क्या कभी हम तीन मिल कर एक हो सकेगें।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 151px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4A585u9vCI/AAAAAAAAAWk/inzRxz2RIXk/s1600-h/Max_Muller.jpg"><img style="border:0 none;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4A585u9vCI/AAAAAAAAAWk/inzRxz2RIXk/s200/Max_Muller.jpg" border="0" alt="" width="141" height="200" /></a><p class="wp-caption-text">मैक्स मुलर - जन्मः ६.१२.१८२३ – मृत्युः २८.१०.१९०० चित्र विकिपीडिया से</p></div>
<p><strong>भारतीय सभ्यता, संस्कृत, और उपनिषद के जर्मन विद्वान – मैक्स मुलर</strong><span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p>मैक्स मुलर का जन्म ६ दिसम्बर १८२३ में देसा, (Dessan, Germany) में हुआ था। लिपजिंग विश्वविद्यालय से पढ़ाई और पी.एच.डी. लेने के बाद १८४५ में वे फ्रांस चले गये जहां उन्होंने संस्कृत सीखी। १८४६ में वे, संस्कृत का और अच्छा अध्ययन करने, इंगलैंड चले गये। उन्होंने १८६८ से १८७५ तक आल सोलस् कालेज All Soules College, Oxford में Comparative Theology के प्रोफेसर रहे।<span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p style="text-align:right;"><em><br />
</em></p>
<p>मैक्स मुलर ने भारतीय सभ्यता, संस्कृत, उपनिषदों का अच्छा अध्ययन किया और कई पुस्तकें लिखी हैं। इनमें मुख्य हैं:</p>
<ol>
<li>A History of Ancient Sanskrit Literature So Far As It Illustrates the Primitive Religion of the Brahmans (1859),</li>
<li>Lectures on the Science of Language (1864, 2 vols.),</li>
<li>Chips from a German Workshop (1867-75, 4 vols.),</li>
<li>Introduction to the Science of Religion (1873),</li>
<li>India, What can it Teach Us? (1883),</li>
<li>Biographical Essays (1884),</li>
<li>The Science of Thought (1887),</li>
<li>Six Systems of Hindu Philosophy (1899),</li>
<li>Natural Religion (1889),</li>
<li>Physical Religion (1891),</li>
<li>Anthropological Religion (1892),</li>
<li>Theosophy, or Psychological Religion (1893).</li>
<li>Auld Lang Syne (1898),</li>
<li>My Autobiography: A Fragment (1901);</li>
<li>The Life and Letters of the Right Honourable Friedrich Max Müller (1902, 2 vols.), यह उनकी पत्नी द्वारा सम्पादित है</li>
</ol>
<p>उनकी मृत्यु २८ अक्टूबर १९०० में हो गयी।</p>
<p>मैक्स मुलर कभी भारत नहीं आये हैं पर भारतीय सभ्यता के बारे में बहुत काम किया है। जर्मनी में, मैंने उनके बारे में लोगों से पूछा पर उन्होंने मैक्स मुलर का नाम नहीं सुना था। मैंने उन्हें बताया कि वे जर्मन थे उन्होंने भारतीय सभ्यता और संस्कृत भाषा पर बहुत काम किया था। उनके नाम पर भारत में भवन और मार्ग हैं। उन्हें यह सुन कर आश्चर्य हुआ।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>खूबसूरत शहर &#8211; बर्लिन</strong></p>
<div>
<p><span style="font-size:130%;"> </span></p>
</div>
<p>मैंने एक दिन बाद, पुन: बर्लिन शहर देखने के लिये बस सेवा का प्रयोग किया। इस बार सोचा कि कुछ जगह उतर कर उसका आनंद लूंगा, पर हल्का-हल्का पानी भी बरसने लग गया इसलिये यह उतनी अच्छी तरह से नहीं हो पाया जैसा कि मैं चाहता था।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4rkV5u9vFI/AAAAAAAAAW8/6va5Bq5lDXM/s1600-h/Berlin+Rickshaw.JPG"><img style="border:0 none;cursor:pointer;width:174px;height:130px;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4rkV5u9vFI/AAAAAAAAAW8/6va5Bq5lDXM/s200/Berlin+Rickshaw.JPG" border="0" alt="" width="200" height="150" /></a><p class="wp-caption-text">बर्लिन के रिक्शे</p></div>
<p>मैं सबसे पहली जगह बर्लिन गेट पर उतरा। यह १४ गेटों में से एक है जहां पर टैक्स की वसूली की जाती थी। यहां पर अलग तरह के रिक्शे हैं जिस पर लोग चढ़कर आस-पास की जगह घूमने जाते हैं। कुछ रिक्शों को लड़कियां भी चलाती दिखीं।</p>
<p style="text-align:right;"><em><br />
</em></p>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 210px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4rl6Zu9vHI/AAAAAAAAAXM/CAeGTMjb0EM/s1600-h/Berlin+Parliament.JPG"><img style="border:0 none;cursor:pointer;width:162px;height:121px;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4rl6Zu9vHI/AAAAAAAAAXM/CAeGTMjb0EM/s200/Berlin+Parliament.JPG" border="0" alt="" width="200" height="150" /></a><p class="wp-caption-text">जर्मन संसद, पीछे और एक तरफ का हिस्सा</p></div>
<p>बर्लिन गेट के बगल में जर्मनी की संसद है। मैं इसके बगल और पीछे गया। मैं सामने इसलिये नहीं गया क्योंकि इसमें कुछ समय लगता और मैं बाकी जगह भी घूमना चाहता था इसलिये वापस जहां से बस मिलने वाली थी वहां पर वापस आ गया।</p>
<p><em><br />
</em></p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 160px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4rlSZu9vGI/AAAAAAAAAXE/XfW3Dlfq92A/s1600-h/Berlin+Tower.JPG"><img style="border:0 none;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4rlSZu9vGI/AAAAAAAAAXE/XfW3Dlfq92A/s200/Berlin+Tower.JPG" border="0" alt="" width="150" height="200" /></a><p class="wp-caption-text">बर्लिन टावर</p></div>
<p>मैं वहां पर बर्लिन टावर भी देखने गया। रात के समय सारा बर्लिन बहुत सुन्दर लगता है। मुझे लगा कि यूरोप के मुख्य शहरों में टावर बनाने का चलन है। वियना में भी इस तरह की टावर है। मैं बर्लिन टावर पर टॉयलेट भी जाना चाहता था, पता चला कि इसके लिए ५० सैन्ट देने पड़ेगें यानी कि लगभग ३० रूपये। सू &#8211; सू करने के लिये ३० रूपये कुछ ज्यादा ही लगे पर यदि न देता तो ज्यादा मुश्किल पड़ती इसलिये पैसे देकर सुविधा का प्रयोग किया।</p>
<p style="text-align:right;"><em><br />
</em></p>
<p>रास्ते में घूमते हुऐ, रात्रि में मनोरंजन की जगहों और साधनों के बारे में, कई जगह पोस्टर दिखायी पड़े, उनका निमंत्रण मिला। मुन्ने की मां की याद आ गयी और मैंने नजरें दूसरी तरफ कर ली <img src='http://s2.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>वहां पर मैक्डॉनाल्ड, पीट्जा शॉप भी है पर मैं वहां जाना ठीक नहीं समझा। मैं एक जर्मन ढ़ाबे पर पहुंचा। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या लूं। वहां कि महिला को अंग्रेजी ठीक से नहीं आती थी। उसने मुझे बतख का मांस, डबलरोटी, चटनी के साथ खाने के लिए कहा। भूख बहुत जोरों से लगी थी सब अच्छा लगा। खाकर वापस आया अगले दिन मुझे वियाना जाना था और सामान लगाते ही मेरी आंख भी लग गयी।</p>
<div style="text-align:center;"><em>यह मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यसदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।</em><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/11/learn-german-language.html"></a></div>
<div style="text-align:center;"><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/11/learn-german-language.html">जर्मन भाषा</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/11/austrian-airline.html">ऑस्ट्रियन एयरलाइन</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/11/bsnl-international-roaming.html">बीएसएनएल अन्तरराष्ट्रीय सेवा &#8211; मुश्कलें</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/12/language-difficulty-berlin.html">बर्लिन में भाषा की मुश्किल</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/12/cycling-is-good-for-health-and.html">ऑफिस, स्कूल साइकिल पर – स्वास्थ भी बढ़िया, पर्यावरण भी ठीक</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/12/berlin-wall-unification-of-germany.html">बर्लिन दीवार का टूटना और दिलों का मिलना</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/01/max-muller.html">भारतीय सभ्यता, संस्कृत, और उपनिषद के जर्मन विद्वान – मैक्स मुलर</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/01/what-to-see-in-berlin-city.html">खूबसूरत शहर बर्लिन</a>।।</div>
<div style="text-align:center;">
<p>&nbsp;</p>
</div>
<div style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</div>
<div style="text-align:left;"><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Berlin">Berlin</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Berlin_Wall">Berlin wall</a>, The Spy who came in from the Cold, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Max_Muller">Max Müller</a>,</div>
<div style="text-align:left;"><span style="font-size:100%;"><a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, </span><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>,  <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <span style="font-size:100%;"><a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, </span><span style="font-size:100%;">सैर सपाटा,</span><span style="font-size:100%;"> <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>,</span><span style="font-size:100%;"> <a title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, </span><span style="font-size:100%;">यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</span></div>
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		<title>पृथ्वी पर स्वर्ग – कश्मीर यात्रा</title>
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		<pubDate>Mon, 22 Dec 2008 03:00:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[Full Articles]]></category>
		<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>
		<category><![CDATA[travel]]></category>

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		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में, काश्मीर यात्रा का वर्णन है। 
This post is about my Kashmir Trip. It is in Hindi (Devnagri).
yeh post meri kashmir yatra ke baare mein hai. It is Hindi (Devnagri).<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=123&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em>इस चिट्ठी में, काश्मीर यात्रा का वर्णन है। <a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rm1qeLDvfKI/AAAAAAAAAGU/gGw_pEpsxaw/s200/sunset-2.jpg"><img class="alignright" title="Dull lake Srinagar Kashmir" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rm1qeLDvfKI/AAAAAAAAAGU/gGw_pEpsxaw/s200/sunset-2.jpg" alt="" width="120" height="158" /></a></em></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;"><span id="more-123"></span>जन्नत कहीं है तो वह यहीं है, यहीं है, यहीं है</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">कहते हैं कि जहांगीर जब सबसे पहली बार कश्मीर पहुंचे तो कहा कि जन्नत कहीं है तो वह यहीं है, यहीं है,  यहीं है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैं १९७५ की जून में कश्मीर गया था। मुन्ने की मां कभी नहीं गयी। हम लोगों ने कई  बार कश्मीर  जाने का प्रोग्राम बनाया पर बस जा न सका। हमारे सारे दायित्व समाप्त हैं। इसलिये मन पक्का कर, इस गर्मी में हम लोग कश्मीर के लिये चल दिये।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">दिल्ली से श्रीनगर के लिये हवाई जहाज पकड़ा। रास्ते में भोजन मिला।  प्लेट में एक प्याला भी था। चाय नहीं मिली पर  जब  प्लेट वापस जाने लगी। तो मैने परिचायिका से पूछा कि यदि चाय या कॉफी नहीं देनी थी तो  प्लेट में कप क्यों रखा था।  वह मुस्कराई और बोली,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;आज फ्लाईट में बहुत भीड़ है।  फ्लाईट केवल एक घन्टे की है इतनी देर में सबको चाय या कॉफी दे कर सर्विस समाप्त करना मुश्किल था। इसलिये नहीं दी,  पर लौटते समय जरूर मिलेगी।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">परिचायिका का मुख्य काम तो अच्छी तरह से बात करना होता है। लौटते समय कौन किससे मिलता है।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">बम्बई का फैशन और कश्मीर का मौसम – दोनो का कोई ठिकाना नहीं है</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">श्रीनगर पहुंचते ही, हम टैक्सी पकड़कर पहलगांव के लिए चल दिये। पहलगांव समुद्र तट से लगभग ७५०० लगभग फीट की ऊँचाई पर है। यहां लिडर और शेषनाग नदियों का संगम है। श्रीनगर से पहलगांव का रास्ता लिडर नदी के साथ चलता है और सुन्दर है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">हमारे टैक्सी चालक का नाम ओमर था। उसने कहा कि बम्बई का फैशन और कश्मीर का मौसम दोनो एक जैसे हैं, पता नहीं कब बदल जाय।  बहुत ज्लद ही इसका अनुभव हो गया। रास्ते में कहीं पांच मिनट बारिश, तो फिर  तेज धूप।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">रास्ते में हमने रूक कर कशमीरी कहवा पिया। यह सुगंधित चाय सा था। इसमें दूध तो नहीं पर दालचीनी और बादाम पड़े थे।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">पहलगांव में हम हीवान (Heevan) होटल में ठहरे।  यह होटल लिडर नदी के बगल में है। खिड़की के बाहर सफेद हिम अच्छादित पहाड़ या फिर पेड़ों से भरी हरी पहाड़ियां थीं। देखने में मन भावन दृश्य था।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">पहलगांव, पहुंचते शाम हो चली थी। लिडर  नदी पर रैफ्टिंग भी होती है। मैंने सोचा क्यों न रैफ्टिंग कर ली जाय। होटेल वालों ने कार से दो किलोमीटर ऊपर नदी के किनारे छुड़वाया फिर नदी पर  रैफ्ट के ऊपर, तेज धार के साथ, तीन किलोमीटर का सफर &#8211; सर पर हैमलेट और बदन पर जैकट।  रैफ्टिंग करने में पूरी तरह भीग गये।  बीच में पानी भी बरसने लगा,  रही सही कमी भी पूरी हो गयी। रैफ्ट ने होटल के आगे छोड़ा । वहां से दौड़ लगाकर वापस होटल आए तो कुछ गर्मी आई। कमरे में आकर कपड़े बदले फिर गर्म चाय पी तो जान में जान आयी।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">हम लोग पहले मां के साथ ऐसी जगहों पर जाते थे। मां हमेशा एक छोटी बोतल में ब्रांण्डी साथ रखती थी। ठंड लगने पर गर्म दूध में एक चम्मच ब्रांडी डालकर पीने के लिए देती थी।  हम लोग ब्रांडी नहीं ले गए थे।  मुझे फिर मां की याद आयी। अगली बार अवश्य साथ ले जाऊंगा।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">यदि आप यह सोचते हैं कि कश्मीर में  विस्की से गर्मी पा  सकती  हैं।  तो भूल जाइये। इस्लाम में शराब पीना हराम है। वहां अधिकतर लोग मुसलमान हैं इसलिये  कश्मीर में शराब हराम है।  हां,  चोरी छिपे  जरूर पी जाती है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">यहां पर आकर लगा कि हमे छाता भी लाना चाहिए था मालुम नहीं कब, पांच मिनट के लिए बरसात।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">कश्मीर में एक अनुभव और हुआ। यहां होटल अच्छे हैं। खाना अच्छा है पर तौलिये साफ नहीं होते हैं। उसका कारण यह बताया कि सूखने में मुश्किल होती है।  मुझे लगा कि अपने साथ छोटे छोटे तौलिये भी रहने चाहिये ताकि बदन पोंछा जा सके।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">बहुत अच्छा हुआ कि मैंने पहुंचते ही रैफ्टिंग कर ली। मुन्ने की मां ने नहीं की थी। उसे डर लगता था। अगले दिन रैफ्टिंग नहीं हो रहीं थी। होटल वाले ने बताया कि किसी ने रैफ्टिंग वाले को पीट दिया था इसलिए उनकी हड़ताल है। एक बार का वे २०० रूपये लेते हैं। एक दिन में कम से कम १००० लोग रैफ्टिंग करते हैं। यानि हड़ताल में २ लाख का घाटा। सच है हड़ताल से, हड़ताल करने वालों का ही घाटा होता है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">अगले दिन हम लोग आड़ू गये। आड़ू ले जाने के लिये स्थानीय टैक्सी करनी होती है। हमने भी एक टैक्सी की। उसके चालक का नाम शहनवाज था। आड़ू में प्राकृतिक सौंदर्य है। वहां लोग पहुंच कर घोड़े पर घूमते हैं। हम लोग घोड़े पर नहीं गये। पैदल ही  घूमने निकल</span><span style="font-size:medium;"> गये। यह सुन्दर जगह है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">जब हम लोग पैदल जाने लगे तो हमारा टैक्सी चालक,  शहनवाज, भी हमारे साथ था। उसका कहना था,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;कश्मीरी पाकिस्तान के साथ नहीं जाना चाहते। वे या तो हिन्दुस्तान के साथ या फिर स्वतंत्र रहना चाहते हैं। उसके मुताबिक पाकिस्तान उग्रवाद फैला रहा है  पर पैरा-मिलिट्री फोर्स भी उग्रवादी की तरह काम कर रही है। यदि किसी के घर उग्रवादी जबरदस्ती घुस जाय। तो उसके  घर की महिलाओं  की इज्जत लूटते हैं।  आग लगा देते हैं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">आड़ू बहुत छोटा सा गांव है जिसमें एक सरकारी मिडिल स्कूल है। दो साल पहले तक यह पांचवी तक था अब ८वीं तक है।  इसे जवाहरलाल नेहरू ने शुरू करवाया था।  मैं हमेशा स्कूल, विश्वविद्यालय में बच्चों के साथ समय व्यतीत करना चाहता हूं। उनके साथ रह कर जीवन में नया-पन आता है। इसलिये इस स्कूल में बच्चों से मिलने पहुंच गया।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">इस स्कूल में लगभग १५० बच्चे हैं। हम जब वहां पहुंचे तो वे प्रार्थना कर रहे थे। उसके बाद हर बच्चा आकर कोई गीत सुनाता था या सामान्य ज्ञान का प्रश्न पूछता था। </span><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rnt-qLDvfLI/AAAAAAAAAGc/EIYAlIDcRzE/s200/Students+Aru.jpg"><img class="alignright" title="students Aaroo" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rnt-qLDvfLI/AAAAAAAAAGc/EIYAlIDcRzE/s200/Students+Aru.jpg" alt="" width="182" height="129" /></a></span><span style="font-size:medium;">वे अध्यापक को उस्ताद शब्द से संबोधित कर रहे थे। उस्ताद के अनुसार यह उन्हे नेतृत्व करने की शिक्षा देता है। स्कूल में अंग्रेजी, उर्दू तथा कश्मीरी पढ़ाई जाती थी। कुछ बच्चों ने अंग्रेजी में सवाल पूछे और कविता भी सुनायी, कुछ ने उर्दू  में भी सुनायी।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैनें कुछ समय बच्चों के साथ गुजारा। मैंने उनसे पूछा कि उनका सबसे पसंदीदा हीरो कौन है उनका जवाब था मिथुन चक्रवर्ती। मुझे आश्चर्य हुआ। उन्होंने इसका कारण यह बताया कि वह बहुत अच्छी फाइट करता है इसलिए वह पसन्द है। उनके उस्ताद जी ने बताया कि वहां &#8216;ज़ी क्लासिक&#8217; चैनल आता है उसमें पुरानी पिक्चरें आती है इसलिए वे मिथुन चक्रवर्ती का नाम ले रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैने भी विद्यार्थियों से एक सवाल पूछा।  मिथुन चक्रवर्ती के यहां एक चौकीदार था। एक दिन सुबह हवाई जहाज से मिथुन को कलकत्ता जाना था। चौकीदार ने जाने के लिए मना किया। उसने  कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;मैंने  अभी सपना देखा है कि हवाई जहाज की दुर्घटना हो गयी है और सब यात्री मर गये हैं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मिथुन चक्रवर्ती उस फ्लाइट से नहीं गये। उस फ्लाइट की दुर्घटना हो गयी और सब यात्री मर गये। मिथुन चक्रवर्ती ने चौकीदार को इनाम दिया पर नौकरी से निकाल दिया । मैंने पूछा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;इनाम तो इसलिए दिया कि जान बच गयी पर चौकीदार को  नौकरी से क्यों निकाला।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">कुछ संकेत देने के बाद एक बच्चे ने सही जवाब बता दिया।</span></p>
<p style="text-align:center;"><span style="font-size:medium;"><strong>लैपटॉप की याद सताये</strong></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैं जहां जाता हूं वहां लैपटॉप भी ले जाता हूं शायद यह मेरे ठाकुर जी हैं पर कश्मीर ट्रिप में साथ नहीं ले गया था।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">अक्सर बोलना होता है &#8211; लैपटॉप साथ हो तो यह आसान होता है।   मेरी कश्मीर की यात्रा मौज मस्ती की थी। कोई भाषण नहीं देना था इसलिए लैपटॉप साथ नहीं लाया। मेरे पास रिलायंस फोन है। इसके कारण हमेशा अंतरजाल पर जाया जा सकता है।  कशमीर में रिलायंस फोन जम्मू तक ही है और कहीं नहीं। इसलिये यह इस ट्रिप में बेकार था।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">कश्मीर में जल्द ही अन्तरजाल की याद आने लगी। पहलगांव में एक ही साईबर कैफे है। वहां पहुंचा तो पता चला कि वह खराब है <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_sad.gif' alt=':-(' class='wp-smiley' /> </span></p>
<p><span style="font-size:medium;">पहलगांव में कोई हिन्दू या सिख नहीं है पर पुलिस स्टेशन के सामने एक मंदिर और गुरूद्वारा है। मेरे पूछने पर बताया गया,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;जब अमरनाथ की यात्रा होती है तो यात्री इसमें जातें हैं।  सिख यात्रियों के लिए गुरूद्वारा में लंगर होता है।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">पहलगांव में ९ होल का गोल्फ कोर्स है। उस पर काम चल रहा है और अन्तरराष्ट्रीय स्तर का १८ होल का गोल्फ कोर्स बन रहा है। इस समय इसके तीन होल पर ही खेल हो सकता है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">पहलगांव से पास में  चन्दरबाड़ी  भी है। यहां टैक्सी से जाया जा सकता है। यहां पर बर्फ  रहती है और स्लेजिंग की जा सकती है। हमारे लिये  समय कम था।  यह करना संभव नहीं था।  इसलिये वहां नहीं गये।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">आप स्विटज़रलैण्ड में हैं</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">पहलगांव में बाईसरन भी देखने की जगह है।  वहां पैदल या फिर घोड़े पर बैठ कर जाया जा सकता है। वहां जाने के लिये रोड तो है पर बहुत खराब है।  घोड़े वालों की  विरोध के कारण, टैक्सी नहीं जा सकती पर आप अपनी कार से जा सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">बाईसरन, एक घासस्थली (Meadow) है। <a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RoL590wiNQI/AAAAAAAAAGk/ryaefVMBBww/s200/Bisaran.jpg"><img class="alignleft" title="Bisaran" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RoL590wiNQI/AAAAAAAAAGk/ryaefVMBBww/s200/Bisaran.jpg" alt="" width="165" height="123" /></a>वहां हम लोग घोड़ों पर गये। पहुंचते ही, घोड़े वाले ने कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;आप लोग स्विटज़रलैण्ड में हैं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मैं कभी स्विटज़रलैण्ड नहीं गया इसलिये कह नहीं सकता कि उसकी बात सच है या नहीं पर यह जगह बहुत खूबसूरत बड़ा सा मैदान है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">हम जब मुन्ने के साथ ऎसी जगह जाते  थे तो  हमेशा चटाई रखते थे और फिर शतरंज होता था। मुन्ने की मां को शतरंज पसन्द नहीं है इसलिए उसके साथ तो नहीं खेला जा सकता। हांलाकि यदि वह खेलती होती तो भी मैं उससे जीत नहीं पाता। कहीं  पत्नियों से चालों में कोई जीत सका है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">ऐसी जगह हम लोग कभी-कभी donkey-donkey भी खेलते थे। इसमें गेंद या फ्रिस्बी को एक फेकता है और दूसरा पकड़ता है। पहली बार न पकड़े जाने पर D  दूसरी बार O और इसी तरह से जो पहले Donkey  बन जाय वह बाहर।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">शिव-पार्वती का निवास – गौरीमर्ग पर अब गुलमर्ग</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">हम लोग पहलगांव से गुलमर्ग पहुंचे। गुलमर्ग लगभग ९,००० फीट पर है। कहा जाता है कि यहां शिव-पार्वती का निवास है इसलिये यह गौरीमर्ग कहलाता था। सोलहवीं शताब्दी में कश्मीर के सुलतान यूसुफ शाह ने इसका नाम गुलमर्ग अर्थात फूलों की घाटी (Valley) कर दिया।</span></p>
<p style="text-align:center;">&nbsp;</p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">हम तुम बॉबी हट में बन्द हों</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">गुलमर्ग में एक मन्दिर है जिसमें &#8216;आप की कसम&#8217;  फिल्म के गाने &#8216;जय जय शिवशंकर&#8217; के कुछ भाग की शूटिंग हुई है। इसकी कुछ शूटिंग </span><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RpB-YkwiNZI/AAAAAAAAAHs/ZytPOLSWfkU/s200/Bobby+hut.jpg"><img class="alignright" title="Bobby hut Gulmarg" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RpB-YkwiNZI/AAAAAAAAAHs/ZytPOLSWfkU/s200/Bobby+hut.jpg" alt="" width="164" height="130" /></a></span><span style="font-size:medium;">श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर  में हुई है। गुलमर्ग में &#8216;बॉबी हट&#8217;  है।  इस फिल्म के एक गाने &#8216;हम तुम एक कमरे में बन्द हों&#8217; की  शूटिंग इसी हट में हुई है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">गुलमर्ग में १८ होल का गोल्फ कोर्स है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा पर स्थित  गोल्फ कोर्स  है। यह बहुत सुन्दर है पर यह बहुत अच्छी स्थिति में नहीं था। इस पर कोई भी खेल नहीं रहा था।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">यहां एक तारगाड़ी (rope way) &#8216;गंडोला&#8217; है। हम लोग घूमने के लिए निकले तो पानी बरसने लगा । पहलगांव में मौसम हमारे साथ रहा पर गुलमर्ग में नहीं । वापस होटल आ गये। बीच-बीच में पानी बरसता रहा,  बाहर नहीं जा पाये।  उस दिन तारगाड़ी   पर नहीं चढ़ पाये। होटेल में आ कर मैंने Every thing you desire: A journey through IIM by Harshdeep Jolly पढ़नी शुरू कर दी तो उसी में डूब गया। यह अच्छी पुस्तक है। इसकी पुस्तक समीक्षा, मैं अपने उन्मुक्त चिट्ठे पर <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/07/everything-you-desire-five-point.html">कर चुका</a> हूं।</span></p>
<p style="text-align:center;">&nbsp;</p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">पाँच साल में गुजरात बाकी राज्यों को बहुत पीछे छोड़ देगा</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rq6R0ih3_sI/AAAAAAAAAIE/iO8dJhv-za4/s200/Ropeway+Gulmarg.jpg"><img class="alignleft" title="Ropeway Gulmarg" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rq6R0ih3_sI/AAAAAAAAAIE/iO8dJhv-za4/s200/Ropeway+Gulmarg.jpg" alt="" width="110" height="176" /></a>गुलमर्ग में अगले दिन हम लोग सुबह &#8216;गंडोला&#8217; तारगाड़ी पर गऐ। १० बजे टिकट मिलना था, लाइन पर लगे रहे, लगभग ११ बजे टिकट मिला। गंडोला  दो चरण में है पहला चरण खिलनमर्ग के पास तक १०,५०० फीट तक जाता है और दूसरा चरण उपर १३,००० फीट तक जाता है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">दूसरे चरण पर जाने के लिये  हम लोग ने लाइन लगायी। यहां पर मेरी मुलाकात अहमदाबाद में काम कर रहे डाक्टरों से हुई। वे मुझसे गुजराती में बात करने लगे। मैं ने बताया कि मैं गुजरात से नहीं हूं न ही गुजराती समझ पाता हूं। इसके बाद वे हिन्दी में बात करने लगे।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">इन लोगों के मुताबिक गुजरात के हालात बहुत अच्छे हैं। मैने पूछा कि क्या मुसलमान भी ऎसा सोचते हैं। उन्होंने कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;हम चार परिवार एक साथ आये हैं एक मुसलमान परिवार है। आप उन्हीं से पूछ लीजये।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मैंने मुसलमान डाक्टर से बात की तो उसका भी वही जवाब था।  इनका कहना था,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;हमारे अस्पताल में  कोई बिजली का जेनरेटर नहीं है। क्योंकि पिछले दो साल में एक मिनट के लिए भी बिजली नहीं गयी। हालांकि  बिजली के लिए ८/-रू० प्रति यूनिट देना पड़ता है। पानी भी २४ घंटे आता है। अगले पाँच साल में गुजरात बाकी राज्यों को बहुत पीछे छोड़ देगा।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मैंने कहा कि मीडिया तो कुछ अलग सी रिपोर्ट करता है। उनके मुताबिक, मीडिया सनसनीखेज बातों पर निर्भर है। वे अक्सर कुछ ज्यादा या गलत लिख देते हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">कुछ समय पहले गुजरात में पुलिस मुठभेड़ (Encounter) में कुछ लोग मार दिये गये थे। मिडिया के मुताबिक यह फर्जी मुठभेड़ था। मैंने इसके बारे में उनके क्या कहना है।  उनका जवाब था,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;वह शक्स पुलिस को मारने के जुर्म में हत्यारा था इसलिए मुठभेड़ में मार दिया गया। ऎसा हर जगह होता है।  पुलिस ने यदि बचाव के लिये मुख्य मंत्री का नाम डाल दिया तो कोई बात नहीं। हमारे  गुजरात में रात को लड़किया सुरक्षित (Safely)  घूम सकती हैं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मुन्ने को जब अमेरिका जाना था तो मैं कुछ साल पहले, उसे स्पोकन इंगलिश की परीक्षा दिलवाने, अहमदाबाद ले गया था। मुझे कुछ इसी तरह का अनुभव हुआ था हांलाकि मुझे गुजरात का अधिक अनुभव नहीं है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे यह डाक्टर पसंद आये। वे अपने प्रदेश के बारे अच्छे विचार रखते थे। उत्तर भारत के कई प्रदेशों के लोग, अपने प्रदेश के बारे में अच्छी राय नहीं रखते हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैं उन लोगों से और बात करना चाहता था और उनके चित्र भी लेना चाहते था पर वहां ओले गिरने लगे। हमें श्रीनगर भी जाना था। हमें लगा कि हम दूसरे चरण में नहीं जा पायेंगे और वापस आ गए।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">हम लोगों से गलती हो गयी थी। सुबह खिलनमर्ग तथा आसपास हमें घोड़े पर चले जाना चाहिये था दस बजे तक सारा काम कर गंडोला के पहले स्टेज पर घोड़े से पहुंचकर, दूसरे स्टेज का टिकट लेना चाहिये था। मिलता तो ठीक था नहीं तो गंडोला से वापस चले आना था। गंडोला में एक तरफ का भी टिकट मिलता है। चलिये अगली बार इसी तरह से ही करेंगे।</span></p>
<p style="text-align:center;">&nbsp;</p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">हेलगा कैटरीना और लीनुक्स</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RrkUMCh3_1I/AAAAAAAAAJM/ehLD_2tOvVo/s200/Kathrine.jpg"><img class="alignleft" title="Helga Katrina Finland" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RrkUMCh3_1I/AAAAAAAAAJM/ehLD_2tOvVo/s200/Kathrine.jpg" alt="" width="140" height="174" /></a></span><span style="font-size:medium;">हम लोग</span><span style="font-size:medium;"> गुलमर्ग से श्रीनगर आये। यहां हम हाउस बोट में रहे। यहां पर मेरी मुलाकात हेलगा कैटरीना से हुई।  वे फिनलैण्ड से हैं और डाक्टर हैं। कैटरीना साड़ी बहुत अच्छी तरह से पहने हुयी थी। मेरे उन्हें यह बताने पर,  मुस्कराईं और बोलीं,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;मैं  भारत तीसरी बार आई हूं। मुझे यह देश बेहद पसन्द है। मुझे पढ़ना अच्छा लगता है और पहली बार, कृष्णामूर्ती को पढ़ने के बाद, मैंने भारत आने का मन बनाया था।&#8217;</span></p></blockquote>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;">कैटरीना के एक लड़का (१६साल) और एक लड़की (१४ साल) है। वे तलाकशुदा हैं पर उनकी पती से अब भी मित्रता है। इस समय उनके पती, उनके घर में रह कर बच्चों की देखभाल कर रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;">Linus Torvalds फिनलैंड से है।  वे, १९९१ में, हेलसिंकी पॉलीटेक्निक में पढ़ रहे थे। उस समय, उन्होने Linux का करनल (Kernel) प्रकाशित किया था। जाहिर है हमारी बातों में Linus Torvalds भी थे।  कैटरीना ने बताया कि Linus Torvalds  का सही उच्चारण लीनुस टोरवाल्डस् है और फिनलैंड में Linux को  लीनुक्स बोलते हैं न कि लिनेक्स। क्या मालुम क्या सही और क्या नहीं।</span></p>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;">कैटरीना में मुझसे पूंछा कि क्या मैं लीनुस के परिवार के बारे में जानता हूं। मैंने कहा कि मैंने उसकी आत्मजीवनी &#8216;Just for fun : The story of a accidental revolutionary&#8217; पढ़ी है। इस लिये उनके जीवन के बारे में काफी कुछ मालुम है। यह पुस्तक कैटरीना ने नहीं पढ़ी थी। मैंने उसे बताया कि यह  पुस्तक बहुत अच्छी है और न केवल पढ़ने योग्य है पर प्रेरणा की स्रोत है। उसने वायदा किया कि वह उसे पढ़ेगी और अगली बार हम उस पर कुछ बात भी करेंगे।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">कैटरीना के बताया,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;फिनलैण्ड की सबसे अच्छी बात वहां की सुरक्षा है। हमारे देश में यहां टैक्स ज्यादा है पर चिकित्सा, पढ़ाई सब मुफ्त है। सारे विश्वविद्यालय सरकारी हैं।  मैं  बढ़ई के चार बच्चों में से एक हूं। मेरे पिता डाक्टरी की पढ़ाई का पैसा नहीं दे सकते थे पर मैं डाक्टर इसलिए बन पायीं क्योंकि पढ़ाई के लिए पैसे नहीं देना पड़ा।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">कैटरीना के पीठ पर एक चिन्ह था। मैंने पूछा कि यह  ठप्पा है या टैटू। उसने मुस्करा कर कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;यह टैटू है। इसे मैंने अपने आप को चालिसवें  जन्मदिन पर उपहार दिया है। अगले साल मैं पच्चास की हो जाउंगी। मैं नहीं समझ पा रही कि मैं अपने आप को क्या उपहार दूं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">कैटरीना को अपने लिये उपहार तय करने में देर नहीं लगी। हम लोग शाम को हाउस बोट पहुंचे तो वहां पर बनारसी साड़ियों का मेला लगा था। चारो तरफ साड़ियों फैली हुई थी। वह बोली,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;मैं  पच्चासिवें जन्म दिन के लिये साड़ी खरीद रहीं हूं पर तय नहीं कर पा रही हूं कि कौन सी लूं। क्या आप मेरी मदद करेंगे।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे हरे रंग वाली साड़ी  अच्छी लग रही थी। उसने वही ले ली।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे कैटरीना  साहसी महिला लगीं। वह भारत अकेले आयीं हैं और कशमीर में पैदल ट्रेक कर रही थीं।  फिर बोट पर ट्रेकिंग करने जा रहीं थीं। उसने मुझे फोटो दिखाये जिसमें वह घोड़े वालों या गाइड के घर में या फिर टेंट में रूकी। मेरे पूछने पर कि क्या वह यह सब, बिना अपने बच्चों के, अकेले आनन्द से कर  पा रहीं हैं। उसने कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;मेरे बच्चे साहसी  नहीं हैं, उन्हें इस तरह ट्रेक करने में मजा नहीं आता है। वे जरा सी गन्दगी से घबरा जाते हैं इसीलिए मैं उन्हें साथ नहीं लायी।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे ट्रेकिंग अच्छी लगती है पर मुन्ने की मां को नहीं।  जब मुन्ना साथ रहता था तब हम लोगों ने कई इस तरह के ट्रिप लिये थे पर अब नहीं। अकेले हिम्मत नहीं पड़ती है। कैटरीना से बात हो गयी है अगली बार जब वह भारत  आकर ट्रेकिंग पर जायेंगी तब मैं भी साथ रहूंगा।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">अच्छा तो हम चलते हैं</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैं १९७५ क
