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	<title>Unmukt - उनमुक्त &#187; यात्रा वर्णन</title>
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	<description>हिन्दी चिट्ठाकार उन्मुक्त की चिट्ठियाँ</description>
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		<title>ईश्वर के घर – हमारी केरल यात्रा</title>
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		<pubDate>Sat, 14 Jan 2012 08:30:05 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
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		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में, हमारी कोचीन-कुमाराकॉम-त्रिवेन्दम यात्रा का वर्णन है।
This post is our travelogue to Cochin-Kumarkom-Trivandum.
is chittthi mein, hamaree Cochin- Kumarkom-Trivandum ka varnan hai.<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=939&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em>इस चिट्ठी में, हमारी कोचीन-कुमाराकॉम-त्रिवेन्दम यात्रा का वर्णन है।</em></p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 427px"><img title="Kumarakom mornig" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kumarakommornig.jpg?w=417&#038;h=386" alt="" width="417" height="386" /><p class="wp-caption-text">सुबह झील से, ताज गार्डन रिट्रीट कुमारकॉम</p></div>
<p style="text-align:center;"><em> यह मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।</em></p>
<p><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/05/why-international-women-day-started.html">क्या कहा, महिलायें वोट नहीं दे सकती थीं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/06/pravin-taxi-driver-intersight-tours.html">मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/06/taj-malabar-hotel-kochin.html">हिन्दी चिट्ठकारों का तो खास ख्याल रखना होता है</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/06/cochin-places-to-see.html">आप जितनी सुन्दर हैं उतनी ही सुन्दर आपके पैरों में लगी मेंहदी</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/07/taj-garden-retreat-kumarakom.html">साइकलें, ठहरने वाले मेहमानो के लिये हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/07/mumbai-taj-gardenretreat-women.html">पुरुष बच्चों को देखे &#8211; महिलाएं मौज मस्ती करें</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/07/kumarakom-english-couple-women.html">भारतीय महिलाएं, साड़ी पहनकर छोटे-छोटे कदम लेती हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/08/kumarakom-australian-women-empowerment.html">पति, बिल्लियों की देख-भाल कर रहे हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/08/bird-sanctuary-kumarakom.html">कुमाराकॉम पक्षीशाला में</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/09/kerala-beef.html">क्या खांयेगे &#8211; बीफ बिरयानी, बीफ आमलेट या बीफ कटलेट</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/09/kerala-pongala-ktdc-hotel-attukal.html">आखिरकार, हमें प्राइवेट और सरकारी होटल में अन्तर समझ में आया</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/10/beaches-are-public-not-private.html">भारत में समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं न की निजी</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/10/kdtc-samudra-trivandum-italian-sylvia.html">रात के खाने पर, सिलविया गुस्से में थी</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/10/why-kanyakumari-is-so-named.html">मुझे, केवल कुमारी कन्या ही मार सके</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/11/kanyakumari-places-to-visit.html">आपका प्रेम है कि आपने मुझे अपना मान लिया</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/11/ayurvedic-massage-kerala.html">आप,  टाइम पत्रिका पढ़ना छोड़ दीजिए</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/12/trivandum-thiruvananthapuram-travancore.html">पति, पत्नी के घर में रहते हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/12/kovalam-beach-kerala.html">पसन्द करें &#8211; कौन सी मछली खायेंगे</a>।।</p>
<h3 style="text-align:center;"><span id="more-939"></span>क्या कहा, महिलायें वोट नहीं दे सकती थीं</h3>
<p>मुझे त्रिवेन्द्रम में होली के आस-पास कुछ काम था। मुझे लगा कि यह बहुत अच्छा मौका है कि जब हम होली में उत्तर भारत से दूर रह सकते हैं और केरल घूम सकते है। इसीलिए हम लोगों ने ऎसा प्रोग्राम बनाया कि मैं त्रिवेन्द्रम में अपना काम कर सकूं और हम केरल भी घूम सकें।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/delhikeralaflight.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/delhikeralaflight.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>हम लोग दिल्ली से, हवाई जहाज के द्वारा कोचीन के लिए चले। शाम का समय था। दाहिने तरफ की खिड़की से, पश्चिम दिशा में, डूबता हुआ सूरज दिखाई पड़ रहा था और क्षितिज पर लाल सी पंक्ति दिखाई पड़ रही थी ऎसा लगता था कि क्षितिज में चारो तरफ आग लगी हुई है।</p>
<p>उस समय आकाश में केवल एक ही तारा चमक रहा था और बहुत देर बाद अस्त हुआ। मेरे विचार मे वह शुक्र (Venus) ग्रह था। वह तारा हमको अपने कस्बे में काफी नीचे दिखाई पड़ता है पर यहां ऊंचाई पर था। शायद, यह इसलिए था कि हम हवाई जहाज में बहुत ऊपर थे।</p>
<p>हम लोग हवाई जहाज पर दिल्ली से कोचीन गये। रास्ते में, एक महिला ने इस बात की घोषणा की। उसने जानकारी दी कि,</p>
<ul>
<li>आज <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/03/blog-post_13.html">अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस</a> है।</li>
<li>यह दिन, किस प्रकार से लोगों को महिलाओं का सम्मान व आदर करने की याद दिलाता है।</li>
<li>वे चाहते हैं कि महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखा जाय।</li>
</ul>
<p>कुछ समय बाद मेरी मुलाकात एक परिचायिका से हुई। मैंने पूछा क्या उसने महिला दिवस के बारे में घोषणा की है। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह घोषणा मैंने नहीं पर हवाई जहाज की महिला चालक ने की थी। उसने भी, यह अपने मन से नहीं कहा था पर उसे कम्पनी के तरफ से जो सामग्री दी गयी थी उसे केवल पढ़ा था।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा कि लेकिन जो पढ़ा था क्या उसमें यह क्यों नहीं बताया गया था कि महिला दिवस क्यों शुरू हुआ क्योंकि और यह रोचक है। परिचायिका ने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यदि आपको इसके बारे में मालुम है तो बतायें।&#8217;</p></blockquote>
<div>यूरोप के बहुत सारे देशों में, महिलाओं को वोट देने का अधिकार बीसवीं शताब्दी में, द्वितीय विश्वयुद्व के बाद ही मिला।</div>
<p>मैंने उसे बताया, कि महिला दिवस, बीसवीं शताब्दी के शुरू में, महिलाओं को वोट का अधिकार दिलवाने के लिये शुरू किया गया था। परिचायिका को यह सुनकर आश्चर्य हुआ और उसने पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या कभी ऎसा भी था जब महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था?&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने उसे बताया कि बीसवीं शताब्दी में अधिकतर देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था और यूरोप के बहुत सारे देशों में तो यह बीसवीं शताब्दी में, द्वितीय विश्वयुद्व के बाद ही मिला। इंगलैंड में भी उन्नीसवी शताब्दी में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था। उन्हे भी यह अधिकार बीसवीं शताब्दी में, १९१८ में मिला।</p>
<div><a href="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/8/8a/Suffrage_parade-New_York_City-May_6_1912.jpg/800px-Suffrage_parade-New_York_City-May_6_1912.jpg"><img class="aligncenter" style="border:0 none;" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/8/8a/Suffrage_parade-New_York_City-May_6_1912.jpg/800px-Suffrage_parade-New_York_City-May_6_1912.jpg" alt="" width="420" height="294" border="0" /></a></div>
<div style="text-align:center;"> <em>६ मई १९१२ को न्यू यॉर्क में वोट के अधिकार के लिये जलूस निकालती महिलायें &#8211; चित्र <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Main_Page">विकिपीडिया</a> से। </em></div>
<p>मैंने उसे यह भी बताया कि दुनिया में पहले महिलाओं को व्यक्ति नहीं माना गया (विस्तार से <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/04/women-empowerment-person-clause-england.html">यहां</a> और <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/04/women-empowerment-person-clause_21.html">यहां</a> पढ़ें)। सबसे पहले महिलाओं को व्यक्ति इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/04/women-empowerment-conelia-sorbjee.html">माना</a> उन्होंने यह कॉर्निया सौरबजी नामक महिला को ९ अगस्त १९२१ में वकील के रूप में पंजीकृत कर किया। यह कार्य, हाऊस आफ लार्ड ने १९२८ में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के लगभग सात साल बाद, किया।</p>
<p>हम लोग साढ़े आठ बजे तक कोचीन पहुंचे। हम लोगो को रात कोचीन में ही बितानी थी और अगले दिन कुमराकॉम जाना था।</p>
<h3 style="text-align:center;">मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता है</h3>
<p>हम लोगों ने केरल घूमने का पैकेज &#8216;<a href="http://www.intersighttours.com/">इन्टर साइट टूरस् एवं ट्रैवल्स्</a>&#8216; कम्पनी से लिया था। उनकी तरफ से हवाई अड्डे पर हमें प्रवीन लेने आये थे। उसके पास वातानुकूलित टाटा इंडिका गाड़ी थी। वे इसके चालक थे। हमें पूरा पैकेज इन्हीं के साथ लेना था। इन्हें ही अंत पर हमें त्रिवेन्द्रम के हवाई अड्डे पर छोड़ना था।<br />
हम लोगों ने जब साउथ अफ्रीका में क्रुगर पार्क घूमने के लिये सारी बुकिंग अन्तरजाल पर ही करवायी थी। उस समय हम डर रहे थे कि सब ठीक होगा या नहीं। लेकिन वहाँ पर सब काम बहुत अच्छी तरह से हुआ। वहाँ का ड्राइवर हमेशा समय से आता था। हमारा वहां का अनुभव, बहुत अच्छा था। हमें केरल की ट्रिप में भी कुछ इसी तरह का अनुभव हुआ।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/pravin-taxi-driver-kerala.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/pravin-taxi-driver-kerala.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>हमारी गाड़ी के चालक, प्रवीण भी समय के पाबन्द थे। इनको जो भी समय बताया जाता था उस वक्त वह वहाँ पर मौजूद रहते थे। उनकी कार एकदम साफ रहती थी। वह हमेशा साफ सुथरे, सफेद कपड़े, पहनते थे। वे बातचित करने मे भी अच्छे थे। हर जगह की खासियत बताते थे, वहां पर क्या खरीदा जा सकती है, कौन सी दुकान अच्छी है। इस तरह सूचनांए भी हम लोगों को देते रहते थे। उनका बर्ताव भी बहुत अच्छा था। हमें उनके साथ घूमना अच्छा लगा।</p>
<p>प्रवीन ने बताया की उसके परिवार में सब लोगों का नाम &#8216;प्र&#8217; अक्षर शुरू होता मैंने पूछा की क्या प्र से नाम का शुरू होना शुभ होता है। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;हां, मेरे घर में सबका नाम प्र से शुरू होता है। मेरी पत्नी का नाम प्रविधा है मेरी बेटी का नाम प्रवीना है। न केवल मेरे पिता का नाम प्र से शुरू होता है पर भाई और भाभी एवं मेरी पत्नी तथा भाभी के मायके वालों का नाम भी प्र से शुरू होता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>प्रवीन एक बात से दुखी थे उन्होंने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;केरल में बहुत से लोग घूमने के लिए आते हैं। उसके लिए बहुत सारे होटल बने हुए हैं। लेकिन होटल मालिकों ने कोई भी जगह टैक्सी चालकों के रहने के लिए नहीं रखी है। हर रात टैक्सी चालक, अपनी टैक्सी में ही सोते हैं। रात में टैक्सी चालक खिड़की नहीं खोल सकते, क्योंकि मच्छर काटते हैं। गाड़ी में, गर्मी और उमस हो जाती है। इसलिए ड्राइवर गाड़ी मे ए.सी. चलाकर सोते है। इस कारण हर रात को केरल में लगभग एक लाख लीटर पेट्रोल और डीज़ल खर्च हो जाता है। यदि हर होटल में टैक्सी चालक के रहने के लिए शयनागार हो तो यह पेट्रोल और डीज़ल का खर्चा बचाया जा सकता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसने यह भी बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;हमारे संगठन ने इस बात की लिखित तथा फोन पर शिकायत पेट्रोलियम मंत्रालय में की है। पर उन्होंने इस पर कुछ भी करने से मना कर दिया। हम लोग इस बात से बहुत ही हताश हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसका यह भी कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;यहां पर कानून के अन्तर्गत तो सारे होटल मालिको को चालकों के लिये शयनागार बनाना चाहिए। लेकिन कोई भी होटल का मालिक उसे नहीं बनाता है और केवल कागजी कार्यवाही की जाती है। जो सरकारी लोग उसको चेक करने के लिए आते है वह भी ठीक से चेक नही करते है और वो घूस खा लेते हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>उक्त बात के अतिरिक्त, प्रवीण ने मुझसे कोई भी बात नहीं की जिसमें केरल की कोई बुरायी निकलती हो। वह अपने प्रदेश के लिए बहुत ही उत्साहित था और उसके मुताबिक वहाँ जगह- जगह उन्नति हो रही है और केरल बहुत आगे जायेगा।</p>
<p>मेरी पत्नी ने एक-दो बार कार का दरवाजा जोर से बंद किया तो। प्रवीण ने उसे समझाया।</p>
<blockquote><p>&#8216;मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता है क्योंकि इससे दरवाजा खराब हो सकता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने प्रवीण को बताया कि हमने मारूति की ए-स्टार <a href="http://munnekimaa.blogspot.com/2009/01/surprise-birthday-party-present.html">खरीदी</a> है उसका कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;कभी भी नई निकली कार नहीं खरीदना चाहिए। उस तरह की कारें, जब छ: महीना चल ले तब लेनी चाहिए। क्योंकि इस समय के अन्दर उस तरह की कारों की कमियां पता चल जाती है और उसके बाद खरीदने पर विचार किया जा सकता है कि उसे लेना चाहिए अथवा नहीं।&#8217;</p></blockquote>
<p>ऎसे बात तो सही है पर हम तो <a href="http://unmukts.wordpress.com/2008/12/17/jc-penny-video-2/">ए-स्टार गाड़ी</a> खरीद चुके हैं।</p>
<p>यह गाड़ी प्रवीण की थी जिसे उसने बैंक से ऋण पर लिया था। कार के लिये उसने ८० प्रतिशत ऋण लिया है और २० प्रतिशत स्वयं लगाया है। इसके लिये उसकी कम्पनी ने भी उसकी मदद की थी। उन्होंने इस बात को लिखकर दिया है कि प्रवीण की गाड़ी उनकी कम्पनी के साथ सम्बद्व रहेगी और इसके लिए प्रत्येक महीने वे एक निश्चित पैसा देगें जिससे वह कार के ऋण को वापस कर सकता है।</p>
<p>केरल में, घूमने वाली कम्पनी की गाड़ी तीन साल से पुरानी गाड़ी नहीं लगायी जाती है। प्रवीन की गाड़ी को भी लगभग डेढ़ साल हो चुका है। उसने बताया कि वह डेढ़ साल के अन्दर गाड़ी बेचकर दूसरी गाड़ी लेगा। वह डीजल की, टाटा इन्डिका ही लेगा। उसके मुताबिक,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह चलने में सबसे अच्छी गाड़ी है।&#8217;</p></blockquote>
<h3 style="text-align:center;">हिन्दी चिट्ठकारों का तो खास ख्याल रखना होता है</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajmalabarcochin.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajmalabarcochin.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>कोचीन में, हम लोग ताज मालाबार होटल में रूके थे। होटल में पहुंचते समय अभिलाष, स्वागत कक्ष पर थे। उन्होंने मुस्कुरा कर हम लोगों का स्वागत किया और कहा कि उसने हमें अपग्रेड दे दिया है और हेल्टज रूम में रहने की सुविधा प्रदान की है। मेरे पूछने पर कि उसने ऎसा क्यों किया। उसने कहा, इसकें दो कारण बताये,</div>
<blockquote><p>&#8216;पहला, हमें पहले पता चल गया था कि हिन्दी चिट्ठाकार उन्मुक्त सपत्नीक आ रहें हैं। हिन्दी चिट्ठाकारों को तो खास कमरा देना ही होता है।&#8217; <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/abhilashreceptionisttajmalabarcochin.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/abhilashreceptionisttajmalabarcochin.jpg?w=225" alt="" border="0" /></a></p></blockquote>
<p>वाह, हिन्दी चिट्टकारी का यह फायदा तो मुझे मालुम ही न था <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </p>
<div style="text-align:right;"><em>स्वगत कक्ष पर अभिलाष,<br />
</em></div>
<div style="text-align:right;"><em>अभिलाष जी, अन्य हिन्दी चिट्ठकारों का भी ख्याल करना।<br />
</em></div>
<blockquote><p>&#8216;दूसरा, इस समय होटेल में, अच्छे कमरे खाली हैं। आप जब वापस जाएं तो अपने मित्रों को इस होटल के बारे में बताये और उन्हें यहां ठहरने के लिये कहें।&#8217;</p></blockquote>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajmalabarcochinoutside.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajmalabarcochinoutside.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a><em></em></p>
<p><em>होटेल के बाहर का दृश्य </em></p>
<p><em></em>ताज मालाबार होटल दो भागों में बना हुआ है पहला भाग पुराना है। इसे १९३६ में अंग्रेजों ने बनवायया था। उस समय यह नाविकों के आराम गृह की तरह प्रयोग किया जाता था। बाद में, ताज होटल ने, इसे खरीद लिया। इसमें एक नई बिल्डिंग बनवायी गयी है जो उसके बगल में बहुमंजिली इमारत है। शायद, हम लोगों का आरक्षण बहुमंजिली कमरे में था। अभिलाष ने हमें, हेल्टज रूम में यानी १९३६ में बने कमरे में भेज दिया। अभिलाष ने मुझसे पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;इस कमरे में दोनो विस्तर अलग-अलग हैं। यदि आप चाहें तो हम आपको दूसरा कमरा दे सकते हैं जिसमें दोनो बिस्तर साथ साथ हो।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने जवाब दिया,</p>
<blockquote><p>&#8216;इस उम्र में हमें इसकी कोई जरूरत नहीं है। यह कमरा चलेगा।&#8217;</p></blockquote>
<p>हम लोग जब कमरे में पहुंचे तो मुझे लगा कि हमारा रात में कोचीन में रूकने का निर्णय सही था। यह होटल भी बहुत अच्छा है और उसका कमरा भी। इस कमरे का भी फर्नीचर और समान, उसी समय की स्टाइल में था। इस कमरे के बाहर देखने पर अप्रवाही जल (Back water) और समुद्र का सुन्दर दृश्य दिखायी पड़ता था।<br />
<img class="alignright" title="View from Taj Malabar hotel Cochin" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajmalabarcochinview.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" /></p>
<div style="text-align:right;"><em>होटेल से बाहर अप्रवाही जल</em></div>
<p>कुछ साल पहले जब मै एक सम्मेलन में भाग लेने कोचीन आया था तब यहाँ पर &#8216;ला मेरिडियन&#8217; होटल में ठहरा था। वह होटल भी एक बेहतरीन होटल है पर ताज मालाबार किसी मायने में उससे कम नहीं है।</p>
<p>सुबह मेरी मुलाकात होटेल के दरबान, ऑगस्टीन से हूई। मैं उसका चित्र नहीं ले पाया पर उसने बताया कि वह काम चलाऊ १८ भाषायें बोल सकता है। मैंने जब उससे पूछा कि उसने यह कैसे सीखा तो उसने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;कोचीन में विदेशी पर्यटक आते हैं। बस उन्ही से बात करते करते उनकी भाषा सीख ली।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने ऑगस्टीन से काफी देर बात की। वह मुझे हंसमुख और मिलनसार व्यक्ति लगा।</p>
<h3 style="text-align:center;">आप जितनी सुन्दर हैं उतनी ही सुन्दर आपके पैरों में लगी मेंहदी</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/synagoguecochin.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/synagoguecochin.jpg?w=178&#038;h=238" alt="" width="178" height="238" border="0" /></a> सबसे पहले हम लोग वहाँ सिनागॉग, यानी की यहूदियों के पूजा स्थल, देखने गये। इसे १५६८ में स्पैनिश एवं डच यहूदियों ने बनावाया था। इसके उपर घड़ी की टावर १७६० में बनी। इसकी देखरेख करने वाले वाले ने बताया,</div>
<blockquote><p>&#8216;इस समय यहाँ पर यहूदियों के केवल पाँच परिवार रह गये है और उन पाँचों परिवार में केवल ग्यारह सदस्य है और पूरे केरल में केवल पन्द्रह परिवार यहूदियों के रह गये हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:right;"><em>डच पैलेस से सियनगॉग के पीछे से दृश्य</em></p>
<p style="text-align:left;">सिनागॉग के बगल में डच पैलेस है। यह महल को पुर्तगलियों ने १५५५ में वहाँ के राजा वीर केरल वर्मा के लिए बनवाया था। १६६५ में, डच लोगों ने इसे बड़ा किया और इसकी मरम्मत करवायी। इसीलिए यह डच पैलेस के नाम से जाना जाता है। इसमें कोचीन के महाराजा की तस्वीरे, पालकियाँ, वेशभूषा व अस्त्र-शस्त्र रखे हुए हैं।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/jaitalikanalmodiahemdabadcochin.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/jaitalikanalmodiahemdabadcochin.jpg?w=212&#038;h=478" alt="" width="212" height="478" border="0" /></a>डच पैलेस घूमते समय हमारी मुलाकात अन्य पर्यटकों के साथ, मेरी मुलाकात जैताली नामक एक प्यारी सी युवती से हुई। उसके पैरों में लगी मेंहदी बहुत सुन्दर लग रही थी। वह स्वयं भी बहुत सुन्दर थी मैंने उससे कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप जितनी खूबसूरत हैं उतनी ही सुन्दर आपके पैर में मेंहदी लगी है। क्या आपने यह कोचीन में लगवायी है?&#8217;</p></blockquote>
<p>यह सुन कर वह शर्मा गयी। उसने मुझसे कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मेरी एक सप्ताह पहले मेरी शादी हुई है। यह मेंहदी मैंने शादी के लिए लगवायी थी।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने जैताली से पूछा कि क्या में उसके पैरों में लगी मेंहदी का चित्र खींच सकता हूं। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;जरूर।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसने पैरों में जूते पहन रखे थे। उसने अपने जूते उतार दिये, जींस को कुछ ऊपर कर लिया ताकि पैरों की मेंहदी अच्छी तरह से दिख सके और अपने पति के साथ चित्र खिंचवाया।</p>
<p>जैताली हनीमून के लिए अपने पति करनाल मोदी के साथ अहमदाबाद से आयी थी। लेकिन, उसके साथ केवल उसके पति नहीं थे। साथ में पति के बड़े भाई और उनकी पत्नी भी थी। यह चारो लोग वहाँ मस्ती से घूम फिर रहे थे। करनाल, सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और <a href="http://www.nutronsystems.com/">न्यूट्रॉन सिस्टम</a> नामक कम्पनी के साथ काम करते है। मैंने पूछा कि क्या वह लोग मुक्त सॉफ्टवेयर पर काम करते हैं उसने कहा नहीं <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_sad.gif' alt=':-(' class='wp-smiley' /> </p>
<p>&#8216;करनाल, जैताली, नमस्ते<br />
करनाल मुक्त सॉफ्टवेयर का भविष्य उज्जवल है तम्हें इस पर भी काम करना चाहिये।<br />
जैताली तुम और करनाल हमेशा सुखी रहो, खुश रहो यही ईश्वर से <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/stfracischurchcochin.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/stfracischurchcochin.jpg?w=150&#038;h=200" alt="" width="150" height="200" border="0" /></a>प्रार्थना&#8217;</p>
<p>हम लोग सन्त फ्रांसिस चर्च भी देखने गये जिसे १५१६ ई० में पुर्तगलियों के द्वारा बनवाया गया था। वास्कोडिगामा के मरने के बाद, वहाँ उन्हें गाड़ दिया गया था पर कुछ साल बाद उसे पुर्तगाल ले जाया गया।</p>
<p>हम लोग दो साल पहले कालीकट घूमने गये थे मैंने इसके बारे में &#8216;<a href="http://unmukth.wordpress.com/2012/01/14/category/%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%A8/">प्रकृति की गोद में तीन दिन</a>&#8216; नाम से यात्रा विवरण लिखा था। इसकी <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/03/blog-post_16.html">पहली कड़ी</a> में कप्पड़ समुद्र-तट पर वास्कोडिगामा के बारे में हुई चर्चा का वर्णन किया था। वहां पर वास्कोडिगामा के बारे में लोगों की राय, खराब थी। फ्रांसिस चर्च में बैठे पादरी से मैंने उस चर्चा का वर्णन किया। उनका कहना था कि उस समय कोचीन और कालीकट के राजा के बीच में लड़ाई चल रही थी। वास्कोडिगामा ने कोचीन के राजा का साथ दिया, इसलिये वे लोग वास्कोडिगामा के बारे में इस तरह की बात करते हैं</p>
<p><img class="alignleft" title="chinese net cochin" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/chinesenetcochin.jpg?w=260&#038;h=211" alt="" width="260" height="211" />यहाँ पर हम लोगों ने मछली पकड़ने के लिये चाईनीज जाल भी देखे। कोचीन मे चीन से बहुत लोग आये थे। वे अलग तरीके से मछली पकड़ते थे। अब वे नहीं रह गये हैं पर केरल के लोग, उसी तरह से मछली पकड़ रहे हैं। इसमें एक तरफ बडा सा जाल है दूसरी तरफ भारी-भारी पत्थर लगे हुए हैं। जाल के डंडो पर कुछ व्यक्ति चलते है तो वह नीचे पानी में चला जाता है जब व्यक्ति वहां से हट जाते है तो पत्थर के भार से जाल ऊपर आता है और जो मछली जाल में फंस जाती है वह जाल के साथ ऊपर आ जाती हैं। यह जाल ढ़ेकली लीवर (lever) के सिद्घान्त पर काम करता है।</p>
<h3 style="text-align:center;">साइकलें, ठहरने वाले मेहमानो के लिये हैं</h3>
<p>हम लोग दोपहर के भोजन के समय कुमाराकॉम पहुंचे। यहां हमें ताज गार्डन रिट्रीट (Taj Garden Retreat) होटल में एक रात रूकना था।</p>
<p><em></em>ताज गार्डन रिट्रीट होटल मुझे बहुत सुन्दर और शान्त लगा। यहां पहले बेकर परिवार रहा करता था इसलिये इसे बेकर हाउस के नाम से जाना जाता था। केरल में, बेकर परिवार ने शिक्षा क्षेत्र में काम किया है। इनके परिवार का आखिरी सदस्य १९६२ में भारत छोड़कर चला गया और इसे १९७७ में बेच दिया। १९९२ में इसे ताज ग्रुप ने ले लिया।</p>
<p>यह लगभग १५ हेक्टेयर में स्थित है इसके बीचो बीच एक झील है। मन किया कि यहां कुछ दिन रुककर पुस्तकों का अध्ययन करूं, कुछ लिखूं। इस होटेल में एक जगह पुस्तकें रखीं थी। आप उन्हें कहीं पर बैठ कर पढ़ सकते थे। पूरे होटल में वाई-फाई (wi-fi) है। आप जहां चाहें वहां बैठ कर अपने लैपटॉप से काम कर सकते हैं, अन्तरजाल पर जा सकते हैं। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajretreatgardencottage.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajretreatgardencottage.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a><br />
<em></em></p>
<p style="text-align:right;"><em>हम होटेल की इसी कॉटेज में रुके थे</em></p>
<p>हम लोगों को जब मालूम चला था कि एक रात हमें ताज रिट्रीट गार्डन में ठहरना है तब हमने इसके बारे में अन्तरजाल में देखा था। हमें <a href="http://www.tripadvisor.com/Hotel_Review-g678552-d304860-Reviews-Taj_Garden_Retreat_Kumarakom-Kumarakom_Kerala.html">वहां</a> इसकी कुछ समीक्षाएं अच्छी नहीं थी। इसलिए हम घबरा रहे थे पर यह न केवल बेहतरीन होटल है पर यहां कि सेवा भी अति उत्तम है। मुझे दुख हुआ कि मैंने वहां केवल एक रात ही रूकने का क्यों प्रोग्राम बनाया।<br />
बेकर पिरवार जिस भाग में रहता था इस समय वह होटल का मुख्य भाग था। इसमें उनके हेरीटॅज़ कमरे थे। बाद में इसमें जगह जगह कॉटेज बना दिये गये हैं। वहां पहुंच कर हमें बताया कि यहां भी हमें अपग्रेड कर दिया गया है इसका कारण वही बताया गया जो कि ताज मालाबार होटेल में <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/06/taj-malabar-hotel-kochin.html">दिया गया था</a>। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatbathroom.jpg"><br />
</a><br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatbathroom.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatbathroom.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a>हम जिस कॉटेज़ में ठहरे थे वह सुन्दर थी इसका बाथरूम अनूठा सा था। इसका कुछ भाग ऊपर से खुला था और उसके ऊपर जाल पड़ा था। वहां पर उसे प्रयोग करने पर लगता था कि हम खुली जगह पर हैं पर वह था, प्राइवेट।<br />
वहां बहुत सी साइकलें रखी थीं मैने स्वागत कक्ष में बैठी महिला से पूछा कि यह यहां क्यों रखी हैं। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;हमारा होटल बहुत फैला है। हमने यह साइकलें हमारे यहां ठहरने वाले मेहमानो के लिये रखी हैं। ताकि वे इसका प्रयोग कर एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिये करें।&#8217;</p></blockquote>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatcycle.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatcycle.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a>मैंने वहां काफी साइकिल चलायी। होटेल के अन्दर आप जहां चाहें वहां साइकिल छोड़ सकते थे या कहीं भी रखी साइकिल को ले सकते थे। रात के समय होटेल वाले साइकिलों को वापस एक जगह पर रखते थे।</div>
<p>वहां कुछ साइकिलों के टायर पतले थे और कुछ के मोटे। पतले टायरों की साइकिल चलाने में मुश्किल पड़ी। लगता था कि वह इधर उधर भाग रही है। मुझे लगा कि कहीं मैं झील में न गिर जाऊँ। मोटे टायर वाली साइकिल चलाने में ज्यादा दम लगती थी।</p>
<p>मैंने न केवल बचपन में पर बाद के जीवन में काफी साइकिल चलायी है। हम अक्सर मित्रों से मिलने साइकिल पर जाया करते थे पर बाद में <a href="http://www.blogger.com/profile/15090591980327578036">शुभा</a> को साइकिल चलाने में तकलीफ होने लगी तब साइकिल चलाना छोड़ दिया। मैंने जिन साइकलों को चलाया है उनके टायर इन दोनो के बीच के होते थे। वे ही बेहतर थे।</p>
<p>आजकल मैंने पुन: साइकिल चलाना शुरू किया है। मेरी साइकिल में बीच के ही टायर हैं। मैं, आजकल इतवार को सुबह लगभग १५-२० किलोमीटर चलाता हूं और सप्ताह में प्रयत्न करता हूं कि सारे काम साइकिल में ही करूं। पेट्रोल भी बचा और वातावरण भी दूषित नहीं हुआ। हांलाकि भीड़ के कारण सब जगह साइकिल पर नहीं जाया जा सकता है।</p>
<p>इस होटेल में मेरी मुलाकात कई लोगों से हुई। वहां मुझे महिला सशक्तिकरण का नया रूप देखने को मिला।</p>
<h3 style="text-align:center;">पुरुष बच्चों को देखे &#8211; महिलाएं मौज मस्ती करें</h3>
<div>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 504px"><img title="Kumarakom morning lake" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kumarakommorninglake.jpg?w=494&#038;h=370" alt="" width="494" height="370" /><p class="wp-caption-text">सुबह के समय अप्रवाही जल से कुमाराकॉम का दृश्य</p></div>
</div>
<div>ताज गार्डन रिट्रीट होटल पहुंचते ही हमारा स्वागत नारियल की माला पहनाकर किया गया। एक ताजा नारियल, जल पीने के लिए दिया गया। उस समय वहां तीन युवतियां भी आयी। वे भी वहीं ठहरी हुई थीं। हमें देखकर उन्होंने कहा कि हमारा ऐसा स्वागत क्यों नहीं हुआ। स्वागत कक्ष में बैठी युवती कुछ परेशानी में पड़ गयी। मैने उसके बचाव में कहा,</div>
<blockquote><p>‘हम दोपहर को आये हैं, गर्मी है- इसलिये हमारा इस तरह से स्वागत हुआ है।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसमें से एक युवती ने कहा,</p>
<blockquote><p>‘हम भी कल दोपहर को आयें थे फिर भी हमारा इस तरह से स्वागत नहीं हुआ।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने बात टालने के लिये कहा,</p>
<blockquote><p>‘अरे, मुझे यह मालूम होता तो कोई और बहाना बनाता।‘</p></blockquote>
<p>वे मतलब समझ गयी। इस बात को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।</p>
<p>इन महिलाओं को जब पता चला कि हम उत्तर भारत से हैं तो उनमें से एक बोली,</p>
<blockquote><p>‘क्या आप सक्सेना है। मेरे पति भी सक्सेना है, और वहीं से है। लगता है कि सक्सेना लोग वहीं पाये जाते हैं।‘</p></blockquote>
<p>मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>‘सक्सेना, कायस्थ होते हैं और उत्तर भारत में शायद ज्यादा तादाद में हैं इसलिये आपको ऐसा लगता है पर मैं सक्सेना नहीं हूं।‘</p></blockquote>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatbedroom.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatbedroom.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a><p class="wp-caption-text">होटेल में श्यनकक्ष के अन्दर</p></div>
<p>यह तीनों अपने तीस के या फिर चालीस के दशक में थी। इनसे बात करने पर पता चला कि यह बम्बई से आयी हैं और विज्ञापन कम्पनी में काम करती हैं।</p>
<p>इन तीनों के साथ इनका परिवार नहीं था। वे अपने पतियों और परिवार को छोड़कर सहेलियों के साथ मस्ती मारने आयी थीं। मुझे यह बात कुछ अजीब लगी।</p>
<p>परिवार के बारे में पूछने पर बताया बच्चों के स्कूल हैं, पति काम पर हैं और बच्चों की देखभाल भी कर रहे हैं। इस कारण उनके परिवार उनके साथ नहीं आ सके।</p>
<p>यह महिलायें ज्यादा समय अपने कॉटेज़ में रहती थीं। मैं भी वहां की शान्ति और सुन्दरता में इतना व्यस्त रहा कि इनके चित्र नहीं खींच पाया। इसलिये पोस्ट नहीं कर पा रहा हूं।</p>
<p>महिला सशक्तिकरण का यह रूप भी देखा &#8211; पुरुष काम के साथ बच्चों को देखे और महिलाएं अपनी सहेलियों के साथ मस्ती करें <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>मैं और शुभा कई बार काम से अकेले गये। शुभा दुनिया के सारे कोने में अकेले जा चुकी है। कई साल उसने अकेले अमेरिका और कैनाडा में पढ़ाया है। लेकिन आज तक हम कभी भी, अपने परिवार को छोड़कर, मौज मस्ती मारने नहीं गये। हम जब भी गये, हमारा परिवार हमारे साथ रहा। ऐसे मौकों पर, जब तक मेरी मां जीवित रहीं, वे भी हमारे साथ <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/06/mother-deathbed.html">रहती थीं</a>। मेरे विचार से, ऐसे मौकों पर अगली पीढ़ी को साथ रखना चाहिये। इससे न केवल, वे बहुत कुछ सीखते हैं पर परिवार में संबन्ध भी प्रगाढ़ होते हैं।</p>
<p>लेकिन, यह भी सच है कि कभी-कभी, केवल मित्रों के साथ मस्ती मारने का अलग मज़ा है।</p>
<p>आइये देखते हैं, महिला सशक्तिकरण का एक दूसरा रूप।</p>
<h3 style="text-align:center;">भारतीय महिलाएं, साड़ी पहनकर छोटे-छोटे कदम लेती हैं</h3>
<p>कुमाराकॉम में, हमारी मुलाकात एक सिख दंपत्ति से भी हुई। वे शिकागो में रहते हैं और अवकाश प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वे दादा-दादी बन गये हैं और  भारत घूमने के लिए आये हुए हैं। सिख महिला ने बताया, <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatkumarakomsikhcouple.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatkumarakomsikhcouple.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a></p>
<blockquote><p>‘हम एल्लपी से आये हैं। यह सफर हमने कल रात नाव पर किया।  रात में नाव, झील के बीचो बीच रूक गयी थी। अगले दिन  मैं तो सुबह पांच बजे ही उठ गयी थी लेकिन नाव को चलाने वाले ६:३७ पर उठे। इसलिये चलने में देर हो गयी।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने उससे पूछा,</p>
<blockquote><p>‘उस समय कितने सेकेंड हुए थे।‘</p></blockquote>
<p>पहले तो उस महिला को मज़ाक समझ में नहीं आया कि मैं यह क्यों पूछ रहा हूं। फिर वह समझ गयी कि उसने ६:३७ मिनट कहा था। इसलिए उससे सेकेंड के बारे में पूछा जा रहा है। वह मुस्कुरा कर बोली,</p>
<blockquote><p>‘उस वक्त ४२ सेकण्ड हुये थे।‘</p></blockquote>
<p>हमें लगा कि रात को नाव से चलना ज्यादा रोमांचकारी होता पर हम तो यात्रा शुरू कर चुके थे और अब उसमें बदलाव संभव नहीं था।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatkumarakomenglishcouple.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatkumarakomenglishcouple.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a>यहां हमारी मुलाकात एक अंग्रेज दंपत्ति से भी हुई। अंग्रेज महिला ने सलवार, कुर्ता पहन रखा था। मैंने उस महिला से कहा कि वे सलवार, कुर्ता में बहुत ही सुन्दर लग रही है। उसने मुस्कुरा कर कहा,</p>
<blockquote><p>‘मैं १९७२ से लगातार भारत आ रही हूं। यहां  इसी वेषभूषा को पहनना  सुविधाजनक है। आप दूसरे से अलग नहीं लगते और आप इसे पहनकर किसी भी मंदिर में आसानी से जा सकते हैं।‘</p></blockquote>
<p>मैंने कहा कि क्या लोग आपको देखकर नहीं पहचान पाते हैं क्योंकि आप देखने में भारतीय  नहीं लगती हैं। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>‘ऐसी बात नहीं है। एक बार मैंने साड़ी पहनी थी। लोग मुझे कश्मीरी समझ गये थे। लेकिन जब मैं  चलने लगी तब वह समझ गये कि मैं भारतीय नहीं हूँ क्योंकि मुझे साड़ी पहनकर चलना नहीं आता है।  मैं लम्बे-लम्बे कदम रख रही थी जब कि भारतीय महिलाएं साड़ी पहनकर  छोटे-छोटे कदम लेती हैं।‘</p></blockquote>
<p>उसके पति ने मुझे बताया कि वह एक एरिक्सन कम्पनी में इंजीनियर थे। अब वे अवकाश प्राप्त हो गये हैं। उन्हें भारत से प्रेम हैं इसलिए वे हर साल यहां आते है। मैं, उनसे   जीएसएम, सीडीएमए तकनीक और मोबाइल फोन के बारे में के बारे में बात करने लगा। थोड़ी देर बाद उनकी पत्नी ने अपने हाथों की हथेली को अजीब तरह से  खोलना और बंद करना शुरू कर दिया मेरी समझ में नही आया कि वह ऐसा क्यों कर रही हैं। लेकिन, उसे  देखकर उनके पति चुप हो गये। महिला ने बताया  कि,</p>
<blockquote><p>‘हम लोग एक मस्ती के लिए भारत आये हैं इस समय कोई व्यापार या काम की बात नहीं की जा सकती है। जब मेरे पति व्यापार या काम सम्बन्धी बातें करना शुरू कर देते है तो मै उनको इस तरह से इशारा से मना करती हूं। जब इसके बाद भी वह नहीं मानते तब मैं उन्हें पैर से ठोकर देती हूं। तब उनके  समझ में आ जाता है कि इस तरह की बाते नहीं करनी है।‘</p></blockquote>
<p>उनके पति ने इसका प्रतिवाद किया,</p>
<blockquote><p>‘मैं  कोई भी व्यापार या काम की बात नहीं कर रहा था हम तो केवल तकनीक के बारे में सूचना साझा कर रहे थे।‘</p></blockquote>
<p>लेकिन उन्होनें इस विषय पर बात करना बंद कर दिया। महिला सशक्तिकरण का एक रूप यह भी है।</p>
<p>चलिये देखते हैं ऑस्ट्रेलियायी महिलाओं का महिला सशक्तिकरण।</p>
<h3 style="text-align:center;">पति, बिल्लियों की देख-भाल कर रहे हैं</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatmotorboat.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatmotorboat.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>कुमाराकॉम में भी अप्रवाही जल है। शाम के समय हमने वहां पर नाव से सैर की और सूर्यास्त का नज़ारा लिया।</div>
<p>नाव पर मेरी मुलाकात,आस्ट्रेलिया से आयी दो महिलाओं से भी हुई। हम लोग कुमाराकॉम से त्रिवेन्द्रम  जाने वाले थे जब कि वे लोग त्रिवेन्द्रम से आ रही थीं और इसके बाद कोचीन जाने वाली थीं। वहां से वे ऊटी जा रही थीं।</p>
<p>शाम को गर्मी और उमस थी। मैं नेकर पहने था। उस महिला ने कहा कि वह भी नेकर पहनना चाहती थी पर उनसे बताया गया था कि वे भारत में ऐसे कपड़े न पहने। मैंने बताया,</p>
<blockquote><p>‘भारत में पुरूष लोग नेकर पहन लेते हैं पर महिलाएं नहीं। हांलाकि इस होटल में नेकर पहन कर या नहाने की ड्रेस पहन कर घूमने में कोई एतराज़ नहीं करेगा।‘</p></blockquote>
<p>उसने कहा,</p>
<blockquote><p>‘तब तो मैं भी कल नेकर ही पहनूगी।‘</p></blockquote>
<p>यह दोनो महिलाएं निरोषध चिकित्सक (Physiotherapist) थीं। उनके मुताबिक ऑस्ट्रेलिया में इस पेशे में पैसा बहुत कम है शायद आने वाले समय में इसमें पैसा मिले।</p>
<p>इन दोनों ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं के पति  साथ में नहीं थे न ही उनके बच्चे साथ थे। मैंने पूछा, कि क्या आपके पति ऑस्ट्रेलिया  में बच्चों की देखभाल करने के लिए रूक गये हैं। उसने कहा, नहीं। हमारे बच्चे  बहुत बड़े हो गये हैं। उनकी शादी भी हो गयी है। वे लोग अलग रहते है। उसके बाद बताया,</p>
<blockquote><p>‘हमने कई बिल्लियां पाल रखी हैं। हमारे पति ऑस्ट्रेलिया में रहकर  बिल्लियों की देखभाल कर रहे हैं और हम दोनों भारत में मस्ती मारने आयें हुए हैं।‘</p></blockquote>
<p>यह भी महिला सशक्तिकरण का एक अलग रूप है। पति ऑस्ट्रेलिया में बिल्लियां देखें और पत्नियां भारत घूमे।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatkumarakomaustralians.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/tajgardenretreatkumarakomaustralians.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>रात्रि भोज पर, मेरी मुलाकात फिर से इन महिलाओं से हुयी। शाम को नाव की सैर करते समय वे नेकर तो नहीं पहने थी पर  अनौपचारिक परिधान पहने थीं। रात के भोजन पर वे एकदम औपचारिक परिधान पहन कर आयीं थीं। मैंने उनकी तारीफ की वे बोली,</div>
<blockquote><p>&#8216;रात्रि का भोजन तो खास होता है। इसलिए ये खास परिधान।‘</p></blockquote>
<p>रात्रि भोज पर कुछ युवतियां केरल के पारम्परिक नृत्य कर रही थी। केरल में, परम्परागत परिधान में  सफेद या हल्के पीले रंग की साड़ी पहनी जाती है। जिसमें सुनहरा किनारा होता है। वे इसी तरह की साड़ी पहने थीं। नृत्य के पहले वे मलयालम में उस नृत्य के बारे में बताती थी। यह  हमारे या वहां पर भोजन कर रहे किसी के समझ में नहीं आ रहा था। मैं इनकी मुख्य नृतकी के पास गया और उससे कहा कि वह अंग्रेजी में हमें इसके बारे में बताये ताकि हम उसे ठीक से समझ सके। अगले नृत्य के पहले उसने ऎसा ही किया पर उसकी अंग्रेजी बहुत अच्छी नहीं थी । मै इतना ही समझ पाया कि वह नृत्य शिव वंदना से जुड़ा है।</p>
<h3 style="text-align:center;">कुमाराकॉम पक्षीशाला में</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kumarakombirdsanctuarybird-2.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kumarakombirdsanctuarybird-2.jpg?w=166&#038;h=195" alt="" width="166" height="195" border="0" /></a>कुमाराकॉम में, एक पक्षीशाला है। इस चिट्ठी में इसी की चर्चा है।</div>
<p style="text-align:right;"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kumarakombirdsanctuarybird-1.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kumarakombirdsanctuarybird-1.jpg?w=188&#038;h=200" alt="" width="188" height="200" border="0" /></a></p>
<p style="text-align:left;">कुमाराकॉम में, एक पक्षीशाला है। हम लोग, सुबह वहां गये थे। पक्षीशाला लगभग १०० एकड़ में है इसमें ४० एकड़ की झील है। यही हमें वहां बताया गया था हांलाकि विकिपीडिया में इस <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kumarakom_Bird_Sanctuary">पक्षीशाला</a> का क्षेत्रफल कम लिखा है।</p>
<p>झील में, हमने नाव से यात्रा की। यह नाव मोटर-बोट नहीं थी । इसे लोग डंडो की सहायता से चला रहे थे।</p>
<p>पक्षीशाला में सुबह के समय घूमना बेहद सुखद था। दृश्य भी सुन्दर था और मौसम भी।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kumarakombirdsanctuarylotuscrane.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kumarakombirdsanctuarylotuscrane.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></div>
<p>यहां पर हमें कई तरह के पक्षी देखने को मिले। हमारे साथ हमारा गाइड भी था वह हमें उनके नाम बता रहा था। हमने वहां इतने पक्षी देखे कि मुझे सबका नाम याद नहीं रहा पर जिनके नाम याद है वे हैं</p>
<div>Pond Heron, Purple Heron, Stork billed Kingfisher, White breasted kingfisher, cormorant, Bronze winged Jacana, Terns, Openbill Stork, Darter (Snake bird)&#8230;</div>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kumarakombirdsanctuarylake.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kumarakombirdsanctuarylake.jpg?w=225" alt="" border="0" /></a>मुझे इनके हिन्दी में नाम नहीं मालुम हैं इसलिये नहीं लिख पा रहा हूं। लेकिन कुछ के चित्र आप इस चिट्ठी पर देख सकते हैं। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kumarakombirdsanctuarybird-3.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kumarakombirdsanctuarybird-3.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></p>
<p>इस चिट्ठी के चित्र में, विदेशी महिला जिस तरह की नाव में सैर कर रही है हम भी उसी तरह की नाव में गये थे।</p>
<p>यहां-वहां एक जगह कुछ लोग झील के अन्दर से मिट्टी निकाल रहे थे। मुझे यह कुछ अजीब लगा। मेरे पूछने पर गाइड ने बताया कि यह अन्दर से सिल्ट (silt) निकाल रहे हैं। यह खेती के लिए उपयोगी होती है। यह लोग इसे किसानों को बेचकर अपनी जीविका चलाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:center;">क्या खांयेगे &#8211; बीफ बिरयानी, बीफ आमलेट या बीफ कटलेट</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kanyakumarivivekanandrockmemorial.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kanyakumarivivekanandrockmemorial.jpg?w=382&#038;h=286" alt="" width="382" height="286" border="0" /></a></div>
<div style="text-align:center;"><em>इस यात्रा के दौरान, कन्याकुमारी में विवेकानन्द रॉक मेमोरिएल से समुद्र का चित्र </em></div>
<p>कुमाराकॉम से त्रिवेन्द्रम के लिये हम लोग टैक्सी से निकले। रास्ते में  हरि पार्क नामक जगह आयी। मैंने  <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/06/pravin-taxi-driver-intersight-tours.html">प्रवीण</a> से कहा कि हम लोग कहीं पर रुककर कॉफी पायेंगे और बाथरूम का प्रयोग करना चाहेंगे। वह हम लोगों को इन्डियन कॉफी हाउस ले गया।</p>
<p>कॉफी हाउस को कोऑपरेटिव सोसायटी चलाती हैं। इनका हेड ऑफिस त्रिशूल में है। इस कॉफी ऑफिस की दीवारों में, कुछ बड़े अक्षरों में उनके मीनू लिखे हुए थे। उस मीनू में  प्रमुख था बीफ बिरयानी, बीफ आमलेट और बीफ कटलेट। मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि किसी भी रेंस्ट्रा में इतनी आसानी से बीफ मिल सकता है। मेरे कस्बे में तो बीफ इस तरह से नहीं बिक सकता। शायद लोग बुरा मान जाएँ। मुझे आश्चर्य लगा कि बीफ इतने खुले तरीके से बिक रहा है। प्रवीण ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;यहाँ पर हिन्दू भी बीफ खाते है। इसलिये यह सब जगह मिल जाता है। यह केवल केरल में ही है और दक्षिण के किसी अन्य प्रान्त में ऐसा नही है। यहाँ पर जो अलग दूसरे प्रान्त के हिन्दू लोग आकर रहते हैं वे भी बीफ नहीं खाते हैं।&#8217;</p></blockquote>
<div>
<div> वहां पर लोगों से बात कर पता चला कि केरल में, बीफ, काफी खाया जाता है।मैंने कभी बीफ नहीं खाया था। मैं खाकर देखना चाहता था कि खाने में कैसा लगता है। मैंने अपने लिए बीफ कटलेट मंगाया। यह स्वाद में आलू के कटलेट की तरह था। मुझे  तो कोई अन्तर नहीं लगा। मैंने वेटर से पूछा कि इसमें कितना बीफ था। वह  नहीं बता सका। वह उसके  बनाने वाले को मेरे पास लेकर आया। उसने बताया,</div>
</div>
<blockquote><p>‘मैं चालीस कटलेट के लिए,  एक किलो बीफ का प्रयोग करता हूं।‘</p></blockquote>
<p>यह अनुपात शायद बहुत कम है। इसलिये इसका स्वाद पता नहीं चल पाया।</p>
<p>हम कटलेट खा कर आगे चले पर वहां जैम, अरे मेरे मतलब ट्रैफिक जैम इंतजार कर रहा था। यह पोंगल त्योहार के कारण था।</p>
<h3 style="text-align:center;">आखिरकार, हमें प्राइवेट और सरकारी होटल में अन्तर समझ में आया</h3>
<div> हम लोग कुमाराकॉम से लगभग सवा ग्यारह बजे त्रिवेन्द्रम के लिए निकले थे। वहाँ से त्रिवेन्द्रम पहुंचने के लिए लगभग चार घण्टें लगते है। लेकिन उस दिन त्रिवेन्द्रम के आट्टूकल भगवती मन्दिर में, पोंगाला (चावल की खीर), वहीं बना कर चढ़ायी जाती है। यह कार्य केवल महिलाएं ही करती हैं। वहां महिलाओं का मेला था।</div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/attukalbhgvatitrivandum.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/attukalbhgvatitrivandum.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></div>
<div style="text-align:center;"> <em>यह चित्र इस मंदिर की <a href="http://www.attukal.org/">वेबसाइट</a> से लिया गया है जहां से आप अंग्रेजी में इसके इतिहास के बारे में पढ़ सकते हैं।</em></div>
<div></div>
<p>त्रिवेन्द्रम पहुंचते-पहुंचते यह त्योहार समाप्त हो रहा था और सब महिलाएं वापस जा रहीं थी।  लौटकर जाने वाली हर कार, प्रत्येक बस, में केवल महिलाएँ थीं। वे केरल की पारंपरिक साड़ी जो   सफेद या हल्के पीले रंग की होती है, पहने थी। इनमें सुनहरा बार्डर था। वे लाल कथई रंग का ब्लाउज पहने हुई थीं। हम लोग इनके ट्रैफिक जैम में फंस गये।  हम त्रिवेन्द्रम में अपने होटेल में  शाम को साढ़े पाँच बजे ही पहुंचे पाये।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/parvathypongalaattukal.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/parvathypongalaattukal.jpg?w=109" alt="" border="0" /></a></p>
<p>हम लोगों ने अगले दिन अखबार में पढ़ा कि लाखों महिलाओं ने इस त्योहार में आट्टूकल भगवती मंदिर में पोंगाला चढ़ाया। इन महिलाओं में २००८ मिस वर्ल्ड की रनर्स् अप पार्वती ओमनकुट्टन भी थीं।</p>
<div style="text-align:left;"><em>पोंगाला बनाती हुई, पार्वती ओमनकुट्टन का यह चित्र &#8216;द हिन्दू&#8217; अखबार के <a href="http://www.hindu.com/2009/03/11/stories/2009031159391100.htm">इस</a> वेब पेज से है</em></div>
<div></div>
<div>मुझे एक बात अजीब लगी। मुझे ऐसा आभास हुआ कि उस दिन बहुत मात्रा में खीर बर्बाद हो जाती है। इसकी पुष्टि वहां पर लोगों ने की। यदि यह सच है तो जिस देश के करोड़ों लोगों को खीर खाना तो दूर, देखना न नसीब हो &#8211; वहां इस तरह के उत्सव या त्योहार का क्या कोई औचित्य है।<a href="http://mallar.files.wordpress.com/2009/04/pongala5.jpg?w=450&amp;h=321"><img class="alignright" src="http://mallar.files.wordpress.com/2009/04/pongala5.jpg?w=200&#038;h=321&%23038;h=147" alt="" width="200" height="147" border="0" /></a></div>
<div></div>
<div style="text-align:right;"><em>यह चित्र </em><em>सुब्रमनयम जी की <a href="http://mallar.wordpress.com/2009/04/20/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%BE/">इस</a> चिट्ठी से है। </em><em>वहीं पर इस इस त्योहार के बारे में हिन्दी में सूचना है। यह चित्र, उपर मेरी </em><em>कही बात की तरफ भी इशारा करता है। </em><em></em></div>
<p>कुछ समय पहले, लोगों ने एक दिन यह कहना शुरू किया कि गणेश जी की मूर्ति दूध पी रही है। यह वास्तव में पृष्ट तनाव (<a title="Surface tension" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Surface_tension" rel="wikipedia">surface tension</a>) के कारण हो रहा था। कई लोग विज्ञान की बारीकी नहीं समझ पाते थे। उन्हें, मैं यह कह कर समझाता था कि जिस देश के करोड़ों बच्चों को एक बूंद दूध न मिले, वहां के भगवान इतना दूध क्यों और कैसे पी सकते हैं।  कुछ ने समझा, पर बहुतों ने नहीं।</p>
<p>बहुत से  उत्सवों और त्योहारों के दौरान, नदी या समुद्र में विसर्जन किया जाता है। मेरे विचार से उत्सवों और त्योहारों में इस तरह की परम्परा का कोई औचित्य नहीं है। यह प्रदूषण फैलाता है। हमें बदलना चाहिये।</p>
<p>त्रिवेन्दम में, हमें  के.टी.डी.सी. के होटल समुद्र में ठहरना था। वहाँ वहां पर उदय समुद्र होटल भी है। मैंने अपने एक मित्र से बात की थी कि हम कहां रुके। उसका  कहना था,</p>
<blockquote><p>‘समुद्र, के.टी.डी.सी. का चार स्टार  होटल है।  यहां से समुद्र का दृश्य बहुत सुन्दर दिखायी पड़ता है।  उदय समुद्र, तीन स्टार का होटल है। तुम्हे,  समुद्र में ही रूकना चाहिए।‘</p></blockquote>
<p>प्रवीण का कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह सच है कि उदय समुद्र तीन स्टार होटल है। लेकिन, इस समय वह पाँच स्टार होटल की सुविधाऐं दे रहा है और हमें उदय समुद्र में ही रूकना चाहिए था क्योंकि वहाँ की सर्विस ज्यादा अच्छी है।‘</p></blockquote>
<p>समुद्र होटल पहुंचते ही हम लोगों को प्राइवेट और सरकारी होटल का अन्तर समझ में आ गया।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/ktdchoteltrivandumoutsidescene.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/ktdchoteltrivandumoutsidescene.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>समुद्र होटल से दृश्य बहुत सुन्दर था पर वहाँ की सर्विस  अच्छी नहीं थी। इसके पहले दो जगह हम लोग ताज ग्रुप के होटल में रुके थे। वहाँ पर  युवक और युवतियाँ थी। वे  जब भी हमसे  मिलते थे, हमेशा गुड-मॉर्निंग, गुड-आफटर-नून, या  गुड-इवनिंग कहते थे, हमेशा मुस्कुराते रहते थे। होटल समुद्र पर सारा काम सरकारी था।  वहां के लोगों में मुस्कुराहट नहीं थी। उनका चेहरा उदासी से भरा हुआ था।  उनमें   कोई जोश भी नहीं लगता था। हम,  जिस कमरे में ठहरे हुए थे वह कमरा भी ताज के होटल के  कमरों से कुछ छोटा था। इसके बाथरूम का फलश और सिंक टूटा था।  पानी भी  अच्छी तरीके से नहीं आ रहा था। यहां पर उस तरीके से भी सुविधाऐं नहीं थी जैसा कि ताज के होटलों में  थी।  हमें  लगा कि आगे से सरकारी होटल की जगह, प्राइवेट होटल में रूकना ज्यादा अच्छा है।</p>
<h3 style="text-align:center;">भारत में समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं न कि निजी</h3>
<div> त्रिवेन्दम में हम लोग केटीडीसी के समुद्र होटेल में ठहरे थे। वहां पहुंच कर हम लोगों ने चाय पी और नीचे समुद्र तट पर घूमने चले गये। इस तट का नाम ही ‘समुद्र तट‘ है । यहां पर सूर्यास्त हो रहा था &#8211; बहुत दृश्य सुन्दर था।</div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/samudrabeachtrivandum.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/samudrabeachtrivandum.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></div>
<p>हम लोगों ने यह सोचा कि पूरे तट का एक नज़ारा ले लिया जाए। हम लोग जब एक तरफ आगे जाने लगे तो एक जगह, एक गार्ड,  हम लोगों को जाने से रोकने लगा। वहां पर कोई प्राइवेट होटल था। वह उसी का गार्ड था। उसने हमसे कहा,</p>
<blockquote><p>‘यह समुद्र तट का हिस्सा केवल उसके होटल के अतिथि के लिए है सबके लिए नहीं  आप  लोग  नहीं जा सकते हैं।‘</p></blockquote>
<p>मैंने उससे रौबीली आवाज़ में कहा,</p>
<blockquote><p>‘भारत में कोई भी समुद्र तट प्राइवेट नहीं है। सारे समुद्र तट सरकारी और सार्वजनिक है। हां कुछ सुरक्षा की दृष्टि से  कुछ तट सार्वजनिक तौर पर नहीं  खुले है। तुम हमें यहां घूमने से नहीं रोक सकते हो।</p></blockquote>
<blockquote><p>हाँ यह बात अलग है कि हम लोग कोई अश्लील तरीके का कपड़ा पहने या कोई अश्लील काम को करें, तो रोक सकते हो। लेकिन हम लोग न अश्लील कपड़े पहने हुए हैं और न ही अश्लील हरकत कर रहे है। इसलिए हमें रोकना एकदम गलत है। तुम अपने मैनेजर को बुलाकर लाओ या फिर मुझे उसके पास ले चलो। मैं उसे समझा देता हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>इतना सुनने के बाद वह थोड़ा सा घबरा सा गया। उसने कहा अच्छा-अच्छा आप लोग आगे जा सकते है। हम लोग आगे तक घूमने गये। वहां घूमते हुऐ उसकी बात समझ में आयी।</p>
<p>उस होटल में बहुत सारे विदेशी पर्यटक भी थे। यह लोग भारतियों से बहुत कम कपड़े पहने हुए थे और धूप का आनन्द ले रहे थे या नहा रहे थे। सारे भारतीय उन्हीं की तरफ देख रहे थे। भारत के पुरूष भी जो नहा रहे थे वह भी ठीक तरह के कपड़े पहनकर नही नहा रहे थे।  मुझे ही देखने में अजीब लग रहा था तो विदेशियों को देखने में  अजीब लगेगा ही। किसी को भी यह हरकत परेशान करेगी। इसीलिए वह मना कर रहा था।</p>
<div><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RfAgITxBLyI/AAAAAAAAAB4/6cgUEdvHMj4/s1600/hotel.jpg"><img class="alignright" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RfAgITxBLyI/AAAAAAAAAB4/6cgUEdvHMj4/s200/hotel.jpg" alt="" border="0" /></a>हम लोग दो साल पहले <a href="http://unmukth.wordpress.com/2012/01/14/2008/10/19/goa-india/">गोवा गये थे</a> वहां पर &#8216;सिटा दे गोवा&#8217; नामक <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/03/blog-post.html">होटल में ठहरे</a> थे। यह बहुत सुन्दर होटल है पर इसने अपनी इमारत इस तरह से बना ली है कि इसके सामने का समुद्र तट इन्हीं का हो गया है। इस इमारत को भी उन्होंने गैर कानूनी तौर से बनाया है। इस बारे में वहां एक लोकहित याचिका हुई। जिसमें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इमारत तोड़ने का आदेश हो गया पर गोवा सरकार ने इसे बचाने के लिए अध्यादेश जारी कर दिया है। इसलिए आजकल वहां बवाल मचा है। इस विषय पर अधिक जानकारी आप डाउन टू अर्थ नामक पत्रिका के <a href="http://www.downtoearth.org.in/full6.asp?foldername=20090331&amp;filename=news&amp;sec_id=4&amp;sid=9">लेख</a> में पढ़ सकते हैं। डाउन टू अर्थ एक अच्छी पत्रिका है। मैंने इसके और पर्यावरण पर कुछ अन्य पत्रिकाओं के बारे में <a href="http://unmukts.wordpress.com/2008/02/17/biology-environment/">यहां</a> लिखा है।</div>
<p>समुद्र तट पर घूमते हुए वहाँ पर कुछ लोगों ने मुझसे पूछा क्या नाव पर घूमना पसन्द करूंगा। मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;इस समय तो कुछ अंधेरा हो रहा है इसलिए आज तो नहीं पर कल घूमना पसन्द करूंगा। लेकिन, इसके लिये आपको कितने पैसे देने होंगे।&#8217;</p></blockquote>
<p>मेरा इतना ही कहना था कि <a href="http://www.blogger.com/profile/15090591980327578036">शुभा</a> मुझसे कहने लगी,</p>
<blockquote><p>‘तुम नाव पर नहीं जाओगे। यदि तुम्हें नाव पर घूमने के लिए जाना है तो तुम अकेले आया करो या फिर मुझे अपने साथ न लाया करो।&#8217;</p></blockquote>
<p>इतने में उस व्यक्ति ने जवाब दिया,</p>
<blockquote><p>&#8216;नाव में एक बार घूमने पर चार सौ पचास रूपये लगेगा और कल सुबह साढ़े नौ बजे से सैर करना शुरू होगा।&#8217;</p></blockquote>
<p>हम जब वहां से चलने लगे, तब शुभा ने फिर से कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;चाहे जो भी हो जाए, लेकिन, तुम नाव पर घूमने नहीं जाओगे।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने उसका मन रखने के लिए कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं तो उससे केवल पैसा पूछ रहा था, मैं घूमने नहीं जा रहा हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने सोचा कि अगले दिन अकेले आऊँगा और चुपके से बिना बताये घूमने चला जाऊँगा लेकिन यह हो न सका। हम उसके बाद बहुत व्यस्त रहे।</p>
<h3 style="text-align:center;">रात के खाने पर, सिलविया गुस्से में थी</h3>
<p>त्रिवेन्दम में हम केटीडीसी के समुद्र होटेल में ठहरे थे। शाम को समुद्र तट पर घूमते हुऐ, एक चट्टान दिखायी पड़ी। हम लोग जाकर उसी पर बैठ गये। समुद्र में ऊंची लहरे उठ रहीं थी। इसलिये वहां पर कोई नहीं नहा रहा था। कुछ समय बाद, हम लोगों ने देखा कि एक विदेशी महिला आयी और समुद्र के अन्दर अकेली ही तैरती हुई चली गयी। इस कारण वह मुझे वह हिम्मती लगी। मैंने ताली बजाकर और हाथ हिला कर, उसका अभिवादन किया और उसकी हिम्मत की दाद दी।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/trivandumzoochimpanze.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/trivandumzoochimpanze.jpg?w=225" alt="" border="0" /></a></div>
<div style="text-align:right;"><em>मेरी जब भी सिविया से मुलाकात हुई तब कैमरा साथ नहीं था इसलिये उसका चित्र नहीं खींच पाया <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_sad.gif' alt=':-(' class='wp-smiley' />  इस चिट्ठी में त्रिवेन्दम के चिड़िया घर में खींचे चित्रों से काम चलाइये।</em></div>
<p>अंधेरा होते ही हम लोग होटल में आ गये। हम लोगों ने सुबह से दिन का खाना नही खाया था इसलिए भूख भी जोरों से लग रही थी।  हम लोग स्वागत कक्ष पर, यह पूछने के लिये गये कि रात का खाना खाने कहां जाना है। हम जल्दी खाना खाकर सोना चाहते थे क्योंकि अगले दिन सुबह कन्याकुमारी जाना था।</p>
<p>स्वागत कक्ष में एक जगह बेचने की मशीन लगी थी। वहां पर काजू वगैरह मिल रहे  थे। मशीन में पैसा डालने पर वह पैकेट बाहर कर देती थी। मैं स्वागत कक्ष पर बैठी महिला से बात करने लगा। <a href="http://munnekimaa.blogspot.com/">शुभा</a> उस मशीन को देखने लगी। इतने में समुद्र तट पर अकेले नहाने नहाने वाली युवती आयी। वह इटैलियन थी। उसने अपना नाम सिलविया बताया। उसके पास काजू का का पैकेट था। उसने मुन्ने की मां  से पूछा कि क्या वह काजू खरीदना चाहती हैं। शुभा ने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं इसमे बहुत कैलरी होती है। मैं तो केवल देख रही थी कि यहां क्या मिल रहा है।&#8217;</p></blockquote>
<p>सिलविया ने कहा फिर भी वह उसे कुछ काजू खाने के लिए देगी। हमने, उसके दिये काजू खाये। सिलविया पैरों में सुन्दर सुनहरे पायल पहने हुयी थी मैंने इसकी तारीफ की तो उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह असली सोने के नही हैं पर बनावटी हैं। मैंने इसे स्पेन में खरीदा था।&#8217;</p></blockquote>
<p>सिलविया अगली रात हमें पुन: खाने में मिली पर वह केवल एक पैर में पायल पहने थी। मैने पूछा कि वह एक पायल क्यों पहने है। उसने वह पैर दिखाते हुए कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;सुबह जब मै समुद्र में नहा रही थी तब लहरें मेरे एक पैर का पायल ले गयीं।&#8217;</p></blockquote>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/trivandumzootiger.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/trivandumzootiger.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>रात के खाने पर वह मुझे कुछ गुस्से में लगी। मैंने उससे इसका कारण पूछा तो उसका कहना था कि वेटर उसके पेपर नैपकिन के प्रयोग करने पर आपत्ति कर रहा है। उस दिन रात के खाने में स्वादिष्ट फ्राइड फिश बनी थी पर उसमें तेल ज्यादा था। सिलविया पेपर नैपकिन में उसे सुखा कर, खा रही थी इस कारण उसने कुछ अधिक पेपर नैपकिन इस्तेमाल कर लिये। वेटर इसी पर आपत्ति कर रहा था। मुझे लगा कि वह, कितने भी पेपर नैपकिन प्रयोग करे आपत्ति नहीं करनी चाहिये। मैंने वेटर को अलग बुला कर बात की। उसने कहा,</div>
<blockquote><p> &#8217;यह युवती आज पहली बार यहां खाने आयी है और लगभग २०० पेपर नैपकीन प्रयोग कर चुकी है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने उसकी मुश्किल बतायी तो वेटर ने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यदि उसने हमें बताया होता तो उसके लिए कम तेल वाली मछली बनवा देते पर २०० नैपकीन का दाम २०० रूपये से भी ज्यादा है जो कि रात के खाने से ज्यादा है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने उससे कहा कि विदेशी है और युवती गुस्से में है।  तुम मेरे साथ चलो। मैं तुम्हे उसके सामने डाटूंगा। तुम माफ़ी मांग लेना बात इसी तरह समाप्त हो जायेगी। तुम  उसके लिए कम तेल की मछली बनवा दो।</p>
<p>मैंने वेटर को सिलविया के सामने डांट दिया उसका गुस्सा शांत हो गया।</p>
<p>अगले दिन वेटर मुझे पुन: मिला और कहने लगा कि उस युवती ने आज नाश्ता नही किया है उसका पेट खराब हो गया है कल उसने ज्यादा मछली खा ली थी।</p>
<h3 style="text-align:center;">मुझे, केवल कुमारी कन्या ही मार सके</h3>
<p>एक दिन हम लोग त्रिवेन्द्रम से कन्याकुमारी के लिये चले। कन्याकुमारी पहुंचने में लगभग ढाई घन्टे का समय लगता है। कहा जाता है कि बाणासुर नामक दैत्यों का राजा था उसने ब्रह्मा जी की पूजा कर उनसे अमृत देने का वर मांगा। ब्रह्माजी ने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;अमृत तो नहीं मिल सकता है पर जिस तरह से तुम अपनी मृत्यु  चाहते हो वह मांग सकते हो।‘</p></blockquote>
<p>इस पर उसने कुमारी कन्या से ही मृत्यु मांगी। वह सोचता था कि कोई भी कुमारी कन्या उसे नहीं मार सकती है।</p>
<p>इसके पश्चात बाणासुर, देवताओं को तंग करने लगा। तंग होकर, देवताओं ने भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी से सहायता की गुहार लगायी।  उन्होंने उन्हें पराशक्ति, जो कि देवी पार्वती का ही एक रूप हैं, की पूजा करने को कहा। ब्रह्मा जी के वर के कारण वे ही बाणासुर से मुक्ति दिला सकती थीं। देवताओं की पूजा  से प्रसन्न हो कर, देवी पराशक्ति ने, बाणासुर को मारने का वायदा किया। उन्होंने कुमारी  कन्या के रूप में जन्म लिया।</p>
<div><a href="http://lh6.ggpht.com/_VD9tZkRYrQ0/SqB6ZWJoMLI/AAAAAAAABlQ/7kj-mF4Md1c/Kanyakumari%20Vivekanand%20rock%20memorial.JPG"><img class="aligncenter" src="http://lh6.ggpht.com/_VD9tZkRYrQ0/SqB6ZWJoMLI/AAAAAAAABlQ/7kj-mF4Md1c/Kanyakumari%20Vivekanand%20rock%20memorial.JPG" alt="" width="400" height="300" border="0" /></a></div>
<div style="text-align:center;"><em>कन्याकुमारी में विवेकानन्द रॉक मेमोरियल से समुद्र का दृश्य</em></div>
<div></div>
<p>पराशक्ति हमेशा शिव जी के साथ ही रहना चाहती हैं। इसलिये   समुद्र में एक चट्टान पर एक टांग से खड़े होकर, उन्होंने शिव जी की पूजा की। शिव जी ने उससे प्रसन्न होकर वर मांगने का कहा। उन्होंने शिवजी को  वर के रूप में प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की। शिव जी ने उन्हे इसका वायदा कर दिया लेकिन देवता यह नहीं चाहते थे। क्योंकि, यदि वह शादी कर लेती तो वे कुमारी नहीं रहती और तब बाणासुर का वध नहीं हो पाता। देवताओं ने, नारद जी को अपनी दुविधा बतायी। नारद जी ने शिवजी से कहा,</p>
<blockquote><p>‘भगवन आपकी शादी का शुभ मुहूर्त सुबह के पहले है। इसलिए वह सुबह के पहले ही शादी करें।‘</p></blockquote>
<p>शिवजी अपनी बारात लेकर सुचीन्द्रम नामक जगह पर रूके। सुबह के पूर्व उनके बारात लेकर शादी के लिए निकलने के पहले ही, नारद जी ने मुर्गे का रूप धारण करके बांग देना शुरू कर दिया। जिससे उन्हें लगा कि सुबह हो गयी है और महूर्त नहीं रहा। इसलिए  वे शादी के लिए नहीं गये।</p>
<p>कहा जाता है कि  कुमारी कन्या की जब शादी नहीं हो पायी तो उसके सारे गहने और जेवरात रंग बिरंगे पत्थरों में बदल गये, जो कि इस समय भी कन्याकुमारी के समुद्र तट पाये जाते हैं।</p>
<p>बाणासुर को, कुमारी कन्या की सुंदरता के बारे में पता चला। उसने उनसे शादी करने की इच्छा प्रकट की जिसे, उन्होंने मना कर दिया। बाणासुर, उन्हें बलपूर्वक  जीतकर उनसे शादी करनी चाही। इस पर दोनो के बीच युद्घ हुआ और बाणासुर मारा गया । इस तरह से उस अत्याचारी की मृत्यु हुयी। इसलिये इस जगह का नाम कन्याकुमारी पड़ा।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/suchindratemple.jpg"><br />
</a> इस कहानी में मुझे कुछ संशय लगता है। जहां तक मुझे मालुम है बाणासुर बालि का पुत्र था और भगवान शिव का भक्त। उसने वर के रूप में ऐसे योद्दा से युद्ध करने की इच्छा प्रगट की थी जो उसे हरा सके। उसे भगवान कृष्ण ने पराजित किया। बाद में वह हिमालय में भगवान शिव की तपस्या करने चला गया।  मुझे कन्याकुमारी में बाणासुर की कथा, <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/08/strength-lies-in-unity-durga-goddess.html">महिसासुर और देवी दुर्गा कहानी</a> का दूसरा रूप लगता है।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/suchindratemple.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/suchindratemple.jpg?w=168" alt="" border="0" /></a><br />
सुचीन्द्रम में, सुचीन्द्र मन्दिर है। यह शिव जी का मंदिर है हालांकि इसमें ब्रम्हा और विष्णु जी की भी मूर्ति  है।  यहां पर गणेश जी की पत्नी की भी मूर्ति है।</p>
<div style="text-align:right;"><em>सुचीन्द्र मन्दिर का चित्र <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Main_Page">विकिपीडिया</a> से</em></div>
<p>कहा जाता है जिस चट्टान पर एक टांग से खड़े होकर  कुमारी कन्या ने अपनी पूजा की,  वहां पर उसका एक निशान बना हुआ है। स्वामी विवेकानंद उस निशान को देखने के लिए वहां गये जिससे  उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। इसी  चट्टान पर  विवेकानंद रॉक मेमोरियल बना हुआ है। यह जगह देखने लायक है। कन्याकुमारी में, देवी कुमारी मन्दिर भी है।</p>
<h3 style="text-align:center;">आपका प्रेम है कि आपने मुझे अपना मान लिया</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/vivekanandrockmemorialkanyakumari.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/vivekanandrockmemorialkanyakumari.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>कहा जाता है जिस चट्टान पर एक टांग से खड़े होकर  कुमारी कन्या ने अपनी पूजा की,  वहां पर उसका एक निशान बना हुआ है। स्वामी विवेकानंद उस निशान को देखने के लिए वहां गये जिससे  उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। इसी  चट्टान पर  विवेकानंद रॉक मेमोरियल बना हुआ है। यह जगह देखने लायक है।</div>
<p>विवेकानन्द रॉक मेमोरियल के बगल की चटटान पर एक बहुत ऊंची सी मूर्ती सन्त थिरूवलुवर की भी है इसे तमिलनाडू सरकार द्वारा बनवायी गयी है।  विवेकानंद रॉक मेमोरियल देखने जाने के लिए स्टीमर से जाना पड़ता है। यह स्टीमर पहले आपको विवेकानन्द रॉक मेमोरियल पर छोड़ता है। इसके बाद यह सन्त थिरूवलुवल की चट्टान पर छोड़ता है फिर वापस लाता है। यह चक्कर लगाता रहता है कोई चाहे तो वहां रूक कर उसके अगले चक्कर में चढ़े या बैठा रहे।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/thiruvalluvarstatuekanyakumari.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/thiruvalluvarstatuekanyakumari.jpg?w=176" alt="" border="0" /></a>विवेकानन्द रॉक मेमोरियल पहुंचते  समय तक काफी धूप हो गयी थी। वहां हमे जूते उतारने पड़े। इस कारण वहां चलने में मुश्किल हुयी, पैर में छाले से पड़ने लगे। विवेकानन्द रॉक मेमोरियल के बाद जब वह हमें सन्त थिरूवलुवर मूर्ति की  चट्टान पर  ले जाने लगा तो हम लोग वहां नहीं उतरे। क्योंकि यहां पर भी जूते उतारने थे।  हमें लगा कि अब नंगे पैर न चल पायेंगे। हमने इस मूर्ति को दूर से ही देखा।</div>
<p>गांधी जी की अस्थियां विसर्जित होने के लिए कन्या कुमारी इसलिये लाई गयीं थी क्योंकि वहां पर  तीन समुद्रों, अरेबियन सागर, हिन्द महासागर, और बंगाल की खाड़ी-का संगम है। वहां  जिस जगह पर उनका अस्थि कलश रखा गया था वहां पर  गांधी मेमोरियल मंडपम बना है।</p>
<p>यह मंडपम जमीन से ८९ फिट ऊंचा है।  यह इसलिए है क्योंकि महात्मा गांधी भी ८९ साल तक जीवित रहे।</p>
<p>इस मंडपम की खास बात यह है कि इसका दरवाजा मंदिर जैसा है। अंदर की ओर, यह एक मस्जिद की तरह  बना हुआ है तथा ऊपर की तरफ,  यह  चर्च की स्टाइल में है।  महात्मा गांधी सब धर्मो का समावेश चाहते थे। इसलिये इसे इस तरह का बनाया गया है कि उनके दर्शन को ठीक प्रकार से दिखा सके।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/gandhimemorialmandapam.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/gandhimemorialmandapam.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>जहां पर मंडपम में, उनका अस्थि कलश रखा गया था वहां पर  स्तंभ सा बना हुआ है।  इसके ऊपर एक छेद है वह छेद इस तरह से बनाया गया कि दो अक्टूबर के दिन, १२ बजे सूरज की रोशनी उसी स्तम्भ पर गिरती है लेकिन किसी अन्य दिन सूरज की रोशनी अंदर नहीं आती है। बरसात का पानी भी, इस छेद से  अंदर नहीं आ पाता है।</div>
<p>गांधी मेमोरियल मंडपम देखते देखते दोपहर हो गयी, भोजन का समय हो रहा था। गर्मी भी बहुत बढ़ गयी थी और हम लोग थक गये थे। मैने <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/06/pravin-taxi-driver-intersight-tours.html">प्रवीन</a> से किसी साफ सुथरी शाकाहारी भोजन मिलने की जगह ले चलने को कहा।  प्रवीन हमें एक गुजराती भोजनालय में ले गया।</p>
<p>भोजनालय में हमें लोग गुजराती समझ बैठे और गुजराती में बात करने लगे। मैंने उनसे माफी मांगी और कहा कि मुझे गुजराती नहीं आती है। उन्होंने आश्चर्य से पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या आप गुजराती नहीं हैं?&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा नहीं, यह तो आपका प्रेम है कि आपने मुझे अपना मान लिया। इसके बाद हमने हिन्दी में बात की। मुझे इसी तरह का अनुभव, <a href="http://unmukth.wordpress.com/2012/01/14/2008/12/22/kashmir/">कश्मीर यात्रा</a> के दौरान गुलमर्ग मे भी <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/07/gulmarg-ropeway-gandola.html">हुआ</a>।</p>
<p>भोजनालय बहुत साफ था। वहां पर गुजराती तरह का भोजन मिल रहा था। ६० रू० में एक थाली और  आप जितना चाहें उतना खा सकते थे। खाना भी बहुत स्वादिष्ट था।</p>
<p>उस दिन एक खास तरह की स्वीटडिश,  पूरणपोली बनी थी जिसे लेने के लिए २० रू० और देने पड़ते थे। मैंने ये नाम कभी नहीं सुना था इसलिए सोचा कि इसे भी चख कर देखना चाहिए। <a href="http://www.tarakash.com/joglikhi/">संजय</a> जी ने मुझे बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह एक प्रकार का &#8220;स्टफ्ड&#8221; पराठा है। भीगी चने की दाल को पीस कर सेका जाता है, कुछ कुछ हलवे जैसी प्रक्रिया होती है। फिर इस मीठे &#8220;पेस्ट&#8221; जिसे पूरण कहा जाता है, गेहूँ के गुंदे आटे की लोईयों में भर कर बेला जाता है फिर पराठे की तरह सेका जाता है। जो तैयार मीठा भरवाँ पराठा तैयार हुआ वह पुरणपोली कहलाता है। यह मुझे यह खास पसन्द नहीं है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मुझे तो यह खाने में मीठी लगी इसलिये इसे न खा सका।</p>
<p>कन्याकुमारी में देवी कुमारी का मंदिर, कामराज मेमोरियल कुमारी हाल आफ हिस्ट्री, लेडी ऑफ रैनसम (Lady of Ransom)  भी देखने की जगहें हैं। खाना खाने के बाद, इसमें से कुछ जगह तो हमने देखी और कुछ जगह नहीं जा पाये और वापस त्रिवेन्द्रम आ गये।</p>
<h3 style="text-align:center;">आप, टाइम पत्रिका पढ़ना छोड़ दीजिए</h3>
<div><a href="http://farm3.static.flickr.com/2628/3818277626_119ecff7ce.jpg"><img class="aligncenter" src="http://farm3.static.flickr.com/2628/3818277626_119ecff7ce.jpg" alt="" width="320" height="212" border="0" /></a></div>
<p>केरल में, तरह-तरह की आयुवेर्दिक मालिश होती है। मैं इसके पहले  तीन बार केरल जा चुका हूं। लेकिन कभी भी मालिश नहीं करवायी थी। मुझे लगा कि इसका भी अनुभव लेना अच्छा रहेगा।</p>
<p>कन्या कुमारी से लौटते समय हमारा टैक्सी चालक <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/06/pravin-taxi-driver-intersight-tours.html">प्रवीन</a> हमें ऐसी जगह ले गया इसका नाम प्रकृति था। वहां पर पहुंचने पर हमारी मुलाकात एक विदेशी जोड़े से हुई। वे इसराइल से आये थे। मैंने उनसे जब मालिश के बारे में पूछा  तो उन्होंने कहा कि उन्हे इसमें बहुत आनन्द आया और हमें भी करवाना चाहिये।</p>
<p>मैंने टाइम पत्रिका मे पढ़ा था कि इस्रायल में <a href="http://unmukts.wordpress.com/2008/12/06/snake-spa-israe/">सापों से मालिश होती</a> है। मैंने उनसे पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या आपने कभी सापों से मालिश करवायी है?&#8217;</p></blockquote>
<div> उन्होंने मुझसे पूछा कि मैंने सापों की मालिश के बारे में कहां पढ़ा है। मैंने उनसे <a href="http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1844564,00.html">टाइम पत्रिका के लेख</a> के बारे में जिक्र किया। इस पर उसने मुस्करा कर कहा,</div>
<blockquote><p>&#8216;मुझे नहीं मालुम कि इस्रायल में कहीं पर सापों से मालिश होती है। आप मेरी बात मानिये,  टाइम पत्रिका पढ़ना छोड़ दीजिए।&#8217;</p></blockquote>
<div style="text-align:center;"><em> क्या आप भी सापों से चम्पी कराना चाहेंगे हिम्मत हो तो पहले यह विडियो देख लीजिये।</em></div>
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<p>तेल  मालिश करवाने में एक घण्टे का समय लगा और इसका उन्होंने छ: सौ रुपया लिया। मेरी मालिश करने वाले लड़के का नाम जैकब था। उसने बताया,<img class="alignright" title="massage" src="http://farm3.static.flickr.com/2487/3817470759_583526f9f7.jpg" alt="" width="206" height="302" /></p>
<blockquote><p>&#8216;मैंने मालिश करने की ट्रेनिंग केरल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कॉलेज से ली है। इसमें बारहवीं पास करने के बाद, डेढ़ साल का कोर्स करना पड़ता है। उसी के बाद आप मालिश कर सकते हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसने बताया कि उसने जयपुर और जालंधर मे भी काम किया है। मैंने पूछा कि क्या वहाँ भी केरल की तरह आयुर्वेदिक मालिश होती है। उसने कहा वहां, केरल के लोग ही आयुर्वेदिक मालिश करते हैं।  वह वहां, कई महीनों रहा पर वह केरल का है इसलिये त्रिवेन्द्रम वापस  आ गया है। यह जगह उसकी नहीं थी पर वह उस व्यक्ति के यहां वेतन पर काम करता था, जिसने  सारी सुविधाऐं दे रखी थी।</p>
<p>वहां महिलाओं<a href="http://photobucket.com/images/stone%20massage" ><img class="alignleft" src="http://i605.photobucket.com/albums/tt136/mphuc1989/Stone_massage-Eliz_Arden-Westin_La_.jpg" alt="da16 Pictures, Images and Photos" width="224" height="284" border="0" /></a> के लिये भी मालिश करवाने की सुविधा थी। महिलाओं को मालिश करने के लिए कोई  महिला ही रहती है। <a href="http://www.blogger.com/profile/15090591980327578036">शुभा</a> ने भी मालिश  करवायी। लेकिन उसे मालिश करवाने के बाद, कुछ प्रतिक्रिया हो गयी। उसका बदन लाल हो गया और छाले पड़ गये। इससे मुझे लगा, कि शायद वहाँ पर हर व्यक्ति को मालिश करवाना ठीक नहीं है।</p>
<p>दूसरी बात यह भी लगी कि शायद और सफाई होती तो ठीक रहता। मालिश एक बेंच पर हो रही थी। इस पर एक चादर बिछा था। वह साफ नहीं था। मैंने जैकब से इसके बारे में कहा, तो उसने बताया कि उसने अभी चादर बदली है। लेकिन यह काम मेरे सामने नहीं हुआ था और यह शायद सच नहीं था।</p>
<div> <em>एक अन्य तरह की मालिश &#8211; गर्म पत्थरों से</em></div>
<p>मालिश शुरू करने से पहले जैकब ने मुझे अपने कपड़े उतारने के लिए कहा और एक छोटा सा कपड़ा नीचे व्यक्तिगत भाग पर  बांधने के लिए दिया। जिसने  मुझे  बपचन में फैंटम की पढ़ी हुई कॉमिक्स में  हबशियों की कपड़ों की याद आ गयी।</p>
<p>इस मालिश में उन्होनें काफी तेल डाला।  जब मैं अपने कस्बे में कभी मालिश करवाता हूं तो उसमें इतना तेल नही पड़ता। हाँ यह बात जरूर है कि उनके मालिश करने का तरीका कुछ भिन्न था और उन्होंने पूरे बदन में  तेल लगाया और बदन  के हर भाग में  मालिश की थी।</p>
<p>मुझे इस मालिश के लिये छ: सौ रूपया ज्यादा लगा यदि कोई मुझसे कहता कि तुम फिर वहाँ जाकर मालिश करा लो तो मैं उतना पैसा खर्च करना ठीक न समझता। हांलॉकि अगली बार केरल जाऊँ और मेरे पास समय हो और पैसे की  चिन्ता न हो तो मै शायद इसे पुन: कराने की सोचूं।</p>
<div><a href="http://photobucket.com/images/massage" ><img class="aligncenter" src="http://i294.photobucket.com/albums/mm119/ohyeth/gaybatman1.jpg" alt="mutual massage Pictures, Images and Photos" width="320" height="229" border="0" /></a></div>
<div style="text-align:center;"><em>लगता है कि बैटमैन और रॉबिन भी मालिश प्रेमी हैं। </em></div>
<div style="text-align:center;"><em>मैं बैटमैन और रॉबिन कॉमिक्स का प्रेमी हूं पर मालिश का नहीं।</em></div>
<h3 style="text-align:center;">पति, पत्नी के घर में रहते हैं</h3>
<p>हम केरल घूमने, इसलिये गये थे क्योंकि मुझे त्रिवेन्द्रम में मुझे कुछ काम था। इस काम के लिये, मैंने यात्रा के आखरी दिन, दोपहर के भोजन के बाद, का समय रखा था। हमारे पास सुबह का समय था। हमने वह समय त्रिवेन्द्रम घूमने का प्रोग्राम बनाया। हम लोग सबसे पहले वहाँ के राजा के महल  गये। वहां हमने एक गाइड लिया। उसने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;केरल राज्य तीन राज्यों को मिलाकर बना  है। इसकी स्थापना १९५६ में हुई थी। त्रिवेन्द्रम पहले त्रावणकोर राज्य (Travancore State) में था। यहाँ पर राजा का लड़का तो नहीं, पर उस  की बहन का लड़का राजा बनता था।&#8217;</p></blockquote>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/trivandum20clock20palace.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/trivandum20clock20palace.jpg?w=173" alt="" border="0" /></a></p>
<div style="text-align:right;">
<p> <em>महल में बाहर की तरफ उन्नीसवीं शताब्दी की बनी एक खास घड़ी, जिसमें घन्टे के पूरे होने पर उतनी बार ऊपर के बकरों सिर, एक दूसरे से टक्कर मारते हैं।</em></p>
<p>मेरे पूछने पर कि  ऎसा क्यों होता था, तब उसका जवाब था,</p>
</div>
<blockquote><p>’यह इसलिये होता था क्योंकि ट्रावनकोर राज्य मातृ प्रधान राज्य था। यदि परिवार में लड़की नहीं है तो लड़की गोद ले ली जाती थी।’</p></blockquote>
<p>इसने मुझे शिलॉग में खसी लोगों की <a href="http://munnekimaa.blogspot.com/2008/12/shillong-khasi.html">याद दिलायी</a>। वह भी मातृ प्रधान समाज है। वहां पर पुरूष अपनी पत्नी का सर नाम रख लेतें हैं और उसी के घर रहने चले जाते  हैं। गाइड के मुताबिक,</p>
<blockquote><p>&#8216;यहां पुरुष शादी के बाद महिलाओं का सर नेम तो नहीं रखते पर अधिकतर पति, पत्नियों के साथ उनके घर में रहते हैं और यह गलत नहीं समझा जाता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>हमारी तरफ तो ऎसे लोगों को घर जमाई कहा जाता है और अच्छी नजर से नहीं देखा जाता है।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/trivandum20visnu20temple.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/trivandum20visnu20temple.jpg?w=225" alt="" border="0" /></a>महल को देखते समय गाइड ने यह बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;इस महल को हजार आदमियों ने मिलकर चार साल में बनाया था। लेकिन राजा इसमे सात महीने ही रह पाये। क्योंकि उनकी मृत्यु हो गयी। उसके बाद राजा के परिवार वालों ने इस महल को छोड़ दिया। उन्हे लगा कि यह महल अपशकुन है। इसलिए उसके बाद इस महल में कोई नहीं रहा।&#8217;</p></blockquote>
<p>राजा के महल के बगल में ही एक भगवान विष्णु का मंदिर है। इस मंदिर में कोई कोट, पैंट पहनकर नहीं जाया जा सकता है और महिलायें सलवार, कुर्ता पहनकर नहीं जा सकती हैं। इसे देखने जाने के लिए आपको ऊपर के कपड़े उतारने पड़ेगें  और एक धोती पहनकर जाना होगा। महिलायें सलवार, कुर्ता के ऊपर धोती पहन सकती है।</p>
<p><a href="http://www.blogger.com/profile/15090591980327578036">शुभा</a> मंदिर को भीतर से देखने नहीं गयी पर मुझे लगा कि इसे अन्दर से देखना चाहिए।  फिर मुश्किल पड़ी धोती पहनने की। वहां पर धोती  किराये पर भी मिल रही थी पर मैने वहीं पर एक केरल में पहनी जाने वाली शर्ट और धोती  खरीदी। उसे ही पहन कर अन्दर गया।</p>
<p>मन्दिर, अन्दर से बहुत भव्य है। इसमें एक जगह सारी महिलायें भजन गा रही थीं। इसमें, भगवान विष्णु की, शेषनाग की शैय्या पर लेटे हुए मूर्ति है। इस मूर्ति को  एक बार में नहीं देखा जा सकता है। इसके लिऐ कई दरवाजे हैं।</p>
<p>मैं इस मूर्ति के किसी भाग को नहीं देख पाया क्योंकि वहाँ पर भीड़ थी और मुझे लगा कि यदि में लाइन में खड़ा होऊँगा तो शायद सब समय यहीं पर चला जायेगा। मैंने महल में ही उस मूर्ति का <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/trivandum20zoo20bat.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/trivandum20zoo20bat.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>छोटा सा मॉडल  देख लिया था। त्रिवेन्द्रम में एक ताराघर (Planetarium) और चिड़ियाघर (Zoo) भी है। मैं इन्हें भी देखना चाहता था।</p>
<p>मंदिर देखने के बाद, हम लोग ताराघर देखने गये। वहां पता चला कि  केवल एक प्रदर्शन अंग्रेजी में है और बाकी सब मलयालम में हैं। अंग्रेजी का प्रदर्शन बारह बजे था लेकिन वह तभी चलेगा जब कि कम से कम चालीस व्यक्ति देखने के लिए आये। हम लोगों को लगा कि यहां इन्तजार करने से अच्छा है कि हम चिड़िया घर देख लें।</p>
<p>चिड़ियाघर में<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/rarja20ravi20verma20maharshtrian20lady.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/rarja20ravi20verma20maharshtrian20lady.jpg?w=204" alt="" border="0" /></a> तरह तरह के जानवर देखने को मिले। मैंने वहां पर जानवरों की तसवीर <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/10/kdtc-samudra-trivandum-italian-sylvia.html">इस चिट्ठी</a> में प्रकाशित की हैं। चिड़ियाघर में एक बात अजीब लगी। वहां पेड़ों पर बहुत से चमगादड़ लटके थे। हम लोग भोजने के समय वापस आ गये। मुझे अपना काम भी करना था।</p>
<p><em>साड़ी पहने मराठी महिला का चित्र, जो मुझे भेंट में मिला  </em></p>
<p>मुझे काम के बाद, वहां के लोगों ने यादगार के रूप में राजा रवी वर्मा का एक चित्र यादगार के लिये भेंट किया। वे अप्रैल २९,१८४८ में जन्में त्रावणकोर राज्य के चित्रकार थे। उनकी मृत्यु अक्टूबर २, १९०६ में हो गयी।</p>
<p>रवी वर्मा, महाभारत एवं रामायण की घटनाओं और पारंपरिक परिधान साड़ी पहने भारतीय महिलाओं के सुन्दर चित्र बनाने के लिये जाने जाते हैं। उनके चित्र, भारतीय परम्परा और युरोपीय कला के एकीकरण के, सबसे अच्छे उदाहरण भी हैं। उन्हें १८७३ में वियाना चित्रकला प्रदर्शनी में प्रथम पुरुस्कार भी मिला। उनके अन्य चित्र आप <a href="http://www.cyberkerala.com/rajaravivarma/">यहां</a> देख सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:center;">पसन्द करें &#8211; कौन सी मछली खायेंगे</h3>
<p style="text-align:center;"><img class="aligncenter" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kovalam20beach.jpg?w=400&#038;h=281" alt="" width="400" height="281" border="0" /></p>
<p>त्रिवेन्दम में हम केटीडीसी के होटेल में ठहरे थे। इस होटल के सामने के समुद्र तट  का नाम &#8216;समुद्र&#8217; था। यह बहुत सुन्दर है पर हमारे टैक्सी चालक <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/06/pravin-taxi-driver-intersight-tours.html">प्रवीन</a> के अनुसार,</p>
<blockquote><p>&#8216;समुद्र तट बहुत जल्दी गहरा हो जाता है और बहुत लहरें आती हैं। इसमें यदि आप अच्छा तैरना नहीं जानते हैं तो नहीं नहा सकते हैं। कोवलम समुद्र तट में पानी जल्दी गहरा नहीं होता है। इसलिए इसमें आप बहुत दूर तक नहाने जा सकते हैं और यदि आपको बहुत अच्छा तैरना नहीं भी आता है तो  भी आप नहा सकतें है। इसमें लहरें भी बहुत ऊँची- ऊँची नहीं आती हैं। इसलिये अधिकतर विदेशी कोवलम समुद्र तट पर जाते हैं। इसे अन्तर्राष्ट्रीय समुद्र तट भी कहा जाता है। आपको वह तट भी देखना चाहिए।’</p></blockquote>
<p>हम लोगों ने पहले सोचा था कि कन्याकुमारी से लौटते समय हम लोग कोवलम तट पर भी जायेगें। लेकिन लौटते-लौटते अंधेरा हो गया। इसलिये वहां नहीं जा पाये।</p>
<p>त्रिवेन्डम में काम समाप्त करने के बाद, हम कोवलम समुद्र तट पर गये। हांलाकि, जब हम वहां पहुंचे तब सूरज डूब चुका था पर यह हमारा आखिरी दिन था। हमारे पास इसके अतिरिक्त कोई चारा नहीं था।</p>
<p>कोवलम अन्तर्राष्ट्रीय समुद्र तट के बारे में, हम लोगों ने कई तरह की बाते सुन रखीं थी पर हमें वैसा कोई दृश्य देखने को नहीं मिला। शायद वहां पहुंचते सूर्यास्त हो चुका था और अन्धेरा शुरू हो गया था।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kovalam20international20beach.jpg"><img class="aligncenter" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/kovalam20international20beach.jpg?w=320&#038;h=240" alt="" width="320" height="240" border="0" /></a></div>
<div style="text-align:center;"><em>हम जब कोवलम तट पर पहुंचे तब वहां अंधेरा हो चुका था। इस  कारण समुद्र तट के कोई चित्र नहीं खींच पाये। ऊपर के दोनो चित्र, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Main_Page">विकिपीडिया</a> कि सौजन्य से, </em><em>कोवलम समुद्र तट के हैं।</em></div>
<p>मेरे बेटे को शर्ट पसन्द है। उसका कहना है कि हम जहां जायें वहां से उसके लिये शर्ट ले आया करें। समुद्र तट पर बहुत सी दुकाने थीं जहां पर शर्ट  मिल रही थीं। हम लोग एक दुकान पर गये वहां पर एक साधारण सी महिला बैठी थी पर जब हमने उससे बात शुरू की तब वह  शुद्घ उच्चारण में अंग्रेजी बोलने  लगी। यहां पर दुनिया भर से, विदेशी आते हैं इसलिये यहां के लोग कई भाषा सीख लेते हैं। मैंने कई दुकानदारों को अंग्रेजी के अलावा फ्रेंच और स्पैनिश भाषा बोलते सुना।<img class="alignright" title="kovalam" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2012/01/selecting20fish20to20eat20at20kovalam.jpg?w=213&#038;h=285" alt="" width="213" height="285" /></p>
<p>कोवलम समुद्र तट के किनारे खाने की जगहें थी। हर खाने की जगह की टेबल से समुद्र दिखायी देता था। आप खाना भी खायें और समुद्र का आनन्द भी लें।</p>
<div>वहां पर बहुत सारे रेस्तरां भी थे। उनके सामने, मछलियां भी रखी रहती थी। आप पसन्द कर लें। वही बना दी जायेगी। मैं स्वयं मछली खाता हूं पर मालूम नहीं क्यों, इस तरह से मछली पसन्द कर, खाने का मन ही नहीं किया।</div>
<p>कोवलम तट का चक्कर लगाने के बाद हम वापस आ गये। हम खाना खा कर, जल्दी सो गये। हमें अगले दिन सुबह ही हवाई जहाज पकड़ना था। इसी के साथ केरल &#8211; ईश्वर की भूमि &#8211; यात्रा विवरण समाप्त होता है अब हम चलेंगे, देव भूमि हिमाचल की यात्रा पर।</p>
<p style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</p>
<p>। <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Matriarchal">matriarchy</a>, Trivandum, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Trivandum">Thiruvananthapuram</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travancore">Travancore</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Raja_Ravi_Verma">Raja Ravi Verma</a>,<br />
। <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Massage#Ayurvedic_massage">massage</a>, <a href="http://hi.wordpress.com/tag/%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80/" rel="tag">तंदुरुस्ती</a>, <a href="http://hi.wordpress.com/tag/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%AF/" rel="tag">स्वास्थ्य</a>, <a href="http://hi.wordpress.com/tag/health/" rel="tag">health</a>, <a href="http://hi.wordpress.com/tag/society/" rel="tag">society</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Ayurveda">Ayurved</a>,<br />
।<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Shore">seashore</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Beach">beach</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Trivandum">Trivandum</a>,<br />
।<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kanyakumari">Kanyakumari</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Suchindrum">Suchindram</a>,<br />
। <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Pongala">pongala</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Attukal_Temple">Attukal Bhagwati temple</a>,  <a href="http://www.tajhotels.com/Leisure/TAJ%20GARDEN%20RETREAT,KUMARAKOM/default.htm">Taj Garden Retreat</a>,   <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Beef">Beef</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Pond_Heron">Pond Heron</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Purple_Heron">Purple Heron</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Stork-billed_Kingfisher">Stork billed Kingfisher</a>, White breasted kingfisher, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Cormorant">cormorant</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Bronze-winged_Jacana">Bronze winged Jacana</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Terns">Terns</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Asian_Openbill_Stork">Openbill Stork</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Darter">Darter</a> (Snake bird), Bird sanctuary, <a href="http://www.tajhotels.com/Leisure/TAJ%20GARDEN%20RETREAT,KUMARAKOM/default.htm">Taj Garden Retreat</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Synagogue">synagogue</a>, <a href="http://www.tajhotels.com/Leisure/TAJ%20MALABAR,COCHIN/AwardsAndAccolades.asp">Taj Malabar hotel</a>,<br />
। टैक्सी, ट्रैवेल गाइड, <a>कानून</a>, <a title="View all posts in सूचना" href="http://hi.wordpress.com/tag/%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE/" rel="category tag">सूचना</a> , <a href="http://hi.wordpress.com/tag/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3/" rel="tag">महिला सशक्तिकरण</a>, <a href="http://hi.wordpress.com/tag/women-empowerment/" rel="tag">women empowerment</a>, International women day, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Women's_rights">women rights</a>,<br />
। <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kerala">Kerala</a>,<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Cochin"> Kochi</a>, Cochin, केरल,  कोचीन, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kumarakom">Kumarakom</a>,<br />
। <a href="http://wordpress.com/tag/travel/">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, सैर सपाटा, <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>, <a title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</p>
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		<title>कुछ चूम रहे थे, कुछ हाथ पकड़े थे</title>
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		<pubDate>Sat, 10 Dec 2011 12:30:17 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में हमारी हैदराबाद यात्रा का वर्णन है।
This post is about out trip to Hyderabad.
is chitthi mein hamari hyderabad yatra ka varnan hai.<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=804&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;">इस चिट्ठी में हमारी हैदराबाद यात्रा का वर्णन है।</p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 433px"><img title="Hyderabad visiting spots" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/3/39/Hyderabad_Montage.png" alt="" width="423" height="661" /><p class="wp-caption-text">हैदराबाद में दर्शनीय स्थल</p></div>
<h3><span id="more-804"></span></h3>
<h3 style="text-align:center;">भागमती नाम से बना, भाग्यनगर &#8211; अब हो गया हैदराबाद</h3>
<p>हैदराबाद का इतिहास, गोलकोण्डा से नया है लेकिन उससे जुड़ा है।</p>
<p>गोकोण्डा का किला एक छोटी पहाड़ी वरंगल के काकतीय राजा प्रताप रूद्रदेव के द्वारा सन् ११४३ ई. में बनवाया गया था। इसे  बनाने का सुझाव एक गड़ेरिया ने दिया था। गोल्ला का अर्थ गड़ेरिया और   पहाडी को कोण्डा कहते है। इसी लिये इसका नाम &#8216;गोल्लकोण्डा&#8217; रखा गया।</p>
<p>सन् १६६३ में, इसी वंश के राजा कृष्णदेवराय ने, एक संधि के अनुसार &#8216;गोलकोण्डा&#8217; किले को बहमनी वंश के राजा मोहम्मद शाह को दे दिया।</p>
<p>बहमनी राजाओं की राजधानी गुलबर्गा तथा बीदर में थी। राज्य में, उनकी पकड़ भी अच्छी न थी। उनके पांच सूबेदार (Governor) थे। ये पांच सुबेदार बहमनी राज्य की अस्थिरता के कारण, मौके का लाभ उठा कर, स्वतंत्र हो गये। इसके एक सूबेदार, कुलि कुतुबशाह नें, १५१८ में गोलकोण्डा में, मे अपनी सलतनत, कुतुबशाही  स्थापित की।</p>
<p>१५१८ से १६१७ तक, कुतुबशाही वंश के सात राजाओं ने गोलकोण्डा पर राज किया। १५८७ में, चौथे राजा मोहम्मद कुली कुतुबशाह ने, अपनी प्रिय पत्नी भागमती के नाम से भाग्यनगर नामक शहर बसाया। यही अब हैदाराबाद हो गया है।</p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 500px"><a href="http://unmukth.wordpress.com/2011/12/10/hyderabad/%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%87%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6"><img title="Hyderabad from Golkonda fort" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/en/thumb/e/e0/View_of_Hyderabad_City_from_Golconda_Fort.JPG/750px-View_of_Hyderabad_City_from_Golconda_Fort.JPG" alt="" width="490" height="392" /></a><p class="wp-caption-text">हैदराबाद - गोलकोण्डा किले से</p></div>
<p>१६५६ में औरंगजेब ने गोलकोण्डा और हैदराबाद पर हमला किया। सुलतान अब्दुल्ला शाह की हार हुई। सुलतान अब्दुल्ला की ओर से गुजारिश करने पर दोनों में संधि हुई। १६८७ में  कुतुबशाही की अब्दुल हसन तानाशाह सातवां राजा था। उस समय औरंगजेब ने दूसरी बार गोलकोण्डा पर हमला किया। इसमें अब्दुल हसन तानाशाह की हार हुई। गोलकोण्डा और हैदराबाद पर मुगलों का शासन आरंभ हुआ।</p>
<p>कुतुबशाही समाप्त होने के उपरांत मुगल साम्राज्य की ओर से कई सूबेदार (Governor) हैदराबाद में रखे गये। लेकिन १७३७ ईस्वी में मोहम्मद शाह के समय, मुगलों की राजनीतिक स्थिति  गिर गई। इसका फायदा उठाते हुए, निज़ाम -उल-मुल्क आसिफ जाह-१ स्वतंत्र बन गया और स्वयं को बादशाह घोषित कर दिया। इस वंश के सात राजाओं में, आखरी राजा ने नवाब मीस उस्मान अली खान ने, १९४७ तक हैदराबाद पर राज्य किया।</p>
<p>१७ सितंबर १९४८ में, निज़ाम की सेना ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और हैदराबाद  स्वतंत्र भारत में मिल गया।</p>
<h3 style="text-align:center;">गोलकुण्डा का किला और अंधेरी रात</h3>
<p>हैदराबाद में गोलकुण्डा का किला भी देखने लायक। इसमें शाम को आवाज और रोशनी का कार्यक्रम होता जिसमें वे इसके इतिहास के बारे में बताते हैं। यह बहुत अच्छा है, कभी वहां जायें तो इसे अवश्य देखें।</p>
<p>हम लोग, इसके अंग्रेजी के प्रोग्राम को देखने के लिए गये थे। इसमें अंग्रेजी में आवाज अमिताभ बच्चन की है पर थोड़ी देर बाद आवाज और रोशनी दोनो गायब हो गयीं। जाहिर है कि बिजली चली गयी थी। कुछ देर तक जब बिजली नहीं आयी तो पता चला कि पावर कट है और जेनरेटर की डीज़ल खत्म हो गया है। बाजार से डीज़ल मंगवाया गया है पर आने में समय लगेगा।</p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 514px"><img title="Golconda fort" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/c/cf/Golconda_fort2.jpg/800px-Golconda_fort2.jpg" alt="" width="504" height="377" /><p class="wp-caption-text">गोलकोण्डा का किला</p></div>
<p>जहां तक मुझे याद पड़ता है उस रात अमावस्या थी &#8211; कम से कम चांद तो नहीं निकला था। आकाश में तारे सुन्दरता बिखेर रहे थे। मैंने पूंछा कि जब तक बिजली नहीं आती है तब तक क्या वे लोग तारों के बारे में बात करना पसन्द करेंगे। वहां पर बैठे लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि क‍या करें, बोर हो रहे थे &#8211; उन्होंने हामी भर दी। मैं अपने मित्रों के बीच ज्यादा बोलने के लिये बदनाम हूं। आदत से लाचार &#8211; हो गया शुरु।</p>
<p>मुझे लगा कि सबसे पहला काम लोगों में उत्सुकता बढ़ाना है इसलिये सबसे पहले तारों के वर्गीकरण के बारे में बताना शुरु किया जैसा कि मैंने <a href="http://unmukts.wordpress.com/2006/05/24/oh-be-a-fine-girl-kiss-me/">यहां</a> बताया। जब मैने वर्गीकरण को याद करने वाला वाक्य</p>
<blockquote><p>&#8216;Be A Fine Girl Kiss Me&#8217;</p></blockquote>
<p>और उसके बाद इसमें जोड़े नये तीन वर्ग को याद करने के लिये वाक्य</p>
<blockquote><p>&#8216;Right Now Sweetheart&#8217;</p></blockquote>
<p>बताया तो मुझे लगा कि कुछ लोग हल्के हल्के मुस्कुरा रहें हैं और उन्हें मजा आने लगा है।</p>
<p>इसके बाद आकाश में तारा समूहों के बारे मैं बताना शुरु किया। तब शुरु हुआ राशियों का सफर और वे क्यों महत्वपूर्ण हैं। इन सब के बारे में मैंने कुछ <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/10/blog-post_07.html">यहां</a> और <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/10/blog-post_07.html">यहां</a> लिखा है। इतने में जनरेटर चलने की आवाज शुरु हो गयी और बिजली आ गयी। इस प्रोग्राम में अधिकतर लोग विदेशी थे। मैंने देखा कि कुछ एक दूसरे को चूम रहे थे, कुछ हाथ पकड़ कर प्यार का इज़हार कर रहे थे। एक विदेशी महिला ने मुस्कराते हुऐ कहा,</p>
<blockquote><p>‘Thank you for taking us on star trek.’</p></blockquote>
<p>इतने में प्रोग्राम शुरु हो गया। अमिताभ बच्चन की आवाज आनी शुरु हो गयी और हम सब उसके जादू में खो गये।</p>
<h3 style="text-align:center;">निजाम के गहने</h3>
<p style="text-align:left;">एक बार हैदराबाद ट्रिप पर मालुम चला कि सलारजंग संग्रहालय में निजाम के गहनों की प्रदर्शनी चल रही है। बस, मैं और शुभा भी पहुंच गए देखने के लिए। गहने तो इतने भारी, तड़क भड़क वाले और भद्दे थे कि मन में कुछ अनिच्छा सी हो गयी। मैंने कहा</p>
<blockquote><p>‘क्या, इन्हें कोई भी पहन सकता है’</p></blockquote>
<p>बगल में एक विवाहित महिला अपने परिवार के साथ थी मुझे और शुभा को देख कर कुछ मुस्करायी और बोली,</p>
<blockquote><p>‘आप लोगों को देखकर लगता है कि आप तो किसी प्रकार के गहने नहीं पहन सकते।‘</p></blockquote>
<p>मैं न तो कोई अंगूठी और न ही कफ-लिंक वगैरह पहनता हूं। यही हाल <a href="http://www.blogger.com/profile/15090591980327578036">शुभा</a> का है &#8211; वह तो फैशन से बहुत दूर रहती है। उसे गहनो से लगाव नहीं। यहां तक कि न चूड़ी, न बिन्दी न सिन्दूर। उसे गहनों से लगाव न रहने के कारण मुझे इस तरह के खर्चे नहीं करने पड़ते। इस कारण मेरे पैसे तो बचते हैं पर कभी कभी इस तरह का उपहार न दे पाने की टीस रहती है।</p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 497px"><img title="Chowmah alla palace" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/b/b0/Chowmah_alla_palace_night.jpg" alt="" width="487" height="174" /><p class="wp-caption-text">निज़ाम का आधिकारिक निवास - चौमहल्ला महल</p></div>
<p>निजाम के गहनों की प्रदर्शनी में जैकब हीरा भी रखा था। यह रोचक लगा।</p>
<h3 style="text-align:center;">जैकब हीरा &#8211; पेपरवेट की तरह प्रयोग किया</h3>
<p>जैकब हीरा सवा सौ साल पहले अफ्रीका की किसी खान में कच्चे रूप में मिला था। वहां से इसे एक व्यवसाय संघ द्वारा ऐमस्टरडैम लाया गया और कटवा कर इसे नया रूप दिया गया। कहते हैं कि, यह दुनियां के सबसे बड़े हीरे में से एक है इसका वजन कोई १८४.७५ कैरेट (३६.९ ग्राम) है। यदि आप इसकी तुलना कोहिनूर हीरे से करें तो पायेंगे कि कोहिनूर हीरे का वजन पहले लगभग १८६.०६ कैरेट (३७.२ ग्राम) था। अंग्रेजी हुकूमत ने कोहिनूर हीरे की चमक बढ़ाने के लिये इसे तरशवाया और अब इसका वजन १०६.०६ कैरेट (२१.६ ग्राम) हो गया है।</p>
<p>जैकब हीरे को भारत लाने का श्रेय अलैक्जेंडर मालकन जैकब को जाता है। जैकब रहस्यमयी व्यक्ति था पर भारतीय राजाओं के विश्वास पात्र था। कहते हैं कि वह इटली में एक रोमन कैथोलिक परिवार में पैदा हुआ था। किपलिंग के उपन्यास किम में, ब्रितानी गुप्त सेवा के लगन साहब का व्यक्तित्व, जैकब पर आधारित है।<img class="alignright" title="jacob diamond" src="http://photos1.blogger.com/blogger2/2872/2820/200/%3F%3F%3F%3F%20%3F%3F%3F%3F.jpg" alt="" width="200" height="150" /></p>
<p>१८९० में जैकब ने इस हीरे को बेचने की बात छठे निजाम, महबू‍ब अली पाशा से की। उस समय इसका दाम १ करोड़ २० लाख रूपये आंका गया पर बात बनी ४६ लाख में। निजाम ने २० लाख रूपये उसे हिन्दुस्तान में लाने के लिये दिये, फिर लेने से मना कर दिया क्योंकि British Resident ने इस पर आपत्ति कर दी। निजाम ने जब पैसे वापस मांगे तो जैकब उसे वापस नहीं कर पाया। इस पर कलकत्ता हाईकोर्ट में मुकदमा चला और सुलह के बाद यह हीरा निज़ाम को मिल गया।<br />
महबूब अली पाशा ने, जैकब हीरे पर कोई खास ध्यान नहीं दिया और इसे भी अन्य हीरों की तरह अपने संग्रह में यूं ही रखे रखा। उनके सुपुत्र और अंतिम निजाम उस्मान अली खान को यह उनके पिता की मृत्यु के कई सालों बाद में उनकी चप्पल के अगले हिस्से में मिला। उन्होंने अपने जीवन में इसका प्रयोग पेपरवेट की तरह किया।</p>
<p>इस हीरे का दाम इस समय ४०० कड़ोड़ रुपये है। प्रर्दशनी के बाहर इस हीरे के नकल का क्रिस्टल ४०० रुपये में बिक रहा था। मैंने इसे खरीद लिया। कम से कम इसका प्रयोग तो मैं पेपरवेट की तरह कर सकता हूं।</p>
<h3 style="text-align:center;">आप किस बात पर, सबसे ज्यादा झुंझलाते हैं</h3>
<p>मुझे दो बातें हमेशा से पसन्द हैंं: आईसक्रीम और पुस्तकें।</p>
<p>किसी भी शहर में मेरे लिए समय व्यतीत करने का सबसे प्रिय तरीका: वहां के अच्छे रेस्तराँ में जाकर आईसक्रीम खाना और पुस्तकों की दूकानों पर समय बिताना। उम्र के चढ़ते चढ़ते, गले के नाज़ुक होने के कारण आईस क्रीम खाना बन्द हो गया। मेरे डाक्टर मित्र कहते हैं कि ठंडी चीज खाने से और गले की खराबी का कोई सं‍बन्ध नहीं है फिर भी मैंने कोई ठन्डी चीज खायी नहीं कि गला हुआ खराब। मालुम नहीं मेरे डाक्टर मित्र सही हैं या मेरा अनुभव, पर मैंने ठन्डी चीज खाना या पीना बन्द कर दिया है। हालांकि पुस्तकों से प्रेम अब भी जारी है।</p>
<p>मुझे अक्सर काम के सिलसिले में दूसरे शहरों में जाना पड़ता है, इसमें हैदराबाद भी है। एक बार हैदराबाद जाने का मौका मिला तो वहां की पुस्तकों की दुकान जाने का कार्यक्रम बनाया। पूछने पर पता चला कि वहां की सबसे अच्छी पुस्तक की दुकान वाल्डन, बेगम पेठ के इलाके में है। बस वहां पहुंच गया।</p>
<p>वाल्डन दुकान काफी बड़ी है किताबों का चयन अच्छा है पर किताबों की रैक बहुत पास-पास है थोड़ी घुटन सी लगी। यदि कुछ दूर दूर होती तो ज्यादा अच्छा रहता। दुकान में एक अंग्रेजी गाना &#8216;सलोरी &#8230;सलोरी&#8217; कहते हुये बज रहा था। कोने में एक संगीत और वीडियो कैसेट का भाग था। वहां हिन्दी का गाना ‘कभी अलविदा न कहना’ बज रहा था। दोनों का मिश्रण कुछ अजीब तरह का माहौल पैदा कर रहा था। संगीत इतनी जोरों से था जैसा कि डिस्को में अक्सर होता है। यह अक्सर किताबों की दुकानों के साथ होता है। मुझे सबसे ज्यादा झुंझलाहट तब होती है जब पुस्तक की दुकान पर जोर जोर से संगीत बजता हो।</p>
<p>किताबों की दुकानें, पुस्तक प्रेमियों के द्वारा या उस व्यापारी वर्ग के द्वारा जो कि पुस्तक प्रेमियों की मनोवृत्ति को अच्छी तरह समझते थे, के द्वारा शुरू की गयीं थी पर अब उनकी जगह उनके नयी पीढियों ने जगह ले ली है। नयी पीढ़ी तो डिस्को सभ्यता में विश्वास करती है और पुस्तक की दुकान को भी उसी रंग में रंगना चाहते हैं। मैं हमेशा इस बात को उनके मैनेजर से कहता हूं, इस बात को उनकी शिकायत पुस्तिका में दर्ज करता हूं &#8211; मालुम नहीं असर होता है कि नहीं पर मैं शिकायत दर्ज करता चलता हूं।</p>
<p>मैंने वाल्डन में कुछ किताबें खरीदी और पैसे देते समय अपनी शिकायत दर्ज की। मेरे साथ एक बुजुर्ग भी कुछ खरीद रहे थे, वे मुस्कराये और सहमति जतायी। मालुम नहीं दुकान वाले की समझ में आया कि नहीं पर मुझे इतना लगा कि मेरी मनोवृति उस बुजुर्ग की तरह है।</p>
<p>खैर अगली बार वाल्डन जाऊंगा तो देखूंगा कि कुछ असर हुआ कि नहीं।</p>
<p style="text-align:center;">यह मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।</p>
<p>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2011/10/golconda-fort-history.html">भागमती नाम से बना, भाग्यनगर &#8211; अब हो गया हैदराबाद</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/12/be-fine-girl-kiss-me-right-now.html">गोलकुण्डा का किला और अंधेरी रात</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/11/blog-post.html">निज़ाम के गहने और जैकब हीरा</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/10/blog-post_25.html">आप किस बात पर, सबसे ज्यादा झुंझलाते हैं</a>।।</p>
<p style="text-align:center;"><em>इस चिट्ठी का आखरी चित्र छोड़, सारे चित्र  <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Main_Page">विकिपीडिया</a> से हैं।</em></p>
<p style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</p>
<p style="text-align:left;">। <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Hyderabad,_India">Hyderabad</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Golconda_Fort">Golconda fort</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Jacob_Diamond">Jacob diamond</a>,</p>
<p style="text-align:left;">। <a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, <a href="http://www.google.co.in/search?q=%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80+%E0%A4%95%E0%A5%87+%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%87&amp;ie=utf-8&amp;oe=utf-8&amp;aq=t&amp;rls=com.ubuntu:en-US:official&amp;client=firefox-a">मस्ती के लिये</a> सैर सपाटा, <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>, <a title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा विवरण </a>, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</p>
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		<title>फैंटम, टार्ज़न … यह कौन हैं – साउथ अफ्रीकन सफारी</title>
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		<pubDate>Sat, 20 Aug 2011 19:30:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में साउथ अफ्रीका की यात्रा का वर्णन है। 
This post is our travelogue to South Africa. 
is chittthi mein south africa kee yatra ka varnan hai.<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=730&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em>कुछ समय पहले मुझे काम से साउथ अफ्रीका जाना पड़ा। इस चिट्ठी  में, वहीं की </em><em> </em><em>यात्रा का वर्णन है। </em></p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 405px"><img title="kruger park SA sunset" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/krugerparksunset.jpg?w=395&#038;h=297" alt="" width="395" height="297" /><p class="wp-caption-text">क्रुगर पार्क साउथ अफ्रीका में सूर्यास्त</p></div>
<h3 style="text-align:center;"><span id="more-730"></span>झाड़ क्या होता है?</h3>
<p>भारत से, हवाई जहाज से साउथ अफ्रीका जाने के तीन तरीके है।</p>
<ol>
<li>दिल्ली से अरब एमिरेट की उड़ान पकड़ कर दुबई और दुबई से जॉहन्सबर्ग।</li>
<li>दिल्ली से एयर इण्डिया की उड़ान पकड़ के केनिया और वहां से केनयन एयर लाइन्स से जॉहन्सबर्ग।</li>
<li>बम्बई से साउथ अफ्रीका एयर लाइन्स की सीधी उड़ान पकड़ कर जॉहन्सबर्ग।</li>
</ol>
<p>इस समय दिल्ली &#8211; अबू धाबी &#8211; जॉहन्सबर्ग की नयी विमान सेवा भी शुरू हो गयी है। हमें लगा कि बम्बई से सीधी जॉहन्सबर्ग के लिए उड़ान पकड़ना सबसे अच्छा और आसान होगा। इसलिए हम लोग बम्बई पहुंचे। बम्बई मे हमें कुछ घण्टें व्यतीत करने थे और हम बान्द्रा क्षेत्र में रूके।</p>
<p>शाम के समय हम लोगों को लगा कि ईमेल चेक कर ली जाय इसलिए साइबर कैफे को ढ़ूंढने के लिए बाहर निकले। एक व्यक्ति से पूछा तो उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;सीधे आगे जाये। आपको एक गोल पार्क मिलेगा उसके बाद एक झाड़ मिलेगा बस उसी के बाजू से एक सीढी जाती है, वहां पर साइबर कैफे है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने पूछा कि झाड़ क्या होता है? उसने हमारी तरफ देखा जैसे मालूम नही कहां के बेवकूफ आ गये है फिर धीरे से मुस्कुरा कर कहा कि झाड़ माने पेड़। मैंने उसको शुक्रिया अदा किया।</p>
<p>साइबर कैफे में बहुत सारे कम उम्र के लोग थे। वे शायद निम्न स्तर के थे जो आपस में बीच-बीच मे बड़ी जोर से चिल्ला रहे थे, नीचे करो, वह मारा। मैंने साइबर कैफे के मालिक से पूछा ये लोग क्या खेल खेल रहे हैं। उसने बताया,</p>
<blockquote><p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/worldofwarcraft.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/worldofwarcraft.jpg?w=200&#038;h=130" alt="" width="200" height="130" border="0" /></a>&#8216;आजकल यहां पर <a href="https://signup.worldofwarcraft.com/trial/index.html">वर्ल्ड ऑफ वारक्रैफ्ट </a>(<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/World_of_Warcraft">warcraft</a>) नामक खेल लोकप्रिय है और यह लड़के दो टीम बनाकर उसे खेल रहे हैं। इसमें टीमें आपस में एक दूसरे से लड़ाई करती है।&#8217;</p></blockquote>
<div>इण्टरनेट और टीवी लोगों के स्वास्थ को कितना नुकसान पहुंचा रहा है इसके बारे में वे नहीं सोच रहे हैं।</div>
<p>एक छोटा सा कमरा जिसमें ठीक से हवा भी नहीं आ रही थी उसी में कम उम्र के बच्चे यह खेल रहे थे। इण्टरनेट और टीवी की सबसे खराब बात यही है कि लोग बाहर में खेलने की जगह, कमरे के अन्दर बंद हो गये हैं। यह उनके स्वास्थ को कितना नुकसान पहुंचा रहा है इसके बारे में वे नहीं सोच रहे हैं।</p>
<p>लौटते समय देखा कि रास्ते में भुट्ठे बिक रहे थे। ठेले वाले की अंगेठी में, छोटी सी धौकिनी लगी थी जो हवा फेंकती थी और अंगेठी तेजी से जलती थी। मैंने पूछा कि एक भुटटा कितने का है उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;दस रूपये का। साहब खाकर देखिये, यह भुटटा खास तरीके का है और मीठा है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा क्या बाहर से आता है उसका जवाब था,</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं, यहीं पैदा होता है पर बीज बाहर से आता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैने पूछा कितना रूपया कमा लेते हो। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं लगभग सौ भुटटे बेच लेता हूं हर भुटटे में करीब -दो रूपये का फायदा होता है। बाकी पैसे भुटटे और कोयले के खर्च में और कुछ अंगेठी और ट्राली को ठीक कराने में चला जाता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने पूछा क्या कुछ पैसा म्यूनिसपिल्टी को भी देना पड़ता है। उसका जवाब था हर महीने हजार रूपये। मैंने पूछा कि क्या रसीद देते हैं। उसका जवाब था,</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं, ये म्यूनिसपिल्टी के आदमी हजार रूपया अपने जेब में रख लेते हैं। बस ये समझिए कि यह एक तरह का गैर-कानूनी टैक्स देता हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>भुट्टा वास्तव में बहुत अच्छा था और मीठा था खाने में मजा ही आ गया।</p>
<p>आगे चलते समय एक जगह कुछ फल बिक रहे थे। मैने उससे पूछा कि शरीफा कितने का है । उसने बताया कि ७०/-रूपया किलो । मैने कहा कि मुझे एक शरीफा चाहिए कितने का पड़ेगा । उसने कहा कि दस रूपया के। मैने कहा कि दस रूपया का! उसने मेरी तरफ ऎसा देखा की शायद मै कहां से आ गया हूं। मैंने कहा कि मैं एक छोटे से कस्बे का हूं। उसने मुस्कुरा कर कहा, अच्छा आठ रूपया दे दीजियेगा। मैंने उसे दस रूपये का नोट दिया तो उसने दो रूपये वापस किये। मैंने कहा तुम ही रख लो। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं साहब मैने आपसे आठ रूपय कहे थे उतने ही लूंगा। ये दो रूपये वापस ले लीजिए।&#8217;</p></blockquote>
<p>मुझे उसकी इमानदारी पर ताजुब हुआ , लगा कि शायद अभी भी लोगों में इमानदारी बची है। मैने उससे कहा कि दो रूपये की जगह हमें कोई और फल दे दो। उसने हमें एक केला दे दिया।</p>
<p>वापस आकर हम लोगों ने रात का खाना खाया और साउथ अफ्रीका जाने के लिए हवाई अड्डे चले गये।</p>
<h3 style="text-align:center;">साउथ अफ्रीकन एयर लाइन्स और उसकी परिचायिकायें</h3>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 280px"><img title="south african airways" src="https://lh4.googleusercontent.com/_VD9tZkRYrQ0/TVcmkp-aIII/AAAAAAAACVo/kTsbtPj-HeM/South%20African%20Airways%20symbol.jpg" alt="" width="270" height="254" /><p class="wp-caption-text">सउथ अफ्रीकन विमान सेवा का चिन्ह</p></div>
<p style="text-align:left;">बम्बई से, जॉहन्सबर्ग जाने के लिए साउथ अफ्रीकन एयरवेज़ (<a href="http://ww3.flysaa.com/fares/nav/en/en_frameset.html?contents=/fares/faresTDPDspSearch.jsp?NewSession=true&amp;locale=en_in&amp;loadFrame=false">South African Airways</a>) का हवाई जहाज रात के ढ़ाई बजे चलता है। रात भर का जागरण तो हो ही गया । इसे अफ्रीकानस् (Afrikaans) भाषा में Suid-Afrikaanse Lugdiens (SAL) भी कहा जाता है। इसमें परिचायिकायें नीले रंग की ड्रेस और गले में, अपने देश के झण्ड़े की तरह का स्कॉर्फ पहनें थी। उन सबका रंग श्याम था।</p>
<p>परिचायिकायें आपस में जिस भाषा में बात कर रहे थे वह मुझको बिल्कुल समझ में नही आ रही थी। हालांकि वे हमसे अंग्रेजी में बात करती थीं। मैने पूछा कि आप लोग किस भाषा में बात कर रहे है तो उनका कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;साउथ अफ्रीका में ११ भाषायें चलती है जिसमें इंगलिश भी एक है। वहां पर लोग अलग-अलग भाषा में बात करते हैं। हम अपनी मातृ भाषा में बात कर रहे हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>एक हम है जो कि आपस में हिन्दी में न बात कर अंग्रेजी में बात करना पसन्द करते हैं।</p>
<p>कुछ दिन पहले अर्न्तजाल में पढ़ा था कि दिल्ली हाई कोर्ट ने ऎयर इण्डिया की परिचायिकाओं की याचिका जो उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ दाखिल की थी खारिज कर दी है। उनकी बर्खास्तगी इस बात पर की गयी थी कि वे ओवर वेट हैं। इन परिचायिकाओं को देखकर यही लगा कि शायद यह इन सब पर लागू होती है।</p>
<p>हवाई जहाज के उड़ने के बाद, उन लोगों ने हम लोगों को खाना दिया। हवाई जहाज में कुछ कम लोग थे तो ज्यादातर लोग बीच वाली सीट में जाकर बैठ गये और खाना खाने के बाद उसी में लेटकर सो गये । मेरे साथ मेरी पत्नी भी थी तो हम लोग बगल वाली सीट मे बैठे हुए थे। मेरी पत्नी पीछे वाली दो सीट में चली गयी और सो गयी हलांकि मुझको कुछ सोने में तकलीफ हुई। अगले दिन सुबह लगभग ८ बजे हम लोग जॉहन्सबर्ग पहुंचे। यहाँ से हमें प्रिटोरिया जाना था। मुझे वहीं काम था इसलिये वहीं ठहरने की बात थी।</p>
<p>क्रुगर नेशनल पार्क साउथ अफ्रीका का सबसे प्रसिद्व जानवरों का पार्क है। अधिकतर लोग जॉहन्सबर्ग से ही वहाँ चले जाते हैं। मुझे प्रिटोरिया में काम था। इसलिए सफारी प्रिटोरिया से ली। अगली बार जाना पड़े तो हम जॉहन्सबर्ग से ही सफारी पर जाना पसन्द करेंगे।</p>
<h3 style="text-align:center;">मान लीजिये, बाहर निलते समय, मैं आपका कैश कार्ड छीन लूं<em> </em></h3>
<p>जॉहन्सबर्ग हवाई अड्डे {नया नाम टैम्बो अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/OR_Tambo_International_Airport">Tambo International Airport</a>)} पर हमें किसी व्यक्ति <a href="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/4/4b/OR_Tambo_International_Airport_Copyright2007KaihsuTai.jpg/180px-OR_Tambo_International_Airport_Copyright2007KaihsuTai.jpg"><img class="alignright" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/4/4b/OR_Tambo_International_Airport_Copyright2007KaihsuTai.jpg/180px-OR_Tambo_International_Airport_Copyright2007KaihsuTai.jpg" alt="" width="200" height="131" border="0" /></a>को लेने आना था और हमें प्रिटोरिया के होटल तक पहुँचना था। लेकिन, हवाई अड्डे पर हमें कोई व्यक्ति लेने के लिए नही आया। हम लोग परेशान हो गये।</p>
<p style="text-align:right;"><em>जॉहन्सबर्ग हवाई अड्डे के अन्दर का दृश्य चित्र <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Main_Page">विकिपीडिया</a> से<br />
</em></p>
<p>शुभा के पास बीएसएनएल की मोबाइल सेवा है और सैमसंग का मोबाइल फोन है। हम लोग इसे इण्टरनेश्नल करा कर ले गये थे। मैं इसे <a href="http://unmukth.wordpress.com/2009/10/19/berlin-travelogue/">पिछली बार जर्मनी</a> भी ले गया था। विदेश में इसमें फिर से सेट करना पड़ता और इण्टरनेश्नल, का विकल्प लेना पड़ता है। पिछली बार, मैं यह विकल्प इन्टरनेशनल नहीं कर पा रहा था क्योंकि मैं &#8216;सेटिंग&#8217; की सूची में जाकर करता था। वास्तव में यह &#8216;अप्लीकेशन&#8217; की सूची में जाकर करना चाहिए। जर्मनी यात्रा के दौरान,  इसे <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/11/bsnl-international-roaming.html">इन्टरनेशनल करने में</a> बहुत मुश्किल पड़ी थी पर इस बार मुझे पूरा विश्वास था कि मैं यह कर लूंगा। जॉहन्सबर्ग पर पहुंचते ही मैने इसे इण्टरनेशनल कर लिया पर फिर भी इसने काम नहीं किया। इससे हमारी परेशानी और बढ़ गयी।<a href="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/b/bd/Oliver_Tambo_statue_Copyright2007KaihsuTai.jpg/180px-Oliver_Tambo_statue_Copyright2007KaihsuTai.jpg"><img class="alignright" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/b/bd/Oliver_Tambo_statue_Copyright2007KaihsuTai.jpg/180px-Oliver_Tambo_statue_Copyright2007KaihsuTai.jpg" alt="" width="113" height="200" border="0" /></a></p>
<div style="text-align:right;"><em>इस </em><em>हवाई अड्डे का नाम <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Oliver_Tambo">ऑलिवर टैम्बो</a> के नाम पर रखा गया है। उनकी यह मूर्ती हवाई अड्डे पर है। चित्र <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Main_Page">विकिपीडिया</a> से </em></div>
<p>मुझे लगा कि हम लोग टैक्सी कर प्रिटोरिया चले जाएँ पर साउथ अफ्रीका में केवल उन्हीं के देश का पैसा, जो कि रैंड कहलाता है, चलता है। एक रैंड लगभग छ: रूपये के बराबर है। यह हम लोगों के पास नहीं था। मेरे पास आईसीआईसीआई बैंक का कैश कार्ड था। इसके द्वारा मेरे सेविंग अकाउंट से कुछ रूपया निकाला जा सकता था। हम अपने साथ आईसीआईसीआई बैंक का यूरो कैशकार्ड भी ले गये थे, साथ में कुछ डॉलर भी थे। इसमें से वहाँ कुछ भी नहीं चलता है जॉहन्सबर्ग से प्रिटोरिटया तक लगभग ३५० रैंड लगते हैं। हमारे पास एक भी रैंड नहीं था। हमें, भारत में रैंड मिल ही नही पाया । हम लोग वह जगह ढूढ़ने लगे, जहाँ से हम पैसों को रैंड में बदल सके।</p>
<p>लोगों ने बताया था कि पैसा एटीएम से बदला जा सकता है। हवाई अड्डे पर एटीएम हम लोग जिस तल पर थे उसके ऊपर के तल पर था। हम लोगों ने अपना समान निकाल लिया था। इसलिए समझ में नहीं आ रहा था कि समान साथ लेकर चले या नहीं। मैंने अपनी पत्नी से एक पुलिस चौकी के बगल मे खड़ा होने को कहा और ऊपर के तल पर पैसा निकालने के लिए चला गया।</p>
<p>ऊपर के तल पर अलग -अलग बैंक के एटीएम लगे थे और काफी लम्बी लाइने थीं। आईसीआईसीआई बैंक का कार्ड वीसा पर चलता है। मैं उसी लाइन में खड़ा हो गया। मेरे आगे के व्यक्ति को पैसा निकालने में देर लग रही थी। बार-बार अपने हाथ को इस तरह दिखा रहा था जैसे कुछ गड़बड़ हो गया है। मेरे पीछे एक महिला खड़ी थी। मैंने कहा कि लगता है यह व्यक्ति मेरी तरह का है जिसने आज तक कभी भी एटीएम से पैसा नहीं निकाला है। मुझे भी बहुत देर लगेगी। वह मुस्कुराने लगी। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यदि आप चाहें तो मैं आपकी सहायता कर सकती हूं। आप जब अपना पिन नम्बर टाइप करेंगे तो मै अपना मुंह दूसरे तरफ कर लूंगी।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है क्योंकि मै आपको अपना कार्ड नहीं दूंगा। महिला ने मुस्करा कर कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मान लीजिए, बाहर निकलते समय मैं आपका कार्ड छीन लूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा, आपका स्वागत है।</p>
<p>मेरे नम्बर आने पर उसने पैसा निकलने में सहायता की। एटीएम को चलाते समय वह कार्ड का विकल्प पूछता है। हमारी समझ में नहीं आया कि कैश कार्ड किस विकल्प आयेगा। उसमें एक विकल्प क्रेडिट कार्ड का था। महिला ने क्रेडिट कार्ड वाला बटन दबाने का सुझाव दिया । मैने डरते डरते क्रेडिट कार्ड वाला बटन दबाया क्योंकि इसमें कैश क्रेडिट कार्ड मशीन के अन्दर चला गया। मुझे घबराहट लग रही थी कि कार्ड बाहर निकलेगा कि नही। लेकिन यह विकल्प सही था। मुझे रैंड मिल गये और मेरा कैश कार्ड भी बाहर आ गया। मैंने महिला को शुक्रिया अदा किया और वापस आया।</p>
<p>मेरे वापस पहुंचते ही मेरी पत्नी ने बताया कि मोबाइल फोन काम करने लगा है। उसने मोबाइल फोन से बात कर ली है और फारूक नामक व्यक्ति हम लोगों को लेने के लिए आ रहा है।</p>
<p>हवाई अड्डे पर मुझे लगा कि मैं फ्रेश हो लूं। मै पुरूषों के टायलेट में गया। यह काफी साफ सुथरा था। यहां पर सब कुछ नये समय के अनुसार था। नल खोलने के लिए हाथ नहीं लगाना पड़ता था। हाथ ले जाने पर नल से पानी अपने आप गिरता था यह फोटो इलेक्टिक एफॅक्ट के कारण होता है। मुझे जो वहाँ सबसे खास बात यह लगी कि वहां पर एक सीट भारतीय पद्वति के अनुसार थी। साउथ अफ्रीका की सरकार को आभास है कि भारतीय लोग अपनी पद्वति के तरह की सीट पर ही फ्रेश होना पसंद करते है।</p>
<p>हमारी मोबाइल से बात हो जाने के कुछ देर बाद, फारूक हमें जॉहन्सबर्ग हवाई अड्डे पर आये। वह बेहद मजेदार व्यक्ति निकले।</p>
<h3 style="text-align:center;">साउथ अफ्रीका में अपराध &#8211; जनसंख्या अधिक और नौकरियां कम</h3>
<p>हमें किसी को जॉहन्सबर्ग हवाई अड्डे {नया नाम टैम्बो अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/OR_Tambo_International_Airport">Tambo International Airport</a>)} पर लेने आना था पर वहां हमें कोई नहीं मिला। मोबाइल से बात करने के बाद पता चले कि उन्हें सूचना मिलने में कुछ गड़बड़ हो गयी थी इसी लिये कोई नहीं आ सका था।</p>
<p>मोबाइल से बात हो जाने के कुछ देर बाद, फारूक हमें  पर लेने आये। वह  बेहद मज़ेदार व्यक्ति निकले। उनको   साउथ अफ्रीका के बारे में अच्छा ज्ञान था।  वे हिन्दी में बात कर रहे  थे। उन्होंने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;मेरे  बाबा सूरत में रहते थे।  वे पहले डरबन में  आये। उनका मकसद यहां पर व्यापार करने का था। शुरू-शुरू में खाली बोतले खरीद कर बेचते थे। उसके बाद कुछ पैसा इक्टठा करके उन्होंने मिठाई की दुकान शुरू कर दी।  यह दुकान &#8216;मुल्ला स्वीट  मीट हाउस&#8217; नाम से आज भी  डरबन में चलती है। इसमें मुख्यत: गुजराती मिठाई बिकती है। इस दुकान को उनके चाचा चलाते हैं। इसमें इस समय एक रेस्ट्रां भी है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने पूछा कि आप जॉहन्सबर्ग क्यों आ गये। उनका कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं बचपन से डरबन में रहा और वहां पर रहते-रहते ऊब गया। इसलिए व्यापार करने जॉहन्सबर्ग  आ गया। मै टैक्सी/ ट्रैवल सर्विस चलाता हूँ।</p></blockquote>
<blockquote><p>मेरे पिता ऊर्दू बोल व लिख लेते थे। मेरी माँ गुजराती बोल और लिख पाती थीं और मैं  स्वयं अग्रेंजी, हिन्दी, ऊर्दू और गुजराती बोल लेता हूँ।&#8217;</p></blockquote>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/jagranda-flower-south-africa.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/jagranda-flower-south-africa.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>रास्ते में फूलों के पेड़ मिले, जिसमें बैगनी रंग का बहुत सुन्दर फूल लगा हुआ था। फारूक के मुताबिक इसका नाम जगरांडा (Jagranda) है। यह सफेद और गुलाबी रंग का भी होता है।</div>
<p>कार में रास्ते भर रेडियों बज रहा था। इस प्रोग्राम को एक लड़की प्रस्तुत कर रही थी। वह बोलती तो अंग्रेजी में थी पर गाने हिन्दी के सुनवा रही थी। फारूक ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह साउथ अफ्रीका में भारतीयों द्वारा चलाया जाने वाला एक रेडियो स्टेशन है। इसका नाम लोटस (Lotus) कमल है। सबसे पहले भारतीय जिस पानी के जहाज द्वारा साउथ अफ्रीका गये थे उसका नाम लोटस था इसलिए इस रेडियो स्टेशन का नाम भी लोटस रखा गया है।&#8217;</p></blockquote>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><img title="Johansburg-poverty" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/johansburg-poverty.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" /><p class="wp-caption-text">जॉहन्सबर्ग में यह भी देखने को मिला</p></div>
<p>फारुक के साथ जॉहन्सबर्ग से प्रिटोरिया  का सफर बहुत अच्छा बीता।  हम लोग जिस रोड़ पर  जा रहे थे,  वह  बेहद अच्छी व  साफ सुथरी थी। उसको देख कर लगता था कि साउथ अफ्रीका में बहुत प्रगति हुई है। वे हमसे कहीं आगे है पर यहां पर अधिकतर  सफेद  लोग ही दिखाई पड़े।</p>
<div>भारत से चलते समय हमें बताया गया था कि यहाँ पर अपराध बहुत हैं पर वहाँ इतना सब कुछ व्यवस्थित देखकर यह नहीं लगा।  मैने फारूक से पूछा कि क्या यहां पर अपराध काफी ज्यादा हैं।  उन्होंने  कहा,</div>
<blockquote><p>&#8216;यहां पर नौकरियां कम हैं और लोग ज्यादा है। यही कारण है कि यहां पर अपराध की संख्या  बहुत अधिक है।&#8217;<em><br />
</em></p></blockquote>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 210px"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/garden-court-hatfield-pretoria-south-africa.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/garden-court-hatfield-pretoria-south-africa.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a><p class="wp-caption-text">प्रिटोरिआ में हमारा होटेल</p></div>
<p>प्रिटोरिया में हमें, ग्राडन कोर्ट हैटफील्ड (<a href="http://cybercapetown.com/Hatfield/">Garden court Hatfield</a>) में ठहरना था। वहाँ पहुँच कर लगा कि  क्यों न मैं ईमेल चेक कर लूँ।  बर्लिन (जर्मनी) <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/01/what-to-see-in-berlin-city.html">यात्रा</a> के दौरान, मैं जिस होटल में ठहरा था उस होटल के नीचे लॉज़ में एक कम्पूयटर रखा था जहाँ अन्तरजाल पर जाया जा सकता था इसके  इस्तेमाल करने के लिए कुछ पैसा नहीं देना पड़ता था। इसी तरह यहाँ भी एक कम्पूयटर था।  मुझे लगा कि यह भी   जर्मनी की  तरह मुफ्त होगा लेकिन पास जाकर उसकी नोटिस  पढ़ी तो उसमें लिखा था कि इसको प्रयोग करने के लिए आपको  १५ मिनट के लिए १५ रैंड (यानी की लगभग ९०/-रूपये) और आधे घण्टें के लिए २५ रैंड   देनें होगें।  अपना  देश समान्यता  में आधे घण्टें का दाम १५/-रूपया लगता है। मुझे लगा कि यह तो बहुत मंहगा है।</p>
<p>हम लोग  शाम को रात का खाना जल्दी खाकर सो गये क्योंकि अगले दिन सुबह ही हम लोगों को क्रुगर राष्ट्रीय पार्क जाना था। अफ्रीका में बहुत सारे पार्क है पर शायद क्रुगर  पार्क अफ्रीका का सबसे अच्छा और सबसे व्यवस्थित  जानवरों का पार्क है।</p>
<h3 style="text-align:center;">यह मेरी तरफ से आपको भेंट है</h3>
<div> मुझे प्रिटोरिया में काम  था और यहीं रूकना था। इसी लिये क्रुगर राष्ट्रीय उद्यान (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kruger_National_Park">Kruger National Park</a>) घूमने का चार दिन तीन रात का पैकेज़, प्रिटोरिया से लिया था।  इसकी बुकिंग अन्तरजाल पर भारत से करा ली थी। यह कुछ मंहगा था। यह इसलिए कि पैकेज़ जॉहन्सबर्ग में शुरू होतें है, लोग वहीं से इसे लेते है पर  हमने तो प्रिटोरिया से लिया था। यह केवल एक ही कम्पनी करती है। जाहिर है कि वह मंहगी थी। अधिकतर लोग तो केवल इसी पार्क को देखने आते है इसलिए वे जॉहन्सबर्ग हवाई अड्डे से ही सीधे इस ट्रिप पर चले जाते है। उन्हें किसी भी होटल में रूकनें की जरूरत नहीं है।</div>
<p>हम लोग सुबह, कुगर राष्ट्रीय पार्क के लिए निकले। होटल में नाश्ता मुफ्त रहता है लेकिन हम लोगों को  साढ़े ६ बजे निकलना था और नाश्ते का समय सात बजे शुरू होता था।   होटल वालों ने हमें  नाश्ता पैक कर दे दिया ताकि उसे हम रास्तें में खा सकें।</p>
<p>हमको लेने के लिए मिस्टर जेम्स ट्योटा वैन लेकर आये थे। यह उस  कम्पनी के साथ काम करते है जिनके साथ हम लोगों  क्रुगर पार्क घूमनें का पैकेज लिया था।  इसमें  लगभग १२ लोग बैठ सकते हैं लेकिन जेम्स के मुताबिक ज्यादा भीड़ नहीं है और केवल हम ही लोग हैं।</p>
<p>हमें दो रातें हेज़ी व्यूह (<a title="Hazyview, Mpumalanga" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Hazyview,_Mpumalanga" rel="wikipedia">Hazyview</a>) शहर के उंभाबा होटल (Umbhaba Lodge) में, और तीसरी रात  पिलिग्रमस् रेस्ट ( Pilgrim&#8217;s rest) शहर के रॉयल होटल में रूकना था।</p>
<div>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><img title="agriculture-farming-watering-southafrica" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/agriculture-farming-watering-southafrica.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" /><p class="wp-caption-text">खेतों में पानी की यांत्रिक सिंचाई</p></div>
</div>
<p style="text-align:left;">यहाँ पर खेतों की सिचाईं एकदम आधुनिक तकनीक  के द्वारा, यंत्रो से होती है। रास्ते में न केवल हमें खेती के, पर जानवरों के फार्म भी मिले। जानवरों के फार्म पर तरह -तरह के जानवर हिरण, शुतुरमुर्ग आदि थे । यह सब मांस खाने के लिए पाले जाते है। शुतुरमुर्ग के अण्डें मे छेद कर, उसके अन्दर का पदार्थ निकाल, उसे  अच्छी तरह से सजाया जाता है। उसके बाद वे  यादगार निशानी की तरह बेचे  जाते हैं।<em></em></p>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 212px"><img title="Aloe_Vera_with_web" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/a/a1/Aloe_Vera_with_web.jpg/202px-Aloe_Vera_with_web.jpg" alt="" width="202" height="269" /><p class="wp-caption-text">चित्र विकिपीडिया से</p></div>
<p style="text-align:left;"><em><br />
</em></p>
<p style="text-align:left;">रास्ते में, हमें एलो वीरा के भी बाग दिखे। जेम्स ने बताया कि यह काफी मात्रा में पैदा किया जाता है। शुभा ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह पेड़  से तरह तरह की दवाईयां बनती हैं और  त्वचा के लिये क्रीम भी बनायी जाती है। अपने घर में भी इसका पेड़ लगा है। पिछले साल हमारी बिटिया रानी इसी तरह की Crema Hidernante <a title="Aloe vera" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Aloe_vera" rel="wikipedia">Aloe Vera</a> नाम की स्पेन में बनी Moistturizing cream लायी थी। जो कि काफी अच्छी है।&#8217;</p></blockquote>
<p>रोड बहुत अच्छी और सीधी थी। मुझे कुछ साल पहले अमेरिका जाने का मौका मिला था। साउथ अफ्रीका में रोड़ देखकर वहां के रास्ते की याद आयी। हांलाकि साउथ अफ्रीका में लोग अपने देश की तरह बांयी तरफ चलते है। आगे कुछ दूर चलने पर एक जगह बोर्ड दिखायी पड़ा जिसमे लिखा हुआ था,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्राइम जोन डोंट हाल्ट&#8217;।</p></blockquote>
<p>मैंने जेम्स से पूछा ऎसा क्यों लिखा है तब जेम्स का कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह जगह मौज़म्बीक देश के पास है और वहाँ के बहुत से लोग यहां आ जाते है और कारें रोक कर लूटते  हैं।  इसीलिए लिखा हुआ है कि यहाँ मत रूकिए।&#8217;</p></blockquote>
<p>शायद यह बात सच नहीं है। साउथ अफ्रीका में अपराध काफी हैं। मुझे लगता है कि जेम्स अपने देश की बुराई नहीं करना चाहते थे। इसीलिये उन्होंने यह बात कही।</p>
<p>रास्ते में, हम लोगों को एक ट्रक  मिली जिसमे फर्नीचर का समान लदा  हुआ जा रहा था । जेम्स ने बताया कि ये लोग मौज़म्बीक से आये है और यहां से  पुराना माल ले जाकर, वहां महंगे दामो में बेचते हैं।</p>
<p>रास्ते में, एक स्टील प्लान्ट, स्क्रैप प्लान्ट और पेपर मिल मिली। बहुत सारे थर्मल पावर स्टेशन मिले। जेम्स के मुताबिक साउथ अफ्रीका में दो हाइडिल पावर स्टेशन हैं जिसमें एक  सनसिटी के पास है। जेम्स ने हमें सनसिटी देखने जाने  की सलाह दी। उसके मुताबिक यह  बहुत सुन्दर जगह है और यहां पर ऎश्वर्या राय, मिस वर्ल्ड चुनी गयी थी।</p>
<p>रास्ते में टोल एरिया गेट बना हुआ था जिसमें रास्ते के मेनटेंस के लिए पैसा देना पड़ता है। यही कारण है कि यहां की रोड़ बेहतर हैं। रास्ते में जगह जगह पर,   पेट्रोल भरने की जगह है  जहाँ बाथरूम जाया जा सकता हैं। यह बहुत साफ थे। मुझे लगा कि काश अपने भारत मे  कुछ इस तरह की चीज़ें होती जिसका हम लोग प्रयोग कर सकते, तो कितना अच्छा होता।</p>
<p>हम लोग आधा रास्ता तय करने के बाद  एक पेट्रोल  पम्प  पर रूके । यहाँ खाने पीने का समान भी मिलता था। यह बहुत अच्छी साफ सुथरी जगह थी।  हम लोग बहुत सबेरे उठ गये थे इसलिए नींद भी आ रही थी। मैंने जेम्स से पूछा कि क्या वे कॉफी लेना पसंद करेगें। उन्होंने कहा, जरूर। हम कॉफी पीने के लिए वहाँ पहुँचें।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/yantora-cofee-creamsouth-africa.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/yantora-cofee-creamsouth-africa.jpg?w=225" alt="" border="0" /></a>मेरी पत्नी ने कॉफी लेने से मना कर दिया । हम लोगों ने दो कॉफी के लिए आर्डर दिया। जो लड़की काफी बना रही थी उसने कॉफी देने के पहले क्रीम से उस पर  सुन्दर सा फूल  बनाया। यानि कि कॉफी के ऊपर क्रीम से नक्काशी। यह बहुत सुन्दर लग रहा था। मैंने उससे कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं हिन्दुस्तान से आया हूं और मैंने कभी भी इस तरह से नक्काकाशी की हुई कॉफी नहीं पी है। क्या मैं कॉफी बनाते समय,  उसका चित्र ले सकता हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>वह मुस्कुरायी और उसने कहा जरूर। उसने एक कप कॉफी और बनायी जिसे मेरी पत्नी नें ले लिया पर तीसरी कॉफी का पैसा नहीं लिया। वह मुस्कुरा कर बोली,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह मेरी तरफ से आपको भेंट है।&#8217;</p></blockquote>
<p>उस लड़की ने अपना नाम यंतोरा बताया। वह मुस्कुरा रही थी और उसकी बातचीत करने का ढंग बहुत प्यारा था।</p>
<p>रास्ते में जो भी कस्बे मिलते थे उनके नाम के अन्त में बाद डॉर्प (Dorp) लिखा हुआ था। जेम्स ने बताया कि यह डच भाषा का शब्द है जिसका अर्थ कस्बा होता है इसलिए यह कस्बे के नाम के बाद लिखा है।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/maize-storage-place-south-africa.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/maize-storage-place-south-africa.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>रास्ते में, मक्का रखने के बड़े बड़े स्टोर मिले जिसमें मक्का बीच से डाला जाता है।</div>
<p>हमें रास्ते में, यूक्लीपिटिस, चीड़, केले,  काजू , संतरे, और आम के बगीचे मिलें। जेम्स ने बताया कि यूक्लीपिटिस का प्रयोग मकान  में फर्नीचर  और  पेपर बनाने  में होता है। केलों को प्लास्टिक से ढ़क कर रखा था। यह इसलिए किया जाता है कि उन्हें बंदर न खा सके और उनमें कीड़े न लगें।</p>
<p>रास्ता व उसके अगल बगल की जगह बेहद साफ सुथरी थी। जेम्स ने बताया कि म्यूनिसपल्टी इसको साफ करने के लिए टेंण्डर बुलाती है और वे लोग साफ रखतें हैं। रास्ते में हमनें गाड़ी में</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><img title="Umbhaba-lodge-south-africa" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/umbhaba-lodge-south-africa.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" /><p class="wp-caption-text">उंभाबा होटल जहां हम हेज़ी व्यूह में ठहरे थे</p></div>
<p>पेट्रोल भरवाया। पेट्रोल पम्प पर लिखा था, यहाँ मोबाइल फोन पर बात करना मना है। मैंने पेट्रोल मालिक से पूछा हमारे भारत में ऎसा नहीं होता है। यहाँ पर ऎसा क्यों लिखा है? उसका जवाब था,</p>
<blockquote><p>&#8216;मोबाइल फोन चार्ज करते समय या बात करते समय वे अक्सर फट जाते हैं । यदि पेट्रोल पम्प पर बात करते समय फट जाये तो अर्नथ हो सकता है। इसलिए यहाँ पर मोबाइल पर बात करना मना है।&#8217;</p></blockquote>
<p>हम लोग रास्ते का आनन्द लेते हुए १२ बजे तक हेज़ीव्यूह ( Hazyview) पहुंच गये। यहीं उम्भाबा लॉज़ (Umbhaba Lodge) में  हमें दो रातें गुजारनी थी।  हम लोगों ने, यहां पर अपना समान रखा और क्रुगर पार्क के लिए चल दिए क्योंकि  दोपहर को एक सफारी में जाना था।</p>
<h3 style="text-align:center;">क्रुगर पार्क की सफाई देख कर, अपने देश की व्यवस्था पर शर्म आती है</h3>
<p>क्रुगर राष्ट्रीय पार्क (<a title="National park" href="http://en.wikipedia.org/wiki/National_park" rel="wikipedia">Kruger national park</a>) पार्क साउथ अफ्रीका में जानवरों को सुरक्षित रखने की जगह है। यह लगभग १८,९८९ वर्ग किलोमीटर (७३३२ वर्ग मील) में फैला है और उत्तर दक्षिण ३५० किलोमीटर (२१७) मील और पूरब पश्चिम ६० किलोमीटर (३७मील) है। इस पार्क के चारो तरफ तार लगे है जिसमें हल्की सी बिजली दौड़ती रहती है। यह इसलिए की जानवर बाहर न जा सके।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><img title="Paul Kruger Vanity fair cartoon" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/8/8e/Paul_kruger00a.jpg/200px-Paul_kruger00a.jpg" alt="" width="200" height="328" /><p class="wp-caption-text">पॉल क्रुगर का वैनिटी फेयर से कार्टून - विकिपीडिया से</p></div>
<p>पॉल क्रुगर (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Paul_Kruger">Paul Kruger</a>) ट्रांसवाल गणराज्य (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Transvaal_Republic">Transvaal Republic</a>) के राष्ट्रपति थे। उन्होंने,  १८९८ में,  इस पार्क की स्थापना घटते हुऐ जानवरों की संख्या और शिकार को रोकने के लिय की।</p>
<p>क्रुगर नेशनल पार्क की सबसे अच्छी बात, वहां की सफाई है।</p>
<p>क्रुगर पार्क में, हम लोगों ने दो दिन में, लगभग १४ घण्टें, वहां पर व्यतीत किये। एक बार दिन में २ बजे से लेकर ८ बजे रात्रि तक और अगले दिन सुबह ६ बजे से २ बजे तक। वहां पर एक भी कागज, शीशे की बोतल, प्लास्टिक, या रैपर नहीं दिखायी पड़ा। हमें हिन्दुस्तान के लगभग सारे राष्ट्रीय पार्क जाने का अवसर मिला है। वहां पर रैपर और प्लास्टिक की भरमार ही दिखायी देती है।</p>
<p>पार्क में दूसरी अच्छी बात यह थी कि उस पार्क में दो ऎसी जगह हैं जहां पर आप नाश्ता या खाना खा सकतें हैं और बाथरूम जा सकते हैं। पूरी जगह की सफाई देखने लायक थी। इसे देख कर मुझे अपने देश की व्यवस्था के बारे में शर्म आयी।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/windmillkrugerpark.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/windmillkrugerpark.jpg?w=225" alt="" border="0" /></a><br />
इस पार्क में मुझे एक बात और बहुत अच्छी लगी। इसमें जगह जगह सोलर पैनल (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Solar_panel">Solar panel</a>) और हवा की चक्की (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Wind_mill">Wind mill</a>) लगी थी । मैंने वहां इसका कारण पूछा तो हमें बताया गया,</p>
<blockquote><p>&#8216;एक बार यहां पानी की कमी के कारण जानवर मरने लगे तब सरकार ने इन्हें लगाया। इससे बिजली पैदा कर पम्प चलाये जाते हैं जो जमीन से पानी निकाल कर पोखरों में जानवरों के लिये डालते हैं। जंगल के अन्दर बिजली के तार इसलिये नहीं लगे हैं कि उससे आग लगने का खतरा होता है। इनमें यह खतरा नहीं है।&#8217;</p></blockquote>
<div style="text-align:center;"><em>यह वीडियो, वर्ष २००४ में कुगर पार्क में पानी के पोखरे के पास भेंसे, शेर और मगरमच्छ के बीच, शौकिया लोगों के द्वारा खींचा गया है। यह बहुत ही रोचक है और शायद जानवरों के बारे में सबसे ज्यादा देखा गया विडियो है।</em></div>
<div style="text-align:center;"><span style="text-align:center; display: block;"><a href="http://unmukth.wordpress.com/2011/08/21/south-africa-kruger-park/"><img src="http://img.youtube.com/vi/LU8DDYz68kM/2.jpg" alt="" /></a></span></div>
<div>
<p>मुन्ने को जानवर पसन्द थे। इसलिये साल में एक बार हम लोग जंगलों में जाया करते थे पर यह जंगल, भारत के जंगलों से एकदम अलग है। भारत में जंगल बहुत घने होते हैं जब कि यह जंगल घना नहीं है। और इसमें झाड़िया हैं और जहाँ तक आपकी नजर जाती है वहां तक सब देख सकतें है। इसी कारण यहां पर ज्यादा जानवर दिखाई पड़ते हैं। हम लोगों ने इस पार्क में जितने भी जानवर देखे उतने जानवर भारत के सारे जंगलो में मिलकर नहीं देखे थे। क्रुगर पार्क में प्रति व्यक्ति को प्रति दिन में १३२ रैंड फीस देनी पड़ती है। उसको देने के बाद, हम लोग पार्क के अन्दर गये। जहां, हमारे जंगल में गाइड, रॉड्रिक्स, हमारा इन्तजार कर रहे थे।</p>
<h3 style="text-align:center;">हम दोनो व्यापार कर बहुत पैसा कमा सकते हैं</h3>
<p>रॉड्रिक्स, एक प्राइवेट गाइड है और जिस कम्पनी के साथ हमने पैकेज़ लिया था वे उसी के साथ काम करते हैं।</p>
<div style="border-bottom:7px solid #5c8a64;border-top:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">साउथ अफ्रीका में ५०% शादियां टूट रहीं हैं।</div>
<p>दो दिन हम रॉड्रिक्स के साथ रहे। इस बीच मेरी इससे काफी मित्रता हो गयी। उसने हमें काफी कुछ अपने बारे में बताया। उसने बताया कि वह एकल पिता है और उसके दो बच्चे हैं जिनमें एक १५ साल का और दूसरा ११ साल का है। वे उन्हीं के साथ रहते हैं। पत्नी, उनसे अलग,  जॉहान्सबर्ग मे रहती है।  शायद, उन दोनो के बीच में तालाक हो गया है। मैंने इस बारे में और विस्तार से कुछ बात करना उचित  नहीं समझा। रॉड्रिक्स के मुताबिक साउथ अफ्रीका में ५०% शादियां टूट रहीं हैं। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/raudriksguidekrugerparksa.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/raudriksguidekrugerparksa.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></p>
<p>रॉड्रिक्स, अपने बच्चो के बारे में चिन्तित थे कि कहीं उनमें खराब आदत न पड़ जाए। इसी लिये वे उनके सामने शराब नहीं पीते हैं। उनके घर में  केवल कोल्ड ड्रिंक्स रहती हैं जिसे वे लेते हैं।</p>
<p>रॉड्रिक्स कुछ आगे बढ़ने वाले  व्यक्ति लगे क्योंकि उन्होनें कुछ देर बात चीत के बाद कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप मुझे बहुत अच्छे लगे यदि आप मेरे साथ आ जाएं तो  हम व्यापार कर बहुत पैसा कमा सकते हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>वे चाहते थे कि मैं उनके व्यापार में हाथ बंटाऊंं  या उन्हें ऎसे लोगों से मिला सकूं, जो उनके व्यापार में हाथ बंटा सके। मेरे लिए, यह मुश्किल काम है। मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मुझे व्यापार करना नहीं आता है और मैं व्यापार नहीं कर पाऊंगा। यदि आप व्यापार करने को सोचते है तो आपको पर्यटन के लिए काम करना चाहिए। इसके लिए इण्टरनेट का प्रयोग करना अच्छा है। व्यापार के लिए आवश्यक है कि वह सुव्यस्थित हो और इसके लिए अलग से व्यवस्था करनी होगी।&#8217;</p></blockquote>
<p>रॉड्रिक्स के पास ट्योटा वैन थी जिसमें कुछ बदलाव कर दिये गये थे। इसमें बैठने के लिये सीटें तीन पक्तियों में थी। यह एक  खुली गाड़ी थी जो कि ऊपर से ढ़की थी। हमने इसी पर दोपहर की सफारी ली।</p>
<h3 style="text-align:center;">फैंटम, टार्ज़न जैसे चरित्य का जन्म &#8211; किंग सॉलमन माइनस् पुस्तक से</h3>
<p>क्रुगर पार्क में दोपहर की सफारी के समय, हमारे साथ न्यूजीलैड से आए हुए एक दम्पत्ति, उनकी पुत्री व ब्रिट्रानी दम्पत्ति थे ।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/deer-zebra.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/deer-zebra.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a></p>
<p>भारत के जंगल के पार्क में सबसे ज्यादा चीतल दिखाई पड़ते है और यहां पर सबसे ज्यादा इम्पाला है। यह हिरण जाति का एक जानवर है। हम लोग हिरण जाति के लगभग सभी जानवरों को देखा। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/hippopotamus.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/hippopotamus.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a></p>
<p>हिरणों के अतिरिक्त, हमने ज़ेबरा (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Zebra">Zebra</a>), हिप्पोपोटामस (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Hippopotamus">Hippopotamus</a>), जंगली सुअर (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Wild_boar">Wild Boar</a>), ज़िराफ (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Giraffe">Giraffe</a>), बबून बंदर (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Baboon">Baboon</a>), नीला वाइल्डबीस्ट (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Blue_Wildebeest">Blue Wildebeest</a>),   हाथी (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Elephant">Elephant</a>),    गेंडें (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Rhinoceros">Rhinoceros</a>), जंगली भैसों (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/African_buffalo">African Buffalo</a>), (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Spotted_hyena">Spotted Hyena</a>) के झुण्डों को देखा।</p>
<p>यहां पर हमनें तरह-तरह की चिड़ियों (लगभग ४०-५० तरह की) को भी देखा। चिड़ियाएं तेजी से उड़ती थी कि हम लोगों ने उनका चित्र  नहीं खींच पाए।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/wildboar.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/wildboar.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a><br />
रॉडिक्स के पास जानवरों की एक बहुत अच्छी गाइड पुस्तक थी। जब हम किसी जानवर के बारें मे पूछते  थे तो रॉडिक्स हमें उसी से दिखाते थे ताकि हम उसे ठीक प्रकार से जान सकें।</p>
<p>जंगल में घूमते समय मैने रॉड्रिक्स से पूछा कि क्या यहाँ पर टार्जन और फैन्टम के चरित्र लोकप्रिय हैं? उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैंने न तो, यह नाम, कभी सुने हैं न ही वे लोकप्रिय हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/giraffe.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/giraffe.jpg?w=150&#038;h=200" alt="" width="150" height="200" border="0" /></a>मुझे आश्चर्य हुआ। जो चरित्र अफ्रीका के जंगलो पर आधारित है वे अफ्रीका में ही नहीं जाने जाते हैं। मुझे इस पर भी आश्चर्य हुआ कि इनके बारे में न्यूजीलैंड और इग्लैंड से आये दम्पत्ति को भी कुछ नहीं मालूम था हांलाकि उन्होंने <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/07/stories-based-on-eclipse.html">किंग सॉलमन माइनस्</a> का नाम सुना था पर पढ़ी नहीं थी।</p>
<p>किंग सॉलमन माइनस्  अंग्रेजी साहित्य की उच्च कोटि की पुस्तक मानी जाती है और इसी ने लोगों के मन में अफ्रीका के जंगलो के बारे में उत्सुक्ता जताई और टार्जन एवं फैन्टम  जैसे चरित्र का जन्म हुआ।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/baboon.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/baboon.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a></p>
<p>रॉड्रिक्स  ने  शाम को हमें पार्क में  छोड़ दिया। पार्क के आफिस से हमें शाम की सफारी लेनी थी और यह सफारी केवल पार्क के लोग ही करा सकते थे। न्यूजीलैंड से  आये दम्पत्ति  यह सफारी नहीं ले सकें क्योंकि यह उन्हें पिछली रात लेनी थी पर वे इसे नहीं ले पाये थे।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/bluewildebeestkrugerparksarasmus.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/bluewildebeestkrugerparksarasmus.jpg?w=200&#038;h=134" alt="" width="200" height="134" border="0" /></a></p>
<p>इस सफारी में हमारें साथ कुछ और लोग (तीन लड़के व एक लड़की) भी थे। मेरे विचार से  अमेरिकन लग रहे थे। वे बात-चीत से घमण्ड़ी लगते थे। यह अमेरिकनों की खास पहचान है वे दुनिया के सबसे बड़े दादा है। वे जो करते हैं वह ही ठीक- अपने आगे दूसरों को कम समझते है। अब समय बदल रहा है शायद वह कुछ सीखें और बर्ताव में परिवर्तन करें। नम्रता, दूसरों को समझना, सबसे बड़ा गुण है यही कारण है कि हमारी सभ्यता इतनी पुरानी होते हुए  आज भी जीवित है पर अन्य पुरानी सभ्यतायें समाप्त हो गयी।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/elephant.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/elephant.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a></p>
<p>लौटते समय हम लोगों की गाड़ी के साथ दो अलग-अलग समय खरगोश आगे आ गये और आगे आगे चलते रहे। जब गाडी तेज हो तो वे तेजी से दौड़ कर सड़क पार करते थे मानों वे हमें  रोकना चाहते हैं। हमारे गाईड ने बताया कि इन्हे रोशनी पसंद है और ये रोशनी से खेलना चाहते है। हम लोगों ने जब अपनी गाड़ी की लाइट बंद कर दी तो वे वापस जंगल में चले गये।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/africanbuffalokrugerparksarasmus.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/africanbuffalokrugerparksarasmus.jpg?w=200&#038;h=134" alt="" width="200" height="134" border="0" /></a></div>
<p>हमारी शाम की सफारी,  रात के लगभग ८ बजे खत्म हुई और हम लोग वापस अपनी लॉज में आ गये।</p>
<h3 style="text-align:center;">हिन्दुस्तानी, बिल्लियों से क्यों डरते हैं</h3>
<p style="text-align:right;"><img class="alignright" title="umbhaba lodge room inside" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/umbhaba-lodge-room-inside.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" /><em>उम्भाबा लॉज़ में हमारे कमरे का दृश्य</em></p>
<p style="text-align:left;"><em></em>इस ट्रिप में सुबह का नाश्ता और रात का खाना मुफ्त था। दोपहर के खाने के समय हम घूमते रहते थे। इसलिये घूमने की जगह ही खाने की बात थी। नाश्ते में हमेशा फलों का रस रहता था पर रात के खाने में न तो रस रहता था न ही पानी।  वे लोग चाहते हैं  कि रात के  खाने के समय लोग शराब या वाइन लें। साउथ अफ्रीका के प्रत्येक रेस्ट्रां में बार रहता था।  उम्भाबा लॉज में भी था। उसे एक महिला देख रही थी। वह उसकी साक़ियः थी। रात के भोजन के समय, वह महिला हमारी टेबल पर आयी और पूछा,</p>
<div>
<blockquote>
<div>&#8216;क्या कोई  ड्रिंक लेना पसन्द करेगें?&#8217;</div>
</blockquote>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/umbhaba-lodge-room-view.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/umbhaba-lodge-room-view.jpg?w=320&#038;h=240" alt="" width="320" height="240" border="0" /></a><em>उम्भाबा लॉज़ में हमारे कमरे की बालकनी से बाहर का दृश्य</em></p>
</div>
<p>हमने बताया कि हम शराब नहीं पीते हैं पर क्या वह हमारे लिये मॉकटेल (Mocktail) बना सकती है। भारत में यह शब्द प्रचलित है पर लगता है कि वहां नहीं है। उस महिला ने यह शब्द कभी नहीं सुना था। उसने पूछा यह क्या होता है मैंने उसे बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;कॉकटेल में  शराब डालते हैं। मॉकटेल में शराब की जगह जूस डालते हैं और इसे सोडा के साथ बनाया जाता हैं। चूंकि इसमें शराब नहीं होती है इसलिये इसे मॉकटेल कहते है। भारत में पार्टियों में यह अक्सर ली जाती है। अगली बार जब कोई भारतीय उनके लॉज़ में रुके और शराब न पीना चाहे तो  वह उनसे यह पीने के लिये पूछ सकती है।&#8217;</p></blockquote>
<p><img class="alignright" title="umbhaba lodge cat" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/umbhaba-lodge-cat.jpg?w=150&#038;h=200" alt="" width="150" height="200" />वह महिला मेरे लिये एक मॉकटेल बना कर लायी। यह उसने पहली बार किया था। इसलिये यह उतनी अच्छी नहीं बनी थी जैसा कि भारत में दावतों या रेस्ट्रां में पीने को मिल जाती है।</p>
<p>उम्भाबा लॉज़ में एक  काली और सफेद रंग की बिल्ली  थी। मैं उसको कुछ खिला रहा था तो उस महिला ने मुझसे पूछा,</p>
<div>
<blockquote><p>&#8216;क्या आपको डर नही लगता है। क्योंकि  भारतीय लोग  बिल्ली से डरते है। जब भी वे हमारे लॉज़  में ठहरते है तो हमें बिल्ली को बंद करके रखना होता है।&#8217;</p></blockquote>
</div>
<p>मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैने हमेशा <a href="http://munnekimaa.blogspot.com/2006/11/blog-post_28.html">जानवर पाले हैं</a>। हमारे यहां तरह तरह के जानवर रहे हैं इसलिए मैं बिल्ली से नहीं डरता। हालांकि बिल्ली से थोड़ा घबराता हूं क्योंकि मैंने कभी भी बिल्ली नहीं पाली है। यदि साउथ अफ्रीका में बिल्ली ने काट लिया तो मै क्या करूंगा।  भारत में बिल्ली नहीं पाली जाती है पर कुत्ते पाले जाते हैं इसलिए भारतीय लोग बिल्ली से घबराते हैं पर कुत्तों से नहीं।&#8217;</p></blockquote>
<p>महिला ने  कहा कि यह बिल्ली पालतू है और तंग नहीं करती है। उसने मुझसे यह भी बताया कि,</p>
<blockquote><p>&#8216;बिल्ली  पालन बहुत आसान है इनकी सफाई नहीं करनी पड़ती है और बिल्ली को खाना देने की जररूत नहीं है वह अपना खाना खुद ढूंढ लेती है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैं अपने मित्रों के लिये वाइन लेना चाहता था। मैंने उससे वहां की अच्छी वाइन के बारे में पूछा। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप लॉज़ से वाइन मत लीजिये यह महंगी पड़ेगी। आप बाज़ार से १९९६ में बनी कोई भी वाइन ले लीजिये क्योंकि उस साल अंगूर की फसल सबसे अच्छी हुई थी और उस साल की बनी वाइन सबसे बेहतरीन है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने, वाइन, हवाई अड्डे से ली पर १९९६ की बनी वाइन नहीं मिल पायी।</p>
<p>हम लोग न केवल थके थे पर जोर की भूख भी लग रही थी। खाना खा कर जल्दी सोने चले गये। हमें अगले दिन क्रुगर पार्क में, सुबह की सफारी लेनी थी।</p>
<h3 style="text-align:center;">आपको तो शर्म नहीं आनी चाहिये</h3>
<div>
<p>क्रुगर पार्क में, हमने सुबह की भी सफारी ली। सुबह की सफारी में हमारे साथ वही न्यूजीलैंड के दम्पत्ति उनकी पुत्री और ब्रिटानी दम्पत्ति थे। न्यूजीलैंडर पिछले दिन भी और इस समय भी गाडी के सबसे पीछे वाली सीट पर बैठे। पीछे की सीट ऊंची होती है शायद वहां से सबसे अच्छा दिखाई पड़ता हो इसीलिए वे सबसे पीछे की सीट पर बैठना पसन्द करते थे। ब्रिटिश दम्पत्ति कुछ देर से आये इसलिए बीच वाली सीट पर हम लोग बैठ गये। हम लोग पिछले दिन भी साथ थे, वे हमारे ही लॉज़ में ठहरे थे &#8211; हमारी उन सब से अच्छी मित्रता हो गयी।</p>
</div>
<div style="border-bottom:7px solid #5c8a64;border-top:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">सार्वजनिक जगहों पर, भारतीय प्रेम या स्पर्श करने में हिचकते हैं।</div>
<p>सुबह सफारी में ठंडक होती है। हमें हिदायत दी गयी थी कि हम ठीक प्रकार से कपड़ें पहनें। हमने कपड़े भी पहने पर इसके बावजूद भी हमें ठंडक लगने लगी। न्यूजीलैंड और ब्रिटेन से आये दम्पत्ति में, पत्नी या तो पति की गोद में बैठ जाती या फिर वे एक दूसरे को आलिंगन में ले लेते ताकि वे एक दूसरे को गर्मी पहुंचा सकें पर <a href="http://munnekimaa.blogspot.com/">शुभा</a> &#8211; वह तो एक भारतीय की तरह छटक कर सीट के दूसरे कोने पर जा बैठी। उनकी तरह से बैठने पर, उसे और मुझे दोनो को शर्म आ रही थी &#8211; मैं उन्मुक्त होकर भी मुक्त नहीं, अपने बन्धनो में जकड़ा हूं। इस तरह का बर्ताव, विदेशियों से एकदम अलग है। हम लोग, सार्वजनिक जगहों में प्रेम या स्पर्श करने में हिचकते हैं।</p>
<p>हम से, न्यूजीलैंड से आये दम्पत्ति ने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप लोग भी पास पास क्यों नहीं बैठते। भारत में तो खजुराहो (<a title="Khajuraho" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Khajuraho" rel="wikipedia">Khajuraho</a>), कोर्णाक (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Konark_Sun_Temple">kornak sun temple</a>) जैसे मन्दिर हैं और कामसूत्र (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kama_Sutra">kam sutra</a>) जैसी पुस्तक लिखी गयी है फिर इस तरह का व्यवहार क्यों कर रहें हैं। आपको तो शर्म नहीं आनी चाहिये। मुझे यह कुछ अजीब सा लगता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मेरे पास इसका कोई उत्तर नहीं था। मैंने उनसे कहा कि मुझे नहीं मालुम। लेकिन मुझे भी यह अजीब लगता है।</p>
<p>रॉड्रिक्स के पास कम्बल थे। हमने उसे ओढ़ लिया। तब ही ठंड से पीछा छूटा।</p>
<p>सुबह चलते समय कुछ बूंदा बांदी हो रही थी। हम लोगों को लगा कि शायद आज का दिन तो बेकार जायेगा और कोई जानवर नही दिखेगें। लेकिन यह सच नही हुआ। वहां पहुंचने के बाद मौसम साफ हो गया, हांलाकि कुछ ठंड थी। हम लोग तरह तरह के जानवर देख पाये। वे धूप लेने के लिए निकले थे। हमें गैंडे भी दिखायी पड़े।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/krugerparksarhinocerosrasmus.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/krugerparksarhinocerosrasmus.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></p>
<div style="text-align:right;"><em>यह चित्र मेरा लिया हुआ नहीं है। इसे रासमस नामक जर्मन लड़के ने खींचा है। इस श्रंखला की अगली कड़ी में, मैंं आपकी मुलाकात, उससे और शेरों से करवाउंगा।  </em></div>
<p>रॉड्रिक्स ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;गैंडे दो प्रकार के होते है एक तो सफेद (<a title="White Rhinoceros" href="http://en.wikipedia.org/wiki/White_Rhinoceros" rel="wikipedia">white rhinoceros</a>) और दूसरा काला (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Black_Rhinoceros">black rhinoceros</a>)।&#8217;</p></blockquote>
<p>मुझें तो दोनों का रंग एक ही सा लगा। मैंने जब यह बात कही तो रॉड्रिक्स ने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;दोनों का रंग एक है पर उन्हें सफेद या काला इसलिए कहा जाता है कि एक गैंडा बड़ा होता है। इसे सफेद कहा जाता है। दूसरी तरह का गैंडा कुछ छोटा होता है जिसे काला कहा जाता है। सफेद गैंडा केवल जमीन की घास खाता है क्योंकि उसकी गर्दन की बनावट इस प्रकार होती है कि वह अपनी गर्दन ऊपर नहीं कर सकता है और काला गैंडा छोटा होता है और वह जमीन की घास और ऊपर की पत्ती भी खा लेता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मेरे यह पूछनें पर कि क्या वे एक ही योनि के है रॉड्रिक्स इसका ठीक से जवाब नही दे पाये। मैंने पूछा कि क्या इन दोनो के सम्भोग से कोई बच्चा पैदा हो सकता है। उसने कहा कि नहीं। मैंने कहा कि तब वे अलग अलग योनि के हैं अन्यथा बच्चा पैदा हो सकते है।</p>
<p>सच यह है कि गैंडे (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Rhinoceros">rhinoceros</a>) की पांच तरह की प्रजातियां पायी जाती हैं। इसमें से तीन एशिया में और दो अफ्रीका में पायीं जाती हैं। इन्हीं दो के बारे में रॉड्रिक्स हमें बता रहे थे।</p>
<p>पेड़ों पर बहुत बड़े घोंसले बने हुए थे। मेरे पूछने पर कि ये किसके घोंसलें है तो उसने कहा कि इनमे चील, बाज और गिद्व रहते है । मैने इन पंक्षियों को भी वहाँ देखा। यह सफारी ८ बजे समाप्त हो गयी। हम लोग वहीं पर नाश्ता करने के लिये रुक गये पर न्यूजीलैंड और अंग्रेज दम्पत्ति ने वहाँ हमसे विदा ली।</p>
<h3 style="text-align:center;">लगता है, आप मुझे जेल भिजवाना चाहती हैं</h3>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/krugerparksaplateau.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/krugerparksaplateau.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a>हम लोग नाश्ता कर पुन: सफारी पर निकल गये, यह सफारी सबसे अच्छी रही क्योंकि सबसे ज्यादा जानवर देख सके। इस सफारी में हम लोग एक पहाडी पर गये थे। ऊपर पहाड़ी पर समतल जगह थी। यह जगह बहुत सुन्दर थी। मेरा मन था कि यहां पर ज्यादा समय गुजारा जाए। लेकिन कुछ देर बाद रॉड्रिक्स ने हमें वहाँ से तुरन्त चलने के लिए कहा। मेरे पूछने पर उसने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;खबर मिली है कि शेर दिखें हैं और हमें वहीं चलना है।&#8217;</p></blockquote>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/lionkrugerparksarasmus.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/lionkrugerparksarasmus.jpg?w=282&#038;h=188" alt="" width="282" height="188" border="0" /></a>रॉड्रिक्स बहुत तेजी से गाड़ी चलाते हुए हमें उस जगह पर ले गये जहाँ पर शेर थे। वहां पर एक शेर ,शेरनी और उसके बच्चे थे। यह रास्ते से थोड़ी दूर पर थे। रॉड्रिक्स के मुताबिक,</div>
<blockquote><p>&#8216;वहां कई शेर, और शेरनियां हैं। लेकिन वे कुछ नीचे की जगह पर है इसलिए हम उनको नहीं देख पा रहे हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>शेरनी हम लोगों को थोड़ी देर तक तो देखती देती रही फिर उसके बाद वह आराम से सो गयी जैसे की उसे मालूम हो कि हम लोग उनका कुछ नही बिगाड़ेगें। धीरे धीरे यह खबर हर तरफ फैल गयी और हर तरफ से लोग गाडी लेकर उनको देखने आने लगे। हम लोगों ने आधा घण्टा उन्हीं को देखने में बिताया।</p>
<p>मेरे पास सोनी का कैमरा है। यह चित्रों को १२ गुना बड़ा कर खींच सकती है पर इसमें शेर और शेरनी के चित्र बड़े नहीं आ रहे थे। बगल की गाड़ी में कुछ जर्मन लोग थे। उनमें से एक लड़के के पास बहुत अच्छा कैमरा था। उस लड़के का नाम ग्रेनर रासमस (Greiner Rasmus) था और उसके पास कैनन (cannon ex 400 D) का कैमरा था। मैंने उससे कहा कि क्या वह कुछ चित्र मुझे भेज सकता हैं। उसने कहा जरूर। उसने मेरे पास कई चित्र भेजें हैं। जिसमें से कुछ, पिछली चिट्ठियों पर और कुछ इस चिट्ठी में हैं।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/r-greiner.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/r-greiner.jpg?w=242" alt="" border="0" /></a>रासमस (Rasmus) २५ वर्षीय नौजवान है। उसने मीडिया, इतिहास और साहित्य में मार्गबुर्ग (<a href="http://abcnews.go.com/International/wireStory?id=6430777">Marburg</a>) में उच्च शिक्षा प्राप्त की और दर्शन में डाक्टेरेट ली है।</p>
<blockquote><p>Gutentag Rasums,<br />
It was pleasure to meet you at Kruger&#8217;s Park. Thank you for photographs. They are beautiful and pettier that the ones that I took. Next year I do plan to visit to <a title="Rainforest" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Rainforest" rel="wikipedia">rain forests</a> in <a title="Brazil" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Brazil" rel="wikipedia">Brazil</a>. I hope you will also be able make it. We can plan to be there together.<br />
Greetings to you from <a title="India" href="http://en.wikipedia.org/wiki/India" rel="wikipedia">India</a>.<br />
Unmukt</p></blockquote>
<p>हम लोग दोपहर तक वापस आये, दिन का खाना खाया। वहां पर एक दुकान भी थी जिसमें यादगार के लिए वस्तुएं मिल रहीं थी। मैंने वहां से कुछ वस्तुऐं अपने तथा मित्रों के लिये खरीदीं। काउंटर पर एक प्यारी सी युवती बैठी थी। उसने मुस्कुराते हुऐ कहा कि,<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/springbokskin.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/springbokskin.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></p>
<blockquote><p>&#8216;आप जानवरों की खाल और शुतुरमुर्ग के रंगे हुऐ अन्डे क्यों नहीं खरीदते। यहां से लोग यह दोनो वस्तुऐं जरूर ले जाते हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैं अपने घर में, हमेशा जानवरों की खाल रखना चाहता था पर यहां जानवरो की खाल रखना गैरकानूनी है। इसलिये कभी रखने की हिम्मत नहीं की। मैंने उस युवती से कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;भारत में जानवरों की खाल रखना गैरकानूनी है। लगता है, आप मुझे जेल भिजवाना चाहती हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/springbokskincertificate.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/springbokskincertificate.jpg?w=218" alt="" border="0" /></a>उसने मुझे समझाया,</p>
<blockquote><p>&#8216;यदि आप यह खाल हमसे खरीदेगें तो हम आपको एक सार्टीफिकेट देगें कि आपने इसे यहाँ से खरीदा है। इस पर भारत में, आपको कुछ नही होना चाहिये क्योंकि हमारे देश में, खाल बेचना गैरकानूनी नहीं है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मेरा मित्र <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/04/blog-post_21.html">इकबाल</a> वकील है। मैंने उससे फोन कर यह बात पूछी। उसने स्पष्ट किया,</p>
<blockquote><p>&#8216;यदि वह लोग सर्टिफिकेट देते हैं तो कोई बात नहीं। तुम इसे खरीद सकते हो। यहां आकर इसे वन विभाग में रजिस्टर करवाना होगा।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैं शेर, चीता या तेंदुवे की खाल खरीदना चाहता था पर यह वहाँ नही मिल रही थी हालांकि कई अन्य जानवरों की खाल मिल रहीं थी। मैंने एक छोटी खाल जो स्प्रिंग बॉक (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Springbok_(antelope)">Springbok</a>) नामक हिरण जाति का होता है उसकी खाल खरीदी।<br />
<em></em></p>
<p style="text-align:right;"><em>आपको विश्वास नहीं &#8211; आप इसका सार्टीफिकेट देख लीजिये अब तो विश्वास हुआ कि नहीं।</em></p>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 210px"><a href="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/6/65/Springbok_etosha.jpg/250px-Springbok_etosha.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/6/65/Springbok_etosha.jpg/250px-Springbok_etosha.jpg" alt="" width="200" height="148" border="0" /></a><p class="wp-caption-text">स्प्रिंगबॉक हिरण का यह चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से</p></div>
<p style="text-align:left;">भारत वापस आ कर, मैंने वन विभाग को पत्र लिखकर इस खाल को रजिस्टर करने की प्रार्थना की। लेकिन उन्होंने यह कह कर मना कर दिया कि यह प्रतिबंधित खालों में नहीं है। शायद स्प्रिंग बॉक जाति का हिरण अपने देश में नहीं पाया जाता है।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/spottedheynakrugerparksarasmus.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/spottedheynakrugerparksarasmus.jpg?w=200&#038;h=134" alt="" width="200" height="134" border="0" /></a>हम लोग वापस होटल के लिए चले। रास्ते में लकडबग्गे (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Spotted_Hyena">spotted hyena</a>) के बच्चे मिले और वे बहुत देर तक रोड़ पर बैठे रहे।  हम लोगों नें अपनी गाडी को कच्चें में उतारकर जाना पडा क्योंकि वह रोड से हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे। जगंल में, जानवरों को अधिकार है। यदि वे रोड़ पर हैं तो आप गाडी उनके आगे नहीं ले जा सकते हैं।</p>
<p>हमें अगले दिन पिलीग्रीम्स रेस्ट (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Pilgrim's_Rest">Pilgrim&#8217;s Rest</a>) जाना था। हम लोगों ने, क्रुगर पार्क में चार सफारी लीं और पार्क में लगभग १४ घन्टे गाड़ी में घूमते हुऐ बिताये। यह अपने आप में थकाने वाला अनुभव था। बाकी समय, हम लोगों ने आराम करने में बिताये।</p>
<h3 style="text-align:center;">ऐसा करोगे तो, मैं बात करना छोड़ दूंगी</h3>
<p>पिलीग्रीम्स रेस्ट ( <a title="Pilgrim's Rest" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Pilgrim's_Rest" rel="wikipedia">Pilgrim&#8217;s Rest</a>) जाने के लिये, हमें सुबह केविल लेने आये। हम लोग लगभग ९ बजे, सुबह पिलीग्रीम्स रेस्ट के लिए चल दिए। रास्ते में हम लोगों को तीन जगहें देखनी थी। सबसे पहले हम लोग ग्रास कॉप गॉर्ज (<a title="Graskop" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Graskop" rel="wikipedia">Graskop</a> gorge) देखने गये। यह गहरी सी घाटी है। जिसमें एक तरफ झरना गिरता रहता है। सुबह के समय हर तरफ धुंध ही धुंध थी इसलिए कुछ अच्छी तरह दिखाई नही दे रहा था।</p>
<p style="text-align:left;">यहां पर, आप चाहें तो घाटी में, एक तरफ से दूसरी तरफ १३५ मीटर तार पर झूल कर जा सकतें हैं या फिर बीचो बीच में आप रस्सी में बांधकर नीचे तक (६८ मीटर), ३ सेकेन्ड में जा सकते हैं। मैंने कहा कि मैं इनमे से कुछ करना पसन्द करूंगा। इस पर मुन्ने की मां, मुझसे, गुस्सा हो गयी। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यदि तुम दोनों में से भी कुछ करोगे तो मैं तुमसे बात करना छोड़ दूंगी।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">हम लोग दूसरी तरफ गये जहाँ से यह हो सकता था। वह रास्ते भर जिद करती रही कि मुझे कुछ नहीं करना है । दूसरी तरफ एक जर्मन दम्पत्ति और उनके बच्चे थे जो कि दोनो कारनामे कर रहे थे। उस वक्त कुछ धुन्ध सी थी। इसलिए मुझे लगा कि बीचो बीच से नीचे जाना ठीक न होगा पर रस्सी में लटक कर, दूसरी तरफ तो जाया जा सकता हूँ। मैंने कैमरा मुन्ने की मां को दे दिया और उससे चित्र खींचने को कहा। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;तुम जो करने जा रहे हो। उसे तो मैं देख भी नहीं सकती हूं चित्र लेने का तो सवाल ही नहीं है।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">यह कह कर उसने अपना मुंह दूसरे तरफ कर लिया। मुझे <a href="http://unmukth.wordpress.com/2011/08/21/2008/10/19/goa-india/">गोवा यात्रा</a> की याद आयी जब मैंने <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/04/para-sailing.html">पैरासेलिंग करने की बात की थी</a>। मैंने जर्मन दम्पत्ति से चित्र लेने की प्रार्थना की।</p>
<p>शुरू में तार लटक कर एक तरफ से दूसरी तरफ जाने में डर लगा पर जब मैं बीचो बीच पहुंचा तो सारा डर समाप्त हो गया और मज़ा आने लगा। नीचे पानी था जिसमें झरना गिरता दिखायी दे रहा था। बीच में पहुंचने के बाद मेरे भार से तार कुछ नीचे हो गया था। नीचे कोई धुंध नहीं थी और मैं एक बेहतरीन नज़ारा देख सका। कुछ देर बाद उन्होनें पुन: मुझे वापस खींच लिया।</p>
<blockquote><p>&#8216;उन्मुक्त जी, मुझे तो आपकी बात पर बिलकुल विश्वास नहीं है। आप तो डरपोक हैं। अज्ञात हो कर चिट्टकारी करते हैं, न किसी को फोन नम्बर देते हैं न ही किसी चिट्टाकार मिलन में पहुंचते हैं और न ही किसी से मिलते हैं। आप बहुत सी चिट्ठियों पर टिप्पणियां करना चाहते है पर टिप्पणी नहीं करते। तार में लटक कर घाटी में जाना तो हिम्मत का काम है। यह कार्य आपसे नहीं हो सकता इसलिये कोई चित्र नहीं है इस चिट्ठी में &#8211; हांकना बन्द कीजिये, हमें न बनाईये।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">मेरे भाई, मेरी बहना, यह सच है कि मैं अज्ञात हो कर चिट्ठाकारी करता हूं, किसी से नहीं मिलता हूं। बहुत सारी चिट्ठियों पर चाह कर भी टिप्पणियां नहीं कर पाता हूं। लेकिन मेरी भी मजबूरी है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि मैं डरपोक हूं। मुन्ने की मां के अनुसार शायद &#8211; मैं ज्यादा ही हिम्मती हूं; अपने वास्तविक जीवन में वह करने पहुंच जाता हूं जिसके बारे में लोग सोचते ही नहीं &#8211; इस लिये कई बार अपनी जान न केवल खतरे में डाल चुका हूं। खैर यह उसका सोचना है। लेकिन आप यह चित्र देखें अब तो आपको विश्वास हो गया न कि मैं तार पर लटक कर बीचों बीच गया था।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/graskopgorgesouthafricaunmukt.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/graskopgorgesouthafricaunmukt.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></div>
<div>अब यह मत कह दीजियेगा कि लगता है कि चित्र में कुछ कलाकारी कर दी गयी है <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </div>
<h3 style="text-align:center;">भगवान की दुनिया &#8211; तभी दिखायी देगी जब खिड़की साफ हो</h3>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/lisbonfallssa.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/lisbonfallssa.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>हमें, ग्रास कॉप गॉर्ज (<a title="Graskop" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Graskop" rel="wikipedia">Graskop</a> gorge) देखने के बाद, लिस्बन झरना (<a title="Lisbon Falls, Maine" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Lisbon_Falls,_Maine" rel="wikipedia">Lisbon Falls</a>) देखने जाना था। मुझे लगा कि वहाँ पर भी धुंध रहेगी और कुछ देख नहीं सकेगें लेकिन यह झरना कम ऊंचाई पर है इसलिए वहां पर धुंध बिल्कुल नहीं थी।</p>
<p style="text-align:left;">लिस्बन झरना पर सुन्दर नज़ारा था। वहां पहुंचकर मुझे जबलपुर के धुंवाधार झरने की याद आयी। हालांकि यह झरना जबलपुर के झरने की जितना सुन्दर नहीं हैं पर सफाई के मामले में उससे कहीं बेहतर है।</p>
<p style="text-align:left;">साउथ अफ्रीका में सफाई तारीफे काबिल थी। वे सफाई के मामले में बहुत आगे हैं। क्या हम कभी साफ रह सकेंगे? हम इतने अधिक हैं कि शायद जब तक हम सब न लगें तब तक यह संभव नहीं। शायद इसके बाद भी नहीं &#8211; भारत मां की भी अपनी कमियां हैं वह इतनी बड़ी नही जिसमें हम सब समा सकें।</p>
<p>सफाई न रहने के कारण, बहुत से लोग अपने देश घूमने नहीं आते हैं। मुझे कश्मीर में मिली फिंनलैण्ड की <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/08/helga-katherine-linux.html">हेलगा कैटरीना</a> की याद आयी। उन्होंने मुझसे कहा था,</p>
<blockquote><p>&#8216;मुझे भारत पसन्द है। मैं यहां अक्सर आती हूं पर गन्दगी के कारण मेरे बच्चे भारत आना पसन्द नहीं करते हैं।&#8217; <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/rainforestgod27swindowsa.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/rainforestgod27swindowsa.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></p></blockquote>
<div>
<div>हमारा तीसरा पड़ाव गॉडस् विंडो (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/God's_Window">God&#8217;s Window</a>) नाम की जगह थी। यह एक गहरी घाटी है जिसका नाम ब्लाइड घाटी (Blyde Canyon) है। घाटी में नीचें एक नदी बहती है। यहाँ पर वर्षा वन (Rain Forest) भी है।</div>
</div>
<p style="text-align:left;">हमें बताया गया कि इस घाटी का नज़ारा बहुत ही सुन्दर है पर धुंध के कारण, हम इसे या फिर नदी को देखने से वंचित रह गये। बाद में हम लोगों ने वहां के चित्र देखे और पिक्चर पोस्ट कार्ड खरीदे। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/god27swindow-1.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/god27swindow-1.jpg?w=200&#038;h=145" alt="" width="200" height="145" border="0" /></a> जिसे देख कर लगा कि शायद हम लोग वास्तव में भगवान की दुनिया देखने से वंचित रह गये।<br />
<em></em></p>
<p style="text-align:left;"><em>यह चित्र मेरे द्वारा नहीं खींचा गया है। एक  पिक्चर पोस्ट कार्ड पर था।</em></p>
<div>हम लोग दोपहर तक पिलीग्रीम्स रेस्ट (<a title="Pilgrim's Rest" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Pilgrim's_Rest" rel="wikipedia">Pilgrim&#8217;s Rest</a>) पहुँचे। यह जगह वर्ष १८७३ में प्रसिद्व हो गयी थी क्योंकि यहां पर खोदने पर सोना मिला।</div>
<h3 style="text-align:center;">सर, पिछली रात, आपने जूस का पैसा नहीं दिया</h3>
<p style="text-align:left;">हम लोग दोपहर तक पिलीग्रीम्स रेस्ट (<a title="Pilgrim's Rest" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Pilgrim's_Rest" rel="wikipedia">Pilgrim&#8217;s Rest</a>) पहुँचे। यह जगह वर्ष १८७३ मे प्रसिद्व हो गयी थी क्योंकि यहां पर  खोदने पर सोना मिला। यहाँ पर जगह जगह से लोग सोना खोदने आने लगे। यह साउथ अफ्रीका में सोने की खादानो में, सबसे ज्यादा सोना पैदा करने वाली खदान बना।  यह १९७२ तक चलता रहा। शुरू में, लोग अकेले आकर सोना खोदने  का काम करतें थे लेकिन बाद में १८९६ में, ट्रांसवाल गोल्ड माईनिंग स्टेट  ( Transvaal Gold Mining Estate) नामक   कम्पनी बनी। उनके पास खदानो की जगह और यह कस्बा भी  फ्रीहोल्ड में था। वर्ष १९७१ में इस कम्पनी ने इस कस्बे को सरकार को  वापस  स्थानान्तरित कर दिया। यह पूरा कस्बा   ऎतिहासिक धरोहर घोषित कर दिया गया है। पूरे कस्बे को ही राष्ट्रीय सग्रंहालय बना दिया गया है और इसे देखने के लिए लोग आते हैं। यहाँ पर कई संग्रहालय हैं।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/royalhotelpilgrim27srest.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/royalhotelpilgrim27srest.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a></p>
<p>यहाँ पर हम लोग रॉयल होटल में ठहरे। जब हम वहां  चेक-इन कर रहे थे उस समय बहुत सारे पर्यटक इसकी फोटो खींच रहे थे।  मैंने उनसे पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप इतने चित्र क्यों खींच रहे हैं? क्या आप  यहां ठहरे हुए हैं?</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">उन्होंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;हम यहां नहीं ठहरे हैं पर इसके चित्र इसलिए  ले रहे हैं क्योंकि न केवल यह बहुत सुन्दर है पर इसका ऎतिहासिक महत्व भी है।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">मुझे यह समझ में नहीं आया क्योंकि वास्तव में यह किसी अन्य होटल जैसे ही था। उसके बाद जब कमरे में आया तो वहां कुछ चौपन्ने थे जिसमें होटल का इतिहास लिखा था। उन्हें पढ़ कर ही, इस होटेल का महत्व समझ में आया। यह १८९५ में,  उन लोगों की सुविधायें देने के लिए बनाया गया जो वहां पर सोना खोदने के लिए आ रहे थे।</p>
<div>मैंने यहां पर इनके कमरे और इसकी जगहों को देखना शुरू किया तो पाया कि इसकी  सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका रख रखाव  पुरानी तरह से ही किया जा रहा है। लगता</div>
<div>है कि  १०० साल के पहले लोग छोटे छोटे कमरों में रहते थे। कमरे और  बाथरूम  के बीच में केवल एक पर्दा पड़ा हुआ था। सारे कमरे इसी प्रकार के थे। शायद  उस समय इस तरह से लोग रहते रहे होगें। इनके बाथरूम मे साबुन रखने का तरीका भी नयाब था। अधिकतर होटल मे साबुन द्रव्य रूप में होता है और प्लास्टिक की छोटी-छोटी शीशियों में मिलता है। यहां का साबुन कागज के पैकेट में था और साबुन के ऊपर हल्का गुलाबी रंग का रिबन लगा हुआ था। यहां पर शैम्पू की छोटी छोटी बोतले नहीं थी पर एक बड़ी बोतल थी जिसमें कार्क लगा हुआ था।  पुराने समय में इसी  तरीके से साबुन या शैम्पू रखे जाते रहे होगें। होटल वाले इस कोशिश में लगे थे कि इस होटल को उसी  वातावरण में रखा जाए जो कि उसके बनने के समय था। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/goldcarriagesa.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/goldcarriagesa.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></div>
<p style="text-align:left;">यहाँ पर हम लोगों ने चार संग्रहालय देखे।</p>
<ul>
<li>पहला, पिलीग्रीम न्यूज़ संग्रहालय था। इसमें वहाँ के  छपाई का इतिहास था।</li>
<li>दूसरा, गैरेज संग्रहालय है।  इसमे वह वाहन भी था जिससे सोना  निकालने के बाद ले जाया जाता था। कई पुरानी कारें भी थी।</li>
<li>तीसरा हाऊस संग्रहालय था। इसमें उस समय  के प्रयोग किये जाने वाले  समान  थे। वहां पर मुझे  हारमोनियम जैसा वाद दिखायी पड़ा। लेकिन उसके अंदर  हवा हाथ से न डाल कर, नीचे पैर से पैडल चला कर डालने की सुविधा थी। इस कमरे में फोटो लगी थी जिसमें  एक महिला साड़ी पहने हुई थी । मैंने  उस संग्रहालय के देख रेख करने वाले युवक से पूछा कि क्या  यहाँ कोई  भारतीय  रहते थे।  वह इस बात की पुष्टि नहीं कर  पाया कि इसमें भारतीय रहते थे अथवा नहीं।  वह यह भी नहीं  बता पाया कि वह वाद हारमोनियम है, क्या उसका कोई और नाम है। शायद वहां के रहने वाले को इस तरह की सूचनायें पता करके रखनी चाहिये।</li>
<li>चौथा संग्रहालय एक स्टोर था। जिसमें इस बात का इतिहास था कि वहाँ किस किस तरह की चीज़ें बेची जाती हैं और किस तरह के पोस्टर होते थे। यहां कई  पोस्टर लगे हुए थे जिसमें एक पोस्टर लैक्टो कैलामाइन लोशन (Lacto Calamine Lotion) का भी था। यह आज भी मिलता है और त्वचा के बचाव के लिये महिलायें प्रयोग करती हैं, पुरुष भी चोरी छिपे इसका प्रयोग करने में नहीं हिचकते हैं <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' />  <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/audreyhepburnlactocalaminelotionposter.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/audreyhepburnlactocalaminelotionposter.jpg?w=225" alt="" border="0" /></a> इस पोस्टर की मॉडेल <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/06/unending-love-rabindra-nath-tagore.html">आड्री हेपबर्न</a> (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Audrey_Hepburn">Audry Hepbern</a>) थी। यह बचपन में मेरी प्रिय कलाकार हुआ करती थी। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/05/roman-holiday.html">रोमन हॉलीडे</a> (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Roman_Holiday">Roman Holiday</a>), न केवल इनकी पर, रूमानी फिल्मों में सबसे प्रसिद्ध फिल्म है। मैंने  इस पोस्टर का चित्र भी लिया जिसे आप देख रहें हैं।</li>
</ul>
<p style="text-align:left;">हमारे  घूमने के पैकेज में सुबह का नाश्ता और रात के भोजन का पैसा पहले ही ले लिया गया था। इसलिये इनके लिए हमें पुन: कोई पैसा नहीं देना था।  रॉयल होटल में रात के भोजन पर एक  वेटर ने  पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या आप कुछ ड्रिंक लेना पसन्द करेगें।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">मैंने कहा कि मैं शराब या वाइन नही लेता हूं और जूस लेना पसन्द करूंगा। मुझे लगता था कि इसका पैसा हमें नहीं देना था पर रात के भोजन में पीने की चीज का पैसा देना था।  हम बिना दिए ही चले आए। अगले दिन जब सुबह नाश्ते पर उस वेटर ने हमसे  मुस्कुराकर  कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;सर, पिछली रात आपने जूस लिया था और उसका पैसा नहीं दिया है।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">मैंने कहा कितना देना है। उसने कहा साढ़े दस रैंड। मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;बिल लेते आओ, मैं दस्तखत कर देता हूं और स्वागत कक्ष पर अदा कर दूंगा।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">उसने जवाब था,</p>
<blockquote>
<blockquote><p>&#8216;इस वक्त मेरे लिए वह पर्ची ला पाना मुश्किल है यदि आपको लगता है कि  आपको पैसा नहीं देना है तो मैं पैसा अदा कर दूंगा।&#8217;</p></blockquote>
</blockquote>
<p style="text-align:left;">मुझे उसकी बात में सत्यता लगी। मैंने उसे वह पैसा दे दिया । बाद में स्वागत कक्ष पर लोगों ने इस बात की पुष्टि की, कि वह पैसा हमें देना था।</p>
<p>इस कस्बे के पोस्ट आफिस में  अन्तरजाल की सुविधा थी। इस पोस्ट ऑफिस को रोज़ नामक महिला, देख रही थी। उसनें बताया कि आधे घण्टे के लिए १५ रैंड यानी की लगभग ९०/-रूपये देने होगें। मैंने यह पैसे दिए। यह कम्पयूटर  विन्डोज़ पर था पर  अच्छी बात यह थी कि इसमें फायरफॉक्स था।  हलांकि फायर फॉक्स पर हिन्दी  ठीक से नहीं दिखायी पड़ रही थी। मैंने अपनी ई-मेल देखीं और उसके बाद, हम वापस प्रिटोरिया चल दिये।</p>
<h3 style="text-align:center;">मैंने, आज तक, यहां हवा में कूदती हुई मछलियां नहीं देखी हैं</h3>
<p>हम लोग पिलग्रिमस् रेस्ट से नाश्ते के बाद प्रिटोरिआ के लिये चले। रास्ते में हमें चीड़ के बाग दिखाई पड़े इनकी खास बात यह थी कि नीचे तने में कोई डाल नहीं थी। वे काट दी गयी थीं। तना बहुत ऊपर तक सीधे गया था। हमारे ड्राइवर केविल ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;तने पर बगल में जाने वाली डाल इसलिए काट दी जाती है कि तना सीधे ऊपर जा सके। यह मकान तथा फर्नीचर बनाने में सुविधाजनक रहता है।&#8217;</p></blockquote>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/dullstroomrosecottage.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/dullstroomrosecottage.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a>पिलीग्रिमस् रेस्ट से प्रिटोरिया पहुंचने में लगभग छः घण्टे लगते हैं। हम लोग रास्ते में डलस्ट्रूम (Dullstroom) नामक जगह में रूके। यहां पर हम लोगों ने रोज़ काटेज नामक जगह पर कॉफी पी। इसके नाम को सच करने के लिये इसके चारो तरफ क्यारियों में गुलाब ही गुलाब लगे थे।</p>
<p>हमारे पैकेज के प्रोग्राम में लिखा था कि डलस्ट्रूम फलाई फिशिंग (Fly Fishing) के लिए प्रसिद्व है। हम इसे ठीक से नहीं समझ पाये थे। यह पढ़कर हमें लगा था कि यह कोई ऎसी जगह है जहाँ पर बहुत सी मछलियां हवा मे कूदती हैं पर हमारे ड्राइवर ने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216; मैं यहां से कई बार गुजरा हूं पर मैंने आज तक हवा में कूदती हुई मछलियां नहीं देखी हैं। मुझे इसके बारे में कुछ नहीं मालूम है। लेकिन आप चाहें तो टूर ऑपरेटर से पूछ सकते हैं। यदि वह कोई जगह बताती है तो मैं आपको वहां ले चल सकता हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p style="text-align:left;">हम लोगों ने टूर आपरेटर से पूछा तो वह भी ठीक से नहीं बता पायी। हम लोग कुछ उलझन में रहे कि यह क्या है।</p>
<p>रोज़ काटेज में काफी पीने के बाद जब हम लोग वहाँ से आगे निकले तो रास्ते में एक दुकान थी जिसमें लिखा हुआ था <a href="http://www.flyfishing.co.za/">फलाई फिशिंग शॉप</a>, हमारे ड्राइवर ने गाडी रोक ली और कहा कि हम वहाँ जाकर पूछ सकतें है।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/dullstroomshopdog.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/dullstroomshopdog.jpg?w=150&#038;h=200" alt="" width="150" height="200" border="0" /></a>इस दुकान के बाहर एक नोटिस लगी थी कि अच्छे स्वभाव के कुत्ते अन्दर आ सकतें हैं। उस दुकान में दो कुत्ते थे जिनका नाम कैटी और एली था। दोनों ही बहुत प्यारे कुत्ते थे। मुझे कोई व्यक्ति पसन्द कर या न करे पर कुत्ते तो मेरे प्रिय हैं वे तो हमेशा मुझे पसन्द करते हैं। मैंने प्यार इनके सर पर हाथ फेरा हाथ मिलाया फिर दुकान के अन्दर गया।</p>
<p style="text-align:left;">हमनें दुकानवालों से फलाई फिशिंग के बारे में पूछा। उस दुकान में जॉन नाम का लड़का था। उसने बताया कि फलाई वास्तव में एक कांटा है जिसमें मछलियां फंसती है, मछली फंसाने के लिए बेट नहीं लगाया जाता है। उसने तरह तरह के कांटे दिखाये जिसमें अलग अलग रंग के रेशे लगे थे। जॉन के मुताबिक,</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/dullstrommflyingfishjohn.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/dullstrommflyingfishjohn.jpg?w=200&#038;h=150" alt="" width="200" height="150" border="0" /></a>&#8216;अलग अलग रंग के रेशे के पानी में पाये जाते हैं। जब कांटे में रंगों के रेशे लगा कर डाला जाता है तब मछलियां उन्हें खाने के लिए आती हैं तो कांटे में फंस जाती हैं।&#8217;</div>
<p style="text-align:left;">Hi John,<br />
It was great pleasure to meet you in Dullstroom. Thanks for telling us information about fly fishing and demonstrating how to cast the rod. I hope you dogs Katti and Elli are fine.</p>
<p>We had wonderful trip of South Africa and will like to visit it again.</p>
<p>With greetings from India<br />
Unmukt</p>
</div>
<div>
<h3 style="text-align:center;">आश्चर्य &#8211; सर्कस को चलाने वाले, इतने कम लोग</h3>
<p>प्रिटोरिया में हमारे  होटल के  बगल में एक बहुत बड़ा सा मैदान था। लौटते समय हमनें देखा कि वहां पर एक सर्कस लगा हुआ था। इसका नाम ब्राइन बॉस्वल सर्कस (<a href="http://www.boswell.co.za/">Brian Boswell&#8217;s Circus</a>) था। हम इसे देखने पहुँचे।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussapretoriaticket.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussapretoriaticket.jpg?w=437&#038;h=328" alt="" width="437" height="328" border="0" /></a></div>
<p>इस सर्कस की सबसे सस्ती सीट ५० रैंड और सबसे मंहगी सीट १०० रैंड की थी। हम लोगों ने ५० रैंड का टिकट लेना उचित समझा। इसके रोज दो शो होते थे: एक साढ़े तीन बजे और एक साढ़े सात बजे। केवल शनिवार को तीन शो थे। यह  अपने देश की तरह का  सर्कस लगता था। यह एक टेंट में था जो कि अपने देश की तरह ही था। हालांकि इस टेंट का घेरा बहुत छोटा, अपने देश के टेंट का, एक तिहाई था।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellsatiger.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellsatiger.jpg?w=165" alt="" border="0" /></a>अपने देश में रात के समय सर्च-लाइट की बीम आकाश में फेंक कर सर्कस की  सूचना दी जाती है। यहां इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं थी पर विज्ञापन के लिये इनके पास गाड़ियां थीं जि<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircuspretoriasahorse.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircuspretoriasahorse.jpg?w=110" alt="" border="0" /></a>स पर शहर में सूचना देने की व्यवस्था थी। इनकी वेबसाइट पर भी इनके प्रदर्शन की विस्तार से सूचना है।</p>
<p>शो में बहुत ज्यादा लोग नही थें ६०-७० लोग रहें होगें। सर्कस  शेर और टाइगर के करतब से प्रोग्राम शुरू हुआ। यह उसी तरह का एक शो था जैसे अपने देश के सर्कसों में होता है। उसके बाद कई और करतब थे जिसमें कई जानवरों के थे।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussapython.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussapython.jpg?w=165" alt="" border="0" /></a>एक करतब  में एक चाइनीज़ लड़की आयी। वह एक पहिये की साईकिल चला रही थी। यह भी अपने देश के प्रोग्राम की तरह था पर कुछ देर बाद  उस लड़की ने साइकिल सहित  रस्सी  कूदना शुरू किया। उसने अपने दोनों टांग से साइकिल  को पकड़ लिया था और जब वह ऊपर उछलती थी तो साइकिल भी  ऊपर उछलती थी और रस्सी नीचें से निकलती थी। वहाँ  एक मेज रखी थी। वह उसी तरह से कूदकर चढ़ती हुई मेज के ऊपर पहुँच गई। अपने देश में  मैंने इस तरह का करतब नहीं देखा है। इसमें कुछ करतब और भी देखे जिसे मैंने अपने देश में नही देखा है।</div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussaperformes.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussaperformes.jpg?w=165" alt="" border="0" /></a></div>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 135px"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussa1948poster.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussa1948poster.jpg?w=125&#038;h=165" alt="" width="125" height="165" border="0" /></a><p class="wp-caption-text">इस सर्कस का १९४८ का पोस्टर</p></div>
<p>इस सर्कस की खास बात यह लगी कि इसमे बहुत कम लोग थे। वही लोग टिकट चेक कर रहे थे, वही लोग जोकर बने हुए थे, और वही लोग सामान, जिस पर करतब दिखाते थे, उसको हटाते थे। मुझे आश्चर्य लगा कि इतने कम लोग इस सर्कस को चला रहे थे।</p>
<p>एक व्यक्ति कुछ संगीत बजा रहा था और शायद ३-४ लोग उसका सहयोग कर रहे थे जो करतब नहीं कर रहे थे। बाकी सब लोग जो लोग करतब करते थे वही लोग सर्कस में अन्य काम भी करते थे। इसमें कुछ चाइनीज़ युवतियां  भी थीं। वे जब करतब नहीं करती थी तो कपड़े बदलकर हम लोगों को  पंखे या खाने की  चीजें  बेचने के लिए इधर उधर घूम रही थीं।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussapretoriajoker.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/boswellcircussapretoriajoker.jpg?w=240&#038;h=320" alt="" width="240" height="320" border="0" /></a>इस सर्कस में एक इन्टरवल भी हुआ। उन्होंने इन्टरवल में सर्कस के सारे पोनीज़ आ गये। यह बहुत छोटे घोड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि  इन पर सवारी कर सकते हैं।  उस सर्कस मे जितने बच्चें थे वे सब उन पर सवारी करने के लिए पहुंच गये।  पोनीज़ ने सर्कस के अन्दर के  गोल घेरे का चक्कर लगाया जिसके लिए पांच रैंड देना पड़ा।</div>
<p>हमारे  देश में यदि शुरूवात ट्रेपीज़ के करतब से होती है तो अन्त शेर के करतब से। यहां प्रोग्राम,  शेरों के करतब से शुरू हुआ लेकिन ट्रेपीज के करतब  द्वारा इसका अंत नहीं हुआ। बल्कि अंत में दो जोकर आ गयें यह वही लोग थे जो बीच में करतब दिखा रहे थे। उन्होंने देखने वालों  से तीन महिलायें और एक पुरूष को लिया और चार कोने मे खड़ा कर दिया और एक बॉक्सिंग रिंग बनायी और बॉक्सिंग की ऎक्टिंग करते रहे।  इसी के साथ यह पूरा प्रोग्राम समाप्त हो गया।</p>
<p>सारा प्रोग्राम लगभग एक   घंटा ४० मिनट चला। सर्कस  देखकर मजा आ गया और  लगा कि ५० रैंड  वसूल हो गये।</p>
<h3 style="text-align:center;">अश्वेत लोग और गोरी मेम &#8211; वोट नहीं दे सकतीं</h3>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/apartheidmuseumjohannesburgsouthafrica.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/apartheidmuseumjohannesburgsouthafrica.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a>साउथ अफ्रीका में हम लोग एक दिन प्रिटोरिआ से जॉहन्सबर्ग घूमने गये। वहां, सबसे महत्वपूर्ण देखने की जगह, रंगभेद सग्रंहालय (एपारथेड (Apartheid) म्यूज़ियम) है। यह सग्रंहालय बताता है कि साउथ अफ्रीका में किस तरह से भेदभाव होता था।</p>
<p>हम लोगों ने टिकट लिया जो कि तीस रैंड का था और साथ ही आडियो सहायता ली। आप जिस जगह पहुँचते है यह आडियो हेल्प अपने आप वहाँ पर लगे चित्रों के बारे में बताती थी। मुझे अच्छी सुविधा लगी इसके लिए हमें १५ रैंड देने पड़े थे। हलांकि हमारे अलावा कोई और लोग इस सुविधा का प्रयोग नहीं कर रहे थे। यह मुझे कुछ अजीब लगा।</p>
<p>हमारे साथ एक टैक्सी ड्राइवर भी था। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं यहां कई बार आया हूं पर मैंने इस संग्रहालय को नहीं देखा है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने अपनी पत्नी के साथ उसका टिकट भी लिया। कुछ टिकटों में काला सफेद और कुछ में सफेद लिखा हुआ था। यह टिकट इस बात के लिए नहीं दिए गये कि हम लोग काले या सफेद थे। यह टिकट यह समझानें के लिए दिया गया था किस तरह से काले और सफेद में भेदभाव किया जाता था। हम लोग अलग अलग रास्ते से अन्दर घुसे।</p>
<p>सग्रंहालय में पहली अजीब बात यह लगी कि इसमे लिखा हुआ था कि पहले वहाँ पर अश्वेत लोग और गोरी महिलायें वोट देने की अधिकारिणी नहीं थी। मैंने &#8216;<a href="http://unmukth.wordpress.com/2011/08/21/2007/10/24/women-empowerment-rights/">आज की दुर्गा &#8211; महिला सशक्तिकरण</a>&#8216; की कहानी लिखते समय, इसकी &#8216;<a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/03/blog-post_13.html">महिला दिवस</a>&#8216; की कड़ी में बताया था कि इस दिवस की शुरुवात महिलाओं को वोट दिलवाने के लिये ही शुरू हुई थी। यहां प्रत्यक्ष सबूत मिल गया।</p>
<p>इस संग्रहालय में सबसे अजीब बात यह थी इसमें महात्मा गांधी का एक भी चित्र नहीं है। सच तो यह है कि इस भेदभाव के खिलाफ उन्होंने यहां पर सबसे पहले लड़ाई लड़ी थी। इस संग्रहालय में उन्हें वह सम्मान नहीं दिया गया जो उन्हें मिलना चाहिए। वहाँ पर शिकायत दर्ज करने की कॉपी थी। मैंने उस पर आपत्ति दर्ज की। यदि आप अब वहाँ कभी जायें और महात्मा गाँधी का चित्र देखें तो वह मेरे ही कारण होगा <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/goldmine.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/goldmine.jpg?w=150&#038;h=200" alt="" width="150" height="200" border="0" /></a></p>
<div style="text-align:right;"><em>संग्रहालय के बगल में, पुरानी बन्द सोने के खान का प्रवेश द्वार &#8211; यहां यह देखा जा सकता है कि सोना कैसे निकाला जाता था।</em></div>
<p>इस संग्रहालय में अजीब तरह की भावनायें मन में आती हैं। मैं वहाँ न जाता तो शायद साउथ अफ्रीका की यात्रा अधूरी रहती।</p>
<p>जॉहन्सबर्ग में महात्मा गांधी की मूर्ति है। सग्रंहालय देखने के बाद हम वहाँ गये। हमारे टैक्सी ड्राइवर को यह जगह नहीं मालूम थी । हम लोगों ने जब उससे कहा कि हम यहां जाना चाहते है तो उसने आसपास के कुछ लोगों से पूछा उसके बाद में वह हमें वहां ले गया। उसने बताया ,</p>
<blockquote><p>&#8216;मै वहां से अक्सर गुजरता हूं और मुझे नहीं मालूम था कि यह जगह महात्मा गांधी स्क्वैर के नाम से जाना जाता है।&#8217;</p></blockquote>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/mahatmagandhistatuejohansburgsa.jpg"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/mahatmagandhistatuejohansburgsa.jpg?w=150&#038;h=200" alt="" width="150" height="200" border="0" /></a></div>
<div><em>महात्मा गांधी स्क्वैर पर मूर्ति</em></div>
<p>वह हमें वहां एक जगह ले कर गया। वहां पर एक मूर्ति थी। उसने कहा कि यही जगह महात्मा गांधी स्क्वैर है। हमें वह मूर्ति महात्मा गांधी की मूर्ति नहीं लगी। मैंने कहा कि लगता है कि हम कुछ गलत जगह आयें है पर मूर्ति के नीचे पढ़ने पर पता चला कि यह महात्मा गांधी की ही मूर्ति है। यह मूर्ति उनके उस उम्र की है जब वे साउथ अफ्रीका में थे। यह उनके जवान समय की है। यही कारण है कि हम उसे नहीं पहचान पायें ।</p>
<p>गाड़ी से उतर कर हमनें टैक्सी ड्राइवर से कहा कि हमें १० मिनट के बाद आकर ले लेना क्योंकि वहां पर कोई रूकने की जगह नहीं थी। जिस समय हम उस मूर्ति का चित्र ले रहे थे तब पुलिस जैसा व्यक्ति हमारे पास आया। वह अपने को सिक्योरिटी का आदमी बता रहा था और उसी तरह के कपड़े पहने था। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप चित्र नहीं ले सकते है और आपको इसके लिए अनुमति लेनी पड़ेगी।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने उससे कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;दुनिया में ऎसा कहीं नहीं होता कि किसी सार्वजनिक मूर्ति का चित्र लेने के लिए किसी के अनुमति जरूरत हो।&#8217;</p></blockquote>
<p>लेकिन वह नहीं माना। हम वहां उससे लड़ना नहीं चाहते थे क्योंकि यह नया देश था और वहां पर झंझट पालना ठीक नहीं था। हमनें पूछा कि अनुमति कहां से मिलेगी तो उसने मुझे एक इमारत की तरफ इशारा करके बताया कि वहां मिलेगी।</p>
<p>हम लोग पैदल चलकर उस इमारत के पास गये। वहां पर पहरेदार ने हमसे इमारत के दूसरी तरफ से १३वीं मंजिल पर जाकर अनुमति लेने की बात बतायी। हम लोग इमारत के दूसरी तरफ गये। वहां लिफ्ट ग्यारहवें तल तक जाती थी। इसलिए ग्यारहवें तल तक लिफ्ट से, उसके बाद सीढी चढ़ कर गये।</p>
<p>ऊपर एक बहुत अच्छा सा ऑफिस था। यहाँ पर स्वागत कक्ष मे बैठी महिला से वहाँ जाने के कारण बताया। उसने किसी अन्य महिला से बात करने को कहा। यह काफी सभ्रांत महिला लग रही थी जो अपने चालीस के दशक में होगी। हमने बताया, हम लोग भारत से आयें है, हम महात्मा गाँधी की मूर्ति की फोटो लेना चाहते हैं, कोई व्यक्ति ऎसा करने से मना कर रहा हैं, <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/permissiontotakepictureofgandhistatue.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/permissiontotakepictureofgandhistatue.jpg?w=200&#038;h=197" alt="" width="200" height="197" border="0" /></a></p>
<blockquote>
<div>&#8216;आपसे इसकी लिए अनुमति लेने की बात की है।&#8217;</div>
</blockquote>
<p>उस महिला ने कहा कि यह सच है कि आपको इसके लिए अनुमति लेनी पड़ेगी। उसने ऑफिस में बात कर यह अनुमित हमें दी। मुझे यह बहुत अजीब बात लगी। हमनें वापस आकर उस मूर्ति के कुछ चित्र लिए।<br />
<em></em></p>
<p style="text-align:right;"><em>महिला के द्वारा दी गयी अनुमति। इसमें उसका मोबाइल नम्बर भी था। वह मैंने हटा दिया है। </em></p>
<p>प्रिटोरिआ में मेरे मित्रों ने उसी रात पर हमें भोजन पर बुलाया था। उसने वहाँ के लोगों को भी मुझसे मिलने के लिए भी बुलाया था। मैने रात में वहाँ जब लोगों को यह बात बतायी तो उन्हे आश्चर्य हुआ। उनका कहना था कि उन्हें आश्चर्य है कि इमारत के दूसरी तरफ जाने पर किसी ने हमें लूट नहीं लिया। उनके मुताबिक वहाँ पर कोई अपना कैमरा नहीं निकलता क्योंकि उसके छिन जाने का भय रहता है।</p>
<p>इस रात्रि के भोजन पर सारे लोग श्वेत लोग थे। उन्होंने रंगभेद सग्रंहालय के बारे में मेरी राय जाननी चाही। मैने उन्हें महात्मा गाँधी के चित्र का न होने की कमी बतायी। उन लोगों का कहना था इसमें कई कमियां है। मुझे लगा कि वे लोग इस संग्रहालय से प्रसन्न नहीं हैं।</p>
<h3 style="text-align:center;">मैं, प्रिटोरिआ से ज्यादा, बम्बई की सड़को पर सुरक्षित महसूस करती हूं</h3>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/highcourtpretoria.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/highcourtpretoria.jpg?w=225" alt="" border="0" /></a> प्रिटोरिया में यदि आप किसी से पूछें कि यहां घूमने की क्या जगह है तो वे बतातें हैं कि यहां पर यूनियन बिल्डिंग देखने के अतिरिक्त कोई भी घूमने की जगह नहीं है।</p>
<div> <em> </em></div>
<div style="text-align:right;"><em>प्रिटोरिआ में उच्च न्यायालय</em></div>
<p>हम लोग यूनियन बिल्डिंग देखने जाने से पहले, वहाँ पर उच्च न्यायालय को देखने गये। वहां उस कक्ष को भी देखा, जिसमें नेलसन मण्डेला को सजा दी गयी थी। वहां के लोगों के मुताबिक महात्मा गांधी इसी हाई कोर्ट के द्वारा अर्टानी बनाये गये थे और वह यहां अक्सर आकर मुकदमों की बहस करते थे।</p>
<p>उच्च न्यायालय को देखने के बाद हम लोग वहां के यूनियन बिल्डिंग  देखने के लिए गये।  यहां पर साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति रहते हैं। यह  बहुत सुन्दर है।</p>
<p>यूनियन बिल्डिंग के सामने से  एक सड़क जाती है उसके सामने एक बहुत बड़ी जगह है जिसमें बगीचा है। यह भी बहुत सुन्दर है।<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/unionbuildingpretoria.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/unionbuildingpretoria.jpg?w=300" alt="" border="0" /></a></p>
<div> <em> </em></div>
<div><em>यूनियन बिल्डिंग</em></div>
<p>अपने देश मे राष्ट्रपति भवन में जो बगीचा है उसे आप हर समय  नहीं देख सकतें हैं। वह कुछ समय के लिए ही सबके लिए खुलता है । यह भी कुछ देश के राष्ट्रपति के बगीचे की तरह जगह है लेकिन यह पूरी खुली जगह है। वहां पर घूमते हुए, हमारी मुलाकात एक भारतीय दम्पत्ति से हुई। मैंने उससे  पूछा की शाम  को  हम वहाँ क्या कर सकते हैं। उन्होंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यहां पर शायद  शाम में कुछ नहीं हो सकता है। आप एक फ्रीडम पार्क देख सकते हैं लेकिन  उसके लिए वहाँ  दिन में ही जाया जा सकता हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p><em> </em>कुछ देर बातचीत करने के बाद हमने उनसे पूछा कि क्या आप गुजराती हैं।  महिला ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;भारत से दो तरह के लोग आये। एक तो मजदूर के रूप में। ये लोग मुख्यत: बिहार और उत्तर भारत के थे। दूसरे लोग गुजरात से आये जो छोटा मोटा व्यापार करने के लिए वहां पहुंचे थे। मेरे  बाबा उत्तर प्रदेश  के थे और दादी बिहार की थीं। वे लोग मजदूर  के रूप में आये थे।&#8217;</p></blockquote>
<div> मैंने उनसे ऎसे ही पूछा कि यहां पर बहुत सफाई है। यहां पर टैक्सी और कारें कानून का पालन करते है। मालूम नहीं क्यों लोग कहते है कि यहां पर कानून की व्यवस्था खराब है। उस महिला ने जवाब दिया।</div>
<blockquote><p>&#8216;मैं जब बम्बई की सड़क पर घूमती हूं तो मैं अपने को ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हूं । मेरी तीसरी पीढ़ी है उसके बावजूद भी साउथ अफ्रीका की सड़क पर अपने आपको बिल्कुल सुरक्षित नहीं महसूस  करती हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>हम लोग वापस अपने होटल आ गये। हमें अगले दिन भारत के लिए वापस चलना था।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/unionbuildinggardenpretoria.jpg"><img class="aligncenter" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/08/unionbuildinggardenpretoria.jpg?w=407&#038;h=305" alt="" width="407" height="305" border="0" /></a></div>
<div style="text-align:center;"><em>यूनियन बिल्डिंग के सामने का बगीचा</em></div>
<p>अगले दिन सुबह, हम प्रिटोरिया से जॉहन्सबर्ग आये। वहीं साउथ अफ्रीकन एयरलाइन्स की उड़ान पकड़ कर, रात में मुम्बई पहुँचे। रात को वहीं विश्राम किया। अगले दिन अपने कस्बे आ गये।</p>
</div>
<p style="text-align:center;"><em>यह यात्रा विवरण मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।</em></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/12/ways-to-reach-south-africa.html">झाड़ क्या होता है? &#8211; अफ्रीकन सफारी पर</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/01/south-african-airways-hostess.html">साउथ अफ्रीकन एयर लाइन्स और उसकी परिचायिकायें</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/01/johannesburg-airport-pretoria-passage.html">मान लीजिये, बाहर निलते समह, मैं आपका कैश कार्ड छीन लूं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/01/south-africa-crime-reason.html">साउथ अफ्रीका में अपराध &#8211; जनसंख्या अधिक और नौकरियां कम</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/01/pretoria-krugar-park-journey.html">यह मेरी तरफ से आपको भेंट है</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/02/kruger-national-park.html">क्रुगर पार्क की सफाई देख कर, अपने देश की व्हवस्था पर शर्म आती है</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/02/life-style-south-africa.html">हम दोनो व्यापार कर बहुत पैसा कमा सकते हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/02/kruger-park-animals-south-africa-1.html">फैंटम टार्ज़न &#8230; यह कौन हैं?</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/03/indians-afraid-of-cats-but-not-of-dogs.html">हिन्दुस्तानी, बिल्लियों से क्यों डरते हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/03/sex-indian-public-rhinoceros-africa.html">आपको तो शर्म नहीं आनी चाहिये</a>।।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/03/lion-hyena-rasmus-kruger-park-south.html">लगता है, आप मुझे जेल भिजवाना चाहती हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/04/graskop-gorge-south-africa.html">ऐसा करोगे तो, मैं बात करना छोड़ दूंगी</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/04/lisbon-falls-gods-window-sa.html">भगवान की दुनिया &#8211; तभी दिखायी देगी जब उसकी खिड़की साफ हो</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/04/pilgrims-rest-south-africa.html">सर, पिछली रात, आपने जूस का पैसा नहीं दिया</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/04/dullstroom-fly-fishing-south-africa.html">मैंने, आज तक, यहां हवा में कूदती हुई मछलियां नहीं देखी हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/05/boswell-circus-south-africa.html">आश्चर्य &#8211; सर्कस को चलाने वाले, इतने कम लोग</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/05/johannesburg-places-to-visit-south.html">अश्वेत लोग और गोरी मेम &#8211; वोट नहीं दे सकतीं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2009/05/pretoria-south-africa-union-building.html">मैं, प्रिटोरिआ से ज्यादा, बम्बई की सड़को पर सुरक्षित महसूस करती हूं</a>।।</p>
<div style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</div>
<div style="text-align:left;">। <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kruger_National_Park">Kruger National Park</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/South_Africa">south africa</a>, साउथ अफ्रीका, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Johannesburg">Johannesburg</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Pretoria">Pretoria</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/South_African_Airways">साउथ अफ्रीका एयरवेज़</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/The_Phantom">Phantom</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Tarzan">Tarzan</a>,</div>
<div style="text-align:left;">। जीवन, life-style,</div>
<div>। <a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, <a href="http://www.google.co.in/search?q=%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80+%E0%A4%95%E0%A5%87+%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%87&amp;ie=utf-8&amp;oe=utf-8&amp;aq=t&amp;rls=com.ubuntu:en-US:official&amp;client=firefox-a">मस्ती के लिये</a> सैर सपाटा, <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>, <a title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा विवरण </a>, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</div>
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		<title>सिक्किम – छोटा मगर सुन्दर</title>
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		<pubDate>Sat, 05 Feb 2011 12:30:58 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में हमारी सिक्किम और कालिम्पॉङ यात्रा का वर्णन है। This post is about our our visit to Sikkim and Kalinpong. is post per hamari sikkim aur kalinpong yatra ka varnan hai.<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=592&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em>इस चिट्ठी  में, हमारी सिक्किम </em><em>और कालिम्पॉङ </em><em>यात्रा का वर्णन है। </em></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/stoneredironoxygen.jpg"><img src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/stoneredironoxygen.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></p>
<p><span id="more-592"></span>सिक्किम राज्य भारत के  उत्तर पूर्व में है। यह हमारे साथ १९७५ में जुड़ा।</p>
<p>सिक्किम भारत का दूसरा सबसे छोटा प्रदेश है। <a href="http://unmukth.wordpress.com/2008/10/19/goa-india/">गोवा</a> (Goa) इससे छोटा प्रदेश है सिक्किम क्षेत्रफल ७ हजार वर्ग किलोमीटर है। इसकी जनसंख्या सारे राज्यों से कम, केवल ५,४०,००० है। इसके पश्चिम में <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Nepal">नेपाल</a>, उत्तर में <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Tibet">तिब्बत</a>, पूरब में <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Bhutan">भूटान</a>, और दक्षिण में <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/West_Bengal">पश्चिम बंगाल</a> का दार्जिलिंग जिला है। सिक्किम में चार जिले हैं &#8211; उत्तर, पूरव, दक्षिण, और पश्चिम।</p>
<p>सिक्किम घूमते समय, हमें पर्यटन विभाग के द्वारा जगह, जगह पर सिक्किम के बारे में कुछ जुमले लिखे दिखे। कहीं लिखा हुआ था &#8211; &#8216;छोटा और सुन्दर&#8217; (Small &amp; beautiful) तो कहीं लिखा हुआ था &#8216;छोटा मगर सुन्दर&#8217; (Small but beautiful), इन दोनो में मुझे तो &#8216;छोटा मगर सुन्दर&#8217; जुमला ज्यादा भाया।<br />
<a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SFueEea72nI/AAAAAAAAAmk/IBGylYzY8-M/s1600-h/Sikkim+Pocket+Guide+F.jpg"><img class="alignleft" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SFueEea72nI/AAAAAAAAAmk/IBGylYzY8-M/s200/Sikkim+Pocket+Guide+F.jpg" border="0" alt="" /></a><br />
सिक्किम पहाडियों और पेड़ों से हरा भरा सुंदर जगह है। यहां अलग अलग सभ्यता और संस्कृति के लोग रहते हैं।   लिम्बू (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Limbu_people">Limbu</a>), लेपचा (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Lepcha_people">Lepcha</a>), और भूटिया (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Bhutia">Bhutia</a>) यहां के मूल निवासी हैं। <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Nepali_people">नेपाली</a> और और <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Tibetan_people">तिब्बती</a> भी यहां बस गये हैं।</p>
<p>यहां पर हम लोगों ने सिक्किम के ऊपर एक पॉकेट गाइड ली। यह गाइड माइलस्टोंस (Millstones) के द्वारा प्रकाशित है। यह सिक्किम के बारे में अच्छी सूचना देती है। आप कभी सिक्किम जाने की सोचें तो इस पुस्तक को पढ़ लें। हालांकि इसमे बताई गई हर जगह में देखने के लिए न तो समय है और शायद न ही जरूरत।</p>
<h3 style="text-align:center;">गैंगटॉक कैसे पहुंचें</h3>
<p>गैगंटॉक सिक्किम की राजधानी है। यहां पहुंचने के दो तरीके है। <a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SGbffdunRcI/AAAAAAAAAnc/RseLiVKqam0/s1600-h/sikkim+green.JPG"><img class="alignright" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SGbffdunRcI/AAAAAAAAAnc/I1PLOxElCQ4/s320-R/sikkim+green.JPG" alt="" width="320" height="240" /></a><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SGbffdunRcI/AAAAAAAAAnc/RseLiVKqam0/s1600-h/sikkim+green.JPG"> </a></p>
<ul>
<li>हवाई जहाज से बागडोगरा फिर कार या हेलीकाप्टर से गैंगटॉक</li>
<li>रेल से जलपाईगुड़ी तक फिर कार से गैंगटॉक</li>
</ul>
<div style="text-align:right;"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SGbffdunRcI/AAAAAAAAAnc/RseLiVKqam0/s1600-h/sikkim+green.JPG"> </a><em>हरा-भरा सिक्किम</em></div>
<p>हम लोग बागडोगरा तक इण्डियन एयरलाइंस के हवाई जहाज से आये। हवाई जहाज में चढ़ते समय, हमें हाथ, एवं मुँह साफ करने के लिए रूमाल तो मिला पर टॉफी नहीं मिली। मैनें परिचायिकाओं से पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;टॉफियां कहाँ है?&#8217;</p></blockquote>
<p>उन्होंने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;प्रबंध समिति ने टॉफियां न बाटनें का निर्णय लिया है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मेरे विचार से यह निर्णय ठीक नही है। इसमें ज्यादा पैसा खर्च नही होता पर लोग प्रसन्न रहते है। हम लोग ज्यादा टाफियां जेब में रख लेते थे और बाद में आराम से खाते रहते थे। लगता है कि यह अब नही हो सकेगा, इसके लिए किसी दूसरी एयर लाइन्स से उड़ान भरनी पड़ेगी।<a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SGbgFjRg_JI/AAAAAAAAAnk/V-N-5WPi6Oc/s1600-h/Sikkim+water+river.JPG"><img class="alignleft" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SGbgFjRg_JI/AAAAAAAAAnk/0KmeqQIOCDQ/s320-R/Sikkim+water+river.JPG" alt="" /></a> <em> </em></p>
<p>परिचारिकायें नीली और नारंगी रंग साड़ियां पहने थी। मैने पूछा कि क्या कोई नियम है कि कौन किस रंग की साड़ी पहनेगा। उसने बताया कि कोई नियम नहीं है पर उन्हें उन दो में से, किसी एक रंग की साड़ी पहनना होता है। जिसे जो रंग पसंद है वह उस रंग की साड़ी पहन सकती है।</p>
<p><em>नदियों और झरनों से भरपूर &#8211; सिक्किम</em></p>
<p>परिचारिकायें, हवाई जहाज पर जबान -तोड़ अंग्रेजी में बात कर रही थीं। उतरते समय भी उन्होंने अंग्रेजी में धन्यवाद और विदा ली। मेरे हिन्दी में कहे &#8216;नमस्ते&#8217; पर जरा शर्मिदगी से भरी मुस्कराहट अवश्य दी।</p>
<p>बागडोगरा एयर पोर्ट से गैगंटॉक लगभग १२५ किलोमीटर है पर पहाड़ी रास्ते के कारण लगभग ४ घण्टें लगते है। हम लोगों ने बागडोगरा हवाई अड्डे से गैगंटॉक के लिये टैक्सी पकड़ी। हमारा टैक्सी ड्राइवर मजेदार व्यक्ति था। वह रास्ते भर बात करता रहा।</p>
<h3 style="text-align:center;">टिस्ता नदी (सिक्किम) पर बांध बने अथवा नहीं</h3>
<p>हम लोगो ने बागडोगरा हवाई अड्डे से, गैगंटॉक के लिये, टैक्सी ली। रास्ता टिस्ता (teesta) नदी के बगल से चलता है। कभी नदी नीचे हो जाती थी तो कभी हम लोगों के साथ। हम लोगों ने रास्ते में एक रेस्ट्राँ में चाय पी । वहाँ पर बहुत से लोग बेड़ा विहार (Rafting) रैफ्टिंग कर रहे थे। वहां इसके अतिरिक्त कुछ और नही थी । इसलिए मैंने पूछा</p>
<blockquote><p>&#8216;यहां कौन लोग बेड़ा विहार करते हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>होटल के मालिक ने बताया</p>
<blockquote><p>&#8216;गैंगटॉक या कलिगंपॉङ जाते समय अथवा  लौटते समय, पर्यटक यहां बेड़ा विहार करते है।&#8217;</p></blockquote>
<p><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SHYivJGu8UI/AAAAAAAAAoE/QisJVLZm3KY/s1600-h/Dam+Teesta+west+bengal.JPG"><img class="alignright" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SHYivJGu8UI/AAAAAAAAAoE/4rtvAtJ5aV8/s320-R/Dam+Teesta+west+bengal.JPG" alt="" /></a>वहां कपड़े बदलने की सुविधा है। लौटते समय, कुछ लोग वहां पर रात को  भी रूकते हैं और दिन में निकल कर हवाई जहाज या ट्रेन पकड़ते हैं।</p>
<p>रास्ते में टिस्ता (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Teesta_River">teesta</a>) नदी पर  बांध बनता दिखाई पड़ा। टैक्सी ड्राइवर ने बताया कि टिस्ता नदी पर कई बांध बन रहे हैं दो पश्चिमी बंगाल में है और कुछ सिक्किम में है। यह डैम अलग-अलग शक्ति की बिजली पैदा करेगें।   हम लोग पांच बजे गैगंटॉक पहुंच गये।</p>
<p>गैंगटॉक पहुंच कर कुछ देर आराम किया फिर बाजार घूमने गये। रास्ते में, एक जगह कुछ लोग डेरा जमा रखा था। वे लोग उत्तर सिक्किम में टिस्ता नदी पर बन रहे बांध का विरोध कर रहे थे। मैने उनसे बात की। उन्होनें बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;हमारे गांव के अधिकतर लोग अनपढ़ है और लोग खेती करते हैं। जब डैम बनेगा तो हमारा गांव डूब जायेगा और हम लोग बेघर हो जायेगें। सरकार विस्थापित लोगों को नौकरी देने की बात कर रही है पर यह नौकरी केवल चपरासी की होगी।&#8217;</p></blockquote>
<p>उनका यह भी कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह   डैम कञ्चनजङ्घा राष्ट्रीय उधान (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Khangchendzonga_National_Park">Khangchendzonga National Park</a>) में है और कानूनन नही बनाया जा सकता है।&#8217;</p></blockquote>
<p>यह लोग अंगेजी मे बात कर रहे थे मैने पूछा की</p>
<blockquote><p>&#8216;आप लोग अंगेजी में बात कर रहे है । आप  तो पढ़े लिखे लगते है।&#8217;</p></blockquote>
<p>उन्होनें कहा कि गांव में उनके जैसे बहुत कम लोग है। मैंने उनसे उनके आंदोलेन के बारे में लिखित सूचना मांगी तब उन्होने कहा कि वह तो नहीं है पर वे लोग चिट्ठा लिखते है। मेरे विचार में वह लोग स्वयं चिट्ठा नही लिखते है पर उनके लिए कोई और लिखता है। क्योंकि जब मैने उनसे पूछा कि वह मुफ्त चिट्ठा लिखने देने की बेबसाइट पर है या उन्होनें कोई डोमेन लिया है। वे इसका ठीक से उत्तर नही दे पाये।</p>
<div><a href="http://bp1.blogger.com/_-_ENIsSR7Yo/SFvS66kxvJI/AAAAAAAABjs/VJ9Rx2Jla2s/s1600/Picture+017.jpg"><img class="alignright" src="http://bp1.blogger.com/_-_ENIsSR7Yo/SFvS66kxvJI/AAAAAAAABjs/VJ9Rx2Jla2s/s320/Picture+017.jpg" alt="" /></a>मुझे बाद में पता चला कि उनका चिट्ठा ब्लॉगर पर है और उसका नाम <a href="http://www.weepingsikkim.blogspot.com/">ani sikkim runcha&#8230;.</a> है।</div>
<div style="text-align:right;"><em>अनशन पर बैठे, उन लोगों का  चित्र उनके चिट्ठे से है। </em></div>
<p>बांध बनाया जाय अथवा नहीं का निर्णय &#8211; अक्सर विवाद में आ जाता है। नर्बदा परियोजना, टेहरी बांध, इसके जीते जागते उद्धाहरण हैं। जल विद्युत-घर के कारण, पर्यावरण का भी नुकसान होता है लेकिन यह थर्मल विद्युत-घर और नाभिकीय-विद्युत घर के मुकाबले, बहुत कम है। बांध के द्वारा पानी का संरक्षण ठीक से किया जा सकता है, बिजली पैदा की जा सकती है। यदि यह न हो तो विकास ही रुक जाये।</p>
<p>बांध बनाने में सबसे बड़ी मुश्किल पुनर्वास की है। इसमें न केवल भ्रष्टाचार है पर कुछ लोग भावनाओं को उभार कर ब्लैक मेल भी करते हैं। मैं नहीं जानता कि टिस्ता नदी पर बन रहे डैम के लिये क्या बात सही है।</p>
<h3 style="text-align:center;">नाथुला पास – भारत चीन सीमा</h3>
<p>नाथुला पास पर भारत चीन की सीमा है। रास्ते में कुछ अन्य दर्शनीय जगहें हैं पर सबसे दूर नथुला पास है। टैक्सी ड्राइवर की सलाह थी कि हम सबसे पहले दूर की जगह को देख लें और लौटते समय अन्य जगहों को देख लेगें। बचपन में परीक्षा देते समय उल्टी बात रहती है कि पहले आसान सवाल का जवाब लिखो फिर कठिन सवाल का।</p>
<div><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr7c2XKIlI/AAAAAAAAApA/ioZBAimF8Jg/s1600-h/rest+room+onway+to+natu+la.JPG"><img class="alignleft" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr7c2XKIlI/AAAAAAAAApA/1xd4FAir3Ds/s320-R/rest+room+onway+to+natu+la.JPG" alt="" width="242" height="182" /></a></div>
<div>नथुला पास जाने के लिए परमिट की जरूरत पड़ती है। इसे अलग-अलग चेक पोस्ट पर दिखाना पड़ता है। एक चेक पोस्ट पर जब हम पास दिखाने के लिए रूके तब मुझे शंका निवारण की आवश्यक्ता पड़ी। वहां पर एक सार्वजानिक शौचालय था। यहां शंका निवारण के लिए २ रूपया देना पड़ता है। मुझे अपनी बर्लिन यात्रा की याद आयी <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/01/what-to-see-in-berlin-city.html">जहां</a> इसी के लिए ५० सेन्ट (लगभग ३० रूपये) देने पड़े थे। इस जगह जाकर मुझे आश्चर्य हुआ क्योंकि मैने इतना साफ सार्वजानिक शौचालय नहीं देखा था। मुझे इस बात से कुछ प्रसन्नता भी हुई।</div>
<div>मैंने शौचालय की देख रेख करने वाले व्यक्ति से, उसकी तारीफ की तो वह नहीं समझ पाया। टैक्सी ड्राइवर ने उस व्यक्ति को उसकी भाषा में यह समझाया तो उसने मुस्कुरा कर तारीफ स्वीकार की।</div>
<p><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr8Ccmnh1I/AAAAAAAAApI/8dxftrDm5Ug/s1600-h/soldier+meorial+nathula+pass.JPG"><img class="alignright" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr8Ccmnh1I/AAAAAAAAApI/GREeVm0dks8/s320-R/soldier+meorial+nathula+pass.JPG" alt="" width="233" height="175" /></a>नथुला पास पर एक यादगार चिन्ह बना हुआ है। यह मार्च २००२ में बनाया गया था। यहां पर गार्ड ने मुझे बताया कि यह १९६२ में भारत -चीन लड़ाई और बाद के अन्य हादसों में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के यादगार में बनाया गया है। इसके ऊपर कुछ ऊपर चढ़ने पर एक जगह पत्थर जड़ा हुआ है जिसमे लिखा हुआ है कि जवाहर लाल नेहरू १ सितम्बर १९५८ को यहां आये थे।</p>
<div><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr6HWzRX4I/AAAAAAAAAow/14009DOz4_M/s1600-h/chinese+soldiers+nathula+pass.JPG"><img class="alignleft" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr6HWzRX4I/AAAAAAAAAow/388pJOX7fCI/s320-R/chinese+soldiers+nathula+pass.JPG" alt="" width="220" height="165" /></a></div>
<p>भारत की सीमा पर सबसे ध्यान देने की बात यह थी कि वहां पर सैकड़ो हिन्दुस्तानी पर्यटक थे पर चीन की तरफ एक भी पर्यटक नहीं था। वहां पर केवल चीनी सैनिक थे। मैंने चीनी सैनिकों से हाथ भी मिलाया।</p>
<p>यहां से चीन में बनी रोड भी दिखाई पड़ती है और चीन में बनी रोड और अपने देश में बनी रोड में जमीन आसमान का अंतर दिखायी पड़ता है। जहां पर चीन की तरफ बनी हुई रोड एक बहुत ही सुन्दर, बेहतरीन और चौड़ी है जिसमें दो गाड़ी असानी से आ-जा सकती हैं। वहीं भारत की तरफ बनी रोड सकरी और कई जगह टूटी फूटी थी। सकरी होने के कारण जब आर्मी की ट्रकें आमने -सामने आ जाती थी तो लम्बा जाम फंस जाता था जिसे हटाने में काफी समय लगता था। नथुला पास से लौटते समय पानी भी बरसने लगा जिसके कारण रोड पर जगह जगह नाले से बन गये और पानी इक्टठा हो गया।</p>
<div><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr6r9b9N3I/AAAAAAAAAo4/4ivU3rmYH3w/s1600-h/Chinese+road+nathula+pass.JPG"><img class="alignright" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SIr6r9b9N3I/AAAAAAAAAo4/lKdXvxjCmFI/s320-R/Chinese+road+nathula+pass.JPG" alt="" width="246" height="185" /></a></div>
<p>अपने देश और चीन  की  रोड देखकर मुझे  शर्म लगी। मैंने वहाँ पर एक गार्ड से पूछा कि ऎसा क्यों है। उसने मुस्कुरा कर कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;हमारी तरफ तो पर्यटकों की भीड़ है। यह लोग, यहाँ पर आकर न केवल समय बर्बाद करते हैं पर उनके आवागमन से रोड भी खराब होत है। चीन की तरफ देखिये, उधर एक भी पर्यटक नही हैं। वे लोग इन सब बातों में समय बर्बाद नहीं करते। भीड़ कम होने के कारण उनकी सड़के भी कम खराब होती है और उनके रख रखाव में आसानी पड़ती है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मुझे लगा कि यदि कभी फिर भारत-चीन से युद्व हुआ (जिसकी सम्भावना सें इंकार नही किया जा सकता) तब इन सड़कों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।</p>
<p>मेरे विचार से यह जगह पर्यटकों के जाने के लिए कुछ समय तक के लिए बंद कर देनी चाहिये ताकि कि हम रास्ते को कम से कम की चीन की तरफ की के रास्ते बराबर बना सकें और विवाद या लड़ाई के समय उनसे पीछें न रहें। लेकिन रास्ता शायद यह बंद करना सम्भव न हो क्योंकि सिक्किम में पैसा कमाने का सबसे बड़ा साधन पर्यटन है और सिक्किम का पर्यटन विभाग नथुला पास घूमने को विज्ञापित करती है कि आप वहां जाएं और देखें कि हमारे देश के सैनिक किस तरह से सीमाओं की रक्षा कर रही है। इसी कारण वहाँ पर भारतीय पर्यटकों की भीड रहती है। इससे लोगों को व्यापार का साधन मिल रहा है। यदि वहां पर्यटकों का जाना रोका जायेगा व्यापार करने के तरीके में कमी आयेगी।</p>
<h3 style="text-align:center;">क्या ईसा मसीह सिल्क रूट से भारत आये थे</h3>
<div style="text-align:center;"><strong>सिल्क रूट क्या है?</strong></div>
<div><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SJUSlmBj4jI/AAAAAAAAApY/jopLezM0FuU/s1600-h/Silk+route.jpg"><img class="alignleft" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SJUSlmBj4jI/AAAAAAAAApY/w1cAQQsrrNE/s200-R/Silk+route.jpg" alt="" /></a>पुराने समय में चीन भारत और पश्चिमी देशों के बीच रेश्म का व्यापार हुआ करता था। यह कई रास्तों से जाता था। इन्हें &#8216;सिल्क रूट&#8217; कहा जाता था। इसमें एक रास्ता नथुला पास होकर जाया करता था। १९६२ में, भारत &#8211; चीन युद्व के बाद यह रास्ता बंद कर दिया। यह पुन: ६ जुलाई २००६ में खोला गया। इस रास्ते से पुनः व्यापार हो रहा है। हमें वहां चीन के कई ट्रक मिले जिसमें चीन से समान भारत आया था।</div>
<p><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SJUSC-XMMfI/AAAAAAAAApQ/kFuK-ehocIQ/s1600-h/Certificate+Natu+la.jpg"><img class="alignright" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SJUSC-XMMfI/AAAAAAAAApQ/8ZPa96mn4BQ/s200-R/Certificate+Natu+la.jpg" alt="" /></a><br />
नथुला पास जाने पर ५० रुपये में आप को सर्टिफिकेट मिल सकता है कि आप नथुला पास गये थे। यह कोई भी बनवा सकता है। आपको केवल पैसे देने पड़ते हैं आप जो नाम चाहें वह दे सकते हैं। देखिये अब तो आपको विश्वास हो गया न कि मैं भी वहां गया था। यह सर्टिफिकेट एक सुन्दर से फोल्डर के अन्दर रख कर मिलता है।</p>
<p>इस फोल्डर के अन्दर के हिस्से में सिल्क रूट का नक्शा बना है और इसके बारे में सूचना लिखी है।</p>
<div style="text-align:center;"><strong>क्या ईसा मसीह ही  सेंट ईसा (Saint Issa) थे और भारत आये थे?</strong></div>
<p><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SJUS17yL0UI/AAAAAAAAApg/FaH_b3BZe-c/s1600-h/Nicolas+Notovich.jpg"><img class="alignleft" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SJUS17yL0UI/AAAAAAAAApg/_z8cDcIzRis/s320-R/Nicolas+Notovich.jpg" alt="" width="153" height="219" /></a>निकोलस नोतोविच (<a title="Nicolas Notovitch" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Nicolas_Notovitch">Nicolas Notovitch</a>) एक रूसी अन्वेषक था। उसने कुछ साल  भारत में बिताये। बाद में, उन्होने फ्रेंच भाषा में &#8216;द अननोन लाइफ ऑफ जीज़स क्राइस्ट&#8217; (<a href="http://reluctant-messenger.com/issa1.htm">The unknown life of Jesus Christ</a>) नामक पुस्तक लिखी है।</p>
<p><em>निकोलस नोतोवच का चित्र <a href="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/en/thumb/6/68/NNotovich150.jpg/180px-NNotovich150.jpg">विकिपीडिया</a> से</em></p>
<p>निकोलस के मुताबिक यह पुस्तक हेमिस बौद्घ आश्रम (<a title="Hemis Monastery" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Hemis_Monastery">Hemis Monastery</a>) में रखी पुस्तक (The life of saint Issa) पर आधारित है। उस समय हेमिस बौद्घ आश्रम लद्दाक के उस भाग में था जो कि भारत का हिस्सा था। हांलाकि इस समय यह जगह तिब्बत का हिस्सा है। यह आश्रम इसी तरह के सिल्क रूट पर था।</p>
<p>यह रहस्य की बात है कि ईसा मसीह ने १३ साल से ३० साल तक क्या किया। इस पुस्तक के आधार  पर निकोला का कहना है कि,</p>
<ul>
<li>इन सालों में ईसा मसीह सिल्क रूट के द्वारा भारत आये थे</li>
<li>उन्होंने यहां में बौद्घ धर्म पढ़ने में बिताया,</li>
<li>उसके बाद बौद्घ धर्म से प्रेरित होकर धर्म की शिक्षा दी।</li>
</ul>
<p>मुझे धर्म के बारे में कम ज्ञान है में नहीं जानता कि बौद्घ धर्म और इसाई धर्म में संबंध है अथवा नहीं। मैं इतिहास का भी अच्छा जानकार नहीं हूं। मैं नहीं कह सकता कि,</p>
<ul>
<li>यह कहानी सच है अथवा नहीं?</li>
<li>ईसा मसीह वास्तव भारत आए थे अथवा नहीं?</li>
<li>ईसा मसीह ने बौद्घ धर्म की शिक्षा ली थी अथवा नहीं?</li>
<li>ईसाई धर्म बौद्घ धर्म से प्रेरित है अथवा नहीं?</li>
</ul>
<p>पर मैं इतना अवश्य जानता हूं कि इस पुस्तक के बारे में <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Lost_years_of_Jesus">विवाद</a> है और इस तरह के विवाद का संतोषजनक जवाब दे पाना मुश्किल है।</p>
<h3 style="text-align:center;">मंदाकिनी झरना &#8211; &#8216;राम तेरी गंगा मैली&#8217; फिल्म वाला<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/babaharbhajansinghtemple.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/babaharbhajansinghtemple.jpg?w=181&#038;h=181" border="0" alt="" width="181" height="181" /></a></h3>
<p>हम लोग, नथुला पास से लौटते समय, बाबा हर भजन सिंह मंदिर भी गये। यह वास्तव में समाधि है। बाबा हर भजन सिंह पंजाब रेजीमेंट में थे। ४ अक्टूबर १९६८ को जब वे एक खच्चर (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Mule">mule</a>) को लेकर आ रहे थे तो उनका पैर फिसल गया जिसके कारण वह एक झरने में गिर पड़े और उनकी मृत्यु हो गई। ऎसा कहा जाता है कि कुछ दिनों बाद वह अपने एक सहयोगी के सपने में आये और कहा कि उनके नाम से एक समाधि बना दी जाए। यहां उन्हीं की समाधि बनी है।</p>
<p>यहां आने पर मुझे बताया गया कि यदि आप २ दिन यानी रविवार और मंगलवार को मांस न खाये तो पवित्र पानी पी सकते हैं पर प्रसाद लेने मे या टीका लगवाने में कोई भी इस तरह की बाधा नहीं थी । मैं सिक्किम का खाना, खाना चाहता था जिसमें मांस भी शामिल था। इसीलिए मैने पानी नहीं लिया पर माथे पर तिलक लगवाया और प्रसाद लिया।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/tsomgolakesikkim.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/tsomgolakesikkim.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<div>लौटते समय हम लोग टोम्गो (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Tsomgo_Lake">Tsomgo</a>) झील पर भी रूके। टोम्गो  सिक्किमी भाषा का शब्द है और <a title="Nepali language" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Nepali_language">नेपाली</a> में इसे छंगू झील कहा जाता है। ज्यादातर लोग इसको छंगू झील ही कहते है। यह ३७८० मीटर (१२,४०० फीट) की ऊंचाई पर है और गैंगटॉक से ३५ किलोमीटर की दूरी पर है। इस झील की परधि लगभग एक किलोमीटर है।</div>
<p style="text-align:left;"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yaktsomgolake.jpg"><img class="alignright" style="border:0 none;" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yaktsomgolake.jpg?w=240&#038;h=320" border="0" alt="" width="240" height="320" /></a></p>
<p style="text-align:left;">इस झील के पास बहुत सारे याक (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Yak">Yak</a>) थे । कई लोग उस पर चढ़कर सवारी कर रहे थे। वहां पर लोगों ने बताया की याक का दूध होता है और इस दूध की पनीर बनती है। जब मैने उसके दूध को पीने की या उससे बनी पनीर खाने की इच्छा की तो वह मुझे नहीं मिल पाया।</p>
<p>यहां पर हम लोगों ने दिन का भोजन लिया। भोजन में इस्क्यूस (iskuss) की रसेदार सब्जी और चावल था। उन्होनें बताया कि यह सब्जी कुछ लौकी और कोहड़ा जैसे होती है। भूख बहुत जोरों से लगी थी। सब कुछ स्वादिष्ट लगा।</p>
<p style="text-align:left;">&nbsp;</p>
<div style="text-align:left;"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/madakinikyongnoslafalls.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/madakinikyongnoslafalls.jpg?w=225" border="0" alt="" /></a></div>
<p style="text-align:left;">लौटते समय हमें कई झरने मिले पर हम लोग एक खास झरने पर रूके। हमारे टैक्सी ड्राइवर ने इसका नाम मंदाकिनी झरना बताया। वहां मंदाकिनी &#8216;राम तेरी गंगा मैली&#8217; फिल्म की हिरोइन है। उस फिल्म में वह इस झरने में नहाती है। इसलिए यह मंदाकिनी झरने के नाम से प्रसिद्व है। यहां पर एक बोर्ड लगा था। जिस पर इसका नाम Kyongnosla falls लिखा था। टैक्सी ड्राइवर के मुताबिक यह बोर्ड दो साल पहले पर्यटन विभाग ने लगाया है।</p>
<p>मैंने &#8216;राम तेरी गंगा मैली&#8217; फिल्म नहीं देखी है। मैं नहीं जानता कि यह सही अथवा नहीं। हो सकता है कि वहां के टैक्सी ड्राईवर पर्यटक को आकर्षित करने के लिये यह बात कहते हों। पर यदि यह सही है तो इसे मंदाकिनी झरने के नाम से पुकारा जाए और कुछ &#8216;राम तेरी गंगा मैली&#8217; फिल्म के साथ जोड़ा जाए तो कुछ ज्यादा लोग आकर्षित होंगे।</p>
<h3 style="text-align:center;">सात राजकुमारियां, जिन्होंने प्रकृति से शादी कर ली</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sevensistersfallssikkim.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sevensistersfallssikkim.jpg?w=225" border="0" alt="" /></a>हम लोगों ने गैंगटॉक से युमथांग घाटी (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Yumthang_Valley">Yumthang valley</a>), युमसंगडॉन्ग (Yumesondong) घूमने का २ दिन १ रात का पैकेज लिया। हमें गुरूडोंगमर (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Gurudongmar">Gurudongmar</a>) झील के बारे में नहीं मालूम था। इसी लिए वह वाला पैकेज नहीं लिया। इसे घूमने के लिए ३ दिन और २ रात का पैकेज लेना पड़ता था।</div>
<div>हम सुबह गैंगटॉक से निकले। हमारा रात का पड़ाव लाचुन्ग (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Lachung">Lachung</a>) में था। यह २६२४ मीटर (८६१० फीट) की ऊंचाई पर है। रात में यहीं रुकना था और अगले दिन सुबह युमथांग घाटी और युमसंगडॉन्ग जाने का प्रोग्राम था।</div>
<p>सिक्किम झीलों और झरनों का प्रदेश है नथुला पास जाते समय हम लोगों को बहुत सी झीलें मिली थी जिसमे सबसे महत्वपूर्ण छंगू झील थी। लाचुंग आते समय हमको बहुत सारे झरने मिले। सबसे पहला महत्वपूर्ण झरना सात बहने (seven sisters) पड़ा।</p>
<p>सात बहने झरने में पानी पहाडी से सात चरणों मे नीचे रास्ते तक गिरता है। इसलिए इसे सात बहने कहा गया है। वहां पर इसके बारे में कथा भी बतायी गयी। राजा की ७ राजकुमारियां थीं। उन्हें प्रकृति से प्रेम था और वे इसी झरने के रूप में हमेशा प्रकृति की हो गयीं । इसलिए इसका नाम सात बहने पड़ा।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/damchunfthang.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/damchunfthang.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<p>सिक्किम भाषा में छू शब्द का अर्थ है, पानी। वहां झरने, नंदियां हैं इसलिए अक्सर जगहों, झरनो के नाम में छू शब्द जोड़ दिया जाता है।</p>
<p>रास्ते में हम लोगों को छूंगथंग (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Chungthang">Chungthang</a>) नामक जगह मिली। यहाँ पर भी टिस्ता और लाचुंग नदी का सगंम है। यहां नदी पर डैम बन रहा है। पानी रोका जायगा और सुरंग के द्वारा के मंगन के पास ले जाया जायगा। जहां पर बिजली घर में १२०० मेगावाट बिजली पैदा होगी।</p>
<p>रास्ते में हमें कई लडके, लडकियां बच्चे स्कूल जाते और लौटते समय मिले। मैने कुछ लड़कियों से बात की।</p>
<div>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/futangschoolgirlsikkim.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/futangschoolgirlsikkim.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a>यह लड़कियां फुटंग स्कूल में पढ़ रही थी। उनके स्कूल में दो मीटिंग होती है। वे दूसरी मीटिंग में पढने जा रही थी। उन्होंने बताया,<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/amitabhbachchanfallssikkim.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/amitabhbachchanfallssikkim.jpg?w=225" border="0" alt="" /></a></p>
</div>
<div>
<blockquote><p>&#8216;हमारा स्कूल अंग्रेजी मीडियम स्कूल है । इसमे सिक्किमी भाषा पढ़ायी जाती है पर हिन्दी नही पढ़ायी जाती है।&#8217;</p></blockquote>
</div>
<p>उन्होंने अपनी कापी में सिक्किम भाषा में लिखा लेख भी दिखाया। मुझे वह देवनागरी में लगा। मेरे पूछने पर कि यदि वे हिन्दी नहीं पढ़ती है तो हिन्दी में कैसे बात कर पा रही हैं। उन्होंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;थोरा-थोरा हिन्दी आती है।&#8217;</p></blockquote>
<p>रास्ते में एक और झरना मिला। मैने इसका नाम पूछा तो ड्राइवर ने बताया की यह अमिताभ बच्चन झरना है। यदि आप इसे देखेगें तो समझ जायेगें है कि हमारा टैक्सी ड्राइवर इसे अमिताभ बच्चन झरना क्यों कह रहा था।</p>
<p>यहाँ पर बड़ी इलायची भी पैदा होती है, जिसका पेड़ भी हम लोगों ने रास्ते में देखा।</p>
<div>
<h3 style="text-align:center;">तारीफ करूं क्या उसकी, जिसने तुझे बनाया</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yusemdong-zero-point-1.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yusemdong-zero-point-1.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<p>लाचुंग से सुबह हम लोग युमसंगडॉन्ग (Yumesondong) और युमथांग घाटी (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Yumthang_Valley">Yumthang valley</a>) देखने के लिए निकले। युमसंगडॉन्ग ज्यादा दूर है। इसलिए पहले उसे देखने की सोची। सुबह भाग्य हमारे साथ नही था। हल्की-हल्की बूंदा-बांदी हो रही थी और बादल छाये हुये थे। इसलिए रास्ते में न तो कुछ ठीक से देख पाये और न ही चित्र ले पाये। मुझे कुछ दुख भी लग रहा था कि इतनी दूर आने के बाद लगता था कि सब व्यर्थ ही रहेगा।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yusemdong-zero-point-snow.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yusemdong-zero-point-snow.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a>युमसंगडॉन्ग में हम लोग जीरो प्वांइट तक गए। इसे जीरो प्वाइंट इसलिये कहा जाता है क्योंकि यहां रोड समाप्त हो जाती है। यह लगभग ४६६३ मीटर १५३०० फीट की ऊँचाई पर है हम लोग जब पहुंचे तो बूंदा बादीं बन्द हो गयी थी पर बादल थे। लेकिन बहुत जल्दी ही भाग्य ने हमारा साथ दिया और धूप निकल आयी। हम लोग वहां करीब एक घण्टा रहे और पूरे समय मौसम सुहावना रहा। मुझे लगा कि शायद भगवान भी हम लोगों का साथ देना चाहते है। यहाँ पर बहुत सी जगह बर्फ जमी हुई थी। बहुत सारे पर्यटक थे और बर्फ में खेल रहे थे।</p>
<p>इस जगह की खूबसूरती कुछ अलग कस्म की है और इसे बयान कर पाना मुश्किल है। इसके लिये मेरी जबान पर अंग्रेजी का शब्द &#8211; raw beauty आता है। मैं नहीं जानता कि इसे हिन्दी में क्या कहा जाय। मुझे तो बस यही गाना याद आता था। <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yusemdong-zero-point.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yusemdong-zero-point.jpg?w=250&#038;h=188" border="0" alt="" width="250" height="188" /></a></p>
<blockquote><p><em>&#8216;तारीफ करूं क्या उसकी,</em><br />
<em>जिसने तुझे बनाया</em><br />
<em>यह चांद सा रोशन चेहरा</em><br />
<em>झुल्फ़ों का रंग सुनहरा।</em><br />
<em>यह झील सी नीली आंखें,</em><br />
<em>कोई राज है इसमें गहरा।&#8217;</em></p></blockquote>
<p>यहां एक बात मुझे अच्छी नही लगी कि चारों तरफ बिसलेरी, शराब की बोतलें, रैपर इधर उधर पड़े हुए थे। यदि इन रैपरों की गंदगी नही हटायी गई तो बहुत जल्दी ही यह बेहतरीन जगह एक कूड़ेखाने में बदल जायेगा। सिक्किम में सबसे ज्यादा पैसा पर्यटन से आता है। मेरे विचार से सरकार को कुछ कदम अति शीघ्र उठाने चाहिए:</p>
<ul>
<li>इन जगहों पर तीन तरह के कूड़ा फेकने की व्यवस्था होनी चाहिए एक में शीशा, दूसरे में प्लास्टिक एवं तीसरे में कागज। इन्हें सप्ताह में दो बार उठाया जाना चाहिए अन्यथा बहुत शीघ्र ही यह जगह घूमने के लायक नही रह जायेगी।</li>
<li>सार्वजनिक शौचालय भी होने चाहिए जिसको पैसा देकर प्रयोग किया जा सकता है। युमसंगडॉन्ग में न कोई पेड़ है, न ही कोई आड़। पुरूष तो जहां चाहे वहां शंका निवारण कर ले पर महिलाओं को अवश्य परेशानी होती होगी।</li>
</ul>
<p>यहां पर दो अस्थायी दुकाने थी। दोनों में शराब और चाय मिल रही थीं। एक दुकान को एक जाकिन नामक महिला चला रही थी। उसने कुछ देर तक मुझसे बात की लेकिन बाद में रूठ गयी और बात करने से मना कर दिया क्योंकि मैंने उसके दुकान से चाय नहीं पी। मैने चाय इसलिए नहीं पी क्योंकि उसमे चीनी बहुत मिली हुई थी और मीठी थी और मैं चीनी नहीं के बराबर लेता हूं। वह युमसंगडॉन्ग जैसी जगह चाय की दुकान लगा कर चाय और शराब बेच रही थी। यह साहस का काम है &#8211; शायद महिला सशक्तिकरण यही है। मैं बिना चाय पिये उसे पैसे दे कर, न खुद को, न ही उसको शर्मिंदा करना चाहता था। शायद मुझसे गलती हो गयी &#8211; मीठी ही सही, मुझे चाय पी लेनी चाहिये थी।</p>
<h3 style="text-align:center;">फूलों के रंग से &#8230; लिखी &#8230; पाती</h3>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yumthangvalley.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/yumthangvalley.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></p>
</div>
<div>युमसंगडॉन्ग से वापसी पर, हमें युमथांग घाटी और गर्म पानी का झरना देखना था। युमथांग घाटी फूलों की घाटी है।</div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/flowers.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/flowers.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<div>यहाँ पर जाने के लिए सबसे अच्छा समय अप्रैल का होता है। हम लोग वहां मई के अन्त में पहुंचे थे। इस समय तक अधिकतर फूल समाप्त हो चुके थे लेकिन युमथांग घाटी युमसंगडॉन्ग और, के बीच तरह -तरह के लाल, नारंगी, बैगनी, पीले और सफेद रंग के फूल थे। इन रंगों में भी, कुछ गहरे थे तो कुछ हल्के और बहुत सुन्दर लग रहे थे।</div>
<div>रास्ते मे एक जगह ड्राइवर ने गाड़ी रोकी और एक सफेद फूल तोड़कर लाया। उसकी महक बहुत अच्छी थी। उसने बताया, इसे फले मेहतो कहते हैं और <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kalimpong">कालिम्पॉङ</a> में इस फूल से अगरबत्ती बनायी जाती है।</div>
<div>
<p>वापस लौटते समय, हम लोगों के सामने से एक जानवर भी गुजरा जो काले रंग का था तथा उसकी पीठ सफेद रंग की थी। यह ऊदबिलाव जैसा था और ड्राइवर के मुताबिक माल-सापटो है। मैं नहीं समझ पाया कि यह क्या है और इसका अंग्रेजी में क्या नाम है।</p>
<p>रास्ते में पत्थरों पर नारंगी/ लाल रंग था। मुझे पहले लगा कि इन्हे रंगा गया है पर एक जगह मैंने उन्हें छू कर देखा तो लगा कि यह प्राकृतिक है। लगता है कि उनमें आयरन है जो कि आक्सीजन के साथ प्रक्रिया करने के कारण इस रंग के हो गए हैं। मंगल ग्रह भी, इसी कारण लाल रंग का दिखायी पड़ता है और सेब काटने के बाद रंग बदल देता है।</p>
</div>
<div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/stoneredironoxygen-1.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/stoneredironoxygen-1.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/pine-leaves.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/pine-leaves.jpg?w=225" border="0" alt="" /></a></div>
<p>रास्ते मे चीड़ के पेड़ भी थे । इन पेड़ो में डाल समाप्त होने की जगह लाल व पीला/ धानी रंग का फूल सा दिखाई पड़ रहा था। ऎसा लगता था कि बड़े दिन पर क्रिस्मस का पेड़ सजा हुआ है। मैंने एक जगह पास जाकर देखा तो पता चला कि यह फूल नहीं है पर नयी पत्तियां निकल रही है।</p>
<p>युमथांग घाटी लाचुन नदी पर है और यह एक सुन्दर सी जगह है । हम लोगो नें सुबह नाश्ता नहीं किया था, अपने साथ ले गये थे। यहीं पर नाश्ता किया और चाय पी।</p>
<p>युमथांग घाटी के पास ही गर्म पानी का झरना है। लोगो ने बताया कि इसमे नहाने से त्वचा की बीमारियां ठीक हो जाती है। इस पानी में सल्फर मिला हुआ है।</p>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/hotspringyumthangvaalley.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/hotspringyumthangvaalley.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
</div>
<div>गर्म पानी के झरने पर पहुंच कर मुझे अपने स्कूल कि रसायन शास्त्र के प्रयोगशाला की याद आयी क्योंकि वहां पर कुछ उसी तरह की गन्ध आ रही थी। मैंने पानी से कुल्ला भी किया तो उसका स्वाद अजीब सा था। यह पानी में सल्फर मिले होने के कारण था। पानी बहुत गर्म था। वहां कुछ समय रह कर हम लोग वापस होटल चले आए और सामान बांधकर वापस गैंगटॉक चल दिए।</div>
<div>इसी रास्ते में हमारी मुलाकात एक ऐसे शख्स से हुई जिस तरह के शख्स मुझे शर्मिन्दा करते हैं और मैंने एक चिट्ठी &#8216;<a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/06/good-manners-su-soo-privacy-rights.html" >क्या आप इस शख्स को जानते हैं?</a>&#8216; शीर्षक से लिखी।</div>
<div>
<h3 style="text-align:center;">मस्का नहीं, मस्कारा कैसे लगायें और मस्का पायें</h3>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/ganeshtokview.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/ganeshtokview.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a>हम लोगों को दो दिन गैंगटॉक में रहना था और यह समय हमने यहीं की जगहों को घूमने में बिताया। पहले दिन हम लोगों ने गणेशटोक गये। यहां पर गणेशजी का मंदिर है और वहाँ से शहर का नजारा दिखाई पड़ता है। यहां से दृश्य साफ तरीके से नहीं दिखाई पड़ रहा था क्योंकि बादल छाये हुए थे और हल्का-हल्का पानी बरस रहा था। गणेशटोक के बगल में ही चिड़ियाघर है। पानी बरसने के कारण हम वहां न जाकर, फूलों की प्रर्दशनी देखने चले गये ।</p>
<div>यह फूलों स्थायी प्रर्दशनी है। क्योंकि बहुत से पेड़ जमीन पर लगे हुए है और कुछ गुलदस्ते भी जगह-जगह पर रखे हुए हैं। पानी बरस रहा था यह ऊपर से ढ़की है इसलिए इसके अन्दर बहुत से लोग थे। यहाँ जगह -जगह फोटो सेशन चल रहा था लोग तरह-तरह के पोज़ (Pose) देकर फोटो खिंचवा रहे थे।</div>
<div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/manojsiliguri.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/manojsiliguri.jpg?w=262&#038;h=196" border="0" alt="" width="262" height="196" /></a></div>
</div>
<div>
<p>यहां पर मेरी मुलाकात मनोज से हुई जो कि अपनी महिला मित्र (या शायद उस की पत्नी हो) के साथ, सिल्लीगुड़ी से घूमने आये थे। इन लोगों के व्यवहार से लगता था कि शायद ये दोनों मित्र है और शादी शुदा नही है। मैने जब इनसे पोज़ देकर चित्र खीचने की बात की तो युवती शर्मा गई। मुझे उनसे यह पूछना ठीक नही लगा कि क्या वे शादी शुदा हैं।</p>
</div>
<p>वहाँ से निकलकर, हम लोग नमग्याल तिब्बतोलोजी संस्थान  (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Namgyal_Institute_of_Tibetology">Namgyal Institute of tibbtology</a>) देखने गये। इस संस्थान में तिब्बती सभ्यता एवं भाषा  पर शोध होता है।  यह तीन मंजिले  भवन में है।</p>
<ul>
<li>पहली मंजिल संग्रहालय पर संग्रहालय है;</li>
<li>दूसरी मंजिल पर  पुस्तकालय है; और</li>
<li>तीसरी मंजिल पर चित्र प्रर्दशनी लगी हुई थी।</li>
</ul>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/namgyalinstituteoftibbtology.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/namgyalinstituteoftibbtology.jpg?w=320&#038;h=240" border="0" alt="" width="320" height="240" /></a>संगहालय में गौतम बुद्व और बौध धर्म से जुड़े लोगों की मूर्तियां लगी हैं। वहां प्रार्थना की पुस्तकें और कुछ अन्य वस्तुएं रखी हुई थीं जिसमें लिखा था कि यह तांत्रिक विद्या में प्रयोग की जाती हैं। मुझे नही मालूम था कि बौध धर्म में भी कुछ तांत्रिक विद्या का प्रयोग होता है मैंने वहाँ के गार्ड से पूछा,</div>
<blockquote><p>&#8216;क्या बौध धर्म मे भी तांत्रिक विद्या  होती है&#8217;?</p></blockquote>
<p>उसने कहा मुझे नहीं मालूम  पर उसने बगल में बैठी एक लड़की की तरफ  इशारा कर उससे  पूछने को कहा।</p>
<p>युवती ने अपना  नाम पासंग  बताया । उसने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं वाणिज्य (commerce) में स्नातक हूं। मेरे पिता इसी सस्थान  में शोधकर्ता थे और मैं इस समय संग्रहालय की इंचार्ज हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसके मुताबिक वह सारा  सामान  सब बौद्ध धर्म की पूजा में प्रयोग किया जाता है।</p>
<p>पासंग गुलाबी रंग की बख्खू ड्रेस पहने हुई थी। उसकी पलकें भी हल्के गुलाबी रंग की थी। वह प्यारी सी गोल मटोल बिटिया लग रही थी। मैंने पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;पलको का गुलाबी रंग प्राकृतिक है अथवा फैशन।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसने बताया कि यह फैशन  है।</p>
<p>हम लोग दूसरी मंजिल पर पुस्तकालय देखने चले गये। जाते समय मेरे व मेरी पत्नी के बीच बात शर्त लगी। मेरे विचार से मस्कारा (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Mascara">mascara</a>) लगाये हुई थी पर मेरी पत्नी के विचार से उसने आई लाइनर (<a title="Eye liner" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Eye_liner">eye-liner</a>) लगाये हुई थी । मैंने लौटकर पासंग अपनी शर्तें के बारे में बताया। वह मुस्करा कर बोली,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप  अपनी पत्नी से ज्यादा महिलाओं के फैशन के  बारे में नहीं जानते हैं।  आप यह शर्त हार गये है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मुझे नहीं मालुम था कि मस्कारा भौंहों में लगाया जाता है और आई लाइनर पलकों में। मेरा हारना लाजमी था। शुभा स्वयं फैशन नहीं करती पर उसे इन बातों के बारे में मुझसे ज्यादा ज्ञान है।</p>
<p style="text-align:center;"><em>जीवन में सुन्दर लगना, न स्वयं को उत्साहित करता है पर दूसरों को भी अच्छा लगता है।</em></p>
<p style="text-align:center;"><em>देखिये कैसे मस्कारा लगायें।</em></p>
<p style="text-align:center;"><span style="text-align:center; display: block;"><a href="http://unmukth.wordpress.com/2011/02/05/sikkim/"><img src="http://img.youtube.com/vi/bVOpCGk1ngk/2.jpg" alt="" /></a></span></p>
</div>
<div>
<h3 style="text-align:center;">सिक्किम में, क्या लड़कियां की संख्या, लड़कों से ज्यादा हैं?</h3>
</div>
<div>हम लोग गैंगटॉक  में वहीं का खाना खाना चाहते थे। इसके  लिए  हमें तिब्बत होटल में खाने के लिये  सुझाव दिया गया था। इस होटल में स्नो लायन (Snow Lion) नाम का रेस्ट्रां   है। यहां वेटर ने हमें शाकाहरी खाना के लिए Vegetarian  chetse Detse और  Vegetarian Phing she rice  खाने की सलाह दी। इसमें सब्जी उबाल कर बनायी गयी थी और मसाला बहुत कम था। हमें यह खाना पसन्द आया।  हमने अगले दिन पुन: वहां खाना खाने गये और मांसाहारी खाना खाया।</div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimzoo-1.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimzoo-1.jpg?w=320&#038;h=240" border="0" alt="" width="320" height="240" /></a></div>
<div style="text-align:center;"><em>सिक्किम का चिड़िया घर </em></div>
<div>गैंगटॉक में तारगाड़ी  (Rope way) भी है। यह तारगाड़ी  गुलमर्ग के बराबर तो अच्छी नहीं है पर तारगाड़ी पर चढ़ने का एक अलग मजा है। यह  बहुत ऊंची  है और इसमें गैंगटॉक शहर दिखाई पडता है। हम लोग इस पर घूमने के बाद चिड़ियाघर  देखने  गये।</div>
<div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimzoosnowleopard.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimzoosnowleopard.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<p>मुन्ने को जानवर बहुत पंसद है। इसलिए हम जहां भी जाते थे वहां चिड़ियाधर या राष्ट्रीय उद्यान अवश्य जाते थे। मैंने कई जगह के चिड़ियाघर देखें है पर  गैंगटॉक तरह का चिड़ियाघर नहीं देखा है। इसमे  जानवर तो  कम  हैं लेकिन  यह है,   अजूबा। सच पूछिए तो यह चिड़ियाघर नहीं,  जंगल है जंगल &#8211; जंगलो के बीच, उसी में जानवरों का रहने का स्थान।  यहां पर मुझे, मालुम नहीं क्यों, जुरैसिक पार्क (<a title="Jurassic Park (film)" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Jurassic_Park_(film)">Jurassic Park</a>) फिल्म की याद आयी।</p>
<p>यहां हमने  कुछ ऎसे जानवर देखे जो वास्तव में कभी नहीं देखे। इनमें स्नो लेपर्ड    (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Snow_leopard">Snow leopard</a>)  लाल पांडा (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Red_panda">Red panda</a>),  हिमालयन पाम सिवेट (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Himalayan_Palm_Civet">Himalayan palm civet</a>) टाइगर बिल्ली, तिब्बती भेड़िया (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Tibetan_wolf">Tibetan wolf</a>)  शामिल है।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/teastallsikkimzoo.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/teastallsikkimzoo.jpg?w=224&#038;h=169" border="0" alt="" width="224" height="169" /></a>चिड़ियाघर  के  बीच छोटी सी दुकान जगह है, जहां पर चाय व कोल्ड ड्रिंक आदि ले सकते है ।  इस दुकान को दो बहने चलाती  हैं। बड़ी बहन का नाम मीना कुमारी प्रधान है । हमनें वहीं बैठकर  चाय पी। गैंगटॉक मे कुछ लड़किया या महिलाएं देखने को ज्यादा मिलती है और दुकानो को वही चलाती  है। हमनें पूछा कि ऎसा क्यों है तो उसने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;यहाँ पर पति और पत्नी दोनों काम करते हैं। मेरे पति  ए०जी०आफिस में काम करते हैं और मैं इस दुकान को अपनी बहन की सहायता से चलाती हूं  मैं कुछ पैसा कमाना चाहती हूं। ताकि अपने बच्चों को पढने के लिए  कलकत्ता भेज सकूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>मेरे दूसरे सवाल पर कि क्या सिक्किम में महिलाएं ज्यादा हैं?  उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह  सच है क्योंकि यहाँ पर ४ लड़कियां है तो केवल एक लड़का है।&#8217;</p></blockquote>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimzooredpanda.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimzooredpanda.jpg?w=265" border="0" alt="" /></a>मैं नहीं समझता हूं कि  लड़कियों और लड़को में इतना अन्तर हो सकता है। मैं हमेशा यही समझता हूं कि लड़की और लड़के के पैदा होने की संभावना बराबर है। मैंने कुछ समय पहले इसी सिद्धान्त पर एक सवाल पूछा था। यदि आपने इसे नहीं देखा हो और कुछ दिमागी कसरत करना चाहें तो <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/09/lies-damned-lies-statistics.html">यहां</a> देखें और इसका जवाब <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/09/probability-boy-girl.html">यहां</a> है।</div>
<p>मुन्ना जीव संबन्धी क्रियाओं  को, गणित द्वारा समझने का काम करता है। उसका कहना है कि,</p>
<blockquote><p>&#8216;महिलाओं में एक्स-एक्स क्रोमोसोम होता है और पुरूषो में एक्स -वाई क्रोमोसोम होता है। और वाई क्रोमोसोम, एक्स क्रोमोसोम से छोट होता है और तेज चलता है इसलिये इससे गर्भाधान होने की संभावना ज्यादा होती है पर पुरूषों का गर्भपात ज्यादा होता इसलिये पैदा होने वाले बच्चों में लड़के और लड़कियो की संख्या लगभग बराबर रहती है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मालुम नहीं कौन ठीक है &#8211; मैं या मुन्ना। ऐसे <a href="http://hindi.webdunia.com/news/news/international/0904/01/1090401147_1.htm">यह रिपोर्ट</a> कुछ ऐसा ही कहती है।</p>
</div>
<div>
<h3 style="text-align:center;">क्या नेपाली लड़कियों के लिये कुछ भी मुश्किल नहीं है?</h3>
<p>हम लोग दूसरे दिन भी गैंगटॉक घूमने निकले। रास्ते में जगह जगह कुछ कमरे से बने हुए दिखाई पड़ते थे। इनमें ड्रम रखे हुए थे जो कि पानी के बहाव से घूम रहे थे। हमारे ड्राइवर ने बताया कि इसे माने (यानी मंदिर) कहते है। सिक्किम में बौद्घ धर्म का जोर है और इसमें बौद्घ धर्म से सम्बन्धित पवित्र पुस्तके रखी रहती है और ड्रम के बाहर बौद्घ धर्म के मंत्र लिखे हुए हैं पानी के बहाव से घूमते रहते हैं। बौद्घ आश्रम में भी इस तरह के गोले होते हैं जिसे लोग हाथ से घुमाते रहते है। यह उसी तरह की बात है जिस तरह से हिन्दू धर्म के लोग रोज सुबह उठकर राम नाम की माला जपते हैं। सिक्किम में इस तरह के मंदिर मरने के बाद मृतक की याद में बनाये जाते हैं।<br />
<img src="http://unmukth.wordpress.com/tmp/moz-screenshot.jpg" alt="" /><br />
<img class="alignright" title="Ban jhakri falls Sikkim" src="http://lh4.ggpht.com/_VD9tZkRYrQ0/STdGDlQK2JI/AAAAAAAABBM/2DW9Q6I7_Ao/Ban%20Jhakri%20falls.jpg" alt="" width="211" height="282" />सबसे पहले, हम लोग सुबह ताशी व्यू पाइंट (Tashi view point) देखने गये। यह युमथांग घाटी के रास्तें में पड़ता है पर घाटी जाते समय हम लोग यहां नही रूके थे क्योंकि उस समय यहां मौसम एकदम साफ नहीं था और हम लोग चाहते थे कि जिस दन मौसम साफ रहे उस दिन वहां जाएं। मौसम आखिरी दिन तक साफ नहीं हुआ इसलिए हम लोग आखिरी दिन वहां गए। कञ्चनजङ्घा रेंज तो नहीं दिखाई पड़ी पर यहां पर सरकारी दुकान है जिसमें यादगार रखने के लिए समान (souvenir) मिलता है यह बहुत अच्छे हैं और इनके दाम भी वाज़िब हैं। यदि आप सिक्किम जांए और इस तरह की वस्तुयें खरीदने की बात हो तो यहीं से खरीदें।</p>
<p>बन झकरी झरना (Ban Jhakri falls) सुन्दर जगह है। यहां पर एक झरना और पार्क बना हुआ है।</p>
<p>इस पार्क में सूर्य की ऊर्जा से चलने वाली बत्तियां लगी हुई हैं और ऊर्जा के बारे में बताने की चेष्टा की गई है। एक कमरे के अन्दर ऊर्जा से सम्बन्धित कुछ बातें लिखी है। यहां इस तरह के खेल भी हैं जो बताते हैं कि एक तरह की ऊर्जा दूसरी तरह की ऊर्जा में कैसे परिवर्तित हो सकती है।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/banjhakrifallsnepaligirls.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/banjhakrifallsnepaligirls.jpg?w=218&#038;h=163" border="0" alt="" width="218" height="163" /></a>यहां एक ड्रम है जब बच्चे इसके अंदर चलते हैं तो यह घुमाता है। घूमने से ऊर्जा उत्पन होती है जिसे संगीत बजाने वाला वाद्य चलता है। यहां एक फिसलने वाली स्लाईड है। फिसलने के कारण बिजली की एक बत्ती जलती है।</p>
<p>यहां पर मुझे  लड़कियों की टोली मिली। वे अपने गुट में  नाच वा गा रहीं थी। मुझे लगा कि वह स्कूल की लड़कियां है पर उन्होंने बताया,<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/banjhakrienergyparktourist.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/banjhakrienergyparktourist.jpg?w=225" border="0" alt="" /></a></p>
<blockquote>
<blockquote><p>&#8216;हम नेपाली हैं और एक फिल्म की शूटिंग के लिये आये हैं। नेपाली लड़कियों के लिये कुछ भी मुश्किल नहीं है।&#8217;</p></blockquote>
</blockquote>
<p>मैंने कहा कि वे क्या मुझे सिक्कमी भाषा में कोई गाना सुना सकती हैं। इस पर वे शर्मा गयीं क्योंकि उन्हें सिक्कमी भाषा नहीं आती थी लेकिन उन्होंने मुझे एक नेपाली और एक हिन्दी गाना भी सुनाया।</p>
<p>उद्यान देखने के बाद, हम रकें (Ranke) बौद्घ आश्रम गये । यह बहुत ही सुन्दर जगह है । यहां मेरी मुलाकात एक लामा से हुई। उसका नाम कर्मा नेक्से था। उसने बताया</p>
<blockquote>
<blockquote><p>&#8216;मेरी आयु १६ वर्ष है। मैं ७ वर्ष पहले यहां आया था। यहां  बौद्घ धर्म की शिक्षा ग्रहण करता हूं।&#8217;</p></blockquote>
</blockquote>
</div>
<div>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimrankemonastry.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimrankemonastry.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a>मेरे कहने पर उसने एक बौद्घ पूजा का मंत्र भी सुनाया।</p>
<p>हम लोग रूमटेक (<a title="Rumtek Monastery" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Rumtek_Monastery">Rumtek</a>) बौद्घ आश्रम भी गये। यह आश्रम रकां आश्रम के जितना सुन्दर तो नहीं है पर यह सबसे महत्वपूर्ण आश्रम है।</p>
</div>
<div>रूमटेक आश्रम मे हर तरफ इन्डो- तिब्बत फोर्स लगी हुई थी यहां चित्र लेने पर मनाही थी। मुझे कुछ आश्चर्य हुआ। मैंने एक जवान से पूछा कि ऎसा क्यों है। उसके मुताबिक लामा के दो गुट है जिनमें आपस में लड़ाई रहती है। इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से तैनात है। उसके अनुसार इस आश्रम में न केवल सोने की मूर्तियां है पर बौद्घ धर्म से संबधित कुछ ऎसी चीजें है जो कि वे अमूल्य है। यदि उन्हें कुछ हो गया तो बौध धर्म की धरोहर ही समाप्त हो जायेगी। इसलिए वे लोग उसकी सुरक्षा के लिए लगे हुए हैं।</div>
<div>
<h3 style="text-align:center;">क्या आपको मालुम है कि सबसे अच्छा वक्तिगत कैक्टस का बगीचा कहां है?</h3>
<p>कालिम्पॉङ (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kalimpong">Kalimpong</a>) सिक्किम में नहीं है। यह पश्चिम बंगाल का हिस्सा है। यह गैंगटॉक जाने के रास्ते के पास में ही है। इसीलिये हम लोगों ने वहां भी जाने का प्रोग्राम बनाया।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/deolaviewpointkalinpong.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/deolaviewpointkalinpong.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a><br />
हम लोग सुबह गैंगटॉक से सिलीगुड़ी के लिये  कालिम्पॉङ (kalimpong) के लिये चले।  दिन में कालिगंपॉड घूमना था और शाम तक सिलीगुड़ी पहुंचना था जहां हमें रात गुजारनी थी। हमें बताया गया था कि कालिम्पॉङ  में दो जगह देखने के लिए हैं इसलिए हम लोग रात में कालिम्पॉङ नहीं रूके।<br />
<a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/deolaviewpointgardenkalinpong.jpg"><img class="alignleft" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/deolaviewpointgardenkalinpong.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a><br />
कालिम्पॉङ में सबसे पहले हम लोग देवला हिल (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Deolo_Hill">Deolo hill</a>) व्यूप्वाइंट गये। यह बहुत ही सुन्दर सी जगह है, पार्क है और इसमें एक गेस्ट हाऊस भी है। जिसमें आप ठहर सकते है। हालांकि कोहरे के कारण दृश्य अच्छा नहीं था। कञ्चनजङ्घा रेंज  तो दिखायी नहीं पड़ी पर  डैनी डेंज़ोंग्पा (<a title="Danny Denzongpa" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Danny_Denzongpa">Danny Denzongpa</a>) फिल्म एक्टर की शराब बनाने की फैक्टरी को देख सके।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/cactusgardenkalinpong.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/cactusgardenkalinpong.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a>दूसरी जगह जो हम लोगों को देखनी थी , वह एक प्राइवेट जगह है लेकिन उसमें बहुत सुन्दर कैक्टस हैं। इस जगह को देखने के लिए  पहले कोई टिकट नहीं था।  लेकिन इसके मालिक ने आने वालों की संख्या देखते हुए पांच रूपया का टिकट लगा दिया। उनके मुताबिक प्रतिदिन, लगभग २५० लोग कैक्टस को देखने आते है। यहां पर तरह तरह के कैक्टस हैं। कैक्टस के पेड़ो में  नारंगी, बैगनी, लाल और सफेद रंग के फूल भी लगे थे। यहां लोगो ने बताया  कि मालकिन ने बताया कि वहां पर एक रेस्ट हाउस भी है जिसमें ६ कमरे हैं। दो बिस्तर के कमरे का ५५०/-रू०  और तीन बिस्तर के कमरे का ७५०/-रू० किराया है।<br />
<a href="http://www.pineviewcactus.com/pictures/NEW/5.jpg"><img class="alignleft" src="http://www.pineviewcactus.com/pictures/NEW/5.jpg" border="0" alt="" width="200" height="146" /></a></p>
<div><em>यह चित्र बगीचे की वेबसाइट से है और उन्हीं के सौजन्य से है।</em></div>
<p>यह लोग <a href="http://www.pineviewcactus.com/index.htm">Pineview Nursery</a> नाम से अपनी वेबसाइट भी चलाते हैं जहां से इनके बारे में विस्तार से जानकारी मिल सकती है।</p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/viewcactusgardenkalinpong.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/viewcactusgardenkalinpong.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></p>
<p>यहां से घाटी में लगे चीड़ के पेड़ो का दृश्य बहुत सुन्दर दिखायी पड़ता है इसी लिये इसका नाम उन्होंने Pineview Nursery  रखा है।</p>
<p>हम लोगों ने दिन का खाना, ज्योति रेस्ट्राँ  में खाया और सिल्लीगुड़ी के लिये चल दिए। अगले दिन हमें, बागडोगरा से, वापसी के लिये हवाई जहाज पकड़ना था।</p>
</div>
<div>
<h3 style="text-align:center;">क्या लोग हिन्दी में भी ब्लॉग  लिख रहे हैं?</h3>
<p>हम लोग सिल्लीगुड़ी शाम को पहुंच गये। जिस जगह हम लोग ठहरे थे उस जगह का नाम चंपा साड़ी बताया गया। थोड़ी देर बाद मैने वहां पर साइबर कैफे ढूंढना शुरू किया। यहां पर सब्जी मंडी है और केवल एक साइबर कैफे। साइबर कैफे के काउंटर पर युवती बैठी थी। वहां ५-६ कंप्यूटर रखे हुए थे।वे सारे विंडोज़ पर थे। मैंने उससे पूछा कि क्या कोई लिनेक्स पर है। उसका जवाब सवाल में था,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह लिनेक्स क्या होता है?&#8217;</p></blockquote>
<div>उसे नहीं मालुम था कि लिनेक्स भी ऑपरेटिंग सिस्टम होता है। मैंने उसे <a href="http://unmukth.wordpress.com/2006/06/01/oss/" >ओपेन सोर्स</a> पर छोटा सा भाषण दिया। मालुम नहीं कितना समझ में आया पर कम से कम एक और को कुछ तो ओपेन सोर्स के बारे पता चला।</div>
<div>
<p>वहां सबसे अच्छी बात यह थी कि फायरफॉक्स वेब ब्रॉउज़र था। इसीलिए मुझे काम करने में मुश्किल नहीं हुई। मैंने अपनी ईमेल चेक की। कुछ का जवाब भेजा। वहां पर २०रू० प्रति घंटा पैसा लिया जाता था और मुझे ३० देने पड़े क्योंकि मैं लगभग १.३० घंटा अन्तरजाल पर था।</p>
<p>उनके कम्पूटर में पुराना फायरफॉक्स था। मैंने उस युवती से कहा कि उसमें नया फायरफॉक्स डाल ले क्योकिं इसमें हिन्दी की मात्रायें ठीक प्रकार से नहीं दिखाई पड़ती हैं। उस युवती ने मुझसे पूछा,</p>
</div>
<blockquote><p>&#8216;क्या लोग हिन्दी में भी ब्लॉग लिखते हैं?&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा हां बहुत सारे लोग हिन्दी में कर रहे है और यह तो बंगाली में भी लिखा जा सकता है।</p>
<blockquote><p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/bagdograairportteashop.jpg"><img class="alignright" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/bagdograairportteashop.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></p></blockquote>
<p>अगले दिन हम लोग बागडोगरा हवाई अड्डा पहले पहुंच गये थे। यहां से ही हमें हवाई जहाज पकड़ना था। यहां काफी पर्यटक आते हैं। इसलिये इसे बढ़िया बनाया गया है। मैंने इसका एक चक्कर लिया। एक जगह तरह-तरह की चाय की पत्ती बिक रही थी। इस दुकान पर patent शब्द लिखा था। मैंने दुकानदार से कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;पेटेंट तो कानून का शब्द है क्या कोई चाय पेटेंट करा रखी है।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसने जवाब दिया,</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं, वर्तनी गलत हो गयी है। यह शब्द patient है। मैं एक तरह की चाय की पत्ती बेचता हूं जो कि डायबटीस् के बिमारों के लिये उत्तम है।&#8217;</p></blockquote>
</div>
<div>मैंने सबसे अच्छी चाय का दाम पूछा तो एक छोटे से पैकेट ९०० रूपये बताया। इस पैकट के द्वारा केवल १० कप चाय बन सकती थी यानि एक कप चाय में केवल चाय की पत्ती का दाम ९० रूपये &#8211; बाप रे बाप।</div>
<div style="text-align:center;">
<p style="text-align:left;">मैंने उससे सस्ती चाय का पैकेट (१० लोगों के लिये) १२० रूपये का लिया। हमारे हवाई जहाज का समय हो चुका था और हम वापस उड़ लिये।</p>
<h3 style="text-align:center;">सिक्किम में ट्रैफिक नियमों का पालन</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimhills.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimhills.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<div style="text-align:left;">सिक्किम में ट्रैफिक नियमों का पालन भारत में किसी अन्य राज्य से बेहतर है। अक्सर कारों  की लम्बी लाइने दिखायी पड़ती हैं। बगल का रास्ता, जो दूसरी तरफ से आने वाली कारों के लिये होता है, खाली ही रहता है। ऎसा नहीं दिखाई पड़ा कि कारें लाइन को तोड़ कर खाली रास्ते पर चलीं जायें जैसा कि अन्य जगहों पर होता है। यहां भी ट्रैफिक जैम होता है पर वह इसलिये क्योंकि रास्ते सकरे हैं और आर्मी के बहुत सारे ट्रक बड़े होते हैं। ट्रैफिक जैम, कारों की लाईन तोड़ने के कारण नहीं होता।</div>
<div style="text-align:left;"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimhills-1.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/sikkimhills-1.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a><br />
सिक्किम में पहाड़ी क्षेत्रों में घूमते हुए हमें कई रोचक से जुमले भी लिखे हुए मिले कि पहाड़ी रास्ते पर कैसे यात्रा की जाए।</div>
<ul style="text-align:left;">
<li>If driving is marriage, then speed is divorce</li>
<li>Mountains are pleasure, if you drive at leisure.</li>
<li>Gentle on my curves.</li>
<li>On my curves, watch your nerves.</li>
<li>Road is hilly, don&#8217;t  be sills.</li>
</ul>
<p style="text-align:left;">हालांकि  मुझे वहां के लोगों को पहाड़ पर गाड़ी चलाने के दो मूलभूत नियमों की समझ कम लगी।</p>
<ul>
<li style="text-align:left;">Don&#8217;t overtake on a turning मोड़ पर किसी गाड़ी से आगे मत जाओ।</li>
<li style="text-align:left;">Give was to upcoming traffic ऊपर जाने वाली गाड़ियों को पहले जाने दो।</li>
</ul>
<p style="text-align:left;">मुझे, यह जुमले कहीं भी लिखे हुए भी नहीं दिखे। हमें अक्सर इन नियमों की याद अपने ट्रैक्सी चालक दिलानी पड़ती थी।</p>
<h3>सिक्किम में संस्कृति और पहनावा</h3>
<p style="text-align:left;">सिक्किम के शहरी इलाके में सारे भारत के लोग आ कर बस गये हैं। लेकिन,  यहां मुख्यतः लिम्बू, लेपचास्, भूटिया, नेपाली, और तिब्बती लोग  हैं। यह अपनी संस्कृति और पहनावे को आज तक निर्वाह कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:left;">भूटिया महिलाओं के पहनावे को खो (kho) या बख्खू (Bakhu) कहतें हैं। बहुत सारे स्कूलों में लड़किया की यही ड्रेस है।</p>
<p>सिक्किम के पारंपरिक पहनावे देखने में बहुत प्यारे लगते हैं। इस विडियो में इसके कुछ झलकियां देखिये।</p>
<span style="text-align:center; display: block;"><a href="http://unmukth.wordpress.com/2011/02/05/sikkim/"><img src="http://img.youtube.com/vi/yRx6jRwOHkc/2.jpg" alt="" /></a></span>
<h3 style="text-align:center;">सिक्किम में महिलाओं का सशक्तिकरण</h3>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/gangtokenergyparkgirls.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/gangtokenergyparkgirls.jpg?w=300" border="0" alt="" /></a></div>
<div>
<p style="text-align:left;">सिक्किम में सबसे मुख्य बात जो मुझको दिखाई पडी वह यह है कि यहां पर काफी लड़कियां &#8211; काम करती हुई, घूमती हुई, या स्कूल जाती हुई-दिखाई पड़ीं। मुझे ऎसा लगा कि यहां पर महिलाओं की संख्या पुरूषों की संख्या से ज्यादा है। वहां के लोगों का भी यही कहना था। हालांकि मैं यह नहीं कह सकता कि यह बात अधिकारिक रूप से यह सच है कि नहीं ।</p>
</div>
<div><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/gangtokzooshopwomen.jpg"><img class="aligncenter" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2011/02/gangtokzooshopwomen.jpg?w=320&#038;h=320" border="0" alt="" width="320" height="320" /></a></div>
<div>
<p style="text-align:left;">वहां पर मैने बहुत सी महिलाओं और लड़कियों से बात भी की। उनसे बात करने पर मुझको लगा की जैसे उनमें अन्य जगह की महिलाओं से ज्यादा आत्म विश्वास है। यह शायद मातृ प्रधान (matriarchal) समाज का प्रभाव हो।</p>
<p style="text-align:left;">यहाँ पर मुझे कहीं भी महिलाओं के साथ छेड़-छाड़  होते नहीं दिखी, जैसा की अपने देश में, अन्य जगह होता है। यहाँ के लोग यह भी बताया कि आप किसी महिला के साथ छेड़-छाड़  करेगें तो सर कलम हो सकता है।</p>
</div>
<p style="text-align:left;">कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यहां पर अन्य राज्यों से ज्यादा ऎड्स है। ऎड्स के कई पोस्टर भी लगे दिखाई पड़े। मैं नहीं कह सकता कि यह बात सच है अथवा नही। वहां पर रहने वाले मेरे एक मित्र के अनुसार,</p>
<blockquote>
<p style="text-align:left;">&#8216;जब समाज में इतना खुलापन हो तो अक्सर सीमायें टूट जाती हैं। इस हालत में ऎड्स का बढ़ना स्वाभाविक है।&#8217;</p>
</blockquote>
<p style="text-align:left;">मैं नहीं जानता कि कि सिक्किम में ऎड्स, भारत के अन्य राज्यों से अधिक है अथवा नहीं, पर यदि कोई मुझसे पूछें कि कौन सा समाज बेहतर है तो मैं यह अवश्य कहना चाहूँगा, यह समाज- जहाँ पर महिलाओं को ज्यादा स्वतन्त्रता है, जहाँ की महिलायें ज्यादा आत्मविश्वासी है- वह भारत के अन्य समाज से बेहतर है।</p>
<p style="text-align:left;">इस चिट्ठी में मैंने लिखा जो मुझे सिक्किम में अनुभव हुआ। लोगों के विचारों में भिन्नता हो सकती है पर मेरी मंशा किसी की भावनाओं को आहत करने की नहीं है।</p>
<p style="text-align:center;">इस यात्रा के दौरान मुझे &#8216;कश्मीर की कली&#8217; फिल्म का गाना</p>
<p style="text-align:center;">&#8216;तारीफ करू क्या उसकी, जिसने तुम्हें बनाया&#8217; की याद आयी।</p>
<p style="text-align:center;">चलते चलते इसे भी सुनिये।</p>
<span style="text-align:center; display: block;"><a href="http://unmukth.wordpress.com/2011/02/05/sikkim/"><img src="http://img.youtube.com/vi/txv7RCe8DXM/2.jpg" alt="" /></a></span>
</div>
<div style="text-align:center;">
<p><em>यह यात्रा विवरण मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।</em></p>
<p><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/06/blog-post.html">सिक्किम &#8211; छोटा मगर सुन्दर</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/06/how-to-reach-sikkim-gangtok.html">गैंगटॉक कैसे पहुंचें</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/07/teesta-dam-protest-north-sikkim.html">टिस्ता नदी (सिक्किम) पर बांध बने अथवा नहीं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/07/natu-la-pass-sikkim.html">नाथुला पास – भारत चीन सीमा</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/08/jesus-christ-silk-route-india.html">क्या ईसा मसीह सिल्क  रूट से भारत आये थे</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/08/spots-between-gangtok-natula-pass.html">मंदाकिनी झरना &#8211; &#8216;राम तेरी गंगा मैली&#8217; फिल्म  वाला</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/09/passage-to-yumesondong-yunthang-valley.html">सात राजकुमारियां, जिन्होंने प्रकृति से शादी कर ली</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/09/yumesondong-zero-point.html">तारीफ करूं क्या उसकी जिसने तुझे बनाया</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/10/yumthang-valley-hot-springs-sikkim.html">फूलों के रंग से &#8230; लिखी &#8230; पाती</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/11/gangtok-visiting-places-1.html">मस्का नहीं, मस्कारा कैसे लगायें और मस्का पायें</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/11/gangto-visiting-places.html">सिक्किम में, क्या लड़कियां की संख्या, लड़कों से ज्यादा हैं?</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/12/blog-post.html">क्या नेपाली लड़कियों के लिये कुछ भी मुश्किल नहीं है?</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/12/blog-post_09.html">क्या आपको मालुम है कि सबसे अच्छा वक्तिगत कैक्टस  का बगीचा कहां है?</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/12/siliguri-bagdogra-airport.html">क्या लोग हिन्दी में भी ब्लॉग लिख रहे हैं?</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/12/sikkim-traffic-rules.html">सिक्किम में ट्रैफिक नियमों का पालन</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/12/sikkim-women-empowerment.html">सिक्किम में महिलाओं का सशक्तिकरण</a>।।</p>
</div>
<p><span style="font-size:x-small;"> </span></p>
<div style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</div>
<div><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Sikkim">Sikkim</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Gangtok">Gangtok</a>, गैंगटॉक, सिक्किम, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Teesta_River">teesta</a>, टिस्ता, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Natu_La">Natu la</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Yumthang_Valley">Yumthang valley</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Hot_springs">hot springs</a>, Kalimpong, Deolo hill, कालिम्पॉङ, देवला हिल व्यूप्वाइंट, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Siliguri">siliguri</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Bagdogra_airport">bagdogra airport</a>, सिलीगुड़ी, बागडोगरा हवाई अड्डा, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Traffic_rules">Traffic</a>, Traffic rules, ट्रैफिक नियम, women empowerment, महिला सशक्तिकरण,</div>
<div><a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>,  <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, <a href="http://www.google.co.in/search?q=%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80+%E0%A4%95%E0%A5%87+%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%87&amp;ie=utf-8&amp;oe=utf-8&amp;aq=t&amp;rls=com.ubuntu:en-US:official&amp;client=firefox-a">मस्ती के लिये</a> सैर सपाटा, <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>, <a title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा विवरण </a>, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</div>
<br />Filed under: <a href='http://unmukth.wordpress.com/category/%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%A8/'>यात्रा वर्णन</a>, <a href='http://unmukth.wordpress.com/category/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80/'>हिन्दी</a>  <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/unmukth.wordpress.com/592/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/unmukth.wordpress.com/592/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&amp;blog=230997&amp;post=592&amp;subd=unmukth&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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		<title>विश्व की संगीत राजधानी – वियाना</title>
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		<pubDate>Mon, 28 Dec 2009 14:14:35 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[film review]]></category>
		<category><![CDATA[travel]]></category>
		<category><![CDATA[travelogue]]></category>
		<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में वियाना यात्रा का वर्णन है।
yeh chitthi vienna yatra ka varnan hai.
This post is about my visit to Vienna.<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=392&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em>मैं काम के सिलसिले में बर्लिन गया था। वहां के लिये, भारत से कोई सीधी उड़ान नहीं थी। इसलिये दिल्ली से वियाना और वहां से बर्लिन गया था। लौटते समय, घूमने के लिये वियाना रुका था। इस चिट्ठी में वियाना यात्रा का वर्णन है। </em></p>
<p style="text-align:center;"><em><img class="aligncenter" title="Vienna" src="https://lh4.googleusercontent.com/_VD9tZkRYrQ0/TU5zg_fKovI/AAAAAAAACUY/3nzy41GlvBo/Vienna.jpg" alt="" width="311" height="232" /><span id="more-392"></span></em></p>
<h3 style="text-align:center;">वियाना &#8211; मैं पहुंच रहा हूं</h3>
<p><a href="http://unmukth.wordpress.com/2009/10/19/berlin-travelogue/">बर्लिन</a> से चलते समय, मैंने अपना कैमरा हैंड बैग में रख लिया था।  बर्लिन हवाई अड्डे पर, एक महिला सिक्योरिटी की इंचार्ज थी। उसने कहा कि इस कैमरे से चित्र खींच कर दिखाओ। मैंने, उसे, उसका चित्र खींच कर दिखाया। उसने कहा कि अब इसे मिटा दो। मैंने उसकी बात मान ली। बाद में मैंने पूछा यदि चित्र ही मिटवाना था तो खिंचवाया ही क्यों? वह कहने लगी,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं देखना चाहती थी कि यह कैमरा ही है, न कि कुछ और।&#8217;</p></blockquote>
<p>लगता है कि आतंकवादियों ने हवाई जहाज उड़ाने का नया तरीका निकाल लिया है <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /><br />
हवाई जहाज पर एक बम्बई के एक व्यापारी से मुलाकात हुई। मैंने पूछा कि वे बर्लिन कैसे आये थे। उनका जवाब था कि वे अपने लड़के से मिलने आये थे जो कि बर्लिन में यांत्रिकी इंजीनियरिंग पढ़ रहा है।</p>
<div style="border-top:7px solid #5c8a64;border-bottom:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">आईआईटी मद्रास, जर्मनी सरकार की सहायता से बना है। इसलिये वहां का यांत्रिकी इंजीनियरिंग विभाग बेहतरीन माना जाता है।</div>
<p>उन्होंने बताया कि जर्मनी की यांत्रिकी इंजीनियरिंग दुनिया में मशहूर है इसीलिये उनके लड़के वहां यांत्रिकी इंजीनियरिंग पढ़ रहे हैं। आईआईटी मद्रास, जर्मनी सरकार की सहायता से बना है। इसलिये वहां का यांत्रिकी इंजीनियरिंग विभाग बेहतरीन माना जाता है। उन्होने यह भी बताया कि जर्मनी में पढ़ाई का खर्च नहीं लगता &#8211; केवल रहने और खाने का। मैंने पूछा,<a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R5rdo9y-sHI/AAAAAAAAAYA/72oDZtYdxLo/s1600-h/Sound-of-Music+poster.jpg"><img class="alignright" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R5rdo9y-sHI/AAAAAAAAAYA/72oDZtYdxLo/s200/Sound-of-Music+poster.jpg" border="0" alt="" width="155" height="157" /></a></p>
<blockquote><p>&#8216;क्या यह केवल जर्मन लोगों के लिये है या सबके लिये।&#8217;</p></blockquote>
<p>उन्होंने कहा कि यह सब के लिये है। मुझे यह कम समझ में आया कि क्यों जर्मन सरकार दूसरे देश के लोगों के लिये भी शिक्षा का पैसा नहीं लेती है। अमरीका में भी ऐसा होता है पर उसके एवज में उन्हें कुछ काम, जैसे टीचिंग एसिस्टेंट बनना पड़ता है।</p>
<p>वियाना में मुझे एक कॉन्वेन्ट में ठहरना था। इसी बात से, मुझे रास्ते में, १९६० के दशक में देखी फिल्म, सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक (Sound of Music), की याद आयी।</p>
<h3 style="text-align:center;">सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक फिल्म, सत्य कथा पर आधारित है</h3>
<p>सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक (Sound of Music) फिल्म, १९६० के दशक में बनी थी। मैंने इसे तभी देखा था। यह आज तक की बनी संगीत-मय फिल्मों में, सबसे प्रसिद्ध है। इसे पांच ऐकेडमी पुरुस्कार मिलें हैं। यह मारिया नामक लड़की की सत्य कथा पर आधारित है। <a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R6nNz9y-sSI/AAAAAAAAAZY/NHAbOd1PWSk/s1600-h/The+Story+of+the+Trapp+Family+Singers.JPG"><img class="alignleft" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R6nNz9y-sSI/AAAAAAAAAZY/NHAbOd1PWSk/s200/The+Story+of+the+Trapp+Family+Singers.JPG" border="0" alt="" width="107" height="162" /></a></p>
<p>मारिया का पूरा नाम मारिया फॉन ट्रैप (शादी के पहले कुक्षेरा) {Maria Von Trapp (nee Kutschera)} था। वह वियाना में रहने वाली एक अनाथ लड़की थी। वियाना से वह सॉल्सबर्ग (Salsburg) के एक कॉन्वेंट में नन बनने के गयी। वहां उसे, विधुर नेवल कमांडर के घर, सात बच्चों की देखभाल करने के लिये, भेजा गया। जहां दोनो में प्रेम हो गया और उन्होने शादी कर ली। द्वितीय विश्व युद्ध के समय, वे ऑस्ट्रिया से भाग कर, अमेरिका चले गये। मारिया ने बाद में अपनी जीवनी &#8216;द स्टोरी ऑफ ट्रैप फैमली सिंगरस् (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/The_Story_of_the_Trapp_Family_Singers">The Story of the Trapp Family Singers</a>) नाम से लिखी।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 169px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R6nON9y-sTI/AAAAAAAAAZg/lQrE19QCZQw/s1600-h/Julia+Andrews+nun.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R6nON9y-sTI/AAAAAAAAAZg/lQrE19QCZQw/s200/Julia+Andrews+nun.jpg" border="0" alt="" width="159" height="155" /></a><p class="wp-caption-text">नन की भूमिका में जूलिया एंड्रयूस्</p></div>
<p>सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक, फिल्म मारिया की पुस्तक &#8216;द स्टोरी ऑफ ट्रैप फैमली सिंगरस्&#8217; पर आधारित है। फिल्म की मूलभूत कहानी तो पुस्तक से ली गयी है पर फिल्मी मसाले के लिये, उसमें बदलाव किया गया है। वास्तव में, मारिया द्वितीय विश्व युद्ध के पहले ही कमांडर के घर बच्चों को देखने गयी थी और उसकी शादी भी पहले हो गयी थी पर यह फिल्म में यह सब द्वितीय विश्व युद्ध के समय का दिखाया गया है। हांलाकि वे द्वितीय विश्व युद्ध के समय ही वहां से भागे थे।</p>
<p>फिल्म में मारिया की भूमिका, जूलिया एंड्रयूस् कलाकारा ने निभाया है। यह कथा सॉल्सबर्ग की है और फिल्म की शूटिंग भी सॉल्सबर्ग में हुई है। यह एक बेहतरीन फिल्म है। यदि आपने नहीं देखी है तो अवश्य देखें। इस फिल्म का ट्रेलर का आनन्द लें।</p>
<p style="text-align:center;"><span style="text-align:center; display: block;"><a href="http://unmukth.wordpress.com/2009/12/28/vienna-wien-austria/"><img src="http://img.youtube.com/vi/Aw-Om-t8iiM/2.jpg" alt="" /></a></span></p>
<p>सॉल्सबर्ग, वियाना से दूर है। वहां एक दिन में जाकर वापस नहीं आया जा सकता था इसलिये वहां नहीं गया। जिस जगह पर इस फिल्म की शूटिंग हुई है वहां पर कन्वेन्शन सेन्टर बन गया है और अन्तर-राष्ट्रीय सम्मेलन होते हैं। क्या मालुम कभी वहां सम्मेलन में जाने का मौका मिल जाय तब ही इस फिल्म की यादों को पूरा कर लूंगा।</p>
<p>इसी फिल्म पर आधरित हिन्दी की फिल्म &#8216;परिचय&#8217; है। इसमें भारतीय परवेश के अनुसार,  बदलाव किये गये हैं। इस फिल्म की मुख्य भूमिका में प्राण, जीतेन्द्र, और जया भादुड़ी हैं। परिचय फिल्म का गाना &#8216;सारे के सारे, गामा के संग&#8217; सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक के लोकप्रिय गीत &#8216;डो रे मी &#8230; डो अ डीयर&#8217; पर आधारित है। इसे भी आप सुन सकते हैं।</p>
<p style="text-align:center;"><span style="text-align:center; display: block;"><a href="http://unmukth.wordpress.com/2009/12/28/vienna-wien-austria/"><img src="http://img.youtube.com/vi/ELKL0F2To_Q/2.jpg" alt="" /></a></span></p>
<h3 style="text-align:center;">टमटम पर, राजसी ठाट-बाट के साथ</h3>
<p>वियाना हवाई अड्डे पर, सिस्टर सिग्रेड और सिस्टर कारमेन, मुझे लेने आयी थीं। मैं इन लोगों से कभी नहीं मिला था। लेकिन उन्हें, उनके कपड़ों के कारण पहचान गया। यह लोग, एक बड़ी सी स्टेशन वैगन लेकर आयीं थीं जिसमें बैठने की तीन पंक्तियां थीं।</p>
<ul>
<li> सिस्टर कारमेन जर्मनी से हैं। वे बहुत अच्छा कार चलाती हैं। उन्हें वियाना शहर के बारे में  अच्छा पता  है।</li>
<li>सिस्टर सिग्रेड महाराष्ट्र से हैं। उनकी हिन्दी अच्छी है। इस समय वे, सिस्टर जनरल की सलाहकार हैं। सिस्टर सिग्रेड को जर्मन भाषा तो आती है पर वियाना के बारे में ज्यादा पता नहीं था। वियाना में, सिस्टर सिग्रेड ने मेरा ख्याल रखा। मैं सारी सिस्टरस् और खास तौर से उनका आभारी हूं।</li>
</ul>
<div style="border-top:7px solid #5c8a64;border-bottom:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">सिस्टर सीग्रेड, मुझे भाषाओं की खास जानकार लगीं</div>
<p>सिस्टर सिग्रेड की आवाज मधुर है वे गाना भी अच्छा गातीं हैं। एक दिन जब हम लोग घूमने निकले तब उन्होंने कार में, मां मरियम की स्तुति में एक भजन सुनाया। उन्होने बताया कि वे हमेशा बाहर जाते समय यह भजन गाती हैं। इस भजन में, मां मरियम से प्रार्थना है कि हमें अपनी शरण में ले लो। मैंने कार में ही इस गाने को रिकॉर्ड कर लिया था। आप भी इसे <a href="http://www.esnips.com/doc/e8fbcc52-9729-4408-9c81-e1ef9de74ef3/come-with-us-mary-prayer">यहां</a> सुन सकते हैं।</p>
<p style="text-align:left;">भारत जाते समय, सिस्टर सिग्रेड, मुझे  हवाई अड्डे छोड़ने भी आयीं थीं। उस समय सिस्टर सिग्रेड ने हिन्दी में एक भजन सुनाया। वे भारत की लगभग सब भाषा में भजन गा लेती हैं और जर्मन में तो गाती ही हैं। मुझे, वे भाषा की खास जानकार लगीं।</p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 507px"><img title="Fiaker-hero square-vienna" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2009/12/fiaker2bhero27s2bsquare.jpg?w=497&#038;h=381" alt="" width="497" height="381" /><p class="wp-caption-text">सिस्टर सिंथिया और सिस्टर सीग्रिड, टमटम पर। साथ में है महिला चालक लियाना। यह चित्र हीरोस् स्कवैर (Heroes&#039; Square) पर खींचा गया था। टमटम के पीछे, घुड़सवारी करते हुऐ, ऑस्ट्रिया के आर्कड्यूक चार्लस् Archduke Charles of Austria की मूर्ति है। वे राजा के पुत्र और १८वीं शताब्दी में आस्ट्रिया सेना में फील्ड मार्शल थे।</p></div>
<p>बर्लिन में यदि कुछ जगहों पर रिक्शा के द्वारा घूमा जा सकता है तो वियाना में घोड़ागाड़ी पर। वियाना में घोड़ागाड़ी, पुरूष वा महिला दोनो ही चलाते हैं। जिस घोड़ागाड़ी का मैंने चित्र लिया था उसकी चालक महिला थी। उसका नाम नाम लियाना है। उसने मुझे बताया कि इस घोड़ागाड़ी को फिआकर कहते हैं। मैंने उसे बताया कि भारत में इसे टमटम कहते हैं। चलते समय लियाना ने मुस्करा कर कहा &#8216;टमटम&#8217;। मैंने भी मुस्करा कर जवाब दिया &#8211; फिआकर। इन घोड़ागाड़ियों के इतिहास के बारे में कुछ जानकारी <a href="http://members.aon.at/krippenfreundewien/fiaker_engl.htm">यहां</a> से प्राप्त की जा सकती है।</p>
<p>इस तरह की घोड़ागाड़ी,  महारानी विक्टोरिया की प्रिय सवारी थी और तभी इनका चलन बढ़ा। इसलिये इन्हें विक्टोरिया भी कहा जाता है। विक्टोरिया नम्बर २०३, घोड़ा गाड़ी के इर्द-गिर्द घूमती लोकप्रिय फिल्म है। इसमें मुख्य भूमिका अशोक कुमार और प्रान ने निभायी है।</p>
<h3 style="text-align:center;">सिगमंड फ्रायड संग्रहालय</h3>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 202px"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R8DZrIX9UTI/AAAAAAAAAbM/UT8H0jSrl0A/s1600-h/Sigmund+Freud+Museum.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R8DZrIX9UTI/AAAAAAAAAbM/UT8H0jSrl0A/s200/Sigmund+Freud+Museum.JPG" border="0" alt="" width="192" height="144" /></a><p class="wp-caption-text">सिगमंड फ्रायड का वियाना में घर जहां पर अब संग्रहालय है</p></div>
<p>वियाना दुनिया के संगीत की राजधानी कही जाती है। यहां बड़े-बड़े संगीतकार हुए हैं जिनमें बीथोवियन, (Beethoven) मोज़ार्ट (Mozart) मुख्य हैं। वियाना में लोग इनके संग्रहालय या म्यूज़िक कॉंसर्ट देखने जाते हैं पर मैं यदि वियाना में कहीं जाना चाहता था तो उस  जगह, जहां सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud)  ने अपना जीवन व्यतीत किया।</p>
<p>फ्रायड १९३८ तक वियाना में रहे। वे यहूदी थे। १९३८ में, वियाना जर्मनी का हिस्सा बन गया तब वे सपरिवार लंदन चले गये। १९३९ में, वहां उनकी मृत्यु हो गयी।</p>
<p>मैं बर्लिन से तैयार होकर निकला था। नाश्ता, हवाई जहाज में ही कर लिया था।  हम लोग  वियाना हवाई अड्डे से ही <a href="http://www.freud-museum.at/e/index.html">फ्रायड संग्रहालय</a> देखने चले गये। इस संग्रहालय को बनाने में उसकी बेटी ने मदद की। संग्रहालय के इंचार्ज ने बताया कि इस संग्रहालय को लगभग १०० लोग रोज देखने आते हैं।</p>
<p>संग्रहालय में मेरे साथ सिस्टर सीग्रेड और सिस्टर कारमेल थीं। हमें देख कर, वहां पर काम कर रही महिला मुस्कराने लगी। मैंने पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या आप लोग, सिंगमड फ्रायड के संग्रहालय में, सिस्टरों को देख कर मुस्करा रही हैं?&#8217;</p></blockquote>
<p>उसने हांमी भरी। लेकिन मुस्कराने का कारण यह भी बताया कि हम तीन में से दो भारतीय हैं।</p>
<div style="border-top:7px solid #5c8a64;border-bottom:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">फ्रायड पढ़ाई के सारे विषयों में या  तो बहुत अच्छे थे या उत्कर्ष &#8211; इससे कम नहीं</div>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 189px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R8DbuYX9UUI/AAAAAAAAAbU/iAKdJYqpbGk/s1600-h/Sigmund+Freud+wating+room.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R8DbuYX9UUI/AAAAAAAAAbU/iAKdJYqpbGk/s200/Sigmund+Freud+wating+room.JPG" border="0" alt="" width="179" height="135" /></a> <p class="wp-caption-text">मरीजों के लिये वेटिंग रूम</p></div>
<p>यहां पर फ्रायड के शिक्षा संबंधी सर्टिफिकेट भी देखे जा सकते हैं। यह बताते हैं कि फ्रायड सारे विषयों में,</p>
<ul>
<li>बहुत अच्छे (very good) थे, या</li>
<li>उत्कर्ष (excellent) थे।</li>
</ul>
<p>इससे कम नहीं।</p>
<p>इस संग्रहालय से कुछ यादगार सामाग्री (Souvenir) भी खरीदी जा सकती है। मैंने वहां से फ्रायड की एक फोटो खरीदी। उनके मरीजों का प्रतीक्षालय (Waiting room) वा उनका परामर्श देने वाला कमरा (Consulting chamber) भी देखा।<br />
<a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R8DbuYX9UUI/AAAAAAAAAbU/iAKdJYqpbGk/s1600-h/Sigmund+Freud+wating+room.JPG"></a><br />
फ्रायड आजकल प्रासंगिक नहीं माने जाते हैं। लेकिन जिस समय उन्होंने सेक्स के बारे में अपने सिद्घान्तो को प्रतिपादित किया उस समय इस विषय पर चर्चा करना करना, एक हिम्मत की बात थी। उन्होंने सामाजिक बंधनो से ऊपर उठकर इस विषय पर बात की। उनके पूरे संघर्ष को, जीवनी के रूप में, इर्विंग स्टोन (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Irving_Stone">Irving Stone</a>) ने &#8216;पैशन आफ माइंड&#8217; (The Passion of Mind) नामक पुस्तक में लिखा है। यह पुस्तक पढ़ने योग्य है।</p>
<h3 style="text-align:center;">मन प्रभू के चरणों में</h3>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 190px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R9qSXkzsTiI/AAAAAAAAAc0/33vMwSkdfUo/s1600-h/convent-vienna.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R9qSXkzsTiI/AAAAAAAAAc0/33vMwSkdfUo/s200/convent-vienna.JPG" border="0" alt="" width="180" height="135" /></a><p class="wp-caption-text">कांवेन्ट से वियाना शहर</p></div>
<p>मैं वियाना के जिस कॉन्वेंट में ठहरा, वह एक पहाड़ी पर है। यह बेहद खूबसूरत जगह है। यहां से वियाना शहर का काफी भाग दिखाई पड़ता है। इसका क्षेत्रफल भी बहुत बहुत अधिक है। यहां से प्रकृति का नज़ारा भी सुन्दर है। उस समय पत्तियां लाल, और पीली हो रही थीं। जो कि ठंड के आते-आते, अधिकतर सारे पेड़ों से &#8211; क्रिसमस पेंड़ (Christmas Tree) को छोड़कर &#8211; गिर जाती हैं। बसन्त ऋतु के आते ही फिर निकलती हैं। पेड़ हरे, पीले, और लाल रंग के दिखायी देते हैं। यह एक खूबसूरत नज़ारा होता है। मुझे यहां शान्ति मिली और लगा कि मन ईश्वर के चरणों में है।</p>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 190px"><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R9qXhUzsTmI/AAAAAAAAAdU/wQsKhZ3tD0Y/s1600-h/convent+vienna+room.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R9qXhUzsTmI/AAAAAAAAAdU/wQsKhZ3tD0Y/s200/convent+vienna+room.JPG" border="0" alt="" width="180" height="135" /></a><p class="wp-caption-text">कॉंन्वेन्ट में कमरा</p></div>
<p>कांवेन्ट में केवल सिस्टरें ही रहती हैं। वे अपने कॉवेन्ट के मुखिया का भी चुनाव करती हैं जिसे सिस्टर जनरल कहा जाता हे। यह छ: साल के लिये होता है। इनकी चार सलाहकार होती हैं जो उन्हें सलाह देती हैं। इन्होंने विश्व को खण्डों में बांटा है। हर खण्ड का अपना मुखिया हैं। वे अपने सलाहकारों के साथ आगे की योजना बनाकर कॉवेन्ट में भेजती हैं। कॉंवेन्ट के  अनुमोदन के बाद,  उस खण्ड में योजना के अनुसार  काम  आगे चलता है।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 187px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R9qYIEzsTnI/AAAAAAAAAdc/TDo1jAavlLI/s1600-h/convent+vienna+room+outside.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R9qYIEzsTnI/AAAAAAAAAdc/TDo1jAavlLI/s200/convent+vienna+room+outside.JPG" border="0" alt="" width="177" height="133" /></a><p class="wp-caption-text">कमरे की खड़की से बाहर का दृश्य</p></div>
<p style="text-align:left;">वियाना में सारे स्कूल सरकारी हैं। प्राइवेट स्कूल बहुत मंहगे हैं इसलिये यह कॉन्वेंट वहां पर कोई स्कूल नहीं चलाता है। लेकिन, बहुत सी सिस्टरें, स्कूलों में पढ़ाती हैं या फिर अस्पताल में या वृद्घ लोगों के आश्रम में नर्स की तरह काम करती हैं। किन्डरगार्डेन के लिये जरूर कांवेन्ट कुछ सुविधा प्रदान करता है। यहां से जो पैसे मिलते हैं वे कॉन्वेंट के पास जाते हैं। इससे वहां का खर्च वगैरह चलता है। कुछ पैसा सिस्टरों के वृद्घ उम्र के लिये रखा जाता है।</p>
<h3 style="text-align:center;">क्या भाई को सौतेली बहन स्वीकर कर लेनी चाहिये</h3>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 123px"><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R-ZIlv4H1II/AAAAAAAAAfA/YyX87At7gXA/s1600-h/Sine+Hill+Dey+Karmell+Sisters.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R-ZIlv4H1II/AAAAAAAAAfA/YyX87At7gXA/s200/Sine+Hill+Dey+Karmell+Sisters.jpg" border="0" alt="" width="113" height="168" /></a><p class="wp-caption-text">सिस्टर साइन हिल डे और सिस्टर कारमेल</p></div>
<p>इस कॉन्वेंट में, मेरी मुलाकात सिस्टर साइन हिल डे से हुई। वे कांवेन्ट की सिस्टर जनरल  रह चुकी हैं। सिस्टर डे, बहुत समय भारत में रहीं हैं। हिन्दी अच्छी समझती हैं पर बोल नहीं पाती हैं। उन्होंने बताया कि भारत में लोग उन्हें फ्लाइंग नन कहते थे क्योंकि वे पहले मोपेड, फिर स्कूटर, और बाद में मोटरसाइकिल चलाती थीं।</p>
<p>सिस्टर डे मुझे बहुत रोचक महिला लगीं। उनके पास किस्सों का भंडार था जिन्हें वे, न केवल नाश्ते और खाने पर, लेकिन शाम को घूमते समय सुनाती रहीं। उनका एक किस्सा तो मुझे फिल्मों की तरह लगा।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 141px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R-ZRqf4H1JI/AAAAAAAAAfI/D3KJwhhRZiM/s1600-h/Mother+Mary+statue.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R-ZRqf4H1JI/AAAAAAAAAfI/D3KJwhhRZiM/s200/Mother+Mary+statue.JPG" border="0" alt="" width="131" height="175" /></a><p class="wp-caption-text">कॉन्वेंट के पूजाघर (Chapel) में मां मरियम की मूर्ती</p></div>
<p>उन्होंने बताया कि बहुत साल पहले, एक भारतीय प्रतिनिधि-मंडल वियाना आया था। उसके साथ, एक भारतीय डाक्टर भी था। वह कुछ महीने वहां रहा। उसके बाद लंदन, फिर वापस भारत चला गया। वियाना में, उसका प्रेम एक आस्ट्रियन लड़की से हो गया। उससे एक लड़की हुई। मां, आस्ट्रिया में ही रह गयी थी। उसने उस लड़की को अनाथालय में छोड़ दिया। लड़की देखने में एकदम भारतीय लगती है।</p>
<p>सिस्टर डे भारत में उसके पिता को जानती थीं। लेकिन वे उससे, इस बात को नहीं कह पायीं। उसका पुत्र अपनी पत्नी के साथ सिस्टर डे से अक्सर मिलने आया करता था। उन्होंने उसे एक दिन अकेले आने को कहा और उसे उसकी सौतेली बहन के बारे में बताया। वह लड़की,  भारत में  अपने सौतेले भाई से भी  मिली। लेकिन उसके भाई ने, उसे मानने से इन्कार कर दिया।</p>
<p>सिस्टर डे ने बताया कि भाई का लड़का अर्थात आस्ट्रिया में रह रही लड़की का भतीजा, इन बातों को ज्यादा ठीक से समझता है। वह अपनी सौतेली बुआ को स्वीकार कर सकता है। शायद निकट भविष्य में, ऐसा संभव हो सके। यदि ऐसा होता है तो उस महिला को वह पहचान मिल सकेगी जो उसके पिता या सौतेले भाई ने नहीं दी।</p>
<p>मुझे लगता था कि यदि मैं वह पिता या भाई होता तो उसे जरूर स्वीकार कर लेता। गलतियां स्वीकारने में कोई छोटा नहीं होता &#8211; बड़ों की यही <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/11/time-to-think_25.html">खासियत होती है</a>। शायद उसके पिता को अपनी प्रतिष्ठा या भाई को अपने पिता के नाम पर समाज में धक्का लगने का डर रहा हो या हो सकता है कि भाई विश्वास ही नहीं करता हो।</p>
<p>मैं दिल से चाहता हूं कि भतीजा अपनी सौतेली बुआ को स्वीकार कर ले। मैं भगवान को नहीं मानता &#8211; अज्ञेयवादी हूं, <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/04/blog-post_09.html">धर्म को अलग तरह से देखता हूं</a>,  पर हे प्रभू, यदि तुम हो, तो ऐसा होने देना।</p>
<p>सिस्टर डे के पास बहुत से किस्से थे। मैंने उनसे कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;सिस्टर डे, आप इन किस्सों को  किताब के रूप में लिख कर क्यों नहीं प्रकाशित करवातीं।&#8217;</p></blockquote>
<p>वे इस बात का कोई जवाब देने से टाल गयीं। उन्होने मुझे फिर वियान कॉन्वेंट में रहने के लिये सपरिवार बुलाया है। यदि मैं फिर गया तो उनसे चिट्ठा लिखवाना जरूर शुरू करवा दूंगा <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </p>
<div>
<h3 style="text-align:center;">वियाना रात में</h3>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 210px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R_ToZf4H1TI/AAAAAAAAAgw/2VHLfyItQD8/s1600-h/Kahlenberg+Church.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R_ToZf4H1TI/AAAAAAAAAgw/2VHLfyItQD8/s200/Kahlenberg+Church.JPG" border="0" alt="" width="200" height="150" /></a><p class="wp-caption-text"> काहलेनबर्ग पर चर्च</p></div>
<div>
<p>एक दिन, शाम को, सिस्टर साइन हिल डे  मुझे वियाना के नज़ारे दिखाने ले गयीं।</p>
<p>हम लोग पहले काहलेनबर्ग (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kahlenberg">Kahlenberg</a>) पहाड़ी पर गये। अठ्ठारहवीं शताब्दी में टर्की ने आस्ट्रिया पर हमला बोल दिया था पोलैंड की सहायता से उन्हें हराया जा सका। इसी उपलक्ष में उस जगह पर एक चर्च का निर्माण हुआ था। यहां से पूरे वियाना, को जो की बिजली रोशनी में जगमग कर रहा था, देखा जा सकता है। यह अपने में सुन्दर दृश्य है। वहां पर होटल मैनेजमेंट स्कूल है जिसका अपना रेस्ट्रां है। इसमें असाम चाय के साथ, दार्जलिंग चाय भी मिलती है। मैंने इसे न लेकर फ्रूट चाय लेना पसन्द किया।</p>
<p>चाय पीने के बाद हम लोग ग्रिनज़िंग (Grinzing) नाम जगह गये। ग्रिनज़िंग यानि कि जहां इसी साल में बनी वाइन (wine) मिलती हो। ये जगह वियाना में प्रसिद्घ है। आस्ट्रिया न केवल अपने संगीत के लिये, पर अपनी वाइन के लिए भी प्रसिद्घ है। इस जगह बहुत सारे रेस्ट्रां हैं। जो कि अपनी वाइन स्वयं बनाते हैं और खाने में पेश करते हैं। पर वहां हर तरह की वाइन भी मिलती है।</p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 498px"><img title="Vienna from Kahlenberg" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/4/4b/720px-Panorama-vom-Kahlenberg.jpg/800px-720px-Panorama-vom-Kahlenberg.jpg" alt="" width="488" height="93" /><p class="wp-caption-text">काहेलबर्ग से वियाना - यह चित्र Clemens Pfeiffer का खींचा हुआ है और विकिपीडिया के सौजन्य से है। </p></div>
<p style="text-align:center;">&nbsp;</p>
<p>हम लोग, वहां के ह्यूडोल्फ हाफ (Houdolf Haf) नामक रेस्ट्रां में खाने गये। यह १०० साल से भी ज्यादा पुराना रेस्ट्रां है। यहां पर अक्सर वियाना राजा के पुत्र आया करते थे।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 192px"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R_Tpjv4H1UI/AAAAAAAAAg4/hebYsBkzie0/s1600-h/Houdolf+Haf.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R_Tpjv4H1UI/AAAAAAAAAg4/hebYsBkzie0/s200/Houdolf+Haf.JPG" border="0" alt="" width="182" height="136" /></a><p class="wp-caption-text">रेस्ट्रां में पियानो एकार्डियन और वायलन बजाते रोमा जिप्सी</p></div>
<p>यहां पर एक व्यक्ति पियानो एकार्डियन और दूसरा वायलन बजा रहा था। वायलन बजाने वाला व्यक्ति मुझे भारतीय लगा। मैंने उससे बात की तो उसने बताया कि वह रोमा जिप्सी है। जिप्सियों का मूल, भारत ही कहा जाता है। शायद इसलिये वह मुझे भारतीय लगा। मुझसे बात करते समय, उसने मुस्कराकर, हिन्दी के कुछ शब्द भी बोले।</p>
<p>मैं बाहर जाता हूं तो वहीं का खाना पसन्द करता हूं। वहां पर मुझे एक भारतीय मिले उन्होंने एक आस्ट्रियन लड़की से शादी कर ली है और वहीं पर बस गये हैं। आजकल फैशन गहनों (Fashion Jewellery) का बोलबाला है। इसी को वे, दुनिया भर से निर्यात कर, आस्ट्रिया में बेचते हैं। उनकी पत्नी बहुत अच्छी हिन्दी बोलती हैं। मैंने पूछा कि वे कैसे इतनी अच्छी हिन्दी बोलती हैं। उन्होंने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;वियाना के विश्वविद्यालय में हिन्दी पढ़ायी जाती है। मैंने वहां पर हिन्दी पढ़ी और सीखी है।&#8217;</p></blockquote>
<p>भारतीय शख्स की सलाह पर, मैंने आलू सलाद (Potato Salad),  वीनर शीत्जल (Weiner Schnitzel)  खाने में लिया।</p>
<ul>
<li>विनर शीतजल एक नामिष भोजन है जिसमें पोर्क (सुअर का मांस)  होता है। यह वियाना की खासियत है।</li>
<li>आलू सलाद में कुछ मिठास थी।</li>
</ul>
<p>मुझे, आलू सलाद पसन्द आयी। इसके आलू बहुत कोमल थे, कांटे से पकड़ने पर टूटते थे। सिस्टर डे ने बताया कि अच्छा पका आलू इसी तरह से होता है। मैं, आलू सलाद को, कांटे से नहीं खा पाया अंतत: उसे चम्मच से ही खाना पड़ा।  इसके बनाने का तरीका  भी सिस्टर डे ने मुझे बताया था पर समझ में नहीं आया।</p>
<h3 style="text-align:center;">एक प्यारी सी लड़की &#8211; लीसा</h3>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 140px"><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SFDhkMvzoQI/AAAAAAAAAls/DXsZsSRvNMk/s200/Lisa-2.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SFDhkMvzoQI/AAAAAAAAAls/DXsZsSRvNMk/s200/Lisa-2.jpg" border="0" alt="" width="130" height="163" /></a><p class="wp-caption-text">लीसा</p></div>
<p>वियाना के कॉन्वेंट में, मेरी मुलाकात लीसा से हुई। वह मुझे एक प्यारी सी लड़की लगी।</p>
<p>लीसा ने मुझे बताया कि आस्ट्रिया में उच्च शिक्षा या व्यावसायिक (Professional) शिक्षा के पहले की शिक्षा निम्न भागों में है:</p>
<ul>
<li>किण्डरगार्डन (Kindergarten) ३ से ६ साल की उम्र</li>
<li>फाल्क शुले (Volkschule) ७ से ११ साल की उम्र</li>
<li>जिमनेसियम (Gymnasium) ४ साल की पढ़ाई</li>
<li>मथुरा  (Mathura)   यह pre university की तरह है।</li>
</ul>
<div>
<p>लीसा जिम्नेसियम  में पढ़ती है। शायद यह हमारे  यहां के हिसाब से दसवीं क्लास है।</p>
<p>लीसा को कॉवेन्ट में देखकर, मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने पूंछा कि वह यहां कैसे आयी है। उसने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;मैं लिंज (<a title="Linz" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Linz" >Linz</a>) में रहती हूं। यह वियाना से लगभग २०० किलोमीटर दूर है। कॉन्वेंट में रहने वाली एक सिस्टर का घर, मेरे घर के पास है। मैं उन्हीं के कहने पर, छुट्टियों में कॉवेन्ट में आती हूं। मुझे यहां अच्छा लगता है लेकिन मेरे मित्रों को कॉवेन्ट पर जाना अच्छा नहीं लगता है।&#8217;</p></blockquote>
<div style="border-top:7px solid #5c8a64;border-bottom:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">लिंज़ शहर के घूमते हुऐ सुन्दर चित्र देखने के लिये <a href="http://www.herold.at/servlet/at.herold.sp.servlet.SPRPHomeServlet?context=RP&amp;sd=AH1_11951343419150101&amp;rd=&amp;unid=ROOT-herold_main:4">यहां</a> जायें।</div>
<div>लीसा के पिता एयर कंडीशनिंग कंपनी में काम करते हैं और मां उसी स्कूल में काम करती है जहां वह पढ़ती है। यह एक सरकारी स्कूल है। वह अपने माता पिता की इकलौती सन्तान है पर उसे कभी अकेलापन नहीं महसूस होता है क्योंकि उसके छ: चचेरे ममेरी, भाई &#8211; बहन हैं जिनके साथ वह सप्ताहान्त बिताती है। मैंने लीसा से कहा कि भारत में लोग अक्सर लड़के की चाहत रखते हैं क्या ऎसा यहां भी है उसने कहा,</div>
<blockquote><p>&#8216;नहीं, यहां इस तरह की कोई भावना नहीं है।&#8217;</p></blockquote>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 189px"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SAFjK7p9u5I/AAAAAAAAAiA/dxjoYrmdtPo/s1600-h/Notebook+school+Classroom+Linz+.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SAFjK7p9u5I/AAAAAAAAAiA/dxjoYrmdtPo/s200/Notebook+school+Classroom+Linz+.jpg" border="0" alt="" width="179" height="135" /></a><p class="wp-caption-text">लीसा के स्कूल में, नोटबुक वाली कक्षा</p></div>
<p>लीसा के पास एक लैपटॉप था। उसने बताया कि वह नोटबुक क्लास में है उसके क्लास में सभी बच्चे अपना लैपटॉप लेकर आते हैं और सारे नोट्स भी उसी पर लेते हैं। काश अपने देश के भी स्कूल इसी तरह के हों।</p>
<p>मुझे <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/03/sisters-nuns.html">सिस्टर डे</a> ने बताया कि लीसा बड़ी होकर डाक्टर बनना चाहती है। मुझे खून देखकर डर लगता है। मैं यह जानते हुए भी कि खून देने में कुछ नहीं होता है आज तक कभी खून नहीं दे पाया। इसीलिये मैं कभी डाक्टर नहीं बन सकता था। हालांकि मैंने उन पुस्तकों को पढ़ा है जिसे उन बच्चों को पढ़ना चाहिये जो डाक्टर बनने का सपना देखते हैं। इन पुस्तकों में से प्रमुख हैं,</p>
<ul>
<li><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/02/microbe-hunters-paul-de-kruif.html">माइक्रोब हंटरस् &#8211; जीवाणु के शिकारी लेखक पॉल डी क्रुइफ</a> (Microbe Hunters by <a title="Paul de Kruif" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Paul_de_Kruif" >Paul de Kruif</a>): (<a href="http://www.esnips.com/doc/a2066cf4-760f-4bc2-b21e-66a873daa565/Microbe-Hunters-by-Paul-de-Kruif"><em>►</em></a>)</li>
<li><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/12/double-helix-james-dewey-watson.html">डबल हेलिक्स – जनन उत्पत्ति निर्देश रहस्य का पर्दाफाश</a> लेखक जेम्स वाटसन (<a title="Double helix" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Double_helix" >Double Helix</a> by <a title="James D. Watson" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/James_D._Watson" >James Watson</a>): (<a href="http://www.esnips.com/doc/9880a22e-039e-42d9-86fd-f0af6c91dd80/The-Double-Helix-by-James-Dewey-Watson"><em>►</em></a>)</li>
<li><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/12/fantastic-voyage-isaac-asimov.html">फैंटास्टिक वॉयेज: अद्भुत यात्रा</a> लेखक <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/01/favourite-sci-fi-writer.html">आईसेक एसीमोव</a> (<a rel="imdb" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Fantastic_voyage" >Fantastic Voyage</a> by  <a title="Isaac Asimov" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Isaac_Asimov" >Issac Asimov</a>): (<a href="http://www.esnips.com/doc/364db1f6-d619-46ee-92de-e28b149e4374/%E0%A4%85%E0%A4%A6%E0%A4%AD%E0%A5%81%E0%A4%A4-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE"><em>►</em></a>)</li>
</ul>
<div>
<p>मैंने लीसा को यह पुस्तकें भेजने का वायदा किया था। इनमें पहली वाली नहीं मिली पर दूसरी और तीसरी मिली। इन दो पुस्तकों को, मैंने उसके पास भेजा है।</p>
<div style="border-top:7px solid #5c8a64;border-bottom:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">आप पुस्तकों के नाम पर चटका लगा कर इनकी समीक्षा हिन्दी में पढ़ सकते हैं। इन समीक्षाओं का हिन्दी में पॉडकास्ट सुनने के लिये, इनके आगे कोष्टक के अन्दर लगे चिन्ह <em>►</em> पर चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ऑग फॉरमैट में है। सुनने के लिये दहिने तरफ का विज़िट पढ़ें।</div>
<blockquote><p>Guten Tag, Lisa<br />
It was pleasure to meet you in Vienna. I wish, I had more time to talk to you. I wanted to talk about about Austria and student life there. The time was short and I had to pack my things. I promise that when we meet next, I will have tea with you.<br />
Do let me know when you receive the books. Do remember the conditions:</p>
<ul>
<li> You have to read and tell me about the books.</li>
<li> You have to share it with your friends.</li>
</ul>
<p>All the best in your life,<br />
Auf Wiedersehen<br />
लीसा नमस्ते<br />
तुमसे वियाना में मिल कर अच्छा लगा। काश मेरे पास और समय होता तो मैं तुमसे ऑस्ट्रिया और वहां के विद्यार्थी जीवन के बारे में बात करता। मुझे समान पैक करना था। इसलिये तुम्हारे हाथ की बनी चाय न पी सका। अगली बार मिलेंगे तो चाय भी पियेंगे और बहुत सारी बातें करेंगे।<br />
लिखना क्या किताबें मिली, शर्तों का भी ध्यान रखनाः</p>
<ul>
<li> तुम्हें, इन किताबों को पढ़ कर, इनके बारे में, लिख कर मुझे बताना है</li>
<li> इन्हें सबको पढ़ने के लिये देना है</li>
</ul>
<p>तुम्हें जीवन की हर खुशी मिले।<br />
हम फिर मिलेंगे,<br />
तब तक के लिये अलविदा।</p></blockquote>
<p>लीसा से मेरी अक्सर ई-मेल पर बात होती है। मैं अपने बिटिया रानी (वास्तव में मेरी बहूरानी), बेटे राजा और लीसा से होने वाली ई-मेल की चर्चा <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/search/label/%E0%A4%88-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80">ई-पाती श्रंखला</a> में करता रहता हूं।</p>
<h3 style="text-align:center;">वियाना में घूमने की जगहें</h3>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 96px"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpEX2oAPzI/AAAAAAAAAiw/iB6Do8b-Tus/s1600-h/vienna-hop-on-hop-off.jpg"><img style="border:0 none;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpEX2oAPzI/AAAAAAAAAiw/iB6Do8b-Tus/s200/vienna-hop-on-hop-off.jpg" border="0" alt="" width="86" height="183" /></a><p class="wp-caption-text">हॉप ऑन - हॉप ऑफ बस का टिकट</p></div>
<p>वियाना में भी, <a href="http://unmukth.wordpress.com/2009/10/19/berlin-travelogue/">बर्लिन</a> की तरह हॉप ऑन &#8211; हॉप ऑफ (Hop on &#8211; Hop off) बसें चलती हैं। वियाना घूमने का यही सबसे अच्छा तरीका है। इनके तीन अलग-अलग रूट हैं पर उनके चलने तथा समाप्त होने की जगह एक ही है। तीनो के टिकट यदि एक साथ खरीदें तो वह २० यूरो पड़ता है।</p>
<p>जैसा कि मैंने पहले <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/02/fiaker-horse-drawn-carriage-vienna.html">बताया</a> है कि मैं एक दिन सिस्टर सीग्रिड और सिस्टर सिंथिया के साथ वियाना शहर घूमने गया था। हमने तीनो रूट का टिकट एक साथ लिया।</p>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 181px"><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpE9WoAP0I/AAAAAAAAAi4/yl5ppCT1tTk/s1600-h/Heroes'++Square.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpE9WoAP0I/AAAAAAAAAi4/yl5ppCT1tTk/s200/Heroes'++Square.JPG" border="0" alt="" width="171" height="128" /></a><p class="wp-caption-text">हीरोस् स्कवैर</p></div>
<p>हम लोग सबसे पहले हीरोस्  स्कवैर (<a title="Hősök tere" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/H%C5%91s%C3%B6k_tere" >Heroes&#8217;  Square</a>) पर उतरे। यह ऐतिहासिक जगह है। यहां महत्वपूर्ण कार्यक्रम होते हैं। १९३८ में जब हिटलर ने आस्ट्रिया को जर्मनी में मिलाया तो उसकी घोषणा यहीं पर की थी।</p>
<p>यहां पर एक जगह एक संगीतकार वायलिन पर धुन बजा रहा था। उसके सामने बर्तन में कुछ लोग पैसा भी डाल रहे थे।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 159px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpFyGoAP1I/AAAAAAAAAjA/GAX5o0RECK0/s1600-h/Saint+Stephens+Cathedral.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpFyGoAP1I/AAAAAAAAAjA/GAX5o0RECK0/s200/Saint+Stephens+Cathedral.JPG" border="0" alt="" width="149" height="112" /></a><p class="wp-caption-text">अन्दर से, सेंट स्टीफंस कैथड्रल</p></div>
<p>हम लोग सेंट स्टीफंस कैथड्रल (Saint Stephens Cathedral) गये।  यह कैथड्रल यहां का सबसे महत्वपूर्ण चर्च है। वहां पर पूजा (<a title="Mass (mass spectrometry)" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Mass_(mass_spectrometry)" >Mass</a>) हो रही थी। यह चर्च अपने में भव्य है। पूजा जर्मन भाषा में थी। कैथड्रल जाते समय, हमने वह जगह भी देखी, जहां मोजार्ट ने अपने जीवन के कुछ साल बिताये थे।</p>
<p>चर्च में मोमबत्ती जलाने के रिवाज है। सिस्टर ने बताया,</p>
<blockquote><p>&#8216;ईसा मसीह ने दुनिया में प्रकाश दिया था। चर्च में मोमबत्ती जलाना, इसी का प्रतीक है।&#8217;</p></blockquote>
<p>यहां मोम से बने दिये जलाये जाते हैं। मैंने दो दिये जलाये। सिस्टर सिग्रेड ने पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;आप दो मोमबत्ती क्यों जला रहे हैं। आपका तो एक ही बेटा है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह सच है कि भगवान ने मुझे एक ही बेटा दिया है कोई बेटी नहीं दी। लेकिन मैं दूसरी मोमबत्ती अपनी बहूरानी के लिये जला रहा हूं। हम उसे बेटी की तरह ही मानते है।&#8217;</p></blockquote>
<div style="border-top:7px solid #5c8a64;border-bottom:7px solid #5c8a64;font-size:12pt;font-weight:bold;line-height:100%;padding-bottom:7px;padding-top:7px;text-align:center;width:375px;margin:10px;">मुझे लगा कि सिस्टर सिंथिया के दिल में, एक छोटी सी, नटखट सी, बच्ची है।</div>
<p>हम लोग दूसरे रूट पर गये। इसमें एक मनोरंजन पार्क है और एक बहुत बड़ा गोल घूमने वाला गोला है। यह १० मिनट में पूरा एक चक्कर घूमता है। सिस्टर सीग्रेड ने पूछा कि क्या मैं यहां उतरना चाहूंगा। मैंने मना कर दिया क्योंकि मैं तीसरी रूट पर राजा के महल में उतरना चाहता था। सिस्टर सिंथिया पार्क की तरफ देख कर बोली,</p>
<blockquote><p>&#8216;एक दिन, मैं यहां आऊंगी और पूरा दिन यहीं रहूंगी।&#8217;</p></blockquote>
<p>मुझे लगा कि उनके मन के किसी कोने में  एक छोटी सी, नटखट सी, बच्ची है।<br />
<a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpGCmoAP2I/AAAAAAAAAjI/SqOJeF0-zx8/s1600-h/Danube.JPG"><img class="alignleft" style="border:0 none;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SBpGCmoAP2I/AAAAAAAAAjI/SqOJeF0-zx8/s200/Danube.JPG" border="0" alt="" /></a><br />
दूसरे रूट का चक्कर लेते समय, हमें डान्यूब (<a title="Danube" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Danube" >Danube</a>) नदी मिली। यह नदी जर्मनी, आस्ट्रिया, स्लोवेकिया, हंगरी, क्रोशिया, सर्विंग, रोमानिया, बुलगारिया और यूक्रेल से गुजरते हुए ब्लैक समुद्र (<a title="Black Sea" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Black_Sea" >Black sea</a>) में गिरती है। इसे दो भागों में विभक्त कर, उसके बीच में द्वीप बना दिया गया है जिस पर मनोरंजन के कई साधन हैं। नदी पर नावें (cruise) भी चलती हैं। इसे देख मुझे अपनी गोवा यात्रा में मंडोवी नदी पर नाव से सैर की <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/03/goa-cruise-on-mandovi.html">याद आयी</a>।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 182px"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SDgy4_se37I/AAAAAAAAAk8/MPZHMk0UYvM/s1600-h/Schloss+Schonburnn+Vienna.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SDgy4_se37I/AAAAAAAAAk8/MPZHMk0UYvM/s200/Schloss+Schonburnn+Vienna.JPG" border="0" alt="" width="172" height="129" /></a><p class="wp-caption-text">राजा के महल में पीछे का बाग</p></div>
<p>तीसरी ट्रिप में हम राजा के महल (<a title="Schönbrunn Palace" rel="homepage" href="http://www.schoenbrunn.at/" >Schloss Schonbrunn</a>) आये। इसके देखने के लिये कई टूर हैं और सबका पैसा अलग-अलग है। हम लोगों ने सबसे सस्ता वाला टूर लिया। इसमें ३५ कमरों का दिखाया जाता है। इसकी सबसे अच्छी बात है कि यह आपको एक माइक्रोफोन देते हैं। कमरे में जाकर बटन दबाइये तो वह उस कमरे के बारे में यह बताता है और उस कमरे के वर्णन के बाद रूक जाता है। अगले कमरे में जाकर पुन: बटन दबाने पर, उस कमरे के बारे में बताना शुरू करता है।</p>
<p>महल के पीछे राजा का बाग है। यह जगह बहुत सुन्दर थी। हर तरफ हरे भरे लॉन हैं। वहां पर लोगों ने बताया कि गर्मी में यह और भी खूबसूरत लगता है।</p>
<h3 style="text-align:center;">कॉन्वेंट में पूजा और सिस्टर लूसी</h3>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 177px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9b6H_PjYI/AAAAAAAAAkU/5BrJsgxVaVQ/s1600-h/Mass+Vienna.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9b6H_PjYI/AAAAAAAAAkU/5BrJsgxVaVQ/s200/Mass+Vienna.JPG" border="0" alt="" width="167" height="126" /></a><p class="wp-caption-text">कॉंवेन्ट में पूजा</p></div>
<p>कॉवेन्ट में, मैंने उनकी पूजा (Mass) में भी भाग लिया। इसके पहले मैं कभी भी इसाई पूजा में शामिल नहीं हुआ था। उस दिन पूजा के लिये, लंदन से खास तौर पर एक पादरी (Father) आये थे। सिस्टर कारमेल अच्छा आर्गन बजाती हैं वे आर्गन बजा रही थीं। दो सिस्टर और एक अन्य पुरूष (जो इसी पूजा के लिए आये थे) गिटार बजा रहे थे।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 130px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9XDH_PjVI/AAAAAAAAAj8/UM3tXMAAynI/s1600-h/Sister+Adel.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9XDH_PjVI/AAAAAAAAAj8/UM3tXMAAynI/s200/Sister+Adel.JPG" border="0" alt="" width="120" height="160" /></a><p class="wp-caption-text">सिस्टर ऎडल पान फ्लूट बजाती हुई।</p></div>
<p>सिस्टर ऎडल, कभी मेडोलिन बजाती थीं तो कभी एक अन्य वाद्य। मैं इस वाद्य को  नहीं समझ सका। पूजा के बाद सिस्टर ऎडल ने बताया कि यह</p>
<blockquote><p>&#8216;पान फ्लूट है। मेडोलिन इटली का वाद्य है और पान फ्लूट इजिप्ट का। इसका वर्णन बाइबिल में भी है।&#8217;</p></blockquote>
</div>
<div>यह पूजा जर्मन में थी जो कि समझ में नहीं आती थी पर भाव जरूर समझ में आये। कुछ देर भजन गाया जाता था फिर कुछ संदेश। कभी फादर संदेश देते थे तो कोई सिस्टर। मुझे उनका एक भजन &#8216;<a href="http://www.esnips.com/doc/31ef21fe-f0e4-426e-9336-72d1e0748360/Mass-Vienna-Convent">अले लू ल्या</a>&#8216; कर्णप्रिय लगा। इसके संगीत से यह खुशहाली का भजन लगा। शायद इसका अर्थ भी कुछ इसी तरह है।</div>
<div>
<div>पूजा के बाद, वे कुछ पानी और कुछ डबलरोटी सा बांट रहे थे। सिस्टर सिग्रेड ने मुझे बताया कि मुझे यह नहीं लेना है इसके लिए संस्कारों की कई सीढ़ियां पार करनी होती है जो कि मैंने नहीं की है।</div>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 182px"><img style="border:0 none;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9Xun_PjWI/AAAAAAAAAkE/LPNYixC0e-g/s200/Dogs+Vienna.jpg" border="0" alt="" width="172" height="66" /><p class="wp-caption-text">टौमी तो मुझे हमेशा हर जगह मिल जाते हैं - कॉन्वेंट में भी मिले।</p></div>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 110px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9Ybn_PjXI/AAAAAAAAAkM/PO3U-YlnWkQ/s1600-h/Sister+Lucy.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/SC9Ybn_PjXI/AAAAAAAAAkM/PO3U-YlnWkQ/s200/Sister+Lucy.JPG" border="0" alt="" width="100" height="133" /></a><p class="wp-caption-text">सिस्टर लूसी</p></div>
<p>सुबह पूजा के बाद हम लोग नाश्ते के लिये गये। उस दिन सिस्टर लूसी का जन्म दिन था। वे मुम्बई से हैं। उनके लिये, हम लोगों ने Happy birth day गाया। इसी के बाद मैं, सिस्टर सिग्रेड, और सिस्टर सिंथिया वियाना घूमने चले गये थे। लौटते समय, मैंने सिस्टर लूसी के लिए एक सफेद गुलाब लिया। हम लोग जब कॉंवेंट वापस पहुंचे तो वहां रात का खाना चल रहा था। मैंने उनका हांथ चूमकर उन्हें गुलाब दिया। यह न केवल सिस्टर लूसी को पर सारी सिस्टरों को पसन्द आया। सबने तालियां बजाकर इसका स्वागत किया। सिस्टर लूसी ने कहा कि वे इसे ईसा के चरणों में समर्पित करती हैं और वे मेरे लिये प्रार्थना करेंगी। वे अगले सुबह तक, इस बात को याद करती रहीं और नाश्ते पर फिर से मुझे धन्यवाद दिया।</p>
<h3 style="text-align:center;">सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा &#8211; वियाना से वापसी</h3>
<p>वियाना से मेरी उड़ान दिन के ११ बजे थी। मेरे साथ एक और सिस्टर भी उस दिन जा रहीं थी। उन्होंने नाश्ते पर एक छोटा सा भाषण दिया। मैं भी खड़ा हो गया और कहा कि मैं भी कुछ कहना चाहता हूं। सबने इसका स्वागत किया।</p>
<p>मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;गुटन मारगेन (शुभ प्रभात)<br />
वियाना में अनगिनत पर्यटक आते हैं सबके अनुभव अपने ही अलग अलग होते होंगे पर मेरा अनुभव अपने में अद्वितीय है। मैंने वियाना को रात में, दिन में, सिस्टरों के साथ देखा। इस तरह का अनुभव शायद किसी और पर्यटक को हुआ होगा।<br />
आप सबका भारत में स्वागत है। भारत में आप मेरे साथ रहें तो मुझे अच्छा लगेगा।<br />
डांके शॉन (आप सबको बहुत धन्यवाद)<br />
ऑउफ वीडरसेह्न (गुड बाई फिर मिलेंगे)&#8217;</p></blockquote>
<p>वियाना से दिल्ली की यात्रा में, मेरे बगल में एक माड़वाड़ी यूवक बैठे थे। वे फर्राटे से जर्मन बोल रहे थे। मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने पूछा कि क्या वे जर्मनी में रहते हैं। उन्होने बताया कि नहीं। वे नेपाल में रहते हैं और वहां रह कर कालीन का व्यापार करते हैं और उन्हें जर्मनी में बेचते हैं। इसलिये उन्होने जर्मन भाषा सीखी है। वे साल में लगभग दो बार जर्मनी जाते हैं। उन्होने रास्ते में हवाई जहाज पर कुछ इत्र खरीदा। मैंने पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या पत्नी के लिये खरीद रहे हैं?&#8217;</p></blockquote>
<p>वे बोले</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं। मैं यह उपहार देने के लये खरीद रहा हूं।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने पूछा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या हवाई जहाज में खरीदने से कोई फायदा है?&#8217;</p></blockquote>
<div style="text-align:left;">
<p>उन्होने बताया कि इसके दाम और ड्यूटी फ्री शॉप के दाम में कोई अन्तर नहीं है पर हवाई जहाज में खरीदने से पॉइंट मिल जाते हैं जिससे बाद में टिकट में सस्ते में मिल जाता है।</p>
<p style="text-align:left;">बात करते करते, हम दिल्ली के हवाई अड्डे पर पहुंच गये। धूल धक्कड़ भीड़ शोर शराबा &#8211; इसी सब के लिये तो मैं तरस रहा था। अपना देश तो सबसे प्यारा है।</p>
<p style="text-align:center;"><em>सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।</em></p>
</div>
<div style="text-align:center;"><span style="text-align:center; display: block;"><a href="http://unmukth.wordpress.com/2009/12/28/vienna-wien-austria/"><img src="http://img.youtube.com/vi/D8mmXae8RBw/2.jpg" alt="" /></a></span></div>
<div style="text-align:center;">
<p><em>यह मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।</em><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/01/vienna-wien.html">वियाना &#8211; मैं पहुंच रहा हूं</a> ।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/02/sound-of-music-story-trapp-family.html">सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक फिल्म, सत्य कथा पर आधारित है</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/02/fiaker-horse-drawn-carriage-vienna.html">टमटम पर, राजसी ठाट-बाट के साथ</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/02/sigmund-freud-museum.html">सिगमंड फ्रायड संग्रहालय</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/03/convent-jesus-christ.html">मन, प्रभू के चरणों में</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/03/sisters-nuns.html">क्या भाई को सौतेली बहन स्वीकर कर लेनी चाहिये</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/04/vienn-by-night.html">वियाना रात में</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/04/school-girl-vienna.html">एक प्यारी सी लड़की &#8211; लीसा</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/05/vienna-places-to-visit.html">वियाना में घूमने की जगहें</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/05/blog-post.html">कॉन्वेंट में पूजा और सिस्टर लूसी</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/05/blog-post_28.html">वापसी की यात्रा</a>।।</p>
</div>
<div style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</div>
<div style="text-align:left;">
<p><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Vienna">Vienna</a>, Wien, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Austria">Austria</a>, <a href="http://www.blogvani.com/default.aspx?mode=tag&amp;TagText=Famous+Places&amp;span=Days30&amp;count=30">Famous Places</a>,</p>
<div style="text-align:left;"><a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>,  <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, <a href="http://www.google.co.in/search?q=%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80+%E0%A4%95%E0%A5%87+%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%87&amp;ie=utf-8&amp;oe=utf-8&amp;aq=t&amp;rls=com.ubuntu:en-US:official&amp;client=firefox-a">मस्ती के लिये</a> सैर सपाटा, <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>, <a title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा विवरण </a>, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</div>
<div style="text-align:left;"><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AE%20%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE">फिल्म समीक्षा</a>,</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<br />Posted in यात्रा वर्णन, हिन्दी Tagged: film review, travel, travelogue <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/unmukth.wordpress.com/392/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/unmukth.wordpress.com/392/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&amp;blog=230997&amp;post=392&amp;subd=unmukth&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>दीवार तोड़ो, दिल जोड़ो: बर्लिन की यात्रा</title>
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		<pubDate>Mon, 19 Oct 2009 13:00:18 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[travel]]></category>
		<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>

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		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में मेरी बर्लिन यात्रा का वर्णन है।
is chitthi mein berlin yatra ka varnan hai.
This post is about my trip to Berlin. <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=357&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em>इस चिट्ठी में मेरी बर्लिन यात्रा का वर्णन है। </em></p>
<div>
<p style="text-align:right;"><span style="font-size:130%;"> </span></p>
</div>
<p><em><img class="aligncenter" title="Berlin gate" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2009/10/berlin2bgate.jpg?w=266&#038;h=355" alt="" width="266" height="355" /><span id="more-357"></span></em><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rzj9THnhJ1I/AAAAAAAAAPc/z71uy7NjzY8/s1600-h/Learn+German.jpg"><img style="float:left;cursor:pointer;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rzj9THnhJ1I/AAAAAAAAAPc/z71uy7NjzY8/s200/Learn+German.jpg" border="0" alt="" width="66" height="98" /></a>वर्ष २००७ में, मुझे बर्लिन जाने का मौका मिला। भारत से बर्लिन के लिये, कोई भी सीधी हवाई जहाज की उड़ान नहीं है। मैंने बर्लिन जाने के लिये, वियाना होते हुए टिकट लिया। मैंने लौटते समय दो दिन वियना में रहने का प्रोग्राम बनाया। मुझे लगा कि इससे अच्छा मौका, इन दोनो जगहों को देखने का नहीं मिलेगा।</p>
<p>जर्मनी और ऑस्ट्रिया दोनो जगह जर्मन भाषा बोली जाती है। इसलिये मैंने जर्मन भाषा के सीखने की बात सोची। इसके लिये मैंने दो पुस्तकें लीः</p>
<ul>
<li>पहली है Learn German in a Month (Readwell Publication New Delhi); और</li>
</ul>
<ul>
<li> दूसरी है German in your pocket (Aureole Publishing, Noida)।<span style="font-size:130%;"> </span><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rzj923nhJ3I/AAAAAAAAAPs/8CDvrGA35Z4/s1600-h/German+in+your+pocket.jpg"><img style="float:right;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rzj923nhJ3I/AAAAAAAAAPs/8CDvrGA35Z4/s200/German+in+your+pocket.jpg" border="0" alt="" width="75" height="108" /></a></li>
</ul>
<p>पहली पुस्तक का फायदा यह है कि इसमें शब्द देवनागरी में भी हैं जिससे उच्चारण ठीक से समझ में आते हैं। दूसरी का फायदा यह है कि यह छोटी है और आपकी जेब में आ जाती है।<span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rzj9pXnhJ2I/AAAAAAAAAPk/sk0BfcT9z-k/s1600-h/German+CD.jpg"><img style="float:left;cursor:pointer;width:83px;height:127px;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rzj9pXnhJ2I/AAAAAAAAAPk/sk0BfcT9z-k/s200/German+CD.jpg" border="0" alt="" /></a>मैंने जर्मन भाषा सीखने की सीडी भी सुनी यह हॉरर एजूकेशन लिमिटेड के द्वारा बनायी गयी है और अच्छी है इसमे सुनने में शब्दों के उच्चारण समझ में आये। जर्मन भाषा सीखने के लिये अन्तरजाल पर भी सहायता <a href="http://german.about.com/library/anfang/blanfang_inhalt.htm">मिली</a>।</p>
<p>मैं जर्मन भाषा तो पूरी तरह नहीं सीख पाया। इसके लिये कुछ और समय चाहिये था पर कुछ सामान्य जर्मन शब्द इस प्रकार हैं। इन शब्दों की वहां जरूरत पड़ी और इसका फायदा हुआ।</p>
<table style="color:#000000;height:841px;" border="1" cellspacing="0" cellpadding="4" width="305">
<tbody>
<tr valign="top">
<td style="font-weight:bold;" width="132"><span style="font-size:130%;">अंग्रेजी में</span></td>
<td style="font-weight:bold;" width="120"><span style="font-size:130%;">जर्मन भाषा में<br />
</span></td>
<td style="font-weight:bold;" width="174"><span style="font-size:130%;">जर्मन  शब्दों  का उच्चारण<br />
</span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Bye! See you    later. (casual) </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Tschüs! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">ट्यूस् </span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Can you help    me? </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Können    Sie mir helfen? </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">कॉनेन    सिआ हेलफ्न </span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Fine,    thanks.</span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Danke, gut. </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">डांकॅ    गुट</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Gentleman</span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Herr</span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">हेर</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Good</span></td>
<td width="120"></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">गुट</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Good    Afternoon, Good day, Hello! &#8211; Hi!</span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Guten Tag! &#8211;    Tag! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">गुटन    टाग</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Good    evening! </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Guten Abend! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">गुटेन    आबेन्ड</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Good    morning! &#8211; Morning! </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Guten    Morgen! &#8211; Morgen! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">गुटन    मॉरनेन</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Good night! </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Gute Nacht! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">गुट    नाक्ट</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Good-bye, </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Auf    Wiedersehen. </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">ऑउफ    वीडरसेहन</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Great,  Very    good</span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Sehr gut. </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">सेर     गुट</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">How are you? </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Wie geht es    Ihnen? </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">वि    गी इस इहनन</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">How are you?    (familiar, informal) </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Wie geht&#8217;s? </span></td>
<td width="174"></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">I am sorry</span></td>
<td width="120"></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">एन्ट    शुलडिगन</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">I don&#8217;t     understand German</span></td>
<td width="120"></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">एक    फसते हे काइन डॉइच </span></span><span style="font-size:85%;">(</span><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">जर्मन</span></span><span style="font-size:85%;">)</span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">I would    like&#8230; </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Ich    möchte&#8230; </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">इश    मश्तय् </span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Lady</span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Dame</span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">डामे</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">May I? </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Darf ich? </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">डार्फ    इश</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">No thanks!</span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Nein, danke!</span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">नाइन    डान्कॅ</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Not so well. </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Nicht so    gut.</span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">नित्स    सो गुट</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Please! &#8211;    Yes, please! </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Bitte! &#8211; Ja,    bitte! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">बिटॅ</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Thank you! </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Danke schön! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">डान्कॅ    शॉन</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">Thanks a    lot! &#8211; Many thanks! </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Vielen Dank! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">फिलेन    डान्कॅ</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132">
<p style="margin-bottom:0;"><span style="font-size:85%;">Thanks!    &#8211; No thanks! </span></p>
<p><span style="font-size:85%;">Note: &#8220;Danke!&#8221; in response to an offer usually means &#8220;No thanks!&#8221; If you want to indicate a positive response to an offer, say &#8220;Bitte!&#8221; </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Danke! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">डान्कॅ</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">What would    you like? </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Was möchten    Sie? </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">वस    मश्त इज़ी</span></span></td>
</tr>
<tr valign="top">
<td width="132"><span style="font-size:85%;">You&#8217;re    welcome! (in response to &#8220;Danke schön!&#8221;) </span></td>
<td width="120"><span style="font-size:85%;">Bitte schön! </span></td>
<td width="174"><span style="font-family:Tahoma;"><span style="font-size:85%;">बिटॅ    शॉन</span></span></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;">&nbsp;</p>
<p style="text-align:center;"><strong>ऑस्ट्रियन एयर लाइन</strong></p>
<p>भारत से वियाना तक की फ्लाइट ऑस्ट्रियन एयर लाइन की थी। हवाई जहाज सही समय पर उड़ा। मुझे आगे की सीट मिली थी।  एक महिला अपने छोटे से बच्चे के साथ आयी। उसने कहा कि मैं उसे यह सीट दे दूं। आगे की सीट में बैठने का यह फायदा है कि बच्चों के लिये वह क्रैडल लग जाती है। जिस पर उन्हे लिटाया जा सकता है। मैंने मान लिया पर परिचायिका ने यह  नहीं करने दिया क्योंकि आगे  पहले से ही एक महिला बच्चे के साथ बैठी थी और ऊपर  केवल एक ही अतिरिक्त ऑक्सीजन मॉस्क था दो नहीं। उस महिला को पुनः अपनी जगह वापस जाना पड़ा। किसी भी अन्य यात्री ने  जिसकी सीट के सामने बच्चे के लिये क्रैडल लग सकता था, उस महिला के साथ सीट बदलने से मना कर दिया। वह कुछ मायूस हो गयी। इससे उसे रास्ते में कुछ तकलीफ तो जरूर हुई होगी पर मैं कुछ कर नहीं सकता था।<a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R0G1MAovthI/AAAAAAAAAQA/TM9ec9sZvac/s1600-h/austrian+air+hostess.jpg"><img style="float:right;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R0G1MAovthI/AAAAAAAAAQA/TM9ec9sZvac/s200/austrian+air+hostess.jpg" border="0" alt="" width="167" height="146" /></a></p>
<p>परिचारिकायें लाल परिधान पहने थीं।  युवतियां लाल स्कर्ट, लाल बेल्ट,  लाल या सफेद ब्लाउज,  लाल जैकेट,  लाल कोट, लाल स्टॉकिंग, यहां तक की लाल जूते पहने थीं। यही हाल युवकों का भी था। वे हमसे तो अंग्रेजी में बात करते थे पर आपस में किसी और भाषा में बात करते थे। मैंने एक परिचारिका से पूछा कि क्या वह जर्मन में बात कर रही है। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;हां, हम जर्मन में बात कर रहें हैं पर हमारा उच्चारण जर्मन के कुछ भिन्न है। लेकिन वर्तनी,  व्याकरण बाकी सब वही है।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने जवाब दिया डांके शॉन  (आपको बहुत धन्यवाद)। वह मुस्कराकर बोली,</p>
<blockquote><p>&#8216;लगता है आपको जर्मन आती है&#8217;।</p></blockquote>
<p>मैंने कहा,  मैं जर्मनी जा रहा हूं  इसलिये  कुछ शब्द सीख लिये  हैं।</p>
<p>मेरे बगल की महिला इटली जा रही थी और जो महिला मुझसे सीट बदलना चाहती थी वह स्पेन जा रही थी। वे हरियाणा के किसी गांव की लग रही थी। उन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी। वे घबरा रही थी। मैंने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है मैं मदद करूंगा। मैंने वियना में उन्हें उस जगह तक पहुंचाया जहां से उन्हें अपनी, अगली उड़ान पकड़नी थी। हांलाकि बाहर निकलते समय एक व्यक्ति खड़ा था जो टिकट देखकर लोगों की सहायता कर रहा था।</p>
<p>मैं बर्लिन जाने के लिये, हाथ का सामान चेक करने के लिये देने लगा। एक व्यक्ति ने मुस्कुराते हुऐ पूछा कि,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या  लैपटॉप है?&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा नहीं। उसने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;क्या नोटबुक है?&#8217;</p></blockquote>
<p>मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;नहीं,  इसमें मेरे कपड़े हैं।&#8217;</p></blockquote>
<p>उसे बहुत आश्चर्य हुआ, मानो कह रहा हो कि क्या कोई भारतीय बिना लैपटॉप के यात्रा कर सकता है। शायद सूचना प्रौद्योगिकी, भारतीयों की पहचान बन गयी है।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>बीएसएनएल अन्तरराष्ट्रीय सेवा &#8211; मुश्कलें</strong></p>
<p>मैं भारत से वियाना सुबह पहुंच गया था। वहां से बर्लिन के लिये उड़ान तीन घन्टे बाद थी। वियाना और बर्लिन का समय एक ही है और भारत के समय से ४:३० घन्टे पीछे है। मैंने अपनी पत्नी को फोन करने के लिये मोबाइल निकाला। यह बीएसएनएल का है। मैं इसे अन्तरराष्ट्रीय घूमने के लिये करवा कर ले गया था पर यह काम न कर, केवल सीमित सेवाओं को दिखा रहा था। वियाना हवाई अड्डे पर मुझे एक भारतीय सज्जन मिले। उनके फोन में भी यही मुश्किल थी। बहुत झुंझलाहट आयी। सामान ज्यादा होने के कारण, मैं अपना लैपटॉप नहीं ले गया था। मैंने अपना  प्रस्तुतीकरण पहले ही भेज दिया था।<span style="font-size:130%;"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R0ofVwovtjI/AAAAAAAAAQQ/imJDlGPEBtI/s1600-h/bsnl-5.jpg"><img style="float:left;cursor:pointer;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R0ofVwovtjI/AAAAAAAAAQQ/imJDlGPEBtI/s200/bsnl-5.jpg" border="0" alt="" /></a></span></p>
<p>घूमते-घूमते, मेरी नजर एक भारतीय युवक पर पड़ी। उसके पास लैपटॉप था। वह कम्प्यूटर इंजीनियर था और अपनी कंपनी की तरफ से पोलैंड जा रहा था। उसे, वहां पर, बैंक की क्रेडिट कार्ड सर्विस का कंप्यूटरीकरण करना था। उसके फोन के साथ भी यही मुश्किल थी। मैंने उससे पूछा कि क्या उसका लैपटॉप काम कर रहा है। उसने कहा हां। मैंने उससे पूछा कि क्या मैं उसके लैपटॉप से अपनी पत्नी को ई-मेल भेज सकता हूं। उसने मना कर दिया। उसका कहना था,</p>
<blockquote><p>&#8216;यह कम्पनी का है। इससे प्राइवेट ई-मेल नहीं जा सकती है। आप पब्लिक बूथ से फोन कर लीजिये।&#8217;</p></blockquote>
<p>मैं नहीं जानता था कि वह बहाना कर रहा था या सच में ऐसा था। यदि यह सच था तो वह कंपनी, मैनेजमेंट के साधारण सिद्धांतो को नहीं समझती। क्या मालुम वह यह सोचता हो कि मैं ई-मेल से बम ब्लास्ट करने की बात सोचता हूं और इसके लिये वह पकड़ जायगा <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>मेरे पास यूरो थे पर सिक्के नहीं। मैंने कभी पब्लिक बूथ से फोन नहीं किया था। भाषा की मुश्किल अपनी जगह थी। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। जीवन में, मैंने अपने आप को कभी इतना असहाय नहीं पाया।</p>
<p>बर्लिन पहुंच कर मैंने अपनी पत्नी को ई-मेल से, मोबाइल फोन की मुश्किल के बारे में बताया। उसने टेलीफोन वालों से पूछ कर निदान भी बताया पर काम नहीं बना। हार कर वहां पर प्रीपेड कार्ड खरीदा। मुझे इसका निदान वियाना में पता चला। इसके लिये Application में जाना पड़ता है। वहां से Network, फिर cell one में जाकर, International चुनना होता है। मैं Setting में जा कर, Network Service में, इसका हल ढूढ़ रहा था। वापस भारत आकर, यह प्रक्रिया पुन: अपनानी पड़ती है। इस बार National चुनकर उचित Network, जो कि Dolphin है, चुनना होता है।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>बर्लिन में भाषा की मुश्किल</strong></p>
<p>बर्लिन में मुझे होटल में ठहरना था। वहां होटलों में चेक-इन का समय ३ बजे का होता है। मैं वहां १० बजे सुबह पहुंच गया था। उन्होंने सामान रखने की अनुमति दे दी पर कहा कि कमरा तीन बजे के बाद ही मिलेगा। मैं सामान रख कर बर्लिन घूमने निकल गया।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R1QMvvZPIOI/AAAAAAAAAQo/pDqfQHTIJck/s1600-R/Berlin+Bazaar.JPG"><img style="border:0 none;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R1QMvvZPIOI/AAAAAAAAAQo/OsGVuQZMfvo/s200/Berlin+Bazaar.JPG" border="0" alt="" width="200" height="150" /></a><p class="wp-caption-text">बाज़ार</p></div>
<p>बर्लिन में ट्रेन, ट्राम, और बसें तीनों चलती हैं पर बस का सबसे ज्यादा प्रयोग होता है। शहर घूमने के लिए, कई एजेंसियां अपनी बस सेवा चलाती हैं। यह हॉप ऑन, हॉप ऑफ (Hop on, Hop Off) कहलाती हैं। आपको केवल एक बार टिकट लेना होता है। यह पूरे दिन के लिए वैध है। यह घूमने की जगह के पास रूकती हैं। आप किसी भी जगह उतरें और कहीं पर बैठ सकते हैं। दस मिनट बाद, वहां पर दूसरी बस आयेगी। बसों में हेडफोन है, जिससे सात भाषाओं में जगहों का वर्णन आता रहता है। इसमें अंग्रेजी तो शामिल है पर हिन्दी नहीं है। मैंने सोचा था कि एक चक्कर बिना उतरे लूंगा फिर दूसरी बार जो जगह अच्छी लगेगी उस पर उतर कर देखूंगा। बीच में ही मुझे भूख लगने लगी। एक जगह मुझे बहुत सारे ढ़ाबे दिखाई पड़े, मैं वहीं उतर गया।<span style="font-size:130%;"> </span><span style="font-size:130%;"> </span><span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p style="text-align:right;"><em><br />
</em></p>
<p>ढ़ाबों में मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या खाऊं। मैं शाकाहारी खाने के साथ,  दूध, अण्डा, और मछली ले लेता हूं। हांलाकि चिकन या अन्य माँस नहीं खाता। मैंने भारत छोड़ते समय निश्चय किया था कि खाने से परहेज नहीं करुंगा लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा था कि क्या खाना लूं। एक ढ़ाबे में, मैंने महिला से बात की। उसने जर्मन भाषा में कुछ जवाब दिया। मैंने कहा,</p>
<blockquote><p>&#8216;डाउच नाइन (जर्मन भाषा नहीं), इंगलिश याह (अंग्रजी हां)।&#8217;</p></blockquote>
<p>वह बोली,</p>
<blockquote><p>&#8216;डाउच नाइन अला&#8230;ला&#8230;ला&#8230;.।&#8217;</p></blockquote>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 160px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R1QNv_ZPIQI/AAAAAAAAAQ4/t8veZeiRE5w/s1600-R/Berlin+Municipal+building.JPG"><img style="border:0 none;cursor:pointer;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R1QNv_ZPIQI/AAAAAAAAAQ4/c1KdpPT0z1w/s200/Berlin+Municipal+building.JPG" border="0" alt="" width="150" height="200" /></a><p class="wp-caption-text">बर्लिन नगरपालिका की ईमारत</p></div>
<p><span style="font-size:130%;"> </span><span style="font-size:130%;"> </span>मुझे लगा भूख से मरा रा रा&#8230;।</p>
<p>बगल के ढ़ाबे में, अश्वेत लोग थे। वे अंग्रेजी अच्छी बोलते थे। मैंने उनसे कुछ शाकाहारी खाने के लिए कहा। उन्होंने मुझे चावल के साथ राजमां और सब्जियां दी, साथ में चटनी भी। खाना गर्म था, मजा आया। खाना खा कर मैं फिर बस में चढ़ गया।</p>
<p><em><br />
</em></p>
<p>बस में घूमते हुए हम उस क्षेत्र से भी गुजरे जहां पर दूतावास हैं। यहां भारतीय दूतावास भी देखा। यह लाल रंग की इमारत है। जिसके पत्थर राजस्थान से आये हैं। एक चक्कर पूरा करने में ही शाम हो गयी, दूसरा चक्कर लेने का न तो समय था, न ही हिम्मत। मैं वापस पैदल ही होटल की तरफ चल दिया, जो कि लगभग एक किलोमीटर दूर था।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 160px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R1QNPfZPIPI/AAAAAAAAAQw/36ybb9Idk5I/s1600-R/Berlin+Church.JPG"><img style="border:0 none;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R1QNPfZPIPI/AAAAAAAAAQw/4OwOfEla_Ck/s200/Berlin+Church.JPG" border="0" alt="" width="150" height="200" /></a><p class="wp-caption-text">बर्लिन में एक चर्च जो द्वितीय विश्व युद्ध में बमबारी का शिकार रहा</p></div>
<p>मैं वापसी में रास्ता भटक गया। मुझे दो छोटी लड़कियां मिलीं। मैंने उन्हें नक्शा दिखा कर पूछा कि मैं यहां कैसे जाऊं। वे अंग्रेजी नहीं समझती थीं पर उन्होंने मुस्करा कर इशारे में बताया और मैं उधर ही चल दिया। काफी दूर जाने के बाद भी जब होटल नहीं मिला तो घबरा गया। वहीं पर एक वृद्ध दंपत्ति दिखाई पड़े। वे भी अंग्रेजी नहीं समझते थे। मैंने उनसे पता पूछा तो वे मुस्करा कर बार बार कुछ इशारा करने लगे। कुछ देर बाद समझ में आया कि मेरा होटल दो इमारत के बाद था और वे उसके बोर्ड की तरफ इशारा कर रहे थे। मैंने उन्हे धन्यवाद दिया और कमरे में पहुंचा।<span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p>कमरे के फ्रिज में, पानी या बीयर के दाम में कोई अंतर नहीं था। मैं शराब या बीयर नहीं पीता हूं पर पानी इतना महँगा। बाथरूम से लेकर, पानी नहीं पिया गया। ७ बज रहे थे। मैंने पिछली रात हवाई जहाज में काटी थी &#8211; थकान अलग लग रही थी, जल्द ही गहरी नींद में डूब गया।</p>
<p style="text-align:right;"><em><br />
</em></p>
<p>मुझे बर्लिन में भाषा की मुश्किल पड़ी। अच्छा हुआ कि मैं कुछ जर्मन के शब्द सीख कर गया था नहीं तो और भी मुश्किल पड़ती।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>ऑफिस, स्कूल साइकिल पर – स्वास्थ भी बढ़िया, पर्यावरण भी ठीक</strong></p>
<div>
<p><span style="font-size:130%;"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R2ciWpu9ugI/AAAAAAAAASA/Xx7_swDghqQ/s1600-h/Berlin-cycle-1.JPG"><img style="float:left;cursor:pointer;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R2ciWpu9ugI/AAAAAAAAASA/Xx7_swDghqQ/s200/Berlin-cycle-1.JPG" border="0" alt="" width="186" height="140" /></a></span></p>
</div>
<div>
<div>
<p><span style="font-size:130%;"> </span>बर्लिन घूमते समय मुझे जगह-जगह लोग साइकिलों पर चलते आये। कुछ बच्चे थे कुछ युवक युवतियां तो फिर कुछ और बड़े। कुछ लोग अपने बच्चों को साइकिल पर बिठा कर जा रहे, कुछ लोग साइकिलों पर ही बर्लिन यात्रा कर रहे थे। बर्लिन में सारी जगह खम्भे बने हैं आप वहीं पर अपनी साइकिलों पर ताला लगा कर छोड़ सकते हैं। मेरे पास समय होता तो मैं भी किराये पर साइकिल लेकर घूमना पसन्द करता।</p>
<div>
<p><span style="font-size:130%;"> </span></p>
</div>
<div>
<p><span style="font-size:130%;"> </span></p>
</div>
</div>
<div>
<p>यूरोप में साइकिल चलाने का काफी चलन है। इसके दो बड़े कारण हैं। यह चालक के स्वास्थ और पर्यावरण दोनों के लिये फायदेमंद है। बर्लिन में, मुझे बहुत सारे बच्चे साइकिल पर स्कूल जाते, और महिलाएँ एवं पुरुष ऑफिस जाते दिखे। वियाना में भी लोग साइकिलों पर घूमते नजर आये। शायद यही कारण हो कि इन दोनों जगह प्रदूषण बहुत कम था। इन दोनो जगह बहुत कम मोटर साइकिलें दिखीं। बहुत से लोग छोटी कार चलाते दिखे। लगता है कि यहां छोटी कारें काफी लोकप्रिय हैं।</p>
</div>
</div>
<p>यूरोप में किराये में साइकिल भी बहुत आसानी से मिल जाती है और इसे जगह जगह पर किराये पर लिया जा सकता है। यह किराये में ली जाने वाली कार जैसा है और स्वचलित हैं। लेकिन अब नयी तकनीक से युक्त होने के कारण खोयी जाने वाली साइकिलों का आसानी से पता लगाया जा सकेगा। अमेरिका में भी इस तरह का चलन शुरू हो रहा है। इसके बारे में आप न्यू यॉर्क टाइमस् का <a href="http://www.nytimes.com/2008/04/27/us/27bikes.html?_r=2&amp;ex=1366948800&amp;en=19840dbf078e00bb&amp;ei=5088&amp;partner=rssnyt&amp;emc=rss&amp;oref=slogin">यह</a> लेख पढ़ सकते हैं।</p>
<p>कुछ दिन पहले न्यूयार्क टाइम्स के <a href="http://www.nytimes.com/2007/11/05/us/05bike.html?_r=1&amp;ei=5070&amp;en=24f2b282cb780869&amp;ex=1194930000&amp;adxnnl=1&amp;emc=eta1&amp;adxnnlx=1194596128-khDMCgUngSKEoCpAaI8J+Q&amp;oref=slogin">एक लेख</a> में भी लिखा था कि अमेरिका के कई शहरों में साइकिलों ट्रैक बन रहे हैं और वे साइकिल चलाने पर जोर दे रहें हैं। अपने देश में कुछ उल्टा हो रहा है। हम सस्ती एक लाख रुपये की कार बनाने के बारे में सोच रहे हैं ताकि सबको कार मिल सके पर न तो सार्वजनिक यात्रा करने के संसाधनों को मजबूत कर रहे हैं, न ही पैदल अथवा साइकिल चलाने पर जोर दे रहे हैं। कुछ दिन पहले इसी बात को लेकर एक <a href="http://www.nytimes.com/2007/11/04/opinion/04iht-edfried.1.8177603.html">अन्य लेख</a> न्यूयॉर्क टाइम्स में निकला था। यदि सारे हिंदुस्तानियों के पास कार हो जायें यानि की एक अरब कारें- क्या हाल होगा &#8211; अरे क्या होगा सब जगह ट्रैफिक जाम।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 141px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R3Gi6pu9uzI/AAAAAAAAAUs/AjWknrVTCP0/s1600-h/Dead+by+the+Berlin+wall.jpg"><img style="border:0 none;cursor:pointer;width:112px;height:171px;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R3Gi6pu9uzI/AAAAAAAAAUs/AjWknrVTCP0/s200/Dead+by+the+Berlin+wall.jpg" border="0" alt="" width="131" height="200" /></a><p class="wp-caption-text">बर्लिन दीवाल पार करते समय, पूर्वी बर्लिन के गार्ड की गोली से मरा यूवक - चित्र विकिपीडिया से</p></div>
<p><strong>बर्लिन दीवार का टूटना और दिलों का मिलना</strong><span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p>बर्लिन दीवार १९६१ में बनी थी। यह इसलिये बनायी गयी थी ताकि लोग पूर्वी जर्मनी से, पश्चिमी जर्मनी की तरफ न जा सके। बस में चल रही कमेंटरी से पता चला कि इसके बनने के बावजूद भी लगभग ५००० लोग भागने में सफल हो गये पर ९० लोग मार दिये गये थे। जिसमें ६० गोलियों के शिकार हुए।<span style="font-size:130%;"> </span><span style="font-size:130%;"> </span><span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p style="text-align:right;"><em><br />
</em></p>
<p>बर्लिन दीवार को १९९० में, तोड़ दिया गया। इस समय, दिखाने के लिये कि कुछ जगह यह छोड़ दी गयी है। बर्लिन दीवार, जहां पर हटा दी गयी है, वहां दो ईंटो की लाइन बिछी है जिससे पता चलाता है कि यहां पर बर्लिन दीवार थी। जगह-जगह उसमें लोहे की प्लेट जड़ी है। जिस पर नम्बर लिखें हैं। शायद किसी निश्चित जगह से उसकी दूरी बताते हैं।<a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R3Gkqpu9u0I/AAAAAAAAAU0/dvuzW1RYTjY/s1600-h/The+Spy.jpg"><img style="float:left;cursor:pointer;width:96px;height:147px;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R3Gkqpu9u0I/AAAAAAAAAU0/dvuzW1RYTjY/s200/The+Spy.jpg" border="0" alt="" /></a></p>
<p>हमारी बस वहां से भी गुजरी, जहां पर बर्लिन दीवाल का कुछ भाग अब भी है। वहां से गुजरते समय, मुझे १९६० के दशक में पढ़ा उपन्यास &#8211; <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/The_Spy_Who_Came_in_from_the_Cold">The Spy Who Came In From the Cold</a> &#8211; की याद आयी। उसी समय इस पर <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/The_Spy_Who_Came_in_from_the_Cold_(film)">बनी फिल्म</a> भी देखी थी। इस उपन्यास को John le Carre ने लिखा है। यह उस समय बर्लिन में चल रहे शीत युद्ध पर आधारित एक डबल एजेंट की कहानी है जिसमें बर्लिन दीवाल की अहम भूमिका है। इसमें कोई शक नहीं कि यह, शीत युद्ध से जुड़ा, सबसे बेहतरीन जासूसी रोमांचकारी उपन्यास है।<span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p>जब जर्मनी के दोनों भाग जुड़ रहे थे तब बहुत से लोग कहते थे क्योंकि कि पूर्वी जर्मनी के लोग पश्चिमी जर्मनी के कारण अमीर हो जायेंगे। इस बारे में पूछने पर वहां लोगों ने बताया कि ऐसा नहीं हुआ। पूर्वी जर्मनी अब भी गरीब है। वहां रोज़गार के साधन नहीं हैं। वहां अधिकतर शहरों में जनसंख्या कम होती जा रही है। युवक युवतियां वहां से निकल कर पश्चिमी जर्मनी आ रहे हैं और पूर्वी जर्मनी के शहर केवल वृद्ध लोगों के शहर होते जा रहे हैं<span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p>द्वितीय विश्व युद्घ के बारे में मैंने डरते डरते कुछ सवाल किये। उनका कहना था कि हांलाकि नयी पीढ़ी यह नहीं समझ पाती है कि जिसे देश में इतने विचारक, इतने दार्शनिक हुए हैं उन्होंने ऐसा काम कैसे कर लिया पर नई पीढ़ी यह भी सोचती है कि यह काम पुरानी पीढ़ी ने किया है जिसके लिये वे उत्तरदायी नहीं हैं।</p>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 210px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R3Gg1pu9uwI/AAAAAAAAAUU/LXX-HoRKAAM/s1600-h/Berlin+wall+remaining.JPG"><img style="border:0 none;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R3Gg1pu9uwI/AAAAAAAAAUU/LXX-HoRKAAM/s200/Berlin+wall+remaining.JPG" border="0" alt="" width="200" height="150" /></a><p class="wp-caption-text">बची हुई बर्लिन दीवाल - चित्र विकिपीडिया से</p></div>
<p>बर्लिन दीवाल का टूटना, पूर्वी-पश्चिमी जर्मनी का आपस में विलय, होना यह एक भावनात्मक बात थी। मुझे जर्मन लोगों ने बताया कि उन्हें इसकी प्रसन्नता है। हमारे भी &#8211; दो टुकड़े हुए हिन्दुस्तान और पाकिस्तान। बाद में पाकिस्तान के भी दो। यानि कि हम दो से तीन हो गये हैं। हम में एक खून है, एक सभ्यता है &#8211; क्या कभी हम तीन मिल कर एक हो सकेगें।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 151px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4A585u9vCI/AAAAAAAAAWk/inzRxz2RIXk/s1600-h/Max_Muller.jpg"><img style="border:0 none;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4A585u9vCI/AAAAAAAAAWk/inzRxz2RIXk/s200/Max_Muller.jpg" border="0" alt="" width="141" height="200" /></a><p class="wp-caption-text">मैक्स मुलर - जन्मः ६.१२.१८२३ – मृत्युः २८.१०.१९०० चित्र विकिपीडिया से</p></div>
<p><strong>भारतीय सभ्यता, संस्कृत, और उपनिषद के जर्मन विद्वान – मैक्स मुलर</strong><span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p>मैक्स मुलर का जन्म ६ दिसम्बर १८२३ में देसा, (Dessan, Germany) में हुआ था। लिपजिंग विश्वविद्यालय से पढ़ाई और पी.एच.डी. लेने के बाद १८४५ में वे फ्रांस चले गये जहां उन्होंने संस्कृत सीखी। १८४६ में वे, संस्कृत का और अच्छा अध्ययन करने, इंगलैंड चले गये। उन्होंने १८६८ से १८७५ तक आल सोलस् कालेज All Soules College, Oxford में Comparative Theology के प्रोफेसर रहे।<span style="font-size:130%;"> </span></p>
<p style="text-align:right;"><em><br />
</em></p>
<p>मैक्स मुलर ने भारतीय सभ्यता, संस्कृत, उपनिषदों का अच्छा अध्ययन किया और कई पुस्तकें लिखी हैं। इनमें मुख्य हैं:</p>
<ol>
<li>A History of Ancient Sanskrit Literature So Far As It Illustrates the Primitive Religion of the Brahmans (1859),</li>
<li>Lectures on the Science of Language (1864, 2 vols.),</li>
<li>Chips from a German Workshop (1867-75, 4 vols.),</li>
<li>Introduction to the Science of Religion (1873),</li>
<li>India, What can it Teach Us? (1883),</li>
<li>Biographical Essays (1884),</li>
<li>The Science of Thought (1887),</li>
<li>Six Systems of Hindu Philosophy (1899),</li>
<li>Natural Religion (1889),</li>
<li>Physical Religion (1891),</li>
<li>Anthropological Religion (1892),</li>
<li>Theosophy, or Psychological Religion (1893).</li>
<li>Auld Lang Syne (1898),</li>
<li>My Autobiography: A Fragment (1901);</li>
<li>The Life and Letters of the Right Honourable Friedrich Max Müller (1902, 2 vols.), यह उनकी पत्नी द्वारा सम्पादित है</li>
</ol>
<p>उनकी मृत्यु २८ अक्टूबर १९०० में हो गयी।</p>
<p>मैक्स मुलर कभी भारत नहीं आये हैं पर भारतीय सभ्यता के बारे में बहुत काम किया है। जर्मनी में, मैंने उनके बारे में लोगों से पूछा पर उन्होंने मैक्स मुलर का नाम नहीं सुना था। मैंने उन्हें बताया कि वे जर्मन थे उन्होंने भारतीय सभ्यता और संस्कृत भाषा पर बहुत काम किया था। उनके नाम पर भारत में भवन और मार्ग हैं। उन्हें यह सुन कर आश्चर्य हुआ।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>खूबसूरत शहर &#8211; बर्लिन</strong></p>
<div>
<p><span style="font-size:130%;"> </span></p>
</div>
<p>मैंने एक दिन बाद, पुन: बर्लिन शहर देखने के लिये बस सेवा का प्रयोग किया। इस बार सोचा कि कुछ जगह उतर कर उसका आनंद लूंगा, पर हल्का-हल्का पानी भी बरसने लग गया इसलिये यह उतनी अच्छी तरह से नहीं हो पाया जैसा कि मैं चाहता था।</p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 210px"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4rkV5u9vFI/AAAAAAAAAW8/6va5Bq5lDXM/s1600-h/Berlin+Rickshaw.JPG"><img style="border:0 none;cursor:pointer;width:174px;height:130px;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4rkV5u9vFI/AAAAAAAAAW8/6va5Bq5lDXM/s200/Berlin+Rickshaw.JPG" border="0" alt="" width="200" height="150" /></a><p class="wp-caption-text">बर्लिन के रिक्शे</p></div>
<p>मैं सबसे पहली जगह बर्लिन गेट पर उतरा। यह १४ गेटों में से एक है जहां पर टैक्स की वसूली की जाती थी। यहां पर अलग तरह के रिक्शे हैं जिस पर लोग चढ़कर आस-पास की जगह घूमने जाते हैं। कुछ रिक्शों को लड़कियां भी चलाती दिखीं।</p>
<p style="text-align:right;"><em><br />
</em></p>
<div class="wp-caption alignleft" style="width: 210px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4rl6Zu9vHI/AAAAAAAAAXM/CAeGTMjb0EM/s1600-h/Berlin+Parliament.JPG"><img style="border:0 none;cursor:pointer;width:162px;height:121px;margin:0 10px 10px 0;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4rl6Zu9vHI/AAAAAAAAAXM/CAeGTMjb0EM/s200/Berlin+Parliament.JPG" border="0" alt="" width="200" height="150" /></a><p class="wp-caption-text">जर्मन संसद, पीछे और एक तरफ का हिस्सा</p></div>
<p>बर्लिन गेट के बगल में जर्मनी की संसद है। मैं इसके बगल और पीछे गया। मैं सामने इसलिये नहीं गया क्योंकि इसमें कुछ समय लगता और मैं बाकी जगह भी घूमना चाहता था इसलिये वापस जहां से बस मिलने वाली थी वहां पर वापस आ गया।</p>
<p><em><br />
</em></p>
<div class="wp-caption alignright" style="width: 160px"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4rlSZu9vGI/AAAAAAAAAXE/XfW3Dlfq92A/s1600-h/Berlin+Tower.JPG"><img style="border:0 none;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/R4rlSZu9vGI/AAAAAAAAAXE/XfW3Dlfq92A/s200/Berlin+Tower.JPG" border="0" alt="" width="150" height="200" /></a><p class="wp-caption-text">बर्लिन टावर</p></div>
<p>मैं वहां पर बर्लिन टावर भी देखने गया। रात के समय सारा बर्लिन बहुत सुन्दर लगता है। मुझे लगा कि यूरोप के मुख्य शहरों में टावर बनाने का चलन है। वियना में भी इस तरह की टावर है। मैं बर्लिन टावर पर टॉयलेट भी जाना चाहता था, पता चला कि इसके लिए ५० सैन्ट देने पड़ेगें यानी कि लगभग ३० रूपये। सू &#8211; सू करने के लिये ३० रूपये कुछ ज्यादा ही लगे पर यदि न देता तो ज्यादा मुश्किल पड़ती इसलिये पैसे देकर सुविधा का प्रयोग किया।</p>
<p style="text-align:right;"><em><br />
</em></p>
<p>रास्ते में घूमते हुऐ, रात्रि में मनोरंजन की जगहों और साधनों के बारे में, कई जगह पोस्टर दिखायी पड़े, उनका निमंत्रण मिला। मुन्ने की मां की याद आ गयी और मैंने नजरें दूसरी तरफ कर ली <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>वहां पर मैक्डॉनाल्ड, पीट्जा शॉप भी है पर मैं वहां जाना ठीक नहीं समझा। मैं एक जर्मन ढ़ाबे पर पहुंचा। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या लूं। वहां कि महिला को अंग्रेजी ठीक से नहीं आती थी। उसने मुझे बतख का मांस, डबलरोटी, चटनी के साथ खाने के लिए कहा। भूख बहुत जोरों से लगी थी सब अच्छा लगा। खाकर वापस आया अगले दिन मुझे वियाना जाना था और सामान लगाते ही मेरी आंख भी लग गयी।</p>
<div style="text-align:center;"><em>यह मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यसदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।</em><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/11/learn-german-language.html"></a></div>
<div style="text-align:center;"><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/11/learn-german-language.html">जर्मन भाषा</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/11/austrian-airline.html">ऑस्ट्रियन एयरलाइन</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/11/bsnl-international-roaming.html">बीएसएनएल अन्तरराष्ट्रीय सेवा &#8211; मुश्कलें</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/12/language-difficulty-berlin.html">बर्लिन में भाषा की मुश्किल</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/12/cycling-is-good-for-health-and.html">ऑफिस, स्कूल साइकिल पर – स्वास्थ भी बढ़िया, पर्यावरण भी ठीक</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/12/berlin-wall-unification-of-germany.html">बर्लिन दीवार का टूटना और दिलों का मिलना</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/01/max-muller.html">भारतीय सभ्यता, संस्कृत, और उपनिषद के जर्मन विद्वान – मैक्स मुलर</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2008/01/what-to-see-in-berlin-city.html">खूबसूरत शहर बर्लिन</a>।।</div>
<div style="text-align:center;">
<p>&nbsp;</p>
</div>
<div style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</div>
<div style="text-align:left;"><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Berlin">Berlin</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Berlin_Wall">Berlin wall</a>, The Spy who came in from the Cold, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Max_Muller">Max Müller</a>,</div>
<div style="text-align:left;"><span style="font-size:100%;"><a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, </span><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>,  <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <span style="font-size:100%;"><a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, </span><span style="font-size:100%;">सैर सपाटा,</span><span style="font-size:100%;"> <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>,</span><span style="font-size:100%;"> <a title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, </span><span style="font-size:100%;">यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</span></div>
<br />Posted in यात्रा वर्णन Tagged: travel <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/unmukth.wordpress.com/357/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/unmukth.wordpress.com/357/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/unmukth.wordpress.com/357/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/unmukth.wordpress.com/357/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/unmukth.wordpress.com/357/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/unmukth.wordpress.com/357/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/unmukth.wordpress.com/357/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/unmukth.wordpress.com/357/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/unmukth.wordpress.com/357/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/unmukth.wordpress.com/357/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/unmukth.wordpress.com/357/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/unmukth.wordpress.com/357/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/unmukth.wordpress.com/357/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/unmukth.wordpress.com/357/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&amp;blog=230997&amp;post=357&amp;subd=unmukth&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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		<title>पृथ्वी पर स्वर्ग – कश्मीर यात्रा</title>
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		<pubDate>Mon, 22 Dec 2008 03:00:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[travel]]></category>
		<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://unmukth.wordpress.com/?p=123</guid>
		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में, काश्मीर यात्रा का वर्णन है। 
This post is about my Kashmir Trip. It is in Hindi (Devnagri).
yeh post meri kashmir yatra ke baare mein hai. It is Hindi (Devnagri).<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=123&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em>इस चिट्ठी में, काश्मीर यात्रा का वर्णन है। <a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rm1qeLDvfKI/AAAAAAAAAGU/gGw_pEpsxaw/s200/sunset-2.jpg"><img class="alignright" title="Dull lake Srinagar Kashmir" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rm1qeLDvfKI/AAAAAAAAAGU/gGw_pEpsxaw/s200/sunset-2.jpg" alt="" width="120" height="158" /></a></em></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;"><span id="more-123"></span>जन्नत कहीं है तो वह यहीं है, यहीं है, यहीं है</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">कहते हैं कि जहांगीर जब सबसे पहली बार कश्मीर पहुंचे तो कहा कि जन्नत कहीं है तो वह यहीं है, यहीं है,  यहीं है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैं १९७५ की जून में कश्मीर गया था। मुन्ने की मां कभी नहीं गयी। हम लोगों ने कई  बार कश्मीर  जाने का प्रोग्राम बनाया पर बस जा न सका। हमारे सारे दायित्व समाप्त हैं। इसलिये मन पक्का कर, इस गर्मी में हम लोग कश्मीर के लिये चल दिये।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">दिल्ली से श्रीनगर के लिये हवाई जहाज पकड़ा। रास्ते में भोजन मिला।  प्लेट में एक प्याला भी था। चाय नहीं मिली पर  जब  प्लेट वापस जाने लगी। तो मैने परिचायिका से पूछा कि यदि चाय या कॉफी नहीं देनी थी तो  प्लेट में कप क्यों रखा था।  वह मुस्कराई और बोली,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;आज फ्लाईट में बहुत भीड़ है।  फ्लाईट केवल एक घन्टे की है इतनी देर में सबको चाय या कॉफी दे कर सर्विस समाप्त करना मुश्किल था। इसलिये नहीं दी,  पर लौटते समय जरूर मिलेगी।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">परिचायिका का मुख्य काम तो अच्छी तरह से बात करना होता है। लौटते समय कौन किससे मिलता है।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">बम्बई का फैशन और कश्मीर का मौसम – दोनो का कोई ठिकाना नहीं है</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">श्रीनगर पहुंचते ही, हम टैक्सी पकड़कर पहलगांव के लिए चल दिये। पहलगांव समुद्र तट से लगभग ७५०० लगभग फीट की ऊँचाई पर है। यहां लिडर और शेषनाग नदियों का संगम है। श्रीनगर से पहलगांव का रास्ता लिडर नदी के साथ चलता है और सुन्दर है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">हमारे टैक्सी चालक का नाम ओमर था। उसने कहा कि बम्बई का फैशन और कश्मीर का मौसम दोनो एक जैसे हैं, पता नहीं कब बदल जाय।  बहुत ज्लद ही इसका अनुभव हो गया। रास्ते में कहीं पांच मिनट बारिश, तो फिर  तेज धूप।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">रास्ते में हमने रूक कर कशमीरी कहवा पिया। यह सुगंधित चाय सा था। इसमें दूध तो नहीं पर दालचीनी और बादाम पड़े थे।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">पहलगांव में हम हीवान (Heevan) होटल में ठहरे।  यह होटल लिडर नदी के बगल में है। खिड़की के बाहर सफेद हिम अच्छादित पहाड़ या फिर पेड़ों से भरी हरी पहाड़ियां थीं। देखने में मन भावन दृश्य था।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">पहलगांव, पहुंचते शाम हो चली थी। लिडर  नदी पर रैफ्टिंग भी होती है। मैंने सोचा क्यों न रैफ्टिंग कर ली जाय। होटेल वालों ने कार से दो किलोमीटर ऊपर नदी के किनारे छुड़वाया फिर नदी पर  रैफ्ट के ऊपर, तेज धार के साथ, तीन किलोमीटर का सफर &#8211; सर पर हैमलेट और बदन पर जैकट।  रैफ्टिंग करने में पूरी तरह भीग गये।  बीच में पानी भी बरसने लगा,  रही सही कमी भी पूरी हो गयी। रैफ्ट ने होटल के आगे छोड़ा । वहां से दौड़ लगाकर वापस होटल आए तो कुछ गर्मी आई। कमरे में आकर कपड़े बदले फिर गर्म चाय पी तो जान में जान आयी।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">हम लोग पहले मां के साथ ऐसी जगहों पर जाते थे। मां हमेशा एक छोटी बोतल में ब्रांण्डी साथ रखती थी। ठंड लगने पर गर्म दूध में एक चम्मच ब्रांडी डालकर पीने के लिए देती थी।  हम लोग ब्रांडी नहीं ले गए थे।  मुझे फिर मां की याद आयी। अगली बार अवश्य साथ ले जाऊंगा।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">यदि आप यह सोचते हैं कि कश्मीर में  विस्की से गर्मी पा  सकती  हैं।  तो भूल जाइये। इस्लाम में शराब पीना हराम है। वहां अधिकतर लोग मुसलमान हैं इसलिये  कश्मीर में शराब हराम है।  हां,  चोरी छिपे  जरूर पी जाती है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">यहां पर आकर लगा कि हमे छाता भी लाना चाहिए था मालुम नहीं कब, पांच मिनट के लिए बरसात।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">कश्मीर में एक अनुभव और हुआ। यहां होटल अच्छे हैं। खाना अच्छा है पर तौलिये साफ नहीं होते हैं। उसका कारण यह बताया कि सूखने में मुश्किल होती है।  मुझे लगा कि अपने साथ छोटे छोटे तौलिये भी रहने चाहिये ताकि बदन पोंछा जा सके।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">बहुत अच्छा हुआ कि मैंने पहुंचते ही रैफ्टिंग कर ली। मुन्ने की मां ने नहीं की थी। उसे डर लगता था। अगले दिन रैफ्टिंग नहीं हो रहीं थी। होटल वाले ने बताया कि किसी ने रैफ्टिंग वाले को पीट दिया था इसलिए उनकी हड़ताल है। एक बार का वे २०० रूपये लेते हैं। एक दिन में कम से कम १००० लोग रैफ्टिंग करते हैं। यानि हड़ताल में २ लाख का घाटा। सच है हड़ताल से, हड़ताल करने वालों का ही घाटा होता है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">अगले दिन हम लोग आड़ू गये। आड़ू ले जाने के लिये स्थानीय टैक्सी करनी होती है। हमने भी एक टैक्सी की। उसके चालक का नाम शहनवाज था। आड़ू में प्राकृतिक सौंदर्य है। वहां लोग पहुंच कर घोड़े पर घूमते हैं। हम लोग घोड़े पर नहीं गये। पैदल ही  घूमने निकल</span><span style="font-size:medium;"> गये। यह सुन्दर जगह है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">जब हम लोग पैदल जाने लगे तो हमारा टैक्सी चालक,  शहनवाज, भी हमारे साथ था। उसका कहना था,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;कश्मीरी पाकिस्तान के साथ नहीं जाना चाहते। वे या तो हिन्दुस्तान के साथ या फिर स्वतंत्र रहना चाहते हैं। उसके मुताबिक पाकिस्तान उग्रवाद फैला रहा है  पर पैरा-मिलिट्री फोर्स भी उग्रवादी की तरह काम कर रही है। यदि किसी के घर उग्रवादी जबरदस्ती घुस जाय। तो उसके  घर की महिलाओं  की इज्जत लूटते हैं।  आग लगा देते हैं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">आड़ू बहुत छोटा सा गांव है जिसमें एक सरकारी मिडिल स्कूल है। दो साल पहले तक यह पांचवी तक था अब ८वीं तक है।  इसे जवाहरलाल नेहरू ने शुरू करवाया था।  मैं हमेशा स्कूल, विश्वविद्यालय में बच्चों के साथ समय व्यतीत करना चाहता हूं। उनके साथ रह कर जीवन में नया-पन आता है। इसलिये इस स्कूल में बच्चों से मिलने पहुंच गया।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">इस स्कूल में लगभग १५० बच्चे हैं। हम जब वहां पहुंचे तो वे प्रार्थना कर रहे थे। उसके बाद हर बच्चा आकर कोई गीत सुनाता था या सामान्य ज्ञान का प्रश्न पूछता था। </span><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rnt-qLDvfLI/AAAAAAAAAGc/EIYAlIDcRzE/s200/Students+Aru.jpg"><img class="alignright" title="students Aaroo" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rnt-qLDvfLI/AAAAAAAAAGc/EIYAlIDcRzE/s200/Students+Aru.jpg" alt="" width="182" height="129" /></a></span><span style="font-size:medium;">वे अध्यापक को उस्ताद शब्द से संबोधित कर रहे थे। उस्ताद के अनुसार यह उन्हे नेतृत्व करने की शिक्षा देता है। स्कूल में अंग्रेजी, उर्दू तथा कश्मीरी पढ़ाई जाती थी। कुछ बच्चों ने अंग्रेजी में सवाल पूछे और कविता भी सुनायी, कुछ ने उर्दू  में भी सुनायी।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैनें कुछ समय बच्चों के साथ गुजारा। मैंने उनसे पूछा कि उनका सबसे पसंदीदा हीरो कौन है उनका जवाब था मिथुन चक्रवर्ती। मुझे आश्चर्य हुआ। उन्होंने इसका कारण यह बताया कि वह बहुत अच्छी फाइट करता है इसलिए वह पसन्द है। उनके उस्ताद जी ने बताया कि वहां &#8216;ज़ी क्लासिक&#8217; चैनल आता है उसमें पुरानी पिक्चरें आती है इसलिए वे मिथुन चक्रवर्ती का नाम ले रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैने भी विद्यार्थियों से एक सवाल पूछा।  मिथुन चक्रवर्ती के यहां एक चौकीदार था। एक दिन सुबह हवाई जहाज से मिथुन को कलकत्ता जाना था। चौकीदार ने जाने के लिए मना किया। उसने  कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;मैंने  अभी सपना देखा है कि हवाई जहाज की दुर्घटना हो गयी है और सब यात्री मर गये हैं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मिथुन चक्रवर्ती उस फ्लाइट से नहीं गये। उस फ्लाइट की दुर्घटना हो गयी और सब यात्री मर गये। मिथुन चक्रवर्ती ने चौकीदार को इनाम दिया पर नौकरी से निकाल दिया । मैंने पूछा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;इनाम तो इसलिए दिया कि जान बच गयी पर चौकीदार को  नौकरी से क्यों निकाला।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">कुछ संकेत देने के बाद एक बच्चे ने सही जवाब बता दिया।</span></p>
<p style="text-align:center;"><span style="font-size:medium;"><strong>लैपटॉप की याद सताये</strong></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैं जहां जाता हूं वहां लैपटॉप भी ले जाता हूं शायद यह मेरे ठाकुर जी हैं पर कश्मीर ट्रिप में साथ नहीं ले गया था।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">अक्सर बोलना होता है &#8211; लैपटॉप साथ हो तो यह आसान होता है।   मेरी कश्मीर की यात्रा मौज मस्ती की थी। कोई भाषण नहीं देना था इसलिए लैपटॉप साथ नहीं लाया। मेरे पास रिलायंस फोन है। इसके कारण हमेशा अंतरजाल पर जाया जा सकता है।  कशमीर में रिलायंस फोन जम्मू तक ही है और कहीं नहीं। इसलिये यह इस ट्रिप में बेकार था।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">कश्मीर में जल्द ही अन्तरजाल की याद आने लगी। पहलगांव में एक ही साईबर कैफे है। वहां पहुंचा तो पता चला कि वह खराब है <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_sad.gif' alt=':-(' class='wp-smiley' /> </span></p>
<p><span style="font-size:medium;">पहलगांव में कोई हिन्दू या सिख नहीं है पर पुलिस स्टेशन के सामने एक मंदिर और गुरूद्वारा है। मेरे पूछने पर बताया गया,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;जब अमरनाथ की यात्रा होती है तो यात्री इसमें जातें हैं।  सिख यात्रियों के लिए गुरूद्वारा में लंगर होता है।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">पहलगांव में ९ होल का गोल्फ कोर्स है। उस पर काम चल रहा है और अन्तरराष्ट्रीय स्तर का १८ होल का गोल्फ कोर्स बन रहा है। इस समय इसके तीन होल पर ही खेल हो सकता है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">पहलगांव से पास में  चन्दरबाड़ी  भी है। यहां टैक्सी से जाया जा सकता है। यहां पर बर्फ  रहती है और स्लेजिंग की जा सकती है। हमारे लिये  समय कम था।  यह करना संभव नहीं था।  इसलिये वहां नहीं गये।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">आप स्विटज़रलैण्ड में हैं</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">पहलगांव में बाईसरन भी देखने की जगह है।  वहां पैदल या फिर घोड़े पर बैठ कर जाया जा सकता है। वहां जाने के लिये रोड तो है पर बहुत खराब है।  घोड़े वालों की  विरोध के कारण, टैक्सी नहीं जा सकती पर आप अपनी कार से जा सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">बाईसरन, एक घासस्थली (Meadow) है। <a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RoL590wiNQI/AAAAAAAAAGk/ryaefVMBBww/s200/Bisaran.jpg"><img class="alignleft" title="Bisaran" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RoL590wiNQI/AAAAAAAAAGk/ryaefVMBBww/s200/Bisaran.jpg" alt="" width="165" height="123" /></a>वहां हम लोग घोड़ों पर गये। पहुंचते ही, घोड़े वाले ने कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;आप लोग स्विटज़रलैण्ड में हैं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मैं कभी स्विटज़रलैण्ड नहीं गया इसलिये कह नहीं सकता कि उसकी बात सच है या नहीं पर यह जगह बहुत खूबसूरत बड़ा सा मैदान है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">हम जब मुन्ने के साथ ऎसी जगह जाते  थे तो  हमेशा चटाई रखते थे और फिर शतरंज होता था। मुन्ने की मां को शतरंज पसन्द नहीं है इसलिए उसके साथ तो नहीं खेला जा सकता। हांलाकि यदि वह खेलती होती तो भी मैं उससे जीत नहीं पाता। कहीं  पत्नियों से चालों में कोई जीत सका है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">ऐसी जगह हम लोग कभी-कभी donkey-donkey भी खेलते थे। इसमें गेंद या फ्रिस्बी को एक फेकता है और दूसरा पकड़ता है। पहली बार न पकड़े जाने पर D  दूसरी बार O और इसी तरह से जो पहले Donkey  बन जाय वह बाहर।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">शिव-पार्वती का निवास – गौरीमर्ग पर अब गुलमर्ग</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">हम लोग पहलगांव से गुलमर्ग पहुंचे। गुलमर्ग लगभग ९,००० फीट पर है। कहा जाता है कि यहां शिव-पार्वती का निवास है इसलिये यह गौरीमर्ग कहलाता था। सोलहवीं शताब्दी में कश्मीर के सुलतान यूसुफ शाह ने इसका नाम गुलमर्ग अर्थात फूलों की घाटी (Valley) कर दिया।</span></p>
<p style="text-align:center;">&nbsp;</p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">हम तुम बॉबी हट में बन्द हों</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">गुलमर्ग में एक मन्दिर है जिसमें &#8216;आप की कसम&#8217;  फिल्म के गाने &#8216;जय जय शिवशंकर&#8217; के कुछ भाग की शूटिंग हुई है। इसकी कुछ शूटिंग </span><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RpB-YkwiNZI/AAAAAAAAAHs/ZytPOLSWfkU/s200/Bobby+hut.jpg"><img class="alignright" title="Bobby hut Gulmarg" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RpB-YkwiNZI/AAAAAAAAAHs/ZytPOLSWfkU/s200/Bobby+hut.jpg" alt="" width="164" height="130" /></a></span><span style="font-size:medium;">श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर  में हुई है। गुलमर्ग में &#8216;बॉबी हट&#8217;  है।  इस फिल्म के एक गाने &#8216;हम तुम एक कमरे में बन्द हों&#8217; की  शूटिंग इसी हट में हुई है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">गुलमर्ग में १८ होल का गोल्फ कोर्स है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा पर स्थित  गोल्फ कोर्स  है। यह बहुत सुन्दर है पर यह बहुत अच्छी स्थिति में नहीं था। इस पर कोई भी खेल नहीं रहा था।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">यहां एक तारगाड़ी (rope way) &#8216;गंडोला&#8217; है। हम लोग घूमने के लिए निकले तो पानी बरसने लगा । पहलगांव में मौसम हमारे साथ रहा पर गुलमर्ग में नहीं । वापस होटल आ गये। बीच-बीच में पानी बरसता रहा,  बाहर नहीं जा पाये।  उस दिन तारगाड़ी   पर नहीं चढ़ पाये। होटेल में आ कर मैंने Every thing you desire: A journey through IIM by Harshdeep Jolly पढ़नी शुरू कर दी तो उसी में डूब गया। यह अच्छी पुस्तक है। इसकी पुस्तक समीक्षा, मैं अपने उन्मुक्त चिट्ठे पर <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/07/everything-you-desire-five-point.html">कर चुका</a> हूं।</span></p>
<p style="text-align:center;">&nbsp;</p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">पाँच साल में गुजरात बाकी राज्यों को बहुत पीछे छोड़ देगा</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rq6R0ih3_sI/AAAAAAAAAIE/iO8dJhv-za4/s200/Ropeway+Gulmarg.jpg"><img class="alignleft" title="Ropeway Gulmarg" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rq6R0ih3_sI/AAAAAAAAAIE/iO8dJhv-za4/s200/Ropeway+Gulmarg.jpg" alt="" width="110" height="176" /></a>गुलमर्ग में अगले दिन हम लोग सुबह &#8216;गंडोला&#8217; तारगाड़ी पर गऐ। १० बजे टिकट मिलना था, लाइन पर लगे रहे, लगभग ११ बजे टिकट मिला। गंडोला  दो चरण में है पहला चरण खिलनमर्ग के पास तक १०,५०० फीट तक जाता है और दूसरा चरण उपर १३,००० फीट तक जाता है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">दूसरे चरण पर जाने के लिये  हम लोग ने लाइन लगायी। यहां पर मेरी मुलाकात अहमदाबाद में काम कर रहे डाक्टरों से हुई। वे मुझसे गुजराती में बात करने लगे। मैं ने बताया कि मैं गुजरात से नहीं हूं न ही गुजराती समझ पाता हूं। इसके बाद वे हिन्दी में बात करने लगे।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">इन लोगों के मुताबिक गुजरात के हालात बहुत अच्छे हैं। मैने पूछा कि क्या मुसलमान भी ऎसा सोचते हैं। उन्होंने कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;हम चार परिवार एक साथ आये हैं एक मुसलमान परिवार है। आप उन्हीं से पूछ लीजये।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मैंने मुसलमान डाक्टर से बात की तो उसका भी वही जवाब था।  इनका कहना था,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;हमारे अस्पताल में  कोई बिजली का जेनरेटर नहीं है। क्योंकि पिछले दो साल में एक मिनट के लिए भी बिजली नहीं गयी। हालांकि  बिजली के लिए ८/-रू० प्रति यूनिट देना पड़ता है। पानी भी २४ घंटे आता है। अगले पाँच साल में गुजरात बाकी राज्यों को बहुत पीछे छोड़ देगा।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मैंने कहा कि मीडिया तो कुछ अलग सी रिपोर्ट करता है। उनके मुताबिक, मीडिया सनसनीखेज बातों पर निर्भर है। वे अक्सर कुछ ज्यादा या गलत लिख देते हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">कुछ समय पहले गुजरात में पुलिस मुठभेड़ (Encounter) में कुछ लोग मार दिये गये थे। मिडिया के मुताबिक यह फर्जी मुठभेड़ था। मैंने इसके बारे में उनके क्या कहना है।  उनका जवाब था,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;वह शक्स पुलिस को मारने के जुर्म में हत्यारा था इसलिए मुठभेड़ में मार दिया गया। ऎसा हर जगह होता है।  पुलिस ने यदि बचाव के लिये मुख्य मंत्री का नाम डाल दिया तो कोई बात नहीं। हमारे  गुजरात में रात को लड़किया सुरक्षित (Safely)  घूम सकती हैं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मुन्ने को जब अमेरिका जाना था तो मैं कुछ साल पहले, उसे स्पोकन इंगलिश की परीक्षा दिलवाने, अहमदाबाद ले गया था। मुझे कुछ इसी तरह का अनुभव हुआ था हांलाकि मुझे गुजरात का अधिक अनुभव नहीं है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे यह डाक्टर पसंद आये। वे अपने प्रदेश के बारे अच्छे विचार रखते थे। उत्तर भारत के कई प्रदेशों के लोग, अपने प्रदेश के बारे में अच्छी राय नहीं रखते हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैं उन लोगों से और बात करना चाहता था और उनके चित्र भी लेना चाहते था पर वहां ओले गिरने लगे। हमें श्रीनगर भी जाना था। हमें लगा कि हम दूसरे चरण में नहीं जा पायेंगे और वापस आ गए।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">हम लोगों से गलती हो गयी थी। सुबह खिलनमर्ग तथा आसपास हमें घोड़े पर चले जाना चाहिये था दस बजे तक सारा काम कर गंडोला के पहले स्टेज पर घोड़े से पहुंचकर, दूसरे स्टेज का टिकट लेना चाहिये था। मिलता तो ठीक था नहीं तो गंडोला से वापस चले आना था। गंडोला में एक तरफ का भी टिकट मिलता है। चलिये अगली बार इसी तरह से ही करेंगे।</span></p>
<p style="text-align:center;">&nbsp;</p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">हेलगा कैटरीना और लीनुक्स</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RrkUMCh3_1I/AAAAAAAAAJM/ehLD_2tOvVo/s200/Kathrine.jpg"><img class="alignleft" title="Helga Katrina Finland" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RrkUMCh3_1I/AAAAAAAAAJM/ehLD_2tOvVo/s200/Kathrine.jpg" alt="" width="140" height="174" /></a></span><span style="font-size:medium;">हम लोग</span><span style="font-size:medium;"> गुलमर्ग से श्रीनगर आये। यहां हम हाउस बोट में रहे। यहां पर मेरी मुलाकात हेलगा कैटरीना से हुई।  वे फिनलैण्ड से हैं और डाक्टर हैं। कैटरीना साड़ी बहुत अच्छी तरह से पहने हुयी थी। मेरे उन्हें यह बताने पर,  मुस्कराईं और बोलीं,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;मैं  भारत तीसरी बार आई हूं। मुझे यह देश बेहद पसन्द है। मुझे पढ़ना अच्छा लगता है और पहली बार, कृष्णामूर्ती को पढ़ने के बाद, मैंने भारत आने का मन बनाया था।&#8217;</span></p></blockquote>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;">कैटरीना के एक लड़का (१६साल) और एक लड़की (१४ साल) है। वे तलाकशुदा हैं पर उनकी पती से अब भी मित्रता है। इस समय उनके पती, उनके घर में रह कर बच्चों की देखभाल कर रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;">Linus Torvalds फिनलैंड से है।  वे, १९९१ में, हेलसिंकी पॉलीटेक्निक में पढ़ रहे थे। उस समय, उन्होने Linux का करनल (Kernel) प्रकाशित किया था। जाहिर है हमारी बातों में Linus Torvalds भी थे।  कैटरीना ने बताया कि Linus Torvalds  का सही उच्चारण लीनुस टोरवाल्डस् है और फिनलैंड में Linux को  लीनुक्स बोलते हैं न कि लिनेक्स। क्या मालुम क्या सही और क्या नहीं।</span></p>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;">कैटरीना में मुझसे पूंछा कि क्या मैं लीनुस के परिवार के बारे में जानता हूं। मैंने कहा कि मैंने उसकी आत्मजीवनी &#8216;Just for fun : The story of a accidental revolutionary&#8217; पढ़ी है। इस लिये उनके जीवन के बारे में काफी कुछ मालुम है। यह पुस्तक कैटरीना ने नहीं पढ़ी थी। मैंने उसे बताया कि यह  पुस्तक बहुत अच्छी है और न केवल पढ़ने योग्य है पर प्रेरणा की स्रोत है। उसने वायदा किया कि वह उसे पढ़ेगी और अगली बार हम उस पर कुछ बात भी करेंगे।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">कैटरीना के बताया,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;फिनलैण्ड की सबसे अच्छी बात वहां की सुरक्षा है। हमारे देश में यहां टैक्स ज्यादा है पर चिकित्सा, पढ़ाई सब मुफ्त है। सारे विश्वविद्यालय सरकारी हैं।  मैं  बढ़ई के चार बच्चों में से एक हूं। मेरे पिता डाक्टरी की पढ़ाई का पैसा नहीं दे सकते थे पर मैं डाक्टर इसलिए बन पायीं क्योंकि पढ़ाई के लिए पैसे नहीं देना पड़ा।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">कैटरीना के पीठ पर एक चिन्ह था। मैंने पूछा कि यह  ठप्पा है या टैटू। उसने मुस्करा कर कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;यह टैटू है। इसे मैंने अपने आप को चालिसवें  जन्मदिन पर उपहार दिया है। अगले साल मैं पच्चास की हो जाउंगी। मैं नहीं समझ पा रही कि मैं अपने आप को क्या उपहार दूं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">कैटरीना को अपने लिये उपहार तय करने में देर नहीं लगी। हम लोग शाम को हाउस बोट पहुंचे तो वहां पर बनारसी साड़ियों का मेला लगा था। चारो तरफ साड़ियों फैली हुई थी। वह बोली,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;मैं  पच्चासिवें जन्म दिन के लिये साड़ी खरीद रहीं हूं पर तय नहीं कर पा रही हूं कि कौन सी लूं। क्या आप मेरी मदद करेंगे।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे हरे रंग वाली साड़ी  अच्छी लग रही थी। उसने वही ले ली।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे कैटरीना  साहसी महिला लगीं। वह भारत अकेले आयीं हैं और कशमीर में पैदल ट्रेक कर रही थीं।  फिर बोट पर ट्रेकिंग करने जा रहीं थीं। उसने मुझे फोटो दिखाये जिसमें वह घोड़े वालों या गाइड के घर में या फिर टेंट में रूकी। मेरे पूछने पर कि क्या वह यह सब, बिना अपने बच्चों के, अकेले आनन्द से कर  पा रहीं हैं। उसने कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;मेरे बच्चे साहसी  नहीं हैं, उन्हें इस तरह ट्रेक करने में मजा नहीं आता है। वे जरा सी गन्दगी से घबरा जाते हैं इसीलिए मैं उन्हें साथ नहीं लायी।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे ट्रेकिंग अच्छी लगती है पर मुन्ने की मां को नहीं।  जब मुन्ना साथ रहता था तब हम लोगों ने कई इस तरह के ट्रिप लिये थे पर अब नहीं। अकेले हिम्मत नहीं पड़ती है। कैटरीना से बात हो गयी है अगली बार जब वह भारत  आकर ट्रेकिंग पर जायेंगी तब मैं भी साथ रहूंगा।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">अच्छा तो हम चलते हैं</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैं १९७५ की गर्मी में कश्मीर आया था। यह मेरी दूसरी ट्रिप है और मेरी पत्नी की  पहली। उस समय डल झील के बीचोबीच चार चिनार के पेड़ थे और प्लेटफार्म बनाकर एक रेस्ट्राँ चला करता था, इसमें कटी पतंग के एक गाने &#8216;अच्छा तो हम चलते हैं&#8217; की शूटिंग हुयी थी। यह बहुत सुन्दर जगह थी। मुझे बताया गया कि अब यह बन्द हो गया है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RsOr-qc9s-I/AAAAAAAAAJU/QAYZzXpmSBU/s200/Eagle-1.jpg"><img class="alignleft" title="Eagle Srinagar houseboat" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RsOr-qc9s-I/AAAAAAAAAJU/QAYZzXpmSBU/s200/Eagle-1.jpg" alt="" width="136" height="176" /></a>हमारी हाउसबोट के बगल एक पेड़ था। उसमें चील दम्पत्ति ने अपना घोसला बना रखा था। उनके दो बच्चे भी थे। वे खाना लाकर उन्हें खिलाते थे। जब मैं उनकी फोटो ले रहा था तो वह चील मुझे घूर कर देख रही थी कि कहीं मैं उसके बच्चों को कुछ चोट न पहुंचा दूं।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे यहां जहीर आलम मालिश करने वाला मिला। वे बीकानेर के रहने वाले हैं और इनकी शादी भोपाल में हुयी है वहीं पर घर जमा लिया है। वहां इनकी Face to face नाम की बाल काटने की दुकान पुराने भोपल में है। साल में ४ महीने भोपल में और ८ महीने कश्मीर में रहते हैं। मैंने उनसे मालिश करवायी। मैंने इसके पहले कभी नहीं करवायी थी। समझ में नहीं आया कि अच्छी थी कि नहीं, पर २०० रूपये जरूर जेब से निकल गये।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">हमने पूथ्वी मां को  अपने बच्चों से गिरवी ले रखा है</span></strong></p>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rs9nG6c9tFI/AAAAAAAAAKs/CJz_AiCoICs/s200/sunset-1.jpg"><img class="alignleft" title="Dull lake Srinagar" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rs9nG6c9tFI/AAAAAAAAAKs/CJz_AiCoICs/s200/sunset-1.jpg" alt="" width="108" height="142" /></a></span><span style="font-size:medium;">यहां पर हाउसबोट का नगर बसा है लगता है श्रीनगर में आने वाला पर्यटक यहीं रूकता है नाव वाले फेरी लगाते रहते हैं। कोई ठण्डा बेच रहा है कोई जूता।  कोई आपको जैकेट बेचना चाहता है तो कोई आपको गहने। उसी के बीच जीवन चल रहा है। यह सब डल झील को बर्बाद भी कर रहा है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैं १९७५ में जून में श्रीनगर गया था मुझे याद नहीं पड़ता कि डल झील पर इतनी  हाउसबोट थीं या नहीं। डल लेक भी बहुत साफ थी। इस बार गन्दी लगी। लोगों से पूछने पर पता चला कि यह सारी हाउसबोट अवैधानिक  है।  बहुत कुछ गन्दगी इन्हीं के कारण है। वहां के लोगों का कहना है,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;२५ साल पहले डल लेक की परिधि ३२ किलोमीटर थी। अब घटकर १६ हो गयी है। लोग इसे मिट्टी से पाटकर कब्जा करते जा रहे हैं। इसमें बदमाशी में राज्य सरकार भी भागीदार है। दो साल पहले जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय में लोकहित याचिका दाखिल की गयी जिसे कारण यह रोका जा सका  और डल लेक में कुछ सफाई शुरू की गयी।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">गोवा  में भी हमने <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/04/iron-and-magnese-ore.html">देखा</a> कि न्यायपालिका के कारण वहां का समुद्रीतट बचा। दिल्ली में भी यदि प्रदूषण कम हुआ तो वह न्यायपालिका के कठोर कदमों के कारण।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">यह पूथ्वी मां हमें अपने पूर्वजों से नहीं मिली है इसे तो हमने अपने बच्चों से गिरवी ली है।  यह हमारे ऊपर है कि हम इसे कैसे उन्हें वापस देते हैं। यह बात शायद केवल न्यायपालिका  ही समझ पा रही  है बाकी लोग तो शायद &#8230;</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">लोग अक्सर न्यायपालिका के न्यायिक क्रिया-कलापों (Judicial activism) की  आलोचना  करते हैं पर यदि आप देखें तो बहुत जगह न्यायपालिका के कारण ही पर्यावरण बचा हुआ है । नेता ऎसे निर्णय नहीं लेते, जिससे उनके वोट बैंक में कमी आये।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">जय-जय शिवशंकर</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;">मैं, १९७५ की जून में एक महीने श्रीनगर रहा था। जिस घर में ठहरा था उसके बगल में पहाड़ी है उसके ऊपर शिवजी का मंदिर है। यह शंकराचार्य जी का मंदिर कहलाता है क्योंकि उन्होंने ही शिवलिंग की स्थापना की थी मैं तब कई बार पैदल उस मंदिर तक गया था। उस समय मंदिर में केवल हमी लोग होते थे। अब पक्की रोड बन गयी है और अन्त में २४० सीढ़ियां है। पहाड़ी रास्ते से जाने की इजाजत नहीं है। सब तरफ पुलिस का पहरा है। </span><span style="font-size:medium;">आप मंदिर तक कैमरा भी नहीं ले जा सकते हैं। इस मंदिर में &#8216;आपकी कसम&#8217; फिल्म के गाने &#8216;जय-जय शिवशंकर&#8217; के आधे भाग की शूटिंग हुयी है। इस बार जब हम लोग मंदिर पहुंचे तब वहां सैकड़ों लोग थे। बहुत भीड़ थी।</span><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RtzVtKc9tPI/AAAAAAAAAL8/F5FZzxB6n_k/s200/Hajbal.jpg"><img class="alignright" title="Hazratbal mosque Srinagar" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RtzVtKc9tPI/AAAAAAAAAL8/F5FZzxB6n_k/s200/Hajbal.jpg" alt="" width="96" height="172" /></a></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">कश्मीर के हरियाली और फूल श्रीनगर में जगह-जगह बाग हैं मुगल राज्य के समय के दो बाग निषाद और शालीमार अब भी पुराने समय की दास्तान बिखेर रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">निषाद बाग से हजरतबल मस्जिद दिखायी पड़ती है जिसमें कुछ साल पहले उग्रवादी घुस गये थे और मुश्किल से निकाले जा सके।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RtzWXqc9tQI/AAAAAAAAAME/rNwd0zpHpwU/s200/chashme-shahi.jpg"><img class="alignleft" title="Chashme shahi srinagar" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RtzWXqc9tQI/AAAAAAAAAME/rNwd0zpHpwU/s200/chashme-shahi.jpg" alt="" width="162" height="121" /></a></span><span style="font-size:medium;">श्रीनगर में चश्मेशाही है यहां पानी निकलता है। कहा जाता है कि इसमें औषधीय तत्व हैं: पीने से पीलिया तथा पेट की बीमारी दूर हो जाती है।  मेरा पेट कुछ खराब चल रहा था।  मैंने पानी पिया। यह मनोवैज्ञानिक कारण था या वास्तविक पर मेरे दस्त ठीक हो गये। कहा जाता है कि जवाहरलाल नेहरू के पीने के लिये पानी यहां से जाता था।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;"><a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RtzXC6c9tRI/AAAAAAAAAMM/veKFUyPIrmw/s200/Pari+Mahal.jpg"><img class="alignright" title="Pari mahal srinagar" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RtzXC6c9tRI/AAAAAAAAAMM/veKFUyPIrmw/s200/Pari+Mahal.jpg" alt="" width="171" height="129" /></a>श्रीनगर में परी महल भी है इसे शाहजहां के लड़के दाराशिकोह ने सूफी संतों के रहने और अध्ययन के लिये बनवाया था। कहा जाता है कि इसका नाम पीर महल था सरकार ने इसका नाम परी महल कर दिया है। सरकार के मुताबिक परियां पवित्र जगह जाती हैं, <a href="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rs9lEKc9tEI/AAAAAAAAAKk/TECmrrHDuII/s200/dsc00377.jpg"><img class="alignleft" title="Dull lake Srinagar" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/Rs9lEKc9tEI/AAAAAAAAAKk/TECmrrHDuII/s200/dsc00377.jpg" alt="" width="202" height="155" /></a> यहां पवित्र आत्मायें रहती थीं &#8211; इसलिये इसका नाम परी महल रख दिया गया।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मालुम नहीं, क्या सच है &#8211; इस समय तो इसमें न सूफी सन्त रहते हैं न ही परियां &#8211; इसमें पैरा मिलिट्री वालों ने कब्जा जमा लिया है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">श्रीनगर में एक नया १८ होल का अन्तरराष्ट्रीय गोल्फ कोर्स बना है परी महल से पूरा दिखायी पड़ता है। यह बहुत सुन्दर है।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">तारीफ करूं क्या उसकी जिसने तुझे बनाया</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;"> कश्मीर में सबसे अच्छी बात यह लगी कि बहुत कम महिलायें बुरका पहने दिखायी पड़ीं। मैं केरल और हैदराबाद भी जाता रहता हूं। वहां पर ज्यादा महिलायें बुरका पहने दिखायी पड़ती हैं बनिस्बत कश्मीर के। महिलायें व लड़कियां सर पर स्कार्फ लगाये, स्मार्ट और सुन्दर लगती हैं; देखने में भी अच्छा लगता है। काला बुरका जैसे सुन्दरता पर कालिख पोत दी गयी हो। </span></p>
<p><span style="font-size:medium;">समार्ट और प्यारी युवतियों को देख कर, मुझे शम्मी कपूर के द्वारा फिल्म कश्मीर की कली में शर्मीला टैगोर के लिये गाया यह गाना याद आया,</span></p>
<p style="text-align:center;"><span style="font-size:medium;"><span style="text-align:center; display: block;"><a href="http://unmukth.wordpress.com/2008/12/22/kashmir/"><img src="http://img.youtube.com/vi/txv7RCe8DXM/2.jpg" alt="" /></a></span><br />
</span></p>
<p style="text-align:center;">&nbsp;</p>
<p style="text-align:center;"><em><span style="font-size:medium;">&#8216;यह चांद सा रोशन चेहरा<br />
झुल्फ़ों का रंग सुनहरा।<br />
यह झील सी नीली आंखें,<br />
कोई राज है इसमें गहरा।<br />
तारीफ करूं क्या उसकी,<br />
जिसने तुझे बनाया।&#8217;</span></em></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">अलविदा कश्मीर</span></strong></p>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;">जितनी अस्तव्यस्तता, श्रीनगर हवाई अड्डे पर है उतनी शायद कहीं नहीं। वहां पर कोई भी स्क्रीन नहीं है जो यह बताये कि आपकी उड़ान सही समय से है या लेट है या उसकी बोर्डिंग शुरू हो गयी है। इसमें टी.वी. है उसमें अलग चैनल आवाज के साथ चल रहे थे। शोर इतना कि कोई भी प्रसारण में क्या कहा जा रहा है पता नहीं चलता। सुरक्षा जांच जगह-जगह पर है। मैं यही समझता था कि यहां सारा काम बहुत तरीके से होगा, पर यहां तो सब उलटा ही है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे कश्मीर में शान्ति लगी। यह उतनी ही है जितना भारत के किसी अन्य जगह पर। जनता, आम नेताओं और पैरा मिलिट्री फोर्स से दुखी लगी। उनके मुताबिक, जितनी अशान्ति उग्रवादी फैलाते हैं उतनी ही नेता और पैरा मिलिट्री फोर्स के लोग। मीडिया की भी इसमें भागीदारी है। वहां के लोगों के अनुसार,</span></p>
<ul>
<li><span style="font-size:medium;">एक नेता दूसरे नेता को नीचा दिखाने के लिये उग्रवादी गतिविधियां करा देता है;</span></li>
<li><span style="font-size:medium;">पैरा मिलिट्री फोर्स को वहां सर्च करने में ज्यादा पैसा मिलता है इसलिये वहां से कब्जा छोड़ना नहीं चाहती;</span></li>
<li><span style="font-size:medium;"> मीडिया भी वहां छोटी-छोटी घटनाओं को ज्यादा विस्तार से दिखा रहा है जिसके कारण लोगों को कश्मीर के बारे में गलतफहमी हो जाती है।</span></li>
</ul>
<p><span style="font-size:medium;">मैं नहीं कह सकता कि आम लोगों का यह सोचना ठीक है या फिर पैरा मिलिट्री फोर्स के लोगों का, या फिर मीडिया का। पर मैं पुनः कश्मीर जाना चाहूंगा। तब तक के लिये &#8211; अलविदा कश्मीर।</span></p>
<p style="text-align:center;"><span style="font-size:medium;"><strong>मुरझा गई तो फिर ना खिलूंगी</strong></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे कश्मीर उतना ही सुन्दर लगा, जितना कि सायरा बानू अपनी पहली फिल्म  जंगली में। यह फिल्म तब बनी (१९६१) जब मैंने अपने यौवन में कदम रखा था। सायरा उस समय केवल सोलह साल की थीं और इंग्लैण्ड से शिक्षा प्राप्त कर लौटी थीं। हांलाकि उस समय मुझे हिन्दी फिल्म देखने की अनुमति नहीं थी। यह फिल्म मैंने सालों बाद &#8211; शायद शादी के बाद &#8211; इसे अपनी पत्नी के साथ देखा। कश्मीर में, मुझे इस फिल्म का सायरा पर फिल्माया यह गीती भी बहुत याद आया।</span></p>
<p style="text-align:center;"><span style="font-size:medium;"><span style="text-align:center; display: block;"><a href="http://unmukth.wordpress.com/2008/12/22/kashmir/"><img src="http://img.youtube.com/vi/u2LhYImObao/2.jpg" alt="" /></a></span><br />
</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;"> </span></strong></p>
<p style="text-align:center;">&nbsp;</p>
<p style="text-align:center;"><em><span style="font-size:medium;">काश्मीर की कली हूं मैं,</span></em></p>
<p style="text-align:center;"><em><span style="font-size:medium;">मुझसे ना रूठो बाबू जी,</span></em></p>
<p style="text-align:center;"><em><span style="font-size:medium;">मुरझा गई तो फिर ना खिलूंगी,</span></em></p>
<p style="text-align:center;"><em><span style="font-size:medium;">कभी नहीं, </span><span style="font-size:medium;">कभी नहीं, </span><span style="font-size:medium;">कभी नहीं।</span></em></p>
<p><span style="font-size:medium;">कश्मीर एक सुन्दर महकते गुलाब की तरह है। इस गुलाब पर आतंकवाद का साया है। हमने शुरू में गलती कर दी थी। यदि अब भी हमने ठीक कदम न उठाये तो पृथ्वी पर यह स्वर्ग, यह सुन्दर महकता गुलाब मुरझा जायगा। यदि यह एक बार मुरझा गया तो फिर कभी न खिलेगा और न ही महकेगा। </span></p>
<p><span style="font-size:medium;"><br />
</span></p>
<p style="text-align:center;"><em> यह यात्रा विवरण मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कई कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। इसकी अलग अलग कड़ियों को आप नीचे दिये गये लिंक पर चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।</em></p>
<p style="text-align:left;"><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/06/kashmir-plane.html">जन्नत कहीं है तो वह यहीं है, यहीं है,  यहीं है</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/06/pahalgaon-raft.html">बम्बई का फैशन और कश्मीर का मौसम – दोनो का कोई ठिकाना नहीं है</a>।।   <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/06/kashmir-pahalgaon-aru.html">मिथुन चक्रवर्ती ने अपने चौकीदार को क्यों निकाल दिया</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/06/bisarn-pahalgaon-kashmir.html">आप स्विटज़रलैण्ड में हैं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/07/gulmarg-bobby.html">हम तुम एक कमरे में बन्द हों</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/07/everything-you-desire-five-point.html">Everything you desire – Five Point Someone</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/07/gulmarg-ropeway-gandola.html">गुलमर्ग में तारगाड़ी</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/08/helga-katherine-linux.html">हेलगा कैटरीना और लीनुक्स</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/08/life-at-dull-lake.html">डल झील पर जीवन</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/08/judicial-activism-and-environment.html">न्यायपालिका और पर्यावरण</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/09/srinagar-spots.html">अलविदा कश्मीर</a>।।</p>
<div style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</div>
<p style="text-align:left;"><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kashmir">kashmir</a>, कश्मीर,</p>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:100%;"><a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, </span><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>,  <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <span style="font-size:100%;"><a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, </span><span style="font-size:100%;">सिक्किम, सैर सपाटा,</span><span style="font-size:100%;"> <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>,</span><span style="font-size:100%;"> <a class="shr" title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a class="shr" title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, </span><span style="font-size:100%;">यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</span></p>
<br />Posted in यात्रा वर्णन Tagged: travel <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/unmukth.wordpress.com/123/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/unmukth.wordpress.com/123/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/unmukth.wordpress.com/123/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/unmukth.wordpress.com/123/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/unmukth.wordpress.com/123/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/unmukth.wordpress.com/123/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/unmukth.wordpress.com/123/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/unmukth.wordpress.com/123/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/unmukth.wordpress.com/123/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/unmukth.wordpress.com/123/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/unmukth.wordpress.com/123/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/unmukth.wordpress.com/123/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/unmukth.wordpress.com/123/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/unmukth.wordpress.com/123/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&amp;blog=230997&amp;post=123&amp;subd=unmukth&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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		<title>मस्ती भरा है समां – गोवा यात्रा संस्मरण</title>
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		<pubDate>Sun, 19 Oct 2008 09:04:05 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[travel]]></category>
		<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>

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		<description><![CDATA[This post about trip to Goa. It is in Hindi (Devnagri).
Yeh post meri goa yatra ka snsmran hai. yeh hindi (devnagri) mein hai. <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=107&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em>इस चिट्ठी पर मेरी गोवा यात्रा का वर्णन है।</em></p>
<p style="text-align:left;">&nbsp;</p>
<p style="text-align:center;"><em><img class="aligncenter" title="Goa from cruise" src="https://lh5.googleusercontent.com/_VD9tZkRYrQ0/TU54qZEZZdI/AAAAAAAACUs/akYBL6b4iuE/Goa%20from%20cruise.jpg" alt="" width="278" height="209" /><span id="more-107"></span></em><strong><span style="font-size:medium;">प्यार किया तो डरना क्या</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;"> अपने पैसे से तो पांच सितारा होटेल में ठहरना तो बहुत मंहगा है, कम से कम मेरे मेरे जेब के बाहर। सम्मेलन हमेशा पांच सितारा होटलों में होते हैं। उनमें जाने का यही फायदा है कि कम से कम उसी के बहाने वहां का भी नजारा देख लिया। हांलाकि जैसा <a href="http://unmukth.wordpress.com/2006/08/01/fynman/">फाइनमेन</a> की पुत्री मिशेल <a href="http://unmukth.wordpress.com/2007/11/21/dont-you-have-time-to-think-michelle-feynman/">Do you have time to think</a> में <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/10/dont-you-have-time-to-think.html">बताती</a> हैं कि फाइनमेन  सम्मेलनो में होटलों से बोर होकर कर जंगलों में कैम्पिंग करना पसंद करते थे पर यह अपने देश में तो सम्भव नहीं लगता है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;"> मुझे, दो साल पहले कलकत्ता जाना पड़ा था। हयात ग्रुप का नया होटल बना है, वहीं पर हमारी कॉन्फरेंस थी। कमरे बढ़िया इंटरनेट का कनेक्शन, पर वह मेरे लिनेक्स लैपटॉप पर चल कर नहीं दिया। मैंने होटल वालों से कहा। उन्होने एक व्यक्ति को भेजा। वह कोई विशेष्ज्ञय तो नहीं लगता था पर थोड़ा बहुत कंप्यूटर के बारे में जानता था। उसने मेरे लैपटौप को देखा और कहा कि,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"> &#8216;बहुत सुन्दर स्क्रीन है। लगता है विंडोस़ की कोई नयी थीम डाली है।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मैंने कहा कि यह विंडोस़ नहीं,  लिनेक्स है। उसने आश्चर्य से पूछा,</span></span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;लिन्क्स? यह क्या होता है।&#8217;</span></span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मैंने, कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में उसकी क्लास ही ले ली। बताया कि यह कितनी तरह के होते हैं, इनमें क्या अन्तर होता है, जैसा कि कुछ मैंने अपनी <a href="http://unmukth.wordpress.com/2006/06/01/oss/">ओपेन सोर्स सॉफ्टवेर</a> की चिट्ठी पर बताया है। उसने मुझसे पूछा कि मैं अगली बार कब आ रहा हूं। मैंने  कहा, कि तुम यह क्यों पूछ रहे हो। उसका जवाब था,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;मैं लिनेक्स के बारे मैं सब सीख कर रखूंगा ताकि आपको मुश्किल न हो।&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">पिछले साल कोची में हयात ग्रुप में हुऐ एक सम्मेलन में रहने का मौका मिला।  यहां पर भी अनुभव कलकत्ता की तरह ही रहा।</span></p>
<p><img class="alignleft" title="cita de goa" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RfAgITxBLyI/AAAAAAAAAB4/6cgUEdvHMj4/s200/hotel.jpg" alt="" width="127" height="97" /></p>
<p><span style="font-size:medium;">इस साल मुझे गोवा जाना पड़ा। यहां <a href="http://www.cidadedegoa.com/">Cidade de Goa</a> के नाम के होटल में टहरने का मौका मिला। यह एक पांच सितारा होटेल है और बहुत अच्छा है। मुझे लगा कि लिनेक्स काफी लोकप्रिय हो चुका है इसलिये यहां बेहतर अनुभव रहेगा। पर यहां भी, मेरे लैपटॉप के साथ वही हुआ को कि मेरे साथ हयात कलकत्ता में हुआ था।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">चलिये, प्यार किया तो डरना क्या। कम से कम तीन लोगों को तो मैंने लिनेक्स के बारे में बताया। वे अगली बार इसके लिये तैयार रहेंगे।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">ऐसे आखिरकर, मैंने यहां पर लिनेक्स लैपटॉप की मुश्किल का हल निकाल ही लिया। बस जालक्रम विन्यास में जा कर यदि कोई लैन का कनेक्शन बना है तो इसका आईपी पता स्वचलित कर दे या नया इसी तरह का लैन कनेक्शन बना लें &#8211; बस काम फिट।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">गोवा और यह होटेल दोनो बहुत अच्छे लगे। इसके बारे में आपको बताउंगा, कुछ चित्र भी लिये थे, वह भी पोस्ट करूंगा। यहां होटेल में दो खास बातें देखने को मिलीः</span></p>
<ul>
<li><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">महिलाओं की तो नेकरे छोटी होती जा रहीं हैं और पुरषों की बड़ी,</span></span></li>
<li><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">गोरे चिट्टे (विदेशी) महिला बदन पर जितने कम कपड़े (बस चले तो सब उतार दें पर यह कानूनी तौर पर मना है), और गेहुवें तथा श्याम (<a href="http://www.blogger.com/profile/15090591980327578036" >शुभा</a> जैसी देसी) महिला बदन पर उतने ही ज्यादा।</span></span></span></li>
</ul>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">परशुराम की शान्ती</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;"> <span style="font-size:medium;"><a href="http://v-k-s-c.blogspot.com/2008/06/parshuram-avtaar.html">परशुराम</a> की शान्ती? उनकी तो शादी नहीं हुई थी फिर यह शान्ती कहां से आ गयी &#8211; अरे बाबा, मेरा मतलब शान्ति, वह शान्ति जिसकी हम सब को तलाश है।</span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">कहते है परशुराम क्षत्रियों से क्रोधित हो गये। यह कामधेनु गौमाता के पीछे हुआ  था। भगवान ने परशुराम जी को शान्ति पाने के लिये तपस्या का मार्ग सुझाया और कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;जहां तीर गिरे वहीं तपस्या करो।&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">तीर तो अरब की खाड़ी में गिरा। समुद्र देव ने वहां से पानी हटा कर जमीन उन्हें सौंप दी।  परशुराम, गौमाता के साथ वहां तपस्या करने पहुंचे इसलिये उसका जगह का नाम गोवा पड़ा।</span></span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">समुद्र देव ने स्वयं जमीन परशुराम को जमीन दी थी इसलिये वहां उनकी हमेशा कृपा रहती है। आज तक कभी समुद्र के कारण कोई विपदा नहीं आयी। सुनामी का भी कोई असर नहीं पड़ा था <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </span></p>
<p><span style="font-size:medium;">परशुराम जी ने शिव की तपस्या की और शान्ति प्राप्त की। इसलिये कहा जाता है कि जो भी गोवा जाता है उसे वहां शान्ति मिलती है। हांलाकि इसमें पुर्तगालियों का भी बहुत बड़ा हाथ है।</span></p>
<p><img class="alignright" title="panji temple goa" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RfH7eMtvwlI/AAAAAAAAACI/LwPkXIMmRXY/s200/temple.jpg" alt="" width="95" height="128" /></p>
<p><span style="font-size:medium;">पणजी (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Panaji">Panji</a>) में एक प्रसिद्ध मंगेश मन्दिर है। परशुराम ने भगवान शिव की तपस्या की थी</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">शायद इसलिये यह भगवान शिव का मन्दिर है। गोवा के पास परुशराम का भी मंदिर है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">शिव मन्दिर पहले पुराने गोवा में था। सोलवीं शताब्दी में जब पुर्तगालियों ने हिन्दुवों पर अत्याचार करना शुरू किया तो वे है पणजी की तरफ भागे और अपने देवी देवता भी ले आये। इस मन्दिर को तब ही पणजी में स्थापित किया गया। यह भव्य है।</span></p>
<p><img class="alignleft" title="ravi stamp goa" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RfH8MstvwmI/AAAAAAAAACQ/yAZo_fK_BX0/s200/ravi.jpg" alt="" width="90" height="122" /></p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2008/10/goa-stamp.jpg"><br />
</a></p>
<p><span style="font-size:medium;">शिव जी के मन्दिर जाते समय रास्ते में मेरी मुलाकात रवी से हुई। वे लोगों के बदन पर जगह जगह ठप्पा लगाते हैं। उसके अनुसार यह लगभग एक माह तक रहता है। सबसे छोटे का २० रुपया और सबसे बड़े का ५० रुपया। मैंने पूछा कि दिन में कितने पैसे मिल जाते हैं। उसने बताया कि लगभग ३००-४०० रुपये मिल जाते हैं।</span></p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2008/10/goa-stamp.jpg"><img class="alignright size-full wp-image-108" title="goa-stamp" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2008/10/goa-stamp.jpg?w=500" alt=""   /></a></p>
<p style="text-align:right;">&nbsp;</p>
<p><span style="font-size:medium;">विदेशी महिलायें तो अजीब अजीब जगह ठप्पा लगवा रहीं थी। मैने तो हांथ में सबसे छोटा ठप्पा लगवाया।  मेरे तो ७० रुपये खर्च हो गये।</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;उन्मुक्त जी, क्या कहा ७० रुपये। लगता है कि गणित में तो हमेशा फेल होते होंगे।&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p style="text-align:right;"><em>बायें हांथ पर ठप्पा देख लीजिये &#8211; विश्वास हुआ न</em></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">नहीं भाई मैने उसे तो २० ही रुपये दिये पर मेरे सहयोगी लोग कहने लगे यह ठप्पा तो शर्ट की बांह के अन्दर है, लोग कैसे देखेंगे। इसके लिये तो बिना बांह की शर्ट होनी चाहिये।</span></span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मेरे पास तो बिना बांह की कोई शर्ट नहीं है। वहां छोटी छोटी बहुत सी दुकाने थीं, जिन पर हर तरह की शर्ट मिल रहीं थी। मैंने दुकान वाली महिला से शर्ट दिखाने को कहा तो इसने ३५ रुपये की बांह वाली शर्ट दिखायी। मैंने कहा मुझे तो बिना बांह की चाहिये, क्योंकि सबको ठप्पा दिखाना है। वह समझ गयी कि आज तो एक मुर्गा फंसा  है। उसने झट से दिखायी और ५० रुपये दाम बताया। मैंने कहा कि यह तो बिना बांह की है, सस्ती होनी चाहिये। पर वह ठस से मस नहीं हुई। हार कर ५० रुपये की ली। हो गया ना ७० रुपये का चूना।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">रात नशीले है</span></strong></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;उन्मुक्त जी यह क्या हिन्दी है &#8211; रात नशीले  है &#8211; में।</span></span><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;</span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">जी हां मैंने नशीले शब्द का प्रयोग जान बूझ कर किया है। मेरी हिन्दी कमजोर नहीं है।</span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">होटल में जगह जगह बढ़िया बार थे और सब तरह के पीने का समान। गोवा में मुन्ने की मां मेरे साथ थी। वहां वह मुझसे जो चिपकी तो बस साये की तरह लगी रही।  सब मजा चला गया। न बार जा पाया न ही उन दृश्यों का आनन्द ले पाया जिसका जिक्र मैंने पहले किया था। अगली बार तो मैं अकेले ही आऊंगा। आपको मालुम होगा कि मैं यह कर सकता हूं। क्योंकि मैं घर का बॉस हूं और  मुन्ने की मां ने, मुझे यह सबसे बताने की अनुमति दे रखी है:-)</span></p>
<p><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2008/10/goa-stamp.jpg"><br />
</a></p>
<p><span style="font-size:medium;">अधिकतर भारतीय लोग अपने परिवार के साथ थे। बस हम ही दो लोग गोवा में थे। हमारे बच्चों के पंख निकल आये हैं।  वे अपना घर बसा कर, हमारे बसेरे से दूर, अपना बसेरा ढ़ूढ़ने, सात समुन्दर दूर निकल गये हैं। रेस्तरां में,  दोपहर के खाने पर  बैंड बज रहा था।  मैंने हिन्दी गाना सुनाने की प्रार्थना की, तो उसने मना कर दिया।  वहां पर बहुत से विदेशी थे। इसलिये वे लोग  या तो अंग्रेजी के गाने गाते थे या फिर कोंकणी के।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मेरे अनुरोध पर बैंड ने कोंकनी में एक  गीत सुनाया। यह कुछ &#8216;पुकारता, चला हूं मैं&#8217; की धुन में था। उसने बताया कि यह एक प्रेम गीत है। मेरे  विद्यार्थी जीवन में  बीटल बहुत लोकप्रिय हुआ करता था  मैंने उनसे बीटल का कोई गाना सुनाने को कहा। उन्होने </span><span style="font-size:medium;">&#8216; </span><span style="font-size:medium;">I want to hold your hand&#8217; सुनाया। उनका यह गाना शायद सबसे चर्चित गाना है। शादी के ३० साल बाद मैं और मुन्ने की मां अपने दूसरे हनीमून पर थे &#8211; केवल हमीं नहीं,  वहां पर सब।</span></p>
<p><img class="alignleft" title="chess hotel goa" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RfmKSctvwoI/AAAAAAAAACg/U7e7oYBut-A/s200/chess.jpg" alt="" width="124" height="94" /></p>
<p><span style="font-size:medium;">रात को सम्मेलन के लोगों का खाना अलग जगह समुद्र के किनारे था। खाने की जगह पर जाने लगा तो एक जगह शतरंज की बाजी बिछी थी। मैं इसे देखने लगा तो एक विदेशी महिला  की आवाज सुनायी पड़ी, </span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;If I knew chess then I would have played chess with you.&#8217; </span></p></blockquote>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;">मैंने मुड़ कर देखा तो बार में एक विदेशी दम्पत्ती, बार का मजा ले रहे थे। महिला ने मु</span></p>
<p style="text-align:left;"><img class="alignright" title="Brenda" src="http://bp0.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RfmKxstvwpI/AAAAAAAAACo/m3My4T2m-yM/s200/brenda.jpg" alt="" width="136" height="102" /></p>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;">झे अपना नाम ब्रेन्डा बताया। मैंने कुछ देर उन लोगों से बात की,  फिर चल दिया खाने पर।</span></p>
<blockquote>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">Brenda, it was a pleasure to meet you. You have promised that you will learn chess and we  will play, when we meet again.</span></span></p>
</blockquote>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><br />
<span style="font-size:medium;">खाना दूर समुद्र के किनारे था। वहां एक ग्रुप गाना गा रहा था। धुन मस्तानी थी पर गाना समझ में नहीं आ रहा था, शब्द कुछ अजीब से इस प्रकार लगते थे।</span></span></span></p>
<blockquote>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">रात नशीले है</span></span></span></span></p>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मस्त जैंहां है</span></span></span></span></p>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">रूप तेरा मास्ताने।</span></span></span></span></p>
</blockquote>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">फिर समझ में आया, यहां केवल भारतीय थे। इसीलिये बैंड हिन्दी पिक्चर आराधना का गाना गा रहे थे।</span></span></span></span></span></p>
<p style="text-align:left;">&nbsp;</p>
<p style="text-align:center;"><span style="font-size:medium;"><strong>सुहाना सफर और यह मौसम हसी</strong></span></p>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">गोवा में दो नदियां हैं: मंडोवी और जुआरी। मंडोवी नदी पर शाम को बोट की सैर होती है। यह  बोट हैं कि पूरे जहाज। लगभग २५० से ३०० व्यक्ति बैठ सकते हैं। इस पर रेस्तराँ बैन्ड सब कुछ रहता है। जो मन आये वह पीजिये, गाना सुनिये, नाच का मजा लीजये, खुद भी नाचिये, और सैर का आन्नद लीजये।</span></span></p>
<p style="text-align:left;"><img class="alignleft" title="Rana couple delhi" src="http://bp3.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RgZa_MSr34I/AAAAAAAAACw/eZEu42DaokQ/s200/rana.jpg" alt="" width="132" height="100" /></p>
<p><span style="font-size:medium;">बोट पर हम लोगो ने,  कुछ लोकगीत सुने और कुछ लोक नृत्य भी देखे। साथ के लोग भी नृत्य करने में उत्सुक थे। बैण्ड वाले भी बहुत चालाक थे अधिकतर नाच उसने सैर करने वालों से ही करवाये। इन नाचने वालों में राना दम्पत्ति भी थे। हमारी इनसे मुलाकात बोट पर हुई थी। पति इंडियन एयलाइंस में और पत्नी रिलाएंस रिटेल में काम करती हैं। यह बहुत अच्छा नाचते थे। बोट में कई डेक थे हम लोग बोट के सबसे ऊपर के डेक पर चले गये। यहां कुछ ज्यादा पैसा देना पड़ता है। यहां पर कुछ कम लोग थे। थोडी देर राना दम्पत्ती भी वही आ गये। मैंने इनसे पूछा कि उन्होने नच बलिये  प्रतियोगिता में भाग लिया है कि नहीं। उनके मना करने पर मेरी उनको सलाह थी कि वे भाग लें, उन्हें अवश्य पुरुस्कार मिलेगा। राना दम्पत्ति ने मेरे कहने पर कुछ खास पोस &#8211; टाईटैनिक स्टाईल में, और कुछ नाच में चित्र खींचने दिये।</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;Hi, both of you dance well. Do participate in the next dance competition and I am sure that you will win a prize. Do let us know in advance, not only we but all Hindi bloggers will be there to cheer you.&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p><img class="alignright" title="scene cruise goa" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RgZcGsSr35I/AAAAAAAAAC4/mDDVSloArpM/s200/cruise.jpg" alt="" width="158" height="119" /></p>
<p><span style="font-size:medium;">बोट से दृश्य बहुत सुन्दर था। दृश्य का आनन्द लेते हुऐ, जब नजर इधर उधर दौड़ायी तो देखा कि एक कोने एक दूसरा बहुत सुन्दर सा भारतीय जोड़ा खड़ा था। युवती के कपड़े एकदम नये युग के थे। वह पैरों से चिपकी हुई कप्री (capri) पैंट और स्पैगेटी टॉप (spagetti top)   पहने हुऐ थी। हम तो यही समझते हैं कि  पैंट नाभी पर रहती थी, वहीं से पहनी जाती है। पर आजकल के लड़के लड़की इसे कमर के सबसे निचले भाग पर रखते हैं। इस युवती ने कप्री इसी तरह से पहन रखी थी। उसका स्पैगेटी टॉप, शायद उसे नूडल स्ट्रैप  टॉप (noodle strap top) कहना ठीक होगा, काफी खुला हुआ था। वह नाक में नथनी, कान पर झुमके, माथे पर बिन्दिया, बहुत सारी चूड़ियां और पायल पहने हुऐ थी।  चलने में छम-छम आवाज आती थी इसी लिये मैंने उसका नाम रखा छम्मक-छल्लो। मेरी और मुन्ने की मां से शर्त लगी। मेरा कहना था की यह छम-छम चूडियों से आ रही है इसका कहना था कि चूड़ियां और पायल दोनो से।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">इस लड़की के चलने में  भी एक स्टाईल था। वह कुछ अलग अलग पोस दे कर अपने साथी  को रिझा रही थी। मैने उस युवती से पूछा कि क्या वह बॉलीवुड में हैं या मॉडल हैं। वह मुस्करायी और बोली,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;यह आप क्यों कह रहें हैं।&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मैंने कहा कि आप सुन्दर हैं, आप जिस तरह से चल रहीं हैं, जिस तरह से खड़ी हैं बस इसी के कारण लगा। उसने हंस कर जवाब दिया,</span></span></span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;मैं तो मॉडल नहीं हूं पर मेरे माता पिता मॉडल थे।&#8217;</span></span></span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मैंने अपनी और मुन्ने की मां की शर्त के बारे में बताया। उसने कहा कि मुन्ने की मां जीत गयी है।</span></span></span></span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">युवती भारतीय मूल की इंगलैण्ड की नागरिक थी. उसका लालन पालन वहीं हुआ था। लड़का पंजाबी था और इंगलैंड पढ़ने गया था। जहां दोनो कि मुलाकात हुई और शादी कर ली। वह शादी के बाद पहली बार अपने ससुराल भारत आयी थी। इस समय लड़का डब्लिन, आयरलैन्ड में डौमिनोस पीट्ज़ा कम्पनी में काम करता है। इसने बताया कि दुनिया में इसके पीट्ज़ा कम्पनी की सबसे ज्यादा ब्रांच हैं और वे पीट्ज़ा हट से अलग सिद्धान्त पर काम करते हैं। वे घर पर पीट्ज़ा आधे घन्टे में पहुचाने में विश्वास करते हैं यदि नहीं कर पाये तो कोई पैसे नहीं लेते हैं।</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">Hi, smart ones. The next time, when  I am at a place where I can order Domino&#8217;s Pizza, I am going to have one.&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे अगले दिन पता चला कि यह युगल दम्पत्ती हमारे ही होटेल में ही ठहरे थे। वे नाशता करके बाहर जा रहे थे तो  हम नाशता करने जा रहे थे। युवती ने हमें देख कर हाथ हिलाया। उसकी चूड़ियां कनखने लगी मुझे  लगा कि वह बताना चाहती है छम-छम चूड़ियों से है और शर्त मैंने जीती है न कि मुन्ने की मां ने। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गोवा में एक बहुत अच्छा ईम्पोरियम है। इसमें भारतवर्ष के सब कोने से समान रहता है। मुन्ने की मां ने जीत कि खुशी में  वहां  से पहले ही अपने लिये पशमीने का एक शॉल खरीद लिया था। मेरी जेब खाली हो चुकी थी।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">डैनियल और मैक कंप्यूटर</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">हमारा होटेल समुद्र तट के बगल में था लेकिन उसके सामने का समुद्र तट होटेल वालों का नहीं है। फिर भी, होटेल वाले समुद्र तट को हमेशा साफ रखते हैं क्योंकि उनके यहां ८०% से अधिक लोग विदेशी हैं  और वे इसी समुद्र तट के लिये इस होटेल में आते हैं। समुद्र तट की सफाई भी देखने काबिल थी। समुद्र पर अटखेलियां करती हुई लहरें , तट पर सुन्दर लोग, बेहतरीन नज़ारा और सबसे अच्छी बात, कोई टोकने वाला नहीं।</span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">गोवा में मुझे एक प्रस्तुतीकरण भी देना था, यह समय आभाव के कारण पूरा नहीं हो पाया  था। इसे पूरा करने के लिये, मैं सुबह ही लैपटॉप लेकर बाहर चला गया।  मुझे वहां  जर्मन इंजीनियर डैनियल मिला। वह यांत्रिक इंजीनियर है और गाड़ियों के ब्रेक बनाने वाली कम्पनी में काम करता है। उसके पास मैक कंप्यूटर था। वह विंडोस़ पर काम करता था और कुछ महीने पहले ही मैक पर काम करना शुरू किया है। उसके मुताबिक मैक सॉफ्टवेर बहुत अच्छा और सरल है। मैंने पूछा क्या विंडोस से भी। उसका जवाब था हां। उसके अनुसार जर्मनी में भी लोग चोरी की विंडोस़ प्रयोग करते हैं और यह लगभग ५०% है।</span></p>
<p><img class="alignleft" title="daniel mac" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RhEVRqOAgQI/AAAAAAAAADc/0eBB2rYAo1k/s200/daniel.jpg" alt="" width="139" height="105" /></p>
<p><span style="font-size:medium;">डैनियल अपनी कंपनी की तरफ से अपने सहयोगी के साथ हिन्दुस्तान आये थे। वे लोग मीटिंग में पूना गये थे फिर गोवा  में सम्मेलन में आये  थे।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">डैनियल को बहुत आशचर्य हुआ कि मेरा लैपटॉप लिनेक्स पर है। मैने उसे इसके बारे में और कुछ अन्य ओपेनसोर्स के सॉफ्टवेर के बारे में जानकारी दी। कुछ देर बाद जब हम फिर मिले तो उसने बताया कि वह ओपेन ऑफिस डाट ऑर्ग  की वेबसाईट पर गया था और इसे डाउनलोड कर दिया है। वह इसका प्रयोग करेगा। होटेल में कमरे में तो लाईन से ब्रॉडबैंड था पर सार्वजनिक जगहों पर वाई फाई था। चलिये एक और व्यक्ति ओपेन सोर्स प्रयोग करने के लिये  राजी हुआ।</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;">&#8216;Guten Tag Daniel,<br />
It was pleasure to meet you. I hope you have tried OpenOffice.Org suit. Do try Firefox. Thunderbird and Sunbird. They all are open source and great software. Some of Hindi bloggers  will like to know more about Mac software. Please let us know more about the same and its support for languages other than English. Till we meet again. Tschüss! (I hope my German is correct)&#8217;</span></p></blockquote>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">चर्च में राधा कृष्ण</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">गोवा के चर्च प्रसिद्ध हैं उनमे सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं: बेसिलका ऑफ बॉम जीज़स और  सर कैथ्रिडल। यह दोनो आमने सामने हैं बीच में सड़क है।</span></span></p>
<p><img class="alignleft" title="church goa" src="http://bp1.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RhZa4tsPCjI/AAAAAAAAADk/JBr2svHoH08/s200/church1.jpg" alt="" width="97" height="131" /></p>
<p><span style="font-size:medium;">बेसिलका ऑफ बॉम जीज़स को बने हुऐ ५०० साल से ज्यादा हो गये हैं।  इसमें फ्रांसिस ज़ेवियरस् का शव रखा हुआ है। इस चर्च में मोमबत्ती जलाने का रिवाज है। कहते हैं कि मन मुराद पुरी हो जाती। हम ने भी दस रुपये में पांच मोमबत्ती खरीदीं। चर्च के अन्दर का दृश्य बहुत भव्य था।  चर्च के एक अलग बड़ा सा आंगन था मोमबत्ती वहीं एक जगह जलानी थी। मुन्ने की मां ने पूछा कि तुमने क्या मन्नत मांगी। मैंने कहा वही जो कि मैंने फतेहपुर सीकरी में मांगी थी। वह  मेरे साथ फतेहपुर सीकरी नहीं गयी थी। उसने दूसरे सवाल पूछने से पहले ही,  मेरे जवाब का अनुमान करते हुऐ कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;यदि अब मैं तुमसे यह पूछूं कि तुमने फतेहपुर सीकरी में क्या मन्नत मांगी थी तो यह मत कहना कि जो तुमने यहां मांगी है।&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मुस्कराहट तो आ ही गयी।</span></span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">कहा जाता है कि शाहंशाह अकबर को पुत्र नहीं था सूफी संत सलीम चिस्ती के आशिर्वाद से अकबर को तीन पुत्र रत्न प्राप्त हुऐ। उनके एक पुत्र का नाम, उन्हीं के नाम पर  सलीम रखा गया। सलीम आगे चल कर जहांगीर के नाम से शाहंशाह बना। फतेहपुर सीकरी अकबर ने सूफी संत सलीम चिस्ती के सम्मान में बनवायी थी। यहां संत सलीम की कब्र भी है। इसी पर चादर चढ़ा कर, मन्नत मांगने की बात रहती है। अकबर ने अपने पुत्र पैदा होने के उपलक्ष में इसे बनवाया था। यहां तो अपने बच्चों के भले के अलावा कोई और क्या मांग सकता है। मैंने वही मांगा जो हम सब चाहते हैं।</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;हे ईश्वर, हमारे बच्चों को संतोष, सुख, और शान्ति देना &#8211; हम दोनो से ज्यादा, चाहे वह थोड़ा ही ज्यादा क्यों न हो।&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;">हम लोग सड़क पार कर  सर कैथ्रडल में भी गये।  यह भी बहुत भव्य है।  इसके बाहर दृष्य हमारे गाईड के साथ यह रहा। गाईड ने बताया  कि इस चर्च में कब्रिस्तान भी है। इसमें महत्वपूर्ण  पुर्तगालियों की शव भी गड़े हैं। वहां एक चमत्कारी क्रौस  भी है। किंवदन्तियों के अनुसार इसका आकार  तब तक बढ़ता रहा जब तक ईसा मसीह स्वयं इसके ऊपर नहीं आ गये। इस क्रौस के ऊपर एक सफेद दुप्पटा पड़ा है जिसे ईसा मसीह का प्रतीक कहा जाता है।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">क्रौस मुझे  हमेशा त्याग का प्रतीक लगता है। मां तो त्याग का ही रूप होती है। क्रौस पर   सफेद रंग का कपड़ा &#8211; जैसे किसी महिला ने सफेद साड़ी साड़ी का पल्लू ओढ़ रखा हो।  मेरी मां सधवा थीं पर मैंने हमेशा उन्हें  सफेद सूती धोती में ही देखा। हम सब भाई बहन की शादी में भी। मेरे पिता यही चाहते थे। मुझे इसे देख कर बस <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/05/mother.html">अम्मां</a> की याद आयी।</span></p>
<p><img class="alignright" title="Radha-krishna goa" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RhZbH9sPCkI/AAAAAAAAADs/ePvjdOYyKog/s200/radha-krishna.jpg" alt="" width="100" height="134" /></p>
<p><span style="font-size:medium;">चर्च की इमारत से बाहर निकलते ही, उसी के आहाते में,  दो छोटे सजे हुऐ बच्चे मिले। मैंने पूछा कि तुम क्या बने हो उन्होने कहा कि,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;हम राधा कृष्ण बने हैं।&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">वहीं पर उन्होने मुझे एक भजन सुनाया और पोस देकर फोटो भी खिंचवायी। पर मुझे उनकी फीस देनी पड़ी &#8211; दोनो को आइसक्रीम खिलानी पड़ी।</span></span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">चर्च के अन्दर मां मिली और बाहर राधा कृष्ण – यात्रा ही सफल हो गयी।</span></p>
<p><strong><br />
</strong></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">गोवा में आमदनी का मुख्य स्रोत पर्यटन है पर इसके अलावा वहां मैगनीस और लोहे की खाने भी हैं। </span></span></p>
<p><img class="alignleft" title="Iron ore goa" src="http://bp2.blogger.com/_VD9tZkRYrQ0/RhpKc9sPCmI/AAAAAAAAAD8/tGtk0WwsJCc/s200/Iron-ore.jpg" alt="" width="132" height="99" /></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">खानों से मैगनीस और लोहे की कच्ची धातु  (ore) निकाल कर बड़ी बड़ी नावों  में पोर्ट पर लाया जाता है। वहां से जहाजों भर कर बाहर। मैगनीस की कच्ची धातु कुछ काली और लोहे की लाल रहती है। बोट में सैर करते समय  कच्ची धातु ले जाने वाली बोट भी दिखायी पड़ती हैं।   मैगनीस की कच्ची धातु  कोरिया और जापान भेजी जाती है और लोहे की जापान और चीन को।</span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">नये बजट में इसमें कच्ची धातु पर ३०० रुपये प्रति टन की ड्यूटी लग गयी है जिसका वहां बहुत विरोध है। लोहे की कच्ची धातु जो चीन भेजी  जाती है उसका दाम २०० रुपये प्रति टन का होता है, उस पर ३०० रुपये प्रति टन की ड्यूटी &#8211; ठीक तो नहीं लगती। बात में कुछ दम लगता है। मैं नहीं जानता कि इस बजट में इसमें कुछ कटौती की गयी अथवा नहीं।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">वहां पर कुछ लोगों ने कुछ और ही किस्सा बताया। लोहे की कच्ची धातु केवल जापान भेजी जाती थी इसके बाद जो बच जाता है उसमें लोहे की मात्रा बहुत कम होती थी तथा वह बेकार होता था। यह बेकार गोवा में पर्यावरण की मुश्कलें पैदा कर रहा था।  खान वालों को हटाने के लिये कहा गया पर उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। चीन किसी और देश से लोहे की कच्ची धातु खरीदता है जिसमें लोहे की मात्रा ज्यादा होती है। वहां की मशीने इस कार्य के लिये उपयुक्त  नहीं थी। इसलिये कम मात्रा के बेकार को इसमें मिला कर मशीन के लिये उपयोगी बनाया गया। इसमें कड़ोड़ों रुपया कमा लिया गया। यदि बेकार को बेच कर पैसा कमा लिया तो क्या गलती हुई, बस शायद सरकार को उसके किसी प्रतिशत पर ड्यूटी लगानी चाहिये।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">आजकल गोवा में विकास को लेकर बहस छिड़ी हूई है। वहां पर गोवा प्लान २००१ लागू है। यह १९८६ में अधिसूचित किया गया था। सब का यह मानना है कि यह अब अनावश्यक हो गया है। १९९७ में एक नया प्लान शुरू किया गया। यह १० अगस्त २००६ में अधिसूचित किया गया।  लोगों का कहना है कि इसमें बहुत बदलाव किये गये हैं और बहुत ज्यादा जमीन नगरीय प्रयोग के लिये रख दी गयी है। इसके कारण वहां का पर्यावरण और सुन्दरता नष्ट हो रही है। इस बारे में बम्बई उच्च न्यायालय की गोवा बेन्च के समक्ष एक जनहित याचिका भी चल रही है। सरकार ने, जन मानस की भावनाओं का ध्यान रखते हुऐ  इस प्लान को २६ जनवरी २००७ को समाप्त कर दिया है। सरकार अब दुसरा प्लान २०१७ बना रही है शायद चुनाव के बाद यह आये।</span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">न मांगू, सोना, चांदी</span></strong></p>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">हम लोग गोवा में जिस  होटेल में रुके थे उसमें प्रति दिन रात में अलग अलग  रेस्तरां पर किसी न किसी थीम पर खाना होता है। एक   रात, समुद्र के किनारे, बारबेक्यू चल रहा था। खाना अफ्रीकन थीम पर था। कुछ अफ्रीकन लोग, तरह तरह के करतब दिखा रहे थे और नाच रहे थे। वे होटेल के मेहमानो को भी स्टेज पर नाचने के लिये बुलाने लगे, कई गये।  मैं भी नाचने के लिये जाने लगा तो मुन्ने की मां ने हांथ पकड़ लिया,</span></span></p>
<blockquote>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;क्या करते हो, इस बुढ़ापे में क्या हो रहा है।&#8217;</span></span></span></p>
</blockquote>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मैंने कहा कि अमिताभ बच्चन भी तो करता है। वह बोली,</span></span></span></span></p>
<blockquote>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;वह तो पैसे के लिये,   पिक्चर में  &#8211; सपनो की दुनिया में करता है।  यह तो असली जिन्दगी है लोग क्या कहेंगे।&#8217;</span></span></span></span></span></p>
</blockquote>
<p style="text-align:left;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">झक्क मार कर बैठ गया।</span></span></span></span></span></span></p>
<p style="text-align:left;">&nbsp;</p>
<p><span style="font-size:medium;">गोवा में हमारी आखरी रात पर, गोवन थीम पर भोजन था। हम भी गये। पहुंचते ही एक स्वागत ड्रिंक मिली। मैंने पी ली पर मुन्ने की मां ने नहीं ली। लगता तो संतरे का जूस था पर स्वाद कुछ अजीब  था। मैंने वेटर से पूछा कि यह क्या है। उसने बताया,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;यह संतरे का जूस है पर इसमें थोड़ी सी काजू फेनी मिली हुई है।&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><br />
<span style="font-size:medium;">फेनी गोवा की देसी शराब है।  यह दो तरह की होती हैः काजू फेनी और नारियल फेनी। यह उसी तरह की तरह है जैसे उत्तरी भारत में महुऐ से बनी देसी शराब। महुऐ से  बनी शराब नीबू और पानी के साथ ली जाती है और फेनी किसी न किसी जूस के साथ ली जाती है। मैं शराब नहीं लेता।  वेटर के बताने पर तो धर्म संकट में फंस गया &#8211; न तो निकाली जा सके, न पचायी जा सके।</span></span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">सामने स्टेज पर, एक बैण्ड संगीत सुना रहा था जिसका संचालन समार्ट  सी युवती   कर रही थी। इसने कोकण के लोकगीत  सुनाये, कुछ लोकनृत्य दिखाये। एक लोक गीत के साथ, लोकनृत्य &#8216;टेंपल डांस&#8217; (Temple Dance) के नामे से भी दिखाया। इसकी धुन बहुत प्यारी ओर सुनी हुई लगी। मैंने उस युवती से इस गीत लोक नृत्य का महत्व पूछा। इसने बताया,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;कुछ युवतियां शादी में  शामिल होना चाहती हैं पर उसके लिये नदी पार करनी है जो कि उफान में है और नाविक उन्हें नहीं ले जा रहा है। वे नाविक को गीत गा कर, नृत्य दिखा कर रिझा रहीं हैं कि उन्हें नदी पार करवा दे।&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मैंने पूछा, यदि इसका यह अर्थ है तो इसे आप टेंपल डांस   क्यों कह रहीं हैं। उसने कहा,</span></span></span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;यह नृत्य दिये के साथ किया जाता है इसलिये इसे &#8216;टेंपल डांस&#8217; कहा जाता है।&#8217;</span></span></span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मैंने उससे कहा कि लोकगीत की धुन बहुत प्यारी है क्या वह इसे बिना कोंकणी गीत के, एक बार फिर से सुनवा सकती है। उसने  कहा अवश्य और धुन बजाने के पहले स्टेज से हमें इंगित कर कहा,</span></span></span></span></span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;This item is dedicated to the young couple sitting at  the left corner&#8217;</span></span></span></span></span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">हमारा मन तो उसका हमें नवजवान जोड़े कहने से ही प्रसन्न हो गया।  धुन भी अच्छी तरह से समझ में आयी और यह भी समझ आया कि यह क्यों अच्छी लगी। इसी धुन पर तो बौबी फिल्म का यह गाना है,</span></span></span></span></span></span></span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">न मांगू सोना चांदी,</span></span></span></span></span></span></span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">न चांहू हीरा मोती</span></span></span></span></span></span></span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">देती है दिल दे, बदले में दिल दे</span></span></span></span></span></span></span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">प्यार में सौदा नहीं</span></span></span></span></span></span></span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">है, है&#8230;.</span></span></span></span></span></span></span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">रात बहुत हो चली थी अगले दिन वापस चलना था। हम लोग वापस समुद्र के किनारे,  किनारे अपने कमरे के लिये चल दिये।</span></span></span></span></span></span></span></span></span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">यह तो भूल ही गया</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मैं दो बातें बताना भूल ही गया। चलिये उसका भी खुलासा कर देता हूं।</span></span></p>
<p><em><span style="font-size:medium;">सबसे रोमांचक लहमां</span></em></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">एक दिन समुद्र तट पर  पैरा सेलिंग हो रही थी। मैंने भी पैरा सेलिंग करने की जिद्द पकड़ ली।   मुन्ने कि मां भी मेरे साथ थी,  कहने लगी बुढ़ापे में यह सब नहीं किया जाता।  पर जब ठान ही लिया और बच्चों जैसी जिद्द  करने लगा तो उसे हांमी भरनी पड़ी। वह किनारे</span></span><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"> दुसरी तरफ मुंह करके खड़ी हो गयी। उसे लगा कि मैं उड़ कर, ऊपर ही चला जांउगा।</span></span><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2008/10/para-sailing-goa.jpg"><img class="alignright size-medium wp-image-109" title="para-sailing-goa" src="http://unmukth.files.wordpress.com/2008/10/para-sailing-goa.jpg?w=114&#038;h=70" alt="" width="114" height="70" /></a></p>
<p style="text-align:right;"><em>उतरने के बाद मुन्ने की मां जैसा चित्र खींच सकी <img src='http://s0.wp.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </em></p>
<p><span style="font-size:medium;">पैरा सेलिंग में मजा आ गया &#8211; बहुत रोमांच लगा।  समुद्र पर, पृथ्वी से ३०० फिट ऊंचे, नीले गगन में। नीचे आते समय दहिने तरफ की रस्सी को खीचना था जिससे हवा में मुड़ सकूं, फिर छोड़ देना था। नीचे से इशारा हुआ कि दोनो हांथ छोड़ दो में ने छोड़ दिया पर हवा चलने लगी और मैं समुद्र के बीचों बीच जाने लगा। जान सरक गयी, फिर दहिने तरफ की रस्सी खींची तो सही सलामत नीचे आया। जान में जान आयी। मैंने मुन्ने की मां की मां को देखा, कैमरा उसके गले में टंगा था, उसने कस के आखें भींच रखी थी।</span></p>
<p><em><span style="font-size:medium;">भाषण और मेरा प्रस्तुतिकरण</span></em></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">आप  ही सोचिये कि &#8211; ऐसी दिल फेंक जगह पर, लहरों की अटखेलियों के बीच, जब आपकी नजरें लैपटॉप पर न हो कर कहीं और हों, मन कहीं और हो &#8211; तब प्रस्तुतिकरण कैसा बना होगा। भाषण सुनने वालों का भी ध्यान भी वहीं था जहां बनाने वाले का मन। शुरु हुऐ कुछ मिनट ही हुऐ नहीं की तालियों की बौछार, सीना चौड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद देखा  तो लोग जम्हाई ले रहे थे। खाना बहुत अच्छा था,सोचा कि लोगों ने ज्यादा खा लिया होगा। थोड़ी देर बाद एक टोकरी में लाल, लाल रंग का कुछ दिखायी पड़ा। सब समझ में आ गया। भाषण बन्द कर स्टेज से भागने में ही भलाई समझी।</span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">मुझे सड़े टमाटर बिलकुल पसन्द नहीं हैं और जब से मालुम चला है कि नये टमाटर में चमक, आकार, और ज्यादा समय चलने के लिये चूहे की जीनस् मिलायी गयी है तब से टमाटर भी कम पसन्द आने लगे हैं &#8211; जी हां, टमाटर में चूहे की जीनस्,  चमक आकार और ज्यादा चलने के लिये। आजकल Genetically Modified Food (जीएमएफ) में जो न हो, वही कम है। इसलिये दुनिया में बहुत सारे लोग इस तरह के खाने को नहीं खाते हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">राज कपूर ने तीसरी कसम फिल्म में तीन कसमें खायी। मैंने भी  गोवा से लौट कर तीन कसमें खायीं:</span></p>
<ul>
<li><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मैं गोवा फिर से जाउंगा (हो सके तो बिना &#8230; );</span></span></li>
<li><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मैं गोवा के नशे में डूबना चाहूंगा; पर<br />
</span></span></span></li>
<li><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">गोवा में कभी भाषण नहीं  दूंगा।</span></span></span></span></li>
</ul>
<p style="text-align:center;"><strong><span style="font-size:medium;">अंकल तो बच्चे हैं</span></strong></p>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">गोवा से अपने कसबे पंहुचने के लिये, हमें पहले हवाई जहाज से फिर ट्रेन की यात्रा करनी थी। एयरपोर्ट से  रेलवे  स्टेशन पंहुंचने समान्यतः ४५ मिनट का समय लगता था। हवाई जहाज के पहुंचने तथा ट्रेन के चलने में ३ घंटे का समय था। हमारे विचार से यह काफी था और आराम से ट्रेन पकड़ सकते थे।  गोवा एयरपोर्ट पर हवाई जहाज की फ्लाइट फिर से निर्धारित कर, ढ़ाई घन्टा देर से उड़ी। हम लोग कुछ तनाव में आ गये, लगा कि कहीं गाड़ी न छूट जाये।</span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">हवाई जहाज में उड़ते समय परिचायिका  ने उद्घोषणा  की,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;उड़ते तथा उतरते समय, खिड़की शटर खुले रखें। अन्तरराष्ट्रीय नियम के अनुसार हवाई जहाज के अन्दर की रोशनी बन्द कर दी जायगी।&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">शटर इसलिये खुले रखे जाते हैं कि यदि कोई बाहर  दुर्घटना हो तो वह दिखायी पड़ जाय पर मुझे यह नहीं मालुम था कि  हवाई जहाज के अन्दर की रोशनी क्यों बन्द कर दी जाती है। मैंने परिचायिका को बुलाने वाला बटन दबाया। वह कुछ देर बाद आयी तब तक मैं The Economics Times में डूब चुका था। एक मीठी अवाज, बनावटी मुस्कराहट के साथ, सुनायी पड़ी,</span></span></span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;May I help you, Sir&#8217;</span></span></span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मैंने अखबार से नजर उठाते हुऐ कहा,</span></span></span></span></span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;मुझे अंग्रेजी कम समझ में आती है क्या हम हिन्दी में बात कर सकते हैं।&#8217;</span></span></span></span></span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">परिचायिका ने The Economics Times की तरफ  कड़ी नजर डाली, फिर मुस्करायी। इस बार मुझे उसकी मुसकराहट बनावटी नहीं लगी। मुझे तो वह बिलकुल अपनी बिटिया जैसी लगी। उसकी मुस्कराहट जैसे कह रही हो कि पापा तुम्हें तो झूट बोलना भी नहीं आता पर उसने मुस्करा कहा कि,</span></span></span></span></span></span></span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;अंकल मुझे भी हिन्दी अच्छी लगती है पर क्या करूं  यहां पर अंग्रेजी बोलने को कहा आता है।&#8217;</span></span></span></span></span></span></span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">वह काफी देर तक बतियाती रही। बिलकुल वैसे ही जैसे कि बिटिया रानी लड़ियाती है। उसने मुझे बताया कि परिचायिका की ट्रेनिंग में क्या क्या सिखाया जाता है  और यह भी बताया कि हवाई जहाज के अन्दर की रोशनी इसलिये बन्द कर दी जाती है कि दुर्घटना हो और बहर जाना पड़े तो आंखे न चौधियाऐं। मेरे यह सब पूछने पर उसे कुछ आश्चर्य हुआ। उसने इसका कारण जानना चाहा। मैंने उसे बताया, </span></span></span></span></span></span></span></span></span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;</span></span></span></span></span></span></span></span></span></span><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मुझे न केवल उड़ान के बारे में पर शायद जीवन में उन सब बातों में रुचि है जो मुझे नहीं मालुम हैं।</span></span></span></span></span></span></span></span></span><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;</span></span></span></span></span></span></span></span></span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">इस पर वह मुन्ने की मां से बोली,</span></span></span></span></span></span></span></span></span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">&#8216;दीदी, अंकल तो बच्चे हैं।&#8217;</span></span></span></span></span></span></span></span></span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">वह नये युग की थी। जानती थी कि, अब किसी भी महिला को आंटी नहीं कहा जाता है केवल दीदी या भाभी।</span></span></span></span></span></span></span></span></span></span></span></p>
<p><span style="font-size:medium;">एयरपोर्ट पर मेरे सहयोगी ने अपनी कार ड्राईवर के साथ भेजी थी।  कार में बैठने और ट्रेन छूटने में केवल ३० मिनट शेष था। ड्राईवर बहुत  कुशल था। उसने हमें केवल २९ मिनट में रेवले स्टेशन पंहुचाया।  मैं लैपटॉप लेकर प्लेटफॉर्म पर डिब्बे के सामने पहुंचा तो ट्रेन ने चलना शुरू कर रही थी। मैं तो चढ़ गया। मुन्ने की मां एक हाथ में पर्स और दूसरे हाथ में एक  हैण्ड बैग पकड़े  थी।  चढ़ते समय उसका पैर फिसला, पर उसका पैर वापस प्लेटफॉर्म पर। मैंने उससे बैग लिया और दूसरे हाथ से   उसे ट्रेन में चढ़ने में सहायात की। समान भी और लोगों ने चलती ट्रेन में चढ़ाया।</span></p>
<p><span style="font-size:medium;">कुछ देर बाद समान ठीक से रख कर मैंने उससे कहा कि वह हैण्ड बैग क्यों पकड़े थी कहीं वह वास्तव में ऊपर चली जाती तो। उसने कहा कि वह निश्चिंत थी कि वह चढ़ जायगी इसलिये उसने ट्रेन में चढ़ने का प्रयत्न किया। वह कुछ आगे और भी कह रही थी पर तब तक मेरा लैपटॉप खुल चुका था। मेरी उंगलियां गोवा की यात्रा का संस्मरण लिखने के लिये थिरकने लगी थीं। फिर भी मैंने उसे कहते हुऐ सुना,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:medium;"><br />
<span style="font-size:medium;">&#8216;इतनी जल्दी मुझसे पल्ला झाड़ रहे थे। सुना नहीं था कि परिचारिका कह रही थी कि तुम बच्चे हो अभी तो तुम्हें २५ साल  और देखना है जब तक बड़े न हो जाओ।&#8217;</span></span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;"><span style="font-size:medium;">मैंने उसकी बात अनुसुनी कर दी। २५ साल तो बहुत समय होता है, मेरे पास शायद केवल १० या १२ साल का समय है। बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ लिखना है लोगों तक अपनी बात पहुचानी है। इसीलिये मैं काफी हड़बड़ी में रहता हूं और मेरी चिट्ठियां, मेरे पॉडकास्ट सब कॉपीलेफ्टेड हैं आपको सारे जहां को उन्हें कॉपी करने संशोधन करने या किसी प्रकार से प्रयोग करने की स्वतंत्रता है। हां यदि लिंक दे देंगे तो मुझे प्रसन्नता होगी।</span></span></span></p>
<p style="text-align:center;"><em>यह लेख मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कई कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। इसकी अलग अलग कड़ियों को आप नीचे दिये गये लिंक पर चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।</em></p>
<div style="text-align:left;"><a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/03/blog-post.html">प्यार किया तो डरना क्या</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/03/blog-post_10.html">परशुराम की शानती</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/03/blog-post_15.html">रात नशीले है</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/03/goa-cruise-on-mandovi.html">सुहाना सफर और यह मौसम हसीं</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/04/mac-computer.html">डैनियल और मैक कंप्यूटर</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/04/church.html">चर्च में राधा कृष्ण</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/04/iron-and-magnese-ore.html">मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/04/bobby.html">न मांगू सोना, चांदी</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/04/para-sailing.html">यह तो बताना भूल ही गया</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/04/goa.html">अंकल तो बच्चे हैं</a>।।</div>
<div style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</div>
<div style="text-align:left;"><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Goa">Goa</a>, <a href="http://www.goatourism.org/index.htm">गोवा</a>,</div>
<div style="text-align:left;"><span style="font-size:100%;"><a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, </span><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>,  <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <span style="font-size:100%;"><a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, </span><span style="font-size:100%;">सिक्किम, सैर सपाटा,</span><span style="font-size:100%;"> <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>,</span><span style="font-size:100%;"> <a class="shr" title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a class="shr" title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, </span><span style="font-size:100%;">यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</span></div>
<br />Posted in यात्रा वर्णन Tagged: travel <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/unmukth.wordpress.com/107/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/unmukth.wordpress.com/107/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/unmukth.wordpress.com/107/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/unmukth.wordpress.com/107/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/unmukth.wordpress.com/107/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/unmukth.wordpress.com/107/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/unmukth.wordpress.com/107/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/unmukth.wordpress.com/107/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/unmukth.wordpress.com/107/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/unmukth.wordpress.com/107/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/unmukth.wordpress.com/107/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/unmukth.wordpress.com/107/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/unmukth.wordpress.com/107/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/unmukth.wordpress.com/107/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&amp;blog=230997&amp;post=107&amp;subd=unmukth&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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		<title>प्रकृति की गोद में तीन दिन</title>
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		<pubDate>Sat, 22 Sep 2007 16:23:28 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[Full Articles]]></category>
		<category><![CDATA[travel]]></category>
		<category><![CDATA[यात्रा वर्णन]]></category>

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		<description><![CDATA[इस चिट्ठी में मेरी केरल में कोज़ीकोड, पूकोड झील, वायनाड वन्य प्राणीशाला, और  एडक्कल गुफाओं की यात्रा का वर्णन है। होली भाई-चारे एवं समानता का त्योहार है पर उत्तर भारत के बहुत से शहरो में इसका स्वरुप बदल गया हैः यह शोर-शराबे, बत्तमीजी, दूसरों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने का दिन बन गया है। [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&#38;blog=230997&#38;post=68&#38;subd=unmukth&#38;ref=&#38;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size:small;"> <img class="alignright" src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/7/7c/Vascodagama.JPG/200px-Vascodagama.JPG" alt="" /> इस चिट्ठी में मेरी केरल में कोज़ीकोड, पूकोड झील, वायनाड वन्य प्राणीशाला, और  एडक्कल गुफाओं की यात्रा का वर्णन है। </span></p>
<p><span style="font-size:small;"><span id="more-68"></span><br />
होली भाई-चारे एवं समानता का त्योहार है पर उत्तर भारत के बहुत से शहरो में इसका स्वरुप बदल गया हैः यह शोर-शराबे, बत्तमीजी, दूसरों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने का दिन बन गया है। हंसी मज़ाक अच्छा है और जीवन में जरूरी भी, पर लोग यह नहीं समझ पाते या समझना नहीं चाहते कि कुछ लोगों को रगों से एलर्जी हो सकती है तथा रगं, अबीर ऐसे लोगों का पूरा हफ्ता बरबाद कर देते हैं। मुझे भी अबीर और रंगो से एलर्जी है। शायद, यह मुझे अपनी मां से, विरासत में <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/05/mother.html">मिला</a> है। सामुहिक मिलन अच्छी बात है पर अपने देश में अलग से मिलने का ऐसा मर्ज़ है कि अक्सर कुछ ज्यादा ही हो जाता है। बहुत से लोग इसी कारण होली में उत्तर भारत से भागते हैं, मै भी उनमे से एक हूं। एक बार केरल जाने का मौका मिला। यह यात्रा संस्मरण उसी के बारे में है।</span></p>
<p align="center"><strong><span style="font-size:small;">कालीकट &#8211; कोज़ीकोड</span></strong></p>
<p><span style="font-size:small;"> कालीकट का नया नाम कोज़ीकोड है। हम हवाई जहाज के द्वारा वहां पहुंचे। प्रकति में सब रगं हैं पर उसके सबसे प्यारे रगं हैं: हरा तथा नीला। इसी लिये पेड़ों को उसने हरा तथा आकाश एवं समुद्र को नीला रगं दिया। केरल में पहंचते ही, सब जगह पेड़ पौध हरे रगं में दिखे, उसके पीछे नीला आसमान और नीला समुद्र। दृश्य देख कर &#8216;बूंद जो बन गयी मोती&#8217; फिल्म में, मुकेश का गाया, यह गाना याद आया,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;हरी भरी वसुन्धरा,</span><br />
<span style="font-size:small;"> पर नीला, नीला यह गगन।</span><br />
<span style="font-size:small;"> दिशायें देखो रगं भरी</span><br />
<span style="font-size:small;"> चमक रही उमगं भरी।</span><br />
<span style="font-size:small;"> वह कौन चित्रकार है</span><br />
<span style="font-size:small;"> वह कौऽऽऽन चित्रकार है।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> रगों के इस छटा को देखते हुए ही शायद केरल के टूरिस्ट विभाग का मोटो है: Kerala – God&#8217;s own country यानी भगवान का घर। मुझे प्रकृति शब्द ज्यादा पसन्द है। इसीलिये यह शीर्षक।</span></p>
<p align="center"><strong><span style="font-size:small;">कप्पड़ समुद्र-तट</span></strong></p>
<p><span style="font-size:small;">शाम के समय, हम <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kappad_Beach">कप्पड़ समुद्र तट</a> गये। </span><span style="font-size:small;">वास्को डि-गामा, भारत में सबसे पहले कप्पड़ समुद्र तट पर उतरा था इस लिये हम लोग इसे देखने गये।</span></p>
<p align="center">वास्को डि गामा &#8211; कप्पड़ समुद्र तट पर</p>
<p><span style="font-size:small;"> समुद्र तट पर चट्टाने थीं जिस पर समुद्र की लहरें खेल रही थीं। समुद्र कुछ अशान्त सा लगा पर बीच एकदम साफ थी भीड़ नहीं थी। थोड़ी देर में सूरज डूबने लगा उसकी लालिमा समुद्र पर फैल गयी दूसरी तरफ चन्द्रमा उगने लगा दृश्य सुन्दर था।</span></p>
<p align="center"><img src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/6/6a/Gama_route_1.png/360px-Gama_route_1.png" alt="" width="360" height="294" /></p>
<p align="center">वास्को डि गामा का भारत आने का रास्ता</p>
<p><span style="font-size:small;">एक ठेलेवाला चाय बेच रहा था। वह चाय, चाय की पत्ती से नही, पर चाय के बुरादे से बना रहा था, थोड़ी अजीब सी लगी। कुछ और लोग भी चाय पी रहे थे मैने उनसे बात करने के लिये कहा,</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;वास्को डिगामा यहां उतरा था। यह ऐतिहासिक समुद्र तट है। यहां केवल समुद्र तट के पहले एक टूटे-फूटे पत्थर पर यह लिखा है। यह तो सैलानी स्थल है कुछ अच्छा बना कर लिखना चाहिये।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> उसने कहा,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;वास्को डि-गामा बहुत क्रूर व्यक्ती था उसके बारे में क्यों लिखा जाय।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> मैने बहस को आगे ले जाते हुए कहा,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;फिर भी यह इतिहास की बात है कि योरप से सबसे पहिले उसी ने भारत का रास्ता खोजा था। इसलिये इस जगह को ऐतिहासिक जगह के रूप में देखें और यदी वह क्रूर था तो उस बात को भी लिखें।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> उन्होने गुस्से से मेरी तरफ देखते हुए कहा,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;हम लोग कुछ नहीं सुनना चाहते यदि वास्को डि-गामा कि यहां मूर्ती बनायी जायगी या कुछ लिखा जायगा तो हम उसे तोड़ देंगे नष्ट कर देगें।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> मुज्ञे लगा कि उसका पारा गरम हो रहा है, इसके पहिले कोई अप्रिय घटना हो जाय मैंने विषय बदलना ही ठीक समझा। बी.बी.सी. की वेब-साईट पर वास्को डि-गामा का इतिहास <a href="http://www.bbc.co.uk/history/historic_figures/gama_vasco_da.shtml">देखें</a> तो इन लोगों का गुस्सा समझा जा सकता है।</span></p>
<p><span style="font-size:small;">समुद्र पर दूर रोशनी दिखायी पड़ रही थी। मैने पूछा यह रोशनी कैसे है। उसने बताया,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;यह मछुहारों के नाव की रोशनी है जो बैटरी से जल रही है। इनके पास मोबाईल फोन भी रहता है और वे मछली पकड़ने के बाद मोबाईल फोन से व्यापारियों से बात करते रहते हैं जो सबसे अच्छा पैसा देने की बात करता है, वहीं सौदा पक्का कर वहीं पर वापस उतर कर बेचते हैं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> मोबाइल क्रान्ती का एक और फायदा। रात हो रही थी हम लोग वापस लौट आये।</span></p>
<p align="center"><strong><span style="font-size:small;">पूकोड झील</span></strong></p>
<p><span style="font-size:small;"> हम अगले दिन सुबह, वायनाड, वन्य प्राणीशाला (Wild Life Sanctuary) देखने के लिये निकल पड़े। केरल की सड़कें बहुत अच्छी हैं। एक बार ससंद में सड़कों के बारे में चर्चा हो रही थी तो किसी ने सड़कों को ओमपुरी तथा हेम मालिनी के गालों से उनकी तुलना की। बिहार की सड़कें ओमपुरी के गालों जैसी बतायी गयीं: फिर तो केरल की सड़कें हेमा मालिनी के गालों जैसी हैं &#8211; एकदम चिकनी। अब्दुल हमारे टैक्सी के चालक थे बस पलक झपकते वह हवाई जहाज की रफतार पकड़ते थे। मुझे उन्हे रास्ते भर बताना पड़ा,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;मै अल्लाह मिंया से प्रेम करता हूं पर इतना भी नही कि मैं, उनसे मिलने, कुछ साल पहिले ही पहुंच जाऊं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"><br />
रास्ते में पूकोड झील पड़ी। यह एक सैर सपाटे का स्थल है: शान्त, स्वच्छ, वा सुन्दर। पिकनिक की जगह पर इतनी सफाई कम देखने को मिलती हैः मन प्रसन्न हो गया। थोड़ी धूप हो गयी थी इसलिये बोटिंग न करके हम लोगों ने उसका पैदल चक्कर लगाना ठीक समझा। थोड़ी देर बद लगा कि कुछ बच्चे बोट पर गा रहें हैं। गाना लय में तथा अच्छा लग रहा था पर समझ में नहीं आ रहा था चक्कर के बाद हम इन बच्चों और उनके टीचरों से मिले। मैने उनके स्कूल तथा गाने के बारे में बात की।</span></p>
<p align="center"><img src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/en/thumb/0/0d/PookodeLake.jpg/250px-PookodeLake.jpg" alt="" /></p>
<p align="center">पुकोड झील</p>
<p><span style="font-size:small;">यह बच्चे पहली से लेकर चौथी क्लास में परुमदचेरी मोपला लोवर प्राइमरी स्कूल नादापुर कालीकट में पड़ते थे। स्कूल के टीचरों ने मोपला का अर्थ मुसलिम बताया गया। मेरे पूछने पर उन्होने कहा,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;यह इस लिये रखा गया है कि वह मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में है। इसके अलावा इसका कोई और अर्थ नहीं है। क्योकि न तो उस स्कूल के मैनेजर मुसलमान हैं, न ही यह स्कूल केवल मुसलमानो के लिये है इस स्कूल में सब धर्म के बच्चे पड़ते हैं तथा सब धर्म के टीचर हैं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;">कुजं अबदुल्ला, इस स्कूल में अरेबिक पढ़ाते हैं। उन्होने बताया कि कुछ स्कूलों में उर्दू तथा कुछ में सस्कृंत पड़ायी जाती है। वही बच्चों के साथ गीत गा रहे थे। उन्होने वह गाना फिर से सुनाया और उसका मतलब भी बताया,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;यह गीत मछुवारे जब मछली पकड़ने जाते हैं तो गाते हैं। इसमें वे, मुथपन्न, जिसे वे भगवान मानते हैं की स्तुति की गयी है। वे उससे प्रार्थना करते हैं कि वह उन्हे स्वस्थ रखे, सलामत रखे, और उन्हे समृधि दे।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;">मेरा पूकोड झील से बिलकुल जाने का मन नही था पर शाम के पहिले वायनाड वाईल्ड लाईफ सैक्चुंरी पहुचना था। इसलिये मन मार कर वहां से चलना पड़ा। मन में यही इच्छा थी कि यदि सारे सैलानी स्थल इतने साफ हो जायें तो क्या बात है।</span></p>
<p align="center"><strong><span style="font-size:small;">एग्रीक्लचर रिर्सच संस्थान</span></strong></p>
<p><span style="font-size:small;"> वायनाड वन्य प्राणीशाला, वायनाड जिले के, सुलतान बत्तरी तहसील में है। हम लोगों ने अपना डेरा वहीं जमाया। जगंल जाने में कुछ समय था इसलिये एग्रीक्लचर रिर्सच संस्थान को देखने के लिये चले गये। वहां पर हमें, एक प्रोफेसर साहब ने घुमाया। यहां पर तरह तरह के फल, मसाले (लौगं, इलायची इत्यादि) के पेड़ लगे थे। वे उनको बेचते भी थे &#8211; पिछले साल उनकी सेल ६५ लाख थी। मैंने कहा,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;तब तो यह जगह आत्म निर्भर होगी। &#8216;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> उन्होने कहा कि नहीं। मुझे कुछ आश्चर्य हुआ। वे बोले,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;केरल में लोग कम काम करते हैं। दो लोग भी इकठ्ठा होगें तो अपनी यूनियन बना लेगें।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> केरल में हिन्दू, मुसल्मान, तथा इसाई तीनो की संख्या लगभग बराबर है। मैने पूछा,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;क्या भगवानों की भी यूनियन है।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> वे हल्के से मुस्करा कर बोले,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;शायद।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;">एग्रीक्लचर रिर्सच समस्थान एक दिन आत्म निर्भर बने; हमारी Bio-diversity को बनाये रखने में मददगार साबित हो; हमारे देश की bio-piracy को रोकने सहायक बने &#8211; ऐसी कामना करते हुए हम ने वहां से विदा ली।</span></p>
<p align="center"><strong><span style="font-size:small;">जगंल &#8211; मुतंगा रेजं</span></strong></p>
<p><span style="font-size:small;"> केरल, कर्नाटक, तथा तामिलनाडू की सीमायें जहां मिलती हैं वह जगंल है। जो हिस्सा केरल में है वह वायनाड वन्य प्राणीशाला कहलाता है। जो हिस्सा कर्नाटक में है वह बन्दीपुर राष्ट्रीय वन उद्यान कहलाता है। जो हिस्सा तामिलनाडू में है वह मुदुमलाई राष्ट्रीय वन उद्यान कहलाता है। यानी, यह तीनो एक ही जगंल के हिस्से हैं। वायनाड वन्य प्राणीशाला तथा मुदुमलाई राष्ट्रीय वन उद्यान हाथियों के लिये सुरक्षित क्षेत्र हैं। बन्दीपुर राष्ट्रीय वन उद्यान टाईगर के लिये सुरक्षित क्षेत्र है।</span></p>
<p><span style="font-size:small;">जगंल या तो सुबह देखने जाया जाता है या शाम को। शाम होने वाली थी और हम लोग वायनाड वन्य प्राणीशाला &#8211; मुतंगा रेजं देखने निकल पड़े। मैं मध्य-प्रदेश के लगभग सभी जगंलो में गया हूं। मुझे यह जगंल, मध्य-प्रदेश के जगंलो से कम घना लगा। हिरण, चीतल, साम्भर के कुछ झुन्ड दिखायी पड़े। कुछ जगंली भैसें (Bison) भी दिखायी पड़े &#8211; पर हाथी का कोई झुन्ड नहीं दिखायी पड़ा। एक जगह घास ऊचीं ऊचीं थी वहां पर हाथी की चिंघाड़ सुनायी पड़ी; वहां देखने पर सूंड़ फिर हाथी का सिर दिखायी पड़ा। हम लोग जीप के ऊपर चढ़ कर देखने लगे। थोड़ी देर बाद वह सूड़ हम लोगों की तरफ आने लगी। हमारा एक साथी चिल्लाया,<br />
&#8216;भागो&#8217;<br />
हम सब गाड़ी पर तेज़ी से भाग कर बैठे और वहां से रफू-चक्कर। रात को जब हम जब अपने कमरे में आये तो बहुत थके हुऐ थे, पता ही नही चला कि कब निद्रा देवी की गोद में चले गये।</span></p>
<p align="center"><strong><span style="font-size:small;">एडक्कल गुफायें</span></strong></p>
<p><span style="font-size:small;"> वायनाड जिले के दक्षिण-पुर्व हिस्से में पहाड़ी है, देखने में यह एक लेटी हुई महिला लगती है: बायीं तरफ उसके पैर हैं तथा दायीं तरफ सिर। हिन्दू पुणान के अनुसार भगवान राम ने ताड़का का वध किया था और यह ताड़का ही है जो गिरी पड़ी है। मुझे तो वह कोई दानवी नहीं लगी, दृश्य इतना सुन्दर है कि मुझे वह एक लेटी हुई सुन्दरी लगी। इसी सुन्दरी के वक्ष-स्थल के नीचे है एडक्कल गुफायें, जहां हम तीसरे दिन सुबह पहुंचे।<br />
</span></p>
<p align="center"><img src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/5/50/Ambukuthi_mala.jpg/180px-Ambukuthi_mala.jpg" alt="एडक्कल गुफाओं से बाहर का दृश्य" width="180" height="135" /></p>
<p align="center">एडक्कल गुफाओं से बाहर का दृश्य</p>
<p><span style="font-size:small;"> एडक्कल मलयालम का शब्द है। इसका मतलब होता है चट्टान, चट्टानों के बीच में। यह दो गुफायें हैं जो कि ऊपर की तरफ से एक चट्टान से बन्द है। यह कोई तीस हज्जार साल पहिले भूकम्प के कारण बनी बतायी जाती हैं। कुछ दूर आप जीप से जा सकते हैं, फिर कुछ ऊपर सीड़ियों से। तब टिकट घर पर पंहुचिये, वहां से टिकट लेकर पहले पत्थर, फिर लोहे की सीड़ियां चढ़ कर गुफाओं में जान होता है।</span></p>
<p align="center"><img src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/en/thumb/d/d9/EdakkalCaveCarving.jpg/180px-EdakkalCaveCarving.jpg" alt="" width="180" height="135" /></p>
<p align="center">एडक्कल गुफाओं में लेख</p>
<p><span style="font-size:small;">पहली गुफा की दीवालों पर कुछ नही है पर दूसरी बहुत कुछ खोद कर लिखा है। कुछ तस्वीरें हैं जिनकी अपनी कथा है; कुछ पुरानी द्राविदियन भाषा में लिखा है,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;यहां वह शूरवीर आया था जिसने हजार शेर मारे हैं&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;">यह गुफायें करीब १२०० मीटर की ऊचांई पर हैं। पहाड़ी की चोटी इन गुफाओं से भी ३०० मीटर ऊपर है। यदि आप पहाड़ी की चोटी पर चढ़ना चाहते हैं तो गुफाओं से उपर चढना पड़ेगा; कुछ दूर रस्सी के सहारे, कुछ दूर पहाड़ी पर। यह जोश और जोखिम का काम है। कुछ लड़के केरल के पौलीटेक्नीक से आये थे, वे चढ रहे थे, मुझे भी जोश आ गया, मैं भी चढने लगा।</span></p>
<p><span style="font-size:small;">लड़को ने अभी जीवन के एक चौथाई बसन्त देखे थे और मैं जीवन के तीन चौथायी से ज्यादा बसन्त देख चुका हूं। २०० मीटर चढने के बाद मुझे लगा शायद ऊपर तक चढ़ तो जाऊंगा पर नीचे न उतर पाउगां। हो सकता है कि कहीं एकदम ऊपर न चला जाऊं। कुछ लड़के मुझसे नीचे से ही वापस चले गये, कुछ मुझसे ऊपर तक भी गये, दो ने कहा कि वे चोटी तक गये थे। नीचे गुफा पर कुछ लड़कियां पहाड़ी की चोटी पर चढ़ने को आतुर दिखायी पड़ी। मैने उन लड़कियों के जोश की सराहना की और कहा,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;">&#8216;यदि तुमसे कोई पहाड़ की चोटी पर चढ़ सका तो उसको मेरी तरफ से एक ईनाम।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> अभी तक किसी ने इनाम लेने का दावा नहीं किया।</span></p>
<p align="center"><strong><span style="font-size:small;">हेरिटेज़ म्यूज़ियम</span></strong></p>
<p><span style="font-size:small;"> एडक्कल गुफायें से हम लोग हेरिटेज़ म्यूजियम आये। वहां के मैनेजर ने बतया कि यह ज़िले स्तर का म्यूज़ियम है तथा अपनी तरह का हिन्दुस्तान में पहला। इस म्यूज़ियम में वायनाड ज़िले पायी जाने वाली मूर्तियां तथा जन जाती लोगों का समान है। यहां से लेटी हुई सुन्दरी एकदम साफ दिखायी पड़ती है। यदी यहां पर एक दूरबीन होती तो एडक्कल गुफायें को अच्छी तरह से देखा जा सकता था। यदि कभी आप अब वहां पर जायें तो हो सकता है कि आपको वहां एक दूरबीन मिले। कम से कम वहां के मैनेजर ने तो यही वायदा किया है।</span></p>
<p align="center"><strong><span style="font-size:small;">जगंल &#8211; कुलार्च रेजं</span></strong></p>
<p><span style="font-size:small;"> हम लोग शाम को जगंल वायनाड वन्य प्राणीशाला की कुलार्च रेजं से गये। इसके बाद जगंल के अन्दर- अन्दर बन्दीपुर राष्ट्रीय वन उद्यान गये। जहां पर एक बहुत बड़ा जलाशय है। यहां पर जानवर पानी पीने आते हैं। हम लोगों ने यहां पर हाथियों तथा जगंली सुअरों के झुन्डों को देखा।</span></p>
<p><span style="font-size:small;">रात हो चली थी हम लोग वापस चल दिये। रास्ते में एक गार्ड-पोस्ट पर एक शोधकर्ता से मुलाकात हुई। वह टाईगरों की सख्यां के बारे में शोध कर रहे था। उसने बताया,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;टाईगरों की सख्यां के बारे में बताना कठिन कार्य है पर तीन तरीकों से जगंलो में टाईगरों की सख्यां के सापेक्षिक घनत्व के बारे में शोध किया जाता है।</span></p>
<ul>
<li><span style="font-size:small;"> रोज़ जगंल के अलग अलग हिस्से पर एक निश्चित दूरी चल कर टाईगरों के पजों के निशान देखे जाते हैं।</span></li>
<li><span style="font-size:small;"> रोज जगंल के अलग-अलग हिस्से पर एक निश्चित दूरी चल कर, टाईगरों के मल के सैम्पल लेकर उसकी डी. एन. ए. (DNA) टेस्टिंग की जाती है पर अभी यह तकनीक अपने देश में विकसित नहीं है।</span></li>
<li><span style="font-size:small;"> जगंल के अलग अलग हिस्से पर एक निश्चित दूरी पर दो तरफ कैमरे लगायें जाते हैं तथा जब कोई जानवर इनके बीच आता है तो उसकी दोनो तरफ से फोटो ले ली जाती है। हर टाईगर की धारियां अलग-अलग होती हैं इससे टाईगरों की पहचान की जा सकती है। यह कैमरे केवल रात मे ही चलते क्योंकि टाईगर रात मे निकलता है।&#8217;</span></li>
</ul>
</blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> वह तीसरे प्रकार से टाईगरों की संख्या के बारे में पता कर रहा था।</span><span style="font-size:small;">शोधकर्ता के अनुसार बन्दीपुर राष्ट्रीय वन उद्यान में टाईगरों की सख्यां सबसे ज्यादा है। यह लगभग १४ टाईगर प्रति १०० वर्ग किलोमीतर है। मैं बान्धवगड़ वन्य प्राणीशाला (रीवां, मध्य प्रदेश) में टाईगरों की सख्यां सबसे ज्यादा समझ्ता था। उसके मुताबिक यह केवल ११ टाईगर प्रति १०० वर्ग किलोमीटर है। मैने कहा,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;यदी तुम सही बता रहे हो तो ऐसा क्यों है कि लोगों को क्यों बान्धवगड़ वन्य प्राणीशाला में हमेशा टाईगर दिख जाता है पर बन्दीपुर राष्ट्रीय वन उद्यान में नहीं।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> उसने बताया,<br />
</span></p>
<blockquote><p><span style="font-size:small;"> &#8216;बान्धवगड़ वन्य प्राणीशाला एक सैलानी स्थल के रूप में विकसित हो चुका है और वहां के टाईगरों को जीप का डर समाप्त हो चुका है इसलिये वह सामने आ जाते हैं पर बन्दीपुर राष्ट्रीय वन उद्यान में अभी तक ऐसा नहीं हुआ है।&#8217;</span></p></blockquote>
<p><span style="font-size:small;"> हम लोग वापस चल दिये क्योंकि अगले दिन सुबह हमें वापस घर के लिये प्रस्थान करना था।</span></p>
<p><span style="font-size:small;">हम लोग वायनाड मे दो दिन थे। यह कम थे वहां कुछ झरने, द्वीप्समूह, तथा डैम है जो कि समय की कमी रहते हम लोग नही देख पाये। हमारी केरल की यत्रा सुखद थी पर एक बात में कहना चाहूगां, मैंने कई जगह छोटे तथा बड़े धार्मिक स्थल बने या बनते देखे, शायद जरूरत से ज्यादा। स्कूल, अस्पताल, कारखाने एक तरह के भाव मन में लाते हैं तथा धार्मिक स्थल कुछ अलग तरह के भाव मन में लाते हैं। कहीं यह किसी तनाव, या अशान्ति का सूचक तो नहीं। यदी ऊपर कोई है तो वह चाहे ख़ुदा हो, या ईश्वर हो, या भगवान हो। न ही वह अपने वतन, देश, घर को, पर हमारे देश भारतवर्ष तथा इस विश्व को रहने लायक बना कर रखे। ऐसी कामना, ऐसी इच्छा, ऐसा विश्वास लिये हम घर वापस लौटे।</span></p>
<p align="center"><em>मेरा कैमरा खराब हो गया था। इसलिये इस लेख में एक भी चित्र मेरे खींचे हुए नहीं हैं। यह सारे चित्र विकिपीडिया से हैं और ग्नू मुक्त प्रलेखन अनुमति पत्र की शर्तों के अन्दर हैं।</em></p>
<p align="center"><em>मैंने तीन दिन केरल में बिताये थे। उन दिनो का विवरण अपने <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com">उन्मुक्त</a> चिठ्ठे पर तीन कड़ियों में प्रकाशित किया था। यह चिठ्ठी उन तीनो कड़ियों को संग्रहीत कर के बनाया गया है। यदि आप इसे कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे लिखे लिंक पर चटका लगा के पढ़ सकते हैं।</em></p>
<p style="text-align:center;">तीन दिन:<br />
<a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/03/blog-post_16.html">ख़ुदा के वत़न में &#8211; पहला दिन</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/03/blog-post_20.html">ईश्वर के देश में &#8211; दूसरा दिन</a>।। <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/2006/03/blog-post_22.html">भगवान के घर में &#8211; तीसरा दिन</a>।।</p>
<div style="text-align:center;">सांकेतिक शब्द</div>
<div style="text-align:left;"><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kerala">kerala</a>, <a href="http://www.keralatourism.org/">kerala tourism</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Kozhikode">Kozhikode</a>,</div>
<div style="text-align:left;"><span style="font-size:100%;"><a href="http://technorati.com/tag/Travel">Travel</a>, <a href="http://technorati.com/tag/travel+and+places">travel and places</a>, </span><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_journal">Travel journal</a>, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Travel_literature">Travel literature</a>, <span style="font-size:100%;"><a href="http://www.newsgator.com/ngs/subscriber/webedposts.aspx?mode=tag&amp;id=0&amp;systemtag=1&amp;tag=travel">travel</a>, travelogue, </span><span style="font-size:100%;">सिक्किम, सैर सपाटा,</span><span style="font-size:100%;"> <a href="http://blogvani.com/Default.aspx?mode=tag&amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;amp;TagText=%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE">सैर-सपाटा</a>,</span><span style="font-size:100%;"> <a class="shr" title="३ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4">यात्रा वृत्तांत</a>, <a class="shr" title="४ की प्रविष्टियों को पढ़ने के लिए चटकाएँ" href="http://chitthajagat.in/?shrenee=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3">यात्रा-विवरण</a>, </span><span style="font-size:100%;">यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,</span></div>
<br /><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/categories/unmukth.wordpress.com/68/" /> <img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/tags/unmukth.wordpress.com/68/" /> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/unmukth.wordpress.com/68/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/unmukth.wordpress.com/68/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/unmukth.wordpress.com/68/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/unmukth.wordpress.com/68/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/unmukth.wordpress.com/68/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/unmukth.wordpress.com/68/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/unmukth.wordpress.com/68/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/unmukth.wordpress.com/68/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/unmukth.wordpress.com/68/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/unmukth.wordpress.com/68/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/unmukth.wordpress.com/68/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/unmukth.wordpress.com/68/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/unmukth.wordpress.com/68/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/unmukth.wordpress.com/68/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&amp;blog=230997&amp;post=68&amp;subd=unmukth&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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